ग्वालियर के प्रसिद्ध शिव मंदिर अचलेश्वर महादेव में जब दान पेटी खोली गई तो दान की रकम के साथ मन्नतों की पर्चियां भी निकली। एक पर्ची का काफी वायरल है। लिखा है- महादेव अमीर बना दो, तब तक सुंदर लड़के नहीं देखूंगा।
सोशल मीडिया पर वायरल ये इंस्टा रील लोगों का ध्यान तेजी से खींच रही है, जिसमें एक ई-रिक्शा ड्राइवर बीच सड़क पर अचानक वाहन बंद होने के बाद परेशान और भावुक नजर आता है। ये छोटा-सा वीडियो अब बड़ी बहस का कारण बन चुका है, क्योंकि इसमें मजाक के नाम पर एक मेहनत करने वाले ड्राइवर की रोजी-रोटी पर असर पड़ता दिख रहा है। कई यूजर्स इसे सिर्फ प्रैंक नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही मान रहे हैं, जो सड़क पर खतरनाक स्थिति भी पैदा कर सकती है। यही वजह है कि यह रील सोशल मीडिया पर लगातार शेयर की जा रही है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल इस इंस्टा रील में एक ई-रिक्शा ड्राइवर का दर्द साफ झलकता है, जो बीच सड़क पर अचानक अपना वाहन बंद होने से परेशान है। एक बाइक सवार युवक उसके पास आकर पूछता है, “अंकल आप रो क्यों रहे हो…”, जिस पर ड्राइवर बताता है कि किसी ने उसके चीनी ऐप से उसकी तिर्री बंद कर दी, जिससे उसकी रोज़ी-रोटी और आज की कमाई का नुकसान हो गया। यह वीडियो लोगों के बीच चिंता और गुस्से का कारण बन गया है क्योंकि इसमें “प्रैंक” के नाम पर ड्राइवर की कमाई और सुरक्षा दोनों से खिलवाड़ होता दिख रहा है।
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग एक मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा को बीच सड़क पर रोक देते हैं। यह सब “मजाक” या प्रैंक के नाम पर किया जा रहा है, लेकिन इसका असर ड्राइवर की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है। कई लोग इसे खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना हरकत बता रहे हैं।
BAT-BMS App क्या है?
BAT-BMS एक असली बैटरी मैनेजमेंट ऐप है, जिसे Shenzhen Grenergy Technology ने बनाया है। इसका काम बैटरी की चार्जिंग, वोल्टेज, तापमान और हेल्थ को मॉनिटर करना होता है। ये आमतौर पर बैटरी सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि किसी वाहन को रोकने के लिए।
कैसे किया जा रहा है “प्रैंक”?
वायरल क्लिप्स में लोग ई-रिक्शा के पास जाकर Bluetooth के जरिए बैटरी सिस्टम से कनेक्ट करते हैं। कुछ ही सेकंड में वाहन की पावर बंद हो जाती है। यह कोई बड़ा हैक नहीं है, बल्कि उन बैटरी सिस्टम की कमजोरी का फायदा है जिनमें सुरक्षा पासवर्ड नहीं होता।
कौन से वाहन हैं ज्यादा खतरे में?
यह समस्या हर ई-रिक्शा में नहीं होती। खतरा केवल उन्हीं वाहनों में है जिनमें:
- Bluetooth-enabled lithium battery लगी हो
- BMS सिस्टम अनसिक्योर्ड हो
- और 10–15 मीटर के अंदर कनेक्शन संभव हो
पुराने lead-acid बैटरी वाले ई-रिक्शा इस समस्या से सुरक्षित रहते हैं।
ड्राइवरों पर असर और बढ़ता खतरा
इस तरह के प्रैंक से ई-रिक्शा ड्राइवर बीच सड़क पर फंस जाते हैं, जिससे उनकी कमाई रुक जाती है और ट्रैफिक में भी खतरा पैदा होता है। यह सिर्फ मजाक नहीं बल्कि एक गंभीर सुरक्षा और आर्थिक समस्या बनता जा रहा है।
जिम्मेदारी और जरूरी सुधार
इस पूरे मामले में जिम्मेदारी कंपनियों और डीलरों की है। जरूरी है कि बैटरी सिस्टम को मजबूत पासवर्ड और सिक्योरिटी फीचर्स के साथ बेचा जाए, ताकि ऐसे गलत इस्तेमाल को रोका जा सके और ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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एक समय ऐसा था जब सोशल मीडिया से कमाई करने की बात को लोग गंभीरता से नहीं लेते थे और इसे सिर्फ शौक या टाइम पास माना जाता था। लेकिन आज ये पूरी तरह बदल चुका है। Instagram, YouTube और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म अब सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं रहे, बल्कि कमाई और करियर बनाने का मजबूत साधन बन चुके हैं। लोग अपने हुनर, ज्ञान और क्रिएटिविटी को ऑनलाइन दिखाकर ब्रांड्स के साथ काम कर रहे हैं और अच्छी इनकम कमा रहे हैं। खास बात ये है कि अब इसके लिए बड़े फॉलोअर्स की भी जरूरत नहीं रह गई है, बल्कि सही स्किल और ऑडियंस से जुड़ाव ज्यादा मायने रखता है।
धीरे-धीरे लोग इसे पार्ट-टाइम से फुल-टाइम करियर में बदल रहे हैं और डिजिटल दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया आज लाखों लोगों के लिए एक नया अवसर बन गया है।
फॉलोअर्स नहीं, भरोसा है असली ताकत
अब ये जरूरी नहीं कि आपके लाखों फॉलोअर्स हों। छोटे लेकिन भरोसेमंद ऑडियंस वाले क्रिएटर्स भी अच्छी कमाई कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि लोग आप पर कितना भरोसा करते हैं और आपका कंटेंट कितना उपयोगी है।
वही लोग आगे बढ़ते हैं जो समस्या हल करते हैं
जो क्रिएटर्स सिर्फ वायरल होने के पीछे नहीं भागते, बल्कि लोगों की मदद करते हैं, जैसे टिप्स देना, स्किल सिखाना या जानकारी साझा करना वे ज्यादा सफल होते हैं। यहां फॉलोअर्स लक्ष्य नहीं, बल्कि परिणाम बन जाते हैं।
ब्रांड्स के साथ सही मेल सबसे जरूरी है
अगर कंटेंट और प्रमोशन मेल नहीं खाते, तो दर्शकों को वो नकली लगता है। इसलिए ब्रांड अब ऐसे क्रिएटर्स को चुनते हैं जिनका कंटेंट और प्रोडक्ट एक-दूसरे से जुड़ा हो।
डिजिटल प्रोडक्ट से लंबी कमाई का मौका
ई-बुक्स, टेम्पलेट्स, कोर्स या गाइड बनाकर लोग एक बार मेहनत करके लंबे समय तक कमाई कर रहे हैं। इसमें न स्टॉक की जरूरत है और न डिलीवरी की टेंशन।
सीधा सपोर्ट भी बन रहा है नया ट्रेंड
अब दर्शक सीधे अपने पसंदीदा क्रिएटर्स को सपोर्ट कर रहे हैं, जैसे मेंबरशिप, एक्सक्लूसिव कंटेंट और पेड कम्युनिटी के जरिए। इससे स्थिर इनकम बनती है।
प्रोफाइल ही बन रहा है नया रिज्यूमे
आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो बन चुका है। लोग अपने स्किल्स दिखाकर सीधे क्लाइंट और काम हासिल कर रहे हैं।
भरोसा और लगातार वैल्यू देना
एल्गोरिदम बदलते रहते हैं, लेकिन एक चीज नहीं बदलती, लोग उन्हीं क्रिएटर्स को फॉलो करते हैं जिन पर उन्हें भरोसा होता है और जो लगातार कुछ उपयोगी देते रहते हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है, जिसे देखकर कई यूजर्स हैरानी जताते नहीं थक रहे। महज 8 सेकंड की ये क्लिप तेजी से वायरल हो रही है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खूब शेयर की जा रही है। वीडियो में एक सांप बेहद आक्रामक अंदाज में नजर आता है, जिसकी हरकतें लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। सबसे ज्यादा ध्यान उस पल ने खींचा, जब हमले के दौरान उसके मुंह से हरे रंग जैसा तरल निकलता दिखाई देता है। यही वजह है कि इंटरनेट पर इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के दावे और सवाल सामने आ रहे हैं। यही कारण है कि यह छोटा-सा वीडियो लोगों की जिज्ञासा और का कारण बन गया है।
पत्थरों के बीच फंसा था सांप, फिर हुआ अचानक हमला
वीडियो में सांप पत्थरों के बीच बैठा दिखाई देता है। तभी एक व्यक्ति उसके सामने चप्पल ले जाता है। खतरा महसूस होते ही सांप लगातार चप्पल पर वार करने लगता है। इसी दौरान उसके मुंह से बड़ी मात्रा में हरे रंग का तरल निकलता दिखाई देता है, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।
क्या सच में इतना जहर छोड़ सकता है सांप?
विशेषज्ञों के अनुसार, हर बार सांप के काटने पर समान मात्रा में जहर नहीं निकलता। ये उसकी प्रजाति, उम्र, आकार और उस समय महसूस हो रहे खतरे पर निर्भर करता है। कई बार सांप बिना जहर छोड़े भी काटते हैं, जिसे ड्राई बाइट कहा जाता है।
हरे रंग का तरल हमेशा जहर नहीं होता
वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला हरा तरल देखकर कई लोगों ने इसे सांप का जहर मान लिया। हालांकि, केवल वीडियो देखकर ये तय नहीं किया जा सकता कि वो वास्तव में जहर ही है। किसी भी वायरल क्लिप के आधार पर वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालना सही नहीं माना जाता।
Now imagine this happening on human skin. pic.twitter.com/KmV7dMnOvI
— Epic Clip Vault (@EpicClipVault) July 2, 2026
लोगों ने दिए मजेदार और हैरान करने वाले रिएक्शन
वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर कमेंट किए। किसी ने इसे बेहद डरावना बताया तो किसी ने मजाक करते हुए लिखा कि “इतना गुस्सा तो इंसानों में भी कम देखने को मिलता है।” कुछ लोगों ने वीडियो की सच्चाई पर भी सवाल उठाए।
सांप दिखे तो क्या करें?
- सांप को छेड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश न करें।
- सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- तुरंत वन्यजीव या रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वायरल ट्रेंड ने ई-रिक्शा चालकों और इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दावा किया जा रहा है कि कुछ शरारती लोग BAT-BMS नाम के एक चीनी ऐप का इस्तेमाल कर ब्लूटूथ के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा की बिजली सप्लाई बंद कर रहे हैं। इससे बीच सड़क पर ई-रिक्शा अचानक रुक जाते हैं और चालक असमंजस में पड़ जाते हैं।
वायरल वीडियो में कुछ युवक ई-रिक्शा का पीछा करते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद वे अपने मोबाइल में BAT-BMS ऐप खोलकर कथित तौर पर 'डिस्चार्ज स्विच' का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाता है। इसके बाद वे ड्राइवर के पास जाकर अनजान बनने का नाटक करते हुए मदद की पेशकश करते हैं।
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एक अन्य वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग ई-रिक्शा चालक को वाहन बंद होने के बाद करीब 3 किलोमीटर तक रिक्शा धक्का लगाकर ले जाते हुए देखा गया। एक अन्य वीडियो में कथित तौर पर ऐसे ही हरकत करने वाले युवक को लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले करने की चेतावनी दी।
कई जगह मारपीट खबरें भी हैं। हालांकि इन वायरल वीडियो और उनमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी घटनाएं वास्तविक हैं या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड की गई हैं।
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क्या है BAT-BMS ऐप?
BAT-BMS एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System) ऐप है, जिसे चीन की कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने डेवलप किया है। यह ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से बैटरी से कनेक्ट होकर अधिकृत यूजर्स को बैटरी की स्थिति देखने और आवश्यकता पड़ने पर बैटरी के डिस्चार्ज सर्किट को ऑन या ऑफ करने की सुविधा देता है। खबरों के मुताबिक भारत में कुछ कम कीमत वाले ई-रिक्शा की बैटरियों में ब्लूटूथ सुरक्षा या पासवर्ड प्रोटेक्शन नहीं होता। ऐसे में यदि बैटरी का ब्लूटूथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है, तो 10 से 15 मीटर की दूरी के भीतर मौजूद कोई भी व्यक्ति बैटरी से कनेक्ट होने की कोशिश कर सकता है।
ई-वाहनों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस वायरल ट्रेंड के बाद ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा तथा बैटरी प्रबंधन प्रणाली की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बैटरी निर्माताओं को मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित ब्लूटूथ पेयरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए ताकि अनधिकृत लोग बैटरी तक पहुंच न बना सकें।
यूपी के औरैया में सांप के साथ रील बनाना एक मिठाई दुकानदार को भारी पड़ गय। रील बनाने के दौरान सांप ने दुकानदार के हाथ में डंस लिया। हालांकि दुकानदार सीधे अस्पताल पहुंच गया, जिससे उसकी जान बच सकी। वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
Parle Products IPO: Parle-G, Melody और Mango Bite जैसे लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाली Parle Products अगले साल 1 अरब डॉलर (करीब 9,530 करोड़ रुपये) से बड़ा IPO लाने की तैयारी कर रही है। मामले की जानकारी रखने वाले कई सूत्रों ने Moneycontrol को यह जानकारी दी है।
सूत्रों के मुताबिक, चूंकि ये देश प्रतिष्ठित ब्रांड है, ऐसे में प्रस्तावित IPO का साइज1 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल कंपनी 10.5 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि, बाजार की स्थिति के हिसाब से IPO का साइड और वैल्यूएशन बदल सकता है।
किन बैंकों को मिल सकती है जिम्मेदारी?
सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने अप्रैल में Request for Proposal (RFP) जारी किया था। इसके बाद कई इन्वेस्टमेंट बैंकों ने अपनी प्रेजेंटेशन दी। फिलहाल कंपनी ने Kotak Mahindra Capital, Axis Capital और HSBC Securities को सलाहकार के तौर पर चुना है।
दो अन्य सूत्रों ने भी इन नामों की पुष्टि की। इनमें से एक ने बताया कि कंपनी चौथे इन्वेस्टमेंट बैंक को भी सलाहकार समूह में शामिल करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में बातचीत जारी है।
Parle Products ने क्या कहा?
Moneycontrol ने जब Parle Products से संपर्क किया तो कंपनी के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) मयंक शाह ने कहा कि कंपनी बाजार में चल रही अटकलों पर टिप्पणी नहीं करती। फिलहाल उसका पूरा फोकस कारोबार को बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि हर बड़ी कंपनी की तरह Parle Products भी ग्रोथ के लिए तमाम विकल्पों का मूल्यांकन करती रहती है।
वहीं, Kotak Mahindra Capital और Axis Capital ने इस खबर पर कोई जवाब नहीं दिया। HSBC Securities ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
Parle Agro से अलग है Parle Products
विजय चौहान के अगुआई वाली Parle Products असल में जयंतीलाल चौहान, सचौना चौान नादिया चौहान के नेतृत्व वाली Parle Agro से अलग कंपनी है। Parle Agro Frooti, Appy Fizz और Bailley जैसे ब्रांड बनाती है। परिवार के बंटवारे के बाद दोनों कंपनियां स्वतंत्र रूप से कारोबार कर रही हैं।
किन कंपनियों से है मुकाबला?
भारतीय बाजार में Parle Products की प्रतिस्पर्धा Britannia, ITC (Sunfeast), Mondelez India, Perfetti, Priya Gold, Anmol Industries और Cremica जैसी कंपनियों से है।
Hurun India 500 की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, Parle Products का अनुमानित वैल्यूएशन 75,420 करोड़ रुपये था। इस वैल्यूएशन के साथ यह भारत की सातवीं सबसे मूल्यवान गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) कंपनी थी।
पहले IPO से किया था इनकार
20 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को Melody टॉफी भेंट करने का वीडियो वायरल होने के बाद CMO मयंक शाह ने कहा था कि इससे भारतीय ब्रांड को वैश्विक पहचान मिलेगी।
उसी दौरान जब उनसे IPO की योजना के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल कंपनी लिस्टिंग पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा था कि Parle Products लंबे समय से एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और फिलहाल उसी तरह बने रहने की योजना है।
कंपनी का कारोबार कितना बड़ा है?
मुंबई के विले पार्ले में मुख्यालय वाली Parle Products की स्थापना 1929 में हुई थी। Parle-G के अलावा कंपनी के पोर्टफोलियो में KrackJack, Monaco, Hide & Seek और Poppins जैसे लोकप्रिय ब्रांड भी शामिल हैं।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 8.5% बढ़कर 15,568.49 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, इसी दौरान उसका मुनाफा 39% घटकर 979.53 करोड़ रुपये रह गया।
बिस्किट और कन्फेक्शनरी के अलावा कंपनी केक, रस्क, आटा और ब्रेकफास्ट सीरियल जैसे सेगमेंट में भी मौजूद है। कंपनी के प्रोडक्ट अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और मध्य-पूर्व सहित कई देशों में बिकते हैं। इसके अलावा नाइजीरिया, कैमरून, घाना, इथियोपिया, केन्या, आइवरी कोस्ट, नेपाल और मेक्सिको समेत कई देशों में इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी हैं।
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मथुरा के वृंदावन में छत पर बंदरों को खाना खिला रही एक युवती सड़क पर आकर गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। मोहल्ले में लगे सीसीटीवी में पूरी घटना कैद हो गई जो अब वायरल है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यक्रम में ऐसा मजाक किया जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। मजाक के दौरान उन्होंने अनजाने में एक संवेदनशील शब्द इस्तेमाल कर दिया।डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यक्रम में अपने बेटों लेकर किए गए मजाक से लोग हैरान रह गए। बुधवार को नॉर्
Canada: कभी-कभी एक छोटी-सी घटना जिंदगी के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकती है, यह कोई नहीं जानता। ऐसा ही एक मामला कनाडा से आया है। दरअसल, यहां का एक 11 साल का लड़का अपनी फैमिली के साथ 2024 में ऑन्टारियो के एक कॉटेज में घूमने गया था। यहां पर सोते समय उसके नाक और मुंह पर एक चमगादड़ बैठ गया। जिसे उसने अपने हाथों से हटा दिया। फिर उसके पिता ने इस जीव को किसी तरह पकड़कर कॉटेज से बाहर निकाल दिया। चूंकि लड़के के चेहरे पर चोट या काटने के कोई निशान नहीं थे और ना ही किसी तरह का लक्षण दिख रहा था तो उसके माता-पिता ने उसे डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी नहीं समझा। बीबीसी ने यह जानकारी ‘कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल’ पर छपी रिपोर्ट के हवाले से दी है।
19 दिन बाद दिखें लक्षण
लेकिन इस मामले के 19 दिन बाद, लड़के के चेहरे पर सुन्नपन और सूजन महसूस होने लगी। ‘कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल’ में बताया गया है कि इसके बाद परिवार उसे इमरजेंसी इलाज के लिए क्लिनक ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसके लक्षणों का पता लगाने की कोशिश की।
शुरुआत में, लड़के को एंटीवायरल दवा दी गई, जिसका इस्तेमाल हर्पीज वायरस से होने वाले संक्रमण के इलाज में किया जाता है। उन्हें लगा कि उसे ‘बेल्स पाल्सी’ हो सकता है, जिसमें चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियां कुछ समय के लिए लकवाग्रस्त (पैरालिसिस) हो जाती हैं।
इसके बाद वह लगातार दो बार अस्पताल गया; पहली बार उसे ‘हर्पीस जिंजिवोस्टोमेटाइटिस’ (मुंह और मसूड़ों का वायरल इन्फेक्शन) होने का शक जताया गया, और फिर अगले दिन वह तब वापस आया जब उसके चेहरे का दाहिना हिस्सा कमजोर पड़ गया था। इस दौरान उसे 39°C (102°F) बुखार हो गया, साथ ही उसे कुछ भी निगलने में दिक्कत, उलझन और ऐसी चीजें दिखाई देने लगीं जो असल में नहीं थीं (विजुअल हैलुसिनेशन)। उस दिन उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। जर्नल के अनुसार, उसे इंट्यूबेट किया गया और बच्चों के इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती कराया गया।
जिसके बाद, कनाडा के मैनिटोबा विश्वविद्यालय के बाल रोग एवं बाल स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने चमगादड़ के कारण होने वाले रेबीज वायरस का प्रबल संदेह जताया। कुछ दिनों बाद, एक टेस्ट के दौरान इसकी पुष्टि हुई। वहीं, हॉस्पिटल में भर्ती होने के 17 दिन बाद लड़के की मृत्यु हो गई।
कनाडा में रेबीज से अब तक 28 मौतें हुईं
बता दें कि कनाडा में रेबीज का संक्रमण बहुत कम होता है। कैनेडियन वेटरनरी मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, 1924 से अब तक देश में रेबीज से इंसानों की 28 मौतें हुई हैं।
एसोसिएशन की वेबसाइट के अनासर, “रेबीज की यह कम दर बड़े पैमाने पर चल रहे टीकाकरण कार्यक्रमों की वजह से है, और अगर इन कार्यक्रमों को जारी नहीं रखा गया तो बीमारी के दोबारा फैलने का खतरा है।”
अगर कोई इंसान सीधे तौर पर चमगादड़ के संपर्क में आता है, तो उसे रेबीज के लिए ‘पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस’ (यानी रेबीज वाले जानवर के संपर्क में आने के तुरंत बाद दिया जाने वाला मेडिकल इलाज) की जरूरत होती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बार लक्षण दिखने के बाद यह संक्रमण लगभग हमेशा जानलेवा साबित होता है।
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