ITR Filing 2026: 31 जुलाई तक नहीं भरा रिटर्न तो लगेगा 5,000 तक जुर्माना! जानिए आपको कौन सा ITR Form भरना है

Income Tax Return Deadline

ITR Filing Deadline 2026 : क्या आप भी इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए आखिरी तारीख (31 जुलाई) का इंतजार कर रहे हैं? याद रखें, इनकम टैक्स पोर्टल ऐन वक्त पर हैंग हो सकता है और आपकी एक लापरवाही सीधे 5,000 रुपए का चूना लगा सकती है! ALSO READ: 1 July से बदल गए 6 बड़े नियम: Aadhaar, Passport से लेकर Credit Card तक, आपकी जेब पर सीधा असर

 

आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा के बाद आइटीआर दाखिल करने पर करदाताओं को विलंब शुल्क देना होगा। यदि कर योग्य आय पांच लाख रुपए से अधिक है तो अधिकतम 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, 5 लाख रुपए तक की कर योग्य आय वाले करदाताओं को 1,000 रुपए विलंब शुल्क देना होगा।

 

ITR में किसे कौन सा फार्म भरना होगा?

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) का सही फॉर्म आपकी आय के स्रोत, कुल आय और टैक्सपेयर की श्रेणी पर निर्भर करता है। गलत ITR फॉर्म भरने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है।

ITR forms

किसे 31 जुलाई तक दाखिल करना होगा रिटर्न

आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का आखरी महीना शुरू हो गया है। विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर आइटीआर-1 और आइटीआर-4 की आनलाइन व आफलाइन यूटिलिटी उपलब्ध करा दी है। वेतनभोगी, पेंशनभोगी और सीमित आय स्रोत वाले करदाताओं के लिए आइटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

 

ये 31 अक्टूबर तक भर सकेंगे रिटर्न

जिन व्यापारियों और पेशेवरों के खातों का आडिट अनिवार्य नहीं है, उनके लिए आइटीआर-3 और आइटीआर-4 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है। वहीं जिन व्यापारियों और कंपनियों के खातों का आडिट जरूरी है, वे 31 अक्टूबर 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।

ITR Filing 2026: सेक्शन 87A में ₹60000 तक की टैक्स रिबेट, जानिए कौन कर सकता है क्लेम

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (FY 2025-26) के लिए ITR-1 से ITR-5 तक के फॉर्म जारी कर दिए हैं। साथ ही ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की एक्सेल यूटिलिटी भी शुरू कर दी है। इसकी मदद से टैक्सपेयर्स पहले ऑफलाइन रिटर्न भर सकते हैं। इसके बाद उसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।

अगर आप ITR भर रहे हैं, तो सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रिबेट के नियम जानना जरूरी है।

क्या है सेक्शन 87A का रिबेट?

सेक्शन 87A के तहत मिलने वाला रिबेट सीधे आपके कुल टैक्स से घट जाता है। यह टैक्स छूट (Exemption) या टैक्स डिडक्शन (Deduction) से अलग होता है। इसका मकसद कम और मध्यम आय वाले लोगों को टैक्स में राहत देना है।

कितना मिलेगा रिबेट?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है और आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये तक है, तो आपको अधिकतम 12,500 रुपये का रिबेट मिल सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं और आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये तक है, तो आपको 60,000 रुपये तक का रिबेट मिल सकता है।

इसमें ध्यान रखने वाली बात है कि यह रिबेट 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने से पहले टैक्स की रकम पर मिलता है।

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

सेक्शन 87A का फायदा सिर्फ इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को मिलता है। इसका मतलब है कि कंपनियां, HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) और NRI इसका फायदा नहीं ले सकते।

अगर आपको शेयर बेचने से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) हुआ है, तो उस टैक्स पर भी यह रिबेट नहीं मिलेगा। लॉटरी, गेम शो या दूसरी ऐसी कमाई, जिस पर विशेष टैक्स दर लागू होती है, उस पर भी यह सुविधा नहीं मिलती।

ITR में रिबेट कैसे क्लेम करें?

सबसे पहले पूरे साल की ग्रॉस टोटल इनकम निकालें। इसके बाद मिलने वाली छूट और डिडक्शन घटाकर टैक्सेबल इनकम निकालें। ITR में अपनी टैक्सेबल इनकम भरें। अगर आपकी आय तय सीमा के भीतर है, तो सेक्शन 87A के तहत रिबेट क्लेम कर दें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-2 और ITR-3 में भी यह सुविधा दी है।

क्या है मार्जिनल रिलीफ?

नए टैक्स रिजीम में अगर आपकी कमाई 12 लाख रुपये से थोड़ी ज्यादा है और बनने वाला टैक्स, 12 लाख से ऊपर की अतिरिक्त इनकम से ज्यादा है, तो आपको मार्जिनल रिलीफ मिलता है।

अब मान लीजिए आपकी टैक्सेबल इनकम 12.15 लाख रुपये है। यानी 12 लाख की सीमा से 15,000 रुपये ज्यादा। इस पर सामान्य नियम से 62,250 रुपये टैक्स बनता है।

लेकिन मार्जिनल रिलीफ मिलने के बाद आपका टैक्स घटकर सिर्फ 15,000 रुपये रह जाएगा। इस पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने के बाद आपकी टैक्स देनदारी 62,250 रुपये से घटकर 15,600 रुपये रह जाएगी।

अगर आप निकालना चाहते हैं अपना पूरा PF बैलेंस, तो जानिए इस बारे में क्या कहते हैं EPFO ​​के नियम

Passport Fee Hike: 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा, सरकार ने बढ़ाई फीस; जानिए नए रेट

Passport Fee Hike: अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या पुराना रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो आपको जेब ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने के लिए पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट नियम, 1980 में बदलाव करते हुए नई फीस तय की है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी।

सरकार ने 20 जून को जारी अधिसूचना में बताया कि पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की Schedule-IV को भी नए शुल्क के साथ बदल दिया गया है।

नए पासपोर्ट के लिए कितनी फीस देनी होगी?

अगर आप 36 पेज वाला नया पासपोर्ट बनवाते हैं या उसे दोबारा जारी (Reissue) कराते हैं, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹2,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹1,500 लगते थे। अगर आप तत्काल (Tatkaal) सेवा चुनते हैं, तो अब ₹5,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹3,500 थी।

अगर आपको 60 पेज वाला पासपोर्ट चाहिए, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹3,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹2,000 लगते थे। वहीं, तत्काल सेवा के लिए अब ₹6,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹4,000 थी।

ये नई फीस बालिगों पर लागू होगी। इसके अलावा 15 से 18 साल के वे नाबालिग भी इसी श्रेणी में आएंगे, जो बालिग कैटेगरी में पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं।

chart pfssssss

खोया या खराब पासपोर्ट बनवाना पड़ेगा महंगा

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट के रीप्लेसमेंट की फीस में की गई है।

अगर 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो नया पासपोर्ट बनवाने के लिए सामान्य प्रक्रिया में ₹5,000 और तत्काल सेवा में ₹7,500 देने होंगे।

अगर 60 पेज वाला पासपोर्ट रीप्लेस कराना है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹6,000 और तत्काल सेवा में ₹8,500 खर्च होंगे। अगर किसी नाबालिग का 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹4,250 और तत्काल सेवा में ₹6,750 फीस देनी होगी।

PCC और दूसरी सेवाओं की फीस भी बदली

पासपोर्ट से जुड़ी दूसरी सेवाएं भी महंगी हो गई हैं। पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए अब ₹750 फीस देनी होगी। वहीं, सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी बनवाने के लिए ₹1,000 देने होंगे।

अगर ये सेवाएं विदेश में ली जाती हैं, तो इमरजेंसी सर्टिफिकेट के लिए 15 अमेरिकी डॉलर और सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी के लिए 50 अमेरिकी डॉलर फीस देनी होगी। इन सेवाओं के लिए तत्काल (Tatkaal) सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

इन्हें मिलेगी 10% तक की छूट

सरकार ने एक और राहत भी दी है। 8 साल तक के बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को नया पासपोर्ट बनवाने (फ्रेश आवेदन) पर फीस में 10% की छूट मिलेगी। हालांकि, यह छूट पासपोर्ट दोबारा जारी (री-इश्यू) कराने पर नहीं मिलेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है। यह एक यात्रा दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल विदेश यात्रा करने और विदेश में धारक की पहचान साबित करने के लिए किया जाता है।

पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ फीस बदली है। पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बालिगों को जारी होने वाला पासपोर्ट पहले की तरह 10 साल तक वैध रहेगा। वहीं, नाबालिगों का पासपोर्ट 5 साल या 18 साल की उम्र पूरी होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्या आपने निपटा लिए टैक्स से जुड़े ये 5 जरूरी काम? जेब पर भारी पड़ सकती है जरा सी भी देरी, ये है डेडलाइंस

ITR Filing 2026: नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और कंपनियों के लिए जुलाई 2026 का महीना टैक्स और कंप्लायंस के लिहाज से बेहद व्यस्त रहने वाला है। इस महीने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने से लेकर TDS जमा करने जैसी कई महत्वपूर्ण तारीखें आ रही हैं। अगर आप इनमें से किसी भी डेडलाइन को चूक जाते हैं, तो आपको भारी पेनाल्टी, लेट फीस और ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है।

अपनी जेब को नुकसान से बचाने के लिए टैक्स से जुड़ी इन 5 बड़ी डेडलाइंस को पहले ही नोट कर लें और समय रहते अपना काम पूरा करें।

1. 31 जुलाई: ITR फाइल करने की आखिरी तारीख

जुलाई महीने की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण डेडलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं को 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न हर हाल में दाखिल करना होगा। इस तारीख के बाद रिटर्न भरने पर भारी लेट फीस देनी होगी और आप अपने नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड भी नहीं कर पाएंगे।

2. 7 जुलाई: टीडीएस जमा करने की डेडलाइन

महीने की शुरुआत में ही 7 जुलाई को एक बड़ा कंप्लायंस आ रहा है। जिन करदाताओं या संस्थाओं को असेसिंग ऑफिसर से तिमाही टीडीएस जमा करने की मंजूरी मिली हुई है, उन्हें अप्रैल-जून तिमाही का टीडीएस 7 जुलाई तक जमा करना होगा। इसके अलावा, जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के दौरान मिले विशेष डिक्लेरेशन और फॉर्म्स को अपलोड करने की आखिरी तारीख भी यही है।

Income Tax: कमाई 12 लाख से सिर्फ ₹1500 ज्यादा होने पर क्या लगेगा ₹60000 का टैक्स? जानिए क्या है नियम

3. 15 जुलाई: इन संस्थाओं के लिए बड़ी रिपोर्टिंग

15 जुलाई की तारीख सरकारी दफ्तरों, स्टॉक एक्सचेंजों, ऑथराइज्ड डीलर्स, आईएफएससी यूनिट्स और गैर-निवासी भारतीय (NRI) निवेशकों के साथ काम करने वाले बिचौलियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इन्हें इस तारीख तक अपनी जरूरी रिपोर्टिंग और टैक्स से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे।

4. 30 जुलाई: चालान-कम-स्टेटमेंट भरने की अंतिम तिथि

टैक्स कटौती करने वाले लोगों या संस्थाओं के लिए 30 जुलाई की तारीख अहम है। जून के महीने में की गई कुछ खास कैटेगरी की टैक्स कटौतियों से संबंधित चालान-कम-स्टेटमेंट को इस तारीख तक सबमिट करना अनिवार्य है।

5. 31 जुलाई: टीडीएस/टीसीएस रिटर्न और जरूरी फॉर्म्स की बाढ़

31 जुलाई सिर्फ आईटीआर के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े टैक्स कंप्लायंस के लिए भी साल का सबसे व्यस्त दिन है:

TDS/TCS तिमाही स्टेटमेंट: सैलरी से टैक्स काटने वाले एम्प्लॉयर्स और टीसीएस कलेक्ट करने वाली संस्थाओं को 30 जून को खत्म हुई तिमाही का रिटर्न 31 जुलाई तक फाइल करना होगा। इसके अलावा, अनिवासियों को किए गए गैर-सैलरी भुगतानों का तिमाही टीडीएस स्टेटमेंट भी इसी दिन तक देना है।

ये खास फॉर्म भरने की भी आखिरी तारीख: अगर आप टैक्स छूट या राहत का दावा करना चाहते हैं, तो 31 जुलाई तक ये फॉर्म जरूर भरें:

  • Form 10E: एरियर या एडवांस सैलरी पर टैक्स रिलीफ पाने के लिए।
  • Form 10BA: धारा 80GG के तहत किराए के मकान पर डिडक्शन का दावा करने के लिए।
  • Form 10H: विदेशी आय पर डिडक्शन का दावा करने वाले लेखकों और पेटेंट धारकों के लिए।
  • Form 10CCE और Form 10CCD: रॉयल्टी से जुड़ी टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए।

एक सबसे जरूरी सलाह ये है कि आखिरी दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल पर हैवी ट्रैफिक के कारण आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए आज ही अपने पेंडिंग टैक्स कंप्लायंस निपटा लें।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

ITR Filing 2026: अब तकरीबन सभी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ईमेल लिखने से लेकर निवेश और टैक्स प्लानिंग तक में लोग AI टूल्स की मदद ले रहे हैं।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए केवल सामान्य AI चैटबॉट्स पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। खासकर जब मामला कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति, क्रिप्टोकरेंसी या बिजनेस इनकम से जुड़ा हो।

AI पर पूरी तरह भरोसा करना क्यों गलत?

ClearTax के फाउंजर और CEO अर्चित गुप्ता का कहना है कि कई लोग अपना Form 16, सैलरी स्लिप और निवेश से जुड़ी जानकारी सीधे सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर रहे हैं। इससे टैक्स कैलकुलेशन में गलती होने का खतरा रहता है।

उनके मुताबिक, सामान्य AI टूल्स के पास टैक्स नियमों का तय ढांचा नहीं होता। यही वजह है कि एक ही Form 16 अपलोड करने पर अलग-अलग बार अलग टैक्स देनदारी दिख सकती है। अगर रिटर्न में कोई गलती होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होगी, AI टूल की नहीं।

डेटा लीक का भी खतरा

रिटर्न फाइल करने में AI के इस्तेमाल से डेटा लीक होने का खतरा भी रहता है। अर्चित गुप्ता के मुताबिक, सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर सैलरी स्लिप, PAN, बैंक डिटेल या दूसरे वित्तीय दस्तावेज अपलोड करना सुरक्षित नहीं है। इससे आपकी निजी जानकारी लीक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यह कई कंपनियों की डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी का उल्लंघन भी माना जा सकता है। कुछ मामलों में कर्मचारियों पर कार्रवाई तक की नौबत आ चुकी है।

AI कहां तक मददगार है?

Deloitte India के पार्टनर तरुण गर्ग का कहना है कि AI को टैक्स फाइलिंग का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह टैक्स नियम समझाने, जरूरी दस्तावेजों की सूची तैयार करने और पुराने-नए टैक्स रिजीम की तुलना करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, AI से तैयार रिटर्न को अंतिम मानने के बजाय ड्राफ्ट की तरह देखें। रिटर्न फाइल करने से पहले सभी जानकारियों का मिलान आधिकारिक दस्तावेजों से जरूर करें।

रिटर्न भरने से पहले ये जांच जरूर करें

  • AIS, TIS और Form 26AS से सभी आय का मिलान करें।
  • सही ITR फॉर्म का चयन हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
  • पुराना या नया टैक्स रिजीम सही तरीके से चुना गया है या नहीं, यह जांचें।
  • TDS और TCS क्रेडिट का मिलान करें।
  • कैपिटल गेन, क्रिप्टो, विदेशी संपत्ति और अन्य जरूरी खुलासों की दोबारा जांच करें।
  • बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI टैक्स फाइलिंग को आसान जरूर बना सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा टैक्सपेयर की ही रहती है। इसलिए ITR फाइल करते समय AI की सलाह पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल या टैक्स प्रोफेशनल की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

Income Tax: कमाई 12 लाख से सिर्फ ₹1500 ज्यादा होने पर क्या लगेगा ₹60000 का टैक्स? जानिए क्या है नियम

ITR Filing 2026: क्या पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं?

ITR Filing 2026: कई टैक्सपेयर्स के मन में हमेशा यह सवाल चलता रहता है कि क्या पति और पत्नी अलग-अलग इनकम टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ मनीकंट्रोल ने एक्सपर्ट से इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की। दरअसल, इस बारे में एक रीडर ने सवाल पूछा है।

पति और पत्नी अलग रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं

रीडर ने पूछा था कि हम पति और पत्नी दोनों नौकरी करते हैं। मैं इनकम टैक्स की नई रीजीम के तहत सेकेक्ट 87ए के तहत मिलने वाले रिबेट का फायदा उठाना चाहती हूं। लेकिन, मेरे पति सेक्शन 80सी के बेनेफिट्स क्लेम करने के लिए इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में रिटर्न फाइल करना चाहते हैं। क्या हम पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन से पूछा।

परिवार का हर सदस्य इनकम टैक्स के लिहाज से अलग इकाई है

जैन ने कहा कि टैक्स के लिहाज से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग मानता है। सिर्फ कुछ खास स्थितियों में इनकम की क्लबिंग का प्रावधान है। सामान्य स्थितियों में हर सदस्य अपने हिसाब से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है। इंडिया में इनकम टैक्स के नियम में परिवार को टैक्स के लिहाज से एक इकाई मानने का प्रावधान नहीं है।

परिवार के सदस्य को कम लायबिलिटी वाली रीजीम चुनने का हक

उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य जैसे पति और पत्नी इनकम टैक्स की उस रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें उनकी टैक्स लायबिलिटी कम आती हो। अगर किसी परिवार में पत्नी नई रीजीम के तहत सेक्शन 87ए के तहत 12 लाख रुपये तक की इनकम पर रिबेट का फायदा उठाना चाहती है तो वह नई रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकती है। पति सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाले डिडक्शन का फायदा उठाने के लिए इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने के लिए डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करना होगा

जैन ने कहा कि ध्यान देने वाली बात यह है कि पति को पुरानी रीजीम के तहत तय अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल कर देना होगा। अगर उनकी सैलरी के अलावा कोई बिजनेस इनकम नहीं है तो रिटर्न फाइल करने के लिए उनकी डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 होगी। अगर सैलरी के साथ उनकी कोई बिजनेस इनकम भी है तो वह 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: अभी महंगे नहीं होंगे होम लोन और कार लोन, RBI गवर्नर ने इंटरेस्ट रेट में वृद्धि से किया इनकार

डेडलाइन बीत जाने के बाद नई रीजीम में रिटर्न फाइल करना होगा 

उन्होंने कहा कि अगर पति अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो ओल्ड टैक्स रीजीम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। फिर उन्हें नई टैक्स रीजीम के तहत रिटर्न फाइल करना होगा। पति संबंधित वित्त वर्ष से जुड़े होम लोन के इंटरेस्ट पर भी डिडक्शन क्लेम कर सकते है। अगर होम लोन ज्वाइंट है तो वह अपने शेयर पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

ITR Filing 2026: विदेशी शेयर, बैंक अकाउंट या आय छिपाई तो लग सकता है ₹10 लाख तक का जुर्माना

कई लोगों को नौकरी के दौरान विदेश में काम करने का मौका मिलता है। कुछ समय बाद वे देश लौट आते हैं। लेकिन, विदेश में पोस्टिंग के दौरान वे वहां एसेट्स खरीद लेते हैं। इनकम टैक्स का नियम कहता है कि अगर किसी टैक्सपेयर का विदेश में एसेट्स है या किसी तरह की इनकम है तो उसे उसकी जानकारी इनकम टैक्स में रिटर्न में देनी होगी। अगर किसी व्यक्ति ने विदेशी कंपनी के शेयरों या म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया है तो भी उसे अपने रिटर्न में इस बारे में बताना होगा।

अब विदेश में एसेट्स या इनकम छुपाना मुश्किल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स की विदेश में एसेट्स और किसी तरह की इनकम पर करीबी नजर रखता है। डिपार्टमेंट को सीधे दूसरे देशों की सरकार और वहां के वित्तीय संस्थानों से इस बारे में जानकारी मिलती है। इसलिए विदेश में एसेट्स या विदेशी एसेट्स से होने वाली इनकम को अब छुपाना मुश्किल हो गया है। ऐसा करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

विदेशी कंपनी के ईसॉप्स या शेयरों की भी देनी होगी जानकारी

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के फाउंडिंग पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अगर एंप्लॉयीज के पास विदेशी कंपनी के ईसॉप्स, आरएसयू या शेयर हैं तो उसे इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी होगी। साथ ही अगर इंडिया के बाहर से किसी तरह की इनकम होती है तो उसके बारे में भी रिटर्न में बताना होगा।” इनकम टैक्स के नियमों के तहत ऐसा करना अब अनिवार्य है।

विदेश में इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर 10 लाख तक की पेनाल्टी

विदेश में एसेट्स और इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है। वह टैक्सपेयर के खिलाप ब्लैक मनी से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। टैक्सपेयर पर 10 लाख रुपये तक पेनाल्टी लगाई जा सकती है। कुछ गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया तक का सामना करना पड़ सकता है।

विदेश में बैंक अकाउंट है तो भी उसकी जानकारी रिटर्न में देनी होगी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान टैक्सपेयर्स के लिए विदेश में बैंक अकाउंट की डिटेल, रियल एस्टेट में निवेश, शेयर या म्यूचुअल फंड्स में निवेश या किसी दूसरे तरह के इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश के बारे में बताना जरूरी है।

फॉरेन इनकम बताना भूल गए तो फाइल कर सकते हैं रिवाइज्ड रिटर्न

अगर टैक्सपेयर विदेश में अपने एसेट्स या इनकम की जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में बताना भूल जाता है या वह गलत इनकम बता देता है तो उसके पास रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने का विकल्प है। उसे अगले साल 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना होगा। ऐसा करने पर वह इनकम टैक्स की कार्रवाई से बच सकता है।

ITR Filing 2026: फॉर्म 16 नहीं मिला? फिर भी आसानी से भर सकते हैं ITR, जानिए स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का समय आते ही ज्यादातर नौकरीपेशा लोग Form 16 का इंतजार करने लगते हैं। यह दस्तावेज ITR फाइल करने का काम काफी आसान बना देता है। लेकिन कई बार नौकरी बदलने, कंपनी बंद हो जाने, कम सैलरी होने या किसी दूसरी वजह से Form 16 नहीं मिल पाता। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि अब ITR भरना मुश्किल हो जाएगा।

लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपके पास Form 16 नहीं है, तब भी आप आसानी से अपना ITR फाइल कर सकते हैं। बस आपको अपनी कमाई, टैक्स कटौती और निवेश से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां जुटानी होंगी।

Form 16 आखिर होता क्या है?

Form 16 एक टैक्स सर्टिफिकेट होता है, जिसे कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है। इसमें सालभर की सैलरी, TDS, टैक्स छूट और दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं।

हालांकि Form 16 ITR भरने में मदद करता है, लेकिन ITR दाखिल करने के लिए इसका होना जरूरी नहीं है। आयकर विभाग ने ऐसी कोई शर्त नहीं रखी है कि बिना Form 16 के रिटर्न नहीं भरा जा सकता।

बिना Form 16 के ITR कैसे भरें?

सबसे पहले सैलरी स्लिप जुटाएं

अगर Form 16 नहीं मिला है, तो सबसे पहले पूरे वित्त वर्ष की सैलरी स्लिप निकाल लें। इन स्लिप्स में आपकी बेसिक सैलरी, HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस और दूसरी भुगतान संबंधी जानकारी होती है।

अगर आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों की सैलरी स्लिप साथ रखें। इससे कुल आय निकालना आसान हो जाएगा।

AIS और TIS जरूर चेक करें

इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें।

AIS में आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयरों से हुई कमाई, TDS और कई दूसरे वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिल जाती है। इससे आपको अपनी कुल आय का सही हिसाब लगाने में मदद मिलेगी।

Form 26AS को नजरअंदाज न करें

ITR भरने से पहले Form 26AS जरूर देखें। इसमें आपके PAN पर कटे TDS और जमा किए गए टैक्स का पूरा रिकॉर्ड होता है।

अगर आपकी कंपनी या बैंक ने TDS काटा है, तो वह यहां दिखाई देगा। इससे यह भी पता चल जाएगा कि आपके नाम पर कितना टैक्स जमा किया गया है।

सिर्फ सैलरी नहीं, दूसरी आय भी जोड़ें

कई लोग ITR भरते समय सिर्फ सैलरी की जानकारी भरते हैं और बैंक ब्याज, FD का ब्याज, डिविडेंड या दूसरी आय को भूल जाते हैं।

ऐसी गलती बाद में नोटिस की वजह बन सकती है। इसलिए AIS, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड देखकर सभी आय को जोड़ना जरूरी है।

टैक्स छूट का फायदा लेना न भूलें

अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुन रहे हैं, तो 80C, 80D, NPS, होम लोन और दूसरी उपलब्ध कटौतियों को जरूर शामिल करें।

अपने निवेश और खर्च से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दिखाया जा सके।

नौकरी बदली है तो ये गलती न करें

अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो सभी कंपनियों से मिली सैलरी को जोड़कर कुल आय निकालें।

कई बार नया नियोक्ता पुरानी नौकरी की आय को अपने टैक्स कैलकुलेशन में शामिल नहीं करता। ऐसे में ITR भरते समय सही आंकड़ा खुद जोड़ना जरूरी होता है। वरना बाद में अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

ITR भरने से पहले एक बार सब मिलान कर लें

रिटर्न फाइल करने से पहले AIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। यह भी सुनिश्चित करें कि आपकी हर आय उसमें शामिल हो।

अगर आपकी कमाई के कई स्रोत हैं या मामला थोड़ा जटिल है, तो किसी टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

ITR Filing 2026: क्या FY 2025-26 की कमाई पर भरने होंगे 2 ITR? नए टैक्स कानून के कंफ्यूजन पर आयकर विभाग ने दिया ये जवाब

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Filing 2026: क्या इस साल भी बढ़ेगी ITR फाइल करने की डेडलाइन? ये 5 फैक्टर करेंगे तय

ITR Filing 2026: ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख पिछले साल दो बार बढ़ाई गई थी। इसकी वजह टैक्स नियमों में बदलाव और ई-फाइलिंग पोर्टल से जुड़ी कुछ तकनीकी चुनौतियां थीं। इसके चलते कई टैक्सपेयर उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल भी डेडलाइन बढ़ सकती है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी संभावना काफी कम नजर आती है।

सबसे बड़ी वजह यह है कि इस बार फाइलिंग से जुड़ी ज्यादातर सुविधाएं और यूटिलिटीज समय पर उपलब्ध हैं। ई-फाइलिंग सिस्टम भी फिलहाल ठीक तरीके से काम कर रहा है। रिटर्न फाइल करने की रफ्तार भी अच्छी बनी हुई है।

किन 5 फैक्टर से डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद कम?

1. कई टैक्सपेयर को पहले ही राहत मिल चुकी है

कई नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर, फर्म पार्टनर्स और कुछ प्रोफेशनल्स के लिए ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख पहले ही बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी गई है। ऐसे में सभी के लिए एक और व्यापक राहत की जरूरत कम हो जाती है।

2. ITR फॉर्म समय पर जारी हुए

ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की यूटिलिटीज पहले से उपलब्ध हैं। ये फॉर्म ज्यादातर टैक्सपेयर इस्तेमाल करते हैं। इसलिए सिर्फ कुछ फॉर्म्स में देरी की वजह से डेडलाइन बढ़ने की संभावना कम है।

3. तकनीकी दिक्कतें कम रहीं

पिछले साल पोर्टल से जुड़ी समस्याएं डेडलाइन बढ़ाने की एक बड़ी वजह थीं। इस बार फाइलिंग सीजन काफी अच्छा रहा है। अब तक कोई बड़ी तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है।

4. टैक्स नियमों में ज्यादा बदलाव नहीं

पिछले कुछ वर्षों में इंडेक्सेशन नियमों, STCG और LTCG टैक्स जैसे कई बड़े बदलाव हुए थे। इस बार टैक्स सिस्टम भी काफी स्थिर है। इसलिए टैक्सपेयर और विभाग दोनों बेहतर तरीके से तैयार हैं।

5. फाइलिंग की रफ्तार मजबूत

21 जून 2026 तक 56 लाख से ज्यादा ITR दाखिल हो चुकी थीं। इनमें से 53 लाख से ज्यादा रिटर्न वेरिफाई भी हो चुकी हैं। यह दिखाता है कि फाइलिंग प्रक्रिया सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही है।

अगर अब तक ITR नहीं भरा, तो क्या करें?

  • Form 16, ब्याज प्रमाणपत्र, कैपिटल गेन स्टेटमेंट और आय से जुड़े अन्य दस्तावेज पहले से जुटा लें।
  • रिटर्न में दी गई जानकारी AIS और Form 26AS से मेल खानी चाहिए। इससे गलती और नोटिस का जोखिम कम होता है।
  • रिटर्न भरने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना जरूर कर लें।
  • आखिरी समय का इंतजार करने पर पोर्टल पर दबाव बढ़ सकता है और गलतियों की संभावना भी रहती है।
  • सिर्फ ITR भरना काफी नहीं है। रिटर्न को ई-वेरिफाई करना भी जरूरी है। इसके बिना रिटर्न वैध नहीं मानी जाती।

कुल मिलाकर डेडलाइन बढ़ने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए टैक्सपेयर को मौजूदा समयसीमा को ही ध्यान में रखकर अपनी ITR फाइल करनी चाहिए।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPFO Pension Rules: मृत्यु, दिव्यांगता या अर्ली रिटायरमेंट पर EPS पेंशन का क्या होता है? समझिए सभी नियम

EPFO Pension Rules: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 1995 को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन योजना समझना बड़ी भूल हो सकती है। यह सोशल सिक्योरिटी स्कीम भी है, जो कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार को भी सुरक्षा देने का काम करती है। कर्मचारी की रिटायरमेंट, दिव्यांगता या मृत्यु जैसे हालात में EPS के नियम भी अलग-अलग लागू होते हैं।

रिटायरमेंट पर कब मिलती है पेंशन?

अगर कोई कर्मचारी कम से कम 10 साल तक EPS में योगदान करता है, तो वह 58 साल की उम्र के बाद मंथली पेंशन पाने का हकदार बन जाता है। हालांकि कर्मचारी चाहे तो 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन भी ले सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में पेंशन की रकम कम हो जाती है, क्योंकि उसे तय उम्र से पहले निकाला जा रहा होता है।

दिव्यांगता की स्थिति में क्या होता है?

अगर कर्मचारी नौकरी के दौरान स्थायी और पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिल सकती है। इस मामले में सामान्य रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 साल की सेवा शर्त उसी तरह लागू नहीं होती। इसका मकसद ऐसे कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनकी कमाने की क्षमता खत्म हो गई हो।

कर्मचारी की मौत होने पर किसे मिलते हैं पैसे?

EPS की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी परिवार को सुरक्षा देता है। कर्मचारी की मौत होने पर पात्र परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन मिल सकती है। इसमें विधवा या विधुर पेंशन, बच्चों की पेंशन और कुछ मामलों में अनाथ पेंशन भी शामिल है।

यही वजह है कि EPS को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजना माना जाता है।

क्या नॉमिनी को हमेशा पेंशन मिलती है?

कई लोग मानते हैं कि EPF की तरह EPS में भी नॉमिनी को सीधे फायदा मिल जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। EPS में पेंशन का अधिकार मुख्य रूप से योजना में तय पात्र परिवार के सदस्यों को मिलता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई अविवाहित कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बना देता है, तो सिर्फ नॉमिनी होने से उस व्यक्ति को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। पेंशन का फैसला EPS के नियमों के मुताबिक होता है।

किन गलतियों से हो सकती है परेशानी?

कई परिवारों को कर्मचारी की मौत के बाद पता चलता है कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। नाम, जन्मतिथि, आधार, बैंक खाते या सर्विस रिकॉर्ड में अंतर होने से पेंशन क्लेम अटक सकता है। कई बार नौकरी बदलने के दौरान पुराने रिकॉर्ड सही तरीके से ट्रांसफर नहीं होते, जिससे सेवा अवधि का पूरा रिकॉर्ड नहीं दिखता।

इसी तरह Form 11 में गलतियां भी बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए कर्मचारियों को अपने EPF पासबुक, ट्रांसफर रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और KYC जानकारी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए।

EPS को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां

कई कर्मचारी मानते हैं कि हर EPF सदस्य अपने आप EPS सदस्य भी बन जाता है। वहीं, 1 सितंबर 2014 के बाद नियम बदल चुके हैं और सभी कर्मचारी EPS के लिए पात्र नहीं होते।

दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि EPS को लोग बचत खाते की तरह समझते हैं। जबकि यह पेंशन योजना है। इसमें मिलने वाला फायदा सेवा अवधि और पात्रता पर निर्भर करता है, न कि खाते में दिख रही रकम पर।

रिटायरमेंट प्लानिंग में EPS की क्या भूमिका है?

EPS को रिटायरमेंट की पूरी व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा देता है। कर्मचारियों को EPF, NPS, निजी निवेश और पर्याप्त जीवन बीमा के साथ अपनी रिटायरमेंट योजना बनानी चाहिए।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नौकरी के दौरान उनके सभी पेंशन रिकॉर्ड सही और अपडेट रहें। इससे भविष्य में परिवार को पेंशन पाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

ITR Filing 2026: सैलरीड टैक्सपेयर्स अक्सर करते हैं ये 5 गलतियां, रिफंड में देरी से लेकर नोटिस आने का भी खतरा

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।