Volkswagen Layoffs: 1 लाख तक लोगों की जा सकती है नौकरी, 4 फैक्ट्रियां बंद करने का भी प्लान

यूरोप की सबसे बड़ी कार मेकर फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और नौकरियों में कटौती के आंकड़े को लाख तक पहुंचा सकती है। कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम कंपनी को ज्यादा कॉम्पिटिटिव बनाने की तैयारी में हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मैनेजर मैगजीन को मामले की जानकारी रखने वालों से पता चला है कि इस हफ्ते की शुरुआत में बोर्ड की मीटिंग हुई।

इसमें CEO ने जो प्लान पेश किए, उनमें कर्मचारियों की छंटनी को दोगुना करके 1,00,000 तक करने की बात शामिल है। कंपनी में अभी लगभग 6,57,000 लोग काम करते हैं। फॉक्सवैगन AG, Porsche और Audi की भी मालिक है। ब्लूम की नई रीस्ट्रक्चरिंग योजना को चर्चा के लिए अगले महीने सुपरवाइजरी बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।

जर्मनी की 4 फैक्ट्रियां हो सकती हैं बंद

मैनेजर मैगजीन के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्लूम कंपोनेंट प्लांट्स और सबसे अहम, फॉक्सवैगन ब्रांड को अलग करने पर भी विचार कर रहे हैं। यह ब्रांड लंबे समय से कम मुनाफे की समस्या से जूझ रहा है। ब्लूम Volkswagen को छोटा और ज्यादा कुशल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह है कि कंपनी अमेरिकी टैरिफ, चीन में लगातार कमजोरी और यूरोप में BYD Co. और Stellantis NV जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से बढ़ते कॉम्पिटिशन का सामना कर रही है।

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28,000 कर्मचारी Volkswagen छोड़ने के लिए राजी

लगभग 28,000 कर्मचारी फॉक्सवैगन छोड़ने के लिए सहमत हो गए हैं। यह 2030 तक पूरे ग्रुप में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले से घोषित योजना का हिस्सा है। लेबर लीडर्स ने फॉक्सवैगन की नई योजनाओं का विरोध किया है। फॉक्सवैगन में नौकरियों में कटौती करना मुश्किल है। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, और जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के पास 2 और सीटें हैं। यह राज्य अक्सर कर्मचारी यूनियनों का साथ देता है।

Raja Shivaji OTT Release Date: रितेश देशमुख की ‘राजा शिवाजी’ ने ओटीटी पर दी दस्तक, जानें कहां देख सकेंगे फिल्म

Raja Shivaji OTT Release Date: रितेश देशमुख की ऐतिहासिक ड्रामा फ़िल्म ‘राजा शिवाजी’ 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और बॉक्स ऑफ़िस पर सफल रही। फ़िल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स, दोनों से ही तारीफ़ मिली; इसकी वजह थी फ़िल्म का भव्य स्केल, ज़बरदस्त एक्टिंग और महान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज का चित्रण। सिनेमाघरों में मिली सफलता के बाद, यह बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक फ़िल्म अब OTT पर आ गई है।

आज, 26 जून को ‘राजा शिवाजी’ नेटफ़्लिक्स पर रिलीज़ हुई। OTT प्लेटफ़ॉर्म ने सोशल मीडिया पर फ़ैन्स के साथ यह रोमांचक जानकारी शेयर की। फ़िल्म के आने की घोषणा करते हुए एक दिलचस्प पोस्टर शेयर किया गया और कैप्शन में लिखा गया, “विद्रोह करने आ रहे हैं राजे। नेटफ़्लिक्स पर मराठी और हिंदी में ‘राजा शिवाजी’ देखें, जो अब उपलब्ध है।”

आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद, फैंस इसे लेकर बहुत उत्साहित दिखे। एक फैन ने कमेंट किया, “आखिरकार! मराठी में, वाह।” एक और फैन ने लिखा, “आखिरकार… अब मैं इसे देख सकता हूँ।” एक कमेंट में यह भी लिखा था, “तेलुगु डबिंग की गुज़ारिश है।” वहीं, कुछ लोग फायर इमोजी भी पोस्ट करते दिखे।

रितेश देशमुख ने इस फ़िल्म का निर्देशन किया है और इसमें अभिनय भी किया है। उनके अलावा, फ़िल्म में अभिषेक बच्चन, भाग्यश्री, जेनेलिया देशमुख, संजय दत्त, फरदीन खान और विद्या बालन जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं। फ़िल्म में सुपरस्टार सलमान खान भी एक खास भूमिका में नज़र आएंगे।

News18 ने फ़िल्म को 3.5 स्टार दिए हैं। रिव्यू के एक हिस्से में लिखा है, “रितेश देशमुख के निर्देशन और मुख्य भूमिका वाली यह फ़िल्म काफी हद तक उनके अभिनय पर टिकी है और उन्होंने इसे बहुत सधे हुए अंदाज़ में निभाया है। बहुत ज़्यादा शोर-शराबे या नाटकीयता के बजाय, उन्होंने अपने किरदार को संयमित रखा है और शांति व आंतरिक तीव्रता पर ज़ोर दिया है। यह तरीका बहुत असरदार रहा है, खासकर उन शांत पलों में, जहाँ बिना किसी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए किरदार का पक्का इरादा साफ़ झलकता है। एक निर्देशक के तौर पर भी उन्होंने परिपक्वता दिखाई है और बिना ज़बरदस्ती ड्रामा पैदा किए दृश्यों को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने दिया है।”

₹250 वाला काम अब सिर्फ ₹13 में… विदेशी बाजारों में अब तहलका मचाएंगे भारतीय आम, पाकिस्तान को लगेगा बड़ा झटका!

Mango Export: कुछ दिनों पहले ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने जिसमें अमेरिका के बाजारों में भारतीय आमों के लिए खूब डिमांड का जिक्र था। हालांकि, भारत में ₹50-₹100 किलो मिलने वाले आम US में करीब ₹1900 के चार पीस बिक रहे थे। इतने मंहगे प्राइस को लेकर खूब बहस हो रही थी। इन्हीं सब के बीच भारतीय आम के शौकीनों के साथ-साथ विदेशी बाजारों के लिए भी एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत से विदेशों में आम भेजने का खर्च, जो अब तक ₹250 प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता था, वह अब घटकर महज ₹13 से ₹20 प्रति किलोग्राम रह गया है।

भारत ने समुद्र के रास्ते सिंगापुर को आमों की एक बड़ी खेप सफलतापूर्वक भेजकर लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इस क्रांतिकारी बदलाव से न सिर्फ भारतीय आमों का निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा, बल्कि विदेशी बाजारों में पाकिस्तान और अन्य देशों के आमों के मुकाबले भारतीय आम बेहद प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे।

अब तक क्यों महंगा था आम का एक्सपोर्ट?

अब तक भारत से प्रीमियम क्वालिटी के आमों जैसे- हापुस, दशहरी, लंगड़ा, चौंसा का निर्यात मुख्य रूप से हवाई जहाज के जरिए होता था। हवाई सफर के कारण केवल ट्रांसपोर्टेशन की लागत ही ₹150 से ₹250 प्रति किलोग्राम तक आ जाती थी। इसके चलते विदेशों में भारतीय आम काफी महंगे बिकते थे और आम निवेशक या निर्यातक ज्यादा मात्रा में ट्रेडिंग नहीं कर पाते थे।

लेकिन, समुद्र के रास्ते किए गए इस सफल ट्रायल ने गेम ही बदल दिया है। अब यह खर्च सीधे ₹13 से ₹20 प्रति किलो पर सिमट गया है, जो कि पहले के मुकाबले लगभग 90% से भी ज्यादा सस्ता है।

कैसे मुमकिन हुआ यह कारनामा?

समुद्र के रास्ते आम भेजने में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कई दिनों के सफर में आम सड़ या गल न जाएं। इस चुनौती को पार करने के लिए लखनऊ स्थित ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर ने ‘एपीडा’ (APEDA) के साथ मिलकर एक खास वैज्ञानिक ‘सी-शिपमेंट प्रोटोकॉल’ तैयार किया।

इस स्पेशल प्रयोग के तहत आंध्र प्रदेश से 4.3 टन बंगनपल्ली आमों को एक खास रीफर कंटेनर (रेफ्रिजरेटेड कंटेनर) में रखकर समुद्र के रास्ते सिंगापुर भेजा गया। वैज्ञानिकों ने इन तकनीकों का इस्तेमाल किया:

FUSICONT बायो-कंट्रोल तकनीक: वैज्ञानिकों ने बागों में फल लगने से लेकर कटाई तक अपनी खास तकनीक से निगरानी की ताकि आम पूरी तरह से केमिकल और पेस्टिसाइड रेजिड्यू-फ्री रहें।

हॉट वाटर और CISH-Met Wash ट्रीटमेंट: कटाई के बाद आमों को CISH द्वारा विकसित खास वॉश तकनीक और हॉट वाटर ट्रीटमेंट से गुजारा गया। इससे आमों की ‘शेल्फ लाइफ’ यानी खराब न होने की अवधि बढ़ गई और उनमें कोई बीमारी नहीं लगी।

30 दिनों तक नहीं खराब होंगे आम: इस तकनीक की मदद से समुद्र के ठंडे तापमान में भी आमों की लाइफ को 30 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। सिंगापुर पहुंचने में इस कंसाइनमेंट को 16 दिन लगे और जब वहां कंटेनर खुला, तो आम बिल्कुल ताजा और बेहतरीन कंडीशन में मिले।

क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह सफलता?

नए और बड़े बाजारों पर कब्जा: अब तक भारतीय आम सिर्फ कुछ प्रीमियम विदेशी स्टोर्स तक ही सीमित थे। लेकिन अब लागत कम होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स सिंगापुर, मलेशिया, हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों में अपनी धाक जमा सकते हैं, जहां आम का आयात करीब $4-5 मिलियन का है। इसके अलावा, भारत संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े मार्केट को भी टारगेट कर सकता है, जिसका बाजार $20-25 मिलियन का है।

किसानों की बढ़ेगी आमदनी: लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इतनी बड़ी कटौती का सीधा फायदा आम उत्पादक किसानों और एक्सपोर्टर्स को मिलेगा। वे अब बिना किसी नुकसान के डर के भारी मात्रा में आम विदेशों में मुनाफे के साथ बेच सकेंगे।

यहां सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा किसानों को आम का दाम, तोतापरी की हजारों एकड़ की खेती पेड़ पर ही सड़ने को छोड़ी!

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति ने हरिद्वार में की पूजा:सिद्धपीठ से नवंबर में होने वाले चुनाव में जीत की कामना की, पहली बार आए उत्तराखंड

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा भारत दौरे पर हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की और आगामी चुनावों में सफलता की कामना की। मंदिर प्रशासन ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने महामंडलेश्वर से मुलाकात कर आशीर्वाद भी लिया। इस दौरान जूमा ने कहा कि हरिद्वार का आध्यात्मिक वातावरण उन्हें बेहद पसंद आया। उन्होंने बताया कि वह पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं, लेकिन हरिद्वार पहली बार आए हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की सराहना की। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया कि यदि वह दोबारा राष्ट्रपति बने तो सबसे पहले हरिद्वार आकर मां दक्षिण काली के दर्शन करेंगे। इस दौरान भारत-दक्षिण अफ्रीका के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। तस्वीरें देखिए- सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी खबर… 1. हरिद्वार के सिद्धपीठ में जैकब जूमा ने की पूजा- दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा इन दिनों भारत के आध्यात्मिक दौरे पर हैं। उन्होंने उत्तराखंड के हरिद्वार पहुंचकर प्रसिद्ध सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की। जूमा ने बताया कि वे पहले भी कई बार भारत (2008, 2010, 2015, 2016) आ चुके हैं, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार का यह उनका पहला दौरा है। मंदिर के महामंडलेश्वर ने फूलों की भव्य माला पहनाकर उनका स्वागत किया। जूमा दक्षिण अफ्रीका के एक प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष हैं। वहां इसी साल 4 नवंबर को स्थानीय निकाय चुनाव हैं और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया है कि यदि वे दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं, तो सबसे पहले फिर से हरिद्वार आकर मां काली की पूजा करेंगे। इस यात्रा के दौरान जूमा के साथ दक्षिण अफ्रीका के राजनयिक, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री वाईपी सिंह और उनके बेहद करीबी मित्र व विवादित कारोबारी अजय कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। 2. सहारनपुर की राशन दुकान से दक्षिण अफ्रीका के ‘किंगमेकर’ बने गुप्ता ब्रदर्स- जैकब जूमा की किस्मत को बदलने और फिर डुबाने के पीछे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गुप्ता बंधुओं (अजय, अतुल और राजेश गुप्ता) का हाथ रहा है। गुप्ता बंधुओं के पिता शिवकुमार गुप्ता सहारनपुर के रायवाला बाजार में राशन और मसालों की दुकान चलाते थे। 1985 में पढ़ाई के बाद मंझले भाई अतुल गुप्ता दक्षिण अफ्रीका चले गए, जहां उन्हें रंगभेद के बाद व्यापार की बड़ी संभावनाएं दिखीं। बाद में उन्होंने अपने भाइयों अजय और राजेश को भी बुला लिया। 1993 में उन्होंने सहारा कंप्यूटर्स की शुरुआत की। मेहनत के दम पर यह देश की नंबर वन कंपनी बनी। इसके बाद उन्होंने कोल-गोल्ड माइनिंग, अखबार (न्यूज एज) और कई न्यूज चैनलों पर कब्जा कर अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। 3. संकट के समय जैकब जूमा की मदद और गुप्ता राज की शुरुआत- 2000 के आसपास गुप्ता ब्रदर्स और तत्कालीन उपराष्ट्रपति जैकब जूमा के बीच दोस्ती हुई। इसके बाद जूमा पर भ्रष्टाचार और गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और 15 साल की सजा सुनाई गई। इस बुरे वक्त में गुप्ता बंधुओं ने जैकब जूमा की 5 पत्नियों और 23 बच्चों की आर्थिक मदद की, बच्चों को नौकरियां दीं और जुमा को राष्ट्रपति बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। 2009 में जैकब ज़ूमा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बन गए। इसके बाद देश में गुप्ता बंधुओं का परोक्ष राज शुरू हो गया। सरकारी ठेके केवल गुप्ता ब्रदर्स को मिलते, बड़े पदों पर नियुक्तियां वे तय करते और यहां तक कि सेना के एयरपोर्ट पर अपने निजी विमान उतारते थे। 4. तीन भाइयों के चक्कर में गई राष्ट्रपति की कुर्सी और फिर जेल- 2016 में तत्कालीन उप वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि गुप्ता भाइयों ने उन्हें वित्त मंत्री बनाने का सौदा किया था। इसके बाद देश में भारी बवाल मच गया। इस बेतहाशा राजनीतिक दखल और अरबों के घोटाले के आरोप के चलते दक्षिण अफ्रीका में बेहद लोकप्रिय रहे जैकब ज़ूमा को अपनी राष्ट्रपति की कुर्सी गंवानी पड़ी और उन्हें 15 महीने की जेल काटनी पड़ी। जुमा के हटते ही गुप्ता ब्रदर्स पर शिकंजा कसा। 2018 में छापेमारी के बाद तीनों भाई कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दुबई (UAE) भाग गए। हालांकि, प्रत्यर्पण संधि होने के बाद हाल ही में दो भाइयों को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन्हें वापस दक्षिण अफ्रीका लाने की तैयारी है। राष्ट्रपति पद गंवाने और जेल जाने के बाद, अब जैकब ज़ूमा एक बार फिर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। अभी वे अपने पुराने साथी अजय गुप्ता को साथ लेकर हरिद्वार में मां भगवती की शरण में पहुंचे हैं। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… देहरादून बॉर्डर पांवटा साहिब पर डटे 200 निहंग:SSP को दिया दो दिन का अल्टीमेटम; बोले- साथियों को छोड़ो वरना कूच करेंगे देहरादून कूच करने वाले निहंगों में से कुछ लोग अब भी पांवटा साहिब में डटे हुए हैं। मामले में हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने पांवटा साहिब पहुंचकर निहंग जत्थेदारों से बातचीत की। उन्होंने उनकी मांगों और उत्तराखंड कूच को लेकर विस्तार से चर्चा की। (पढ़ें पूरी खबर)

Hero Passion+ Disc variant launched at Rs 84,128

Hero MotoCorp has added a new variant to its premium 100cc commuter, the Passion+, which comes with a front disc brake. The Passion Disc+ costs Rs 84,128 (ex-showroom, Delhi), making it the most expensive of all the 97.2cc Hero machines spanning the Splendor+, HF and Passion+ brands.

  1. Has a Bluetooth-compatible fully digital display
  2. Weighs 116 kilos, 1kg more than Drum variant 
  3. Available in four colours, claimed 71kpl fuel economy

The Passion+ is powered by Hero’s venerable 97.2cc, air-cooled, single-cylinder ‘sloper’ engine making the same 8hp at 8,000rpm and 8.05Nm of torque at 6,000rpm. This engine is mated to a 4-speed gearbox and is nestled within a simple tubular steel cradle frame that is suspended by a slim telescopic fork and twin shock absorbers – hardware that’s par for the course in the segment. This engine comes with Hero’s fuel-saving i3s start/stop technology and the company claims a certified fuel economy figure of 71kpl. Considering our past experience with Hero commuter machines, achieving this figure should be possible with some careful and gentle riding.

Hero Passion+ digital display

The Passion+ Disc variant comes with a 240mm disc brake at the front, replacing the Drum variant’s 130mm drum brake. This change should result in more surefooted braking performance consistently on the Passion+. Another change on the Disc variant compared to the lower Drum variant is that it comes with a fully digital display that is also Bluetooth enabled bringing in functions like call and SMS Alerts, should you choose to pair your smartphone to it. This display also shows the rider useful information such as a real time mileage indicator (RTMI), service reminders and a low fuel warning light. The Passion+ also has the side stand cut-off feature, which cuts the engine should you put the side stand down while a gear is engaged. Hero’s 100cc commuters also have a small storage cubby above the engine complete with a USB charging port – a rather practical addition.

It is available in the same 4 colours as the Drum variant – red, blue, black and grey – albeit with revised graphics. The Passion+ has always been the premium model in Hero’s 100cc lineup, sitting above the HF and Splendor+ ranges and this Disc variant is the most expensive of all of them. At Rs 84,128, the Passion+ Disc costs Rs 3,800 more than the Drum variant. This and the Splendor+ XTEC Disc are the only two 100cc Hero commuters to come with a front disc brake, something that rivals from Honda and Bajaj do not offer. 

Hero Passion+ Disc variant launched at Rs 84,128

Hero Passion front right side static in studio

Hero MotoCorp has added a new variant to its premium 100cc commuter, the Passion+, which comes with a front disc brake. The Passion Disc+ costs Rs 84,128 (ex-showroom, Delhi), making it the most expensive of all the 97.2cc Hero machines spanning the Splendor+, HF and Passion+ brands.

  1. Has a Bluetooth-compatible fully digital display
  2. Weighs 116 kilos, 1kg more than Drum variant 
  3. Available in four colours, claimed 71kpl fuel economy

The Passion+ is powered by Hero’s venerable 97.2cc, air-cooled, single-cylinder ‘sloper’ engine making the same 8hp at 8,000rpm and 8.05Nm of torque at 6,000rpm. This engine is mated to a 4-speed gearbox and is nestled within a simple tubular steel cradle frame that is suspended by a slim telescopic fork and twin shock absorbers – hardware that’s par for the course in the segment. This engine comes with Hero’s fuel-saving i3s start/stop technology and the company claims a certified fuel economy figure of 71kpl. Considering our past experience with Hero commuter machines, achieving this figure should be possible with some careful and gentle riding.

Hero Passion+ digital display

The Passion+ Disc variant comes with a 240mm disc brake at the front, replacing the Drum variant’s 130mm drum brake. This change should result in more surefooted braking performance consistently on the Passion+. Another change on the Disc variant compared to the lower Drum variant is that it comes with a fully digital display that is also Bluetooth enabled bringing in functions like call and SMS Alerts, should you choose to pair your smartphone to it. This display also shows the rider useful information such as a real time mileage indicator (RTMI), service reminders and a low fuel warning light. The Passion+ also has the side stand cut-off feature, which cuts the engine should you put the side stand down while a gear is engaged. Hero’s 100cc commuters also have a small storage cubby above the engine complete with a USB charging port – a rather practical addition.

It is available in the same 4 colours as the Drum variant – red, blue, black and grey – albeit with revised graphics. The Passion+ has always been the premium model in Hero’s 100cc lineup, sitting above the HF and Splendor+ ranges and this Disc variant is the most expensive of all of them. At Rs 84,128, the Passion+ Disc costs Rs 3,800 more than the Drum variant. This and the Splendor+ XTEC Disc are the only two 100cc Hero commuters to come with a front disc brake, something that rivals from Honda and Bajaj do not offer. 

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

An image depicting the concept that diabetes is a manageable condition

Healthy Lifestyle for Diabetes: खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खान-पान के कारण आज के समय में मधुमेह (डायबिटीज) आज एक ऐसी बीमारी बन चुका है जो उम्र और देश की सीमाओं को लांघकर हर घर में पैर पसार रहा है। दुनिया भर में इसके मरीजों की संख्या डराने वाली रफ्तार से बढ़ रही है। इस साइलेंट किलर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आज कई प्रकार की संस्थायें इस दिशा में काम कर रही है।ALSO READ: health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार

 

अगर आप या आपके परिवार में कोई इस समस्या से जूझ रहा है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव और आपके किचन में मौजूद ये 10 आसान देसी उपाय आपकी शुगर को हमेशा कंट्रोल में रख सकते हैं। 

 

आइए जानते हैं डायबिटीज से बचाव के 10 आसान और प्राकृतिक उपाय

 

शुगर को जड़ से कंट्रोल करने के 10 अचूक और सरल उपाय

 

1. जामुन का सीजनल जादू: जामुन को 'डायबिटीज के मरीजों का खास फल' कहा जाता है। इसका गूदा, रस और छाल शुगर को बढ़ने नहीं देते।

 

2. जादुई 'जवारे': गेहूं के छोटे-छोटे पौधों (जवारे) का रस निकालकर रोज सुबह-शाम आधा कप पिएं। इसे 'ग्रीन ब्लड' कहा जाता है। जवारे का रस प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है।

 

3. करेले का कड़वा सच: करेले का जूस इंसुलिन की तरह काम करता है। नए रिसर्च बताते हैं कि उबले हुए करेले का पानी पीने से भी ब्लड शुगर लेवल बहुत तेजी से सामान्य होता है।

 

4. जामुन की गुठली का पाउडर: जामुन खाने के बाद उसकी गुठली फेंकें नहीं। सुखाकर चूर्ण बना लें। इसमें मौजूद 'जाम्बोलिन' तत्व स्टार्च को शुगर में बदलने से रोकता है। सुबह-शाम 3 ग्राम पानी के साथ लें।

 

5. मेथी दाने का चमत्कार: मेथी दाना पुरानी से पुरानी डायबिटीज को काबू कर सकता है। मेथी दाने का चूर्ण बना लें और रोज सुबह खाली पेट दो चम्मच पानी के साथ फांक लें।ALSO READ: Health tips: स्वस्थ जीवन के लिए 10 सरल और असरदार उपाय

 

6. गाजर और पालक की जुगलबंदी: डायबिटीज के कारण अक्सर आंखें कमजोर होने लगती हैं। इससे बचने के लिए गाजर और पालक का मिक्स जूस नियमित रूप से पिएं।

 

7. भूख का बेस्ट पार्टनर 'खीरा': शुगर के मरीजों को थोड़ी-थोड़ी देर में भूख लगती है। ऐसे में बार-बार भारी खाना खाने के बजाय खीरा खाएं। यह पेट भी भरेगा और शुगर भी नहीं बढ़ाएगा।

 

8. शलजम और हरी सब्जियां: खाने में शलजम की सब्जी या सलाद शामिल करें, यह ब्लड शुगर को घटाता है। इसके अलावा लौकी, तरोई, परवल और पपीता ज्यादा खाएं।

 

9. नींबू पानी से बुझाएं प्यास: डायबिटीज में बार-बार तेज प्यास लगना आम है। सादे पानी की जगह पानी में नींबू निचोड़कर पिएं, इससे बार-बार प्यास लगने की समस्या शांत होगी।

 

10. नीम, आंवला और गुड़मार का फॉर्मूला: रोज सुबह 2 चम्मच नीम का रस या 4 चम्मच आंवले का रस लें। आयुर्वेद में 'गुड़मार' की पत्तियों का काढ़ा भी शुगर के लिए रामबाण माना गया है।

 

गोल्डन टिप: सबसे जरूरी बात, ये सारे नुस्खे तभी काम करेंगे जब आप अपनी आदतों को सुधारेंगे। रोज कम से कम 30 मिनट तेज कदमों से चलें यानी ब्रिस्क वॉक करें, मीठे और जंक फूड से तौबा करें और एक्टिव रहें। बस, फिर देखिए आप कैसे मुस्कुराते हुए डायबिटीज की जंग जीत लेंगे!

 

मधुमेह एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूकता ही मधुमेह का सबसे बड़ा बचाव है।

 

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अब गोवा में भी चलेगी वॉटर मेट्रो, 2000 करोड़ का मेगा प्लान, बदलेगा टूरिज्म का अंदाज और मिलेगा मैरीटाइम प्रोजेक्ट्स का तोहफा

पणजी: गोवा के पर्यटन और बुनियादी ढांचे को एक नया आयाम मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने गोवा के मैरीटाइम सेक्टर (समुद्री क्षेत्र) को बढ़ावा देने और वहां एक अत्याधुनिक वॉटर मेट्रो सिस्टम शुरू करने के लिए 2000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की योजना तैयार की है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को गोवा में इस बड़े मेगा प्लान का ऐलान किया है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने क्या बड़े ऐलान किए?

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की उपस्थिति में नए कैप्टन ऑफ पोर्ट्स भवन का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस बड़े प्रोजेक्ट की जानकारी साझा की। केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि ‘मैं विशेष रूप से गोवा सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं। हमारे मंत्रालय की तरफ से हमने आने वाले दिनों में गोवा में मैरीटाइम सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 2000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लाने का फैसला किया है।’

गोवा में वॉटर मेट्रो को लेकर क्या है तैयारी?

गोवा आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के सफर को और अधिक सुगम व आधुनिक बनाने के लिए सरकार की योजना राज्य में वॉटर मेट्रो सिस्टम शुरू करने की है। सोनोवाल ने बताया कि सरकार लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गोवा में वॉटर मेट्रो सिस्टम शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा उद्घाटन किए गए नए कैप्टन ऑफ पोर्ट्स भवन को केंद्रीय मंत्री ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इस भवन के डिजाइन को बेहद सोच-समझकर जहाजों से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। यह नया भवन गोवा के समृद्ध इतिहास और उसकी समुद्री विरासत को दर्शाता है।

विकास भी, विरासत भी के दृष्टिकोण पर काम

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पहल के जरिए सरकार ने गोवा की समुद्री विरासत को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसमें वो हमेशा कहते हैं कि विकास भी, विरासत भी यानी विकास के साथ-साथ विरासत का भी संरक्षण।

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योगी सरकार की शादी अनुदान योजना: OBC परिवारों की 5,000 से ज्यादा बेटियों को मिला ₹20,000 का लाभ

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए राहत का मजबूत आधार बनती जा रही हैं। खासतौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के गरीब परिवारों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना बेटियों की शादी में आर्थिक सहारा बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही इस योजना का सकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है।

अब तक 5 हजार से ज्यादा ओबीसी बेटियों को शादी अनुदान योजना का लाभ मिल चुका है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं तेजी से जमीनी स्तर पर पहुंच रही हैं और जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध हो रही है।

 

2026-27 में 1 लाख से अधिक लोगों को लाभ देने का लक्ष्य

 

दरअसल गरीब परिवारों के लिए बेटी की शादी हमेशा एक बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती रही है। ऐसे में योगी सरकार की शादी अनुदान योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 लाख 5 हजार लोगों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसमें शुरुआती महीनों में ही 5032 लोगों को लाभान्वित किया जा चुका है। कुल आवेदकों में 4178 ऐसे भी शामिल हैं, जिन्होंने मार्च में शादी की थी और उसी माह आवेदन किया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 लाख 16 हजार से अधिक आवेदकों को इस योजना के तहत सहायता प्रदान की गई थी।

 

बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद

 

इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को दिया जाता है, जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये तक है। साथ ही योजना के लिए यह भी अनिवार्य है कि लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष हो। योगी सरकार ने योजना के क्रियान्वयन में संवेदनशील वर्गों को प्राथमिकता देने का भी सराहनीय कार्य किया है। विकलांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को आवेदन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाती है। 

 

लाभार्थियों को समय पर मिल रही धनराशि

 

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने शादी अनुदान योजना की सफलता पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि यह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन रही है। आवेदक को 20 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी है और लाभार्थियों को समय पर मदद मिल रही है। प्रमुख सचिव ने बताया कि यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग देकर बड़ी सहायता कर रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार पिछड़े वर्ग के उत्थान और विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। Edited by : Sudhir Sharma

100 से ज्यादा महिला क्रिकेटर्स है Trolling से परेशान, ICC के बचाव कार्यक्रम से जुड़ी

 

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के सोशल मीडिया मंचों पर ‘Trolling’ के बचाव से जुड़े ‘Player Protection Programme’ में 100 से अधिक महिला क्रिकेटरों ने पंजीकरण कराया है।ICC ने इसके लिए कृत्रिम मेधा Artificial Intelligence से संचालित ‘Moderator’ Freedom to hear के साथ साझेदारी की है जिसने मौजूदा महिला T20I विश्वकप के दौरान लगभग 60,000 ‘हानिकारक सामग्री’ को हटाया है।ICC ने एक विज्ञप्ति में कहा कि टूर्नामेंट की शुरुआत से अब तक 50 से अधिक नए खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है।

बयान में कहा गया है, ‘‘यह सेवा ICC के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। ICC Women T20I World Cup 2026 में भाग ले रही 12 में से सात टीम की खिलाड़ी इससे जुड़ी हैं। इसके अलावा अंपायर और प्रसारकों ने भी पंजीकरण कराया है।’’

टी20 विश्व कप के पहले सप्ताह के बाद इस ‘टूल’ ने लगभग 250,000 टिप्पणियों की समीक्षा की और लगभग 60,000 हानिकारक सामग्री को हटा दिया।ICC ने कहा, ‘‘बार-बार अपराध करने वालों में से 2,000 से अधिक लोगों की गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिए गए और 370 उपयोगकर्ताओं को ब्लॉक कर दिया गया।’’

भारत की बाएं हाथ की स्पिनर राधा यादव ने कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में कहा, ‘‘ सोशल मीडिया मेरे लिए दुनिया भर में दोस्तों, परिवार और प्रशंसकों के साथ बातचीत करने का अच्छा मंच साबित हो सकता है लेकिन यह ट्रोलिंग के कारण विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों के लिए मुसीबत भी बन गया है।’’उन्होंने कहा, ‘‘‘इस बारे में खुलकर बात करना और समस्या का समाधान ढूंढना महत्वपूर्ण है, इसीलिए मैंने आईसीसी के ‘प्लेयर प्रोटेक्शन प्रोग्राम’ में पंजीकरण कराया।’’