यूपी की नई स्टार्टअप पॉलिसी का एलान, स्टार्टअप मासिक भत्ता 17500 रुपए से बढ़कर 20000 रुपए किया गया

उत्तर प्रदेश सरकार ने नई स्टार्टअप पॉलिसी 2026 और नए स्टार्टअप मिशन को मंजूरी दी है। इसके तहत स्टार्टअप्स के मासिक भत्ते से लेकर सीड फंडिंग तक को बढ़ाया गया है। लखनऊ जिले के छोटे से गांव भुलभुलपुर में 10 हजार रुपए की छोटी सी लागत से अंजलि सिंह ने एकेले ही जूट फॉर लाइफ नाम से स्टार्टअप शुरू किया था,जो अब 5 करोड़ के टर्न-ओवर तक पहुंच चुका है। इस सफर में अंजलि ने अपने साथ 250 महिलाओं को रोजगार का मौका भी दिया है। यूपी में ऐसे ही स्टार्टअप्स के लिए माहौल बनाने के मकसद से यूपी सरकार ने नई स्टार्टअप्स पॉलिसी बनाई है।

उत्तर प्रदेश सरकार की नई नीति के तहत स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती मदद भत्ते को 17,500 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है और ये रकम अब 1 साल की बजाय 2 साल तक मिलेगी। इसी के तरह प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में इसे 50 लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकेगा।

इसके साथ ही स्वतंत्र स्टार्टअप मिशन का भी गठन किया गया है, जिसकी कमान मुख्य सचिव के पास होगी। इसमें प्रति वर्ष 2 लाख रुपये तक का क्लाउड रिम्बर्समेंट और 1,000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड भी रखा गया है। AI और Deep-tech जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। जूट फॉर लाइफ जैसे स्टार्टअप को सफलता तक पहुंचाने वाली अंजलि मानती हैं कि यूपी सरकार की नई स्टार्ट अप नीति छोटे उद्यमियों के लिए वरदान साबित हो सकती है।

खास बात यह है कि इस नीति में AI,मशीन लर्निंग,रोबोटिक्स और एयरोस्पेस जैसे डीप-टेक क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन क्षेत्रों की बड़ी परियोजनाओं को ₹100 करोड़ तक की पेशेंट कैपिटल मिल सकती है। नई नीति के तहत यूपी स्टार्टअप मिशन को एक स्वायत्त संस्था के रूप में मंजूरी दी गई है, जो अब यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन की जगह स्टार्टअप्स से जुड़े कामकाज को संभालेगी और जिसकी अगुवाई मुख्य सचिव करेंगे।

नई नीति में महिला उद्यमियों,दिव्यांगजन,ट्रांसजेंडर उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान बरकरार रखे गए हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता रहेगा, ताकि राज्य के पिछड़े इलाकों में भी उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके।

यह स्टार्टअप नीति राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के लक्ष्य से सीधे जुड़ी हुई है। 2030 के लिए निर्धारत इस लक्ष्य में योगी सरकार स्टार्टअप्स की अहम भूमिका देख रही है।

 

 

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वीरांगना रानी अवंतीबाई ने देश की रक्षा व आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर किया : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi said that brave queen Avantibai sacrificed her all for defense and freedom of country

– मुख्यमंत्री योगी ने बांदा में वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की भव्य प्रतिमा का किया अनावरण

– मुख्यमंत्री ने कहा- 'जब अच्छे नेता चुने जाते हैं, तब महापुरुषों को मिलता है सम्मान

– योगी ने कहा- 'वीरों-वीरांगनाओं के बलिदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है यह सम्मान

Chief Minister Yogi Adityanath : वीरांगना रानी अवंती बाई ने भारत की आन-बान-शान की रक्षा और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान और त्याग आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को बांदा जिले के कालू कुआं चौराहे पर वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की भव्य प्रतिमा का अनावरण करते हुए अपने संबोधन में यह कहा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण करना उनके लिए गौरव का विषय है। सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के वीरों-वीरांगनाओं और राष्ट्र नायकों को बांदा के महत्वपूर्ण स्थलों पर सम्मान देकर वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए एक नया आदर्श प्रस्तुत किया है।

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गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लगभग तीन वर्ष पहले भी उन्हें बांदा में दो महत्वपूर्ण प्रतिमाओं के अनावरण का अवसर मिला था। आज वीरांगना अवंती बाई की प्रतिमा के अनावरण से यह गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि बांदा का सिटी डेवलपमेंट प्लान, विकसित होती सड़कें और अन्य विकास कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि योजनाबद्ध विकास किस प्रकार किसी शहर की पहचान बदल सकता है।

 

मातृभूमि की रक्षा के लिए दिया बलिदान

मुख्यमंत्री ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पूरे देश में आजादी की प्रबल इच्छा थी। बैरकपुर में मंगल पांडे ने क्रांति की चिंगारी जलाई, मेरठ में धन सिंह गुर्जर ने उसका नेतृत्व किया, कानपुर के बिठूर में तात्या टोपे ने उसे आगे बढ़ाया और झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई ने वीरता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी महान परंपरा में वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी ने भी राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, संघर्ष और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। मुख्यमंत्री ने प्रतिमा स्थापना से जुड़े सभी लोगों का अभिनंदन करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में राष्ट्रनायकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करते हैं।

 

वीरांगना अवंती बाई को किया नमन

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कि जब अच्छे नेता चुने जाते हैं, तो महापुरुषों को ऐसे ही सम्मान मिलता है। यह सम्मान उन नायकों-नायिकाओं और वीरों-वीरांगनाओं के प्रति कृतज्ञता है, जिनके लिए राष्ट्रधर्म ही सर्वोपरि था और उसके लिए बलिदान दिया। इसी परम्परा में वीरांगना अवंती बाई लोधी का नाम भी आता है। मुख्यमंत्री

 ने उनकी स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए विनम्र सम्मान अर्पित किया।

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इस अवसर पर जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद, पीडब्ल्यूडी के राज्यमंत्री कुंवर बृजेश सिंह, बांदा विधायक प्रकाश द्विवेदी, नरैनी विधायक ओममणि वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष कल्लू राजपूत समेत अन्य भाजपा नेता व गणमान्य उपस्थित रहे।

UP के मजदूरों को बड़ी राहत, अब हर दिन मिलेंगे कम से कम ₹300, 125 दिन रोजगार की भी गारंटी

उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस नई योजना के तहत अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी।

इस योजना के समुचित कार्यान्वयन के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। करीब 20 वर्षों तक ग्रामीण रोजगार की रीढ़ रहे मनरेगा की जगह अब यह नया ढांचा ले रहा है। यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, रोजगार बढ़ाएगा और गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देगा।

 

यूपी के ग्रामीण परिवारों को होगा फायदा

 

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्यों में शामिल है, जहां लाखों परिवार रोजगार के लिए मनरेगा पर निर्भर रहे हैं। नई योजना लागू होने के बाद यूपी के ग्रामीण मजदूरों को कई बड़े लाभ मिलने वाले हैं। अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों के बजाय 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी। साथ ही नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण मजदूरों को सीधा फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय औसत मजदूरी 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। योगी सरकार ने बढ़ी हुई मजदूरी देने के लिए सारे प्रबंध पहले से कर रखे हैं। 

 

वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी 

 

मनरेगा की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव जियोस्पेशियल प्लानिंग को लेकर देखा जा रहा है। पहले जहां स्थानीय मांग के आधार पर कार्यों को मंजूरी दी जाती थी, वहीं अब गांवों में सैटेलाइट डेटा, भूमि रिकॉर्ड और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन्हीं योजनाओं के अनुसार तय होगा कि सरकारी धन कहां और किस कार्य पर खर्च किया जाएगा। वहीं अब पहले की तरह केवल मांग के आधार पर रोजगार नहीं मिलेगा। प्रदेश के गांवों में पहले से तैयार विकास योजनाओं के आधार पर काम तय किए जाएंगे।

 

निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी 

 

अब यूपी के गांवों में विकास कार्यों की योजना और निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी। इससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। इसमें सड़क निर्माण, सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण परियोजनाएं और स्थायी सामुदायिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। अब विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं को आपस में जोड़कर परियोजनाओं को लागू किया जा सकेगा। इससे कार्यों के दोहराव को रोका जा सकेगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों की दक्षता में सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री योगी ने अपने हाथों से बच्चों को परोसा भोजन, किताब-कॉपी पाकर खिल उठे नौनिहालों के चेहरे

Chief Minister Yogi served food to children with his own hands

– मुख्यमंत्री योगी ने सहारनपुर के 5 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का किया सम्मान

– मुख्यमंत्री ने नन्हे-मुन्नों का कराया अन्नप्राशन, कक्षाओं में जाकर बच्चों से किया संवाद

– प्रदर्शनी का अवलोकन कर मुख्यमंत्री योगी ने जाना बच्चों का नवाचार

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों किताब-कॉपी, बैग, स्टेशनरी किट पाकर नौनिहालों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि स्कूल आओगे, इस पर सभी बच्चों ने मुस्कुराकर स्कूल आने का वादा किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर बच्चों के नवाचार को भी जाना। मुख्यमंत्री ने मंच से प्रदर्शनी में शामिल बच्चों के आत्मविश्वास की भी सराहना की। परिषदीय विद्यालयों की बच्चियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी स्थल और मंच पर बच्चों से संवाद किया तथा उन्हें चॉकलेट भी दीं। 

 

भोजन मंत्र के उपरांत बच्चों ने किया भोजन 

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने हाथ से भोजन परोसा। इसमें प्रदेश सरकार के मंत्रियों व अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री योगी का साथ दिया। बच्चों ने भोजन ग्रहण करने से पहले मंत्रपाठ किया। प्रदेश के मुखिया को अपने लिए भोजन परोसते देखकर बच्चे आह्लादित हो उठे।

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मुख्यमंत्री योगी ने नन्हे-मुन्नों से किया परिचय

कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री योगी क्लासरूम पहुंच गए। उन्होंने यहां एक-एक कर सभी बच्चों से नाम पूछा और उनसे बातचीत की। बच्चे भी मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर खुशी से उनसे बातचीत करते रहे। बच्चों ने मुख्यमंत्री के प्रश्नों के बालसुलभ निश्छल उत्तर दिए तो सभी खिलखिला उठे। मुख्यमंत्री ने बच्चों की प्रशंसा कर उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें चॉकलेट भी दीं।

 

बच्चों का कराया अन्नप्राशन 

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आए नन्हे-मुन्नों का अन्नप्राशन भी कराया। विपरीत मौसम के कारण क्लास रूम में ही यह आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने बच्चों को चंदन/टीका लगाकर खीर खिलाई और उपहारस्वरूप उन्हें खिलौने भी दिए। जिन बच्चों का अन्नप्राशन हुआ, वे मुख्यमंत्री की गोद में भी खेले।

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मुख्यमंत्री के हाथों 5 बच्चों को मिली कॉपी-किताबें, बैग व स्टेशनरी किट 

साक्षी – कक्षा-1, पीएम श्री विद्यालय, बडढ़ा खेड़ा विकास क्षेत्र सरसावा 

आरव – कक्षा-1, मुख्यमंत्री अभ्युदय विद्यालय, सढौली हरिया विकास क्षेत्र रामपुर मनिहारान

लव्यांश – कक्षा-1, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इस्माइलपुर विकास क्षेत्र पुंवारका

अस्मिता – कक्षा-1, प्राथमिक विद्यालय, पानसर विकास क्षेत्र मुजफ्फराबाद

रविंद्र – कक्षा-4, पीएम श्री विद्यालय, दलहेडी विकास क्षेत्र नानौता 

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5 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का सम्मान 

मुख्यमंत्री योगी ने सहारनपुर के 5 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का भी सम्मान किया। सम्मान पाने वालों में निम्न प्रधानाध्यापक शामिल रहे।
 

इंदु बेस – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुतुबपुर लबडोला विकास क्षेत्र नागल

कुलदीप अरोड़ा – प्रधानाध्यापक – प्राथमिक विद्यालय, सरसावा नंबर-1 विकास क्षेत्र सरसावा

अश्वनी कुमार शर्मा – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – प्राथमिक विद्यालय, तबर्रकपुर विकास क्षेत्र गंगोह

राज सिंह – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – प्राथमिक विद्यालय, घान्ना खंडी विकास क्षेत्र पुंवारका

मोहिनी पाल – इंचार्ज प्रधानाध्यापक – कंपोजिट विद्यालय, खिड़का जुनारदार विकास क्षेत्र मुजफ्फराबाद 

अयोध्या दान प्रकरण में एसआईटी जांच की समय सीमा बढ़ाई, 15 जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

Deadline extended for SIT probe into Ayodhya pilgrimage site donation matter

Donation controversy in Ayodhya : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की समय-सीमा 15 जुलाई तक बढ़ा दी है। मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन छानबीन के लिए एसआईटी ने मुख्यमंत्री से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने एसआईटी को आगामी 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी इस प्रकरण में हर पहलू की सघनता और निष्पक्षता से जांच करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।

दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। गत 23 जून को एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन गृह विभाग को सौंपा था, जिसमें कठोर संस्तुतियां की गई थीं।

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इन संस्तुतियों के आधार पर गत 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

YEIDA Master Plan: जेवर एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेगा हाथरस का नया 10000 एकड़ का इंडस्ट्रियल हब, हींग से EV तक सबको बूस्ट, देखें पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस को बड़ा औद्योगिक और रोजगार केंद्र बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। योगी सरकार, हाथरस को इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के साथ हजारों रोजगार पैदा करने वाला डेस्टिनेशन बनाने की योजना पर काम कर रही है। यमुना एक्सप्रेसवे के फेज-2 विकास के तहत ‘महायोजना/मास्टर प्लान 2041’ के अंतर्गत ‘हाथरस अर्बन सेंटर’ को एक हाईटेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बता दें कि, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की मास्टर प्लान 2041 योजना के तहत हाथरस में करीब 10 हजार एकड़ में एक आधुनिक ग्रीनफील्ड अर्बन सेंटर विकसित किया जाएगा। बता दें कि, यह परियोजना जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी होगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उद्योगों व रोजगार को नई रफ्तार देगी।

50 से ज्यादा गांवों में विकसित होगी नई सिटी

बता दें कि, यह हाईटेक सिटी हाथरस और सासनी तहसील के 50 से अधिक गांवों में लगभग 4,000 हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) क्षेत्र में विकसित की जाएगी। यह अलीगढ़, मथुरा और आगरा के साथ विकसित किए जा रहे चार प्रमुख शहरी केंद्रों में से एक होगी। योजना का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए जीआईएस तकनीक की मदद ली जा रही है। इसके लिए आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरे क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरियाली और खुले स्थानों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।

उद्योग और रहने की सभी सुविधाएं होंगी

यह परियोजना एक आधुनिक औद्योगिक और आवासीय शहर के रूप में विकसित होगी। इसमें उद्योग, आवास, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन जोन के लिए अलग-अलग क्षेत्र बनाए जाएंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और कई प्रमुख राजमार्गों से अच्छी कनेक्टिविटी होने के कारण यह इलाका उद्योग लगाने के लिए आकर्षक केंद्र बनेगा। इसे आगरा के सैटेलाइट टाउन के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जिससे आगरा पर बढ़ता औद्योगिक दबाव कम हो सके।

हींग, गुलाल और EV उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

बता दें कि, हाथरस पहले से ही 10 हजार से अधिक MSE इकाइयों का केंद्र है। नई परियोजना से यहां के स्थानीय उद्योगों को और मजबूती मिलेगी। ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)’ योजना के तहत हाथरस की प्रसिद्ध हींग और गुलाल बनाने वाले कारोबारियों को आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, होजरी, कांच के मोती, पीतल के आभूषण, मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के पुर्जों के लिए विशेष औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। आगे चलकर मेडिकल उपकरण, सर्जिकल डिवाइस और पावर ग्रिड मशीनरी जैसे आधुनिक उद्योगों को भी यहां लाने की योजना है।

डीपीआर और जमीन अधिग्रहण का काम शुरू

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। परियोजना पूरी होने के बाद बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और हाथरस पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो जाएगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस दौरे में 548 करोड़ रुपये से अधिक की 143 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों को घरों की चाबियां भी सौंपीं।

राम मंदिर: सात्विकता, सुशासन और सनातन की अग्निपरीक्षा

The image shows a view of the grand temple of Lord Shri Ram in Ayodhya Dham

अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण केवल शिल्पकला का दर्शन नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की सदियों पुरानी अगाध आस्था, तप और संकल्प की पूर्णाहुति है। इस पावन काज में देश-विदेश के रामभक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई का अंश समर्पित किया है।ALSO READ: अयोध्या के श्री रामलला मंदिर पर लोभ का साया

ऐसे में, यदि मंदिर परिसर या दान राशि के प्रबंधन में किसी भी स्तर पर कोई विसंगति या मानवीय भूल सामने आती है, तो सनातनी समाज का उद्वेलित होना स्वाभाविक है। किंतु, इस संवेदनशील घटनाक्रम पर जिस प्रकार की विपक्ष की राजनीति शुरू हुई है, उसने एक बार फिर साबित किया है कि देश के विरोधी दलों के लिए जन-आस्था केवल चुनावी लाभ-हानि का जरिया मात्र है।

 

देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार का तरीका अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय रहा है। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।

सरकार ने केवल बातें नहीं की, बल्कि त्वरित कार्रवाई से जीरो टॉलरेंस की नीति को धरातल पर उतार कर दिखाया। जैसे ही 5 जून को मामला सामने आया, सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया। इस जांच दल ने बिना किसी दबाव के, पूरी निष्पक्षता से मात्र 10 दिनों में ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। 

 

इसका ही परिणाम है कि 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज कर, आठ मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है और बाकी संदिग्धों से भी कड़ी पूछताछ जारी है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि वर्तमान योगी शासन तंत्र में चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, प्रभु राम के काज में और सनातन की सात्विकता के साथ खिलवाड़ करने वाले को छोड़ा नहीं जाएगा।

 

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गरिमामय पक्ष श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, चंपत राय जी और अनिल मिश्रा जी का निर्णय रहा। इन दोनों विभूतियों ने अपना संपूर्ण जीवन राम काज और सनातन धर्म की सेवा में समर्पित कर दिया है। विशेषकर चंपत राय जी के उस संघर्ष को देश कभी नहीं भूल सकता, जिन्होंने बिना रुके, बिना थके पत्थरों की नक्काशी से लेकर अदालती दस्तावेजों को सहेजने तक, मंदिर निर्माण के हर मोर्चे पर एक सच्चे सेनापति की तरह काम किया। जन-जन उन्हें आदर से राम जी का पटवारी कहता है। 

 

जब जांच की बात आई, तो उन्होंने भारतीय लोक-मर्यादा की श्रेष्ठ परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया। उनका यह इस्तीफा किसी दोष की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का वह उत्कृष्ट उदाहरण है जो त्रेतायुग की न्यायप्रियता की झलक है। उन्होंने पद इसलिए छोड़ा ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी प्रभाव के पूरी हो सके। ऐसे तपस्वी व्यक्तित्वों पर राजनीतिक लाभ के लिए कीचड़ उछालना, उनकी जीवनभर की तपस्या का अपमान करना है।

 

दूसरी ओर, विरोधी दलों का रवैया हमेशा की तरह निराशाजनक और सनातन विरोधी ही है। इतिहास गवाह है कि यह वही विपक्ष है जिसने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के अस्तित्व को नकारने के लिए वकीलों की भारी-भरकम फौज खड़ी कर दी थी, रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, कदम-कदम पर रोड़े अटकाए और राम जी का निमंत्रण सिरे से खारिज किया था। आज वही लोग अचानक दान की पारदर्शिता के सबसे बड़े पैरोकार बनने का ढोंग कर रहे हैं। 

 

वास्तव में, विपक्ष को इस संवेदनशील मामले में कोई जनहित या आस्था की चिंता नहीं है; उन्हें तो बस आगामी चुनावों में भुनाने के लिए एक राजनीतिक मुद्दा मिल गया है। इनका असली एजेंडा सनातनी समाज की उस अटूट एकता को भंग करना है, जो मंदिर निर्माण के बाद अभूर्व रूप से सुदृढ़ हुई है। वे भ्रामक आंकड़े फैलाकर और श्रद्धालुओं के मन में संशय के बीज बोकर इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण को कमजोर करना चाहते हैं। देश की जनता को यह समझना होगा कि जो दल कभी सनातन को मिटाने की बात करने वालों के साथ खड़े होते हैं, उनकी सहानुभूति केवल एक छलावा और नया चुनावी पैंतरा मात्र है।

 

स्मरण रखना होगा कि आज का दौर केवल जमीनी राजनीति का नहीं, बल्कि सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉर) का भी है। ऐसे समय में प्रत्येक सनातनी का यह परम कर्तव्य है कि वह सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से पहले विवेक का उपयोग करे। किसी भी अपुष्ट या सनसनीखेज खबर को बिना जांचे आगे फॉरवर्ड न करें, क्योंकि यह श्री राम मंदिर की वैश्विक छवि को धूमिल करने का एक सोचा-समझा प्रयास भी हो सकता है। हमें केवल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और सरकारी जांच एजेंसियों के आधिकारिक बयानों व तथ्यों पर ही विश्वास करना चाहिए। यहां कहने का अर्थ यह नहीं कि चढ़ावे में हुई किसी गड़बड़ी पर हम आंखें मूंद लें, बल्कि हमारी डिजिटल सतर्कता ही विरोधियों के दुष्प्रचार को ध्वस्त करेगी।

 

उत्तर प्रदेश सरकार ने दोषियों को पकड़कर अपना काम पूरी निष्पक्षता से किया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कुछ कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। मंदिर को मिलने वाले हर छोटे-बड़े दान का ब्लॉकचेन या अत्याधुनिक रीयल-टाइम डिजिटल ऑडिट होना चाहिए, ताकि संपूर्ण वित्तीय लेखा-जोखा एक पारदर्शी और सुरक्षित प्रणाली के तहत रहे।

इसके साथ ही, मंदिर परिसर और सुरक्षा घेरे में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस और एआई-संचालित सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग अनिवार्य किया जाए, जिससे किसी भी मानवीय चूक की गुंजाइश शेष न बचे। ट्रस्ट के दैनिक कार्यों और वित्तीय लेन-देन की समय-समय पर समीक्षा के लिए तिरुपति, सांवरिया सेठ या वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर देश के शीर्ष व ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति भी बनाई जा सकती है, जो इस व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ करे।

 

प्रभु श्री राम का मंदिर भारत की आत्मा और हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। इसकी नींव हमारे पुरखों के सदियों के संघर्ष और करोड़ों भक्तों के अटूट विश्वास पर टिकी है। योगी सरकार की कड़ी और पारदर्शी कार्रवाई ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि न्याय होकर रहेगा। अब यह प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है कि वह राजनीतिक गिद्धों की अफवाहों पर ध्यान न देकर व्यवस्था पर भरोसा रखे। हमारी एकजुटता ही उन ताकतों को सबसे करारा जवाब होगी जो आस्था के बहाने सनातनियों को बांटना चाहती हैं; क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है, पर पराजित नहीं।


(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)ALSO READ: त्रेता से लेकर कलयुग तक कहानी चरण पादुका की

मौत पर राजनीति न करें अखिलेश, अलीगंज की घटना उनके कुकृत्यों का नतीजा : ब्रजेश पाठक

Deputy CM Brajesh Pathak targets Akhilesh Yadav regarding Aliganj case

– डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव को दी मौत पर सियासत न करने की सलाह

– कहा- 15 लोगों की जान गई और अखिलेश एसी कमरे में बैठकर कर रहे राजनीति 

– प्लॉट आवंटन से लेकर बिल्डिंग निर्माण और नक्शा पास कराने में शामिल रही अखिलेश की मशीनरी 

– सील होने के बावजूद आखिर किस दबाव में अखिलेश सरकार ने ध्वस्तीकरण का आदेश रद करने का काम किया 

– सीएम योगी हर पल ले रहे घटना पर अपडेट, चार अफसर हो चुके हैं सस्पेंड, एसआईटी जांच में दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई 

Deputy CM Brajesh Pathak : अलीगंज अग्निकांड पर विपक्ष द्वारा राजनीति किए जाने पर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तीखा हमला बोला। उन्होंने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा है कि यह हादसा आपकी सरकार के कुकृत्यों का नमूना है। उन्होंने कहा कि इस हृदयविदारक घटना में 15 लोगों की जान गई है और आप एसी कमरे में बैठकर राजनीति कर रहे हैं। 

 

ब्रजेश पाठक ने अलीगंज अग्निकांड को अखिलेश सरकार के भ्रष्टाचार का नमूना बताते हुए कहा कि प्लॉट आवंटन से लेकर इस अवैध बिल्डिंग का निर्माण का कार्य आपकी ही सरकार के दौरान हुआ था। आपने इसे सील करके सील खोलने का काम किया था। ध्वस्तीकरण के आदेश को रद करने का काम किया था। ये दर्दनाक घटना आप के ही सरकार के कुकृत्यों का यह नतीजा है। 

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डिप्टी सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सारे कार्यक्रम रद करके स्वयं तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। पीड़ित परिवारों से मिले और उन्हें न्याय दिलाने के लिए रात में ही कार्रवाई शुरू कर दी गई। चार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है।

 

डिप्टी सीएम ने कहा कि जितने भी लोग इस घटना में जवाबदेह पाए जाएंगे सभी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री जी ने एसआईटी का गठन भी कर दिया है। डिप्टी सीएम ने कहा कि जिन लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोया है, उनके दर्द को समझते हुए सरकार हर संभव मदद और न्याय सुनिश्चित करेगी।

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अखिलेश सरकार में कैसे मिली भवन निर्माण की इजाजत? 

अखिलेश सरकार के भ्रष्टाचार वाले इकोसिस्टम ने पूरे प्रदेश में ऐसी खतरनाक इमारतों को बनाने का रास्ता खोल दिया, जो आज लोगों की जान ले रही हैं। ये भवन 1980 में लॉटरी से आवंटित तो हुआ था, लेकिन असली खेल अखिलेश यादव के राज में हुआ।

 

20 अगस्त 2014 को अखिलेश सरकार ने 1992 वर्गफुट का आवासीय नक्शा पास कर दिया। 2016 में अवैध निर्माण का मुकदमा दर्ज हुआ, 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश भी आ गया। लेकिन मात्र 2 महीने बाद, 5 जुलाई 2016 को अखिलेश सरकार ने ध्वस्तीकरण का आदेश रद्द कर दिया। आखिर क्यों और किसके दबाव में?

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सैटेलाइट तस्वीरें भी सब कुछ बेनकाब करती हैं। दिसंबर 2015 में प्लॉट बिल्कुल खाली था, मगर फरवरी 2016 में निर्माण शुरू हुआ और जून 2016 तक इमारत बनकर तैयार हो गई। यानी नियम-कानून को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से नक्शा पास कराया गया, निर्माण कराया गया और सब अखिलेश सरकार की नाक के नीचे चलता रहा। क्या अखिलेश के समय किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई? क्या कोई जवाबदेही तय हुई? बिल्कुल नहीं! ये अग्निकांड अखिलेश यादव सरकार की भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।
Edited By : Chetan Gour 

बेंगलुरु में होगा ‘यूपी ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग’ का आयोजन, देश के कई दिग्गज उद्योगपति होंगे शामिल

UP Global Growth Dialogue will be organized in Bengaluru

– यूपी के विकास, उद्योग समर्थित वातावरण तथा विभिन्न सेक्टर्स में निवेश की अपार संभावनाओं पर होगी चर्चा

– निवेशकों को यूपी में आमंत्रित करेगा इन्वेस्टर रोडशो, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे अध्यक्षता 

– इन्वेस्टर रोडशो में शामिल होंगे देश के कई दिग्गज उद्योगपति 

Uttar Pradesh Global Growth Dialogue-2026 : योगी सरकार उत्तर प्रदेश को निवेशकों की पहली पसंद बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में बुधवार 24 जून को बेंगलुरु में 'उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026' के तहत इन्वेस्टर्स रोडशो का आयोजन किया जा रहा है। रोडशो की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इस आयोजन में देश के कई दिग्गज उद्योगपति भी शामिल होंगे।

 

इस आयोजन में इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी एंड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज, ग्लोबल कैपैसिटी सेंटर्स व एफडीआई पर आधारित तीन सत्र होंगे। इन सत्रों में संबंधित क्षेत्रों के दिग्गज उद्यमी अपने विचार प्रकट करेंगे। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश और व्यापार के अवसरों पर एक लघु फिल्म की स्क्रीनिंग भी होगी। 

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रोडशो का उद्देश्य सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु में निवेशकों व उद्योगपतियों के सामने उत्तर प्रदेश की विकास गाथा, निवेश अनुकूल नीतियों तथा विभिन्न सेक्टर्स में उभरते अपार व्यावसायिक अवसरों को प्रस्तुत करना है।

इस दौरान उत्तर प्रदेश के मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, सेक्टोरल पॉलिसीज, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क, इलेक्ट्रिक व्हीकल व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आदि में यूपी की प्रगति से अवगत कराते हुए निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा।

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गौरतलब है कि सिंगल विंडो सिस्टम, विशाल भूमि बैंक, स्किल्ड मैनपावर और इन्सेंटिव पॉलिसी के चलते गत 9 वर्षो में यूपी निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है।
Edited By : Chetan Gour

अयोध्या मामले में SIT ने गृह विभाग को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट

SIT submits preliminary report to Home Department in Ayodhya case

Uttar Pradesh News : अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। इस रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार की ओर से एक्शन शुरू हो सकता है।

माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर गबन और चोरी के मामलों में केस भी दर्ज कराई जा सकती है। वहीं कुछ लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। राम मंदिर एसआईटी की जांच के पहले चरण की प्रक्रिया पूरी होने और जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब कुछ नए नामों की चर्चा तेज हो गई है।

ये लोग राम जन्मभूमि में कर्मचारी नहीं हैं। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। 

Edited By : Chetan Gour