CM योगी का बड़ा बयान, सनातन संस्कृति को खत्म करना चाहती हैं कुछ ताकतें, भारत विरोधी साजिशों से किया आगाह

गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों का आह्वान किया है कि वे देश की प्रगति यात्रा में बाधा उत्पन्न करने वालों से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि हम सभी को भारत के खिलाफ होने वाली साजिशों को समझना होगा। कुछ ताकतें भारत की प्रगति यात्रा, सनातन संस्कृति एवं परंपरा को तबाह करना चाहती हैं। अपने ही समाज में कालनेमि का रूप धारण कर बैठे देशविरोधी षड्यंत्रकारियों से हम अनभिज्ञ बने रहेंगे तो अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसी स्थिति होगी। 

 

सीएम योगी बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में विगत 23 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्रों पर पुष्पार्चन करने तथा व्यासपीठ का पूजन करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे ही समाज के कुछ लोग दुनिया की उन ताकतों के प्रवक्ता बने हुए हैं, जो सनातन संस्कृति पर आघात करने में लगी हुई हैं। समाज ऐसी ताकतों व उनके प्रवक्ताओं से सतर्क रहकर अपने परिमार्जन के लिए तैयार रहेगा, तो सुखी रहेगा। समाज सुखी रहेगा तो राष्ट्र को समृद्धि के पथ पर अग्रसर होने से कोई नहीं रोक पाएगा। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत 12 वर्षों से तीव्र प्रगति कर रहा भारत अगले दो तीन सालों में दुनिया के तीन शीर्ष देशों में सम्मिलित हो जाएगा। अपनी प्रगति यात्रा में भारत ने जिन्हें पछाड़ा, उन्हें अच्छा न लगना स्वाभाविक है। कई ताकतों को भारत की प्रगति अच्छी नहीं लगती। ऐसी ताकतों ने देश में अस्थिरता, अशांति और अव्यवस्था फैलाने की साजिश शुरू कर दी है। 

 

नक्सलवाद समाप्त तो चैन से कैसे बैठेंगे इसे प्रेरित करने वाले

सीएम योगी ने कहा कि 12 वर्ष पूर्व देश के 120 जिलों में नक्सलवाद था। आज एक भी जिले में नक्सलवाद नहीं है। ऐसे में नक्सलवाद को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने वाले चैन से बैठने के बजाय दूसरे रूप में और छद्म नामों से आएंगे। मुख्यमंत्री ने रामायण कालखंड में हनुमानजी की राह रोकने वाले कालनेमि का उदाहरण देते हुए समझाया कि वर्तमान दौर के कालनेमियों से सबको सावधान रहना होगा। ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा जो भारत के खिलाफ षड्यंत्र में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भागीदार रहते हैं। समाज को एकजुट होकर हुंकार भरनी होगी कि हम देश के खिलाफ किसी भी षड्यंत्र को स्वीकार नहीं करेंगे।

 

बड़ी यात्रा में आने लगती हैं चुनौतियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जब भी अपनी एक बड़ी यात्रा पर होता है तो बड़ी चुनातियों का आना भी शुरू हो जाता है। जब श्रीराम का राजतिलक होना था तो परिवार में फूट डालकर उन्हें वनवास दे दिया गया। वनवास से लौटकर जब उन्होंने रामराज्य की स्थापना की तो माता जानकी को वनवास के लिए जाना पड़ा। महाभारत कालखंड में जब इंद्रप्रस्थ अपने वैभव पर था, तब महाभारत का शंखनाद हो गया। भारत के स्वर्णयुग में भी ऐसी स्थिति आई। चंद्रगुप्त और चाणक्य की जोड़ी के समय विश्व की 45 प्रतिशत अर्थव्यवस्था पर भारत का कब्जा था। जब हम मुग्ध हो जाते हैं तो कुछ ऐसे लोग सक्रिय हो जाते हैं, जो खुरपेंच में विश्वास करते हैं। उनका प्रयास व्यवस्था को छिन्नभिन्न करने का होता है। हमें प्रगति पर मुग्ध होने से बचना होगा, व्यवस्था को छिन्नभिन्न करने वालों से सतर्क रहना होगा।

 

सनातन की पावन धारा में आ जाते हैं विषधर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन की पावन धारा में हर मत, संप्रदाय को संरक्षण मिलता है। इसमें कुछ विषधर आकर इसे डंसने का प्रयास करते हैं। सनातन संस्कृति व परंपरा पर आघात कर भारत को अस्थिर करने वाले प्रयासों के खिलाफ हमें जागरूक होना होगा। इसमें सिर्फ स्कूली शिक्षक ही नहीं, बल्कि गुरु के रूप में रहने वाले हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा।

 

मातृशक्ति व मातृभूमि का अपमान करने वाले कठोर दंड के पात्र

सीएम योगी ने कहा कि इस देश में कई सारे लोग पश्चिम की हवा में बह गए हैं। वे दुर्गा पूजा के समय राक्षस चण्ड-मुण्ड की पूजा करेंगे। जेएनयू में उन्हें महिमामंडित करने का प्रयास करेंगे। सनातन पर्वों के आयोजनों में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करेंगे।

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, यूपी की 110 ग्राम पंचायतों में शुरू हुई आधार सेवाएं, 6 जिलों के ग्रामीणों को मिलेगी सुविधा

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अब आधार कार्ड बनवाने, उसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर या बायोमेट्रिक अपडेट कराने के लिए ग्रामीणों को शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों को डिजिटल सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी पहल की है। इसके तहत छह जिलों की 110 ग्राम पंचायतों में आधार नामांकन एवं अपडेट सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। इस व्यवस्था से अब तक 75,000 से अधिक आधार सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।

 

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना चरणबद्ध तरीके से सभी ग्राम पंचायतों तक यह सुविधा पहुंचाने की है। इसके तहत प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में आधार केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में 5000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। इससे न केवल ग्रामीणों के समय व धन की बचत होगी, बल्कि पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने का भी नया रास्ता खुलेगा।

 

डिजिटल पंचायतों की मजबूत नींव

योजना को गति देने के लिए पंचायत सहायकों को आधार ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब तक 1200 से अधिक पंचायत सहायकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि शेष का प्रशिक्षण जारी है। वर्तमान में 179 पंचायत सहायकों की ऑपरेटर आईडी सक्रिय हो चुकी है और 157 आधार मशीनों का एक्टिवेशन पूरा कर लिया गया है। इससे ग्राम पंचायत स्तर पर सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। फिलहाल लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व बलरामपुर की 110 ग्राम पंचायतों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है। इन जिलों के ग्रामीणों को अब आधार सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है।

 

पंचायतें बनेंगी नागरिक सेवा का केंद्र

पंचायती राज निदेशक के अनुसार, यह पहल केवल आधार सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्राम पंचायतों को भविष्य में डिजिटल नागरिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की मजबूत आधारशिला बनेगी। इससे ग्रामीणों को सरकारी सेवाएं गांव में ही उपलब्ध होंगी और पंचायतों की आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। विभाग ग्राम पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आधार सेवाओं की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कदम है और जल्द ही इसका लाभ प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगा।

खरीफ बुआई 95% के करीब, 107 लाख हेक्टेयर में पूरा हुआ आच्छादन : शाही

Shahi UP News

कम बारिश के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार की समयबद्ध तैयारियों और किसानों की मेहनत के कारण खरीफ फसलों का आच्छादन लक्ष्य के करीब पहुंच गया है। वर्ष 2026 में खरीफ आच्छादन का लक्ष्य 110 लाख हेक्टेयर रखा गया था, जिसके मुकाबले लगभग 107 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। यह लक्ष्य का करीब 95 प्रतिशत है, जबकि पिछले वर्ष 103 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 100 लाख हेक्टेयर में आच्छादन हो पाया था।

 

यह जानकारी बुधवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने लोकभवन में पत्रकारों से वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सुपर अल नीनो की आशंका के कारण सामान्य से कम वर्षा का अनुमान था। इसके बावजूद सरकार ने किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई। 

 

खरीफ सीजन में 50 प्रतिशत अनुदान पर 1.73 लाख कुंतल से अधिक बीज वितरित किए गए। साथ ही दलहन, तिलहन, मूंगफली, सोयाबीन और तिल जैसी फसलों के रकबे को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। सरकार ने 6.13 लाख से अधिक किसानों को 16,449 कुंतल मुफ्त मिनी किट वितरित किए, जबकि 1.23 लाख कुंतल से अधिक बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। दलहन, तिलहन तथा मोटे अनाज के बीजों का बड़े पैमाने पर वितरण कर किसानों को कम वर्षा की परिस्थितियों में भी खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अल्प अवधि की तोरिया फसल को बढ़ावा देने का निर्णय

कृषि मंत्री ने बताया कि 28 जुलाई तक प्रदेश में औसत से लगभग 25 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। 11 जिलों में 40 से 60 प्रतिशत तक कम बारिश हुई, जबकि 13 जिलों में स्थिति और अधिक चिंताजनक रही। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने सितंबर में अल्प अवधि की तोरिया फसल को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए 1,000 कुंतल तोरिया बीज वितरण का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें 600 कुंतल मुफ्त मिनी किट और 400 कुंतल अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए पोर्टल खोल दिया गया है तथा 17 अगस्त के बाद ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन किया जाएगा।

7.66 लाख किसानों तक दलहन और तिलहन के मिनी किट वितरण का लक्ष्य

श्री शाही ने किसानों को आश्वस्त किया कि योगी सरकार रबी सीजन में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देगी। इसके लिए प्रमाणित बीजों की उपलब्धता और वितरण की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बीज वितरण के लिए 10 जुलाई को पोर्टल खोला जा चुका है और सितंबर के पहले सप्ताह में ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन कर समय से बीज उपलब्ध कराया जाएगा। इस वर्ष 7.66 लाख किसानों तक दलहन और तिलहन के मिनी किट वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 36,475 कुंतल बीज निशुल्क वितरित किए जाएंगे। उन्होंने किसानों से पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील करते हुए बताया कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी ई-लॉटरी प्रणाली से होगी।

अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे 25,900 कृषि यंत्र

उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों पर अनुदान योजना के तहत भी पोर्टल 20 जुलाई से खोल दिया गया है। इसकी लॉटरी 10 अगस्त को निकाली जाएगी। फार्म मशीनरी बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर और एकल कृषि यंत्रों सहित कुल 25,900 कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। अब तक 41,762 किसानों ने आवेदन किया है। फार्म मशीनरी बैंक पर 80 प्रतिशत तक तथा कस्टम हायरिंग सेंटर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। कृषि यंत्रों के चयन की प्रक्रिया भी ई-लॉटरी के माध्यम से पूरी की जाएगी।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध

कृषि मंत्री शाही ने पत्रकारों को बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। एक अप्रैल से 28 जुलाई तक 57.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया, जिसमें से 28.88 लाख मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। लगभग इतनी ही मात्रा में अभी भी उर्वरक उपलब्ध है। यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, एमओपी का पर्याप्त भंडार है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले जहां करीब 1,500 सहकारी समितियां उर्वरक वितरण करती थीं, वहीं अब 7000 समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाई जा रही है। जुलाई में ही सहकारी समितियों ने 3.22 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और 1.07 लाख मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के किसी भी ब्लॉक में उर्वरकों की कमी नहीं है।

सपा सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का अधिक वितरण 

कृषि मंत्री ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2015-16 में प्रदेश में 84.98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण हुआ था, जबकि योगी सरकार के कार्यकाल में यह बढ़कर 2025-26 में 118 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार किसानों को पूर्ववर्ती सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का निपटारा करने के साथ ही कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया है। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे धैर्य रखें, समय पर पंजीकरण कराएं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

अब प्रतियोगिता से निखरेंगी गोशालाएं, उत्कृष्ट मॉडल को मिलेगा पुरस्कार

Yogi Janata darshan

Gaushala Evaluation Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गोशालाओं को संरक्षण केंद्र से आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर एवं उत्पादक इकाइयों के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने नई पहल शुरू की है। आयोग ने प्रत्येक जिले की गोशालाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के आधार पर मूल्यांकन कराने का निर्णय लिया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली गोशालाओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि उनके सफल मॉडल को प्रदेशभर में अपनाने की दिशा में काम होगा। 

 

मूल्यांकन में वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश के स्वास्थ्य एवं पोषण, नस्ल संवर्धन, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता के प्रयास प्रमुख आधार होंगे। गोशालाओं में वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता, भूसा-चोकर का उचित प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पशु आहार, नर-मादा एवं बछड़े-बछियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण, नंदीशाला की व्यवस्था और वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही सिक वार्ड, नियमित पशु चिकित्सा, कमजोर गोवंश की पृथक देखभाल, पर्याप्त शेड, स्वच्छता, सीसीटीवी, बाउंड्री वॉल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी समीक्षा होगी।

 

आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह एवं महेश शुक्ल तथा सदस्य राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय और दीपक गोयल ने गोशालाओं के समग्र विकास की कार्ययोजना पर मंथन के बाद पूरी योजना तैयार की।

अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि आयोग का उद्देश्य गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके लिए बायोगैस संयंत्र, गोबर एवं गोमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग, जैविक खाद और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही आसपास के किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। आयोग का मानना है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से प्रदेश की गोशालाओं में बेहतर प्रबंधन, गोवंश संरक्षण, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता के नए मानक स्थापित होंगे।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव : सीएम योगी ने किया महायोगी गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन

Guru Purnima Mahotsav CM Yogi Adityanath

Guru Purnima Mahotsav CM Yogi Adityanath: गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार प्रातःकाल गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का नाथपंथ की परंपरा के अनुसार विशिष्ट पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, योगिराज बाबा गंभीरनाथ समेत नाथपंथ के सभी गुरुजन का भी विधि विधान से पूजा की।

 

गोरक्षपीठाधीश्वर ने भगवान गोरखनाथ और अन्य गुरुजन को श्रद्धा निवेदित कर लोक कल्याण के पथ पर मार्गदर्शन के लिए भावपूर्ण कृतज्ञता व्यक्त की की।  गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष अनुष्ठान प्रातः काल से ही प्रारंभ हो गया और सामूहिक आरती के साथ अनुष्ठान की पूर्णता हुई।

गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। वैसे तो गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं, गुरु गोरखनाथ जी तथा नाथपंथ के गुरुजन का दर्शन-पूजन उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा होता है। पर, गुरु पूर्णिमा का अवसर गोरखनाथ मंदिर में विशिष्ट पूजा का होता है। बुधवार को गोरक्षपीठाधीश्वर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महायोगी गोरखनाथ, मंदिर परिसर में मौजूद सभी देव विग्रहों और नाथपंथ के गुरुओं की प्रतिमाओं के समक्ष विधि विधान के साथ पूजन किया।

 

आनुष्ठानिक कार्यक्रमों के क्रम में उन्होंने सबसे पहले नाथपंथ के आदिगुरु भगवान गोरखनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनकी विशिष्ट पूजा की। वह परिसर में मौजूद सभी देव-विग्रहों के पास पहुंचे और उनका पूजन किया। उसके बाद वह बारी-बारी से बाबा गंभीरनाथ, अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ समेत ब्रह्मलीन गुरुओं की समाधि पर गए। सभी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर आशीर्वाद लिया।

 

गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार गुरु गोरखनाथ को रोट का महाप्रसाद भी अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना की आनुष्ठानिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद गुरु पूर्णिमा पर होने वाली परंपरागत सामूहिक आरती हुई तथा सभी गुरुओं के प्रति आस्था निवेदित की गई।

योगी सरकार ने स्मार्ट मीटर पर फैला भ्रम किया दूर, यूपीपीसीएल ने दी पूरी जानकारी

  • स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा नया आर्थिक बोझ
  • सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक खबरों का यूपीपीसीएल ने किया खंडन
  • प्रीपेड से पोस्टपेड व्यवस्था में लौटने के बाद नियमानुसार जमा हो रही सिक्योरिटी राशि
  • यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, एसएमएस एवं व्हाट्सएप पर मिल रही बिजली बिल की सुविधा

 

लखनऊ, 28 जुलाई। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी बीच स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों पर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया कि पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के बाद पहले समायोजित या वापस की गई सिक्योरिटी राशि ही नियमानुसार दोबारा जमा कराई जा रही है। इसे नया शुल्क या स्मार्ट मीटर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताना पूरी तरह भ्रामक है।

 

यूपीपीसीएल की ओर से बताया गया कि हाल के दिनों में कुछ समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर नया आर्थिक बोझ डालने और उसने पुनः सिक्योरिटी धनराशि वसूलने संबंधी खबरें प्रसारित की जा रही है, जो कि तथ्यों के अनुरूप नहीं है और अधूरी जानकारी के आधार पर प्रस्तुत की गई है। 

 

यूपीपीसीएल के अनुसार, प्रदेश में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पूर्व में प्रीपेड प्रणाली पर संचालित किया गया था। उस समय उपभोक्ताओं द्वारा पूर्व में जमा की गई सिक्योरिटी धनराशि को नियमानुसार उनके बकाया विद्युत देयकों के विरुद्ध समायोजित कर दिया गया था तथा जिन उपभोक्ताओं पर कोई बकाया नहीं था, उनकी जमा सिक्योरिटी राशि उनके प्रीपेड खाते में रिचार्ज के रूप में क्रेडिट कर दी गई थी। तत्पश्चात उपभोक्ताओं की सुविधा एवं जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पुनः पोस्टपेड प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया। वर्तमान में सभी उपभोक्ताओं को प्रत्येक माह पूर्व की भांति नियमित मासिक विद्युत बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस संबंध में आवश्यक आदेश पूर्व में ही निर्गत किए जा चुके हैं।

 

यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया कि पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के फलस्वरूप अब वही सिक्योरिटी धनराशि, जो पूर्व में उपभोक्ताओं को समायोजित अथवा वापस कर दी गई थी, नियमानुसार पुनः जमा कराई जा रही है। इसे किसी प्रकार का नया शुल्क अथवा स्मार्ट मीटर लगाए जाने के कारण उपभोक्ताओं पर डाला गया अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया जाना पूर्णतः भ्रामक एवं तथ्यों से परे है। उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का एकमुश्त वित्तीय भार न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए इस धनराशि को चार समान मासिक किस्तों में वसूल किए जाने का निर्णय लिया गया है। 

 

प्रथम किस्त जून-2026 की ऊर्जा खपत के बिल, जो जुलाई-2026 में जारी हुआ था, उसमें शामिल थी। बाकि तीन किस्तें आगामी तीन मासिक बिलों में स्वतः सम्मिलित होकर आएंगी। यह संपूर्ण प्रक्रिया बिलिंग प्रणाली द्वारा स्वतः संपादित की जाएगी। इसके लिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की अतिरिक्त औपचारिकता पूर्ण करने की आवश्यकता नहीं होगी।

 

यूपीपीसीएल ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश के सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को नियमित पोस्टपेड मासिक बिल जारी किए जा रहे हैं। भविष्य में दिए जाने वाले नए विद्युत संयोजन भी पूर्व की भांति पोस्टपेड स्वरूप में ही प्रदान किए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर, प्रीपेड व्यवस्था तथा सिक्योरिटी धनराशि को परस्पर जोड़कर प्रस्तुत किए जा रहे समाचार तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और इनसे केवल उपभोक्ताओं में अनावश्यक भ्रम उत्पन्न हो रहा है।

 

सभी उपभोक्ताओं को उनका मासिक विद्युत बिल यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, विभागीय वेबसाइट, पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे जाने वाले एसएमएस एवं व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अभी तक पंजीकृत नहीं है अथवा किसी कारणवश गलत दर्ज है, वे संबंधित वितरण निगम के अधिकृत व्हाट्सएप Chatbot, निकटतम विद्युत कार्यालय अथवा 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से अपना बिल प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार विद्युत बिल का भुगतान भी यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, विभागीय वेबसाइट, विभागीय काउंटर, जन सुविधा केंद्र (सीएससी), विद्युत सखी तथा अन्य अधिकृत डिजिटल एवं फिनटेक के माध्यमों से अत्यंत सरलता से किया जा सकता है।

 

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सभी विद्युत उपभोक्ताओं से अनुरोध किया कि वे सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक समाचारों पर विश्वास न करें। केवल यूपीपीसीएल एवं संबंधित वितरण निगमों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं को ही प्रमाणिक मानें। सभी उपभोक्ताओं से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे प्रत्येक माह अपना विद्युत बिल समय से डाउनलोड कर निर्धारित तिथि तक उसका भुगतान करें, जिससे किसी प्रकार की असुविधा अथवा विलंब अधिभार से बचा जा सके।

सरकार ने किसानों को दिलाया भरोसा, यूपी में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध

UP fertilizer availability: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार वर्तमान खरीफ सीजन में मुख्य फसल धान की रोपाई और अन्य फसलों की बुवाई के उपरांत किसानों को फसल संस्तुति के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि परेशान न हों, प्रदेश में उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि व संबंधित विभाग के अधिकारी लगातार मॉनीटरिंग करें। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भ्रामक सूचनाओं व अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से उर्वरक भंडारण न करें। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। 

प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खरीफ सीजन- 2026 के तहत सोमवार (27 जुलाई) तक कुल 28.25 लाख मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री की जा चुकी है, जबकि 29.05 लाख मीट्रिक टन उर्वरक अब भी उपलब्ध है। सरकार किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 

 

किसी भी समस्या पर जनपद व मंडल के अधिकारियों से संपर्क करें किसान

कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सभी 18 मंडलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। जनपदों में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो वे जनपद, मंडल के कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। मंडलवार यूरिया उपलब्धता के आंकड़े इस प्रकार हैं-

  • सहारनपुर : 43,275 मी. टन
  • मेरठ : 67551 मी. टन
  • आगरा : 95852 मी. टन 
  • अलीगढ़ : 86474 मी. टन 
  • बरेली : 116987 मी. टन
  • मुरादाबाद : 83972 मी. टन
  • कानपुर : 143076 मी. टन
  • प्रयागराज : 111070 मी. टन
  • झांसी : 47722 मी. टन
  • चित्रकूट : 50189 मी. टन
  • वाराणसी : 109312 मी. टन
  • मीरजापुर : 36014 मी. टन
  • आजमगढ़ : 73086 मी. टन
  • गोरखपुर : 91659 मी. टन
  • बस्ती : 51638 मी. टन
  • गोंडा : 59199 मी. टन
  • लखनऊ : 138186 मी. टन
  • अयोध्या : 71695 मी. टन

नौकरी ढूंढ़ने नहीं, नौकरी देने की सोच पैदा कर रहा ‘यूथ अड्डा’

CM Yuva Yojana: आज की जेनरेशन जेड (Gen Z) पारंपरिक नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह पीढ़ी नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और आत्मनिर्भरता में अपना भविष्य देखती है। जिन युवाओं का जन्म 1997 के बाद हुआ, वे इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक के साथ बड़े हुए हैं। ऐसे में उन्हें केवल रोजगार नहीं, बल्कि अवसर, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और उद्यमिता का पूरा इकोसिस्टम चाहिए।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बहुत पहले समझ लिया था। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने केवल रोजगार योजनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाने की सोच के साथ सीएम युवा और यूथ अड्डा जैसी अभिनव अवधारणा को विकसित किया। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इस पहल का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि विचार, कौशल, तकनीक, मार्गदर्शन और बाजार सभी को एक मंच पर उपलब्ध करवा कर युवाओं के लिए उद्यमिता का नया इकोसिस्टम तैयार करना है। 

 

Gen Z की क्षमता और भविष्य की कार्यशक्ति में उसकी अहम भूमिका को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक वर्ष पहले ही पहचान लिया था। इसी सोच के तहत युवाओं और उद्यमिता के बीच मौजूद दूरी को कम करने की पहल की गई। कॉफी या चाय पर सहज, खुले और व्यावहारिक संवाद के माध्यम से युवाओं को कौशल, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास हुआ। इसी अनौपचारिक लेकिन प्रभावी मॉडल को ‘यूथ अड्डा’ नाम दिया गया, जहां कॉफी शॉप जैसे माहौल में युवा अपने विचार साझा कर सकें, विशेषज्ञों से संवाद कर सकें और अपने उद्यमी सपनों को वास्तविक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

Gen Z की जरूरतों के अनुरूप तैयार हुआ यूथ अड्डा

आज का युवा केवल ऋण या अनुदान नहीं चाहता। वह चाहता है कि कोई उसके विचार को समझे, बिजनेस मॉडल बनाने में मदद करे, अनुभवी मेंटर्स से जोड़े, बैंकिंग प्रक्रिया आसान बनाए और बाजार तक पहुंच दिलाए। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यूथ अड्डा को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्र के बजाय एक समग्र उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। यहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, फ्रेंचाइजी मॉडल, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन सब कुछ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।

 

यूथ अड्डा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सरकारी सेवा वितरण की पारंपरिक सोच को बदलता है। यहां युवा केवल किसी योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि अवसर का आकांक्षी है, जिसकी जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित की गई हैं। यह दृष्टिकोण शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

कॉलेज से सीधे स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर

प्रदेश सरकार ने महसूस किया कि उद्यमिता की शुरुआत नौकरी मिलने के बाद नहीं, बल्कि कॉलेज और तकनीकी संस्थानों के दिनों से ही होनी चाहिए। इसलिए यूथ अड्डा का फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक और आईटीआई के विद्यार्थियों पर रखा गया है। यहां छात्रों को प्रेरित किया जाता है कि वे डिग्री पूरी होने के बाद केवल नौकरी के लिए आवेदन करने की बजाय यह सोचें कि वे किस समस्या का समाधान कर सकते हैं और उससे किस प्रकार सफल उद्यम स्थापित किया जा सकता है। योगी सरकार ने यह भी समझा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक आधारित होगी। इसी कारण यूथ अड्डा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और आधुनिक डिजिटल टूल्स पर विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रदेश का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, पूरे बिजनेस सफर में साथ

यूथ अड्डा केवल प्रशिक्षण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। यहां युवाओं को बिजनेस आइडिया तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी, डिजिटल ब्रांडिंग, गूगल बिजनेस प्रोफाइल, वॉट्सएप बिजनेस, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और व्यवसाय विस्तार तक लगातार मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही 100 से अधिक तैयार फ्रेंचाइजी मॉडल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं का जोखिम काफी कम हो सके।

ग्रामीण युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष फोकस

यूथ अड्डा की अवधारणा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाना है, ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का सहयोग देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पूरे वर्ष चलता रहेगा उद्यमिता का अभियान

यूथ अड्डा को केवल एक केंद्र नहीं, बल्कि वर्षभर सक्रिय रहने वाले उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया गया है। यहां बैंकर्स मीट, टेक फेस्ट, स्टार्टअप क्लिनिक, बिजनेस आइडिएशन वर्कशॉप, फाउंडर्स टॉक, नारी शक्ति श्रृंखला, कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम और सफल उद्यमियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक पांच लाख युवाओं को इस पहल से जोड़ना, ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराना, 10,000 से अधिक नए उद्यम एवं फ्रेंचाइजी स्थापित करना तथा 25,000 से अधिक एमएसएमई को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बनते हैं, तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

यूपीकॉन निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी पहल के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीकॉन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह के मुताबिक,  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) के अंतर्गत यूपीकॉन द्वारा संचालित यूथ अड्डा को प्रदेश में उद्यमिता के एक सशक्त मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। यूपीकॉन युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, परियोजना परामर्श, बैंकिंग सहायता, डिजिटल सशक्तीकरण और उद्योग जगत से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित कर रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल योजनाओं का लाभ दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश तथा एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में सहभागी बनाना है।

योगी सरकार में जल संरक्षण बना जन आंदोलन, यूपी ने हासिल किया संयुक्त राष्ट्र का छठवां सतत विकास लक्ष्य

Yogi government water conservation: कभी जल संकट और गिरते भूजल स्तर की चुनौती से जूझने वाला उत्तर प्रदेश आज जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया गया। इसी क्रम में यूपी, संयुक्त राष्ट्र के छठवें सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6) को हासिल कर चुका है। यूपी में जल दोहन की दर 2017 के 71.26 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत हो गई है, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य का मानक है। यह उपलब्धि जल संरक्षण के लिए सम्मलित प्रयासों से मिली है।

 

भूजल गर्भ विभाग निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, आधुनिक तकनीक के सम्मलित प्रयासों ने प्रदेश को जल सरंक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धियां दिलाई हैं। प्रदेश सरकार और विभाग के प्रयासों का सबसे बड़ा परिणाम भूजल पुनर्भरण में वृद्धि के रूप में सामने आया है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 69.91 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) था, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 73.39 बीसीएम हो गया। वहीं भूजल दोहन की दर 71.26 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6) को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश सफल रहा।

प्रदेश में अतिदोहित विकासखंड़ों की संख्या हुई कम

उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल संरक्षण अभियानों का असर अतिदोहित क्षेत्रों में भी दिखाई पड़ा। वर्ष 2017 में प्रदेश में 82 अतिदोहित विकासखंड थे, जिनकी संख्या घटकर 44 रह गई। वहीं सुरक्षित श्रेणी के विकासखंडों की संख्या 540 से बढ़कर 563 हो गई। यह परिवर्तन वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन व योजनाबद्ध कार्यों की वजह से संभव हो पाया।

अभियान बना भूजल रिचार्ज की ताकत

'कैच द रेन' अभियान के तहत वर्ष 2021 से 2025 के बीच 3.39 लाख वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं, 1.34 लाख पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया, 14.38 लाख जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्य हुए। साथ ही 1.33 लाख भूजल पुनर्भरण एवं पुनः उपयोग से जुड़ी संरचनाएं विकसित की गईं। इन प्रयासों ने वर्षा जल संचयन व भूजल रिचार्ज को नई गति दी।

2 मीटर तक बढ़ा भूजल स्तर

डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अटल भूजल योजना ने भी सकारात्मक बदलाव में अहम भूमिका निभाई। 26 विकासखंडों में ग्राम पंचायत आधारित वाटर सिक्योरिटी प्लान लागू किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्र अतिदोहित या सेमी-क्रिटिकल श्रेणी से सुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़े। एक स्वतंत्र अध्ययन में 550 ग्राम पंचायतों में से 303 पंचायतों में भूजल स्तर में 0.5 से 2 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया।

 

रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग से लाभ

योगी सरकार ने रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सरकारी एवं अर्धसरकारी भवनों पर भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया। प्रदेश में 1,05,593 उपयुक्त भवनों की पहचान की गई, जिनमें से 35,206 भवनों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। भूगर्भ जल विभाग द्वारा 227 भवनों पर प्रणाली स्थापना से प्रतिवर्ष लगभग 4252.80 लाख लीटर संभावित भूजल पुनर्भरण क्षमता भी विकसित की गई है।

करोड़ों लीटर भूजल रिचार्ज क्षमता बढ़ी

योगी सरकार में लगभग सभी विभागों ने जल संरक्षण अभियान को प्राथमिकता में शामिल किया। इसके तहत पिछले कुछ वर्षों में लघु सिंचाई विभाग ने 6,627 चेकडैम का निर्माण किया, जिनकी भंडारण क्षमता 14 हजार करोड़ लीटर व भूजल रिचार्ज क्षमता 10 हजार करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है। इसके साथ ही 1,417 तालाबों का जीर्णोद्धार किया, जिसकी भूजल रिचार्ज क्षमता 1,400 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है। वहीं 6,800 से अधिक भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित की।

 

ग्राम्य विकास विभाग ने लगभग 19,974 अमृत सरोवर विकसित किए। कृषि विभाग ने 37,273 खेत तालाबों का निर्माण कराया। इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और कृषि उत्पादकता दोनों में सुधार हुआ। यह सभी प्रयास यूपी में भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण के लिए काफी अहम साबित हो रहे हैं।

ऑनलाइन बैठकों में अब नहीं चलेगी लापरवाही, योगी सरकार ने तय की जवाबदेही

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जवाबदेह, अनुशासित और परिणामोन्मुख प्रशासन की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन समीक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बना दिया है। अब निदेशालय स्तर पर आयोजित प्रत्येक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) तथा जनपद स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनिवार्य सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। अनुपस्थिति या अनधिकृत प्रतिनिधित्व की गुंजाइश नहीं होगी। इस संबंध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

 

निर्देशों में कहा गया है कि समय-समय पर आयोजित महत्वपूर्ण ऑनलाइन समीक्षा बैठकों में कई जनपदों से अपेक्षित स्तर की सहभागिता नहीं हो रही थी। कई मामलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं बैठक में शामिल नहीं होते थे और न ही किसी अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित होती थी। इसे प्रशासनिक जवाबदेही के अनुरूप नहीं मानते हुए अब स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है। सभी अधिकारी केवल अपनी आधिकारिक ई-मेल आईडी के माध्यम से ही बैठक में शामिल होंगे, जिससे प्रतिभागियों की पहचान सुनिश्चित होगी और समीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।

अधिकारी स्वयं होंगे बैठक में शामिल

नए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) तथा जनपद स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं प्रतिभाग करेंगे। यदि किसी अपरिहार्य शासकीय कारण से वे उपस्थित नहीं हो सकते हैं, तो अपने स्थान पर किसी वरिष्ठ अधीनस्थ अधिकारी को विधिवत अधिकृत कर बैठक में भेजेंगे, ताकि किसी भी मंडल अथवा जनपद का प्रतिनिधित्व प्रभावित न हो।

एक जनपद से एक ही अधिकृत लॉगिन

निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि एक ही जनपद या मंडल से अलग-अलग डिवाइस और अलग-अलग आईडी से बैठक में जुड़ने की व्यवस्था स्वीकार नहीं होगी। यदि एक से अधिक अधिकारियों की उपस्थिति आवश्यक हो तो सभी अधिकारी एक ही स्थान पर बैठकर एक अधिकृत लॉगिन आईडी के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। इससे तकनीकी अव्यवस्था समाप्त होगी और समीक्षा अधिक सुव्यवस्थित बनेगी।

जवाबदेही के साथ तेज होगा क्रियान्वयन

बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति से समीक्षा बैठकों की गुणवत्ता बेहतर होगी, निर्णयों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित होगा और शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाओं की निगरानी तथा क्रियान्वयन में और अधिक गति आएगी।