Ram Temple Donation Theft: चंपत राय के इस्तीफे के अलावा राम मंदिर डोनेशन चोरी केस में ट्रस्ट की पहली बैठक से निकलीं ये 5 बड़ी बातें

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने रखी गई। बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने माना कि इस मामले में ट्रस्ट के साथ विश्वासघात हुआ है और जिम्मेदार लोगों ने भरोसा तोड़ा है। बैठक में उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। ट्रस्ट ने साफ कहा कि उसे राज्य सरकार की SIT और उसकी जांच पर पूरा भरोसा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा और व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

बैठक से निकलीं 5 बड़ी बातें

  • 1. SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने पेश की गई

बैठक में सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की SIT की जांच रिपोर्ट रखी गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की और जांच पर भरोसा जताया।

  • 2. ट्रस्ट ने माना कि भरोसा तोड़ा गया

बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने स्वीकार किया कि इस मामले में ट्रस्ट के विश्वास के साथ धोखा हुआ। आरोप है कि जिम्मेदार लोगों ने अधिकारियों को गुमराह किया और ट्रस्ट का भरोसा तोड़ा।

  • 3. दोबारा ऐसी घटना न हो, इसकी होगी समीक्षा

ट्रस्ट ने फैसला किया कि दान की राशि के संग्रह और निगरानी की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की दोबारा गुंजाइश न रहे।

  • 4. चंपत राय और अनिल मिश्रा से मांगा जाएगा पक्ष

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीटिंग का एजेंडा रखा। स्वामी गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार का प्रस्ताव रखा। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को भी बुलाने का फैसला किया गया। दोनों इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखेंगे।

  • 5. CEO का पद बनाने का प्रस्ताव खारिज

सूत्रों के अनुसार, बैठक में ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का नया पद बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन ट्रस्ट ने इसे मंजूर नहीं किया।

फिलहाल ट्रस्ट की बैठक जारी है और आने वाले समय में इस मामले को लेकर कुछ और अहम फैसले सामने आ सकते हैं। वहीं, दान की कथित गड़बड़ी की जांच SIT लगातार कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

YEIDA Master Plan: जेवर एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेगा हाथरस का नया 10000 एकड़ का इंडस्ट्रियल हब, हींग से EV तक सबको बूस्ट, देखें पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस को बड़ा औद्योगिक और रोजगार केंद्र बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। योगी सरकार, हाथरस को इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के साथ हजारों रोजगार पैदा करने वाला डेस्टिनेशन बनाने की योजना पर काम कर रही है। यमुना एक्सप्रेसवे के फेज-2 विकास के तहत ‘महायोजना/मास्टर प्लान 2041’ के अंतर्गत ‘हाथरस अर्बन सेंटर’ को एक हाईटेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बता दें कि, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की मास्टर प्लान 2041 योजना के तहत हाथरस में करीब 10 हजार एकड़ में एक आधुनिक ग्रीनफील्ड अर्बन सेंटर विकसित किया जाएगा। बता दें कि, यह परियोजना जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी होगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उद्योगों व रोजगार को नई रफ्तार देगी।

50 से ज्यादा गांवों में विकसित होगी नई सिटी

बता दें कि, यह हाईटेक सिटी हाथरस और सासनी तहसील के 50 से अधिक गांवों में लगभग 4,000 हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) क्षेत्र में विकसित की जाएगी। यह अलीगढ़, मथुरा और आगरा के साथ विकसित किए जा रहे चार प्रमुख शहरी केंद्रों में से एक होगी। योजना का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए जीआईएस तकनीक की मदद ली जा रही है। इसके लिए आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरे क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरियाली और खुले स्थानों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।

उद्योग और रहने की सभी सुविधाएं होंगी

यह परियोजना एक आधुनिक औद्योगिक और आवासीय शहर के रूप में विकसित होगी। इसमें उद्योग, आवास, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन जोन के लिए अलग-अलग क्षेत्र बनाए जाएंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और कई प्रमुख राजमार्गों से अच्छी कनेक्टिविटी होने के कारण यह इलाका उद्योग लगाने के लिए आकर्षक केंद्र बनेगा। इसे आगरा के सैटेलाइट टाउन के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जिससे आगरा पर बढ़ता औद्योगिक दबाव कम हो सके।

हींग, गुलाल और EV उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

बता दें कि, हाथरस पहले से ही 10 हजार से अधिक MSE इकाइयों का केंद्र है। नई परियोजना से यहां के स्थानीय उद्योगों को और मजबूती मिलेगी। ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)’ योजना के तहत हाथरस की प्रसिद्ध हींग और गुलाल बनाने वाले कारोबारियों को आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, होजरी, कांच के मोती, पीतल के आभूषण, मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के पुर्जों के लिए विशेष औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। आगे चलकर मेडिकल उपकरण, सर्जिकल डिवाइस और पावर ग्रिड मशीनरी जैसे आधुनिक उद्योगों को भी यहां लाने की योजना है।

डीपीआर और जमीन अधिग्रहण का काम शुरू

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। परियोजना पूरी होने के बाद बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और हाथरस पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो जाएगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस दौरे में 548 करोड़ रुपये से अधिक की 143 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों को घरों की चाबियां भी सौंपीं।

Bullet Train: जेवर से लखनऊ सिर्फ 1 घंटा 40 मिनट में! बुलेट ट्रेन के इस प्लान से यूपी से दिल्ली का डिस्टेंस गजब रफ्तार में होगा तय

Bullet Train: उत्तर प्रदेश और देश की राजधानी दिल्ली के बीच का सफर आने वाले समय में गजब की रफ्तार से तय होने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जेवर में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बेहद अहम और बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में यात्रा का समय बेहद कम हो जाएगा।

केवल 1 घंटे 40 मिनट में जेवर से लखनऊ का सफर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया कि इस प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इसी तरह जेवर से लखनऊ का सफर पैसेंजर्स सिर्फ 1 घंटा 40 मिनट में तय कर सकेंगे। परियोजना की रफ्तार और महत्व पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैसे गंगा बहती है, ठीक उसी तरह बुलेट ट्रेन भी दौड़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी की पूरी तस्वीर बदल देगा और राज्य के औद्योगिक व आर्थिक विकास को एक बहुत बड़ा बूस्ट देगा।

जेवर बनेगा उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली और सेमीकंडक्टर हब

आपको बता दें कि जेवर को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण का एक बड़ा केंद्र बनाने के लिए शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यमुना सिटी, जेवर में 6750 करोड़ रुपये के कुल निवेश वाले दो बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स का संयुक्त रूप से शिलान्यास किया। इन प्रोजेक्ट्स से क्षेत्र में करीब 3000 नौकरियां पैदा होंगी।

इन दो बड़ी परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास

ASCENT-K Circuit (3250 करोड़ रुपये का निवेश): यह दक्षिण कोरिया की केसीसी (KCC) के साथ एक जॉइंट वेंचर है। यहां आधुनिक हाई-डेंसिटी और मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स का निर्माण किया जाएगा। Amber Enterprises (3500 करोड़ रुपये की फैसिलिटी): इस प्लांट में HVAC कंपोनेंट्स और पीसीबी असेंबली का निर्माण किया जाएगा।

पीसीबी आयात पर घटेगी निर्भरता, मजबूत होगा रुपया

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने भारत की बढ़ती घरेलू विनिर्माण क्षमताओं की तारीफ करते हुए कहा कि देश अब इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की केवल असेम्बलिंग करने से आगे बढ़कर उनके कोर कंपोनेंट्स बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत हर साल लगभग 40000 करोड़ रुपये के पीसीबी का आयात करता रहा है। अब घरेलू उत्पादन से इस आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी। यहां बनाए जाने वाले एडवांस्ड मल्टी-लेयर पीसीबी (कुछ 20 से 22 लेयर वाले) आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। जिसे हम कभी आयात करते थे, अब उसे दुनिया के लिए मेक इन इंडिया करेंगे।

जेवर में बनने वाला हर एक पीसीबी विदेशी मुद्रा की बचत करेगा, रुपये को मजबूत करेगा और भारत के भुगतान संतुलन में सुधार लाएगा। हजारों करोड़ रुपये के इस निवेश के चलते जेवर क्षेत्र उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली के रूप में उभरने के लिए तैयार है। अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि उनके विजन के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने का सपना उत्तर प्रदेश में साकार हो रहा है।

अयोध्या मामले में SIT ने गृह विभाग को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट

SIT submits preliminary report to Home Department in Ayodhya case

Uttar Pradesh News : अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। इस रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार की ओर से एक्शन शुरू हो सकता है।

माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर गबन और चोरी के मामलों में केस भी दर्ज कराई जा सकती है। वहीं कुछ लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। राम मंदिर एसआईटी की जांच के पहले चरण की प्रक्रिया पूरी होने और जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब कुछ नए नामों की चर्चा तेज हो गई है।

ये लोग राम जन्मभूमि में कर्मचारी नहीं हैं। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। 

Edited By : Chetan Gour 

बीएसबी से संबद्ध विद्यालयों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार

 Yogi government is connecting BSB affiliated schools with mainstream

– यू-डायस प्लस कोड आवंटन और विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया को मिली गति

– जिलों को आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश

– छात्रों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की पहल

Uttar Pradesh News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक सक्षम और छात्र केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। शिक्षा सुधारों को संस्थागत मजबूती प्रदान करने और प्रत्येक विद्यार्थी को सुव्यवस्थित शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने के क्रम में अब भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी), हरिद्वार से संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस कोड आवंटन तथा विद्यालय श्रेणी उन्नयन (स्कूल केटेगरी अपग्रेडेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।

 

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रशासन, तकनीक आधारित अनुश्रवण और डेटा प्रबंधन को लगातार मजबूती दी जा रही है। यू-डायस प्लस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से शिक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ने की पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने, अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

 

आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के लिए नवीन यू-डाइस प्लस कोड आवंटन तथा आवश्यकतानुसार विद्यालय श्रेणी उन्नयन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं, उन्हें नवीन कोड आवंटित होंगे

निर्देशों में कहा गया है कि जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें नवीन कोड आवंटित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी, जबकि पूर्व से यू-डायस कोड प्राप्त विद्यालयों के लिए मान्यता के अनुरूप विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों, आख्या और संस्तुति सहित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके।

 

बीएसबी ने किया है नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध

उल्लेखनीय है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड, हरिद्वार द्वारा संचालित एवं संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस पोर्टल पर नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इसके दृष्टिगत शासन स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।

विद्यालयों के यू-डायस प्लस प्रणाली से जुड़ने के बाद उनका शैक्षणिक डाटा राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में व्यवस्थित रूप से समाहित हो सकेगा, जिससे नामांकन, शैक्षणिक प्रगति, परीक्षा संबंधी अभिलेखों तथा अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
Edited By : Chetan Gour 

Ram Mandir Daan Chori Case: एसआईटी ने सरकार को सौंपी राम मंदिर में कथित चंदा चोरी की रिपोर्ट, जानें- बड़ी बातें

Ayodhya Ram temple donation case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंगलवार (23 जून) को यूपी सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी। लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को यह शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच अभी भी चल रही है। मामले में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

अयोध्या राम मंदिर में मिले चंदे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। SIT द्वारा शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद, पंत ने PTI वीडियो को बताया कि SIT अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की कोशिश कर रही है। पंत ने कहा, “अब तक सामने आई जानकारी और हमारे पास मौजूद तथ्यों के आधार पर हमने आज पहली रिपोर्ट सौंपी है। यह केवल शुरुआती रिपोर्ट है और अंतिम रिपोर्ट कुछ समय बाद सौंपी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट गोपनीय है। उन्हें इस चरण में मीडिया के साथ जांच के नतीजों का विवरण साझा करने की अनुमति नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या टीम आगे की जांच के लिए अयोध्या लौटेगी क्योंकि सौंपी गई रिपोर्ट केवल शुरुआती थी? इस पर पंत ने PTI से कहा, “बिल्कुल, हम जरूरत के हिसाब से ऐसा करेंगे।”

अखिलेश यादव ने उठाया था मामला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें दावा किया गया था कि राम मंदिर में दिए गए चंदे में से करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालतों से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। यादव ने SIT जांच पर रोज़ाना जानकारी देने की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि एजेंसी पर जनता का भरोसा कम हो गया है, जिसे उन्होंने BJP सरकार के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का नतीजा बताया था।

मंदिर से जुड़े लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का निर्देश

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश दिए। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ सहित रोजाना की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी कथित अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब करीब दो महीने की अवधि में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे। दान पेटियां दो घंटे के भीतर ही नोटों से भर जाती थीं। यही वजह है कि एसआईटी इस दान की निगरानी एवं हिसाब-किताब की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी सामने आई है।

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