ममता बनर्जी को महाझटका! TMC के 12 और बैंक खाते सील, अब तक 1000 करोड़ रुपए लॉक

TMC bank accounts sealed: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा भूचाल आ चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) का शिकंजा ऐसा कसा है कि पार्टी पूरी तरह लाचार नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने टीएमसी के 12 और बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया। कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली मामूली राहत के अगले ही दिन हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब तक टीएमसी के कुल 15 बैंक खाते सील हो चुके हैं, जिनमें करीब 1,000 करोड़ रुपये फंसे होने का अनुमान है।

सरकारी और प्राइवेट बैंकों पर एक्शन

पुलिस के आला अफसरों के मुताबिक, जिन 12 नए खातों पर रोक लगाई गई है, वे अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट बैंकों में फैले हुए हैं। पुलिस ने इन खातों को खोलने वालों की पूरी कुंडली और पिछले सभी लेन-देन (ट्रांजैक्शन हिस्ट्री) का ब्योरा बैंकों से तलब किया है। ALSO READ: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, ED ने फ्रीज किए 440 करोड़, क्या होगा TMC पर इसका असर

इससे पहले गुरुवार को ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी को HDFC बैंक के तीन खातों से रोजमर्रा के दफ्तर के खर्चे, स्टाफ की सैलरी और कानूनी लड़ाई के लिए सीमित लेन-देन की इजाजत दी थी। इसके लिए रिटायर्ड जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी भी नियुक्त किया गया था। लेकिन पुलिस की इस नई कार्रवाई ने हाई कोर्ट से मिली राहत को पूरी तरह बेअसर कर दिया है।  ALSO READ: ममता बनर्जी ने संभाली TMC की कमान, बागी नेताओं को दी चुनौती, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा…

 

इस पूरे विवाद की जड़ें हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों और पार्टी के भीतर मचे घमासान से जुड़ी हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद टीएमसी के भीतर अंतर्कलह चरम पर पहुंच गई। ममता बनर्जी के ही बागी विधायकों और सीनियर नेताओं ने बैंक प्रशासन से लिखित शिकायत कर दी कि संगठन में भारी विवाद है, इसलिए खातों से लेन-देन रोका जाए।

 

साइबर क्राइम सेल में FIR : बागी नेताओं ने बिधाननगर पुलिस के साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि इन खातों में जमा भारी-भरकम रकम के सोर्स (पूंजी का जरिया) संदिग्ध हैं। इस शिकायत के अगले ही दिन पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

क्या है पूरा मामला?

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत इन खातों को अटैच किया है। यह पूरी कार्रवाई एक प्राइवेट एविएशन कंपनी से जुड़े 160 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। यह पूरा स्कैम एक 'एम्ब्रेयर बिजनेस जेट' और एक 'अगस्ता हेलीकॉप्टर' की रहस्यमयी खरीद-फरोख्त से जुड़ा हुआ है। टीएमसी ने शुक्रवार को दोबारा कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया और ईडी के इस फ्रीजिंग ऑर्डर को चुनौती दी है। पार्टी के सीनियर वकील किशोर दत्ता ने जस्टिस कृष्णा राव की अदालत से तुरंत सुनवाई की गुहार लगाई, जिस पर अब अदालत सोमवार को फैसला करेगी।

 

जिस रेप केस को लेकर फायर हैं ममता बनर्जी उसी पर सरकार को क्लीनचिट देती दिखीं कभी उनकी करीबी रहीं सयोनी घोष, ये सब कहा

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 12 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद पूरे राज्य के लोग गुस्से में हैं। दिल दहला देने वाले इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। वहीं अब इस मामले में पीड़ित परिवार से तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद सायोनी घोष भी पहुंचीं। बता दें कि, दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में हुई इस हृदयविदारक घटना सायोनी के अपने संसदीय क्षेत्र जादवपुर के अंतर्गत आता है। वहीं पीड़ित परिवार से मुलाकात की और इसके बाद उन्होंने जो कहा, वह उनके पुराने राजनीतिक स्टैंड से बिल्कुल उलट है।

घटना के बाद बंगाल में बवाल

सायनी घोष ने मंगलवार को आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले की निष्पक्ष और पूरी जांच कराई जाएगी। जानकारी के अनुसार, 12 साल की एक बच्ची शनिवार को अचानक लापता हो गई थी। बाद में उसका शव एक तालाब से मिला। पुलिस का कहना है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या किए जाने का आरोप है। इस घटना के बाद इलाके में लोगों में भारी गुस्सा है और विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में चार आरोपियों में से तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।

पीड़ित परिवार से मिली TMC की बागी सांसद सायोनी घोष

जाधवपुर से सांसद सायनी घोष ने कहा कि वह पीड़ित बच्ची के परिवार से मिली हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। किसी भी बच्ची के साथ ऐसी घटना होती है तो उसका दर्द हर किसी को होता है। सायनी घोष ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस मामले की निष्पक्ष, पूरी और गहराई से जांच कराएंगी। उन्होंने कहा कि दोषियों को सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिया है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पहली नजर में भले ही इस मामले में दो, तीन या चार लोग शामिल दिख रहे हों, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा गिरोह होने की आशंका है। इसलिए जांच हर पहलू से की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और भविष्य में बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सरकार का किया बचाव 

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष ने कहा कि राज्य में नई सरकार बने अभी सिर्फ दो महीने ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल या कोई भी मुख्यमंत्री ऐसी घटनाएं नहीं चाहता। चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, सबसे जरूरी बात यह है कि ऐसे मामलों में तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए और सभी दोषियों को सबसे कड़ी सजा, यानी फांसी की सजा दिलाने की कोशिश करनी चाहिए।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस की एक अन्य सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी इस घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दर्दनाक मामला है। वह इस घटना की कड़ी निंदा करती हैं और पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हैं। उन्होंने मांग की कि सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति भी गरमा गई है। इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

बीजेपी नेता केया घोष ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने बताया कि दो आरोपियों को अदालत में पेश किया जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी को भी पेश किया जाना है। केया घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस इस मामले पर राजनीति कर रहे हैं और लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घटना वाले दिन पीड़िता के पिता की मुख्यमंत्री से बात हुई थी और उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिया गया था।

Annapurna Yojana: अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने महिलाओं को मिलेंगे ₹3,000! जानें कौन होगा पात्र और कैसे चेक करें स्टेटस

Annapurna Yojana: पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को बुधवार, 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इसके तहत 25 से 60 साल की उम्र की लगभग 1.2 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में हर महीने ₹3,000 भेजे जाएंगे। इस योजना का मकसद राज्य भर की महिलाओं को आर्थिक मदद देना और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है।

इस दौरान बुधवार को एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कई जिलों से आई सैकड़ों लाभार्थी महिलाओं की मौजूदगी में इस योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत पैसे सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जिससे इसका औपचारिक रूप से शुभारंभ हुआ।

इससे पहले, सरकार ने बताया था कि उसे इस योजना के लिए अब तक लगभग 1.5 करोड़ आवेदन मिले हैं। जांच-पड़ताल के बाद, कुल 1.2 करोड़ आवेदन सही पाए गए। इनमें लगभग 5 लाख आदिवासी महिलाएं शामिल थीं।

अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी कौन हैं?

इस योजना के लाभार्थी वे महिलाएं हैं जो सरकार द्वारा तय किए गए मानदंडों को पूरा करती हैं। इसमें मुख्य रूप से 25 से 60 वर्ष की आयु की लगभग 1.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें हर महीने ₹3,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाएगी।

‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का नया रूप है अन्नपूर्णा योजना 

सरकार ने अन्नपूर्णा योजना के लिए कुल ₹36,000 करोड़ का बजट तय किया है। यह पहले से चल रही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का ही नया रूप है, जिसके तहत लगभग 2.4 करोड़ लोग लाभ उठा रहे थे।

इस बदलाव के कारण महिलाओं में अपनी पात्रता (eligibility) को लेकर कुछ भ्रम हो सकता है कि उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं। सरकार ने बताया है कि लक्ष्मी भंडार योजना के योग्य पुराने लाभार्थियों को नई अन्नपूर्णा योजना में शामिल कर दिया गया है। वहीं, मई से नए आवेदन जमा किए गए थे।

स्टेटस चेक करने के स्टेप्स

अगर आपने अन्नपूर्णा योजना के लिए आवेदन किया है और अपना लाभार्थी स्टेटस देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें:

  1. सबसे पहले पश्चिम बंगाल सोशल सिक्योरिटी पोर्टल पर जाएं:

    https://socialregistry.wb.gov.in/

  2. फिर Citizen Access सेक्शन पर क्लिक करें, जो आपको इस लिंक पर ले जाएगा:

    https://socialregistry.wb.gov.in/citizen/

  3. अब अपने जिले (District) का चयन करें और मोबाइल नंबर डालकर लॉगिन डिटेल्स भरें।
  4. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP (वन टाइम पासवर्ड) आएगा।
  5. OTP और कैप्चा (Captcha) भरकर लॉगिन करें।
  6. लॉगिन करने के बाद डैशबोर्ड में जाकर “Application Status” पर क्लिक करें।
  7. यहां आपको आपकी आवेदन स्थिति और लाभार्थी जानकारी दिख जाएगी।

कौन पात्र नहीं है

मुख्यमंत्री ने पहले ही साफ किया था कि लक्ष्मी भंडार योजना नई अन्नपूर्णा योजना में पूरी तरह शामिल होने तक जारी रहेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनकम टैक्स भरने वाले, सरकारी कर्मचारी, नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारी और पेंशन पाने वाले लोग इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। हालांकि, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) प्रक्रिया के तहत आने वाले आवेदक या SIR प्रक्रिया में न्यायिक समीक्षा का सामना कर रहे लोग इस योजना के लाभ के पात्र बने रहेंगे।

सरकार ने बताया कि जून महीने में भी लाखों लाभार्थियों के खातों में पैसे भेजे गए थे, लेकिन आने वाले चरणों में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया 1 जून से शुरू होकर 90 दिनों तक चलेगी। इस दौरान हर नगर पालिका (Municipality) में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन और सत्यापन का काम किया जाएगा, ताकि सभी पात्र लोगों को इस योजना का लाभ मिल सके।

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पश्चिम बंगाल में OBC बिल पास! TMC के समय की रिजर्वेशन लिस्ट से 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स बाहर

West Bengal OBC Bills: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार (29 जून) को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित किए। इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के समय तैयार की गई OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। नए प्रावधानों के तहत अब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से बाहर की 66 समुदायों को OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा। इनमें 54 हिंदू और 12 मुस्लिम समुदाय शामिल हैं।

नई व्यवस्था में पहले की लिस्ट की तुलना में 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स और 9 हिंदू सब-ग्रुप्स को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार की ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) की पिछली लिस्ट में 113 सब-ग्रुप्स थे। इनमें से 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम थे। हाई कोर्ट ने मई 2024 में इस लिस्ट को रद्द कर दिया था। OBC रिजर्वेशन को 17% से घटाकर 7% कर दिया था।

क्या बदला है?

पहले राज्य की OBC सूची में कुल 113 उप-समुदाय शामिल थे, जिनमें 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम समुदाय थे। मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस लिस्ट को कानूनी रूप से अस्थिर बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद OBC आरक्षण 17% से घटाकर 7% कर दिया गया था।

नई व्यवस्था में क्या होगा?

संशोधित कानून के तहत राज्य सरकार, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर OBC आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी और समय-समय पर उसमें संशोधन भी कर सकेगी। हालांकि कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होगी। सरकार को यह अधिकार भी होगा कि वह पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर OBC समुदायों को अलग-अलग कैटेगरी में वर्गीकृत करे।

आयोग की भूमिका बढ़ी

संशोधन के तहत अब कोई भी व्यक्ति OBC सूची में शामिल किए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा। यदि किसी समुदाय को सूची में गलत तरीके से शामिल या बाहर रखा गया है तो उस पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकेगी। ऐसे मामलों में पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी होंगी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव

मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जारी किए गए OBC प्रमाणपत्रों को रद्द करते हुए कहा था कि समुदायों को OBC लिस्ट में शामिल करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं अपनाई गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 66 OBC वर्गों को अधिसूचित करते हुए आरक्षण को 7% कर दिया था। राज्य सरकार का कहना है कि अब OBC सूची में किसी भी नए समुदाय को शामिल करने से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग विस्तृत जांच करेगा। उसी की सिफारिश के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

विधानसभा में जोरदार बहस

बहस के दौरान, BJP विधायकों ने आरोप लगाया कि पिछली TMC सरकार ने अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को खुश करने के लिए मुस्लिम समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों को शामिल करके जानबूझकर एक पक्षपाती OBC लिस्ट तैयार की थी। पार्टी ने यह भी दावा किया कि संशोधित लिस्ट में हिंदू समुदायों की कीमत पर मुस्लिम समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया था।

फिलहाल, TMC सरकार के समय संशोधित कानून के तहत OBC आरक्षण के लिए कैटेगरी A में 65 समुदाय और कैटेगरी B में 78 समुदाय शामिल हैं। उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी रही BJP ने TMC सरकार के समय तैयार की गई नई लिस्ट पर आपत्ति जताई थी। साथ ही दावा किया था कि उस लिस्ट में मुस्लिम पृष्ठभूमि वाले समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया, जिससे ‘हिंदू’ पृष्ठभूमि वाले समुदाय वंचित रह गए।

अब आगे क्या होगा?

इन दो बिलों के पास होने से शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा तैयार OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। ये संशोधन पिछड़ा वर्ग आयोग को OBC लिस्ट में किसी भी समुदाय को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति जताने का अधिकार भी देते हैं।

नए बिल में क्या है?

बिल में यह भी प्रावधान है कि राज्य सरकार, पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी। हालांकि आरक्षण कोटा समय-समय पर बदला जा सकता है। लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

सरकार के पास आयोग की सलाह से OBC समुदायों को उनके पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटने का अधिकार भी होगा। नया कानून, पहले की लेफ्ट फ्रंट सरकार द्वारा लाए गए आरक्षण कानून के ढांचे को फिर से लागू करता है। पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण, रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के बाद 2010 में शुरू किया गया था।

तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने (जिसका नेतृत्व स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य कर रहे थे) तत्कालीन पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री योगेश चंद्र बर्मन द्वारा पेश किए गए एक बिल के ज़रिए यह कानून बनाया था। इसमें कैटेगरी A समुदायों के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी B समुदायों के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।

ममता सरकार ने किया था बदलाव

2011 में सत्ता में आने के बाद TMC सरकार ने 2012 में कानून में संशोधन किया और कैटेगरी A में 65 समुदायों तथा कैटेगरी B में 78 समुदायों को बनाए रखा। अनुसूचित जातियों से धर्म परिवर्तन करके ईसाई बने लोगों को भी कैटेगरी B में शामिल किया गया था। इन संशोधनों के तहत मूल कानून की अनुसूचियों (schedules) को भी फिर से व्यवस्थित किया गया, जिसमें पहले की अनुसूची 1 और अनुसूची 2 को क्रमशः अनुसूची 2 और अनुसूची 3 में बदल दिया गया।

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सोमवार को पारित बिलों के तहत BJP सरकार ने लेफ्ट फ्रंट के समय की मूल अनुसूची 1 को फिर से लागू कर दिया है (जो TMC कानून के तहत अनुसूची 2 के बराबर थी)। जबकि TMC के समय की अनुसूची 1 और अनुसूची 3 को खत्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा सोमवार को पारित बिलों के तहत, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके तय किया जाएगा।

बागी गुट ने TMC चेयरपर्सन पद से हटाया पर उससे पहले ही ममता बनर्जी चल चुकी थीं अपनी चाल! इनसाइड स्टोरी अब सामने आई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद अब ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को गंवाने के खतरे से जूझ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी फाउंडर ममता बनर्जी के लिए स्थितियां और विकट तब हो गईं जब पार्टी के बागी खेमे ने उन्हें चेयरपर्सन के पद से ही हटा दिया। एक बारगी ऐसा लगा कि क्या अब टीएमसी ममता बनर्जी के हाथों से पूरी तरह फिसल गई। पर अब एक नई जानकारी सामने आ रही है।

ममता बनर्जी के खेमे ने एक बड़ा खुलासा किया है। कोलकाता में बागी गुट द्वारा एक बैठक में पार्टी संस्थापक और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाए जाने के ठीक एक दिन बाद ममता बनर्जी की ओर से एक बड़ा जवाबी दांव चला गया है।

सामने आई इनसाइड स्टोरी के मुताबिक बागी गुट द्वारा उन्हें पद से हटाए जाने से पहले ही ममता बनर्जी अपनी चाल चल चुकी थीं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की एक नई पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची तैयार कर भारतीय चुनाव आयोग को सौंप दी थी। इसमें खुद ममता बनर्जी को ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का चेयरपर्सन बताया गया है।

बागी गुट के कदम से पहले ही ममता ने सुरक्षित किया दावा

न्यूज एजेंसी पीटीआई और दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक जब बागी नेता पार्टी के भीतर संगठनात्मक तख्तापलट की तैयारी कर रहे थे ठीक उसी समय ममता बनर्जी ने 1998 में अपने द्वारा स्थापित की गई पार्टी के तंत्र पर अपना नियंत्रण सुरक्षित करने के लिए कदम उठा दिया था। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने बताया कि शनिवार को ही पार्टी के नए नेतृत्व ढांचे और 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को अंतिम रूप दे दिया गया था।

सोमवार दोपहर को ही इस सूची को चुनाव आयोग के पास जमा कर दिया गया था। यह सब तब हुआ जब कोलकाता में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट खेमे ने अपना विशेष सत्र भी आयोजित नहीं किया था।

ममता खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई को बताया कि जब बागी खेमा अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने की तैयारियां कर रहा था, तब ममता बनर्जी ने पहले ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दे दिया था और टीएमसी की चेयरपर्सन के रूप में यह सूची चुनाव आयोग को भेज दी थी।

ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग भेजी गई लिस्ट में कौन-कौन?

चुनाव आयोग को सौंपे गए आधिकारिक दस्तावेज पर खुद ममता बनर्जी के हस्ताक्षर हैं। इस नई सूची में निम्नलिखित नेताओं को प्रमुख पदाधिकारी बनाया गया है-

चेयरपर्सन: ममता बनर्जी

उपाध्यक्ष: सुब्रत बख्शी

राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता: अभिषेक बनर्जी

संयुक्त सचिव और राज्यसभा नेता: डेरेक ओ’ब्रायन

संयुक्त सचिव: डोला सेन

कोषाध्यक्ष: सुभाशीष चक्रवर्ती

ममता के करीबी नेताओं ने बताया कि चुनाव आयोग को भेजी गई इस नई कमेटी का ढांचा पुराने संगठनात्मक प्रबंधों से बिल्कुल अलग है। इस लिस्ट से असंतुष्ट और बागी खेमे से जुड़े कई नेताओं की छुट्टी कर दी गई है। यहां तक कि इस महीने की शुरुआत में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का हिस्सा रहे अरूप बिस्वास को भी इस संशोधित सूची से बाहर कर दिया गया है।

दूसरी तरफ बागी गुट ने अरूप रॉय को चुना नया चेयरपर्सन

दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को कोलकाता में हुए विशेष सत्र के बाद पार्टी में संगठनात्मक विभाजन को और गहरा कर दिया। बागी खेमे ने घोषणा की कि उन्होंने ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटा दिया है और उनकी जगह वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुना है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की। बागी खेमे का दावा है कि यह विशेष सत्र तृणमूल कांग्रेस के संविधान के अनुसार ही बुलाया गया था और इस सत्र में लिए गए सभी फैसलों की जानकारी औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को दी जाएगी।

ममता खेमे का पलटवार- यह सिर्फ एक कॉमेडी शो और सर्कस है

ममता बनर्जी खेमे ने बागियों के इस पूरे सत्र और अभ्यास को पूरी तरह से अमान्य और खारिज कर दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि असंतुष्ट नेताओं के पास न तो ऐसा सत्र बुलाने का कोई अधिकार था और न ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बदलने का कोई जनादेश था।

कुणाल घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि, ‘यह एक कॉमेडी शो है। एक व्यक्ति जिसे टीएमसी से निष्कासित किया जा चुका है, वह विशेष सत्र आयोजित कर रहा है। यह मामला कोर्ट में है और हमें विश्वास है कि न्याय होगा। हम इस तरह के हास्यास्पद व्यवहार को कोई महत्व नहीं देते हैं। टीएमसी का मतलब ही ममता बनर्जी है, बाकी सब एक सर्कस है।’

कई बड़े नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी

पार्टी के भीतर बगावत पर कड़ा रुख अपनाते हुए ममता बनर्जी खेमे की अनुशासन समिति ने कई वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष, बिप्लव मित्रा, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यास्मिन के नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

ममता बनर्जी के लिए आगे क्या? लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के आसार

कोलकाता के एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग किस संगठनात्मक ढांचे को वैध और असली टीएमसी के रूप में मान्यता देगा। दोनों गुटों द्वारा किए जा रहे परस्पर विरोधी दावों ने टीएमसी के भीतर संकट को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां दोनों धड़े अब पार्टी की विधायी और संगठनात्मक दोनों शाखाओं पर अपना दावा ठोक रहे हैं।

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ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि यह विवाद चुनाव आयोग के सामने लड़ा जाएगा और अंततः अदालतों तक भी पहुंच सकता है। इससे एक बात तो साफ है कि ममता बनर्जी द्वारा 1998 में स्थापित की गई इस पार्टी पर नियंत्रण के लिए एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का मंच तैयार हो गया है।

ममता बनर्जी के हाथों से फिसली TMC की कमान, तृणमूल के बागी 58 विधायकों ने अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना

TMC Crisis Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी सबसे बड़े संकट से जूझ रही हैं। ममता बनर्जी का अब पार्टी पर कंट्रोल भी खत्म हो गया है। तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में विपक्ष के नेता रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुन लिया है। यह पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब TMC के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है।

बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। जबकि रीताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। इस नए ढांचे के जरिए बागी गुट ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद से प्रभावी रूप से हटा दिया है।

रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बैठक के बाद रीताब्रता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “तृणमूल कांग्रेस नेताओं और सदस्यों के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।” बागी गुट के नेता ने इस प्रक्रिया को वैध ठहराने की कोशिश करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है।

विशेष सत्र का डिटेल्स निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। बागी गुट के सूत्रों के अनुसार, रीताब्रता बनर्जी ने न्यू टाउन के एक होटल में बैठक की, जिसमें कोलकाता नगर निगम के लगभग 60 विधायक और 70 पार्षद मौजूद थे। उन्होंने इन फैसलों का समर्थन किया।

संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू

उन्होंने कहा, “यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे।” बनर्जी ने कहा, “हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा।” उन्होंने बताया कि नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा। बनर्जी ने कहा, “हम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के एक पैनल का गठन करेंगे।”

440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर भी रोक

इस बीच, पुलिस ने बागी विधायकों की शिकायत पर पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर भी रोक लगा दी है। ये शिकायतें वित्तपोषण के स्रोत को लेकर की गई थीं। हालांकि, बनर्जी ने ममता के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो बागी गुट की मुख्य सलाहकार बन सकती हैं। उन्होंने कहा, “यदि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है।”

ममता गुट का बयान

ममता बनर्जी के खेमे ने हालांकि इस पूरी कवायद को सिरे से खारिज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागियों को पार्टी संविधान के तहत ऐसा कोई सत्र बुलाने या संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “तृणमूल और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पूरक हैं। बागियों के पास ऐसा करने की कोई शक्ति नहीं है।”

ममता के वफादार नेताओं ने संकेत दिया है कि यह मामला अब पार्टी की वैधता को लेकर कानूनी लड़ाई में बदल सकता है। एक वफादार नेता ने बताया कि पार्टी की अनुशासन समिति जल्द ही बागी गतिविधियों में शामिल होने के लिए अरूप रॉय, फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास सहित अन्य नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी।

यह विशेष सत्र पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में उत्पन्न अभूतपूर्व संकट के बीच आयोजित किया गया। कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने विपक्ष के नेता पद के लिए रीताब्रता बनर्जी के दावे का समर्थन किया था। साथ ही पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। बागी गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और बढ़ गई है।

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हाल में पार्टी को संसद में एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया। साथ ही BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने की घोषणा की है।

Monsoon Rain crisis: 18 जून तक इस इलाके में हुई सिर्फ 2% बुवाई, बारिश का ये आंकड़ा तो डरा रहा है!

Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्ती और बारिश में हो रही देरी ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। पानी की कमी और रूठे मानसून की वजह से इस क्षेत्र के आठ जिलों में खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक मराठवाड़ा में बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले महज 2 प्रतिशत रह गया है। सूखे की मार झेलने वाले इस इलाके के किसानों और प्रशासन के लिए बारिश और बुवाई का यह आंकड़ा बेहद डराने वाला है।

बुवाई के आंकड़े: 10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले सिर्फ 1 लाख हेक्टेयर

मराठवाड़ा मध्य महाराष्ट्र का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यहां की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पीटीआई ने एक रिपोर्ट को कोट करते हुए बताया है कि यहां बारिश में देरी से बुवाई के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट आई है। इस साल 18 जून तक पूरे क्षेत्र में अब तक केवल 1.07 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर ही बुवाई हो पाई है। पिछले साल इसी दिन तक यह आंकड़ा 10.77 लाख हेक्टेयर था। पिछले पांच वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में औसतन लगभग 49.72 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलें बोई जाती रही हैं। आंकड़ों से साफ है कि पिछले साल 18 जून तक जितनी बुवाई हुई थी, उसकी तुलना में इस साल अब तक केवल 2 प्रतिशत ही बुवाई हो सकी है।

जिलावार बुवाई का हाल (बीड सबसे आगे, लातूर सबसे पीछे)

मराठवाड़ा के कुल आठ जिले (छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली और नांदेड़) बारिश की इस देरी का सीधा खामियाजा भुगत रहे हैं। इन 1.07 लाख हेक्टेयर में से आधी से ज्यादा बुवाई (68,572 हेक्टेयर) अकेले बीड जिले में हुई है। दूसरे जिले अपने ऐतिहासिक स्तर से मीलों पीछे हैं। उदाहरण के तौर पर छत्रपति संभाजीनगर में पिछले साल इसी अवधि में 1.64 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी जबकि इस साल यहां सिर्फ 3072 हेक्टेयर में ही फसल बोई जा सकी है।

बारिश और जलाशयों का गहराता संकट

बुवाई में इस भयंकर गिरावट का सीधा कारण बारिश का न होना और जलाशयों में पानी की कमी है। एक अधिकारी के मुताबिक, जून महीने में मराठवाड़ा में औसतन 98.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन 18 जून तक इस क्षेत्र में अपने सामान्य कोटे की मात्र 42.7% बारिश (यानी सिर्फ 42.7 मिमी) ही दर्ज की गई है। मराठवाड़ा में मौजूद 11 प्रमुख मेगा प्रोजेक्ट्स (बांधों) में जल स्तर लगातार गिर रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक इन बांधों में सिर्फ 60.84 टीएमसी (Thousand Million Cubic Feet – tmc) पानी बचा था, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 67.35 टीएमसी था।

Jahangir Khan: TMC के ‘पुष्पा’ जहांगीर खान की पत्नी सरीना भी गिरफ्तार, पति को छुड़ाने के लिए किया था बवाल

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान की पत्नी सरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया। उन पर पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों पर हमला करने का आरोप है। 37 वर्षीय सरीना बीबी को फलता थाना क्षेत्र में हुई हिंसा के मामले में हिरासत में लिया गया। आरोप है कि उन्होंने दो दिन पहले थाने के बाहर हुए हंगामे के दौरान अपने पति जहांगीर खान को पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश की थी। इसी घटना को लेकर पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है।

पुलिस पर हमला करने का आरोप 

रिपोर्टों के अनुसार, फलता पुलिस थाने में हुई हिंसा के मामले में अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि सरीना बीबी ने अपने पति जहांगीर खान की रिहाई की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन की अगुवाई की थी। जहांगीर खान 8 जून से पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि उन्हें नेपाल सीमा के पास उस समय पकड़ा गया था, जब वे कथित तौर पर देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरीना बीबी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। उनका आरोप था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और ऐसी गतिविधियों में देश-विरोधी तत्व शामिल हो सकते हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

मुख्यमंत्री ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

फलता में हाल ही में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि दोषी पाए जाने वाले लोगों की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कानून का पालन करना सभी के लिए जरूरी है और किसी को भी व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सरीना बीबी अपने पति जहांगीर खान को कमर में रस्सी बांधकर सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने से नाराज थीं। आरोप है कि इसी वजह से उन्होंने पुलिस थाने पर हमले की योजना बनाई। पुलिस का यह भी दावा है कि गिरफ्तारी के बाद जहांगीर खान को कई बार फलता की सड़कों पर घुमाया गया था।

 जहांगीर खान का गढ़ था फालता

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान ने फलता इलाके में अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई थी। फलता, अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीर खान उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उनका आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के साथ सार्वजनिक विवाद हुआ था। उस चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, जिसके बाद फलता में दूसरे चरण का मतदान रद्द कर दिया गया था। उस समय जहांगीर खान तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार थे।

बाद में एक नाटकीय घटनाक्रम में जहांगीर खान ने दोबारा मतदान से पहले चुनाव मैदान से अपना नाम वापस ले लिया। चुनाव प्रचार के दौरान वे खुद की तुलना तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार से करते थे। उनके चुनाव से हटने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यह सीट रिकॉर्ड अंतर से जीत ली। धमकी देने और चुनावी गड़बड़ियों से जुड़े आरोपों के कारण जांच एजेंसियां भी लंबे समय से जहांगीर खान की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं।

ममता बनर्जी के साथ साये की तरह रहने वाले पुलिस वालों को हटाया, क्या है इनसाइड स्टोरी?

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने उनके पुराने सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को हटाकर नई टीम तैनात की, लेकिन ममता बनर्जी ने नए सुरक्षाकर्मियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

टीएमसी के मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ करीब 20 साल से जुड़े सुरक्षा अधिकारी अचानक हटा दिए गए हैं। इसके बाद उनके कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर फिलहाल कोई आधिकारिक सरकारी सुरक्षा तैनात नहीं है। पार्टी का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो निजी गार्ड लगाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के पांच पीएसओ उस समय से उनके साथ थे जब वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री थीं। बाद में 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इन अधिकारियों को राज्य पुलिस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया था। हाल ही में उन्हें उनकी मूल यूनिट में वापस भेजने के निर्देश दिए गए, जबकि कोलकाता पुलिस ने उनकी जगह तीन नए सुरक्षाकर्मी भेजे। ममता ने इन नए अधिकारियों को स्वीकार नहीं किया।

मामला तब चर्चा में आया जब टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी के पुराने सुरक्षा अधिकारी हटा दिए गए हैं और उनके घर के बाहर कोई सुरक्षा तैनात नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पूरी रात अपने वाहन के साथ घर के बाहर मौजूद रहेंगे, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।

टीएमसी ने इस कदम को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह ममता बनर्जी को अलग-थलग करने और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है।

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राजनीति का नहीं, बल्कि सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी का विषय है।

वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता को बिना जानकारी दिए लंबे समय से जुड़े सुरक्षाकर्मियों को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु से पुराने सुरक्षा इंतजाम बहाल करने और ममता के दो पुराने पीएसओ को वापस लाने की मांग की।

टीएमसी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा समर्थित नई सत्ता व्यवस्था आने के बाद से ममता बनर्जी के आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे कम की गई है। पहले हरिश चटर्जी स्ट्रीट पर लगे बैरिकेड हटाए गए और अब उनके पुराने सुरक्षाकर्मियों को भी हटा दिया गया है।

इसके अलावा, ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर की सुरक्षा भी सरकार बदलने के बाद वापस ले ली गई थी।

फिलहाल इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताकर भाजपा और राज्य प्रशासन पर लगातार निशाना साध रही है।

त्रिपुरा चुनाव में कुल 822 वोट पाने वाली पार्टी (NCPI) लोकसभा में बनी NDA की नई ‘पॉवर प्लेयर’!

NCPI

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसद, जो कल तक दीदी के “माँ, माटी, मानुष” के सुर में सुर मिला रहे थे, अचानक एक रात में 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के रंग में रंग गए। लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया गया और देखते ही देखते दिल्ली के सियासी गलियारों में एक नया 'मर्जर' (विलेय) इतिहास रच दिया गया।

सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आपने आज से पहले इस पार्टी का नाम कब सुना था? कोई लिख रहा है कि 'मुझे तो लगा शायद यह कोई नया कॉर्पोरेट स्टार्टअप है जो “राष्ट्रवाद + सिटीजनशिप” का कॉम्बो पैक बेच रहा है”।

लेकिन रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि इस पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुल 822 वोट हासिल किए थे। जी हां, सिर्फ 822! इतने वोट तो हमारे देश में किसी बड़े गांव की पंचायत के चुनाव में नोटा (NOTA) को मिल जाते हैं। इनका चुनाव चिन्ह था— 'पेन की निब'। शायद इसीलिए सांसदों को इस पार्टी से इतना लगाव हुआ, क्योंकि आखिरकार 'इस्तीफा' और 'विलय' की एप्लीकेशन लिखने के लिए पेन की जरूरत तो पड़ती ही है।

सियासी विरोधाभास का चरम देखिए: इस छोटी सी पार्टी का कभी पुराना नारा हुआ करता था— “दलबदलू नेताओं को खारिज करो!” आज उसी पार्टी के जहाज पर 20 बड़े बागी नेता सवार हो चुके हैं।

कानूनी खेल और दीदी का 'माइग्रेशन'
बागी सांसद कह रहे हैं— “चूंकि हम कुल संख्या के दो-तिहाई (2/3) हैं, इसलिए कानूनन हमारा विलय पक्का है। बाकी की लड़ाई कोर्ट और चुनाव आयोग में देख लेंगे।” यानी फॉर्मूला सीधा है— पहले किसी छोटे से घर में घुस जाओ, फिर दावा करो कि असली महल के मालिक भी हमीं हैं!

ममता दीदी इस समय क्या सोच रही होंगी? शायद “माँ, माटी, मानुष” के नारे को बदलकर “माँ, माटी, माइग्रेशन” करने का वक्त आ गया है। अभिषेक बनर्जी स्पीकर साहब को चिट्ठी लिख रहे हैं कि “यह सब फर्जीवाड़ा है, पार्टी एक है।” दूसरी तरफ, ये 20 सांसद कोरस में गा रहे हैं— “हम तो कब के 'नेशनलिस्ट सिटीजन' हो गए, जो पीछे छूट गए वो गुजरे जमाने के हैं।”

राजनीति का नया 'यूनिकॉर्न'
यह भारतीय राजनीति का आधुनिक बिजनेस मॉडल है:

  • अगर अपनी मूल पार्टी में मन न लगे, तो एक गुमनाम पार्टी ढूंढो।
  • उसमें सामूहिक रूप से (2/3 बहुमत के साथ) मर्ज हो जाओ ताकि दलबदल कानून की तलवार न चले।
  • सत्ताधारी गठबंधन (NDA) को समर्थन देकर रातों-रात वीआईपी बन जाओ।

आज टीडीपी (TDP) और जेडीयू (JD-U) जैसी क्षेत्रीय पार्टियां भी सोच रही होंगी कि हम सालों से जमीन पर पसीना बहा रहे हैं, और ये लोग एक रात के 'मर्जर' से एनडीए में सीधे वीआईपी लाउंज में एंट्री पा गए! साफ है कि भारतीय राजनीति अब विचारधाराओं का अखाड़ा नहीं, बल्कि 'कॉर्पोरेट मर्जर और एक्विजिशन' (M&A) की बड़ी मंडी बन चुकी है। यहाँ नेता अब जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि 'प्रॉडक्ट' हैं, और 822 वोट वाली छोटी पार्टियां रातों-रात राजनीति की 'यूनिकॉर्न' बन रही हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal