त्रिपुरा चुनाव में कुल 822 वोट पाने वाली पार्टी (NCPI) लोकसभा में बनी NDA की नई ‘पॉवर प्लेयर’!

NCPI

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसद, जो कल तक दीदी के “माँ, माटी, मानुष” के सुर में सुर मिला रहे थे, अचानक एक रात में 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) के रंग में रंग गए। लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया गया और देखते ही देखते दिल्ली के सियासी गलियारों में एक नया 'मर्जर' (विलेय) इतिहास रच दिया गया।

सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आपने आज से पहले इस पार्टी का नाम कब सुना था? कोई लिख रहा है कि 'मुझे तो लगा शायद यह कोई नया कॉर्पोरेट स्टार्टअप है जो “राष्ट्रवाद + सिटीजनशिप” का कॉम्बो पैक बेच रहा है”।

लेकिन रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि इस पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुल 822 वोट हासिल किए थे। जी हां, सिर्फ 822! इतने वोट तो हमारे देश में किसी बड़े गांव की पंचायत के चुनाव में नोटा (NOTA) को मिल जाते हैं। इनका चुनाव चिन्ह था— 'पेन की निब'। शायद इसीलिए सांसदों को इस पार्टी से इतना लगाव हुआ, क्योंकि आखिरकार 'इस्तीफा' और 'विलय' की एप्लीकेशन लिखने के लिए पेन की जरूरत तो पड़ती ही है।

सियासी विरोधाभास का चरम देखिए: इस छोटी सी पार्टी का कभी पुराना नारा हुआ करता था— “दलबदलू नेताओं को खारिज करो!” आज उसी पार्टी के जहाज पर 20 बड़े बागी नेता सवार हो चुके हैं।

कानूनी खेल और दीदी का 'माइग्रेशन'
बागी सांसद कह रहे हैं— “चूंकि हम कुल संख्या के दो-तिहाई (2/3) हैं, इसलिए कानूनन हमारा विलय पक्का है। बाकी की लड़ाई कोर्ट और चुनाव आयोग में देख लेंगे।” यानी फॉर्मूला सीधा है— पहले किसी छोटे से घर में घुस जाओ, फिर दावा करो कि असली महल के मालिक भी हमीं हैं!

ममता दीदी इस समय क्या सोच रही होंगी? शायद “माँ, माटी, मानुष” के नारे को बदलकर “माँ, माटी, माइग्रेशन” करने का वक्त आ गया है। अभिषेक बनर्जी स्पीकर साहब को चिट्ठी लिख रहे हैं कि “यह सब फर्जीवाड़ा है, पार्टी एक है।” दूसरी तरफ, ये 20 सांसद कोरस में गा रहे हैं— “हम तो कब के 'नेशनलिस्ट सिटीजन' हो गए, जो पीछे छूट गए वो गुजरे जमाने के हैं।”

राजनीति का नया 'यूनिकॉर्न'
यह भारतीय राजनीति का आधुनिक बिजनेस मॉडल है:

  • अगर अपनी मूल पार्टी में मन न लगे, तो एक गुमनाम पार्टी ढूंढो।
  • उसमें सामूहिक रूप से (2/3 बहुमत के साथ) मर्ज हो जाओ ताकि दलबदल कानून की तलवार न चले।
  • सत्ताधारी गठबंधन (NDA) को समर्थन देकर रातों-रात वीआईपी बन जाओ।

आज टीडीपी (TDP) और जेडीयू (JD-U) जैसी क्षेत्रीय पार्टियां भी सोच रही होंगी कि हम सालों से जमीन पर पसीना बहा रहे हैं, और ये लोग एक रात के 'मर्जर' से एनडीए में सीधे वीआईपी लाउंज में एंट्री पा गए! साफ है कि भारतीय राजनीति अब विचारधाराओं का अखाड़ा नहीं, बल्कि 'कॉर्पोरेट मर्जर और एक्विजिशन' (M&A) की बड़ी मंडी बन चुकी है। यहाँ नेता अब जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि 'प्रॉडक्ट' हैं, और 822 वोट वाली छोटी पार्टियां रातों-रात राजनीति की 'यूनिकॉर्न' बन रही हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal