मछली खाने के शौकीन जरूर पढ़ें, गर्मी के मौसम में कौन-सी फिश पहुंचाती है सबसे ज्यादा फायदा

गर्मियों में खानपान को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि इस मौसम में पाचन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। खासकर सी-फूड पसंद करने वाले लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि गर्मी के दिनों में किस तरह की मछली खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। दरअसल, मछली पोषण का बेहतरीन स्रोत मानी जाती है, लेकिन मौसम के अनुसार सही विकल्प चुनना भी उतना ही जरूरी है। कुछ मछलियां शरीर पर हल्का असर डालती हैं, जबकि कुछ को पचाने में ज्यादा समय लग सकता है।

ऐसे में विशेषज्ञों की राय जानना जरूरी हो जाता है। अगर आप भी गर्मियों में मछली खाने के शौकीन हैं, तो यह जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है कि कौन-सी मछली इस मौसम में आपकी सेहत और पाचन के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है

गर्मी के मौसम में छोटी मछली क्यों मानी जाती है बेहतर?

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मानसून और गर्मियों जैसे उमस भरे मौसम में छोटी मछलियां शरीर के लिए ज्यादा अनुकूल साबित हो सकती हैं। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं।

पेट पर नहीं डालती ज्यादा बोझ

गर्मियों में पाचन तंत्र अपेक्षाकृत धीमा काम करता है। बड़ी मछलियों में प्रोटीन और फैट की मात्रा अधिक होती है, जिन्हें पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। वहीं छोटी मछलियां अपेक्षाकृत हल्की होती हैं और आसानी से पच जाती हैं।

शरीर की गर्मी को रखती हैं संतुलित

विशेषज्ञों के मुताबिक बड़ी मछलियों को पचाने की प्रक्रिया में शरीर अधिक ऊर्जा खर्च करता है, जिससे अंदरूनी गर्मी बढ़ सकती है। इसके विपरीत छोटी मछलियां शरीर पर कम दबाव डालती हैं और मौसम के अनुरूप बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।

ताजगी का फायदा, संक्रमण का खतरा कम

गर्मी के दिनों में खाने की चीजों के जल्दी खराब होने का खतरा रहता है। बड़ी मछलियां कई बार लंबे समय तक स्टोर की जाती हैं, जबकि छोटी मछलियां अक्सर ताजा पकड़ी और जल्दी बेची जाती हैं। यही वजह है कि इनके सेवन से फूड पॉइजनिंग का जोखिम अपेक्षाकृत कम माना जाता है।

हड्डियों के लिए पोषण का पावरहाउस

कई छोटी मछलियां कांटों सहित खाई जाती हैं। इससे शरीर को कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन D जैसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

बड़ी मछली पसंद है तो इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप बड़ी मछली खाना पसंद करते हैं, तो ताजगी की जांच जरूर करें। मछली की आंखें साफ और गलफड़े लाल होने चाहिए। साथ ही बहुत बड़ी मछली की बजाय मध्यम आकार की ताजी मछली चुनना बेहतर माना जाता है।

स्वाद भी बरकरार, पाचन भी आसान

गर्मियों में मछली को डीप फ्राई करने के बजाय हल्की ग्रेवी या कम तेल में पकाकर खाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। टमाटर, धनिया और हल्के मसालों से बनी करी स्वाद बढ़ाने के साथ पाचन को भी आसान बनाती है।

सही चुनाव ही है सेहत की कुंजी

मछली चाहे छोटी हो या बड़ी, उसकी ताजगी और पकाने का तरीका सबसे ज्यादा मायने रखता है। हालांकि गर्मियों में हल्की, ताजी और आसानी से पचने वाली छोटी मछलियां सेहत के लिहाज से बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।

मानसून पर ‘विलेन’ अल नीनो का ग्रहण : 5 राज्यों में सूखे का खतरा, IMD की चिंताजनक चेतावनी

Indian Monsoon Update 2026

प्रशांत महासागर में बन रही एक वैश्विक मौसमी घटना भारत के मानसून के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआती प्रगति के बाद कई क्षेत्रों में इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिसके चलते देश के अनेक हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है।
 

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अगले कुछ महीनों तक बना रहता है, तो न केवल मानसून कमजोर पड़ सकता है, बल्कि कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और खाद्य कीमतों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। ALSO READ: Monsoon : मौसम के महादानव अल-नीनो को परास्त करेगा Indian Ocean Dipole, जानिए कैसे होगी झमाझम बारिश

क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ जाती है चिंता?

'अल नीनो' (El Niño) प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसके कारण वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में मानसून कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार अल नीनो का प्रभाव जून से ही दिखाई देने लगा है। यदि इसकी तीव्रता बढ़ती है, तो मानसून सीजन के मध्य और अंतिम चरण में वर्षा की कमी और अधिक गंभीर हो सकती है।

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा?

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अल नीनो लंबे समय तक सक्रिय रहा, तो देश के पांच प्रमुख कृषि राज्यों पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है:

  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • उत्तरी कर्नाटक

Indian Monsoon Update 2026

इन राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका है।

 

शहरों में भी बढ़ रहा जल संकट

सूखे का खतरा केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। देश के कई बड़े शहर पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं।
 

विशेषज्ञों का कहना है कि जल संचयन और वर्षा जल संरक्षण की दिशा में पर्याप्त प्रगति न होने के कारण कई महानगर मानसून पर अत्यधिक निर्भर हैं। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो मुंबई, पुणे समेत कई शहरों में जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है।
 

जल विशेषज्ञों का मानना है कि अब जल संरक्षण, रीसाइक्लिंग और वर्षा जल संग्रहण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है। ALSO READ: 5 चक्रव्यूह में फंसा मानसून, बारिश को तरसते 7 राज्यों में पारा 40°C के पार, जानें आपके शहर का हाल

 

क्या 2026-27 की गर्मियां रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं?

मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के प्रभाव के चलते आगामी वर्षों में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है।
 

कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के कई हिस्सों में गर्मी की तीव्रता बढ़ सकती है और हीटवेव की घटनाएं अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे हालात में कई क्षेत्रों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।

किसानों पर दोहरी मार

कम बारिश का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, यदि वर्षा में उल्लेखनीय कमी बनी रहती है, तो खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें प्रभावित हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • धान
  • तुअर और मूंग जैसी दालें
  • सोयाबीन और मूंगफली जैसे तिलहन
  • कपास
  • बाजरा
  • फल और सब्जियां

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अचानक फसल पैटर्न नहीं बदल सकते, क्योंकि खेती केवल तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था से भी जुड़ी होती है।

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महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

कृषि उत्पादन घटने का सीधा असर बाजार पर पड़ता है।

यदि उत्पादन कम हुआ और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ी, तो खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। दाल, तेल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।

राहत की खबर भी है

हालांकि स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है, जो किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने में मदद कर सकता है। इसके अलावा :

  • देश का सिंचित क्षेत्र पिछले दशक में बढ़ा है।
  • मौसम पूर्वानुमान तकनीक पहले से अधिक सटीक हुई है।
  • AI आधारित कृषि सलाह किसानों को समय रहते निर्णय लेने में मदद कर रही है।
  • केंद्र और राज्य सरकारें लगातार निगरानी कर रही हैं।

विशेषज्ञों की सलाह: किसान क्या करें?

विशेषज्ञों ने किसानों को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

✔ एक ही फसल पर पूरी निर्भरता से बचें।

✔ मिश्रित खेती अपनाएं।

✔ कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें।

✔ मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बुआई की योजना बनाएं।

✔ सूखा प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा बुआई का जोखिम सोच-समझकर लें।

उम्मीद की किरण: IOD बन सकता है गेमचेंजर

मौसम वैज्ञानिकों की नजर अब 'पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) पर है। यदि मानसून के उत्तरार्ध में पॉजिटिव IOD सक्रिय होता है, तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है और देश के कई हिस्सों में अतिरिक्त वर्षा का कारण बन सकता है।
 

फिलहाल देश की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। आने वाले कुछ सप्ताह तय करेंगे कि अल नीनो भारत के लिए केवल एक मौसमी चुनौती साबित होगा या फिर यह खेती, पानी और महंगाई से जुड़ा बड़ा राष्ट्रीय संकट बन जाएगा।

 

बालकनी, छत या गमलों में उगाएं अपनी पसंदीदा सब्जियां, मानसून में मिलेगा शानदार रिजल्ट

मानसून का मौसम किचन गार्डन शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है क्योंकि इस दौरान नमी और ठंडक पौधों की ग्रोथ को तेजी से बढ़ाते हैं। अच्छी बात यह है कि इसके लिए बड़े बगीचे या आंगन की जरूरत नहीं होती, बल्कि बालकनी, छत या छोटे गमलों में भी आसानी से सब्जियां उगाई जा सकती हैं। थोड़ी सी सही देखभाल, उपयुक्त मिट्टी और नियमित पानी देने से कई तरह की हरी सब्जियां और हर्ब्स घर पर ही तैयार हो सकते हैं।

यह न सिर्फ ताजा और ऑर्गेनिक खाने का विकल्प देता है, बल्कि बाजार पर निर्भरता भी कम करता है। कुछ ही हफ्तों में पौधे तैयार होकर उपज देने लगते हैं, जिससे रसोई में ताजी सब्जियों की उपलब्धता बनी रहती है और सेहत भी बेहतर रहती है।

करेला

मानसून की नमी करेले की बेल को तेजी से बढ़ने में मदद करती है। इसे सहारा देने के लिए जाली या ट्रेलिस जरूरी होता है। गर्म और उमस भरा मौसम इसकी ग्रोथ के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

हरी मिर्च

हरी मिर्च मानसून में आसानी से उगने वाली सब्जियों में से एक है। बस ध्यान रखें कि मिट्टी में पानी जमा न हो। रोज कुछ घंटे धूप मिल जाए तो पौधा ज्यादा फल देता है।

लौकी

लौकी की बेल बारिश में तेजी से फैलती है और ज्यादा मेहनत नहीं मांगती। इसे गमले या छत पर आसानी से उगाया जा सकता है। बेहतर ग्रोथ के लिए इसे सपोर्ट यानी जाली देना जरूरी है।

तोरई

तोरई मानसून में बहुत अच्छी तरह बढ़ती है। नियमित पानी और धूप मिलने पर यह भरपूर उत्पादन देती है। सही जगह और थोड़ी देखभाल से यह पौधा जल्दी तैयार हो जाता है।

पालक

अगर आपके पास कम जगह है तो पालक सबसे अच्छा विकल्प है। यह जल्दी तैयार हो जाता है और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। गमलों में इसे आसानी से उगाया जा सकता है।

मेथी

मेथी मानसून में बोई जाती है और बाद में ताजी पत्तियों का अच्छा उत्पादन देती है। नियमित कटाई से इसकी ग्रोथ और बेहतर हो जाती है।

धनिया

धनिया बहुत तेजी से बढ़ने वाला पौधा है और बार-बार काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में नमी बनाए रखना इसकी सबसे बड़ी जरूरत है।

बैंगन

बैंगन मानसून में अच्छा उत्पादन देता है लेकिन कीड़ों से बचाव जरूरी होता है। सही धूप, खाद और पानी के संतुलन से यह लंबे समय तक फल देता है।

कल का मौसम 22 June: IMD ने इन 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया, दिल्ली हरियाणा राजस्थान तक आंधी तूफान, चेक करिए Weather

देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। एक तरफ दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और लू की स्थिति बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 22 जून के लिए कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में जोरदार बारिश देखने को मिल सकती है, जबकि मध्य भारत और कुछ उत्तरी राज्यों में लू का असर बना रहेगा।

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक, असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इन राज्यों के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है, जिससे निचले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वी भारत के राज्यों बिहार, झारखंड और ओडिशा में मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है। यहां कई जगहों पर बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने इन राज्यों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान की चेतावनी दी है। बिहार में कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दक्षिण भारत में भी मानसून का असर साफ दिखाई दे रहा है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कई स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। कोंकण और गोवा तथा लक्षद्वीप में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इन इलाकों में बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई है।

दिल्ली हरियाणा राजस्थान तक आंधी तूफान

उत्तर भारत में भी मौसम करवट ले रहा है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

राजस्थान के लिए मौसम विभाग ने विशेष चेतावनी जारी की है। पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है, जबकि झोंकों की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी आंधी आने की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

गर्मी का प्रकोप भी रहेगा जारी 

हालांकि देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का प्रकोप अभी भी जारी है। छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में लू चलने की संभावना है। वहीं विदर्भ क्षेत्र में लू से लेकर भीषण लू तक की स्थिति बनी रह सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, अधिक पानी पीने और शरीर को ठंडा रखने की सलाह दी है। विदर्भ में गर्म रातों की स्थिति भी बनी रह सकती है, जिससे लोगों को रात में भी राहत मिलने की संभावना कम है।

इस बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुकी है। मौसम विभाग का कहना है कि 23 जून के आसपास मानसून इन राज्यों के और अधिक क्षेत्रों तथा छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इससे किसानों को राहत मिलने के साथ-साथ खेती के कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।

समुद्री क्षेत्रों के लिए भी चेतावनी जारी की गई है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति झोंकों के साथ 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर आने वाले दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सक्रिय बना रहेगा। कहीं भारी बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है तो कहीं लू का असर जारी रहेगा। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।

IMD Heavy Rain Alert: मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 23 जून तक इन राज्यों में पहुंचेगी बारिश….IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट

देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। एक तरफ दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में जोरदार बारिश देखने को मिल सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी लू का असर बना रहेगा।

दो दिन में आगे बढ़ेगा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुकी है। मौसम की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं और 23 जून के आसपास मानसून के इन राज्यों के और अधिक क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावना है। इससे किसानों और आम लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

इन राज्यों में होगी भारी बारिश 

पूर्वोत्तर भारत में अगले कई दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में लगातार बारिश होने की संभावना जताई गई है। मेघालय और असम के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है। इसके चलते निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा बना हुआ है।

पूर्वी भारत की बात करें तो बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने वाली हैं। बिहार और ओडिशा में कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तर भारत में ऐसा रहेगा मौसम

उत्तर भारत में भी मौसम का असर दिखाई देगा। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। राजस्थान में आंधी और धूल भरी हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं कर्नाटक और केरल में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बन सकती है।

पश्चिमी भारत में कोंकण, गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। कोंकण और गोवा में 22 जून के बाद भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।

यहां दिखेगा  गर्मी का प्रकोप

हालांकि देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का प्रकोप अभी भी जारी है। विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कुछ इलाकों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। विदर्भ में कई स्थानों पर गंभीर लू की स्थिति बनी रह सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और शरीर को ठंडा रखने की सलाह दी है।

मौसम विभाग ने भारी बारिश वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने, यातायात संबंधी सलाह का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। वहीं बिजली गिरने और तेज आंधी की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को पेड़ों के नीचे खड़े न होने और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम के लिहाज से काफी सक्रिय रहने वाला है। जहां कई राज्यों में मानसून राहत की बारिश लेकर आएगा, वहीं कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और लू दोनों की चुनौती बनी रहेगी। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की जरूरत है।

Monsoon Update: 23 जून से फिर रफ्तार पकड़ेगा मानसून, जुलाई के पहले सप्ताह तक दिल्ली पहुंचने के संकेत

देशभर में मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिया है कि 23 जून के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। 8 जून से दक्षिण महाराष्ट्र में रुका हुआ मानसून अब दोबारा उत्तर और पूर्व दिशा की ओर बढ़ सकता है, जिससे कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है।

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मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। वहीं, छत्तीसगढ़ में भी जल्द मानसून की एंट्री होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो मानसून जुलाई के पहले सप्ताह तक दिल्ली पहुंच सकता है।

 

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में सक्रिय है मानसून

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 21 जून को अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में पूरे सप्ताह भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

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कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी ने पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। असम और मेघालय में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ओडिशा, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है।

 

पिछले 24 घंटों के दौरान असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और झारखंड में भी तेज बारिश हुई है।

 

मध्य और पश्चिम भारत में गर्मी का असर बरकरार

 

एक ओर जहां पूर्वी भारत में मानसून सक्रिय है, वहीं मध्य और पश्चिम भारत के कई इलाकों में गर्मी और लू का असर बना हुआ है। तटीय और मध्य महाराष्ट्र में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में भी 25 जून तक लू जैसी स्थिति बनी रह सकती है। तेलंगाना और बिहार के कुछ हिस्सों में 21 जून तक गर्म हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।

तापमान में गिरावट की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में 22 जून तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। महाराष्ट्र में 21 जून के बाद तापमान 2 से 3 डिग्री तक कम हो सकता है, जबकि तेलंगाना में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।  Edited by : Sudhir Sharma

कल का मौसम 21 जून: IMD ने इन 13 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया, 20 से ज्यादा राज्यों में आएगा आंधी-तूफान!

देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से करवट ले रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 21 जून (रविवार) के लिए मौसम का ताजा हाल जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक तरफ जहां मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ने के लिए पैर पसार रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय वेदर सिस्टम के कारण देश के एक बड़े हिस्से में मौसम खराब रहने वाला है। IMD ने रविवार को देश के 13 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और 20 से ज्यादा राज्यों में तेज आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है।

इन 13 राज्यों में होगी भारी से बहुत भारी बारिश

मौसम विभाग ने देश के पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों के 13 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी है। ये राज्य इस प्रकार हैं:

असम और मेघालय: यहां कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम: इन इलाकों में बादलों की भारी गड़गड़ाहट के साथ मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा।

अरुणाचल प्रदेश: यहां भी भारी बारिश को लेकर ऑरेंज/येलो अलर्ट है।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: पूर्वोत्तर के इन सभी चार राज्यों में भारी वर्षा होने का अनुमान है।

ओडिशा और झारखंड: मानसून के अनुकूल सिस्टम के कारण यहां रविवार को अच्छी बारिश होगी।

बिहार: राज्य के अलग-अलग जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश के आसार हैं।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: मध्य भारत के इन दोनों राज्यों में भी झमाझम बारिश की चेतावनी है।

केरल और कोंकण-गोवा: तटीय इलाकों और दक्षिण भारत के केरल में भारी बारिश हो सकती है।

20 से ज्यादा राज्यों में आंधी-तूफान और बिजली का साया

मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार को देश के आधे से ज्यादा हिस्से (20 से अधिक राज्यों) में तेज हवाएं, धूलभरी आंधी और आकाशीय बिजली का तांडव देखने को मिल सकता है:

उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और आंधी-तूफान के साथ बिजली चमकेगी। जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में ओले भी गिर सकते हैं।

पूर्वी और मध्य भारत: बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ (महाराष्ट्र) में मौसम काफी खराब रहेगा। यहाँ कुछ जगहों पर 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ आने की आशंका है।

दक्षिण भारत: तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, तेलंगाना, रायलसीमा, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में भी बादलों की भयंकर गर्जना के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का अलर्ट है।

राहत के बीच कुछ इलाकों में अभी भी सताएगी ‘लू’

भले ही देश के बड़े हिस्से में आंधी-बारिश की वजह से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन कुछ राज्यों को अभी भी भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ेगा।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और विदर्भ: इन दोनों क्षेत्रों में रविवार को भी कुछ जगहों पर भीषण लू (Heat Wave) का प्रकोप बना रहेगा।

बिहार और तेलंगाना: इन राज्यों के सीमित इलाकों में भी रविवार को गर्म हवाएं (लू) लोगों को परेशान कर सकती हैं, जिसके बाद सोमवार से राहत मिलने की उम्मीद है।

सावधानी की सलाह

मौसम विभाग ने आंधी-तूफान और विशेषकर आकाशीय बिजली की चेतावनी को देखते हुए लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या कमजोर इमारतों के पास आश्रय न लें। साथ ही, समुद्र में ऊंची लहरें उठने के कारण मछुआरों को गहरे पानी में न जाने की हिदायत दी गई है।

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भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार को देश के कई राज्यों में बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि दिल्ली-NCR, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही, दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र के और हिस्सों तक पहुंचने की उम्मीद है।

दिल्ली-NCR में मिलेगी गर्मी से राहत

दिल्ली-NCR के लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को कई जगहों पर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। शनिवार को भी ऐसा ही मौसम देखने को मिला था और यह सिलसिला रविवार को भी जारी रह सकता है।

महाराष्ट्र में बढ़ेगा मानसून का असर

महाराष्ट्र में अगले 4-5 दिनों के दौरान मानसून और आगे बढ़ सकता है। विदर्भ क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है, जिसके चलते कुछ इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

हालांकि राज्य के आंतरिक हिस्सों में अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके बाद तापमान में गिरावट आने की संभावना है।

तमिलनाडु में भारी बारिश का अलर्ट

तमिलनाडु के पश्चिमी घाट से जुड़े 10 से अधिक जिलों में 21 जून से भारी बारिश होने की संभावना है। नीलगिरि, इरोड, सलेम, धर्मपुरी, कृष्णागिरी, कोयंबटूर, थेनी, डिंडीगुल, कन्याकुमारी और तिरुनेलवेली के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।

बारिश के कारण कई जिलों में तापमान 4-5 डिग्री तक कम हो सकता है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह भी दी है, क्योंकि तटीय इलाकों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

पश्चिम बंगाल में रेड अलर्ट

उत्तर बंगाल के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भारी बारिश हो सकती है।

वहीं, कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने जलभराव, ट्रैफिक जाम और कम दृश्यता को लेकर चेतावनी दी है।

हिमाचल प्रदेश में येलो अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के 7 से 10 जिलों में रविवार और सोमवार को गरज-चमक, बिजली गिरने और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने 25 जून तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।

राजस्थान में तेज आंधी और बारिश

राजस्थान में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मौसम बदल गया है। बीकानेर, शेखावाटी, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग में अगले 48 घंटों के दौरान 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।

जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश और आंधी-तूफान का अनुमान है।

मानसून को लेकर क्या है अनुमान?

IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस अवधि में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90% रह सकती है, जो सामान्य से कम मानी जाती है।

लोगों के लिए सलाह

मौसम विभाग ने जिन इलाकों में अलर्ट जारी किया है, वहां के लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने, बिजली गिरने से बचने और स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

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लापतागंज में लापता मानसून!

बारिश

जून आधा बीत गया है लेकिन मानसून लापता है। बावजूद इसके सोशल मीडिया बता दे रहा है कि सावन आया! निश्चित ही भीषण गर्मी के बीच अचानक तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश हुई। पर वह एक के बाद एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभों की बारिश है, जबकि मानसून आंध्र प्रदेश के आसपास अटका हुआ है। और पूरी संभावना है कि जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर का चौमासा (आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन) गर्मी, उमस से ऐसा रूलाने वाला होगा कि हर कोई भारत में जलवायु की बरबादी में वैसे ही रोएगा जैसे प्रदूषण से सर्दियों में दिल्ली अधमरी होती है।

यों अधमरी, बरबादी जैसे शब्द बहुत भारी है लेकिन यदि कोई अमेरिकी या रेगिस्तानी अरब-अफ्रीकी देशों के लोग भी भारत की गर्मी-उमस, प्रदूषित सर्दियों में आकर घूमने के हिमाकत करें तो वह अधमरी दशा से सांस लेते हुए होंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री जून में  ही दिल्ली आए थे। उन्होने कहा वे खुद  बहुत गर्मी वाले मायामी से है लेकिन दिल्ली की तीखी गर्मी तो असहनीय है। दुनिया के मौसम, जलवायु वैज्ञानिकों की दो टूक भविष्यवाणी है कि जलवायु परिवर्तनों से सर्वाधिक दक्षिण एसिया प्रभावित होगा। सोचें,  बावजूद इस सबके हालिया खबर है कि अडानी धड़ाधड़ कोयले की खदाने ले रहे हैं और मोदीजी के साथ धधकता भारत बना देने की धुन में हैं।

बहरहाल, बात फैल गई। असल मुद्दा 2026 के चौमासे में किसान को दस तरह के संकट झेलने है। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन में वह बारिस के लिए तरसेगा। महीनों से वैश्विक जलवायु मॉडल एल नीनो के असर की चेतावनी दे रहे है। कोई आश्चर्य नहीं जो मध्य भारत और उत्तर भारत में सूखी हवाओं ने मानसूनी धाराओं को रोक दिया है। यदि मौसम एजेंसियों के अनुमान सही निकले तो अगस्त और सितंबर में भारी समस्या होगी।

पर सब कुछ जानते हुए भी सरकार और सोशल मीडिया ने किसानों को सावन का अंधा बना रखा है। सब ठीक है, सामान्य है, समय से पहले ही मानसून चल पड़ा आदि-आदि। किसान क्योंकि सोशल मीडिया को देखता, पढ़ता है। तो वह भी जून में सावन की हवा के मुगालते में है। मेरा इस सप्ताह प्रत्यक्ष अनुभव था, जो दिल्ली से अलवर की और जाते देखा कि बाजारे की बुवाई हो रही है! जबकि दिल्ली और एनसीआर में मानसून यों भी 27-29 जून के बीच पहुंचता है। उत्तरी राजस्थान में एक से पांच जुलाई के बीच बारिस होती है। बावजूद इसके पश्चिमी विक्षोभ की बारिस में ही बाजरे की बुवाई!

कुल मिलाकर मुद्दा यह कि जलवायु के हर तरह गडबडा जाने के बावजूद सरकारी स्तर पर कुछ भी जोखिम प्रबंधन नहीं। मतलब एल नीनो यदि मानसून को भटकाएगा तो किसानों को क्या करना चाहिए, ऐसी कोई सलाह नहीं। सावधानी बरतने की नसीहत नहीं। बारिस धोखा दे सकती है सो फला-फला वैकल्पिक फसल योजनाएँ हैं। सूखा-सहिष्णु बीजों की फला व्यवस्था हैं।

डीजल, खाद, बीज भी लापता

मानसून लापता है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाला क्षेत्र नहीं बन रहा है। जो बन रहा है वह इतना मजबूत नहीं है कि मानसून को पुश करक आगे बढ़ा सके। सो, इस साल दक्षिण पश्चिम मानसून दूसरी बार अटक गया है। पहले केरल के तट पर पहुंचने पहले कई दिन तक अटका रहा और फिर तेजी से आगे बढ़ने के बाद दोबारा अटक गया। 14 जून को सेटेलाइट की तस्वीरों में मानसून के बादल दिख रहे थे लेकिन 15 जून को लापता हो गए। प्री मानसून बारिश कई जगह हुई है लेकिन बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित ज्यादातर पूर्वी राज्यों में मानसून की निर्धारित तिथि निकल गई है और बारिश नहीं हुई। अभी पूरे हफ्ते यही स्थिति रहनी है। 25 जून के म्यांमार की ओर से बंगाल की खाड़ी में एक कमजोर गतिविधि की संभावना है। इससे पहले गुजरात में 79 फीसदी, महाराष्ट्र में 78 फीसदी और झारखंड में 70 फीसदी कम बारिश होने की खबर है। जानकारों का मानना है कि इस साल सामान्य से 50 फीसदी कम बारिश हो सकती है।

सो, बारिश नहीं है तो पानी नहीं है और खरीफ की खेती के लिए तैयार किसान चिंता में है। बारिश नहीं हुई है तो नदियां और नहरें भी सूखी हैं और पूर्वी भारत भी भूमिगत जल स्तर नीचे जाने के उस संकट से घिरा है, जो अब तक पश्चिम में दिखाई देता था। भूमिगत जल स्तर नीचे चला गया है और बोरिंग या पम्पिंग सेट के जरिए पानी निकालना निरंतर मुश्किल होता जा रहा है। अगर किसान के पास बोरवेल है या पम्पिंग सेट है तो उसे चलाने के लिए बिजली या डीजल की जरुरत है। पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में तो बोरवेल है लेकिन उनके उलट बिहार, झारखंड आदि राज्यों में किसान पम्पिंग सेट का इस्तेमाल किया जाता है और उसके लिए डीजल चाहिए, जो बाजार से

लापता है। सरकार कह नहीं रही है लेकिन ऐसे उपाय कर रही है, जिससे लोगों को डीजल मिलने में मुश्किल हो।

सरकार ने अनिवार्य कर दिया है कि गैलन या कंटेनर में पेट्रोल पंप से डीजल नहीं ले सकते हैं। सवाल है कि क्या किसान अपना पम्पिंग सेट लेकर पेट्रोल पंप पर जाएं और डीजल खरीदें? छोटे किसानों के लिए यह संभव ही नहीं है। इसलिए वे बड़े किसानों या गांव के साहूकारों पर निर्भर हैं और ज्यादा कीमत देकर डीजल खरीद रहे हैं। अगर कोई किसान अपना पम्पिंग सेट लेकर पेट्रोल पंप पर जा रहा है तो वहां से 20 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं मिल रही है। सरकार ने आदेश जारी करके सामान्य पेट्रोल पंप पर दो सौ लीटर से ज्यादा डीजल नहीं देने का नियम बनाया है लेकिन बिहार जैसे राज्यों में आम लोगों के लिए इसे घटा कर 20 लीटर कर दिया गया है। सोचें, कीमत एक सौ रुपए लीटर तक पहुंची है और उपलब्धता कम हो गई है। किसान सारे दिन इस जुगाड़ में घूम रहे हैं कि कैसे डीजल मिले ताकि खेत में पानी पहुंचे और धान के बीज गिराए जाएं या जिनका बिचड़ा तैयार है वे रोपनी कर सकें।

किसान का संकट इतने पर समाप्त नहीं हो रहा है। उसकी स्थिति तो मुंशी प्रेमचंद के किसान से भी बदतर दिख रही है। उसे आसमान से बारिश का इंतजार है या पेट्रोल पंप से डीजल मिलने का इंतजार है और साथ ही खाद व बीज की उपलब्धता का भी इंतजार है। सरकार कह रही है कि उसके स्टॉक में खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कहा गया है कि दो करोड़ मिट्रिक टन खाद है। लेकिन किसानों को 15 किलो की जगह पांच किलो खाद मिल रही है। बिहार, उत्तर  प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे कृषि वाले राज्यों से तस्वीरें आ रही हैं कि किसान खाद और बीज के सेंटर के बाहर रात गुजार रहे हैं ताकि सुबह उनको खाद मिल सके। यूरिया और डीएपी दोनों जरूरी उर्वरक बाजार से लापता हैं। यूरिया की सामान्य कीमत 266 रुपए बोरी और डीएपी की 1,350 रुपए बोरी है। लेकिन यूरिया पांच सौ रुपए और डीएपी दो से ढाई हजार रुपए बोरी के दाम पर बिक रहा है। सरकार कालाबाजारी करने वालों को चेतावनी दे रही है और स्टॉक नहीं करने की सलाह दे रही है लेकिन संकट यह है कि रेलवे के रैक भी समय पर नहीं पहुंच रहे हैं ताकि बाजार में आसानी से खाद उपलब्ध हो। सरकार ने 17 लाख टन यूरिया आयात किया है लेकिन वह यूरिया भी बाजार में आने से पहले ही लापता हो जा रहा है। इस बार तो कहा जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जंग की वजह से समस्या हुई है लेकिन खेती के समय डीजल, खाद और पानी की समस्या चिरंतन है। किसान को इससे कभी मुक्ति नहीं मिलती है। ऊपर से प्रेमचंद के किसान की तरह आज भी भारत का किसान साहूकारों के ऊंचे ब्याज वाले कर्ज के तले दबा है। उससे भी मुक्ति नहीं मिल रही है।