Devi Shakti Event: अंबानी फैमली ने धूम धाम से किया देवी मां का स्वागत, रणवीर सिंह-कृति सेनन से लेकर इन एक्टर्स ने इवेंट में लिया हिस्सा

Devi Shakti Event: नवरात्रि के एक दिन पहले अंबानी परिवार ने ‘देवी शक्ति’ के सम्मान में और भारत की शानदार कारीगरी की विरासत को समर्पित ‘स्वदेश’ (Swadesh) के एक साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक खास शाम का आयोजन किया।

शनिवार शाम को रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बॉलीवुड हस्तियां और खास मेहमान भारतीय कारीगरी, सांस्कृतिक परंपराओं और त्योहारों के शुभ माहौल का जश्न मनाने के लिए एक साथ आए। इस जश्न में पूरा अंबानी परिवार शामिल हुआ, जिसमें नीता अंबानी और मुकेश अंबानी, उनके बेटे आकाश अंबानी और अनंत अंबानी, और बहुएं श्लोका मेहता और राधिका मर्चेंट शामिल थे।

नीता अंबानी शानदार कढ़ाई वाली मैजेंटा-पिंक सिल्क साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। इस साड़ी पर बारीक सोने की ज़री का काम और सजावटी बॉर्डर था। उन्होंने इसके साथ भारी कढ़ाई वाला ब्लाउज, शानदार ज्वेलरी, बिंदी और खूबसूरत इयररिंग्स पहने थे। वहीं मुकेश अंबानी ने क्लासिक ब्लैक बंदगला सूट पहनकर उनके लुक को पूरा किया, जिसमें गुलाबी पॉकेट स्क्वायर ने रंग का एक हल्का सा टच जोड़ा।

इस जश्न में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे भी अंबानी परिवार के साथ शामिल हुए। इनमें रणवीर सिंह, कृति सेनन, आमिर खान, रश्मिका मंदाना, अदिति राव हैदरी, जैकलीन फर्नांडिस, जैकी श्रॉफ, शनाया कपूर, सारा अली खान, संजय दत्त, मनीष मल्होत्रा ​​और गौरी खान जैसे कई नामी चेहरे शामिल थे।

दूसरे मेहमानों ने भी त्योहार के हिसाब से कपड़े पहने थे। वे शानदार साड़ियों, बारीक कढ़ाई वाले एथनिक कपड़ों और पारंपरिक लिबास में नजर आए, जो भारतीय टेक्सटाइल, कारीगरी और सदाबहार फेस्टिव फैशन की खूबसूरती को दर्शाते थे।

शाम का मुख्य आकर्षण ‘स्वदेश इरोस’ में ‘देवी शक्ति’ कार्यक्रम था, जिसमें नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व और भारत की शिल्प विरासत की अद्भुत विविधता का संगम देखने को मिला। स्टोर के एक साल पूरे होने के मौके पर उन कारीगरों को सम्मानित किया गया, जिनकी लगन, हुनर ​​और रचनात्मकता ने देश की पारंपरिक कलाओं को आज भी जीवित रखा है।

मेहमानों को कालीघाट पेंटिंग, कलमकारी और आशावली बुनाई के लाइव प्रदर्शन के ज़रिए भारत की मशहूर कलाओं को बनाने की बारीक प्रक्रियाओं को करीब से देखने का मौका मिला। इन इंटरैक्टिव प्रदर्शनों में कला के इन रूपों में शामिल बारीकी, धैर्य और विशेषज्ञता को दिखाया गया, जिससे आने वाले लोग उस कारीगरी की सराहना कर सके जो पीढ़ियों से चली आ रही है।

एक खास लिमिटेड-एडिशन कलमकारी प्रदर्शन ने जश्न में चार चांद लगा दिए और इस पारंपरिक कला की खूबसूरती को सबके सामने पेश किया। इन अनुभवों के जरिए, ‘स्वदेश इरोस’ ने भारत की कलात्मक विरासत को दिखाने और देश की सांस्कृतिक पहचान को संजोने वाले कारीगरों के प्रति सम्मान और सराहना बढ़ाने के अपने संकल्प को फिर से दोहराया।

Fendi ने ₹8.3 लाख में बेचा ऐसा बैग, जिसे देखकर लोगों को याद आया नवरात्रि का बाजार; हर्ष गोयनका ने भी उठाए सवाल

इटली के मशहूर लग्जरी फैशन ब्रांड फेंडी का एक हैंडबैग इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है। इसकी खासियत इसकी ऊंची कीमत ही नहीं, बल्कि इसका ऐसा डिजाइन है, जिसने कई भारतीय उपयोगकर्ताओं को नवरात्रि के दौरान बाजारों में दिखने वाले रंगीन बैग और पारंपरिक सजावटी सामान की याद दिला दी। मोतियों, शीशों और कढ़ाई से सजे इस बैग की तस्वीरें सामने आते ही लोग इसकी तुलना भारतीय बाजारों में मिलने वाले मिलते-जुलते सामान से करने लगे। मामला तब और सुर्खियों में आ गया, जब उद्योगपति हर्ष गोयनका ने बैग के डिजाइन और कीमत को लेकर सवाल उठाए।

बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार-शॉ भी इस चर्चा में शामिल हुईं और भारतीय कारीगरों को उचित पहचान दिए जाने की बात कही। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस सिर्फ एक बैग तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय पारंपरिक कला, कारीगरों की मेहनत और वैश्विक फैशन में उनके योगदान को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।

39,500 मोती और 475 शीशों से तैयार हुआ बैग

फेंडी की वेबसाइट पर यह बैग “बैगेट 26424: बहुरंगी री-एडिशन” नाम से दर्ज है। ब्रांड के अनुसार, इसे पूरी तरह हाथ से तैयार किया गया है। इसमें करीब 39,500 मोती और 475 शीशे लगाए गए हैं। कंपनी का कहना है कि इस बैग को तैयार करने में 138 घंटे से अधिक समय लगता है। यह बैग इटली में बनाया गया है और इसकी कीमत करीब 8.3 लाख रुपये बताई गई है।

500 रुपये के बाजार वाले बैग से होने लगी तुलना

बैग की तस्वीर सामने आने के बाद कई भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसके चमकीले रंगों और शीशों वाले डिजाइन की तुलना गुजरात समेत भारत के अलग-अलग बाजारों में मिलने वाले पारंपरिक बैग से की। आरपीजी समूह के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने भी इस समानता पर सवाल उठाया। उन्होंने फेंडी के बैग की कीमत की तुलना भारत में मिलने वाले कम कीमत के समान दिखने वाले बैग से करते हुए भारतीय कारीगरों को उचित श्रेय दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस मामले की तुलना पिछले साल सामने आए प्रादा के कोल्हापुरी चप्पल विवाद से भी की।

किरण मजूमदार-शॉ ने भी जताई आपत्ति

हर्ष गोयनका की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार-शॉ ने भी फेंडी के डिजाइन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक कारीगरी का इस्तेमाल करने के साथ उन कारीगरों को पहचान मिलनी चाहिए, जिन्होंने इन कलाओं को पीढ़ियों तक जीवित रखा है। उनके अनुसार, भारतीय कारीगरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।

प्रादा के कोल्हापुरी चप्पल विवाद की याद हुई ताजा

फेंडी के बैग को लेकर शुरू हुई बहस ने प्रादा के कोल्हापुरी चप्पल विवाद को भी चर्चा में ला दिया। उस मामले में भी प्रादा के जूतों की डिजाइन की तुलना महाराष्ट्र की पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलों से की गई थी। विवाद के बाद प्रादा ने अपनी वेबसाइट पर कोल्हापुरी जूतियों से जुड़े सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ की जानकारी शामिल की थी। इसी पुराने मामले का हवाला देते हुए सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने फेंडी के बैग को लेकर भी भारतीय कारीगरों की पहचान और पारंपरिक कला के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सवाल उठाए।

सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय

फेंडी के बैग को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे भारतीय कारीगरी से मिलता-जुलता बताते हुए ब्रांड के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने तो फेंडी के उत्पादों के बहिष्कार की बात भी कही। वहीं, कुछ उपयोगकर्ताओं ने इस बहस का रुख भारत की अपनी फैशन और लग्जरी इंडस्ट्री की ओर मोड़ दिया। उनका सवाल था कि अगर भारतीय डिजाइन और पारंपरिक कारीगरी इतनी समृद्ध है, तो भारत ने इन्हीं कलाओं और डिजाइनों पर आधारित ऐसे वैश्विक ब्रांड क्यों नहीं बनाए, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना सकें।

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