Maharashtra SIR: महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट से 2 करोड़ नाम कटे, मुंबई में 35% की भारी गिरावट! नाम जुड़वाने के लिए कैसे करें अप्लाई?

Maharashtra SIR List: महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। ये लोग पिछली वोटर लिस्ट में शामिल कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सोमवार 31 अगस्त को यह जानकारी दी। राज्य के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.71 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर (अन्य लिंग) के मतदाता शामिल हैं।

मुंबई में मतदाताओं की संख्या में लगभग 36.1 लाख की कमी आई है। यानी करीब 35 फीसदी वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र की पिछली वोटर लिस्ट में जून तक करीब 9.8 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जबकि SIR के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 7.7 करोड़ रह गई है। यानी आंकड़ों के हिसाब से करीब 21.1 फीसदी की कमी आई है।

हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ऐसे लोगों को 30 सितंबर तक अपना दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है।

क्यों हटाए गए नाम?

अधिकारियों ने बताया कि 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फर्म) जमा नहीं हो पाए। उनसे संपर्क नहीं हो सका। शायद उनकी मृत्यु हो गई थी। या उन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। SIR प्रोसेस से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड थे।

इनमें से 78.86 प्रतिशत को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा फॉर्म 28.6 लाख पुणे में जमा नहीं हो पाए। इसके बाद ठाणे (28.5 लाख), मुंबई उपनगर (26.5 लाख), नागपुर (14.43 लाख), नासिक (10.27 लाख) और मुंबई शहर (9.5 लाख) का नंबर आता है।

मुंबई में 36.1 लाख मतदाता कम

SIR के बाद मुंबई के मतदाता आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में करीब 36.1 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो पिछली लिस्ट की तुलना में लगभग 35 फीसदी है। यह कमी कई कारणों से हुई है। मतदाता गणना के दौरान जिन लोगों के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो सके या जिनके बारे में जानकारी नहीं मिली, उन्हें विभिन्न कैटेगरी में रखा गया।

17 लाख डुप्लीकेट नामों का भी मामला

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार, करीब 17 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज पाए गए थे। इन नामों को एक साथ मिलाकर हटाया गया है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से ‘फर्जी’ या ‘डुप्लीकेट मतदाता’ मानना सही नहीं होगा। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अगर एक से अधिक जगह दर्ज था। उसे एक निर्वाचन क्षेत्र में बरकरार रखते हुए दूसरे स्थान से हटाया गया, तो इससे कुल मतदाता संख्या में कमी दिखाई देती है।

30 सितंबर तक वापस जुड़ सकता है नाम

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम बाहर होने वाले मतदाताओं के लिए यह आखिरी मौका नहीं है। वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो उसे अपने क्षेत्र के संबंधित चुनाव अधिकारी या BLO से संपर्क करके अपना दावा पेश करना होगा। जरूरी प्रक्रिया और दस्तावेज पूरे करने के बाद नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का अवसर मिलेगा।

18 साल के होने वाले युवाओं को भी मौका

इस प्रक्रिया में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। जो युवा 1 अक्टूबर से पहले 18 वर्ष की उम्र पूरी कर रहे हैं, वे भी इस अवधि के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी आगामी चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता मिलेगा।

ऑनलाइन ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए नागरिक ECI के वोटर पोर्टल और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वोटर अपने EPIC नंबर के जरिए भी नाम और संबंधित डिटेल्स की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई गई है।

नाम नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा?

ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यानी जिन लोगों का नाम SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गया है, उनके पास अभी दावा दाखिल कर अपना नाम वापस सूची में शामिल कराने का अवसर मौजूद है।

  • नाम जोड़ने के लिए: Form 6
  • मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए: Form 7
  • एड्रेस या अन्य डिटेल्स में सुधार के लिए: Form 8

ड्राफ्ट लिस्ट को अंतिम सूची न समझें

महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है। यह फाइनल लिस्ट नहीं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। इसलिए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपना नाम अभी चेक करें। अगर नाम गायब है या डिटेल्स में कोई गलती है, तो तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सुधार या नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी करें।

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विदेशों में लहराया भारत का परचम, अब अपनी ही नागरिकता साबित करने के पड़े लाले! पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के साथ क्या हुआ?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर अब तक कई लोग सवाल उठा चुके हैं। वहीं अब एसआईआर पर भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने चिंता जताई है। कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके सूरी ने बताया कि उन्हें भी अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ रहे हैं। सूरी पंजाब में वोटर लिस्ट की जांच और अपडेट के लिए चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए है। नवदीप सूरी यूएई व मिस्र में भारत के राजदूत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में उच्चायुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

उन्होंने पंजाब में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान अपने अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है। सूरी ने कई पोस्ट के जरिए बताया कि वोटर लिस्ट के सत्यापन के दौरान उन्हें किन परेशानियों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा।

नवदीप सूरी ने बताई अपनी परेशानी

नवदीप सूरी ने बताया कि, SIR के दौरान उन्होंने अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर वोटर आईडी और आधार कार्ड जमा किए थे। उस समय उन्हें बताया गया कि उनके दस्तावेज और दी गई जानकारी सही है। लेकिन, कुछ समय बाद एक वॉलंटियर ने उन्हें संदेश भेजकर बताया कि उनकी कुछ जानकारी साल 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही है। इसके बाद सूरी ने इस मामले को समझने और आगे की प्रक्रिया जानने के लिए BLO से दोबारा संपर्क किया।

नोटिस जारी कर फिर बुलाया

सूरी के अनुसार, इसके बाद उन्हें एक नोटिस लेने के लिए फिर से बुलाया गया। वहां उनसे ऐसे कागजात जमा करने को कहा गया, जिनसे उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि हो सके। इस मांग को लेकर उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पूर्व राजनयिक को भी नागरिकता साबित करने में दिक्कत हो रही है, तो आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया कितनी मुश्किल होगी। उन्होंने चुनाव आयोग से सफाई मांगी।

बताया क्यों नहीं है रिकॉर्ड

सूरी ने बताया कि, साल 2003 में वह भारत से बाहर तैनात थे, इसलिए उस समय के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से उनका डिटेल्स नहीं मिल पाया। अधिकारियों ने उनसे भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट दिखाने को कहा। उन्होंने कहा कि उनके पास वोटर आईडी और आधार के अलावा भी कई जरूरी डॉक्युमेंट मौजूद हैं, जिससे वह अपनी नागरिकता साबित कर सकते हैं। सूरी की इस बात से SIR के दौरान पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा दस्तावेजों के मिलान को लेकर चल रही चर्चा और बढ़ सकती है।

क्या है SIR

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में केवल योग्य मतदाताओं के नाम ही दर्ज रहें। यह प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई थी, जहां सत्यापन के दौरान मृत लोगों समेत कई नाम मतदाता सूची से हटाए गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल में भी चुनाव से पहले मतदाता रिकॉर्ड की जांच और सुधार का काम किया गया। SIR के दौरान अगर किसी मतदाता का नाम 2002 या 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है, तो उससे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। ऐसे लोगों को पुराने मतदाता रिकॉर्ड से अपना या अपने परिवार का संबंध साबित करने के लिए जरूरी कागजात देने पड़ सकते हैं।

Abhijeet Dipke: रिटायर्ड पिता ने विदेश में अभिजीत दिपके की पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने CJP के फंड पर उठाए सवाल, जांच की मांग

Abhijeet Dipke: सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत डिपके के पिता की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी अपने बेटे की विदेश में हायर एजुकेशन का खर्च कैसे उठा सकता है? RTI एक्टिविस्ट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और सेंट्रल GST अधिकारियों से CJP के कानूनी स्टेटस और फंडिंग की जांच करने का भी आग्रह किया है।

RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी और अभिजीत डिपके के पिता भगवान राव डिपके की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। तिवारी ने सवाल किया कि रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद भगवानराव डिपके अपने बेटे को हायर एजुकेशन के लिए विदेश कैसे भेज पाए। इसी आधार पर उनकी आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है।

लीगल डिफेंस फंड भी जांच के दायरे में

डिपके के पिता की आर्थिक जांच की मांग के अलावा, तिवारी ने CJP के उन प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित लीगल डिफेंस फंड पर भी आपत्ति जताई है, जिन पर कथित NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़े पुलिस केस चल रहे हैं। तिवारी ने चुनाव आयोग को एक लेटर लिखकर यह पता लगाने को कहा है कि क्या लीगल डिफेंस फंड की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी को ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत रजिस्टर किया गया है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक तिवारी ने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी एक अनरजिस्टर्ड संस्था है। लेकिन एक पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर काम कर रही है। अगर इसे लीगल डिफेंस फंड के तौर पर 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या CJP ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत उसके पास रजिस्टर्ड है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर पार्टी रजिस्टर्ड नहीं है, तो पॉलिटिकल पार्टी के नाम पर उसका काम करना और फंड इकट्ठा करना या लेना जांच का विषय हो सकता है।

कपिल सिब्बल ने दिया 1 करोड़

एक अलग अर्जी में तिवारी ने सेंट्रल GST अधिकारियों से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिबल CJP प्रदर्शनकारियों के कानूनी बचाव के लिए दिए गए 1 करोड़ रुपये के योगदान पर 18 प्रतिशत GST देने के लिए जिम्मेदार होंगे। NEET पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने के लिए CJP ने एक लीगल डिफेंस फंड बनाया है। सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की है।

विवाद के बीच अभिजीत दिपके बीमार पड़े

यह नया विवाद सामने आने के बाद महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अपने घर पर अभिजीत दिपके बीमार पड़ गए। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, दिपके शनिवार सुबह करीब 11:45 बजे अपने घर के पार्किंग एरिया में इंतजार कर रहे लोगों के एक समूह से मिलने के लिए नीचे आए। हालांकि, जल्द ही उन्हें बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद वे घर के पिछले हिस्से में गए और उल्टी की। इसके बाद वे मीडिया से बात किए बिना ही वापस ऊपर चले गए। उनके पिता भगवान दिपके ने बताया कि उनकी जांच के लिए तुरंत डॉक्टरों को बुलाया गया।

दिपके का इलाज करने वाले डॉ. विशाल लहाने ने पत्रकारों को बताया कि उनका ब्लड प्रेशर गिरकर 100/60 mmHg हो गया था। उन्होंने उनकी इस हालत का कारण तनाव और चिंता को बताया। डॉक्टर ने कहा, “दिपके का ब्लड प्रेशर 100/60 के स्तर पर थोड़ा कम है। तनाव और चिंता के कारण उन्हें सुबह से ही बेचैनी और जी मिचलाने की समस्या हो रही है। उन्हें कुछ बार उल्टी हुई है और दस्त की भी शिकायत है।”

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डॉक्टर ने बताया कि दिपके को IV (नस के ज़रिए) फ्लूइड दिया गया। उन्हें दिन भर आराम करने की सलाह दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि दिपके को बुखार नहीं है। उम्मीद है कि पर्याप्त आराम करने से वे ठीक हो जाएंगे। अगर उनकी हालत में सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर इलाज के अगले कदम पर फैसला लेने से पहले ब्लड टेस्ट करेंगे।