भारतीय हॉकी टीम सिर्फ पाक से बेहतर, श्रीजेश समेत इन दिग्गजों ने की आलोचना

विश्व कप में 51 साल बाद पदक जीतने का सपना लेकर गई भारतीय पुरूष हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने में भी नाकाम रहने के बाद पूर्व दिग्गजों ने युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं देने और उसी कोर ग्रुप के साथ लगातार खेलने पर सवाल उठाये हैं।अर्जेंटीना से 3 -5 से हारने के बाद भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म हो गई और इससे वे कमजोरियां भी उजागर हुई जो पेरिस ओलंपिक के बाद से लगातार चली आ रही थी।

पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

भारतीय टीम विश्व कप से पहले स्विटजरलैंड में मानसिक दृढता बढाने के लिये बूट कैंप में गई लेकिन टूर्नामेंट में दबाव का सामना नहीं कर सकी। ड्रैग फ्लिकर और कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर अधिक निर्भरता का खामियाजा भुगतना पड़ा जबकि वह पूरी तरह फिट नहीं थे। मनप्रीत सिंह और मनदीप सिंह जैसे सीनियर अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके।नतीजा यह हुआ कि अंकतालिका में भारतीय टीम फिलहाल सिर्फ पाकिस्तान से ऊपर है और 8वें स्थान पर है।

पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद संन्यास लेने वाले गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने कहा ,‘‘सीनियर खिलाड़ियों के जाने के बाद उनकी जगह कौन लेगा । क्या हमने दूसरी जमात तैयार की है। लॉस एंजिलिस ओलंपिक में दो ही साल बचे हैं और उससे पहले करीब तीस अंतरराष्ट्रीय मैच ही होंगे। क्या ओलंपिक के लिये इससे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। नहीं।’’उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप की टीम में भी भी वही कोर खिलाड़ी हैं जबकि मनमीत सिंह, आमिर अली, रोशन कुजूर, तालेम प्रियब्रत, रोहित, अर्शदीप जैसे कई प्रतिभाशाली जूनियर इंतजार ही कर रहे हैं।’’

पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने कहा कि चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे।उन्होंने कहा ,‘‘ जूनियर खिलाड़ियों को सही समय पर मौके मिलने चाहिये और चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। तैयारी ओलंपिक से ओलंपिक की होनी चाहिये । कोचिंग स्टाफ ने अनुभव को ही तरजीह दी जो काम नहीं आया। भारत के पास यह सर्वश्रेष्ठ मौका था लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी। हर दस मिनट में डिफेंस चरमरा रहा था।’’

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कप्तान रहे वासुदेवन भास्करन ने कहा ,‘‘ मैने पिछले चार साल में किसी भारतीय फॉरवर्ड को अच्छा खेलते नहीं देखा। बैक पास कहां थे, गोल पर कितने हमले किये और फुल प्रेस जाने के समय मिडफील्ड पूरा खाली छोड़ दिया।’उन्होंने कहा ,‘‘ हमने नये खिलाड़ियों को मौके ही नहीं दिये। नीदरलैंड की पेरिस ओलंपिक टीम के छह स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी विश्व कप टीम में नहीं थे। हम हमदर्दी, पिछले रिकॉर्ड और आंकड़ों पर ही टीम चुन लेते हैं। कम से कम छह जूनियर खिलाड़ियों को प्रो लीग में आजमाना चाहिये था।’’

वहीं एक और दिग्गज परगट सिंह का मानना है कि भारतीय हॉकी का आंतरिक ढांचा इतना कमजोर है कि प्रतिभायें निकलती ही नहीं है।उन्होंने कहा ,‘‘ अच्छी घरेलू स्पर्धायें नहीं होने से हमारे पास अच्छी बेंच स्ट्रेंथ नहीं है। यूरोप में कई डिविजन की लीग होती है जो हमारे यहां नहीं है। पहले बेटन कप, आगा खान कप, बांबे गोल्ड कप, मुरूगप्पा कप, नेहरू हॉकी से अच्छी प्रतिभायें निकलती थी। सारा ढांचा ही खराब कर दिया है। इसके अलावा नये खिलाड़ियों को मौका देना था तो दो साल पहले ही बदलाव की शुरूआत कर देनी चाहिये थी।’’

Asian Games में इस बार किसी भी हाल में पदक का सूखा खत्म करना चाहती हैं मीराबाई

साइखोम मीराबाई चानू आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियाई खेलों में हिस्सा लेंगी और उस बड़े मेडल को जीतने की कोशिश करेंगी जो उनके शानदार वेटलिफ्टिंग करियर में अभी तक नहीं मिल पाया है। ओलंपिक मेडल विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन को एशियाई खेलों के लिए भारत की पांच सदस्यीय वेटलिफ्टिंग टीम में शामिल किया गया है। ये खेल जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे।

एशियाई खेल 2026 में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में होगी।मीराबाई चानू, जो महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी, ने अभी तक एशियाई खेलों में कोई मेडल नहीं जीता है। वह हांगझोऊ 2023 में मेडल जीतने के बहुत करीब थीं, लेकिन चौथे स्थान पर रहीं।

मीराबाई ने कहा है, “एशियाई खेलों का मेडल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगी क्योंकि मुझे वहां जीतना है जहां मैंने पहले कभी मेडल नहीं जीता है। इसलिए, एशियाई खेल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।” आइची-नागोया में मेडल जीतने से मीराबाई चानू का तीन बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स – ओलंपिक, एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स – में मेडल का कलेक्शन पूरा हो जाएगा। मीराबाई चानू ने पिछले महीने लगातार तीसरा गोल्ड और कुल मिलाकर चौथा कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल जीता था।

एशियाई खेलों के लिए भारत की वेटलिफ्टिंग टीम में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं; इनमें से पांच में से चार ने पिछले महीने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीते थे। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की सिल्वर मेडल विजेता ज्ञानेश्वरी यादव और हरजिंदर कौर क्रमशः महिलाओं के 53 किग्रा और 69 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। सेराम निरुपमा देवी 61किग्रा कैटेगरी में महिला टीम को पूरा करती हैं।

ऋषिकांत सिंह चनमबम एशियाई खेलों में भारत के अकेले पुरुष वेटलिफ्टर होंगे। उन्होंने पिछले महीने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था और वे 60किग्रा कैटेगरी में हिस्सा लेंगे।भारत ने एशियाई खेलों में वेटलिफ़्टिंग में 14 मेडल जीते हैं – पांच सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज़ – लेकिन अभी तक कोई गोल्ड मेडल नहीं जीता है।


Asian Games में मुख्य खिलाड़ियों को आराम देकर युवा टीम भेजेगा अफगानिस्तान

अफगानिस्तान ने दरविश रसूली की अगुवाई में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम में युवा खिलाड़ियों के साथ नजीबुल्लाह ज़दरान और करीम जनत जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी शामिल हैं। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की राष्ट्रीय चयन समिति ने टीम के अधिकतर खिलाड़ी हाल ही में खत्म हुई 11वीं शपागीजा क्रिकेट लीग से चुना हैं। नियमित कप्तान राशिद खान और रहमानुल्लाह गुरबाज और अज़मतुल्लाह ओमरजई जैसे अहम खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा नहीं होंगे।

एशियाई खेल 24 सितंबर से तीन अक्टूबर तक होने हैं। इससे ठीक एक सप्ताह पहले, अफ़गानिस्तान की टीम तीन मैचों की टी-20 सीरीज़ के लिए भारत का दौरा करेगी। वहीं, टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज मोहम्मद अकरम ने शपागीजा क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम में जगह बनाई है। उन्होंने आठ पारियों में 339 रन बनाए, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल थे। ऑलराउंडर इस्मत आलम को भी टूर्नामेंट में उनके अच्छे प्रदर्शन का इनाम मिला है। उन्होंने 294 रन बनाए और नौ विकेट लिए, जिसके लिए उन्हें एससीएल का ‘बेस्ट प्लेयर’ अवॉर्ड मिला।

विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद इशाक, हसन ईसाखिल, खालिद तानीवाल और इमरान मीर टीम में शामिल अन्य युवा खिलाड़ियों में से हैं, जबकि नजीबुल्लाह और जनत अंतरराष्ट्रीय अनुभव लेकर आए हैं।

अफगानिस्तान एशियाई खेलों की टीम इस प्रकार है:- दरविश रसूली (कप्तान), मोहम्मद इशाक (विकेटकीपर), मोहम्मद अकरम, हसन ईसाखिल, खालिद तानिवाल, इमरान मीर, फैसल खान शिनोजादा, नजीबुल्लाह जादरान, फरमानुल्लाह सफी, इस्मत आलम, करीम जनत, नांग्याल खरोती, अरब गुल मोमंद, फरीदून दाऊदजई और अब्दुल्ला अहमदजई।

डायमंड लीग में नहीं होगी नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की भिड़त, पाक खिलाड़ी ने अचानक वापस लिया नाम

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। वहीं खराब प्रदर्शन के बाद नदीम ने इस महीने के अंत में लॉजेन में होने वाली डायमंड लीग प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया है। लुसाने डायमंड लीग का आयोजन 21 अगस्त को होगी। इस लीग से नदीम ने अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं अब डायमंड लीग में भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का सामना पाकिस्तान के अरशद नदीम के साथ नहीं होगा।

एशियन गेम के लिए करना चाहते हैं तैयार

नदीम के डायमंड लीग से पीछे हटने की वजह एशियन गेम्स 2026 और विश्व एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप के लिए तैयारी बताया जा रहा है। फिलहाल नदीम लाहौर में प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके बाद वह अपने कोच टेरसियस लिबेनबर्ग और स्थानीय प्रशिक्षकों की देखरेख में कुछ हफ्तों की ट्रेनिंग के लिए दक्षिण अफ्रीका जाएंगे। अरशद नदीम के पर्सनल ट्रेनर सलमान बट के अनुसार, नदीम अब सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए वह अपनी फिटनेस और शरीर पर खास ध्यान दे रहे हैं। इसके बाद वह 6 से 14 सितंबर तक बुडापेस्ट में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में नजर आएंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स खराब प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स में अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ग्लासगो की ठंडी और तेज हवाओं वाली परिस्थितियों में वह टॉप-8 में भी जगह नहीं बना सके। इस मुकाबले में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। खराब प्रदर्शन के बाद नदीम को पाकिस्तान में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा था।

PAAF ने नदीम से बनाई दूरी

इस बीच पाकिस्तान के अधिकारियों पर भी सवाल उठे। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, कोच सलमान बट को पद पर बनाए रखने को लेकर विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने अरशद नदीम से दूरी बना ली। इसके चलते ओलंपिक चैंपियन को अपनी ट्रेनिंग और तैयारियों का ज्यादातर काम खुद ही संभालना पड़ा। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोचों के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद भी रोक दी थी। इसके कारण अरशद नदीम को ग्लासगो की अलग मौसम परिस्थितियों के बावजूद लाहौर में सलमान बट की देखरेख में ही ट्रेनिंग करनी पड़ी। इससे उनकी तैयारियों पर भी असर पड़ा।