जालंधर की लेडी अफसर ने जेल में बनाए प्रेम संबंध:कनाडा में पंजाबी कैदी से मिलती, उसके पैसे से कॉस्मेटिक सर्जरी, फॉरेन ट्रिप कीं

कनाडा की जेल में तैनात जालंधर मूल की एक महिला अधिकारी पर पंजाबी कैदी से रिश्ते को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। जांच के मुताबिक उसने अपनी ड्यूटी उसी ब्लॉक में लगवाई, जहां कैदी बंद था। वह ज्यादातर समय उसकी सेल के आसपास बिताती थी और जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम के अलावा कथित तौर पर अवैध मोबाइल के जरिए भी उसके संपर्क में रहती थी। बदले में कैदी उस पर महंगे गिफ्ट लुटाता रहा। जांच दस्तावेजों के मुताबिक उसने महिला अधिकारी की कॉस्मेटिक सर्जरी और विदेश यात्राओं का खर्च भी उठाया। पूरा मामला तब सामने आया, जब एक वरिष्ठ जेल अधिकारी के घर पर जानलेवा हमले की साजिश की जांच शुरू हुई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जालंधर मूल की महिला अधिकारी ने ही उस अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो कैदी तक पहुंचाई थी। इसके बाद कथित तौर पर उसी जानकारी के आधार पर अधिकारी की पहचान कर पूरी साजिश रची गई। यह मामला बाद में कनाडा पुलिस की प्रोजेक्ट साउथ जांच का अहम हिस्सा बना। 3 जुलाई को ऑन्टारियो सुपीरियर कोर्ट की अनुमति के बाद 563 पन्नों वाले ITO (इन्फॉर्मेशन टू ऑब्टेन) के कुछ हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनसे पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। महिला अधिकारी पेड लीव पर हैं, जबकि कैदी अब भी जेल में बंद है। जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांटेड ड्रग तस्कर रॉयन वेडिंग के कथित ड्रग नेटवर्क से भी जोड़ा है। दोसांझ गांव की निशवंत, कैदी ड्राइवर के तौर पर कनाडा गया
कनाडा पुलिस के मुताबिक निशवंत कौर दोसांझ का परिवार पंजाब के जालंधर जिले के दोसांझ कलां गांव से जुड़ा बताया जाता है। वह ब्रिटिश कोलंबिया के ऐबट्सफोर्ड में रहती हैं और टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में कॉर्पोरल थीं। 32 वर्षीय गुरप्रीत सिंह पंजाब से ट्रक ड्राइवर के रूप में कनाडा गया था। बाद में जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांछित ड्रग तस्कर रायन वेडिंग के कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जोड़ा। अक्टूबर 2024 से वह टोरंटो जेल में बंद है और अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का सामना कर रहा है। दोनों के बीच पहले से प्यार, जेल में देख फिर रिश्ते सक्रिय हुए
ITO के मुताबिक गुरप्रीत के अक्टूबर 2024 में टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर पहुंचने से पहले से ही दोनों के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे। गुरप्रीत के जेल पहुंचने के बाद निशवंत को पता चला तो उनके बीच का यह रिश्ता फिर से सक्रिय हो गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि निशवंत ने अपनी ड्यूटी उसी टावर और ब्लॉक में लगवा ली, जहां गुरप्रीत बंद था। अक्टूबर 2024 से 2025 तक दोनों के बीच लगातार निजी मुलाकातें होती रहीं। सेल के बाहर ज्यादा समय, यहीं से बढ़ा शक
पुलिस के अनुसार निशवंत अक्सर गुरप्रीत की सेल के आसपास जरूरत से ज्यादा समय बिताती थीं। जेल सुपरवाइजरों ने यह भी नोटिस किया कि वह गुरप्रीत से मिलने के बाद उसके पूर्व सेलमेट से भी मिलती थीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी असामान्य गतिविधि के बाद दोनों पर निगरानी बढ़ाई गई। जेल के फोन के अलावा कथित अवैध मोबाइल से भी संपर्क
ITO के मुताबिक दोनों जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम के अलावा गुरप्रीत के पास मौजूद कथित अवैध मोबाइल फोन के जरिए भी लगातार संपर्क में थे। जांच के दौरान गुरप्रीत की कई बातचीत इंटरसेप्ट कर मॉनिटर की गई। जांच दस्तावेजों में दावा किया गया है कि निशवंत ने एक सहकर्मी को बताया था कि गुरप्रीत ने उन्हें महंगे गिफ्ट दिए, कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए पैसे दिए और विदेश यात्राओं का खर्च भी उठाया। जांच अधिकारी डिटेक्टिव कांस्टेबल एंटोनियो डी ओनोफ्रियो ने लिखा कि गुरप्रीत का निशवंत पर इतना प्रभाव था कि यह एक जेल अधिकारी और कैदी के रिश्ते के लिहाज से बेहद असामान्य था। नंबर प्लेट से हत्या की साजिश तक में शामिल
यॉर्क रीजनल पुलिस के मुताबिक जून 2025 में एक वरिष्ठ करेक्शनल अधिकारी की हत्या की साजिश रची गई। अधिकारी के घर पर मुंह ढके हमलावर ने हमला करने की कोशिश भी की। ITO में आरोप है कि गुरप्रीत ने जेल के बाहर मौजूद सहयोगियों के जरिए पूरी योजना बनाई, जबकि निशवंत ने कथित तौर पर ‘इंटरनल फैसिलिटेटर’ की भूमिका निभाई। पुलिस का दावा है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो लेकर गुरप्रीत तक पहुंचाई। बाद में इसी जानकारी के आधार पर वाहन का रिकॉर्ड निकाला गया और अधिकारी के घर की पहचान की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी घटना के बाद प्रोजेक्ट साउथ जांच का दायरा बढ़ा। निशवंत की नाराजगी का बदला लिया
इस मामले में सार्वजनिक किए गए अदालत दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गुरप्रीत सिंह की वरिष्ठ जेल अधिकारी से क्या रंजिश थी। हालांकि पुलिस का दावा है कि निशवंत दोसांझ की उस अधिकारी से नाराजगी थी और उसी के बाद कथित साजिश रची गई। जांच में और भी कई नाम
563 पन्नों के ITO में निशवंत और गुरप्रीत के अलावा कई पुलिस अधिकारियों और सिविलियन के नाम भी जांच के दायरे में होने का उल्लेख है। एजेंसियां इनके बीच कथित संपर्क और सहयोग की भी जांच कर रही हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में पहले भी कंट्राबैंड और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। इसी वजह से जेल पहले से जांच एजेंसियों की निगरानी में थी। दोनों पक्षों का क्या कहना है:-

PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में रविवार को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या या पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। JAAC का कहना है कि यह प्रदर्शन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ है। साथ ही, यह आंदोलन JAAC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन ने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। पाकिस्तानी सेना की फायरिंग की 2 फोटो… कई इलाकों से पहुंचे लोग, विदेश में भी प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी कई अलग-अलग इलाकों से लोगों के काफिले लगातार पहुंचते रहे। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी बताई गई। JAAC ने कहा कि रावलाकोट और चक की महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। वहीं, JAAC की अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। JAAC का कहना है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद पूरे PoJK में तनाव बढ़ गया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘रीलिज शौकत मीर’ अभियान चलाया, जिसके तहत लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ‘लॉन्ग लिव कश्मीर’ और ‘लॉन्ग लिव द पीपल’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शन करने वाले संगठन JAAC के बारे में जानिए 5 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य JAAC ने सोशल मीडिया पर PoK के 10 जिलों की अनुमानित आबादी का आंकड़ा साझा किया। संगठन के मुताबिक, यदि प्रत्येक जिले से 50 हजार लोग प्रदर्शन में शामिल हों तो कुल संख्या पांच लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने लोगों से सफेद झंडे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उसका कहना है कि उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि प्रदर्शन केवल बुनियादी अधिकारों की मांग के लिए है। पिछले महीने हिंसा में 30 की मौत हुई थी 8 जून को PoK में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह हिंसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान हुई। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। PoK में JAAC और सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। भारत ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से दखल देने की मांग की थी PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत ने पाकिस्तान पर फेक न्यूज और फेक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की तरफ से लगातार झूठी खबरें और वीडियो फैलाने का पैटर्न देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान हटाने की हताश कोशिश है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के गलत कामों और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए उसे जवाबदेह ठहराएगा। JAAC पर बैन लगा, जिसके बाद हिंसा भड़की सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। रविवार को JAAC के कार्यकर्ता संगठन के एक सदस्य की मौत के विरोध में अस्पताल के शवगृह के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। सदस्य की मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची, तभी झड़प शुरू हो गई और हिंसा फैल गई। रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने रॉयटर्स से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि इसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस का आरोप है कि JAAC से जुड़े लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर शॉटगन और अन्य हथियारों से हमला किया। पुलिस ने घटना को आतंकवादी कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। PoK में 27 जुलाई को चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। ————————— पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

‘कार्ल मार्क्स के सगे रहो या अमेरिका के, तुम दोनों के वफादार नहीं बन सकते’, ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा था? बोले- फिर से सिर उठा रहा, कुचल देंगे…

अमेरिका की 250वीं सालगिरह की पूर्व संध्या पर ट्रंप ने अपने आधे घंटे के भाषण में अमेरिकी ताकत और महानता का बखान करने के बाद कम्युनिस्ट आंदोलन को कुचलने का संकल्प भी लिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह फिर से सिर उठा रहा है।ट्रंप ने कहा, “आप कार्ल मार्क्स के लिए वफादार हो सकते

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अल्ट्रा-रिच का ट्रेंड:अमीर लोग दर्जनों-सैकड़ों बच्चे पैदा करने को ‘प्रोजेक्ट’ मान रहे; यह वंश बचाने नहीं, शक्ति-प्रभाव का नया प्रतीक बना

विकसित देशों में जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। बहुत से लोग कहते हैं कि वे एक बच्चे का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। वहीं, एक छोटा-सा वर्ग अति धनी लोगों का है, जो तकनीक और लगभग असीम संसाधनों के दम पर ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों में कहीं स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे, कहीं 200 बच्चों की इच्छा तो कहीं 300 बच्चे पैदा करने के दावे सामने आए हैं। इस ट्रेंड को ‘किडमैक्सिंग’ कहा जा रहा है। यानी बच्चों की संख्या का ही ताकत, विरासत, प्रभाव और भविष्य पर कब्जे का प्रतीक बन जाना। यह कहानी असमानता का सबसे ठोस रूप भी दिखाती है। एक ओर लोग आईवीएफ के लिए कर्ज लेते हैं। दूसरी तरफ अरबपति दो करोड़ रु. या इससे ज्यादा खर्च कर सरोगेसी और डोनर एग्स से ‘ऑर्डर’ की तरह बच्चे बनवा रहे हैं। इसमें सबसे चर्चित नामों में इलॉन मस्क हैं। उनके 14 बच्चे हैं। टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव का दावा है कि उनके स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं। अमेरिकी बीमा उद्योगपति ग्रेग लिंडबर्ग ने ‘बेबी प्रोजेक्ट’ चलाया। इसमें मॉडल्स को धोखे से एग डोनेशन के लिए फंसाने के आरोप भी लगे। उनके 12 बच्चों की बात सामने आई है। वहीं, यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने एक समय अपने डीएनए को ‘फैलाने’ की सनक तक जाहिर की थी। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की आर्ली रसेल कहती हैं, ‘अरबपति एक साथ कई सरोगेट्स के जरिए ‘बैच’ में बच्चे पैदा करवा सकते हैं। आईवीएफ तकनीक अब सिर्फ संतान पाने का जरिया नहीं है। यह लिंग चयन, बीमारी और कुछ जीन संबंधी गुणों को चुनने का औजार बन चुकी है। इसका खर्च अरबपति ही उठा सकते हैं।’ मनोवैज्ञानिक ​कहते हैं कि जैसे पुराने समय के राजा अपनी वंशावली को शक्ति का स्रोत मानते थे, वैसे ही आज के कुछ टेक-किंग्स अपने खून को भविष्य की पूंजी मान रहे हैं। फर्क बस इतना है कि अब तलवार की जगह तकनीक है। नतीजा: ‘परिवार’ की भावना और सोच ही खतरे में पड़ी अमेरिकी लेखिका अन्ना लोई सुसमैन के अनुसार, अरबपतियों की इस सनक की शिकार कुछ महिलाएं और बच्चे हैं। सरोगेट माताओं के शोषण, सहमति उल्लंघन, बच्चों की देखभाल पर सवाल उठे हैं। कई मामलों में बच्चे ननों के भरोसे, दूसरे देशों में पले-बढ़े, जबकि पिता के लिए वे सिर्फ आंकड़े बनकर रह गए। समाजशास्त्री इवा इलूज चेतावनी देती हैं, ‘अगर इस पर सख्ती और नैतिक चर्चा नहीं हुई, तो परिवार की नींव ही हिल जाएगी।’

संडे प्रोफाइल : टकर कार्लसन:कभी ट्रम्प के समर्थक थे, अब रखा तीसरी पार्टी का विचार

अमेरिका की दक्षिणपंथी राजनीति की प्रभावशाली आवाज टकर कार्लसन फिर चर्चा में हैं। कभी उनकी लोकप्रियता फिल्मी सितारों जैसी थी। अब वे राष्ट्रपति ट्रम्प से मतभेद और नई राजनीतिक पार्टी के विचार को लेकर सुर्खियों में हैं। कार्लसन लंबे समय से अमेरिकी राजनीति और मीडिया की सबसे प्रभावशाली दक्षिणपंथी आवाजों में गिने जाते हैं। इमिग्रेशन विरोध, श्वेत पहचान और राष्ट्रवादी मुद्दों पर उनके आक्रामक विचारों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। वे वर्षों तक रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रबल समर्थक रहे, लेकिन हाल के महीनों में दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कार्लसन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि ट्रम्प ने अपने चुनावी वादों के विपरीत कदम उठाया है। उन्होंने अपने पॉडकास्ट पर यह स्वीकार भी किया कि ट्रम्प को लेकर उन्होंने लोगों को गुमराह किया था। इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में तीसरी राजनीतिक पार्टी बनाने का विचार सामने रखकर हलचल पैदा कर दी। वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के प्रयासों पर भी सवाल उठा चुके हैं। ट्रम्प द्वारा अल्लाह शब्द के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर खुद को ईसा मसीह जैसी छवि में प्रस्तुत करने की भी उन्होंने आलोचना की। गौरतलब है कि अमेरिका में मुख्य रूप से दो-दलीय राजनीतिक व्यवस्था (टू-पार्टी सिस्टम) है, जिसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहता है।
58 वर्षीय कार्लसन को पत्रकारिता विरासत में मिली। उनके पिता रिचर्ड वार्नर कार्लसन मीडिया जगत से जुड़े रहे। इतिहास में स्नातक करने के बाद टकर ने पत्रिकाओं और अखबारों में काम किया तथा 1995 में पीबीएस से टीवी करियर की शुरुआत की। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान 2016 से 2023 के बीच फॉक्स न्यूज के शो ‘टकर कार्लसन टुनाइट’ से मिली। यह शो औसतन करीब 30 लाख दर्शकों तक पहुंचता था और कार्लसन अमेरिकी कंजरवेटिव राजनीति की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल हो गए थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके नाम वाली टी-शर्ट और मग की बिक्री कई बार ट्रम्प से जुड़े उत्पादों से भी अधिक बताई गई। रिपब्लिकन रणनीतिकार जेफ रो के मुताबिक 2020-21 के दौरान कंजरवेटिव राजनीति में कार्लसन जैसा प्रभाव रखने वाला शायद ही कोई दूसरा व्यक्ति था।
हालांकि उनकी पहचान विवादों से भी जुड़ी रही। उन्होंने इमिग्रेशन, नस्ल और पहचान की राजनीति पर कई तीखी टिप्पणियां कीं। वे बार-बार यह दावा करते रहे कि अमेरिका का अभिजात वर्ग श्वेत ईसाई मतदाताओं की जगह नए प्रवासी मतदाताओं को स्थापित करना चाहता है। इन विवादों के चलते डिज्नी और लेक्सस जैसी कंपनियों ने उनके शो से विज्ञापन हटा लिए थे। 2023 में फॉक्स न्यूज से अलग होने के बाद उन्होंने अपना स्ट्रीमिंग मंच ‘टकर कार्लसन नेटवर्क’ शुरू किया। आज भी वे अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति की सबसे चर्चित और विवादास्पद आवाजों में शामिल हैं।

वर्ल्ड अपडेट्स:लिथुआनिया में परमाणु हथियारों पर लगी संवैधानिक रोक हटाने की तैयारी, संसद में प्रस्ताव पेश

रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच लिथुआनिया ने अपने संविधान से परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगी रोक हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 141 सदस्यीय संसद (सीमास) के 51 सांसदों ने संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल को राष्ट्रपति गितानास नौसेदा का समर्थन प्राप्त है। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद-137 को हटाने की बात कही गई है। यह अनुच्छेद देश में सामूहिक विनाश के हथियारों और विदेशी सैन्य अड्डों की मौजूदगी पर रोक लगाता है। सरकार का तर्क है कि बदलते सुरक्षा माहौल में यह प्रावधान अब अप्रासंगिक हो गया है। लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देश लंबे समय से रूस से संभावित खतरे का हवाला देते रहे हैं। हालांकि रूस इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि नाटो देशों पर हमला करने की उसकी कोई योजना नहीं है। मॉस्को का आरोप है कि पश्चिमी देश रूस के खतरे का इस्तेमाल पूर्वी यूरोप में सैन्य विस्तार को उचित ठहराने के लिए कर रहे हैं। इस बीच, पूर्वी यूरोप में नाटो की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिका द्वारा पूर्वी यूरोप के अतिरिक्त नाटो देशों में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावना जताई गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि नाटो का परमाणु ढांचा उसकी सीमाओं के और करीब लाया गया तो वह इसे प्रत्यक्ष सैन्य खतरा मानते हुए जवाब देगा।

250वें स्वतंत्रता दिवस पर जश्न में डूबा अमेरिका:न्यूयॉर्क में परेड, वॉशिंगटन में फाइटर प्लेन्स की उड़ान, मियामी ड्रोन शो और आतिशबाजी की 20 तस्वीरें

अमेरिका आज अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। इस मौके पर वॉशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया, टेक्सास और मियामी समेत देशभर में परेड, एयर शो, आतिशबाजी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कॉन्सर्ट आयोजित किए जा रहे हैं। राजधानी वॉशिंगटन डीसी में ऐतिहासिक इमारतों के ऊपर भव्य आतिशबाजी और लड़ाकू विमानों के फ्लाईपास्ट ने समारोह को खास बना दिया। देखिए अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की 20 तस्वीरें… न्यूयॉर्क से मियामी तक जश्न की 5 तस्वीरें आतिशबाजी और रंगारंग जश्न की 9 तस्वीरें एयर शो और परेड की 6 तस्वीरें आजादी के पिछले सबसे बड़े जश्न ————————– ये खबर भी पढ़ें…. अमेरिका की आजादी के 250 साल का जश्न:देशभर में परेड; वॉशिंगटन में इतिहास की सबसे बड़ी आतिशबाजी होगी अमेरिका में आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। फिलाडेल्फिया, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी समेत 50 राज्यों में परेड, ऐतिहासिक कार्यक्रम और म्यूजिक कॉन्सर्ट का आयोजन हो रहा है। व्हाइट हाउस के मुताबिक थोड़ी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद राजधानी वॉशिंगटन डीसी में इतिहास की सबसे बड़ी आतिशबाजी होगी। पूरी खबर पढ़ें…

खामेनेई के जनाजे में लाखों लोगों की भीड़:अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, ताबूत देखते ही रो पड़े लोग; ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के लगे नारे

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शनिवार को तेहरान की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। छह दिन तक चलने वाले इस अंतिम संस्कार के पहले दिन ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में सुबह से ही लाखों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। अधिकारियों का अनुमान है कि पूरे कार्यक्रम में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। खामेनेई का ताबूत ईरानी झंडे में लपेटकर मंच पर रखा गया था। उनके साथ हमले में मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत भी रखे गए। ताबूत देखते ही कई लोग रो पड़े और कई श्रद्धालु फूट-फूटकर बिलखते नजर आए। इस दौरान भीड़ लगातार ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजराइल पर खुदा का कहर’ के नारे लगाती रही। कई लोग बदला लेने की मांग वाले पोस्टर लेकर पहुंचे। अंतिम यात्रा 6 जुलाई को तेहरान से निकलेगी। इसके बाद पार्थिव शरीर 7 जुलाई को कोम, 8 जुलाई को इराक के नजफ और करबला और 9 जुलाई को मशहद ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया जाएगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. अंतिम संस्कार में 100 ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे: अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए। 2. तेहरान में अभूतपूर्व सुरक्षा और लोगों के लिए विशेष इंतजाम: अंतिम संस्कार को देखते हुए सेना और पुलिस की भारी तैनाती की गई। मेट्रो और सरकारी बसें मुफ्त रहीं, होटलों में 50% तक छूट दी गई, 5,000 से ज्यादा स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था की गई और दूसरे शहरों से विशेष ट्रेनें चलाई गईं। 3. खामेनेई की अंतिम यात्रा 5 शहरों से गुजरेगी: अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर क़ोम, इराक के करबला और नजफ होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। 4. ईरान ने अमेरिका से बातचीत रोकी, परमाणु ठिकानों के निरीक्षण से भी इनकार: अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका-ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता फिलहाल रोक दी गई है। साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ट्रम्प का दावा- ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को अंतिम संस्कार पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी होंगी। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडे्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

250 साल का अमेरिका:13 कॉलोनियों से दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनने तक का सफर; देशभर में जश्न, राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे संबोधित

अमेरिका आज अपनी आजादी के 250 साल का जश्न मना रहा है। 4 जुलाई 1776 को 13 ब्रिटिश कॉलोनियों ने डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस (स्वतंत्रता की घोषणा) अपनाकर ब्रिटेन से अलग होने का फैसला किया था। इस मौके पर पूरे अमेरिका में हजारों कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वॉशिंगटन डीसी, फिलाडेल्फिया, न्यूयॉर्क और बोस्टन समेत कई शहरों में परेड, सैन्य बैंड, सांस्कृतिक कार्यक्रम, ऐतिहासिक प्रदर्शनी और आतिशबाजी का आयोजन होगा। व्हाइट हाउस के कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे। अमेरिका ने इस समारोह को ‘अमेरिका 250’ नाम दिया है। इसकी तैयारी के लिए 2016 में एक विशेष समिति बनाई गई थी। यही समिति पूरे देश में होने वाले आयोजनों की जिम्मेदारी संभाल रही है। अमेरिका की आजादी 250 साल के जश्न से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

इंटरकास्ट मैरिज, शिमला में हनीमून, फिर आस्ट्रेलिया गई पत्नी:4 साल से इंतजार में ₹34 लाख के कर्ज में डूबा कुरुक्षेत्र का युवक; तनाव में पिता की मौत

इंटरकास्ट मैरिज के बाद पत्नी के साथ विदेश में नई जिंदगी बसाने का सपना देखने वाले हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रहने वाले संजीव कुमार की जिंदगी 4 साल में पूरी तरह बदल गई। मैरिज के सिर्फ एक महीने बाद ही उसकी उसकी नवविवाहित पत्नी ऑस्ट्रेलिया चली गई। जाते समय उसने जल्द स्पॉन्सर भेजकर अपने पास बुलाने का भरोसा दिया था। मगर, चार साल बीतने के बाद भी वह इंतजार ही करता रह गया। इस इंतजार में उसकी बेकरी तक बिक गई। उस पर करीब 34 लाख रुपए का कर्ज चढ़ गया और परिवार आर्थिक संकट में टूट गया। इस तनाव में उसके पिता भी चल बसे। वह प्रत्येक माह डेढ़ लाख रुपए की किस्त भरने को मजबूर है। उधर, अब पत्नी ने उसके साथ रहने और उसे ऑस्ट्रेलिया बुलाने से मना कर दिया। यहां तक की उसका मैरिज रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल करा दिया। मन मारकर संजीव ने उसके खिलाफ ऑस्ट्रेलिया एंबेसी को शिकायत कर दी है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में कोर्ट में मामला दायर करने के लिए याचिका डाली है। युवक संजीव की इंटरकास्ट मैरिज के कुछ PHOTOS… यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए संजीव के साथ क्या हुआ…. अब ससुर कह रहे कि बेटी उनकी बात नहीं सुनती संजीव ने बताया कि दोबारा रजिस्ट्रेशन के बाद भी वह लगातार स्पॉन्सर भेजने का भरोसा देती रही। इस दौरान वीजा और अन्य औपचारिकताओं में उसके 8 से 10 लाख रुपए और खर्च हो गए। मगर, इसके बाद भी उसे ऑस्ट्रेलिया नहीं बुलाया गया। उसने पत्नी और ससुराल पक्ष से जवाब मांगा तो पहले बहाने बनाए गए। बाद में ससुर ने कह दिया कि बेटी अब उनकी बात नहीं मानती। कुछ समय बाद पत्नी ने उसका, उसके परिवार के सदस्यों के मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट तक ब्लॉक कर दिए। कर्ज बढ़ता गया, पिता की मौत हो गई पत्नी को विदेश भेजने के लिए लिया गया कर्ज लगातार बढ़ता गया। आज वह हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए सिर्फ ब्याज चुका रहा है। इस आर्थिक तनाव के बीच 6 मई 2025 को उसके पिता जसवंत सिंह की मौत हो गई, जबकि उसकी मां भी लगातार बीमार रहने लगी हैं। आरोप लगाया कि पत्नी और उसके परिवार ने उससे करीब 34 लाख रुपए खर्च करवाकर उसे छोड़ दिया। अब ऑस्ट्रेलिया और पुलिस से न्याय की उम्मीद संजीव ने बताया कि उसने ऑस्ट्रेलियाई एंबेसी में शिकायत भेजी है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में कोर्ट में मामला दायर करने के लिए याचिका डाली है। अब वह जल्द ही कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक (SP) से मिलकर शिकायत देगा। उसकी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और उसके खर्च किए गए रुपए वापस दिलाए जाएं।