खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान के बाद कोम पहुंचा:यहां से पूर्व सुप्रीम लीडर ने धार्मिक शिक्षा हासिल की; अंतिम यात्रा निकाली जाएगी

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर सोमवार शाम तेहरान से कोम पहुंच गया। ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक, हेलिकॉप्टर के जरिए पार्थिव शरीर को कोम लाया गया, जहां मंगलवार को अंतिम यात्रा और धार्मिक रस्में होंगी। कोम वही शहर है, जहां उन्होंने धार्मिक शिक्षा हासिल की थी। बाद में ईरान के सबसे प्रभावशाली धार्मिक नेताओं में शामिल हुए। कोम को शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। इससे पहले तेहरान में तीसरे दिन भी लाखों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। लोगों ने खामेनेई और उनके परिवार के दिवंगत सदस्यों के ताबूतों पर फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। कोम में अंतिम यात्रा के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को उनके गृह नगर मशहद ले जाया जाएगा। गुरुवार को उन्हें इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। तेहरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा से जुड़ी 5 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. तेहरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा में जनसैलाब: तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में लाखों लोग जुटे। भारी भीड़ के कारण ताबूत लेकर चल रहा वाहन कई जगह धीमा पड़ा और आजादी स्ट्रीट पर कुछ देर के लिए रुकना भी पड़ा। 2. खामेनेई का पार्थिव शरीर कोम पहुंचा: तेहरान में अंतिम यात्रा के बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक रस्मों के लिए कोम ले जाया गया। गुरुवार को उनके गृह नगर मशहद में दफन किया जाएगा। 3. ईरान में खामेनेई के बदले की मांग तेज: अंतिम यात्रा में लाल झंडे और ‘या लथारत अल-खामेनेई’ के नारे गूंजे। समर्थकों ने खामेनेई की हत्या का बदला लेने की मांग दोहराई। 4. ईरानी नेताओं की दो टूक चेतावनी: राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा को खामेनेई के रास्ते पर चलने का संकल्प बताया। सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि हत्या करने वालों का पीछा नहीं छोड़ा जाएगा। 5. इजराइल-ईरान के बीच बयानबाजी तेज: नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ पूरे ईरान की आवाज नहीं है। वहीं इराक के शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन:यहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे, ब्रह्मोस डील पर मुहर लगने की संभावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन है। वे सोमवार को पहुंचे थे, एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच आज द्विपक्षीय बैठक होगी। जिसमें करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर मुहर लगने की संभावना है। मोदी इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन भी जाएंगे। 9वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। पीएम इंडोनेशिया के बिजनेसमैन के साथ राउंडटेबल मीटिंग करेंगे और जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। इसके बाद न्यूजीलैंड के लिए रवाना हो जाएंगे। इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप दिखाई देती है। यहां रामलीला होती है, गरुड़ एयरलाइन है और नोट पर भगवान गणेश की तस्वीर भी छप चुकी है। आखिर यहां भारतीय संस्कृति कैसे पहुंची? पढ़िए खबर के आखिर में भास्कर नॉलेज। मोदी की इंडोनेशिया दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें… इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए अहम इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब है। भारत और इंडोनेशिया ने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान साबंग पोर्ट और आसपास समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की संभावित डील इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा मानी जा रही है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के DRDO और रूस की ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। भास्कर नॉलेज इंडोनेशिया 2000 साल से भारतीय संस्कृति से जुड़ा भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की बात करें, तो ये करीब 2,000 साल पुराने माने जाते हैं। प्राचीन काल से भारतीय व्यापारियों, हिंदू और बौद्ध संस्कृति का इंडोनेशिया पर गहरा प्रभाव रहा है। आज भी इंडोनेशिया के बाली और जावा में रामायण और महाभारत पर आधारित नृत्य-नाटक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रचलित हैं। वहां 85% मुस्लिम आबादी होने के बाद भी 20 हजार रुपिया के नोट पर भगवान गणेश की फोटो छपी थी। इसके अलावा भी कई ऐसे प्रतीक है, जिसमें भारतीय संस्कृति की छाप मिलती है। भारत का इंडोनेशिया पर कभी शासन नहीं रहा, फिर भी पहुंची संस्कृति PM मोदी का 102वां विदेश दौरा, तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे पीएम मोदी का यह 102 वां विदेश दौरा है। वहीं वह तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे हैं। उनका पहला दौरा मई 2018 में हुआ था। इसके बाद मोदी सितंबर 2023 में जकार्ता में आयोजित 20वीं आसियान (ASEAN)-भारत और 18वीं ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने इंडोनेशिया पहुंचे थे। ———————– ये भी पढ़ें… मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, संसद को संबोधित किया:बोले- सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता, 5 भारतीयों से हुई इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सम्मान मिलने पर PM मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया। पूरी खबर पढ़ें…

गोल्डन टेंपल में निक्कर पहनकर पहुंचे विदेशी कपल को रोका,VIDEO:माथा टेकने जा रहे थे, सिख ने कहा- एंट्री फ्री, पहले पूरे कपड़े पहनो

अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में निक्कर पहन कर माथा टेकने जा रहे विदेशी कपल को सिख ने रोक दिया। महिला और युवक दोनों ने निक्कर पहनी हुई थी। सिख ने उन्हें गेट पर रोका और नियमों के बारे में बताया। सिख ने बताया कि निक्कर पहनकर अंदर जाना मना है। इस दौरान विदेशी महिला ने टिकट के बारे में भी पूछा, जिस पर उसे बताया गया कि यहां एंट्री पूरी तरह फ्री है। दोनों को पूरे कपड़े पहनकर आने की सलाह दी। नियम समझने के बाद विदेशी महिला ने सहमति जताई। ये वीडियो 4 जुलाई का है। जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। गुरुघर की मर्यादा से अवगत कराने के लिए सूचना बोर्ड लगाया गया है। इन पर स्पष्ट लिखा है कि कैप, शॉर्ट पैंट (निक्कर), कैप्री, मोजे और मिनी स्कर्ट पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं है। श्रद्धालुओं से सिर ढकने और पूरे कपड़े पहनकर ही गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश करने की अपील की गई है। अब पढ़ें वीडियो क्या है…
वीडियो में दिख रहा कि एक विदेशी महिला और उसके साथ मौजूद युवक गोल्डन टेंपल में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे थे। तभी एक सिख ने उन्हें बताया कि गुरुद्वारा साहिब के अंदर निक्कर या हाफ पैंट पहनकर जाना मना है। उन्होंने समझाया कि दर्शन करने के लिए पूरे कपड़े या पजामा पहनना जरूरी है। बातचीत के दौरान विदेशी महिला ने पूछा कि क्या अंदर जाने के लिए किसी प्रकार का टिकट लेना पड़ता है। इस पर स्पष्ट किया कि गोल्डन टेंपल में प्रवेश पूरी तरह फ्री है और केवल गुरुघर की मर्यादा के अनुसार कपड़े पहनना जरूरी है। इसके बाद महिला ने अपने साथी की ओर इशारा करते हुए पूछा कि क्या उन पर भी यही नियम लागू होता है। सिख ने बताया कि यह नियम सभी श्रद्धालुओं और टूरिस्टों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वे किसी भी देश या धर्म से संबंध रखते हों। सिख ने दोनों को पास के बाजार से पायजामा या पूरे कपड़े खरीदने की सलाह भी दी। सिख और विदेशी महिला के बीच हुई बातचीत… सिख: “इनसाइड द गुरुद्वारा साहिब, प्लीज वियर द प्रॉपर पायजामा। (गुरुद्वारा साहिब के अंदर, कृपया पूरा पायजामा पहनें)
विदेशी महिला: ओके, वेल (अच्छा, ठीक है) सिख: मार्केट की तरफ इशारा करते हुए यू शुड ट्राय द मार्केट एंड बाय फ्रॉम देयर। देन यू कैन गो इनसाइड द गुरुद्वारा। (आप मार्केट जाकर वहां से खरीद सकती हैं। उसके बाद आप गुरुद्वारा साहिब के अंदर जा सकती हैं।)
विदेशी महिला: आई वॉज गोइंग देयर। व्हेयर आई बाय द टिकट? (मैं वहीं जा रही थी। मुझे टिकट कहां से मिलेगी?) सिख: आह नो, देयर इज नो टिकट। टिकट इज नो टिकट। यू शुड वियर द प्रॉपर क्लोथ्स, देन यू कैन गो। (अरे नहीं, यहां कोई टिकट नहीं है। कोई टिकट नहीं लगती। आपको बस सही कपड़े पहनने होंगे, फिर आप जा सकती हैं।)
विदेशी महिला: अपने साथी की तरफ इशारा करते हुए) ही इज फाइन?(क्या ये ठीक हैं?) सिख: नो, ही इज ऑल्सो… निक्कर इज नॉट अलाउड। दिस इज नॉट अलाउड। (नहीं, ये भी… निक्कर यहां अलाउड नहीं है। यह पहनना मना है।)
विदेशी महिला: ओके। (ठीक है।) सिख: यू वियर प्रॉपर पायजामा, फुल पैंट, देन यू कैन गो। (आप लोग पूरा पायजामा या फुल पैंट पहनें, फिर आप अंदर जा सकते हैं।)
विदेशी महिला: ओके। (ठीक है।) गोल्डन टेंपल में लगाया बोर्ड… ——— ये खबर भी पढ़ें…. गोल्डन टेंपल में भगवंत मान की फोटो वाले आईकार्ड उतरवाए अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में शनिवार को नया विवाद हो गया। यहां मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीर वाले पहचान पत्र पहनकर पहुंचे श्रद्धालुओं के गले से ये पहचान पत्र उतरवाए गए। (पढ़ें पूरी खबर)

बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा 91 वर्ष के हुए:धर्मशाला-लद्दाख में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पीएम मोदी का बधाई संदेश- विश्व शांति के लिए उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय

विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा सोमवार को 91 वर्ष के हो गए हैं। इस विशेष अवसर पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित उनके अस्थायी निवास स्थान के मुख्य तिब्बती मंदिर ‘त्सुगलाखंग प्रांगण’ में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) और स्थानीय तिब्बती समुदाय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए सैकड़ों बौद्ध अनुयायियों, पर्यटकों और स्थानीय भारतीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। दलाई लामा के बारे में जानें- नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है जन्म: 6 जुलाई 1935 को पूर्वोत्तर तिब्बत के ताकत्सेर गांव में हुआ। भारत आगमन: वर्ष 1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद वे भारत आए और तब से धर्मशाला को अपना निवास स्थान बनाकर विश्व को शांति का संदेश दे रहे हैं। वैश्विक सम्मान: विश्व शांति और अहिंसा के प्रति उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1989 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी दीर्घायु की शुभकामनाएं दलाई लामा के जन्मदिन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने लिखा कि दलाई लामा को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। शांति और सद्भाव का उनका संदेश दुनिया भर के लोगों के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति रहा है। उनकी नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति तथा वैश्विक कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है। मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।” राष्ट्रगान और विशेष प्रार्थना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत धर्मशाला में आयोजित इस समारोह में कांगड़ा के उपायुक्त (डीसी) हेमराज बैरवा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत भारत और तिब्बत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद दलाई लामा की लंबी उम्र और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया और केक काटा गया। मुख्य अतिथि का संबोधन: दलाई लामा शांति और करुणा के जीवंत प्रतीक मुख्य अतिथि डीसी हेमराज बैरवा ने राज्य सरकार की ओर से शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दलाई लामा केवल एक वैश्विक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि संघर्ष और विभाजन से त्रस्त इस आधुनिक विश्व में शांति, करुणा और सार्वभौमिक उत्तरदायित्व के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि असली सुख भौतिकता में नहीं, बल्कि दयालु हृदय और क्षमा में है। इसके साथ ही डीसी ने क्षेत्र के पर्यटन और अर्थव्यवस्था में तिब्बती समुदाय के योगदान की सराहना की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आधिकारिक संदेशों का वाचन समारोह के दौरान तिब्बती स्कूलों और ‘तिब्बती प्रदर्शन कला संस्थान’ के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांधा। इस मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद के उपाध्यक्ष खेनपो सोनम टेनफेल और कार्यवाहक सिक्योंग त्सेग्याल चुक्या द्रानी ने क्रमशः संसद और काशाग (कैबिनेट) का आधिकारिक संदेश पढ़ा। इसके अतिरिक्त, उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सीटीए के कई सिविल सेवकों को भी सम्मानित किया गया।

यूरोप के 23 देशों में रिकॉर्ड-तोड़ हीटवेव:गर्मी से 11 लाख करोड़ का नुकसान, अगले साल 34% आबादी पानी को तरसेगी

यूरोप में इस साल गर्मी का लोगों की जिंदगी व अर्थव्यवस्था, दोनों पर सीधा असर पड़ा। यूरोप के 23 देशों में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग हीटवेव दर्ज की गई। कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा और कई शहरों में अस्पतालों, बिजली ग्रिड, परिवहन और खेती पर दबाव बढ़ गया। अलग-अलग अनुमानों में इस गर्मी से 20 हजार से ज्यादा मौतों का दावा किया जा रहा है। भीषण गर्मी का यूरोप की जीडीपी पर भी असर हुआ है। एलियांज रिसर्च मॉडल के आधार पर की गई गणनाओं के अनुसार, गर्मी यूरोपीय अर्थव्यवस्था को ₹11 लाख करोड़ तक का झटका दे सकती हैं। वहीं, 2030 तक यूरोप को 61 लाख करोड़ रु. तक का आर्थिक नुकसान सहना पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्पादकता में गिरावट, बिजली की मांग में उछाल, फसल नुकसान, पर्यटन पर असर और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता दबाव है। विशेषज्ञों के मुताबिक संकट यहीं नहीं रुकेगा। यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी का अनुमान है कि अगले साल तक यूरोप की करीब 34% आबादी जल संकट की चपेट में आ सकती है। दक्षिणी यूरोप में यह संकट और गहरा होगा, जहां गर्मियों में पानी की मांग और बढ़गी। भारत में 45 डिग्री झेल लेते हैं फिर यूरोप में 36 आफत क्यों? भारत में 45 डिग्री तापमान सूखी गर्मी में होता है, इसलिए पसीना जल्दी सूखकर शरीर को ठंडा करता है। यूरोप में 36° डिग्री गर्मी भी उमस के साथ आती है, तो पसीना सूख नहीं पाता और शरीर गर्म रहता है। इसे वेट-बल्ब खतरा कहते हैं। वेट-बल्ब तापमान लंबे समय तक रहे तो स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी जानलेवा हो सकता है। इससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है और किडनी और लिवर फेल हो सकते हैं। उछाल… ब्रिटेन में एसी बिक्री 330%, फ्रांस में 1000% बढ़ी भीषण गर्मी ने एसी को लग्जरी से जरूरत बना दिया है। ब्रिटेन में एसी की बिक्री 330% तक तो फ्रांस में 1000% तक बढ़ी। तापमान बढ़ते ही कई बाजार में स्टॉक घटने लगा। पंखों व पोर्टेबल कूलर की मांग भी कई गुना तेजी से बढ़ी। 23 देशों में गर्मी के रिकॉर्ड टूटे, स्पेन में पारा 45 डिग्री पार हुआ यूरोप की हीटवेव ने तापमान के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कम से कम 23 देशों में जून की गर्मी ने नए रिकॉर्ड बनाए। स्पेन में पारा 45 डिग्री के पार पहुंचा, जबकि फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड्स व ब्रिटेन में भी रिकॉर्ड गर्मी दर्ज हुई। भास्कर एनालिसिस भीषण हीटवेव के पीछे ओमेगा ब्लॉक; इसमें गर्म हवा फंसकर बढ़ा रही तबाही ओमेगा ब्लॉक क्या पैटर्न होता है? यह मौसम का ऐसा पैटर्न है, जिसमें हाई-प्रेशर सिस्टम दो लो-प्रेशर सिस्टम के बीच फंस जाता है। इसका आकार ग्रीक अक्षर ओमेगा जैसा दिखता है। इस पैटर्न से गर्मी क्यों बढ़ने लगती है? हाई-प्रेशर सिस्टम गर्म हवा को एक जगह रोक देता है। बादल कम बनते हैं, बारिश रुकती है और जमीन लगातार गर्म होती रहती है। इससे यह संकट होता है। यूरोप की हीटवेव इस पैटर्न से कैसे जुड़ी है? ओमेगा ब्लॉक ने उत्तरी अफ्रीका और भूमध्यसागर की गर्म हवा को यूरोप के ऊपर रोक दिया। इसलिए कई देशों में तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर रहा। इस पैटर्न से और क्या असर पैदा होता है? जहां हाई-प्रेशर रहता है, वहां गर्मी और सूखा बढ़ता है। लो-प्रेशर में भारी बारिश-बाढ़ का खतरा बढ़ता है। जलवायु बदलाव से खतरा क्यों बढ़ गया है? ओमेगा ब्लॉक पहले भी बनते थे, लेकिन अब धरती ज्यादा गर्म है। इसलिए ऐसे पैटर्न में फंसी हवा पहले से ज्यादा गर्म और जानलेवा होने लगी हैं। यूरोप दुनिया में सबसे तेजी से गर्म हो रहा है। इसलिए ओमेगा ब्लॉक यहां ज्यादा खतरनाक हो रहे हैं। यूरोप के 20% घरों में ही एसी; इसलिए भी संकट ज्यादा यूरोप में हीटवेव इसलिए भी ज्यादा घातक साबित हो रही है, क्योंकि वहां सिर्फ 20% घरों में ही एसी है। अमेरिका में एसी 90% से भी ज्यादा घरों में है। यूरोप की ज्यादातर इमारतें ठंडे मौसम के हिसाब से बनी हैं। इसलिए तापमान ज्यादा होने पर घर, अस्पताल व नर्सिंग होम तक गर्म हो जाते हैं। बुजुर्गों, बच्चों व बीमार लोगों पर खतरा और बढ़ जाता है।

वर्ल्ड अपडेट्स:फ्रांस के लालिक म्यूजियम में 40 करोड़ रुपए की चोरी, नकाबपोश बदमाश 20 क्रिस्टल ज्वेलरी लेकर फरार

फ्रांस के लालिक म्यूजियम से रविवार तड़के करीब 40 लाख यूरो (करीब 40 करोड़ रुपए) के आभूषण चोरी हो गए। घटना जर्मनी सीमा से सटे विंगन-सुर-मोडेर कस्बे की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह करीब 5:30 बजे कई नकाबपोश बदमाश संग्रहालय का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। उन्होंने छह डिस्प्ले केस तोड़े और करीब 20 क्रिस्टल आभूषण लेकर फरार हो गए। चोरी हुए आभूषण क्रिस्टल के बने थे और उनमें कीमती रत्न नहीं जड़े थे। इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन्हें पिघलाकर या दोबारा बेच पाना आसान नहीं होगा। लालिक म्यूजियम की शुरुआत 2011 में हुई थी। यह प्रसिद्ध फ्रांसीसी ज्वेलर और ग्लास कलाकार रेने लालिक तथा उनके उत्तराधिकारियों की कला को समर्पित है। संग्रहालय में 650 से अधिक आर्ट नोवो, आर्ट डेको और आधुनिक क्रिस्टल कला की कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। चोरी के बाद संग्रहालय को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में पेरिस के लूव्र म्यूजियम से फ्रांस के क्राउन ज्वेल्स के आठ दुर्लभ आभूषण चोरी हुए थे। उनकी कीमत करीब 8.8 करोड़ यूरो आंकी गई थी। इसी दौरान डेनिस डिडेरो हाउस ऑफ एनलाइटनमेंट से करीब 2,000 दुर्लभ सिक्के और नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री से 15 लाख यूरो कीमत के छह दुर्लभ सोने के नगेट भी चोरी हुए थे।

वर्ल्ड अपडेट्स:फ्रांस के लालिक म्यूजियम में 40 करोड़ रुपए की चोरी, नकाबपोश बदमाश 20 क्रिस्टल ज्वेलरी लेकर फरार

फ्रांस के लालिक म्यूजियम से रविवार तड़के करीब 40 लाख यूरो (करीब 40 करोड़ रुपए) के आभूषण चोरी हो गए। घटना जर्मनी सीमा से सटे विंगन-सुर-मोडेर कस्बे की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह करीब 5:30 बजे कई नकाबपोश बदमाश संग्रहालय का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। उन्होंने छह डिस्प्ले केस तोड़े और करीब 20 क्रिस्टल आभूषण लेकर फरार हो गए। चोरी हुए आभूषण क्रिस्टल के बने थे और उनमें कीमती रत्न नहीं जड़े थे। इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन्हें पिघलाकर या दोबारा बेच पाना आसान नहीं होगा। लालिक म्यूजियम की शुरुआत 2011 में हुई थी। यह प्रसिद्ध फ्रांसीसी ज्वेलर और ग्लास कलाकार रेने लालिक तथा उनके उत्तराधिकारियों की कला को समर्पित है। संग्रहालय में 650 से अधिक आर्ट नोवो, आर्ट डेको और आधुनिक क्रिस्टल कला की कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। चोरी के बाद संग्रहालय को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में पेरिस के लूव्र म्यूजियम से फ्रांस के क्राउन ज्वेल्स के आठ दुर्लभ आभूषण चोरी हुए थे। उनकी कीमत करीब 8.8 करोड़ यूरो आंकी गई थी। इसी दौरान डेनिस डिडेरो हाउस ऑफ एनलाइटनमेंट से करीब 2,000 दुर्लभ सिक्के और नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री से 15 लाख यूरो कीमत के छह दुर्लभ सोने के नगेट भी चोरी हुए थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन में विदेशी फंडिंग पर शिकंजा:चुनावी उम्मीदवारों को हर बड़े चंदे का स्रोत बताना होगा
ब्रिटेन ने सोमवार को विदेशी राजनीतिक चंदे पर नियम और सख्त कर दिए। सरकार का कहना है कि इसका मकसद विदेशी पैसे के जरिए चुनावों को प्रभावित होने से रोकना और राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना है। यह जानकारी ब्रिटिश सरकार के बयान में दी गई है। नए नियमों के तहत अब चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को उम्मीदवार घोषित होने से पहले मिले 2,230 पाउंड से अधिक के सभी चंदों की जानकारी देनी होगी। साथ ही यह भी साबित करना होगा कि यह रकम वैध स्रोतों से आई है। हाउसिंग मंत्री स्टीव रीड ने कहा कि विदेशी दानदाताओं के लिए कड़े मानक लागू कर और उम्मीदवारों से फंडिंग का स्रोत साबित कराने की व्यवस्था कर सरकार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा कर रही है। नियमों के मुताबिक विदेश से आकर ब्रिटेन में बसे लोग अब तभी एक लाख पाउंड या उससे अधिक का राजनीतिक चंदा दे सकेंगे, जब वे कम से कम एक साल तक स्थायी रूप से ब्रिटेन में रह चुके हों। इसके अलावा कंपनियों से मिलने वाले राजनीतिक चंदे का आकलन अब उनके राजस्व के बजाय कर चुकाने के बाद हुए वास्तविक मुनाफे के आधार पर किया जाएगा। ये नए नियम मार्च में घोषित प्रावधानों के बाद लागू किए गए हैं। तब सरकार ने विदेश में रहने वाले ब्रिटिश नागरिकों के राजनीतिक चंदे की सीमा एक लाख पाउंड प्रति वर्ष तय की थी। लोगो विवाद में मॉली टी पर भारी पड़ा लुई वितों: चीनी अदालत ने $15 लाख हर्जाना और माफी का आदेश दिया
चीन की लोकप्रिय बबल टी चेन मॉली टी को फ्रांसीसी लग्जरी ब्रांड लुई वितों (Louis Vuitton) के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में 1.03 करोड़ युआन (करीब 11 लाख पाउंड या 15 लाख डॉलर) हर्जाना भरने का आदेश दिया गया है। अदालत ने माना कि कंपनी का लोगो लुई वितों के मशहूर चार-पंखुड़ी वाले मोनोग्राम ट्रेडमार्क की नकल करता है। इस फैसले के बाद चीन में कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। चाइना डेली के अनुसार, शंघाई के पूर्व में स्थित सूझोउ की अदालत ने गुरुवार को मॉली टी को विवादित लोगो का इस्तेमाल तुरंत बंद करने, सार्वजनिक माफी मांगने और लुई वितों को 1.03 करोड़ युआन का हर्जाना देने का आदेश दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मॉली टी और उससे जुड़ी कंपनियों ने कई ट्रेडमार्क पंजीकरण के लिए आवेदन किए थे, लेकिन चीन के राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रशासन ने अधिकांश आवेदन खारिज कर दिए। केवल “मॉली टी” नाम वाले चीनी अक्षरों का ट्रेडमार्क ही पंजीकृत हो सका। इस मामले से जुड़ा एक हैशटैग चीनी सोशल मीडिया पर 40 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है और इस पर हजारों टिप्पणियां आई हैं। कई यूजर्स ने मॉली टी का समर्थन करते हुए कहा कि पश्चिमी लग्जरी ब्रांडों के कई डिजाइन भी चीनी कलाकृतियों से प्रेरित रहे हैं। वीबो पर एक यूजर ने लिखा कि वह समर्थन जताने के लिए रोज मॉली टी पिएगा। वहीं कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अदालत के फैसले को सही ठहराया। उनका कहना था कि लुई वितों ने संबंधित ट्रेडमार्क पहले ही पंजीकृत करा रखा है, इसलिए कानून के मुताबिक उसकी सुरक्षा का अधिकार उसी के पास है। ‌‌BBC ने इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए मॉली टी और लुई वितों दोनों से संपर्क किया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी की ओर से कोई बयान नहीं आया। NATO सम्मेलन से पहले रूस का बड़ा हमला:कीव में 9 की मौत
यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस ने एक सप्ताह में दूसरी बार बड़ा मिसाइल हमला किया है। सोमवार तड़के हुए हमले में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। घायलों में कम से कम पांच बच्चे शामिल हैं। यह हमला तुर्किये में होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुआ है। सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात होने की उम्मीद है। रविवार को हमले से कुछ घंटे पहले राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि खुफिया जानकारी के अनुसार रूस कीव पर एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। वहीं रूस का कहना है कि उसने हाल में रूसी क्षेत्र के बिजलीघरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेनी हमलों के जवाब में सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। NATO बैठक से पहले जेलेंस्की ने सहयोगी देशों से यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलों की आपूर्ति में देरी नहीं करने की अपील की।

PM मोदी इंडोनेशिया रवाना, सबसे बड़े हिंदू मंदिर जाएंगे:राष्ट्रपति सुबियांतो से ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस डील पर करार संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस दौरान वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात करेंगे और प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे,जो इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है। साथ ही राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक में करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर मुहर लगने की संभावना है। इसके अलावा रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेता कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा में सहयोग लगातार बढ़ा है। इस यात्रा का उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना माना जा रहा है। मोदी का इंडोनेशिया का यह तीसरा दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले दो बार इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं। पहला दौरा मई 2018 में हुआ था। इस दौरान दोनों देशों ने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी समेत 15 से अधिक समझौतों पर सहमति बनी। इसी यात्रा में दोनों देशों ने साझा समुद्री दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके बाद मोदी सितंबर 2023 में जकार्ता में आयोजित 20वें आसियान (ASEAN)-भारत और 18वें ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने इंडोनेशिया पहुंचे थे। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की संभावित डील इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा मानी जा रही है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ इंडोनेशिया की तटीय और समुद्री सुरक्षा क्षमता को भी मजबूत करेगा। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के DRDO और रूस की ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए अहम इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब स्थित है। यह मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास होने के कारण रणनीतिक रूप से जरूरी माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। भारत और इंडोनेशिया ने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान साबंग पोर्ट और आसपास समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया। साबंग पोर्ट भारतीय नौसैनिक जहाजों के लिए ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री पहुंच और निगरानी क्षमता मजबूत हो सकती है। इंडोनेशिया का सबसे बड़ा मंदिर भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा को समर्पित राजधानी जकार्ता से करीब 400 किमी दूर मध्य जावा प्रांत में स्थित प्रम्बानन मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित हैं। यह भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है। प्रम्बानन परिसर में कुल 240 मंदिर हैं। इनमें सबसे ऊंचा और प्रमुख मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई करीब 47 मीटर (154 फीट) है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। प्रम्बानन मंदिर उसी साझा विरासत का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।

PM मोदी इंडोनेशिया रवाना, सबसे बड़े हिंदू मंदिर जाएंगे:राष्ट्रपति सुबियांतो से ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस डील पर करार संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस दौरान वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात करेंगे और प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे,जो इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है। साथ ही राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक में करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर मुहर लगने की संभावना है। इसके अलावा रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेता कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा में सहयोग लगातार बढ़ा है। इस यात्रा का उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना माना जा रहा है। मोदी का इंडोनेशिया का यह तीसरा दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले दो बार इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं। पहला दौरा मई 2018 में हुआ था। इस दौरान दोनों देशों ने संबंधों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी समेत 15 से अधिक समझौतों पर सहमति बनी। इसी यात्रा में दोनों देशों ने साझा समुद्री दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके बाद मोदी सितंबर 2023 में जकार्ता में आयोजित 20वें आसियान (ASEAN)-भारत और 18वें ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने इंडोनेशिया पहुंचे थे। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की संभावित डील इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा मानी जा रही है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ इंडोनेशिया की तटीय और समुद्री सुरक्षा क्षमता को भी मजबूत करेगा। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के DRDO और रूस की ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए अहम इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब स्थित है। यह मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास होने के कारण रणनीतिक रूप से जरूरी माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। भारत और इंडोनेशिया ने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान साबंग पोर्ट और आसपास समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया। साबंग पोर्ट भारतीय नौसैनिक जहाजों के लिए ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री पहुंच और निगरानी क्षमता मजबूत हो सकती है। इंडोनेशिया का सबसे बड़ा मंदिर भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा को समर्पित राजधानी जकार्ता से करीब 400 किमी दूर मध्य जावा प्रांत में स्थित प्रम्बानन मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित हैं। यह भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है। प्रम्बानन परिसर में कुल 240 मंदिर हैं। इनमें सबसे ऊंचा और प्रमुख मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई करीब 47 मीटर (154 फीट) है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। प्रम्बानन मंदिर उसी साझा विरासत का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।

खामेनेई के जनाजे में 3 बेटे शामिल, मुजतबा दूर रहे:लोगों ने ‘किल ट्रम्प’ के नारे लगाए; आज तेहरान में अंतिम यात्रा

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में रविवार को उनके तीन बेटे मसूद, मेयसम और मुस्तफा शामिल हुए। हालांकि खामेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई समारोह से दूर रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल से जान का खतरा होने के कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं लिया। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने ‘किल ट्रम्प’ और ‘किल बीबी’ (इजराइल के प्रधानमंत्री) के नारे लगाए। साथ ही, पूर्व सुप्रीम लीडर का बदला लेने की मांग की। आज सोमवार को तेहरान की सड़कों से खामेनेई की भव्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसमें लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। खामेनेई के ताबूत को शहर के प्रमुख मार्गों से ले जाया जाएगा। धार्मिक नेता, सरकारी अधिकारी और सेना के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहेंगे। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी 4 तस्वीरें… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडे्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…