पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन:सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे, शाम को ऑस्ट्रेलिया के तीसरे दौरे पर होंगे रवाना

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन है। पीएम बुधवार को यहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर 1000 साल से ज्यादा पुराना है। इससे पहले मंगलवार को जकार्ता में भारत-इंडोनेशिया के बीच 20 समझौते हुए। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा। इसी के साथ फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहेंगे पीएम इंडोनेशिया के बाद, पीएम 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे। पीएम मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख कारोबारियों को संबोधित करेंगे। साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान मोदी की इंडोनेशिया दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें… इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को लेकर चिंता क्यों है? इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक) में चीन पिछले कुछ सालों से अपनी सैन्य और समुद्री मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। इसी वजह से भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फिलीपींस, वियतनाम और कई अन्य देशों की चिंता बढ़ी है। चीन लगभग 90% दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। चीन ने समुद्र में कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां हवाई पट्टियां, रडार और मिसाइल सिस्टम तैनात किए हैं। फिलीपींस और वियतनाम के जहाजों के साथ चीनी कोस्ट गार्ड की कई बार झड़प हो चुकी है। पीएम मोदी बोले- दुनिया के 50% डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘दुनिया के करीब 50% डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं। देश में हर महीने 75 करोड़ से ज्यादा डिजिटल पेमेंट किए जाते हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग अब अपने डेबिट कार्ड और एटीएम का पासवर्ड तक भूलने लगे हैं। ग्लोबल रैंकिंग में भारतीय यूनिवर्सिटी की संख्या 12 से बढ़कर 50 से ज्यादा हो गई है। एनर्जी से लेकर कनेक्टिविटी और चिप मैन्युफैक्चरिंग तक भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। भारत ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। PM मोदी बोले- भारत नए सी रूट बना रहा, इंडोनेशिया हमारा फेवरेट फ्रेंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप से इंडोनेशिया के आगे की दूरी करीब 150 किलोमीटर है। इसलिए इंडोनेशिया आने वाले हर भारतीय को यहां अपनापन महसूस होता है।
ट्रेड, ट्रेडिशन और टूरिज्म के जरिए दोनों देश वर्षों से अपने रिश्तों को आगे बढ़ा रहे हैं। आज भारत नए पोर्ट्स, नए शिप्स और नए सी रूट बना रहा है। ऐसे समय में इंडोनेशिया हमारे लिए फेवरेट फ्रेंड बनकर हमारे साथ खड़ा है।
भारत और इंडोनेशिया दोनों ही विकास के लिए अधीर हैं। हमारे पास न रुकने का मौका है और न थमने का। यहां रहने वाले कुछ भारतीयों ने भी मुझे इंडोनेशिया के विकास के बारे में बताया है। ———————– पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मोदी ने कहा- भारत-इंडोनेशिया में कुछ-कुछ होता है: इंडोनेशियाई राष्ट्रपति बोले- मैं मोदी का करियर कॉपी करता हूं पीएम मोदी ने मंगलवार शाम को जकार्ता में भारतीय लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यहां भारत का गाना ‘कुछ-कुछ होता है’ बहुत लोकप्रिय है। जब भारत-इंडोनेशिया साथ मिलकर चलते हैं तो कुछ-कुछ से भी आगे बढ़कर बहुत कुछ होता है। पीएम बोले- राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा था कि उनके अंदर भारत का DNA है। पूरी खबर पढ़ें…

मोदी आज इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे:यह एक हजार साल पुराना; शाम को 3 दिन के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रवाना होंगे पीएम

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा और आखिरी दिन है। पीएम आज इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर एक हजार साल पुराना है। इंडोनेशिया के बाद पीएम ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न रवाना होंगे। उनका ऑस्ट्रेलिया दौरा 8 से 10 जुलाई तक है। पीएम ने मंगलवार को इंडोनेशिया यात्रा के दौरान डिफेंस डील का ऐलान किया था। दोनों देशों के बीच पहली बार लगभग साढ़े पांच हजार करोड़ रुपए का अहम रक्षा करार हुआ है। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलें खरीदेगा। भारत मलक्का की खाड़ी में अहम साबांग पोर्ट को डेवलप करेगा। पीएम मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पीएम मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान बिन्तांग आदिपूर्णा से नवाजा गया है। पीएम मोदी को यह 35वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांतो ने कहा कि पीएम मोदी ने संबंधों में मजबूती लाने के लिए अहम योगदान दिया है। ऑस्ट्रेलिया में सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे पीएम पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात करेंगे। दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। मोदी की यह यात्रा पीएम अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। उनका यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख कारोबारियों को संबोधित करेंगे। साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। PM के इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

अमेरिका ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की:सीरिक, केश्म और बंदर अब्बास को निशाना बनाया; होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद कार्रवाई

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के दक्षिणी हिस्से में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ था। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सीरिक, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद कई इलाकों में आग लग गई, हालांकि नुकसान और हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एयरस्ट्राइक में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी रडार, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और कुछ बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया गया। CENTCOM ने कहा कि ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निशाना बनाया, इसलिए यह जवाबी कार्रवाई की गई। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

चीन का नया ‘मिसाइल मैसेज’:परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल दागी, हिंद-प्रशांत में बढ़ा तनाव, भारत के लिए क्या मायने

चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। भारत के लिए चिंता भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं। चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं। यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं। भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा। दो मोर्चों पर चुनौती भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं। अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा। QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है। चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत? विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है। भारत क्या कर रहा है? भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।

चीन का नया ‘मिसाइल मैसेज’:परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल दागी, हिंद-प्रशांत में बढ़ा तनाव, भारत के लिए क्या मायने

चीन ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रशांत महासागर में परीक्षण कर अपनी रणनीतिक सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशांत क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षण में संभवतः चीन की नई पीढ़ी की JL-3 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसकी मारक क्षमता इतनी है कि चीन के समुद्री क्षेत्र से भी हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य साधे जा सकते हैं। चीन इसे नियमित सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन क्षेत्रीय देशों का कहना है कि इससे हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। भारत के लिए चिंता भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी है। बीते कुछ वर्षों में चीनी नौसेना की पनडुब्बियां हिंद महासागर में कई बार देखी गई हैं। जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर चीन की सक्रियता पहले से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती है। यदि चीन अधिक आधुनिक और कम शोर वाली परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करता है, तो हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सैन्य पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही अब तक चीन का फोकस दक्षिण चीन सागर और ताइवान तक माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी परमाणु पनडुब्बियां हिंद महासागर में भी नियमित रूप से देखी गई हैं। चीन का जिबूती में सैन्य अड्डा, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंच और श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर प्रभाव भारत के लिए पहले से रणनीतिक चुनौती हैं। यदि चीन की नई पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हो जाती हैं, तो वे हिंद महासागर से भी भारत के अधिकांश हिस्सों को निशाना बना सकती हैं। भारत के परमाणु प्रतिरोधक संतुलन पर असर भारत की परमाणु नीति क्रेडिबल मिनिमम डेटेरेंस और नो फर्स्ट यूज पर आधारित है। चीन यदि समुद्र आधारित परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ाता है तो भारत को भी अधिक परमाणु पनडुब्बियां, लंबी दूरी की K-4 और K-5 मिसाइलें और समुद्री निगरानी नेटवर्क तेजी से मजबूत करना होगा। दो मोर्चों पर चुनौती भारत पहले से उत्तरी सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान का सामना कर रहा है। यदि चीन समुद्री मोर्चे पर भी अपनी क्षमता बढ़ाता है तो भारत को भूमि, वायु और समुद्र—तीनों मोर्चों पर सैन्य संसाधन बढ़ाने पड़ सकते हैं। अंडमान-निकोबार की रणनीतिक अहमियत बढ़ेगी भारत का अंडमान एवं निकोबार कमांड मलक्का स्ट्रेट की निगरानी करता है। चीन की पनडुब्बी गतिविधियां बढ़ने पर भारत को समुद्री निगरानी बढ़ाने के अलावा पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), ड्रोन एवं P-8I निगरानी विमान की क्षमताओं को और मजबूत करना पड़ेगा। QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी मजबूत होगी चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच QUAD सहयोग और मजबूत हो सकता है। समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ सकती है। चीन लगातार क्यों बढ़ा रहा है सैन्य ताकत? विशेषज्ञों के अनुसार चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, अमेरिका को प्रशांत क्षेत्र में चुनौती देना चाहता है, अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत कर रहा है और हिंद-प्रशांत में सैन्य प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके साथ ही चीन भविष्य में समुद्र आधारित परमाणु शक्ति के जरिए वैश्विक रणनीतिक संतुलन बदलना चाहता है। भारत क्या कर रहा है? भारत पहले से अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस दिशा में भारत जो कदम उठा रहा है उनमें INS अरिहंत और अरिघात जैसी परमाणु पनडुब्बियों का विकास, K-15 और K-4 बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, P-8I समुद्री निगरानी विमान, अंडमान-निकोबार कमांड का विस्तार और QUAD के तहत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (मालाबार) शामिल हैं।

सीरिया में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के बीच धमाका:जिस होटल में ठहरना था उसके पास ब्लास्ट, सुरक्षा बढ़ाई गई

सीरिया की राजधानी दमिश्क में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दौरे के बीच मंगलवार को धमाका हुआ है। यह ब्लास्ट उस होटल के पास हुआ है, जहां मैक्रों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय लोगों ने एक साथ कई धमाकों की आवाज सुनी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियोज में इलाके से धुआं भी उठता देखा गया। धमाके के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास की सड़कों को बंद कर दिया और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। फिलहाल किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। अधिकारियों ने धमाके के कारणों की जांच शुरू कर दी है। मैक्रों, बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद दमिश्क का दौरा करने वाले यूरोपीय संघ (EU) के पहले बड़े नेता हैं। धमाके से जुड़ी 3 फुटेज… तख्तापलट के बाद सीरिया पहुंचने वाले मैक्रों पहले बड़े यूरोपीय नेता मैक्रों सोमवार को सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुंचे थे। बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद वह सीरिया का दौरा करने वाले पहले बड़े यूरोपीय नेता बन गए हैं। दमिश्क एयरपोर्ट पर सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मैक्रों ने राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने ऐतिहासिक उमय्यद मस्जिद का भी दौरा किया। मैक्रों के दौरे में सीरिया के पुनर्निर्माण, विदेशी निवेश, सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद विरोधी अभियान प्रमुख एजेंडा हैं। दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, वित्त और ऊर्जा क्षेत्र में कई समझौतों पर भी चर्चा हो रही है। खबर लगातार अपडेट हो रही है….

कनाडा में डूबने से 2 पंजाबी युवकों की मौत:एक का पैर फिसला, बचाने कूदा दूसरा भी डूबा; बरनाला-अमृतसर के रहने वाले थे

कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर की लाशीन नहर में डूबने से दो पंजाबी युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में बरनाला जिले के तपा मंडी निवासी लवप्रीत सिंह (26 साल) और अमृतसर के गांव बुटाला (नौरंगपुर) निवासी एक अन्य युवक शामिल हैं। लवप्रीत सिंह के माता-पिता ने केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, विदेशों में रह रहे समाजसेवियों और एनआरआई समुदाय से मदद की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि उनके इकलौते बेटे के पार्थिव शरीर को कनाडा से पंजाब लाने के लिए प्रशासनिक और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे उसका अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कर सकें। गहरे पानी के कारण दोनों की डूबने से मौत यह हादसा उस समय हुआ, जब दोनों दोस्त मॉन्ट्रियल की लाशीन नहर के किनारे मौजूद थे। बताया जा रहा है कि अचानक अमृतसर निवासी युवक का पैर फिसल गया और वह नहर में गिर गया। उसे बचाने के प्रयास में लवप्रीत सिंह भी पानी में कूद गया, लेकिन तेज बहाव और गहरे पानी के कारण दोनों की डूबने से मौत हो गई। कई घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन घटना की सूचना मिलते ही मॉन्ट्रियल फायर डिपार्टमेंट व पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे की मशक्कत के बाद दोनों युवकों को पानी से बाहर निकाला गया। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। ढाई साल पहले वर्क परमिट पर गया था इस घटना से तपा मंडी निवासी पूर्व सैनिक बलवीर सिंह का परिवार गहरे सदमे में है। मृतक लवप्रीत सिंह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। वह करीब ढाई साल पहले वर्क परमिट पर कनाडा गया था और वहां एक कंपनी में ट्राला चालक के रूप में काम कर रहा था। बेटे को विदेश भेजने के लिए बेची जमीन 12वीं कक्षा पास करने के बाद बेटे के बेहतर भविष्य के लिए सीआरपीएफ के पूर्व जवान बलवीर सिंह ने अपनी दो एकड़ जमीन बेचकर उसे कनाडा भेजा था। परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि जिस बेटे को उज्ज्वल भविष्य के लिए विदेश भेजा है, उसकी पार्थिव देह वापस आएगी। लवप्रीत ने करीब 10 दिन पहले ही परिवार से फोन पर बातचीत की थी।

भारतवंशी बिजनेसमैन ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को ठगा:खुद को CIA एजेंट बताया, लड़ाकू विमानों की डील पर 425 करोड़ रु. की धोखाधड़ी

अमेरिका में धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे भारतवंशी बिजनेसमैन गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का भरोसा जीता और रक्षा सौदों के नाम पर करीब 425 करोड़ रुपए का फर्जी कर्ज मंजूर करा लिया। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) और इंडोनेशियाई मैगजीन टेम्पो की रिपोर्ट के अनुसार, गौरव ने इंडोनेशियाई सेना को 36 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और मिलिट्री कमांड सिस्टम दिलाने का दावा किया। इसके लिए उसने फर्जी शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया और अमेरिका के एक कथित ‘सीक्रेट प्रोग्राम’ के नाम पर करीब 425 करोड़ रुपए का फर्जी कर्ज मंजूर करा लिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह कथित ठगी 2020 से 2022 के बीच हुई। ठगी से मिले पैसों से गौरव ने लॉस एंजिलिस में करीब 208 करोड़ रुपए का एक आलीशान बंगला भी खरीदा। प्रबोवो गौरव को ‘मिस्टर G’ बुलाते कहते थे रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव ने प्रबोवो का इतना भरोसा जीत लिया था कि वे उसे ‘मिस्टर G’ कहकर बुलाते थे। उसने राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी ऐसी जानकारियों का भी इस्तेमाल किया, जो केवल उनके करीबी लोगों को पता थीं। इनमें यह बात भी शामिल थी कि प्रबोवो अपने घर के मकड़ी के जालों को प्रकृति का हिस्सा मानते हैं और उन्हें साफ नहीं कराते। गौरव ने यह भी दावा किया कि उसने 2002 के बाली बम धमाकों के आतंकियों को पकड़वाने और प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की थी। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत ने कहा कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे आखिरी समझौते तक नहीं पहुंचे थे। इसलिए सरकार को कोई सीधा आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।

वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में भूस्खलन से 33 लोग दबे: 17 को बचाया गया, 16 की तलाश जारी

चीन के पश्चिमी गांसू प्रांत के पहाड़ी इलाके में मंगलवार को हुए भूस्खलन में 33 लोग मलबे में दब गए। सरकारी मीडिया के मुताबिक, अब तक 17 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 16 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, सेंट्रल चीन के हुबेई प्रांत में सोमवार रात आए तेज तूफान और आंधी-बारिश से कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 275 लोग घायल हुए हैं। एक व्यक्ति अब भी लापता है। मौसम विभाग के मुताबिक, कई इलाकों में 149 किमी/घंटा तक की रफ्तार से हवाएं चलीं। अगले 24 घंटे में 260 मिमी तक बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। चीन के मौसम विभाग ने सुपर टाइफून ‘बावी’ को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। यह तूफान 290 किमी/घंटा तक की रफ्तार वाली हवाओं के साथ प्रशांत महासागर से ताइवान की ओर बढ़ रहा है। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

खामेनेई के पार्थिव शरीर को आज कोम ले जाया जाएगा:यहीं से खामेनेई ने धार्मिक शिक्षा हासिल की थी; शिया धर्मगुरु और छात्र शामिल होंगे

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर धार्मिक रस्मों के लिए मंगलवार को तेहरान से करीब 120 किमी दूर कोम शहर ले जाया जाएगा। कोम ईरान में शिया इस्लामिक शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र और देश के सबसे पवित्र शहरों में से एक माना जाता है। यहां ईरान के सबसे बड़े धार्मिक मदरसे हैं, जहां हजारों छात्र और धर्मगुरु इस्लामी शिक्षा हासिल करते हैं और पढ़ाते हैं। खामेनेई ने भी यहीं से धार्मिक शिक्षा हासिल की थी। इसी वजह से कोम को शिया समुदाय का सबसे जरूरी धार्मिक और वैचारिक केंद्र माना जाता है। आज कोम में खामेनेई के जनाजे का जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें शिया धर्मगुरू और छात्र भी शामिल होंगे। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी 5 तस्वीरें… खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…