वेनेजुएला में मलबे के नीचे लगातार आठ दिन तक फंसे रहने के बाद एक कुत्ते को जीवित बाहर निकाल लिया गया। लंबे समय तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद उसके सुरक्षित मिलने की घटना को लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुत्ता किसी आपदा के बाद मलबे में दब गया था। समय बीतने के साथ उसके जीवित मिलने की उम्मीद बेहद कम होती गई, लेकिन बचाव दल ने तलाश अभियान बंद नहीं किया। आखिरकार लगातार प्रयासों के बाद रेस्क्यू टीम उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रही। कुत्ते के जीवित मिलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि आपदा के बाद शुरुआती दिनों के बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी रखना कितना महत्वपूर्ण होता है। रेस्क्यू के बाद कुत्ते की स्वास्थ्य जांच की गई और उसे आवश्यक देखभाल के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। आठ दिन बाद उसके जीवित मिलने की यह घटना पूरे अभियान की सबसे भावुक और प्रेरक तस्वीर बनकर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन के हर पांचवें विश्वविद्यालय में श्वेत छात्र अल्पसंख्यक: 27 संस्थानों में 50% से कम दाखिला
ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में छात्र आबादी का जातीय स्वरूप तेजी से बदल रहा है। 2024-25 के आधिकारिक उच्च शिक्षा आंकड़ों के द टेलीग्राफ द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, देश के 147 विश्वविद्यालयों में से 27 में गोरे ब्रिटिश छात्रों की हिस्सेदारी 50% से कम रह गई है। दस साल पहले ऐसे विश्वविद्यालयों की संख्या केवल 13 थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विश्वविद्यालयों में गोरे ब्रिटिश छात्रों की हिस्सेदारी 25% से भी कम है। एस्टन यूनिवर्सिटी में यह 23%, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड में 26% और ब्रुनेल यूनिवर्सिटी लंदन व SOAS यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में 27% दर्ज की गई। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि 80 ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में गोरे ब्रिटिश छात्रों का प्रतिनिधित्व देश की कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी की तुलना में कम है। वहीं प्रतिष्ठित रसल ग्रुप के 24 विश्वविद्यालयों में से 15 में भी यही स्थिति देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कम-से-कम 10 ऐसे विश्वविद्यालय जहां गोरे ब्रिटिश छात्र अब अल्पसंख्यक हैं, वहां आज भी केवल ब्लैक एशियन एंड माइनॉरिटी एथनिक (BAME) समुदाय के छात्रों के लिए आरक्षित छात्रवृत्तियां और आर्थिक सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। कुछ योजनाओं में सालाना 18 हजार पाउंड तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। यूनिवर्सिटी ऑफ बकिंघम के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एरिक कॉफमैन ने इन छात्रवृत्तियों का विरोध करते हुए कहा कि नस्ल आधारित सहायता योजनाएं समाप्त होनी चाहिए क्योंकि वे नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देती हैं। हंटर बाइडेन का ट्रम्प पर तंज: बोले- एक ही युद्ध 38 बार खत्म करने के लिए नोबेल पीस प्राइज मिलना चाहिए
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेटे हंटर बाइडेन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर तीखा व्यंग्य किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात कही। हंटर ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि इतिहास में किसी राष्ट्रपति ने एक ही युद्ध को इतनी बार खत्म नहीं किया। हंटर बाइडेन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं आधिकारिक तौर पर डोनाल्ड जे. ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करता हूं। इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति ने एक ही युद्ध को इतनी बार खत्म नहीं किया।” इसके बाद उन्होंने दावा किया कि CNN की गिनती के अनुसार ट्रम्प ईरान के साथ युद्ध खत्म होने की घोषणा कम से कम 38 बार कर चुके हैं। उन्होंने लिखा कि यह उपलब्धि नोबेल पुरस्कार समिति के संज्ञान में लाई जानी चाहिए। हंटर का यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रम्प लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराया है। कुछ महीने पहले ट्रम्प ने कहा था कि उन्होंने आठ बड़े युद्ध रुकवाए हैं और सिद्धांत रूप से हर युद्ध रोकने पर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। बाद में उन्होंने ट्रुथ सोशलl पर यह दावा भी किया कि कुछ लोगों के मुताबिक उन्होंने 100 से अधिक युद्ध रुकवाए हैं। हंटर बाइडेन की पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ यूजर्स ने इसे ट्रम्प के दावों पर तीखा व्यंग्य बताया, जबकि कई लोगों ने हंटर के पुराने विवादों का हवाला देते हुए उनकी आलोचना की। वहीं कुछ यूजर्स ने कहा कि व्यक्तिगत विवादों से अलग इस मुद्दे पर उनका तंज काफी सटीक और मजेदार है।
अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर गुरुवार को एक 52 वर्षीय व्यक्ति ने खुद को आग लगा ली। उसके हाथ में तिब्बती झंडा था। सूचना मिलने पर पुलिस और इमरजेंसी टीम मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) ने बताया कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि व्यक्ति ने यह कदम क्यों उठाया। मामले की जांच की जा रही है। मृतक की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि उसके परिजनों को पहले सूचना दी जानी है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि घटना के वक्त सभी आधिकारिक बैठकें खत्म हो चुकी थीं। इसलिए UN के नियमित कामकाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। घटना का पूरा वीडियो…. 20 साल से अमेरिका में रह रहा था शख्स कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान उसके एक दोस्त ने लोबगा रांगजेन के रूप में की है। बताया गया है कि वह करीब 20 साल से अमेरिका में रह रहा था। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौके पर सामने आए वीडियो में व्यक्ति पारंपरिक बौद्ध भिक्षु जैसे वस्त्र पहने दिखाई देता है। उसने पहले फुटपाथ पर तिब्बती झंडा रखा और फिर खुद को आग लगा ली। आग लगने के बाद एक मिनट से भी कम समय में वह सड़क पर गिर पड़ा। घटना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया। मौके से ‘चाइना आउट ऑफ तिब्बत’ लिखे पर्चे भी बरामद किए गए। 2009 से अब तक 150 से ज्यादा तिब्बतियों ने आत्मदाह किया चीन के तिब्बत पर नियंत्रण के विरोध में 2009 से अब तक 150 से ज्यादा तिब्बती खुद को आग लगाकर जान दे चुके हैं। इनमें बौद्ध भिक्षु, साध्वियां, छात्र, किसान और आम लोग शामिल हैं। पहला चर्चित मामला फरवरी 2009 में सामने आया, जब युवा भिक्षु तपे ने खुद को आग लगा ली थी। इसके बाद 2012 और 2013 में ऐसी घटनाएं सबसे ज्यादा हुईं। तिब्बती संगठनों का कहना है कि लोग चीन के शासन का विरोध जताने, दलाई लामा की तिब्बत वापसी, धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी, तिब्बती भाषा और पहचान बचाने की मांग को लेकर यह कदम उठाते हैं। कई लोगों ने खुद को आग लगाने से पहले ‘तिब्बत को आजाद करो’, ‘दलाई लामा को वापस आने दो’ और ‘चीन तिब्बत छोड़ो’ जैसे संदेश भी छोड़े। चीन का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे निर्वासित तिब्बती नेतृत्व लोगों को भड़काता है। वहीं, निर्वासित तिब्बती प्रशासन इस आरोप को खारिज करता है। उसका कहना है कि लोग चीन की नीतियों और लगातार बढ़ते दबाव से परेशान होकर अपनी जान दे रहे हैं। चीन ने 1951 में तिब्बत पर कब्जा किया था तिब्बत का मुद्दा दुनिया के सबसे पुराने राजनीतिक और क्षेत्रीय विवादों में से एक है। 1950 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) तिब्बत में दाखिल हुई। इसके बाद 1951 में ’17-पॉइंट एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर हुए और चीन ने तिब्बत पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। चीन इसे ‘शांतिपूर्ण मुक्ति’ कहता है। हालांकि, तिब्बती समुदाय और निर्वासित सरकार का कहना है कि यह समझौता दबाव में कराया गया था और चीन ने तिब्बत पर सैन्य कब्जा किया। चीन का कहना है कि तिब्बत 13वीं सदी के मध्य से उसका हिस्सा है। वहीं कई तिब्बती मानते हैं कि वे लंबे समय तक प्रभावी रूप से स्वतंत्र रहे और चीन उनकी सांस्कृतिक पहचान को खत्म करने के साथ-साथ संसाधनों से समृद्ध इस क्षेत्र का दोहन करना चाहता है।
अमेरिका-ईरान के बीच अप्रैल में शुरू हुई बातचीत के दौरान अमेरिका को डर था कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट के कुछ सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को सतर्क रहने का संदेश भिजवाया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को डर था कि अगर दोनों वार्ताकारों की हत्या हुई तो युद्धविराम और शांति प्रक्रिया टूट जाएगी। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली एक बैठक से पहले भी ईरान को हमले का खतरा था। इसी कारण पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को फाइटर जेट की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। लौटते समय भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई और डेलिगेशन सड़क के जरिए तेहरान पहुंचा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान में अगली वार्ता खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद: दोहा में हुई बातचीत के बाद कतर ने बताया कि दोनों पक्ष पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बाद जल्द अगले दौर की वार्ता करेंगे। 2. UN पहुंचा ईरान-इजराइल विवाद: ईरान ने इजराइल पर सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को धमकी देने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई। 3. ईरान हाई अलर्ट पर, 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का दावा: ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले सेना की तैनाती बढ़ी। कार्यक्रम में 30 देशों के प्रतिनिधि और करीब 2 करोड़ लोग शामिल होंगे। 4. होर्मुज पर ईरान की अमेरिका को चेतावनी: ईरान ने कहा है कि होर्मुज हमारा इलाका है, अमेरिकी दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे। सभी जहाजों को तय समुद्री मार्ग अपनाने को कहा। 5. ईरान ने IAEA को परमाणु ठिकानों की जांच से रोका: ईरान ने कहा है कि फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु साइट्स पर IAEA के निरीक्षकों को एंट्री नहीं मिलेगी। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल की कीमतें कम हो रही हैं। उन्होंने ‘फ्रीडम फ्यूल नेटवर्क’ नाम की एक नई गैस स्टेशन चेन की तस्वीर भी साझा की। लेकिन इसके साथ ट्रंप ने फर्जी गैस स्टेशन की तस्वीर पोस्ट करदी।ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यक्रम में ऐसा मजाक किया जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। मजाक के दौरान उन्होंने अनजाने में एक संवेदनशील शब्द इस्तेमाल कर दिया।डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यक्रम में अपने बेटों लेकर किए गए मजाक से लोग हैरान रह गए। बुधवार को नॉर्
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को बिना आधिकारिक मंजूरी के अवैध रूप से गिराए जाने का मामला गरमाने के बाद सिख समुदाय में भारी आक्रोश है। विरोध के बाद प्रांतीय सरकार ने मामले का संज्ञान लिया है। सरकार ने ऐतिहासिक ‘गुरुद्वारा सिंह सभा’ को तुरंत दोबारा बनाने (पुनर्निर्माण करने) का आदेश जारी किया है, साथ ही जमीन के मालिकाना हक की कानूनी जांच शुरू कर दी है। यह पूरा मामला लाहौर से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित फारूखाबाद का है। पंजाब सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, 125 साल से भी अधिक पुराने ऐतिहासिक ‘गुरुद्वारा सिंह सभा’ को एक स्थानीय व्यवसायी (बिजनेसमैन) ने ढहा दिया। आरोप है कि इसके लिए संबंधित विभागों से कोई जरूरी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ या आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।
सिख समुदाय के लोगों ने किया प्रदर्शन इस अवैध तोड़-फोड़ की जानकारी मिलते ही सिख समुदाय के लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सिखों के कड़े विरोध के बाद यह गंभीर मामला सरकार के उच्च अधिकारियों और प्रांतीय मंत्रियों के संज्ञान में आया। मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने किया मुआयना घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रांतीय मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने खुद मौके का मुआयना किया और पीड़ित सिख समुदाय के सदस्यों से बातचीत की। स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने घोषणा की कि इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम तुरंत शुरू कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इस मामले पर जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। औकाफ विभाग यानी Evacuee Trust Property Board द्वारा साझा की गई शुरुआती जानकारी में भी यह पुष्टि हुई है कि गुरुद्वारे को बिना किसी कानूनी मंजूरी के गिराया गया था। इसके साथ ही, मंत्री ने जमीन के मालिकाना हक की जांच के आदेश भी दिए हैं, क्योंकि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह संपत्ति औकाफ विभाग के पास रजिस्टर्ड नहीं थी। मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने और उनके ऐतिहासिक पूजा स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी धार्मिक स्थल के साथ इस तरह की अवैध हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दूसरी ओर, सरकार के इस फैसले पर साइट के आसपास काम करने वाले स्थानीय व्यापारियों ने आपत्ति जताई है। व्यापारियों का कहना है कि यह जगह पिछले लगभग आठ दशकों (80 सालों) से खाली पड़ी थी। इस लंबे समय के दौरान कई गरीब परिवार वहां आकर बस गए और कई लोगों ने अपनी दुकानें खोल लीं।
स्थानीय व्यापारियों ने सरकार से अपील की स्थानीय व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि अगर गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण के लिए वहां से अतिक्रमण हटाया जाता है, तो बेघर होने वाले परिवारों को रहने के लिए दूसरी जगह दी जाए और उनके रोजगार व रोजी-रोटी का पूरा प्रबंध किया जाए।
गुरुद्वारा तोड़ने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई इस घटना ने पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय के बीच ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि बिना इजाजत तोड़-फोड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और धर्मस्थल को उसका पुराना स्वरूप वापस दिया जाएगा।
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्वागत समारोह में मौजूद रहे। ताकाइची आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच निवेश, व्यापार, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। यह प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची का पहला भारत दौरा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें जापान भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश है। मार्च 2026 तक उसका कुल निवेश ₹4.58 लाख करोड़ पहुंच चुका था। भारत-जापान ने साल 2025 में अगले 10 साल के लिए 10 ट्रिलियन जापानी येन (₹5.84 लाख करोड़) के जापानी निजी निवेश का टारगेट तय किया। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और हाई-टेक डिफेंस उद्योगों में होगा। एक सर्वे के मुताबिक, जापानी कंपनियों के लिए भारत दुनिया का सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद निवेश देश है। भारत में व्यापार कर रही 75% से अधिक जापानी कंपनियां मुनाफे में हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के लिए भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 2025 में एक विशेष रणनीतिक डायलॉग शुरू किया है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पूरी तरह जापानी शिनकानसेन तकनीक और जापानी लोन की मदद से आगे बढ़ रहा है, जो दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है। ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ईरान ने बुधवार को कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते (MoU) के तहत जारी होने वाली 6 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों का एक हिस्सा जरूरी सामान खरीदने में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पर कतर की राजधानी दोहा में हुई बैठक में सहमति बनी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि कतर के अधिकारियों के साथ बैठक में तय हुआ कि ईरान अपनी जरूरत के मुताबिक सामान खरीदेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने लेबनान में युद्ध रोकने समेत समझौते की कुछ शर्तों का पालन नहीं किया। बैठक में यह भी फैसला हुआ कि समझौते के उल्लंघन की निगरानी के लिए गुरुवार तक एक अलग कमेटी बनाई जाएगी, जहां किसी भी उल्लंघन की आधिकारिक शिकायत दर्ज की जा सकेगी। गरीबाबादी ने साफ किया कि दोहा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच कोई सीधी बैठक नहीं हुई। बातचीत कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अलग-अलग हुई। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले- ईरान पर बातचीत सही दिशा में बढ़ रही: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है। 2. इजराइल का ऐलान- लेबनान, सीरिया और गाजा से सेना नहीं हटेगी: इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि लेबनान, सीरिया और गाजा में सेना की तैनाती जारी रहेगी। जब तक हिजबुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता, सैनिक वापस नहीं बुलाए जाएंगे। 3. ईरान का दावा- खामेनेई के अंतिम संस्कार में 2 करोड़ लोग पहुंचेंगे: ईरान ने कहा कि अंतिम संस्कार में 2 करोड़ तक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 30 देशों के प्रतिनिधि भी पहुंचेंगे और तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 4. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य हुई: समुद्री निगरानी कंपनी केप्लर के मुताबिक मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से 34 जहाज गुजरे। युद्ध के बाद इस अहम समुद्री मार्ग पर तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य हो रही है। 5. अमेरिका-ईरान समझौते की 5 शर्तों पर अब भी अटकी बात
MoU पर हस्ताक्षर के दो हफ्ते बाद भी फ्रीज फंड जारी होने, तेल निर्यात में राहत, होर्मुज में सामान्य आवाजाही, लेबनान में युद्धविराम और परमाणु मुद्दे जैसे अहम मामलों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिकी नौसेना के MH-60S सीहॉक हेलिकॉप्टर ने बुधवार को अरब सागर में इमरजेंसी वॉटर लैंडिंग की। हेलिकॉप्टर में सवार चार क्रू मेंबर में से तीन को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि एक अब भी लापता है। उसकी तलाश में नौसेना का सर्च ऑपरेशन जारी है। अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, हेलिकॉप्टर USS जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश विमानवाहक पोत से उड़ान पर था। इमरजेंसी लैंडिंग के बाद बचाए गए तीनों क्रू मेंबर की हालत स्थिर है। अमेरिकी नौसेना ने कहा कि शुरुआती जांच में हेलिकॉप्टर पर किसी हमले के संकेत नहीं मिले हैं। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसका पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल लापता क्रू मेंबर की तलाश जारी है।
अमेरिकी नौसेना के MH-60S सीहॉक हेलिकॉप्टर ने बुधवार को अरब सागर में इमरजेंसी वॉटर लैंडिंग की। हेलिकॉप्टर में सवार चार क्रू मेंबर में से तीन को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि एक अब भी लापता है। उसकी तलाश में नौसेना का सर्च ऑपरेशन जारी है। अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, हेलिकॉप्टर USS जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश विमानवाहक पोत से उड़ान पर था। इमरजेंसी लैंडिंग के बाद बचाए गए तीनों क्रू मेंबर की हालत स्थिर है। अमेरिकी नौसेना ने कहा कि शुरुआती जांच में हेलिकॉप्टर पर किसी हमले के संकेत नहीं मिले हैं। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसका पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल लापता क्रू मेंबर की तलाश जारी है।

