Digital arrest scam पर बड़ा एक्शन, 9,400 WhatsApp ब्लॉक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का खुलासा

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए दूरसंचार नियामकों, सेवा प्रदाताओं, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों एवं केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को शामिल करते हुए बहुस्तरीय कार्रवाई की गई है तथा व्हाट्सऐप ने ऐसे अपराधों में शामिल 9,400 खातों पर रोक लगाई है।

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सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने अपनी विस्तृत स्थिति रिपोर्ट में इस कार्रवाई का ब्योरा दिया है। यह रिपोर्ट देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट  के 9 फरवरी के निर्देशों के अनुपालन में दाखिल की गई है। Edited by : Sudhir Sharma

आकाश अंबानी का बड़ा बयान, AI युग का डिजिटल गेटवे बनेगा JiO

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के ताज़ा नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि कंपनी अब अपने अगले बड़े ग्रोथ फेज की ओर बढ़ रही है, जहां जियो सिर्फ टेलीकॉम नहीं बल्कि भारत का डिजिटल और AI गेटवे बनने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी प्रबंधन के मुताबिक, जियो अब उस चरण में पहुंच चुका है जहां उसकी मजबूत कनेक्टिविटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य में AI आधारित सेवाओं के विस्तार की नींव तैयार कर रही है।

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रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कहा, “जियो ने भारत को इंटरनेट युग से जोड़ा और अब 52 करोड़ 40 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ यह ‘इंटेलिजेंस एरा’ का डिजिटल गेटवे बनने की स्थिति में है। जियो की एडवांस कनेक्टिविटी और कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए AI सेवाएं देश के उपभोक्ताओं, घरों और व्यवसायों तक पहुंचेंगी।” 

 

देश का सबसे बड़ा यूजर बेस और तेजी से बढ़ते 5G नेटवर्क के साथ, जियो का फोकस अब कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर को और गहराई तक ले जाने पर है। जियोफाइबर और जियोएयरफाइबर को केवल ब्रॉडबैंड सेवा नहीं, बल्कि एक ऐसे कनेक्टिविटी टूल के रूप में देखा जा रहा है, जो घरों और छोटे व्यवसायों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाकर डिजिटल और AI सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ाएगा।

 

मार्च 2026 तक जियो का फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर बेस 2 करोड़ 71 लाख तक पहुंच गया है और इसका मार्केट शेयर करीब 43% हो चुका है। जियोएयरफाइबर का सब्सक्राइबर बेस 1 करोड़ 30 लाख है, जो इस विस्तार का बड़ा आधार बनकर उभरा है।

 

डेटा खपत में तेज बढ़ोतरी भी इस बदलाव की अहम कड़ी है। जियो नेटवर्क पर कुल डेटा ट्रैफिक में करीब 35% की सालाना बढ़त दर्ज की गई है, जबकि प्रति व्यक्ति डेटा खपत 42.3 GB प्रति माह तक पहुंच गई है। यह बढ़ता डेटा उपयोग आने वाले समय में AI आधारित सेवाओं के लिए मजबूत फाउंडेशन तैयार करेगा। 

 

फाइनेंशियल प्रदर्शन भी इस ट्रेंड को सपोर्ट करता है। Q4 FY26 में जियो प्लेटफॉर्म्स का रेवेन्यू  44,928 करोड़ रुपय रहा, जो 12.7% बढ़ा, जबकि EBITDA 20,060 करोड़ रुपय रहा और मार्जिन 52% से ऊपर पहुंच गया। पूरे साल में भी डिजिटल सर्विसेज कंपनी की ग्रोथ का प्रमुख इंजन बनी रहीं। 

 

इस तरह जियो का मॉडल मोबाइल कनेक्टिविटी, ब्रॉडबैंड विस्तार और बढ़ती डेटा खपत मिलकर एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है, जो आने वाले वर्षों में AI इकोनॉमी के लिए बुनियादी ढांचा बन सकता है।

ईशा अंबानी Isha Ambani

AI और प्राइसिंग पर फोकस, स्केल को वैल्यू में बदलेगा रिलायंस रिटेल : ईशा अंबानी

 

रिलायंस रिटेल अब अपने अगले ग्रोथ फेज में AI आधारित मर्चेंडाइजिंग और बेहतर प्राइसिंग पर फोकस रखेगा, ताकि अपने बड़े नेटवर्क से ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाया जा सके। कंपनी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ईशा अंबानी ने कहा, “FY27 में हमारा ध्यान इस बड़े नेटवर्क के ज़रिए ग्राहकों को ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा पहुंचाने पर रहेगा – AI आधारित मर्चेंडाइजिंग, बेहतर प्राइसिंग और मजबूत निष्पादन के जरिए हम ये करने की कोशिश करेंगे।”

 

FY26 में कंपनी का रेवेन्यू ₹3.70 लाख करोड़ के पार रहा और EBITDA ₹27,000 करोड़ से अधिक रहा। रिलायंस रिटेल ने 38.7 करोड़ ग्राहकों को 193 करोड़ ट्रांजैक्शंस के जरिए सेवा दी। कंपनी का स्टोर नेटवर्क 20,000 के पार पहुंच गया है, जबकि जियोमार्ट जैसे प्लेटफॉर्म इस नेटवर्क को डिजिटल और हाइपरलोकल डिलीवरी से जोड़ रहे हैं।

 

जियोमार्ट के हाइपरलोकल कॉमर्स में तेज बढ़त दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में जियोमार्ट के औसत दैनिक ऑर्डर तिमाही आधार पर 29% और सालाना आधार पर 300% से ज्यादा बढ़े। जियोमार्ट अब 5,100+ पिन कोड और 1,200+ शहरों में सेवाएं दे रहा है, जिसे 3,100 से ज्यादा स्टोर्स का नेटवर्क सपोर्ट कर रहा है। Edited by: Sudhir Sharma

एप्पल में बड़ा बदलाव: 15 साल बाद CEO पद छोड़ेंगे टिम कुक, जॉन टर्नस संभालेंगे कमान

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एप्पल के CEO टिम कुक सितंबर में अपने मौजूदा पद से इस्तीफा दे देंगे और एप्पल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर नई भूमिका शुरू करेंगे। एप्पल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जॉन टर्नस, CEO की भूमिका संभालेंगे।

 

15 साल से टिम कुक इस अहम जिम्मेदारी को निभा रहे थे। 65 वर्षीय कुक इस्तीफे के बाद भी वे कंपनी से जुड़े रहेंगे। वे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर नई पारी की शुरुआत करेंगे।

 

टिम कुक 1998 में वर्ल्डवाइड ऑपरेशंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में Apple में शामिल हुए थे। साल 2005 से 2011 तक उन्होंने कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के रूप में काम किया।

 

साल 2011 में एपल के को-फाउंडर स्टीव जाब्स के जाने के बाद टिम कुक कंपनी के सीईओ बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान एप्पल कंपनी ने आसमान की बुलंदियों को छुआ और कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 4 ट्रिलियन डॉलर तक जा पहुंचा। उन्होंने चीन पर निर्भरता कम करते हुए भारत पर फोकस किया। इससे कंपनी को काफी फायदा हुआ।

edited by : Nrapendra Gupta

Vivo Y05 : सबसे सस्ता स्मार्टफोन भारत में लॉन्च, 6500mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले और Extended RAM के साथ

Vivo ने भारत में अपना नया बजट स्मार्टफोन Vivo Y05 लॉन्च कर दिया है। यह डिवाइस कंपनी के एंट्री-लेवल पोर्टफोलियो को मजबूत करता है। इससे पहले इस फोन को मलेशिया और सऊदी अरब जैसे चुनिंदा बाजारों में पेश किया गया था, जिसके बाद अब इसे भारतीय बाजार में उतारा गया है। फोन Vivo की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर भी उपलब्ध है।

 

कीमत और उपलब्धता

 

Vivo Y05 के बेस वेरिएंट (4GB RAM + 64GB स्टोरेज) की कीमत ₹12,999 रखी गई है। वहीं 4GB RAM और 128GB स्टोरेज वाला दूसरा वेरिएंट भी पेश किया गया है, लेकिन इसकी कीमत का अभी खुलासा नहीं किया गया है। यह स्मार्टफोन Midnight Blue और Champagne Gold जैसे दो कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।

 

फीचर्स और स्पेसिफिकेशन

 

Vivo Y05 4G एक फीचर-पैक्ड बजट स्मार्टफोन है, जिसमें बड़ा डिस्प्ले, दमदार परफॉर्मेंस और लंबी बैटरी लाइफ का कॉम्बिनेशन मिलता है।

 

डिस्प्ले: फोन में 6.74 इंच का HD+ LCD पैनल (1600×720) दिया गया है, जिसमें वॉटरड्रॉप नॉच डिजाइन है। 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ स्मूद स्क्रॉलिंग और एनिमेशन मिलते हैं। इसमें 260 PPI पिक्सल डेंसिटी और 1200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस दी गई है। साथ ही हाई-ब्राइटनेस Eye-Care मोड भी मौजूद है।

परफॉर्मेंस: यह स्मार्टफोन Unisoc T7225 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर (12nm, 1.8GHz तक) पर काम करता है। फोन में Android 16 के साथ OriginOS 6.0 मिलता है।
 

मेमोरी: इसमें 4GB RAM दी गई है, जिसे Extended RAM तकनीक के जरिए 8GB तक बढ़ाया जा सकता है। यानी फिजिकल और वर्चुअल RAM के कॉम्बिनेशन से बेहतर मल्टीटास्किंग और तेज ऐप स्विचिंग मिलती है।

कैमरा: फोन में 8MP का रियर कैमरा (f/2.0) LED फ्लैश के साथ और 5MP का फ्रंट कैमरा (f/2.2) दिया गया है। इसमें नाइट, पोर्ट्रेट, लाइव फोटो, टाइम-लैप्स और डॉक्यूमेंट जैसे कई शूटिंग मोड्स मिलते हैं।

बैटरी: Vivo Y05 में 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो कंपनी के मुताबिक 29 घंटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकती है। इसमें 15W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग सपोर्ट भी मौजूद है।
 

ड्यूरेबिलिटी: फोन में मिलिट्री-ग्रेड ड्रॉप प्रोटेक्शन और IP65 रेटिंग दी गई है, जो इसे धूल और पानी से सुरक्षित बनाती है।
 

कनेक्टिविटी: इसमें Wi-Fi, Bluetooth 5.2, OTG सपोर्ट, FM रेडियो और IR सेंसर जैसे फीचर्स भी शामिल हैं।

 

कुल मिलाकर, Vivo Y05 बजट सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प के तौर पर सामने आया है, जिसमें बड़ी बैटरी, स्मूद डिस्प्ले और उपयोगी फीचर्स का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है। Edited by : Sudhir Sharma

रिलायंस फाउंडेशन की बड़ी पहल, 10 लाख ‘साइबर सखी’ तैयार होंगी, महिलाओं को मिलेगा साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

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रिलायंस फाउंडेशन ने ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘e-SafeHER’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह एक साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण पहल है, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली C-DAC संस्था (‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग’) के साथ मिलकर शुरू किया गया है। 

 

इस कार्यक्रम का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर देशभर में 10 लाख महिलाओं को ‘साइबर सखी’ के रूप में तैयार करना है, ताकि वे सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। मध्य प्रदेश और ओडिशा से कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा। 

महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक और सक्षम बनाने वाला कार्यक्रम e-SafeHER के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षा, डिजिटल लेन-देन और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पहल खास तौर पर उन महिलाओं पर केंद्रित है, जो तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रही हैं। रिलायंस फाउंडेशन इस कार्यक्रम को देशभर में स्वयं सहायता समूहों और अपने जमीनी नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाएगा, जबकि C-DAC प्रशिक्षण सामग्री और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा।

 

इस मौके पर रिलायंस फाउंडेशन की डायरेक्टर ईशा अंबानी ने कहा, “भारत में ग्रामीण महिलाएं पहले से कहीं ज्यादा तेजी से ऑनलाइन आ रही हैं। रिलायंस फाउंडेशन का उद्देश्य सिर्फ डिजिटल पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने के लिए जरूरी जानकारी और कौशल देना भी है। e-SafeHER के जरिए हम महिलाओं को यह सिखाना चाहते हैं कि वे डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल आत्मविश्वास के साथ करें और अपने जीवन और आजीविका को मजबूत बनाएं।”

 

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “देश में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए हम, e-SafeHER जैसी पहल के जरिए दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंच बना रहे हैं। ताकि वे डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और सशक्त बन सकें। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसे आगे बड़े स्तर पर अपनाया और विस्तार दिया जा सकता है।”

 

रिलायंस फाउंडेशन का कहना है कि यह पहल महिलाओं के डिजिटल सशक्तिकरण के उसके व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत डिजिटल साक्षरता, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

10,000 से ज्यादा के Online Payment पर 1 घंटे का होल्ड, क्या है RBI ला रहा है 3 फीचर्स

डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कई बड़े बदलाव के सुझाव दिए हैं। इनमें से एक यह है कि ₹10,000 से ज्यादा के डिजिटल पेमेंट्स को लाभार्थी के खाते में जमा होने में 1 घंटे की देरी का नियम लागू किया जाए। अधिकतर डिजिटल ट्रांजैक्शन तुरंत होते हैं, जिससे यूजर को सोचने या गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता। 

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हालांकि अभी ये सिर्फ प्रस्तावित हैं, लागू नहीं हुए हैं। इस प्लान में किल स्विच से लेकर पेमेंट होने में एक घंटे वाली देरी शामिल है। इससे अगर गलत ट्रांजेक्शन हो जाता है तो उसे रोकने या कैंसिल करने का अवसर मिल सकता है। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए RBI ने ये प्रस्ताव रखा है। RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।  RBI सिर्फ टाइम लिमिट ही नहीं, बल्कि 3 नए फीचर्स भी ला रहा है।

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क्या होगा फायदा 

अभी हम जैसे ही 'Pay' बटन दबाते हैं, पैसा तुरंत दूसरे के खाते में पहुंच जाता है। जालसाज (Scammers) इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। RBI का नया प्रस्ताव कहता है कि अगर आप ₹10,000 से ज्यादा भेज रहे हैं, तो वह पैसा सामने वाले को तुरंत नहीं मिलेगा। उस 1 घंटे के दौरान आप ट्रांजेक्शन को चेक कर सकते हैं। अगर गलती से पेमेंट हुआ है, तो उसे कैंसिल कर सकते हैं। और धोखाधड़ी का अहसास होने पर पेमेंट रोक सकते हैं। Edited by : Sudhir Sharma

अगर आप भी देर तक मोबाइल देखते हैं तो जान लें ये नुकसान

smartphone side effects: आज का डिजिटल युग (Digital Age) हमें कई तरह की तकनीकी सुविधाएं दे रहा है, और मोबाइल (Mobile)  इसका सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है। स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग या देर तक मोबाइल देखने की आदत हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है।ALSO READ: Summer health tips: लू और डिहाइड्रेशन से बचाने वाले 10 घरेलू पेय और हेल्थ टिप्स

 

आजकल लोग सोशल मीडिया, वीडियो, गेमिंग और काम के लिए घंटों मोबाइल स्क्रीन पर रहते हैं। ऐसा करने से सिर्फ आंखों और नींद पर असर नहीं पड़ता, बल्कि  मानसिक स्वास्थ्य, शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां भी प्रभावित हो सकती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते हैं कि डिजिटल युग में मोबाइल का संतुलित उपयोग करना बेहद जरूरी है।

 

1. आंखों की रोशनी पर बुरा असर

2. अनिद्रा और खराब स्लीप साइकिल

3. 'टेक्स्ट नेक' और गर्दन में दर्द

4. मानसिक स्वास्थ्य और तनाव

5. याददाश्त और एकाग्रता में कमी 

6. बचाव के लिए क्या करें?

7. मोबाइल-FAQ
 

यहां वेबदुनिया के सुधि पाठकों के लिए देर तक मोबाइल देखने से होने वाले 5 बड़े नुकसान दिए जा रहे हैं:

 

1. आंखों की रोशनी पर बुरा असर

मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' (Blue Light) सीधे हमारी आंखों के रेटिना को प्रभावित करती है। अत: लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखें शुष्क हो जाती हैं, उनमें जलन और धुंधलापन होने लगता है। जिससे कि कम उम्र में ही चश्मा लग जाना और भविष्य में मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।

 

2. अनिद्रा और खराब स्लीप साइकिल

आपको बता दें कि सोने से ठीक पहले मोबाइल देखना आपकी नींद का सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन/ Melatonin नामक हार्मोन को बनने से रोकती है, जो हमें नींद आने में मदद करता है। इससे नींद पूरी न होने से अगले दिन चिड़चिड़ापन, थकान और काम में एकाग्रता की कमी महसूस होती है तथा सेह‍त को खतरा महसूस होने लगता है।ALSO READ: health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार

 

3. 'टेक्स्ट नेक' और गर्दन में दर्द

साथ ही आपको यह जानना भी बहुत जरूरी है कि जब आप मोबाइल देखते हैं, तो आपकी गर्दन अक्सर झुकी हुई होती है। और इस तरह गर्दन झुकाने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे डॉक्टर्स 'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम' कहते हैं। जिसके कारण गर्दन, कंधों और पीठ में दर्द शुरू हो जाता है, जो आगे चलकर स्पॉन्डिलाइटिस का रूप ले सकता है।

 

4. मानसिक स्वास्थ्य और तनाव

सोशल मीडिया पर दूसरों की चमक-धमक वाली जिंदगी देखना और लगातार नोटिफिकेशन चेक करना हमारे दिमाग को शांत नहीं रहने देता। इसी वजह से देर तक मोबाइल देखने से दिमाग हमेशा अत्यधिक उत्तेजित रहता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है। बच्चों में यह लत उनके मानसिक विकास को रोक देती है।

 

5. याददाश्त और एकाग्रता में कमी

मोबाइल पर लगातार 'रील्स' या छोटे वीडियो देखने से हमारे दिमाग की अटेंशन स्पैन यानी किसी चीज पर ध्यान लगाने की क्षमता कम हो रही है। जैसा कि दिमाग को कम समय में ज्यादा जानकारी की आदत हो जाती है, जिससे गहरी सोच और याद रखने की क्षमता कम होने लगती है। इससे आप रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भूलने लगते हैं और निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं।

 

6. बचाव के लिए क्या करें?

20-20-20 का नियम: हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर रखी किसी चीज को देखें।

 

स्क्रीन टाइम लॉक: रात को सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल को खुद से दूर रख दें।

 

नाइट मोड: अगर बहुत जरूरी हो, तो फोन में 'रीडिंग मोड' या 'ब्लू लाइट फिल्टर' का इस्तेमाल करें।

 

डिजिटल डिटॉक्स: हफ्ते में एक दिन कुछ घंटों के लिए मोबाइल को पूरी तरह बंद रखने की कोशिश करें।

 

7. मोबाइल-FAQ:

 

1. सवाल: मोबाइल देर तक देखने से आंखों पर क्या असर पड़ता है?

जवाब: आँखों में थकान, ड्रायनेस और स्ट्रेन हो सकता है।

 

2. सवाल: नींद पर इसका क्या असर है?

जवाब: नीली रोशनी मेलनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद की गुणवत्ता घटती है।

 

3. सवाल: इसे कम करने के लिए क्या किया जा सकता है?

जवाब: मोबाइल ब्रेक लेना, रात में स्क्रीन टाइम कम करना और ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करना मदद करता है।

 

4. सवाल: क्या मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है?

जवाब: ज्यादा समय मोबाइल पर बिताने से स्ट्रेस, चिंता और ध्यान की समस्या बढ़ सकती है।

स्मार्टफोन को 'स्मार्टली' इस्तेमाल करें, इसे अपनी सेहत पर हावी न होने दें।

 

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Chrome का नया लुक, अब ऊपर वाले टैब्स से पाएं छुटकारा, इस सीक्रेट सेटिंग से बदलें अपना ब्राउजिंग एक्सपीरियंस

हम में से ज्यादातर लोग अपने वेब ब्राउज़र में बदलाव पसंद नहीं करते। इंटरनेट सर्फिंग हमारी जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन गई है कि छोटा सा “अपडेट” भी कभी-कभी सिरदर्द लगने लगता है। लेकिन, गूगल ने अब क्रोम के सबसे बेसिक फीचर- टैब्स (Tabs)-को पूरी तरह से बदल दिया है। यह फीचर नवंबर 2025 से डेवलपर्स के लिए टेस्टिंग मोड (Canary Build) में था, लेकिन अब इसे हम सभी के लिए जारी कर दिया गया है।

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क्या है यह नया बदलाव?

मंगलवार को गूगल ने क्रोम में 'वर्टिकल टैब्स' (Vertical Tabs) फीचर लॉन्च किया है। अब तक आपके द्वारा खोले गए पेज (टैब्स) ब्राउज़र में सबसे ऊपर एक लाइन में दिखाई देते थे। अब आप उन्हें स्क्रीन के बाईं ओर (Left Side) एक लंबी लिस्ट के रूप में देख सकेंगे।

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क्यों है यह खास?

टैब्ड ब्राउजिंग का चलन 2002 में फायरफॉक्स (Firefox) के दौर से शुरू हुआ था और तब से हम ऊपर की तरफ ही टैब्स देखने के आदी हैं। लेकिन जब हम बहुत सारे टैब्स खोल लेते हैं, तो वे इतने छोटे हो जाते हैं कि यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा पेज किस बारे में है। वर्टिकल टैब्स इसी समस्या का समाधान हैं।

 

यूजर्स को इससे क्या फायदा होगा?

वर्टिकल टैब्स सिर्फ एक दिखावटी बदलाव नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक फायदे हैं:

 

नाम पढ़ना हुआ आसान: जब आप 20-30 टैब्स खोल लेते हैं, तो ऊपर वाली पट्टी में सिर्फ छोटे आइकन दिखते हैं। वर्टिकल लिस्ट में टैब का टाइटल (Headline) साफ नजर आता है, जिससे आपको पता रहता है कि आप किस पेज पर हैं।

 

बेहतर मैनेजमेंट: अगर आप बहुत ज्यादा रिसर्च या मल्टी-टास्किंग करते हैं, तो साइड बार में टैब्स को मैनेज करना और उनके बीच स्विच करना ज्यादा तेज और आसान होता है।

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जगह की बचत: अगर आपको सिर्फ आइकन देखने हैं, तो आप इस साइड बार को छोटा (Collapse) भी कर सकते हैं, जिससे स्क्रीन पर कंटेंट देखने के लिए ज्यादा जगह मिलती है।

 

रीडिंग मोड (Reading Mode): गूगल ने इसके साथ ही 'फुल-पेज रीडिंग मोड' भी दिया है। अब किसी भी आर्टिकल पर राइट-क्लिक करके आप उसे बिना किसी विज्ञापन या फालतू की चीजों के, बिल्कुल एक किताब की तरह पढ़ सकते हैं।

 

इसे कैसे शुरू करें?

यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है। अगर आप इसे आज़माना चाहते हैं, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

क्रोम के सबसे ऊपरी हिस्से (जहां टैब्स होते हैं) पर Right-Click करें। वहाँ “Show Tabs Vertically” का विकल्प चुनें। अगर आपको यह विकल्प नहीं दिख रहा है, तो परेशान न हों। गूगल इसे धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर रहा है, जल्द ही यह आपके ब्राउज़र में पहुंच जाएगा।  Edited by : Sudhir Sharma 

iPad mini को टक्कर देगा Oppo Pad Mini, 144Hz OLED डिस्प्ले, Snapdragon 8 Gen 5 और दमदार बैटरी जैसे फीचर्स

Oppo कॉम्पैक्ट टैबलेट मार्केट में एंट्री करने की तैयारी में है। कंपनी का नया Pad Mini जल्द लॉन्च हो सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन लीक रिपोर्ट्स में इसके दमदार फीचर्स सामने आए हैं। यह टैबलेट उन यूजर्स को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है जो पोर्टेबल होने के साथ-साथ पावरफुल डिवाइस चाहते हैं। लॉन्च के बाद यह बाजार में मौजूद प्रीमियम कॉम्पैक्ट टैबलेट्स को सीधी टक्कर दे सकता है।

 

144Hz OLED डिस्प्ले और प्रीमियम डिजाइन

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लीक्स के मुताबिक Pad Mini में 8.8 इंच का LTPO AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है, जिसका रेजोल्यूशन 2882×1920 पिक्सल होगा। इसमें 144Hz रिफ्रेश रेट और 1800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस दी जा सकती है, जिससे विजुअल्स काफी शार्प और कलर्स बेहद ब्राइट नजर आएंगे। 3:2 आस्पेक्ट रेशियो इसे काम और वीडियो देखने दोनों के लिए बेहतर बनाता है। डिजाइन की बात करें तो इसमें 5.39mm पतला यूनिबॉडी मेटल चेसिस मिल सकता है और वजन करीब 279 ग्राम होगा, जो इसे काफी स्लिम और हल्का बनाता है।

 

 Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर

 

परफॉर्मेंस के लिए इसमें Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट मिलने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो यह अपने सेगमेंट के सबसे पावरफुल टैबलेट्स में से एक होगा। यह गेमिंग, मल्टीटास्किंग और डेली प्रोडक्टिविटी जैसे काम आसानी से संभाल सकेगा। कैमरा के तौर पर इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर सेंसर दिया जा सकता है, जो फोटो और वीडियो कॉलिंग के लिए उपयोगी होगा।

 

 बैटरी, चार्जिंग और कनेक्टिविटी

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रिपोर्ट्स के अनुसार टैबलेट में 8000mAh की बैटरी दी जा सकती है, जो 67W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी। इससे यह पूरे दिन चलने के साथ जल्दी चार्ज भी हो सकेगा। कनेक्टिविटी के लिए इसमें eSIM सपोर्ट मिलने की संभावना है, जिससे यूजर्स कहीं भी आसानी से इंटरनेट का उपयोग कर सकेंगे।

 

  iPad mini से होगी टक्कर

 

यह टैबलेट Apple iPad mini (8th generation) को सीधी टक्कर दे सकता है। जहां Apple अपने डिवाइस में वॉटर रेजिस्टेंस और बेहतर हार्डवेयर दे सकता है, वहीं Oppo हाई रिफ्रेश रेट OLED डिस्प्ले के जरिए यूजर्स को आकर्षित करने की कोशिश करेगा। फिलहाल कंपनी की ओर से लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन लीक के आधार पर इसकी जल्द एंट्री की उम्मीद की जा रही है।  Edited by : Sudhir Sharma

Gemma 4: गूगल ने पेश किया अब तक का सबसे शक्तिशाली ओपन AI मॉडल; जानें इसकी खासियतें और इस्तेमाल का तरीका

गूगल ने अपनी अब तक की सबसे सक्षम ओपन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल सीरीज 'Gemma 4' से पर्दा उठा दिया है। इस कदम को दुनिया भर के डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और व्यवसायों के लिए शक्तिशाली AI एप्लिकेशन बनाने की राह में एक बड़ी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। 

 

गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) द्वारा विकसित यह मॉडल विशेष रूप से 'एडवांस्ड रीजनिंग' और 'जटिल ऑटोमेटेड वर्कफ़्लो' के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के आधिकारिक ब्लॉग के अनुसार इसे अपाचे 2.0 (Apache 2.0) लाइसेंस के तहत जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि कोई भी इसका व्यावसायिक उपयोग, संशोधन और निर्माण पूरी तरह से मुफ्त में कर सकता है। एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि व्यावसायिक उपयोग के लिए फ्री लाइसेंस देकर गूगल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

 

क्या है Gemma 4 की खासियत?

 

Gemma 4 को उसी तकनीक और रिसर्च पर बनाया गया है जिस पर गूगल का मुख्य मॉडल Gemini 3 आधारित है। इसके फीचर्स- 
चार अलग-अलग साइज: यह मॉडल मोबाइल फोन से लेकर बड़े सर्वर तक के लिए चार आकारों में उपलब्ध है।  बिना इंटरनेट के काम: इसके छोटे 'एज मॉडल्स' (2 बिलियन और 4 बिलियन पैरामीटर्स) को विशेष रूप से फोन, रास्पबेरी पाई और एनवीडिया जेटसन जैसे डिवाइस पर ऑफलाइन चलाने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि बैटरी और रैम की बचत हो सके।

 

 बहुभाषी क्षमता: यह 140 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर उपयोगी बन जाता है।

 

स्वायत्त कार्य (Autonomous Action): यह केवल चैटबॉट तक सीमित नहीं है, बल्कि मल्टी-स्टेप प्लानिंग, कोड जनरेशन और ऑडियो-विजुअल प्रोसेसिंग जैसे जटिल काम भी कर सकता है।

 

अब आपके स्मार्टफोन पर चलेगा शक्तिशाली AI

'एंड्रॉयड डेवलपर्स ब्लॉग' के मुताबिक, Gemma 4 की सबसे बड़ी खूबी इसका मोबाइल पर सीधे चलना है। डेवलपर्स आज से ही 'AICore डेवलपर प्रीव्यू' के जरिए इसका उपयोग कर सकते हैं। गूगल ने पुष्टि की है कि Gemma 4 के लिए लिखा गया कोड इस साल के अंत में आने वाले Gemini Nano 4 सक्षम डिवाइस पर भी काम करेगा। गूगल के 'AI Edge Gallery' ऐप के जरिए यूजर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के 'एजेंट स्किल्स' जैसे फीचर्स का अनुभव ले सकेंगे, जो पूरी तरह से डिवाइस पर ही प्रोसेस होते हैं।

 

कैसे करें Gemma 4 का उपयोग?

यदि आप एक डेवलपर, छात्र या व्यवसायी हैं, तो आप इन तरीकों से इसकी शुरुआत कर सकते हैं:

बड़े मॉडल्स (31B और 26B): इनका उपयोग Google AI Studio के जरिए किया जा सकता है।


डाउनलोड: मॉडल के वेट (Weights) को Hugging Face, Kaggle या Ollama से सीधे डाउनलोड किया जा सकता है।


टूल सपोर्ट: यह मॉडल पहले दिन से ही Hugging Face Transformers, vLLM, llama.cpp और NVIDIA NIM जैसे लोकप्रिय टूल्स को सपोर्ट करता है।

 

डेस्कटॉप और रोबोटिक्स: यह विंडोज, लिनक्स और मैक ओएस पर चलता है। साथ ही, रास्पबेरी पाई 5 के जरिए इसे रोबोटिक्स में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

बाजार में कड़ी टक्कर और विशेषज्ञों की राय

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने Gemma 4 की कार्यक्षमता की सराहना करते हुए इसे 'इंटेलिजेंस-पर-पैरामीटर' के मामले में सबसे कुशल बताया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसे मेटा (Meta) की Llama सीरीज और चीन के DeepSeek मॉडल्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। Edited by : Sudhir Sharma