LIVE: उत्तर भारत में फिर कमजोर पड़ा दक्षिण-पश्चिम मानसून

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Latest News Today Live Updates in Hindi : उत्तर भारत में एक बार फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है। हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान दिखे। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां मूसलाधार बारिश हो रही है। पल पल की जानकारी…

वियतनाम में नाव पलटने से मारे गए आंध्र प्रदेश के तीन लोगों के पार्थिव शरीर RGI एयरपोर्ट पर पहुंचे और अधिकारियों ने उन्हें उनके परिवार वालों को सौंप दिया।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी इंदौर से भोपाल की जेन ज़ी साइक्लोथॉन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की गूंज की शुरूआत और संकल्प है। प्रदेश में 25 सालों से भाजपा की सरकार है। मध्य प्रदेश में पेपर माफिया और नौकरियों में धांधली चल रही है। यह चिंता का विषय है। यह राजनीतिक यात्रा नहीं बल्कि शिक्षा को बचाने की यात्रा है। जो अमीर है उसके पास शिक्षा है और गरीबों के पास केवल मजदूरी है। ऐसा 80 साल की आजादी के बाद है। मध्य प्रदेश में शिक्षा को लेकर अराजकता है।

-उत्तर भारत में एक बार फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है।

-पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां मूसलधार बारिश हो रही है। 

-राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई हिस्सों में मंगलवार सुबह बारिश हुई। 

SBI Funds Management IPO खुला: 11,693 करोड़ के इश्यू पर दांव लगाने से पहले जानें GMP, प्राइस बैंड और लिस्टिंग डेट

SBI Funds Management IPO

SBI Funds Management IPO : देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट का 11,693 करोड़ रुपए का IPO आज से निवेशकों के लिए खुलेगा। जानिए प्राइस बैंड, बिडिंग डेट, लिस्टिंग, ऑफर फॉर सेल, GMP और कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ी सभी अहम जानकारी। ALSO READ: EPFO का बड़ा अपडेट, नौकरी बदलने पर अब 2 तरीकों से करें PF ट्रांसफर, मिनटों में होगा पूरा प्रोसेस
 

16 जुलाई तक लगेगी बोली

इस IPO में बिडिंग 14 जुलाई से शुरू हो गई। आप इसमें 16 जुलाई तक बोली लगा सकेंगे। एंकर निवेशकों को 574 रुपए के अपर प्राइस बैंड पर 4.63 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए गए। आईपीओ में शेयरों का अलॉटमेंट 18 जुलाई को तय होगा और कंपनी के शेयर 21 जुलाई को BSE और NSE पर लिस्ट होंगे। इसके एक शेयर का फेस वैल्यू 1 रुपया है। इसका प्राइस बैंड 545 से 574 रुपए तय किया गया है।

 

अनलिस्टेड (ग्रे) मार्केट में आज एसबीआई फंड्स शेयर 100 रुपए प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। इसका मतलब है कि निवेशकों को लिस्टिंग पर 17 फीसदी लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि किसी आईपीओ के शेयर मार्केट में ग्रे मार्केट की चाल के अनुसार ही सूचीबद्ध हो।

 

ऑफर फॉर सेल है यह IPO

SBI फंड्स मैनेजमेंट का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है। इसका मतलब है कि प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं और सारा पैसा उन्हीं के पास जाएगा, कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा। भारतीय स्टेट बैंक अपनी 6.3% हिस्सेदारी के तहत 12.83 करोड़ शेयर बेचेगा। अमुंडी इंडिया होल्डिंग भी अपनी 3.7% हिस्सेदारी के तहत 7.56 करोड़ शेयर बेचेगी।

 

1.8 करोड़ निवेशकों की संपत्ति का प्रबंधन

SBI फंड्स देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है, जो 1.8 करोड़ निवेशकों की 29 लाख करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करती है। वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 22% बढ़कर 4,390 करोड़ रुपए और शुद्ध मुनाफा 21% बढ़कर 3,067 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

 

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

रानी की वाव ने बढ़ाया भारत का गौरव, WOW Awards Asia 2026 में 3D प्रोजेक्शन शो को मिला गोल्ड अवार्ड

rani ki vav 3D projection

पाटन स्थित यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल 'रानी की वाव' (राशकी वाव) के 3D प्रोजेक्शन मैपिंग शो और हेरिटेज लाइटिंग प्रोजेक्ट ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। इस प्रोजेक्ट को प्रतिष्ठित 17वें WOW अवार्ड्स एशिया 2026 में गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह विशेष सम्मान “एक्सपीरिएंशियल टेक अवार्ड्स – अचीवमेंट इन ऑडियो-विजुअल फॉर एन इवेंट” श्रेणी में दिया गया है, जो पूरे गुजरात के लिए बेहद गर्व का क्षण है। ALSO READ: पर्यावरण संरक्षण की मिसाल: 35 स्थानीय प्रजातियों के पौधे रोपकर अहमदाबाद ने स्थापित किया वैश्विक कीर्तिमान

 

पर्यटकों के अनुभव को और अधिक भव्य बनाने का प्रयास

भारत के सबसे प्रसिद्ध और अद्वितीय ऐतिहासिक स्मारकों में शुमार 'रानी की वाव' हर साल देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटकों के इस दौरे के अनुभव को और अधिक तकनीकी, रोचक और यादगार बनाने के उद्देश्य से, गुजरात सरकार द्वारा यहाँ अत्याधुनिक 3D प्रोजेक्शन मैपिंग शो और हेरिटेज लाइटिंग सिस्टम का स्थायी रूप से सफल इंस्टॉलेशन किया गया था।

 

प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन और पर्यटकों की अद्भुत प्रतिक्रिया

इस भव्य प्रोजेक्ट का वर्चुअल उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 मार्च, 2026 को किया गया था। शो की शुरुआत के बाद से ही नामित एजेंसी द्वारा इसके संचालन और रखरखाव का काम बेहद उत्साहपूर्वक किया जा रहा है। यह अनूठा प्रयोग बहुत कम समय में लोकप्रिय हो गया है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 12 जुलाई, 2026 तक ही 44,209 से अधिक आगंतुक इस अद्भुत शो का आनंद ले चुके हैं। ALSO READ: Gujarat TAT-HS Exam Date: उच्चतर माध्यमिक शिक्षक बनने का इंतजार खत्म, 2 अगस्त को होगी परीक्षा; जल्द आएंगे एडमिट कार्ड

आधुनिक तकनीक और ऐतिहासिक विरासत का अनूठा संगम

क्रियान्वयन एजेंसी (Implementation Agency) द्वारा इस प्रोजेक्ट को WOW अवार्ड्स एशिया 2026 के नामांकन के लिए भेजा गया था, और यह सम्मान मिलने के बाद इसकी सफलता और अधिक निखर गई है। यह स्वर्ण पदक दर्शाता है कि कैसे अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक के उपयोग से गुजरात की भव्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया जा सकता है, जिससे पर्यटकों को एक अनोखा और रोमांचक अनुभव मिल रहा है।

हार्मुज स्ट्रेट में UAE के 2 तेल टैंकरों पर ईरानी मिसाइल हमला, 1 भारतीय की मौत; अमेरिका ने नाकेबंदी का किया ऐलान

Hormuz Strait Attack: Iran Missile attack on 2 UAE oil tankers

हार्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे यूएई के 2 जहाजों पर ईरानी सेना ने क्रूज मिसाइल से हमला कर दिया। इस हमले में 1 भारतीय की मौत, चालक दल के 8 सदस्य घायल हो गए। घायलों में 6 भारतीय नागरिक और 2 यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। ALSO READ: Top News 14 July: हार्मुज स्ट्रेट में यूएई के 2 जहाजों पर हमला, कच्चा तेल उछला, 900 साल पुरानी मूर्ति का रहस्य सुलझा

 

संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि ओमान के जलक्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी लेन में मोम्बासा और बाहिया नामक टैंकरों को निशाना बनाया गया।

 

मंत्रालय के अनुसार, घायलों में 6 भारतीय नागरिक और 2 यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इस हमले के परिणामस्वरूप टैंकर मोम्बासा के चालक दल के एक भारतीय सदस्य की जान चली गई और 8 अन्य लोग घायल हो गए। इनमें 4 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं।

यूएई ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। इसे गंभीर उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा करार दिया है।

 

अमेरिका करेगा नाकेबंदी

तेल टैंकरों पर ईरानी हमले से नाराज अमेरिका ने आज से एक बार फिर हार्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी का फैसला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि अमेरिका “ईरानी नाकाबंदी” को फिर से लागू कर रहा है, जिसके तहत ईरान के जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों की आवाजाही पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अब से अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का जिम्मा संभालेगा। इसके बदले इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा, ताकि सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई की जा सके। ट्रंप ने कहा कि इस योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ALSO READ: Strait of Hormuz : ईरान को ट्रंप की चेतावनी, अमेरिका बनेगा 'हॉर्मुज का गार्जियन', मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ा तनाव

 

ईरान के संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह किसी भी स्थिति में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में अमेरिकी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी सेना ने कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने ईरान की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की या व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डाली, तो इसका कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण में क्यों पिछड़ रहा है भारत

india ranks second from lowest in latest environment performance index

प्रभाकर मणि तिवारी

पर्यावरण संरक्षण के मामले में दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक, 2026 ने पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि सरकार इसे खारिज करती रही है। ALSO READ: जर्मनी: 23 सालों में सबसे जानलेवा रहा जून का महीना

 

केंद्र सरकार के तमाम दावों के बावजूद भारत पर्यावरण संरक्षण के मामले में प्रगति नहीं कर पा रहा है। ताजा एनवायरनमेंट परफार्मेंस इंडेक्स (ईपीआई) में भी वह नीचे से दूसरे नंबर पर है। उसके बाद लाओस का ही स्थान है। विडंबना यह है कि आठ एशियाई देशों में भी उसका स्थान सबसे अंतिम है। बांग्लादेश का स्थान भी भारत से ऊपर है।

 

येल और कोलंबिया विश्वविद्यालय हर दो साल पर पर्यावरण से संबंधित यह वैश्विक सूचकांक तैयार करते हैं। इसके तहत पर्यावरण की स्थिति, पारिस्थितिकी तंत्र की जीवंतता और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले बदलावों से निपटने के उपायों को ध्यान में रखते हुए दुनिया के तमाम देशों को शून्य से सौ के पैमाने पर मापा जाता है।

 

ताजा सूची में शामिल 177 देशों में भारत 176वें स्थान पर है। सूची में शीर्ष पर एस्टोनिया है। यही नहीं, पहले पांच स्थानों पर यूरोपीय देश ही काबिज हैं। सूची में भारत का ईपीआई स्कोर सौ में से 22.46 है, जबकि एस्टोनिया का 74.79। इससे फर्क समझा जा सकता है।

 

इससे पहले वर्ष 2024 की ईपीआई में 180 देशों में भी भारत 176वें स्थान पर था जबकि वर्ष 2022 के सूचकांक में वह सबसे अंतिम 180वें स्थान पर था।

 

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते दस साल के आंकड़े को ध्यान में रखते हुए भारत की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आए हैं। लेकिन कार्बन डाई ऑक्साइड और ग्रीन गैसों के उत्सर्जन की समस्या अब भी गंभीर होने के कारण वैश्विक देशों की सूची में उसकी स्थिति नहीं सुधर रही है।

 

रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि कम रैंकिंग वाले देशों को हवा, पानी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन पर काफी ध्यान देना चाहिए। ALSO READ: चीन के मिसाइल परीक्षण से किन देशों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ी

 

क्या कहती है सरकार

भारत ने इस साल अब तक इस सूचकांक पर कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन वर्ष 2022 में जब देश को 180 देशों में से सबसे नीचे रखा गया था तो पर्यावरण मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया था। उस समय जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा था कि सूचकांक में इस्तेमाल किए गए सूचक अनुमानों और अवैज्ञानिक तरीके पर आधारित है। बयान में सरकार ने आकलन के पैमाने और तरीकों पर सवाल खड़े किए थे।

 

सरकार की दलील रही है कि सूचकांक तैयार करने के दौरान 2050 के अनुमानित ग्रीन हाउस उत्सर्जन की गणना का सही तरीका नहीं अपनाया जाता। इसके साथ ही इसमें जंगल और वेटलैंड्स के कार्बन सोखने की क्षमता का भी सटीक आकलन नहीं किया गया है। इसके अलावा इस कृषि प्रधान देश में जैव विविधता, मिट्टी के स्वास्थ्य जैसे कई अहम सूचकांकों की भी अनदेखी की जाती रही है। ALSO READ: खमेनेई के बाद ईरान: कितनी बदल जाएगी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था

 

पर्यावरणविदों ने गिनाए पिछड़ने के कारण

पर्यावरणविदों का कहना है कि कोयले पर अतिरिक्त निर्भरता, तेजी से बढ़ती आबादी और अनियंत्रित शहरीकरण के कारण जंगल की कटाई बढ़ना और कचरा प्रबंधन ठीक नहीं होने के कारण नदियों और भूमिगत पानी में प्रदूषण बढ़ा है। इसके अलावा, विकास की होड़ के कारण पर्यावरण नियमों की अनदेखी किए जाने और इन नियमों को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू नहीं करने के कारण पर्यावरण संरक्षण में देश पिछड़ रहा है।

 

असम की पर्यावरण कार्यकर्ता सुमति बसुमतरी डीडब्ल्यू से कहती हैं, “हरित और सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने के सरकारी दावों के बावजूद देश में दो-तिहाई से बिजली उत्पादन कोयले से ही किया जाता है। इससे वायु प्रदूषण के साथ ही ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी बढ़ता है।”

 

उनका कहना था कि अनियंत्रित विकास के कारण कई बार पर्यावरण नियमों की अनदेखी की जाती है। इससे कानून होने के बावजूद अपेक्षित नतीजे नहीं मिलते।

 

मेघालय के वरिष्ठ पर्यावरणविद एम. खोंगताव डीडब्ल्यू से कहते हैं, “बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करने और विकास की होड़ में आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए देश के खासकर पूर्वोत्तर इलाके में जंगलों की कटाई तेजी से बढ़ी है। इसके लिए अक्सर पर्यावरण नियमों की अनदेखी की जाती रही है। इससे पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंच रहा है।”

 

सिलीगुड़ी स्थित गैर-सरकारी पर्यावरण संगठन हिमालयन नेचर एंड एडवेंचर फाउंडेशन की कार्यकर्ता कनिका बसु डीडब्ल्यू से कहती हैं, “विकास की होड़ में हम कचरे और प्लास्टिक का समुचित प्रबंधन नहीं कर पा रहे हैं। इससे इलाके की नदियों के साथ ही भूमिगत पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस समय ज्यादातर नदियों का पानी सीधे पीने के लायक नहीं है।” ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

विकास बनाम पर्यावरण के टकराव से बने हालात

मणिपुर के पर्यावरण कार्यकर्ता और लोकटक झील के संरक्षण के बनी तकनीकी समिति के सदस्य सलाम राजेश डीडब्ल्यू से कहते हैं, “विकास बनाम पर्यावरण के टकराव में अक्सर बाजी विकास के हाथ रहती है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कोई कामयाबी नहीं मिल सकती। पूर्वोत्तर भारत में मीठे पानी की सबसे बड़ी लोकटक झील इसकी मिसाल है। कड़े कानूनों के बावजूद पेड़ों की कटाई पर अंकुश नहीं लग पा रहा है और जंगल तेजी से साफ हो रहे हैं।”

 

पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाके में जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाले बदलावों पर लंबे अरसे से शोध करने वाले जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुगत हाजरा डीडब्ल्यू को बताते हैं, “ग्लोबल वार्मिंग के कारण पर्यावरण में होने वाले बदलावों की वजह से सुंदरबन इलाके में कई द्वीप पानी में डूब चुके हैं। दरअसल, पर्यावरण नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी किसी एक एजेंसी के पास नहीं है। इसलिए केंद्र और राज्य अक्सर इसकी अनदेखी का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ते रहते हैं। इसकी वजह से नियम कड़ाई से लागू नहीं हो पाते।”

 

पर्वतीय राज्य सिक्किम में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाली महिला कार्यकर्ता सोंगमित लेप्चा डीडब्ल्यू से कहती हैं, “पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों को कड़ाई से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को एक अलग नोडल एजेंसी का गठन करते हुए उसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए। इसके अलावा बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता घटाते हुए जल प्रबंधन की बेहतर रणनीति तैयार की जानी चाहिए। उसके  बिना तस्वीर में सुधार संभव नहीं है।”

 

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी वैश्विक रिपोर्ट को खारिज करना समस्या का हल नहीं है। इसकी वजह रेखांकित कर उसे दूर करने की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो भावी पीढ़ी को इसका गंभीर नतीजा भुगतना पड़ सकता है।

Top News 14 July: हार्मुज स्ट्रेट में यूएई के 2 जहाजों पर हमला, कच्चा तेल उछला, 900 साल पुरानी मूर्ति का रहस्य सुलझा

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Top News 14 July : हार्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे यूएई के 2 जहाजों पर हमला, ट्रंप ने ईरान की सेना पूरी तरह ध्वस्त, कच्चे तेल 85 डॉलर के करीब, उत्तर भारत में कमजोर हुआ मानसून, 900 साल पुरानी मूर्ति का रहस्य सुलझा, सरस्वतीजी की समझी जाने वाली मूर्ति देवी गायत्री की दुर्लभ प्रतिमा निकली। 14 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

हार्मुज में तेल टैंकरों पर ईरान का हमला

हार्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे यूएई के 2 जहाजों पर ईरान का हमला कर दिया। इस हमले में 1 भारतीय की मौत, चालक दल के 8 सदस्य घायल हो गए। घायलों में 6 भारतीय नागरिक और 2 यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। अमेरिका ने भी ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए और समुद्री नाकेबंदी शुरू कर दी। ALSO READ: Strait of Hormuz : ईरान को ट्रंप की चेतावनी, अमेरिका बनेगा 'हॉर्मुज का गार्जियन', मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ा तनाव

 

ईरान की सेना पूरी तरह ध्वस्त : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सेना पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और उस पर बहुत भारी हमले किए जा रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हाल ही में एक समझौता हुआ था, लेकिन तेहरान ने उसे तुरंत तोड़ दिया। क्योंकि उन्हें इसमें कुछ पसंद नहीं आया। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

 

कच्चा तेल 85 डॉलर के करीब

अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। ब्रेट क्रूड 84.23  डॉलर प्रति बैरल तो WTI क्रूड की कीमत 79.27 डॉलर प्रति बैरल हुई। इंडियन बास्केट में कच्चा तेल 74.37 डॉलर प्रति बैरल था।

 

उत्तर भारत में मानसून कमजोर

उत्तर भारत में एक बार फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है। हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान दिखे। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां मूसलाधार बारिश हो रही है। 

 

900 साल पुरानी मूर्ति का रहस्य सुलझा

मध्यप्रदेश के धार जिले से मिली 12वीं शताब्दी की एक प्राचीन प्रतिमा को लेकर सदियों पुरानी मान्यता अब बदल गई है। खबरों के मुताबिक जिस देवी की मूर्ति को अब तक विद्वान और शोधकर्ता मां सरस्वती की प्रतिमा मानते आ रहे थे, उसकी नई पहचान देवी गायत्री के रूप में हुई है। लाल बलुआ पत्थर से बनी इस दुर्लभ प्रतिमा की डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और हाई-रिजॉल्यूशन 3D मैपिंग के जरिए पुरातत्व विशेषज्ञों ने इसके छिपे हुए प्रतीकों को समझा। ALSO READ: 900 साल पुरानी मूर्ति का रहस्य सुलझा, सरस्वतीजी की समझी जाने वाली मूर्ति निकली देवी गायत्री की दुर्लभ प्रतिमा

900 साल पुरानी मूर्ति का रहस्य सुलझा, सरस्वतीजी की समझी जाने वाली मूर्ति निकली देवी गायत्री की दुर्लभ प्रतिमा

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मध्यप्रदेश के धार जिले से मिली 12वीं शताब्दी की एक प्राचीन प्रतिमा को लेकर सदियों पुरानी मान्यता अब बदल गई है। खबरों के मुताबिक जिस देवी की मूर्ति को अब तक विद्वान और शोधकर्ता मां सरस्वती की प्रतिमा मानते आ रहे थे, उसकी नई पहचान देवी गायत्री के रूप में हुई है। 

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भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय में रखी गई लाल बलुआ पत्थर से बनी इस दुर्लभ प्रतिमा की डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और हाई-रिजॉल्यूशन 3D मैपिंग के जरिए पुरातत्व विशेषज्ञों ने इसके छिपे हुए प्रतीकों को समझा। करीब 900 साल से चली आ रही पहचान अब बदल गई है।  पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रतिमा की सबसे बड़ी पहचान वह चीज बनी जो इसमें मौजूद नहीं थी। आमतौर पर मां सरस्वती की प्रतिमाओं में वीणा प्रमुख रूप से दिखाई देती है, लेकिन इस मूर्ति में वीणा नहीं है।

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पुरातत्वविदों के मुताबिक चार भुजाओं वाली यह देवी ललितासन मुद्रा में विराजमान हैं और उनके हाथों में माला, कमल और वेद दिखाई देते हैं। प्रतिमा के पास बारीकी से उकेरा गया हंस (राजहंस) भी मौजूद है, जो पवित्र ज्ञान और आध्यात्मिक विवेक का प्रतीक माना जाता है। आकाशीय पुष्प अर्पित करने वाले देवदूत जैसे चित्र भी देवी की दिव्यता को दर्शाते हैं।

Bankipur by-election: कितनी है प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी की संपत्ति? जाह्नवी ज्यादा अमीर, चुनावी हलफनामे में हुआ खुलासा

prashant kishor net worth: बिहार की राजनीति में इस समय पटना की हाईप्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बना हुआ है। वजह हैं चुनावी रणनीतिकार से नेता बने जन सुराज पार्टी (JSP) के प्रमुख प्रशांत किशोर यानी पीके। सोमवार को जब प्रशांत अपनी पत्नी डॉक्टर जाह्नवी दास के साथ बांकीपुर सीट से नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तो सबके मन में एक ही सवाल था कि राजनीतिक दलों की किस्मत बदलने वाले 'पीके' के पास खुद कितनी दौलत है? आपको बता दें कि बांकीपुर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि परिणाम 3 अगस्त को आएगा। 

 

हालांकि उनके चुनावी हलफनामे के बाद उनकी संपत्ति से जुड़ा सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो गया है। हलफनामे के मुताबिक, प्रशांत किशोर और उनकी डॉक्टर पत्नी जाह्नवी दास मिलकर करीब 198 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। दिलचस्प बात यह है कि संपत्ति के मामले में पत्नी जाह्नवी पति प्रशांत किशोर से भी एक कदम आगे हैं। नामांकन के दौरान प्रशांत किशोर की कुर्सी पर हाथ टिकाकर उनके साथ मजबूती से खड़ीं डॉक्टर जाह्नवी दास पीके के राजनीतिक सफर में तो उनके साथ हैं, लेकिन नेटवर्थ के मामले में उनसे आगे हैं। ALSO READ: Bankipur by-election : प्रशांत किशोर की पहली चुनावी परीक्षा, बांकीपुर उपचुनाव में दांव पर जनसुराज का भविष्य, क्या है पार्टी की रणनीति

कितनी है दोनों की संपत्ति 

डॉक्टर जाह्नवी दास की कुल संपत्ति 101.93 करोड़ रुपए है। उनके पास 89.51 करोड़ रुपए की चल संपत्ति और 12.42 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है। उन पर 55 लाख रुपए का कर्ज भी है।  प्रशांत किशोर पीके के पास अपने नाम पर 22.19 करोड़ की चल और 73.87 करोड़ की अचल संपत्ति है। प्रशांत किशोर पर 5.77 करोड़ रुपए का कर्ज भी है। उनकी कुल संपत्ति 96.07 करोड़ रुपए है। 

क्या है कमाई का जरिया

लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर देश के बड़े-बड़े नेताओं के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर ने अपनी कमाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया है। पीके ने बताया कि उन्होंने राजनीतिक सलाह देने के अपने पेशे से तीन साल में 241 करोड़ रुपए कमाए थे। उन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच 4.45 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स और 5.58 करोड़ रुपये का GST भरा है।

100% ऑनरशिप वाली कंपनी

प्रशांत किशोर के पास 'वेदहास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी में शत-प्रतिशत शेयर हैं। इसी कंपनी के जरिए उन्होंने साल 2024-25 में अपनी ही 'जन सुराज पार्टी' को 85 करोड़ रुपए और 'जन सुराज फाउंडेशन' को 50 लाख रुपए का चंदा दिया। चंपारण में उपवास रखने के बाद प्रशांत किशोर ने एक बेहद चौंकाने वाला एलान किया था। उन्होंने घोषणा की है कि वे अपने घर को छोड़कर अपनी सारी संपत्ति जन सुराज पार्टी को दान कर रहे हैं। इसके साथ ही अगले 5 सालों तक कन्सल्टेंसी (सलाह) से होने वाली अपनी कमाई का 90 फीसदी हिस्सा भी वह पार्टी को दान कर देंगे। इससे पहले भी वह अपनी कमाई में से 98 करोड़ रुपए पार्टी को चंदे के रूप में दे चुके हैं।

भाजपा के गढ़ में पीके की चुनौती

दूसरों को चुनाव लड़वाने और जितवाने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर का जीवन का यह पहला चुनाव है। सुबह-सुबह सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर में पत्नी के साथ पूजा-अर्चना करने के बाद पीके ने सीधे बीजेपी के इस पारंपरिक गढ़ में हुंकार भरी। यह सीट भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।

 

भाजपा के लिए इस सीट पर ड्रामा कम नहीं रहा। पार्टी ने पहले अभिषेक बंटी को उतारा, जिन्होंने 24 घंटे में मैदान छोड़ दिया। अब युवा चेहरे नीरज सिन्हा को टिकट दिया है। वहीं लालू यादव की आरजेडी ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। 

योगी सरकार का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर गिफ्ट, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू, 45 मिनट में होगा सफर

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तेजी से विकसित हो रहे आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में 13 जुलाई सोमवार को एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर को जोड़ने वाला 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-6) उद्घाटन के बाद जनता को समर्पित हो गया है।

इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही दोनों शहरों के बीच वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिली है। पहले जहां यह सफर ढाई से तीन घंटे में पूरा होता था, वहीं अब महज 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकता है।

 

लगभग 1648 दिनों की कड़ी मेहनत, आधुनिक तकनीक और सूझबूझ से बने इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की परियोजना की नींव वर्ष 2018 में रखी गई थी। लखनऊ और कानपुर के बीच लगातार बढ़ते ट्रैफिक, घंटों लगने वाले जाम और तीन घंटे तक के सफर को देखते हुए लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी। परियोजना का उद्देश्य दोनों महानगरों के बीच विश्वस्तरीय, सुरक्षित और तेज संपर्क उपलब्ध कराना था।

 

मार्च 2019 में रखी गई थी परियोजना की आधारशिला

मार्च 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसके बाद दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के महत्व को देखते हुए इसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (एनई-6) का दर्जा प्रदान किया। इसी के साथ यह देश का पहला पूरी तरह से एआई और आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट से लैस एक्सप्रेव वे बनने की राह पर आगे बढ़ गया था। निर्माण कार्य को तेज गति देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने परियोजना को दो पैकेजों में विभाजित कर दिया था। जिसके निर्माण का दायित्व पीएनसी इंफ्राटेक को सौंपा गया था।

 

एनएचएआई ने दो पैकेजों में पूरा कराया महत्वाकांक्षी निर्माण

पहला पैकेज लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र से जुड़ा लगभग 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन था। घनी आबादी, यातायात और भूमि अधिग्रहण जैसी चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरों ने आधुनिक तकनीक के सहारे इस कठिन कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया। जबकि दूसरा पैकेज लगभग 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सेक्शन था, जो नई भूमि पर विकसित किया गया। यह मार्ग लखनऊ के 11 और उन्नाव के 31 गांवों से होकर गुजरता है। भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद वर्ष 2022 में इस हिस्से का निर्माण तेज गति से आगे बढ़ गया था। अक्टूबर 2025 तक इसका 45 किमी वाला ग्रीनफील्ड हिस्सा पूरी तरह तैयार हो चुका था। 2026 के शुरुआती महीनों में लखनऊ पैकेज के अंतिम गर्डर्स और रैंप बनाने का काम 99% तक पूरा कर लिया गया था। जून 2026 में इसका ट्रायल रन हुआ।

 

बिना टोल प्लाजा पर रुके होगा सफर, फास्ट टैग से कटेगा टोल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्याधुनिक तकनीक है। सड़क निर्माण में बड़े स्तर पर ऑटोमेटेड मशीन गाइड कंस्ट्रक्शन सिस्टम का उपयोग किया गया। कंप्यूटर और सैटेलाइट आधारित तकनीक से संचालित मशीनों ने सड़क निर्माण को अधिक सटीक, मजबूत और टिकाऊ बनाया। इससे निर्माण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी काफी कम हो गई। इस एक्सप्रेसवे की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली है। यहां पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं बनाए गए हैं। 

 

वाहन बिना रुके 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक सफर कर सकेंगे और एडवांस फास्ट टैग तथा ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक के माध्यम से टोल स्वतः कट जाएगा। इससे यात्रियों को समय की बचत होगी, ईंधन की खपत कम होगी और टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम से भी पूरी तरह राहत मिलेगी।

 

एक्सप्रेसवे के दोनों ओर लगाए 46 हजार से अधिक पौधे

सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे आधुनिक मार्गों में शामिल है। पूरे 63 किलोमीटर मार्ग पर 80 से अधिक हाई डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड राडार लगाए गए हैं। अगर कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है तो कंट्रोल रूम से सीधे ऑटोमैटिक चालान कट जाएगा। इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया है। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर वन विभाग के सहयोग से 46 हजार से अधिक पौधे लगाए गए हैं, ताकि सफर के दौरान यात्रियों को एक खूबसूरत ग्रीन कॉरिडोर का अनुभव मिल सके। 

 

स्टेट कैपिटल रीजन, निवेश और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ लाखों यात्रियों को मिलेगा। दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन हजारों नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी, उद्यमी और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े कर्मचारी सफर करते हैं। 6-लेन (भविष्य में 8-लेन विस्तार योग्य) लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय ढाई-तीन घंटे से घटकर महज 35 से 45 मिनट रह गया है। यह आधुनिक एक्सप्रेसवे प्रस्तावित स्टेट कैपिटल रीजन, औद्योगिक विकास, निवेश, तेज माल परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति देगा।

POCSO कानून के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- लड़का-लड़की को भागने से सरकार कैसे रोकेगी

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सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि कई मामलों में जब किशोर-किशोरियां आपसी सहमति से घर छोड़कर चले जाते हैं, तो माता-पिता अपने तथाकथित 'सम्मान' की रक्षा के लिए उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करा देते हैं। 

 

जस्टिस बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि सरकार किसी लड़के और लड़की को साथ भागने से कैसे रोक सकता है? 15 से 18 साल की उम्र बेहद संवेदनशील और नई चीजें आजमाने की उम्र होती है। यह प्रयोग और भावनात्मक समझ विकसित होने का भी दौर होता है।

 

अदालत ने सोमवार को कहा कि जब किसी लड़के और लड़की के बीच संबंध हो और वे साथ चले जाएं, तो हर मामले को स्वतः पॉक्सो का केस नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि 15 से 18 वर्ष की उम्र बेहद संवेदनशील होती है और यह प्रयोग एवं भावनात्मक समझ विकसित होने का दौर होता है। ऐसे में हर मामला POCSO का मामला माना जाना उचित नहीं हो सकता। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

किशोरों की निजता से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई

 

सुप्रीम कोर्ट किशोरों के निजता के अधिकार (Right to Privacy of Adolescents) से जुड़े स्वत: संज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई कर रहा था। यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें किशोरियों से अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखने और “दो मिनट के सुख” के लिए रिश्तों में न पड़ने जैसी टिप्पणी की गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर दिया था।

 

किस मामले से शुरू हुआ विवाद

वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने अदालत को बताया कि मूल मामला एक नाबालिग लड़की और 25 वर्षीय युवक के साथ भाग जाने का था। उन्होंने कहा कि अब वह मामला सुलझ चुका है। अदालत द्वारा गठित समिति और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लड़की से बातचीत की थी। रिपोर्ट में POCSO मामलों में व्यवस्था की कई खामियों की ओर संकेत किया गया। दीवान ने बताया कि लड़की अपनी इच्छा से युवक के साथ रहना चाहती थी और दोनों का एक बच्चा भी है।

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 6 से 18 वर्ष की उम्र में कई किशोर-किशोरियां आपसी संबंध बनाते हैं और साथ चले जाते हैं। ऐसे मामलों में माता-पिता अपने सम्मान की रक्षा के लिए आपराधिक मुकदमे दर्ज करा देते हैं। बाद में अदालतों को आरोपियों को बरी करना पड़ता है।”

किशोरों के लिए जागरूकता जरूरी

माधवी दीवान ने अदालत से कहा कि किशोरों के कल्याण और बाल संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार 17-18 वर्ष के युवाओं को जेल भेज दिया जाता है, इसलिए कम उम्र से ही जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करना जरूरी है।

कक्षा 6 से POCSO जागरूकता की तैयारी

केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि उसकी सिफारिशें स्वीकार होती हैं तो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कक्षा 6 से चरणबद्ध तरीके से POCSO और किशोर शिक्षा (Adolescent Education) शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक हाईकोर्ट में पहले से ही बाल अधिकारों से जुड़ी समितियां मौजूद हैं, इसलिए मामलों की निगरानी राज्य सरकारें भी कर सकती हैं। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा अलग से निगरानी की आवश्यकता पर सहमति नहीं जताई।