जब से सोनम जेल से बाहर आई, देशभर में लड़कियां पति का मर्डर कर रहीं हैं, राजा के भाई ने किसके सामने दी ये दलील

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राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कराने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अब 21 जुलाई को सुनवाई होगी। पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद जताते हुए जमानत रद्द करने की मांग की है।

बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या की वारदात में आरोपी उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करवाने के लिए मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन कुछ कारणों के चलते अब सुनवाई 21 जुलाई को होगी।

इंदौर में रहने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से पूरी उम्मीद है। उनका विश्वास है कि 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर देगा।

देशभर में पतियों के मर्डर हो रहे हैं : विपिन रघुवंशी ने कहा कि जब से सोनम रघुवंशी जमानत पर बाहर आई है, उसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में पत्नियों द्वारा अपने पतियों की हत्या की कई घटनाएं सामने आई हैं। उनका कहना है कि यह केवल हत्या नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच विश्वास की भी हत्या है। सोनम ने जिस तरह अपने पति की हत्या की, उसने उस विश्वास को तोड़ दिया। उनका यह भी कहना है कि इसके बाद कई अन्य महिलाओं द्वारा भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया गया है। यदि सोनम को कड़ी सजा नहीं मिली, तो आने वाले समय में इस तरह की घटनाएं जारी रह सकती हैं।

क्या था राजा रघुवंशी हत्याकांड का पूरा मामला : यह मामला तब सामने आया जब 12 मई 2025 को शादी के बाद राजा रघुवंशी और सोनम 23 मई को मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो गए। दोनों को आखिरी बार एक होमस्टे से चेकआउट करते हुए देखा गया था। कुछ दिन बाद उनकी किराए की स्कूटी सोहरारिम के पास लावारिस हालत में मिली। इसके बाद 2 जून को लापता होने के करीब 10 दिन बाद राजा रघुवंशी का शव ईस्ट खासी हिल्स जिले में वीसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से बरामद हुआ।

योगी सरकार की योजनाओं का लाभ ले रहे युवा, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में मिल रहा बढ़ावा

UP Youth Employment: उत्तर प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए संचालित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई देता है। योगी सरकार की नीतियों और योजनाओं का लाभ लेकर कई युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बन रहे हैं। प्रदेश सरकार का जोर कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में बढ़ावा देने पर है। मत्स्य पालन, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य ग्राम आधारित कार्यों में निवेश को प्रोत्साहित करने वाली योजनाएं युवाओं को नए अवसर उपलब्ध करा रही हैं। रायबरेली में मत्स्य पालन के क्षेत्र में काम कर रहे सुजीत चौधरी ने योगी सरकार के इस विजन को धरातल पर उतारा है।

एक इंजीनियर ने बदल दी मछली पालन की तस्वीर 

सुजीत चौधरी ने बताया कि वे मूल रूप से बस्ती जनपद के निवासी हैं। उन्होंने साल 2005 में बीटेक की पढ़ाई पूरी और बाद में एक कंपनी के साथ जुड़ गए। साल 2007 में उन्हें कंपनी ने अमेरिका भेजा, जहां उन्होंने लगभग नौ वर्षों तक कार्य किया। उन्होंने बताया कि साल 2016 में वे भारत लौटे और नोएडा में एक सॉफ्टवेयर की शुरूआत की। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में कृषि आधारित उद्यम शुरू करने की दिशा में निर्णय लिया। इसी दौरान उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश करने का फैसला किया। 

50 से ज्यादा किसानों को साथ जोड़कर कर रहे मत्स्य पालन

सुजीत ने बताया कि उन्होंने साल 2019 में रायबरेली जनपद के महराजगंज क्षेत्र के गांव बल्ला में लगभग 10 हेक्टेयर भूमि लीज पर लेकर मत्स्य पालन की शुरुआत की थी। वर्तमान में वे इस क्षेत्र में 23 तालाबों के माध्यम से व्यावसायिक स्तर पर मछली उत्पादन कर रहे हैं। प्रतिवर्ष लगभग 500 से 600 टन मछली का उत्पादन और विपणन किया जाता है। उन्होंने बताया कि वे 50 से ज्यादा किसानों को साथ जोड़कर मत्स्य पालन से खुद के साथ-साथ दूसरों की भी आमदनी को बढ़ाने में जुटे हैं। सुजीत ने बिचौलियों से दूरी बनाकर खुद ही सीधे ग्राहकों से जुड़कर अपना कारोबार बढ़ाया है। वे खारे पानी में होने वाली समुद्री झींगा मछली का भी उत्पादन कर रहे हैं।

फिश हब और प्रशिक्षण केंद्र से युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर

मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2021 में उन्हें 8.50 लाख रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। इस सहायता ने उनके उद्यम के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब वह इसी क्षेत्र में एक फिश हब स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित फिश हब में आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रयोगशाला और मत्स्य पालन से संबंधित प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे स्थानीय युवाओं को कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।

 

सुजीत चौधरी जैसे उद्यमियों की ऐसी पहल दर्शाती है कि सही नीतिगत सहयोग, तकनीकी ज्ञान और उद्यमशीलता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं। यह मॉडल न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है।

Fact Check : सेटेलाइट तकनीक से सड़क और हवा में चलने वाली बस? जानिए नितिन गडकरी के दावों का सच

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पब्लिक ट्रांसपोर्ट और देश के हाइवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अक्सर अपने विज़नरी और चौंकाने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में इंटरनेट पर 'सेटेलाइट तकनीक से सड़क बनाने'  और 'हवा में चलने वाली बस (Flying Bus)' को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं।

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नितिन गडकरी का बयान

राजमार्ग मंत्री ने कहा कि शहरी यातायात की जटिल समस्याओं को हल करने के लिए अब हमें पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर  नई सोच और वैकल्पिक, प्रदूषण-मुक्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट (जैसे रोपवे, केबल कार और एरियल पॉड्स) को अपनाना होगा।  आइए सबसे पहले इस दावे का सटीक फैक्ट-चेक (Fact Check) करते हैं और समझते हैं कि धरातल पर सरकार की क्या योजना  है।

 

Fact Check: दावों की हकीकत क्या है?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों का गहराई से विश्लेषण करने पर निम्नलिखित तथ्य सामने आए हैं-

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सेटेलाइट तकनीक से सड़क बनाना (Satellite Method for Roads)


सच्चाई

 (भ्रामक व्याख्या ) सरकार 'सेटेलाइट से कोई भौतिक सड़क' नहीं बना रही है। दरअसल, यहां तकनीक का  मतलब GPS/Satellite-Based Tolling System से है। सरकार देश के 5,000 किलोमीटर से अधिक हाइवे पर सैटेलाइट आधारित  टोल सिस्टम (ANPR और GPS) लागू कर रही है। इसके तहत गाड़ियों में लगे सेटेलाइट ट्रैकर के जरिए यह देखा जाएगा कि गाड़ी ने हाइवे पर कितनी दूरी तय की और उसी हिसाब से बिना टोल प्लाजा पर रुके पैसे सीधे बैंक खाते से कट जाएंगे। इसके अलावा सड़कों के सर्वे और अलाइनमेंट के लिए भी सैटेलाइट इमेजरी (GIS) का उपयोग किया जा रहा है। 

 

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हवा में चलने वाली बस (Air Bus/Flying Bus)

सच्चाई
(पूरी तरह सच ) नितिन गडकरी ने कई मौकों पर देश में “हवा में दौड़ने वाली बस” (Air Bus या Aerial  Pod System) लाने की पुष्टि की है। यह कोई काल्पनिक दावा नहीं है, बल्कि सरकार भारी ट्रैफिक वाले शहरी क्षेत्रों (जैसे  दिल्ली-एनसीआर में धौला कुआं से मानेसर) और पहाड़ी राज्यों (जैसे उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर) के लिए इस पर काम कर रही  है। 

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क्या होती है 'हवा में चलने वाली बस'? यह कैसे काम करेगी? 

जब लोग 'हवा में चलने वाली बस' सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि यह कोई उड़ने वाला हवाई जहाज होगा। लेकिन तकनीकी रूप  से इसका ढांचा पूरी तरह अलग है:

 

एरियल पॉड और रोपवे सिस्टम (Aerial Pods)

यह एक प्रकार का पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) सिस्टम है। इसमें  छोटी, स्वचालित इलेक्ट्रिक कारें या केबल कार (पॉड्स) जमीन से ऊपर बने एलिवेटेड (ऊंचे) पिलर्स और ट्रैक्स पर हवा में लटकी हुई  चलती हैं। 

 

ट्रैफिक जाम से आजादी

यह सिस्टम पारंपरिक फ्लाईओवर या सड़कों के बजाय हवा के कॉरिडोर का इस्तेमाल करता है।  चूंकि नीचे की सड़क के ट्रैफिक से इसका कोई लेना-देना नहीं होता, इसलिए सफर का समय 70% तक कम हो सकता है। 

Air Bus info

इको-फ्रेंडली (Clean Energy)

यह पूरी तरह बिजली, सौर ऊर्जा या अन्य ग्रीन एनर्जी स्रोतों से संचालित होगी, जिससे मेट्रो शहरों में बढ़ते प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी। 

 

नागपुर और देहरादून में पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी

नितिन गडकरी ने इस विज़नरी ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तहत दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं: 

 

देहरादून एयर बस प्रस्ताव 

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एक विस्तृत डबल-डेकर  एयर बस सिस्टम का प्रस्ताव राज्य सरकार के साथ साझा किया गया है। 

नागपुर का 135-सीटर मेगा प्रोजेक्ट

नागपुर के रिंग रोड के लिए एक विशेष हाई-कैपेसिटी इलेक्ट्रिक बस प्रोजेक्ट पर  काम चल रहा है। इस 135-सीटर बस में फ्लाइट जैसी सुविधाएं (जैसे विमान जैसी सीटें और बस होस्टेस) होंगी। सबसे खास बात  यह है कि यह 'फ्लैश-चार्जिंग' तकनीक से लैस होगी, जो बस स्टॉप पर यात्रियों के उतरने-चढ़ने के महज 30 से 40 सेकंड के  भीतर बस को पूरी तरह चार्ज कर देगी। 

 

सोशल मीडिया पर 'सेटेलाइट से सड़क बनाने' की बात तकनीकी रूप से केवल GPS टोलिंग और सेटेलाइट सर्वे से जुड़ी है। वहीं हवा में बस चलाने का सपना हकीकत में बदलने जा रहा है, जिसे हम 'एरियल पॉड टैक्सियों' के रूप में जल्द ही भारतीय शहरों की सड़कों के ऊपर दौड़ते हुए देखेंगे।

होर्मुज पर हमले से सहमा शेयर बाजार, Sensex 561 अंक लुढ़का, Nifty में भी आई गिरावट

Indian stock market fell amidst conflict between US and Iran

Share Market Update News : अमेरिका और ईरान में जंग तेज हो गई है और युद्ध की इस आग में खाड़ी देश भी जल रहे हैं। दूसरी ओर तेल ने भारतीय शेयर बाजार का खेल बिगाड़कर रखा हुआ है। दरअसल, अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हमलों का सिलसिला जारी है। इन बढ़ते हमलों से निवेशकों में घबराहट का माहौल रहा। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत लुढ़ककर 77054.94 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 के स्‍तर पर आ गया।

 

अमेरिका और ईरान में जंग तेज हो गई है और युद्ध की इस आग में खाड़ी देश भी जल रहे हैं। दूसरी ओर तेल ने भारतीय शेयर बाजार का खेल बिगाड़कर रखा हुआ है। दरअसल, अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हमलों का सिलसिला जारी है। इन बढ़ते हमलों से निवेशकों में घबराहट का माहौल रहा।

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कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत लुढ़ककर 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 के स्‍तर पर आ गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, जिसने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया और चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई।

इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, एलएंडटी और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्‍यादा गिरावट रही। भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फ़ार्मा, TCS और डॉ. रेड्डीज़ लेबोरेटरीज़ सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयर रहे।

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल 86.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। अगर यह तेजी जारी रहती है, तो इससे एक बार फिर भारत पर भी इसका असर पड़ना शुरू हो जाएगा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने सोमवार को 3062.27 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

आईएमए स्टूडेंट चैप्टर द्वारा सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों का ‘जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ में प्रेरणादायक शैक्षणिक भ्रमण

Dr. Janak Palta McGilligan with Symbiosis University students

 

 

 

 

 

 

इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन (आईएमए) के स्टूडेंट चैप्टर द्वारा 'सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेस, इंदौर' के प्रबंधन (मैनेजमेंट) विद्यार्थियों के लिए 'जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' का एक प्रेरणादायक शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना था।

 

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को 'जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' की संस्थापक-निदेशक और पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से सीधे संवाद करने का बहुमूल्य अवसर मिला। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने, जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, जैविक खेती, कचरा प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, “यदि युवा आज से ही पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।”

 

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान में स्थापित सौर ऊर्जा प्रणाली, वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), जैविक खेती, अपशिष्ट प्रबंधन तथा सतत विकास के विभिन्न मॉडलों का व्यावहारिक अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने संस्था की कार्यप्रणाली को निकट से समझा और विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपने ज्ञान का विस्तार किया।

 

इस शैक्षणिक भ्रमण में सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेस, इंदौर से डॉ. अजीत तोमर, डॉ. नीलम वर्मा एवं डॉ. जगदीप भी विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अनुभवात्मक भ्रमण विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक जीवन से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे उनमें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और नवाचार की सोच विकसित होती है।

 

आईएमए स्टूडेंट चैप्टर की ओर से यश जायसवाल ने इस भ्रमण का सफल समन्वय (कोऑर्डिनेशन) किया। उन्होंने विद्यार्थियों को कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया और बताया कि आईएमए समय-समय पर ऐसे औद्योगिक एवं सामाजिक संस्थानों के भ्रमण आयोजित करता रहता है, ताकि विद्यार्थी कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ सकें।

 

कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों (फैकल्टी मेंबर्स) ने इस भ्रमण को अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक बताया और पद्मश्री डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन सहित पूरे सेंटर परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आईएमए स्टूडेंट चैप्टर भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे औद्योगिक भ्रमण, सांगठनिक भ्रमण, विशेषज्ञ संवाद एवं अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।

 

रिपोर्ट- यश जायसवाल, इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन (आईएमए)

सोनम वांगचुक को मिला विपक्ष का साथ, केजरीवाल-अखिलेश ने की यह अपील, क्‍या अब तोड़ेंगे अनशन?

Akhilesh Yadav and Arvind Kejriwal made this appeal to Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk's protest : दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का विरोध प्रदर्शन पिछले 24 दिनों से चल रहा है। शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस प्रदर्शन में 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस बीच सोनम वांगचुक को विपक्ष का भी साथ मिल गया है। वांगचुक के अनशन पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोनम वांगचुक से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।

 

दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का विरोध प्रदर्शन पिछले 24 दिनों से चल रहा है। शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस प्रदर्शन में 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस बीच सोनम वांगचुक को विपक्ष का भी साथ मिल गया है। वांगचुक के अनशन पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोनम वांगचुक से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।

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अखिलेश ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सोनम वांगचुक से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी कि लोकतंत्र के लिए।

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अखिलेश ने कहा कि जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वे आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है। अखिलेश ने कहा कि जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। 'सत्याग्रह' का महत्व वो क्या जानें जो 'सत्ताग्रह' के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। 

 

अरविंद केजरीवाल ने भी की यह अपील

इसी बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के चल रहे विरोध प्रदर्शन को अपनी पार्टी का समर्थन दिया और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। केजरीवाल ने एक कहा कि वे गुरुवार को जंतर-मंतर जाकर वांगचुक से मुलाकात करेंगे और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शन को समर्थन देंगे।

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सोनम वांगचुक अपने फैसले पर अडिग

'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नीट परीक्षा और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है। उनका वजन 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है। उनकी बिगड़ती सेहत ने समर्थकों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन 59 वर्षीय वांगचुक अपने फ़ैसले पर अडिग हैं। उन्होंने कहा, मैंने जो शुरू किया है, उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा। 

Amarnath Yatra 2026: पोनी एम्बुलेंस सेवा से श्रद्धालुओं को राहत, मेडिकल किट और ऑक्सीजन के साथ तैयार

pony ambulance

अमरनाथ यात्रा में शिरकत करने वाले वे श्रद्धालु अब राहत महसूस कर रहे हैं जिन्हें स्वास्थ्य समस्याएं आ रही हैं क्योंकि स्वाथ्य विभाग ने यात्रा मार्ग पर पोनी अर्थात खच्चरों पर एम्बुलेंस स्थापित किए हैं जो कुछ ही देर में पीड़ितों के पास पहुंच कर उन्हें राहत दे रही हैं। ALSO READ: आगरा के फ्रिज में बर्फ से बनी शिवलिंग जैसी आकृति, वीडियो वायरल; श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी

 

दरअसल इस बार भी स्वास्थ्य सेवा निदेशालय कश्मीर ने अमरनाथ यात्रा के लिए एक ‘पोनी एम्बुलेंस’ सेवा शुरू की है, जो तीर्थयात्रियों को उनकी यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सहायता प्रदान कर रही है। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के मार्गदर्शन में निदेशक स्वास्थ्य सेवा कश्मीर द्वारा की गई इस पहल को यात्रियों द्वारा व्यापक रूप से सराहा जा रहा है।

 

तीर्थयात्रियों के साथ जाती है पोनी एम्बुलैंस

पोनी एम्बुलेंस, मेडिकल किट और आक्सीजन सिलेंडर से सुसज्जित एक घोड़े पर चढ़कर आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली, बालटाल और पहलगाम दोनों अक्षों पर तीर्थयात्रियों के साथ जाती है। प्रशिक्षित कर्मचारी पोनी एम्बुलेंस को संभालते हैं, जो यात्रा के दौरान यात्रियों के सामने आने वाली किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। समय पर किए गए इस हस्तक्षेप से रुग्णता और मृत्यु दर में काफी कमी आई है। ALSO READ: क्या है अमरनाथ हिमलिंग के पिघलने का राज? क्या कहते हैं पर्यावरणविद

 

pony ambulance in amarnath yatra

स्वास्थ्य विभाग ने सराहा

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस अभिनव दृष्टिकोण के लिए स्वास्थ्य विभाग की सराहना करते हुए कहा कि हम श्री अमरनाथ यात्रियों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पोनी एम्बुलेंस सेवा ने तीर्थयात्रियों के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और यात्रा के दौरान आराम। 
 

विभाग का कहना था कि यह अग्रणी प्रयास चुनौतीपूर्ण इलाके में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के समर्पण को दर्शाता है। पोनी एम्बुलेंस ने कश्मीर के स्वास्थ्य सेवा नवाचार को प्रदर्शित करते हुए दूरदराज के क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एक नया मानक स्थापित किया है।

 

इस एंबुलेंस में घोड़े पर चढ़ा एक आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र चिकित्सा किट और आक्सीजन सिलेंडर से लैस है। यह तंत्र बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर तीर्थयात्रियों के साथ जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पोनी एम्बुलेंस को प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। ये कर्मी यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं या आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं।

 

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बकौल, हम अमरनाथ यात्रियों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पोनी एम्बुलेंस सेवा ने यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के आत्मविश्वास और आराम को बढ़ाया है। वे कहते थे कि यह सेवा, जिसे तीर्थयात्रियों द्वारा व्यापक रूप से सराहा गया है, कश्मीर में स्वास्थ्य सेवा विभाग द्वारा शुरू की गई है। इस सेवा की परिकल्पना विभाग के निदेशक द्वारा पिछले साल की गई थी। स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस सेवा ने दूरदराज के इलाकों में आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एक नया मानक स्थापित किया है।

पहलगाम आतंकी हमले में हाफिज सईद पर NIA कोर्ट सख्त, गैर-जमानती वारंट जारी

non bailable warrent against hafiz saeed

NIA कोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में फरार आरोपी और पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख हाफिज मुहम्मद सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। हाफिज सईद को भारत और अमेरिका दोनों ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है। उसे 2008 के मुंबई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड भी माना जाता है। ALSO READ: धार भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष को झटका, सुप्रीम कोर्ट का मप्र हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार

 

एनआईए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने 8 जुलाई को यह आदेश पारित किया। इससे दो दिन पहले ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में सईद के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था।

 

एनआईए ने अदालत को बताया कि फरार आतंकी हाफिज सईद, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का रहने वाला है, पहलगाम आतंकी हमले में आरोपी है और जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है। एजेंसी ने उसके खिलाफ खुली तारीख वाला गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी ताकि आगे की कार्रवाई शुरू की जा सके।

 

कोर्ट ने आदेश में कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ निष्पक्ष, पूर्ण और प्रभावी जांच के लिए जरूरी है। इसलिए उसके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाता है। ALSO READ: होर्मुज में ईरानी हमले में भारतीय की मौत, नाराज भारत ने लिया बड़ा एक्शन

 

गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वालों में ज्यादातर पर्यटक थे। इसका बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थि‍त आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे।

राम मंदिर दान चोरी कांड पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बड़ा खुलासा

Govind Dev Giri on Ram Mandir Donation Theft

Govind Dev Giri on Ram Mandir Donation Theft अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए दान चोरी कांड पर पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक तौर पर वास्तविक राशि की पुष्टि की है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने माना कि मंदिर से लगभग 3 करोड़ रुपए की नकद राशि चोरी हुई है। इससे पहले इस रकम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

 

पुणे दौरे पर आए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने उन मीडिया रिपोर्टों और दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि मंदिर से 14 करोड़ रुपए मूल्य का सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान गायब हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सभी खबरें पूरी तरह गलत हैं।  ALSO READ: अब इस तरह होगी अयोध्या राम मंदिर में CEO की नियुक्ति, कौन कर सकता है इस पद के लिए आवेदन

चंपत राय ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया

ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर कोषाध्यक्ष गिरी ने कहा कि चंपत राय ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। यह कहना सरासर गलत है कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है। राय को इस बात का गहरा एहसास था कि उनकी देखरेख में थोड़ी लापरवाही हुई है, जिसके कारण उन्होंने खुद पद छोड़ने का फैसला किया। उन पर कोई दबाव नहीं था।

 

मैं इस्तीफा नहीं दूंगा : अपने इस्तीफे की चर्चाओं को पूरी तरह निराधार बताते हुए गिरी ने कहा कि मैंने कोई इस्तीफा नहीं दिया है और न ही ऐसा कोई विचार मेरे मन में है। मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं, मैदान छोड़कर भागने वाला नहीं हूं। उन्होंने अपनी सादगी का भी हवाला दिया। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'

SIT जांच पर भरोसा

उन्होंने यूपी सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई पर पूर्ण संतोष जताया और कहा कि रामलला के दरबार में अपराध करने वाले को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि मंदिर परिसर के भीतर ही दान प्रबंधन से जुड़े कुछ कर्मचारियों और बाहरी तत्वों की मिलीभगत से इस हेराफेरी को अंजाम दिया गया। एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में 80 लाख रुपए की नकद बरामदगी की बात कही थी। इस मामले में कुछ बैंक कर्मियों और राम जन्मभूमि परिसर में तैनात कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई और गिरफ्तारियां हुईं।

व्यवस्था को बदलने की तैयारी

स्वामी गोविंद देव के इस बयान के बाद अब चोरी की वास्तविक रकम को लेकर स्थिति साफ हो गई है। 3 करोड़ की इस आधिकारिक चोरी के स्वीकारे जाने के बाद अब ट्रस्ट के भीतर सुरक्षा ऑडिट और दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को बदलने की तैयारी की जा रही है। अयोध्या में रामलला के गर्भगृह और दान काउंटरों पर अब अत्यधिक सुरक्षित डिजिटल काउंटिंग और सख्त सीसीटीवी निगरानी प्रणाली लागू की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी चूक को रोका जा सके। मामले में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और न्यायालयी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

ड्रग्स केस में घिरे नाना की मुश्किलें बढ़ी, युवती ने लगाए लाखों रुपए हड़पने के आरोप, इंदौर पुलिस करेगी फिर से जांच

Nana patwari

एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी करप्‍शन, नीट पेपर लीक आदि के खिलाफ इंदौर से भोपाल तक साइकिल यात्रा निकाल रहे हैं, उधर उनके भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी दूसरी मुश्किलों में फंसते जा रहे हैं। ड्रग्स मामले में घिरे नाना पटवारी का अब एक नया केस सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन के गलियारों में हलचल मचा दी है। एक युवती, जिसे पहले ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए पुलिस द्वारा बुलाया गया था, ने नाना पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस युवती ने ड्रग्स केस के अलावा नाना पटवारी की प्रताड़नाओं से तंग आकर पुलिस को एक और मामले की जानकारी दी है। उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि नाना पटवारी ने उसके लाखों रुपए हड़प लिए हैं और बार-बार मांगने के बावजूद पैसे वापस नहीं कर रहा है। इंदौर के डीसीपी जोन एक नरेंद्र रावत ने इस मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और मंगलवार को नाना पटवारी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया है।

बुटिक का काम करती है युवती : पुलिस को दी गई अपनी लिखित शिकायत में युवती ने बताया है कि वह पेशे से एक उद्यमी है। वह बुटिक का काम, फाइनेंस का काम और रियल एस्टेट का काम करके अपने बुजुर्ग पिता के साथ मिलकर परिवार का भरण-पोषण करती है। युवती ने शिकायत में उल्लेख किया है कि वह पिछले कुछ वर्षों से कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी को जानती है। नाना पटवारी ने उसे राऊ बायपास इंदौर पर शुभम बेली डीपीएस स्कूल के पास एक प्लाट दिखाया था और उसे लेने के लिए प्रेरित किया था। युवती ने इस प्लाट को खरीदने में अपनी सहमति जताई थी।

किया था लाखों का लेन- देन : युवती के अनुसार, उक्त प्लाट का कुल सौदा 36 लाख रुपये में तय हुआ था। इस सौदे के दौरान नाना पटवारी ने यह आश्वासन दिया था कि वह छह महीने के भीतर इस प्लाट को फिर से बिकवा देगा, जिससे युवती को लगभग 5 लाख रुपए का अतिरिक्त मुनाफा हो जाएगा। इस समझौते के तहत युवती ने नाना पटवारी के साथ एक अनुबंध पत्र भी तैयार किया था। उसने बताया कि बयाना राशि के तौर पर उसने कुल 13 लाख रुपए विभिन्न माध्यमों से नाना पटवारी को दिए थे। इस लेनदेन के बदले में नाना पटवारी ने उसे उक्त प्लाट की दो डायरियां भी दी थीं, लेकिन कुछ समय बीतने के बाद नाना पटवारी ने वे दोनों डायरियां वापस ले लीं।

पीड़ित युवती का आरोप है कि डायरियां वापस लेने के बाद नाना पटवारी ने उसे दी गई राशि में से केवल साढ़े सात लाख रुपए ही नकद वापस किए थे। बाकी बची हुई साढ़े पांच लाख रुपए की राशि आज तक उसे प्राप्त नहीं हुई है। युवती ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसने कई बार नाना पटवारी को फोन कॉल किए और अपने बकाया पैसे की मांग की, लेकिन नाना पटवारी ने न तो पैसे लौटाए और न ही इस संबंध में कोई संतोषजनक उत्तर दिया। अब इस युवती ने पुलिस प्रशासन से नाना पटवारी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने ड्रग्स मामले के साथ-साथ इस वित्तीय धोखाधड़ी के मामले को भी जांच के दायरे में ले लिया है, जिससे नाना पटवारी की परेशानियां और अधिक बढ़ गई हैं।