स्वस्थ, जागरूक और विकसित भारत की आधारशिला है ‘योग’

'समत्वं योग उच्यते' अर्थात् संतुलन ही योग है… श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण का यह संदेश जहां समूचे विश्व को संतुलित करने का सूत्र है, वहीं महर्षि पतंजलि ने पतंजलि योग सूत्र में 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोध' के माध्यम से मानव जीवन को स्वस्थ और निरोग रहने का मार्ग प्रदान किया है। भारत की यही सनातन योग परंपरा विश्व को शरीर, मन और आत्मा के स्तर पर संतुलित और समृद्ध बनाने का आधार है।

सदियों पूर्व ऋषि-मुनियों द्वारा विकसित जीवन पद्धति आज संपूर्ण विश्व के लिए सुख, शांति और संतुलन का मार्ग है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि योग विश्व मानवता के कल्याण का माध्यम बन गया है। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और अथक प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 21 जून को अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की गई।

यह निर्णय भारतीय संस्कृति और जीवन-दर्शन के प्रति विश्व समुदाय के सम्मान का प्रतीक है। दुनियाभर के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। यह भारत की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रमाण है। इस वर्ष अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ आयु के लिए योग' रखी गई है।

 

मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि इस वर्ष अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस पर मध्यप्रदेश की पावन धरती पर आयोजित समारोह में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। उनका आगमन मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह सुखद संयोग है कि योग के वैश्विक आंदोलन में मध्यप्रदेश को विशेष भूमिका निभाने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

 

प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश सरकार ने योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए हैं। स्वस्थ नागरिक विकसित और समृद्ध राष्ट्र का आधार है। प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति के स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए 'घर-घर योग- हर व्यक्ति निरोग' अभियान शुरू किया गया है।

प्रदेश में 800 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्रों तथा विभिन्न चिकित्सालयों में नियमित योग गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। प्रशिक्षित योग शिक्षकों द्वारा छोटे-छोटे समूहों में भी नागरिकों को योगाभ्यास करवाया जा रहा है। योग-सखी और योग-दूत गांव-गांव और शहर-मोहल्लों तक योग का संदेश पहुंचा रहे हैं।

 

प्रदेश में 12 मई से आरंभ हुआ अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस आयोजन 'हर घर योग अभियान' से जनभागीदारी का नया अध्याय लिख रहा है। इसी क्रम में आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित ऑनलाइन योग सत्रों का लाभ प्रदेश के लोगों को प्राप्त हो रहा है।

हम सभी के लिए गौरव की बात है कि विगत दिनों इंदौर स्थित मालवांचल यूनिवर्सिटी में आयोजित योग महोत्सव में 35 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने सामूहिक योग कर एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। योग 'वन अर्थ-वन हेल्थ' विचार को व्यवहार में उतारने का माध्यम है जो हमें स्वयं, समाज और प्रकृति से जोड़ता है। यह शरीर को स्वस्थ रखने के साथ जीवन को संतुलित, सार्थक और उत्कृष्ट बनाता है।

 

मध्यप्रदेश सरकार ने योग को पर्यावरण-संरक्षण और जनकल्याण से भी जोड़ा है। विश्व पर्यावरण दिवस से लेकर अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस तक विशेष जन-अभियान संचालित किया जा रहा है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से पर्यावरण-संरक्षण और योग से स्वास्थ्य संरक्षण पर कार्य किया जा रहा है। प्रकृति और मानव स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। योग हमें प्रकृति संग सह-अस्तित्व का जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यही भारतीय जीवन-दर्शन का मूल तत्व भी है।

 

मध्यप्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा, योग वेलनेस सेंटर, आरोग्य मंदिरों तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से योग को जनांदोलन बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक योग से लाभ प्राप्त करे और स्वस्थ जीवन की दिशा में कदम बढ़ाए।

 

मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि मध्यप्रदेश में जनवरी 2027 में 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य और एक चेतनाः समग्र कल्याण के लिए योग' विषय पर वैश्विक सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इसमें मध्यप्रदेश, भारत की सभ्यतागत चेतना का वैश्विक प्रतिनिधित्व करेगा।

 

आज जब दुनिया तनाव, अवसाद, जीवनशैली जनित रोगों और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे समय में योग मानवता के लिए बड़ा संबल है। ऐसे यह स्वस्थ शरीर, शांत मन और सुखी जीवन का आधार है।अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण का संकल्प है। यह भारत की उस प्राचीन चेतना का उत्सव है, जिसने सदियों से मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है।

हमें गर्व है कि आज पूरी दुनिया योग को अपनाकर भारत के इस अमूल्य ज्ञान का लाभ प्राप्त कर रही है। मैं, प्रदेश के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजन, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों और सामाजिक संगठनों से आग्रह करता हूं कि वे योग गतिविधियों से जुड़ें और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

 

आइए, हम सभी मिलकर योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। अपने परिवार और समाज को इससे जोड़ें तथा स्वस्थ मध्यप्रदेश, विकसित भारत और समृद्ध विश्व के निर्माण में सहभागी बनें। अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस की प्रदेशवासियों को हार्दिक मंगलकामनाएं…
(लेखक- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

Stay-at-Home पिता ने बदल दी Parenting की परिभाषा| Fatherhood Story | Happy Father’s Day

एक नौकरी जाने के बाद, निशांत की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई। जहाँ पहले वो Corporate Job में व्यस्त थे, वहीं अब उन्होंने अपने 6 साल के बेटे शिवेन के लिए Full-time पिता बनने का फैसला लिया। लोगों ने ताने दिए… सवाल उठाए… “असली नौकरी कब करोगे?”
“माँ का काम क्यों कर रहे हो?”
लेकिन निशांत रुके नहीं। हर स्कूल Drop, हर Homework, हर Bedtime Story में उन्होंने अपने बेटे का बचपन जीया। ये कहानी है एक ऐसे पिता की जिसने साबित किया कि Parenting का कोई Gender नहीं होता।
इस Father’s Day, एक बात याद रखें: बच्चे आपकी Salary नहीं, आपकी Presence याद रखते हैं।

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कांग्रेस व सपा सरकारों ने ललितपुर को कुल 1500 करोड़ रुपए भी नहीं दिए होंगे : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath gifted projects to Lalitpur

– मुख्यमंत्री योगी ने किया राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रु. की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास

– सपा-कांग्रेस ने उपेक्षित रखा, हम ललितपुर को एक दिन में दे रहे 1500 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

– अब बहन-बेटियों को सिर पर नहीं ढोना पड़ता पानी, बुंदेलखंड में हर घर जल योजना साकार

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ललितपुर को आज एक साथ 1500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। कांग्रेस ने पांच दशक और सपा ने चार बार प्रदेश में शासन किया, लेकिन इन दलों ने कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपए भी ललितपुर को नहीं दिए होंगे, क्योंकि उनमें विकास की सोच नहीं थी। सपा के लिए सैफई ही परिवार था और कांग्रेस के लिए दिल्ली का परिवार ही देश था। दोनों इससे बाहर नहीं निकल सकते। लेकिन, हमारे लिए 25 करोड़ जनता ही परिवार है और उसे विकास, सुरक्षा, सम्मान देना हमारा दायित्व है। 

 

मुख्यमंत्री शनिवार को तुवन मंदिर मैदान में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रुपए की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर ललितपुर की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात बुंदेलखंड के सुंदरतम जनपदों में से एक ललितपुर हमारे हृदय में बसता है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित जनता का अभिनंदन करते हुए आश्वासन दिया कि डबल इंजन सरकार यहां के विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।

 

अब ललितपुर के युवाओं व बेटियों को मिलती है सरकारी नौकरी 

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संकुचित सोच वाली इनकी सरकारों ने हर जनपद में एक-एक माफिया दिया था, जो जनता की गाढ़ी कमाई पर डकैती डालने के साथ अवैध खनन, वनों की अवैध कटान, गोतस्करी करते थे। प्रदेश को बंजर बनाते थे। इन लोगों ने यूपी को बीमारू बनाकर बुंदेलखंड के नौजवानों को पलायन पर मजबूर किया। बहन-बेटियों को कष्ट दिया था, लेकिन आज ललितपुर की बेटियां व नौजवान यूपी पुलिस समेत सरकारी नौकरियों में भर्ती होते हैं। 

 

पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलता था ललितपुर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलने वाला ललितपुर विकास की योजनाओं से कोसों दूर था। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास परियोजनाएं नहीं थीं। पानी होने के बावजूद खेती के लिए सिंचाई, गरीब के लिए आवास की सुविधा नहीं थी। मिट्टी के घड़े में पानी ढोते-ढोते माता-बहनों की जिंदगी व्यतीत हो जाती थी। यहां के संसाधनों व वन संपदा में लूट होती थी और मुट्ठी भर लोग अवैध खनन कर अव्यवस्था पैदा करते थे। 

 

अब नवाचार के लिए जाना जा रहा है ललितपुर

मुख्यमंत्री ने कहा कि ललितपुर अब विकास की ऊंचाइयों को प्राप्त कर नवाचार के लिए जाना जा रहा है। प्रदेश की पहली गोशाला देकर ललितपुर ने बताया था कि सरकार भी गोशाला का संचालन कर सकती है। तुवन सरकार की कृपा से तत्कालीन जिला प्रशासन ने पहली गोशाला प्रारंभ की थी। अब वहां से कंपोस्ट का निर्यात अन्य देशों को होने जा रहा है। अब ललितपुर के पास मेडिकल कॉलेज, अटल आवासीय विद्यालय भी है। 1500 एकड़ में यूपी का पहला फार्मा पार्क ललितपुर में बनेगा, इसकी तैयारी हो चुकी है। इससे हजारों नौजवानों को नौकरी मिलेगी। 

 

बुंदेलखंड में बसने जा रहा यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बहन-बेटियां, माताएं सिर पर घड़ा लेकर नहीं जातीं, क्योंकि बुंदेलखंड में हर घर जल की योजना साकार हो रही है। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की चर्चा करते हुए कहा कि हम लोग यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बुंदेलखंड में बसाने जा रहे हैं। पहले यहां का युवा पलायन करता था। ठोकर से घड़ा फूट जाता था तो माताएं-बहनें किस्मत पर रोती थीं।

आपके पूर्वजों ने बुंदेलखंड को सजाया-संवारा था, लेकिन पिछली सरकारों के निकम्मेपन और माफियावृत्ति के कारण बुंदेलखंड पिछड़ा था। हर जनपद में माफिया नौजवानों की नौकरी पर डकैती डालता था। विकास योजनाओं पर गुंडों को बैठाकर जनता के हक को छीना जाता था, जिससे बुंदेलखंड ठगा महसूस करता था। 

 

नए भारत को ताकत दे रहे पीएम मोदी

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि सरकार ने बुंदेलखंड को भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के हब के रूप में विकसित करने की बात कही थी। अभी इस कॉरिडोर में यूपी के अंदर ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। ऑपरेशन सिंदूर में जब यह मिसाइल दागी गई तो पाकिस्तान त्राहिमाम करते हुए जान की भीख मांग रहा था। पीएम मोदी नए भारत को ताकत दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश समेत बुंदेलखंड का कायाकल्प हो रहा है।

यहां की पहचान अब नौजवानों को नौकरी, बहन-बेटियों की सुरक्षा-समृद्धि से हो रही है। महिला स्वयंसेवी समूह की बहनें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से तेजी से कैसे आय बढ़ा सकती हैं, बुंदेलखंड, ललितपुर, झांसी इस मॉडल का प्रतीक बन रहा है।

 

पूरी हो गई दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना 

मुख्यमंत्री ने कहा कि समग्र विकास का कोई विकल्प नहीं हो सकता। विकास ही जीवन में परिवर्तन लाएगा। नौजवान, किसान, कारीगर, हस्तशिल्पी, व्यापारी, बेटी-बहन समेत समाज के हर तबके को विकास का वाहक बनाना पड़ेगा, तब किस्मत बदलेगी और समृद्धि आएगी। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने यही कार्य किया।

लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से बढ़ाया गया है। दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना अब पूरी हो गई। रतौली बांध, बावनी बांध, कचनौदा बांध, चिल्ली सिंचाई आदि परियोजनाओं ने बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदली है। किसानों की आमदनी अब कई गुना हो रही है। 

 

गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों को नहीं दिया मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों के लिए नहीं, बल्कि ललितपुर के लिए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किया। मुख्यमंत्री युवा के माध्यम से युवा उद्यमी बनाए जा रहे हैं। पूर्वजों ने कहा था कि ललितपुर न छोड़ियो, जब तक मिले उधार। किंतु अब आपको उधार लेने की जरूरत नहीं, क्योंकि सरकार ब्याज-गारंटी मुक्त पैसा दे रही है। अपना व्यवसाय चलाइए और कुछ समय बाद पैसा वापस कर दीजिए। आपका व्यवसाय भी बढ़ेगा और आप उद्यमी भी हो जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री ने विधायकों व सांसद की जमकर तारीफ भी की

मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा कार्य तब होता है, जब अच्छी सरकार आती है। अच्छी सरकार तब आती हैं, जब अच्छे विधायक-सांसद चुने जाते हैं। मुख्यमंत्री ने मन्नू कोरी व रामरतन कुशवाहा को ईमानदार, मेहनती तथा जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पति बताते हुए कहा कि वे दिन-रात काम करते हैं। हमने उनसे कहा है कि मेहनत से जनता की सेवा करिए। परिवारवाद के खिलाफ खड़े रहिए, पार्टी आपके साथ खड़ी रहेगी। इन लोगों को सांसद अनुराग शर्मा का सान्निध्य भी प्राप्त होता है।

आयुर्वेद आरोग्यता के लिए ऋषि परंपरा का सबसे बड़ा उपकार है। सैकड़ों वर्षों से सांसद जी का परिवार उस विधा को पुनर्जीवित कर भारत की पारंपरिक उपचार व्यवस्था को बढ़ा रहा है। वैद्यनाथ के नाम पर उन्होंने तेजी के साथ आर्युवेद का विस्तार किया है। ललितपुर में फॉर्मा पार्क के बाद आयुष पार्क भी बनाएंगे, जिसमें सांसद जी के अनुभव का लाभ मिलेगा। 

 

33 से अधिक देशों ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अमेरिका-ईरान युद्ध में दुनिया में ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई तो अमेरिका भी किंकर्तव्यविमूढ़ जैसी स्थिति में था। भारत में ऊर्जा संकट न पैदा हो, महंगाई न बढ़े, इसके लिए मोदी जी के नेतृत्व में कार्य किया गया। यह कार्य अन्य देशों में नहीं हो पाया। स्लोवाकिया समेत 33 से अधिक देशों ने पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। इससे 140 करोड़ भारतीयों का भी सम्मान होता है और देश अपने यशस्वी प्रधानमंत्री पर गौरव की अनुभूति करता है।

 

समारोह में प्रभारी मंत्री दानिश आजाद अंसारी, राज्यमंत्री मनोहर लाल ‘मन्नू कोरी’, सांसद अनुराग शर्मा, विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन, जिला पंचायत अध्य़क्ष कैलाश नारायण निरंजन, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सोनाली जैन, तुवन सरकार मंदिर के महंत रामलखन दास जी, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिशचंद्र रावत आदि मौजूद रहे। विधायक रामरतन कुशवाहा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
Edited By : Chetan Gour

मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर, ईरान ने फिर बंद किया हॉर्मुज, आखिर क्यों लिया ये फैसला?

Iran closed the Strait of Hormuz due to a ceasefire violation

Iran closes the Strait of Hormuz again : मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, ईरान ने सीजफायर उल्लंघन के चलते एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद कर दिया है। ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान का कहना है कि अमेरिका के भरोसा तोड़ने और लेबनान में इसराइल के युद्धविराम का उल्लंघन करने के कारण होर्मुज को बंद किया गया है। ईरानी सेना का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल ने हमला किया है, जो कि युद्धविराम का लगातार उल्लंघन है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद दोनों देशों ने होर्मुज को खोलने का निर्णय लिया था। अब ईरान के इस फैसले ने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है।

 

मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, ईरान ने सीजफायर उल्लंघन के चलते एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद कर दिया है। ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान का कहना है कि अमेरिका के भरोसा तोड़ने और लेबनान में इसराइल के युद्धविराम का उल्लंघन करने के कारण होर्मुज को बंद किया गया है।

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ईरानी सेना ने किया यह दावा

ईरानी सेना का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल ने हमला किया है, जो कि युद्धविराम का लगातार उल्लंघन है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद दोनों देशों ने होर्मुज को खोलने का निर्णय लिया था। अब ईरान के इस फैसले ने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है।

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ईरान ने दी यह चेतावनी 

ईरान की जॉइंट मिलिट्री कमांड ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर आक्रामकता जारी रहती है तो आगे के कदम उठाने की योजना बनाई गई है। ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने संकेत दिया कि जब तक ईरान को यह महसूस नहीं होता कि अमेरिका समझौते का पालन कर रहा है, तब तक शायद ही कुछ हो पाएगा।

 

लेबनान पर इसराइली हमलों में 16 लोगों की मौत 

बाघेई ने कहा, अंतिम समझौते के लिए बातचीत तभी शुरू होगी, जब लेबनान में लड़ाई खत्म करने सहित मुख्य वादों को पूरा किया जाएगा। शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर हुए इसराइली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 2 बच्चे भी शामिल थे।

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ईरानी सेना के दावे पर क्‍या बोले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस?

वहीं दूसरी ओर ईरानी सेना के दावे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान भी सामने आया है। वेंस का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान होर्मुज को बंद कर रहा है। उपराष्ट्रपति वेंस का कहना है कि ईरान पर बातचीत के लिए आने वाले दिनों में उनके स्विट्जरलैंड जाने की उम्मीद है।

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नेतन्याहू बोले- लेबनान से पीछे नहीं हटेगी ईरानी सेना

इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ किया है कि ईरान की सेना लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच 111 दिनों की जंग के बाद युद्ध समाप्त करने को लेकर 14 बिंदुओं का समझौता हुआ है। इसे इस्लामाबाद समझौते का नाम दिया गया है। इस समझौते में इसराइल शामिल नहीं है। ऐसे में ईरान की तरफ से होर्मुज को एक बार फिर बंद किए जाने का फैसला क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है।
Edited By : Chetan Gour

फिर बंद होगा होर्मुज? ईरान की बड़ी चेतावनी, अमेरिका-इजरायल पर लगाया सीजफायर तोड़ने का आरोप!

ईरान ने एक बार फिर दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यावसायिक जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान किया है। ईरानी सेना के शीर्ष कमान का कहना है कि अमेरिका ने शांति समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है, जबकि इजरायल लगातार लेबनान में हमले जारी रखे हुए है।

ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल मुख्यालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने संघर्षविराम समझौते की पहली शर्त का खुला उल्लंघन किया है और इजरायल दक्षिणी लेबनान में लगातार हमले कर रहा है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद किया जा रहा है।

“यह सिर्फ पहला कदम है”

ईरान ने चेतावनी दी है कि यह शांति समझौते के उल्लंघन के जवाब में उठाया गया पहला कदम है। अगर “आक्रामक कार्रवाई” जारी रही तो आगे और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

लेबनान से सेना हटाने की मांग

ईरान लंबे समय से मांग कर रहा है कि इजरायल अपनी सेना लेबनान से वापस बुलाए। लेकिन इजरायल ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया है और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई जारी रखी है।

हालांकि शुक्रवार को इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्षविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन इसके बाद भी हिंसा थमती नजर नहीं आ रही है।

शनिवार को दक्षिणी लेबनान के सैदा (सिडोन) के पास एक गांव पर इजरायली हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई। वहीं, लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक, नबातियेह जिले में हुए हमलों में 16 लोगों की जान गई।

हिजबुल्लाह सांसद हसन फदलाल्लाह ने कहा कि संगठन को इजरायली हमलों का जवाब देने का पूरा अधिकार है।

स्विट्जरलैंड जा सकते हैं जेडी वेंस

इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वह जल्द ही ईरान के साथ वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड जा सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते के तहत घोषित संघर्षविराम अभी भी कायम है और उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वास्तव में बंद कर दिया गया है।

शांति वार्ता पर संकट

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली नई वार्ता शुक्रवार को टाल दी गई थी। इन बातचीतों का उद्देश्य 60 दिनों के भीतर लंबित मुद्दों, खासकर ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, पर स्थायी समाधान तलाशना था।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विककोफ वार्ता को फिर से शुरू कराने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। वहीं, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के भी वहां पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

ट्रंप ने फिर जताई नाराजगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार खुद को क्षेत्रीय युद्ध रोकने वाले नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिकी समर्थन के बिना इजरायल की स्थिति बेहद कमजोर हो सकती थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई से नाराज हैं और उन्होंने इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान उनके रवैये पर असंतोष भी जताया था।

अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य वास्तव में बंद होता है और क्या अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता दोबारा पटरी पर लौट पाती है।

पत्नी से मांगी 50 लाख की फिरौती! शेयर बाजार में नुकसान के बाद शख्स ने रची किडनैपिंग खतरनाक साजिश

गुजरात के सूरत में किडनैपिंग का एक अनोखा मामला सामने आया है। इस मामले की जांच कर रही पुलिस को जब किडनैपिंग की सच्चाई पता चली तो हर कोई हैरान रह गया। गुजरात के सूरत में एक व्यक्ति पर खुद के किडनैपिंग की झूठी कहानी बनाने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, शेयर बाजार में बड़ा आर्थिक नुकसान होने के बाद उसने अपने परिवार से लाखों रुपये हासिल करने के लिए पूरी साजिश रची। शुरुआत में मामला किडनैपिंग का लग रहा था, लेकिन जांच के दौरान ऐसे सुराग मिले जिनसे पता चला कि घटना के पीछे की हकीकत कुछ और ही थी। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान गुजरात के सूरत में मोटा वराछा के रहने वाले जिग्नेश लालजीभाई तलाविया के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक उसने किडनैपिंग की झूठी कहानी बनाई, फिरौती के मैसेज भेजे और गुजरात और इस वजह से गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी जांच एजेंसियों को सक्रिय होना पड़ा।

पुलिस में दर्ज करवाया टिकट

मामले की शुरुआत 12 जून को हुई, जब जिग्नेश की पत्नी ने पुलिस को बताया कि उनका पति एक दिन पहले 11 जून को घर से बिना किसी को बताए गए थे और उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा है। शिकायत दर्ज होने के कुछ समय बाद परिवार के पास मोबाइल फोन से मैसेज आने लगे, जिनमें दावा किया गया कि जिग्नेश का किडनैपिंग कर लिया गया है। संदेश भेजने वालों ने उसकी रिहाई के बदले 50 लाख रुपये की मांग की और पैसे नहीं मिलने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इन संदेशों के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने नंबर को किया ट्रैक

फिरौती वाले मैसेज के बाद परिवार को जिग्नेश के मोबाइल से एक वीडियो भी मिला, जिसमें वह काफी घबराया हुआ नजर आ रहा था। वीडियो में भी पैसों की मांग दोहराई गई, जिससे परिवार और पुलिस की चिंता बढ़ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरत पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कई विशेष टीमों को जांच में लगाया। पुलिस ने तकनीकी मदद और निगरानी के जरिए उसकी तलाश शुरू कर दी ताकि जल्द से जल्द उसकी सही लोकेशन का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन ट्रैक की, जिससे पता चला कि फोन मध्य प्रदेश के उज्जैन क्षेत्र में एक्टिव था। जिसके बाद पुलिस टीमों को सर्च जारी रखने के लिए वहां भेजा गया।

लेकिन एनालिसिस के दौरान, अधिकारियों को डिजिटल सबूतों में कमियां और गड़बड़ियां मिलीं। वीडियो और लोकेशन डेटा किडनैपिंग के दावों से पूरी तरह मेल नहीं खा रहे थे। आगे की जांच से पता चला कि वीडियो शायद गुजरात के गोधरा में रिकॉर्ड किया गया था। इसके आधार पर सर्च एरिया बदल दिया गया।

कब हुआ किडनैपिंग का खुलासा

जांच आगे बढ़ने पर 15 जून को पुलिस ने जिग्नेश को गोधरा के एक होटल से बरामद कर लिया। वह पूरी तरह सुरक्षित था, जिसके बाद किडनैपिंग की आशंका खत्म हो गई। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसके साथ कोई किडनैपिंग नहीं हुआ था और पूरी घटना एक सोची-समझी योजना का हिस्सा थी। पुलिस के अनुसार, वह 11 जून को खुद ही घर से निकला था। उसने अपना स्कूटर सूरत में एक जगह खड़ा किया, फिर सार्वजनिक वाहन से रेलवे स्टेशन पहुंचा और वहां से ट्रेन पकड़कर उज्जैन चला गया था।

क्यों रची ये साजिश

पुलिस जांच में सामने आया कि जिग्नेश ने खुद ही अपने मोबाइल से परिवार को किडनैप होने और पैसे की मांग करने की बात कही गई थी। शक से बचने के लिए वह बीच-बीच में अपना फोन बंद और चालू करता रहा। जांच में ये भी पता चला कि वह दो दिन के लिए उज्जैन में ठहरा था और बाद में गोधरा पहुंच गया। अधिकारियों के अनुसार, आर्थिक परेशानी इस पूरे मामले की मुख्य वजह हो सकती है। जांच के दौरान पता चला कि शेयर बाजार में जोखिम भरे निवेश के कारण उसे भारी नुकसान हुआ था, जिसके चलते उसने यह पूरा नाटक रचा।

50-60 लाख रुपए का हुआ नुकसान

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिग्नेश को पहले हुए आर्थिक नुकसान से उबरने के लिए परिवार की मदद मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उसने शेयर बाजार में निवेश जारी रखा। बताया जा रहा है कि बाद में उसे फिर से बड़ा नुकसान हुआ, जिसकी रकम करीब 50 से 60 लाख रुपए तक पहुंच गई। मामले की जांच के बाद उतरन पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

नॉर्वे की युवराज्ञी अस्पताल में और बेटा जेल में

Norway Crown Princess Mette-Marit

Norway-Crown Princes: विधि का विधान भी कई बार कितना विचित्र होता है! नॉर्वे की 52 वर्षीय युवराज्ञी (क्राउन प्रिंसेस) मेत्ते-मारित, 2018 से ही फेफड़ों की एक असाध्य बीमारी से जूझ रही थीं। एक लंबी प्रतीक्षा के बाद, 17 जून को प्रतिरोपित एक नए फेफड़े के साथ अब वे अस्पताल में हैं। युवराज हाकोन मग्नुस के साथ उनके विवाह से पहले का 29 साल का उनका एक बेटा भी है— मारियुस बोर्ग ह्यिबी। बलात्कार के दो गंभीर मामलों के कारण, अदालत ने उसे 4 साल की सज़ा काटने के लिए इन्हीं दिनों जेल भेज दिया है! 

 

युवराज्ञी मेत्ते-मारित की मुश्किल घड़ी आधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2018 में शुरू हुई थी। उस समय, नॉर्वे के राजमहल ने घोषणा की थी कि वे फेफड़ों के “क्रॉनिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस” रोग से पीड़ित हैं—यह फेफड़ों में होने वाली एक जानलेवा असाध्य बीमारी है। डॉक्टरों ने इस बीमारी का पता शुरुआती दौर में ही लगा लिया था। मेत्ते-मारित ने उस समय घोषणा की कि जब तक संभव होगा, वे अपने राजकीय दायित्व निभाती रहेंगी। ALSO READ: नॉर्वे का राजपरिवार चिंताग्रस्त क्यों है?

बीमारी बढ़ती ही गई

समय के साथ बीमारी का असर बढ़ता ही गया। मेत्ते-मारित को बार-बार अपने कार्यक्रम रद्द करने पड़े—चाहे वे अपने पति हाकोन के साथ रही हों या अकेले—सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना कम करना और लंबे समय तक आराम करना पड़ा। 

 

स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से इतर, 2019 में यौन शोषण के लिए बदनाम हो गए अमेरिकी बैंकर जेफरी एपस्टीन के साथ मेत्ते-मारित का ईमेल से वर्षों तक चला करीबी संपर्क भी था। मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि 2011 और 2013 के बीच वह कई बार इस अमेरिकी अरबपति से मिली भी थीं। हंगामा होने पर, एक सार्वजनिक बयान जारी कर उन्होंने एपस्टीन के साथ अपने व्यवहार में हुई ग़लतियों को स्वीकार किया। समय के साथ यह बहस भले ही धीमी पड़ती गई, मेत्ते-मारित का स्वास्थ्य भी बिगड़ता ही गया। दैनिक जीवन हर दिन के साथ दुष्कर होने लगा।

 

2023 की शरद ऋतु में, मेत्ते-मारित कुछ समय के लिए सार्वजनिक जीवन से दूर हो गईं; बीमारी के कारण उन्हें लंबे समय तक आराम करना पड़ा। अक्टूबर 2024 में उन्हें कहना पड़ा कि वे बीमारी के कारण छुट्टी पर हैं। राजमहल ने बताया कि फेफड़े वाली बीमारी के इलाज़ के लिए लेनी पड़ रही दवाओं के “साइड इफ़ेक्ट” से ऐसा हो रहा है। ALSO READ: नॉर्वे के राजघराने में भूचाल: शाही परिवार के सदस्य पर पहली बार मुकदमा

बेटे के शर्मनाक कारनामे

इसी दौरान, बेटे मारियुस बोर्ग ह्यिबी के कारनामों के कारण शाही परिवार पर सार्वजनिक दबाव काफी बढ़ गया। अगस्त 2024 में, मारियुस को राजधानी ओस्लो में एक युवा महिला के फ्लैट में हुई बहस और मार-पीट के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया—उस के साथ मारियुस के अंतरंग संबंध थे।

 

मेत्ते-मारित के लिए केवल उनका बेटा ही चिंता का कारण नहीं था: मार्च 2025 में, राजमहल ने घोषणा की कि उनकी बीमारी बढ़ गई है— प्रतिदिन ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, जिनके कारण अपने औपचारिक दायित्व निभाना उनके लिए कठिन होता जा रहा है। सितंबर 2025 में, उन्हें अमेरिका की अपनी तय यात्रा रद्द करनी पड़ी। यात्रा के बदले, फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार लाने का कई सप्ताहों तक चलने वाला इलाज करवाना पड़ा।

 

कुछ ही समय बाद, परेशान करने वाली एक और ख़बर आई— जाँच से पता चला कि मेत्ते-मारित का स्वास्थ्य वास्तव में काफ़ी बिगड़ गया है। अतः डॉक्टरों ने फेफड़े के प्रतिरोपण (ट्रांसप्लांटेशन) की तैयारी शुरू कर दी। 2025 के अंत में, मेत्ते-मारित ने पहली बार इस मामले पर खुलकर बात की। लंबे समय तक वे यही मानती और आशा करती रहीं कि दवा से ही बीमारी को काबू में रखा जा सकता है।

एपस्टीन से जुड़े मामलों से सुर्खियों में

2026 के आरंभ में मेत्ते-मारित, जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामले को लेकर फिर से सुर्खियों में आ गईं। हाल ही में जारी दस्तावेज़ों से पता चला कि एपस्टीन से उनके संपर्क पहले की जानकारी की अपेक्षा कहीं ज़्यादा रहे होंगे। उन्होंने एक बार फिर माफ़ी मांगी। अपनी ग़लतियां स्वीकार कीं और कहा कि उस समय उन्होंने स्थिति का ग़लत आकलन किया था।

 

उन्हीं दिनों, उनके उद्दंड बेटे मारियुस बोर्ग ह्यिबी के आपराधिक कारनामों की मुख्य अदालती सुनवाई— राजधानी ओस्लो में कड़ी सुरक्षा के बीच—3 फरवरी से 19 मार्च 2026 तक चली। आरोपों और गवाहों के बयानों ने मीडिया का खूब ध्यान खींचा। राजपरिवार के लिए यह सब शर्म से डूब मरने जैसा था।

साँस के लिए नाक में लगी नली

2026 का वसंत आने तक मेत्ते-मारित की बीमारी की गंभीरता बहुत चिंताजनक बन गई थी। बहुत ही महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रमों के समय वे “पोर्टेबल ऑक्सीजन यूनिट” इस्तेमाल करने लगी थीं। नाक में लगी एक नली से उन्हें हवा मिलती थी। जून 2026 आते ही उनकी बेटी इंग्रिद अलेक्सांद्रा अपनी माँ का साथ देने के लिए ऑस्ट्रेलिया में अपनी पढ़ाई छोड़कर वापस आ गईं। पति युवराज हाकोन ने भी अपनी दिनचर्या में बदलाव किये और कई कार्यक्रमों को रद्द कर दिया।

 

5 जून को दो डॉक्टरों ने घोषणा की कि मेत्ते-मारित के बीमार फेफड़े हटाकर उनकी जगह किसी अंगदाता से मिले फेफड़े प्रतिरोपित करने के लिए लिए उन्हें एक प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। 17 जून को यह प्रतिरोपण हो भी गया। एक नए फेफड़े के साथ अब वे अस्पताल में हैं।

29 वर्षीय बेटे को मिली 4 साल जेल की सज़ा

नए फेफड़े के प्रतिरोपण से दो ही दिन पहले, 15 जून 2026 को, ओस्लो के एक जज ने मेत्ते-मारित के बेटे मारियुस के ख़िलाफ़ चल रहे मुकदमे पर फ़ैसला सुनाया। 29 वर्षीय मारियुस को 40 में से 34 आरोपों में— जिनमें बलात्कार के दो मामले भी शामिल थे— दोषी पाया गया और चार साल की जेल की सज़ा सुनाई गई।

 

मरियुस बहुत तुनुकमिजाज़ी, झगड़ालू और हिंसक स्वभाव का युवक है। उस पर लगे आरोपों की लंबी सूची में हैः यौन-संबंध सहित चार मामलों में बलात्कार के अलावा घरेलू हिंसा, मार-पीट, चीखना-चिल्लाना, पराई संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, मादक पदार्थों से संबंधित अपराध और यातायात नियमों का उल्लंघन। कई महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने और उनकी जानकारी या सहमति के बिना उनका वीडियो बनाने के भी आरोप हैं। सुनवाई में मारियुस ने सबसे गंभीर आरोपों वाले अपराधों से इनकार किया।

बलात्कार, हिंसा और मार-पीट के लगे आरोप

अपने साथ बलात्कार का आरोप लगाने वाली 29 वर्षीया “इन्फ्लुएंसर” नोरा हाउकलांद ने मारियुस पर हिंसा और मार-पीट करने का भी आरोप लगाया है। दोनों कुछ समय तक बिना विवाह के एकसाथ रह चुके हैं। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में नोरा का कहना है कि “ट्रॉमा (गहरा मानसिक सदमा) आसानी से नहीं जाता। आज भी, जब वह दरवाज़े के ज़ोर से बंद होने, किसी पुरुष के ज़ोर-ज़ोर से पैर पटकने या मोटरसाइकिल की ऊँची आवाज़ सुनती हैं, तो उसकी धड़कनें बढ़ जाती हैं।” अभियोग पत्र में कहा गया है कि मारियुस की हिंसा के भुक्तभोगी ऐसी स्थिति में थे, जिसमें वे “नींद और/या नशे की हालत” के कारण अपना बचाव करने में पूर्णतः असमर्थ थे।

 

उल्लेखनीय है कि युवराज्ञी मेत्ते-मारित का यह बिगड़ैल बेटा, उनके पति युवराज हाकोन माग्नुस के साथ उनके विवाह से पहले, 13 जनवरी 1997 को पैदा हुआ था। उसके असली पिता का नाम मोर्थन बोर्ग है। मेत्ते-मारित और युवराज हाकोन का अपसी परिचय 1999 में एक संगीत महोत्सव के समय हुआ था। विवाह हुआ 25, अगस्त 2001 को। यानी, मारियुस का जन्म दोनों के विवाह से चार साल पहले ही हो गया था। इसलिए, वह नॉर्वे के राजपरिवार का आधिकारिक सदस्य नहीं है। शायद इस कारण भी वह विद्रोही बन गया है— अपनी माँ सहित राजपरिवार की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिलाने पर उतारू है।

यूपी में संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी मिलेगी एक क्लिक पर

Information regarding property identification ownership and records in UP will be available with single click

– फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर लगेगी रोक

– संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल

– भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

– यूनिक प्रॉपर्टी आईडी, भू-आधार और स्वतः नामांतरण व्यवस्था पर मंथन

Uttar Pradesh News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया। 

 

 भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

योगी सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्तुतीकरण में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन कर नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य हो सकेगी। 
 

 हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक पहचान

योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी ग्रामीण एवं शहरी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करना है। इस आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का कार्य पहले से चल रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। 

 

पंजीकरण के साथ ही स्वतः होगा नामांतरण

प्रदेश सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा संसाधनों की बचत होगी। 

भू-आधार से जुड़ेगा हर भूमि पार्सल

योगी सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से कार्य कर रही है। इसके तहत प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी ‘भू-आधार’ प्रदान किया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने में मदद करेगी, जिससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक और अद्यतन रहेंगे। 

 

बिजली, पानी और संपत्ति कर रिकॉर्ड होंगे एक जगह 

 इस प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने में सहायक होगी और कर संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी। 

 

ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी, नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगी, बल्कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी नई गति प्रदान करेगी। उत्तर प्रदेश को तकनीक आधारित भूमि और संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Edited By : Chetan Gour

‘फिर से दोस्ती करना चाहती हैं मेलोनी…’, ट्रंप ने इटली PM को दिया अब ये जवाब

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर फिर एक बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि जी-7 समिट के दौरान मेलोनी ने कई बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता पहले के मुकाबले कम हो रही है। उनके मुताबिक, इसकी एक वजह ईरान को परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने से रोकने में इटली की कथित असफलता हो सकती है।

अपने पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि मेलोनी ने उस समय अमेरिका का साथ नहीं दिया, जब ईरान को परमाणु हथियारों तक पहुंचने से रोकने की बात हो रही थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा इटली से प्यार करता है और उसकी सुरक्षा के लिए खड़ा रहता है। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि नाटो ने भी इटली की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ट्रंप ने मेलोनी पर साधा निशाना

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के साथ तनाव के दौरान इटली ने अमेरिका को अपने एयरबेस और रनवे का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, इटली सरकार का कहना था कि अमेरिका ने इसके लिए तय प्रक्रिया के तहत पहले से मंजूरी नहीं ली थी। ट्रंप ने कहा, “मेलोनी ने हमें इटली के रनवे और लैंडिंग स्ट्रिप का इस्तेमाल नहीं करने दिया। इससे हमारे कामकाज और जरूरी व्यवस्थाओं में काफी परेशानी हुई। यह तब हुआ जब अमेरिका इटली और नाटो के दूसरे सहयोगी देशों की सुरक्षा पर हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।”

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उनके साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रही थीं। उनके अनुसार, मेलोनी जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करने के लिए अमेरिका और उनके साथ नजदीकियां दिखाना चाहती थीं। हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर इटली सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ट्रंप और मेलोनी के बीच बयानबाजी तेज

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अब जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। ट्रंप ने लिखा, “अब वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्त बनना चाहती हैं। नहीं, धन्यवाद!” वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक वीडियो में ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया था कि जी-7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनसे तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की थी।

मेलोनी ने कहा कि ट्रंप की यह बात पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत है। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने ही एक सहयोगी देश के बारे में इस तरह की बातें क्यों कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि ट्रंप के लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और ऐसी बातें दोनों देशों के रिश्तों के लिए ठीक नहीं हैं।

हे राम! चढ़ावा चोरी के बाद अब 40% कमीशन के आरोप से गरमाई अयोध्या

Ram Mandir Trust: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है। इस बीच, एक नए खुलासे ने विवाद को और गहरा कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि चढ़ावा चोरी का यह सिंडिकेट बहुत बड़ा हो सकता है। इसी बीच, मंदिर परिसर के निर्माण कार्यों में 'कमीशनखोरी' का एक बेहद गंभीर और नया आरोप सामने आया है, जिसने हड़कंप मचा दिया है।

हालांकि, इन आरोपों की असली सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ हो सकेगी। यहां यह भी जानकारी दे दें कि डॉ. अनिल मिश्रा के करीबी व उनकी सिफारिश पर राम मंदिर में नियुक्त किए गए लवकुश मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति जो कि राम मंदिर में दान की रकम की गिनती और रखरखाव करते थे, उनसे दान की राशि को बैंक में जमा करने की प्रक्रिया के बार में SIT ने पूछताछ की। 

कॉल रिकॉर्डिंग सुनाई तो मुझे काम से हटा दिया

​राम मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी से जुड़े रहे सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने सोशल मीडिया पर दिए एक इंटरव्यू में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा पर सीधे उंगली उठाई है। इससे पहले टिन्नू यादव भी ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों पर सवाल उठा चुके हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी कांड, अब सर्विलांस स्टाफ रडार पर! RMO की भी खुलेगी कुंडली

 

​दीनानाथ वर्मा ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि राम मंदिर परिसर से जुड़े कार्यालय निर्माण के दौरान एल्युमिनियम के काम के लिए एक ठेकेदार से कथित रूप से 40 फीसदी कमीशन की मांग की गई थी। इस कमीशन को एडजस्ट करने के लिए काम का बिल भी जानबूझकर 40% बढ़ाकर तैयार कराया गया। ​वर्मा का आरोप है कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े पर आपत्ति जताई थी और इसकी शिकायत सबूत के तौर पर कॉल रिकॉर्डिंग के साथ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से की थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें (दीनानाथ वर्मा को) ही काम से अलग कर दिया गया। उन्होंने इस मामले में कर्मी रवि गुप्ता के नाम का भी जिक्र किया है।

कौन हैं डॉ. अनिल मिश्रा? : साइकिल से लिफ्ट वाले बंगले तक का सफर

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले धर्म सेना प्रमुख संतोष दूबे ने वेबदुनिया को अहम जानकारी देते हुए बताया ​कि विवादों के केंद्र में आए डॉ. अनिल मिश्रा का नाम तब सबसे ज्यादा चर्चा में आया, जब उन्हें 22 जनवरी को हुए राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान का 'मुख्य यजमान' (प्रधान यजमान) बनाया गया था। अपनी पत्नी उषा मिश्रा के साथ उन्होंने ही मुख्य पूजा संपन्न की थी।

साधारण बैकग्राउंड से 'खास' होने की कहानी

दूबे ने बताया कि डॉ. मिश्रा का जन्म 1958 में आंबेडकर नगर के पतौना गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। जौनपुर से पढ़ाई के बाद 1981 में फैजाबाद से होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) की डिग्री ली। वे सरकारी सेवा में चिकित्साधिकारी रहे और सुल्तानपुर व गोंडा में तैनात रहे। इस दौरान वे RSS की शाखाओं से जुड़े रहे और अवध के प्रांत कार्यवाह बने। आपातकाल का विरोध भी किया। साल 2020 में उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार पद से रिटायर होने के बाद, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बने 'राम मंदिर ट्रस्ट' में उन्हें स्थायी सदस्य बनाया गया। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला, आस्था के केंद्र पर 'चंदा चोरी' का साया, SIT जांच से मचा हड़कंप

चर्चा का विषय बनी 'लाइफस्टाइल'

​कभी साइकिल और स्कूटर पर चलने वाले डॉ. अनिल मिश्रा की किस्मत ट्रस्ट का सदस्य बनते ही तेजी से बदली। स्थानीय लोगों और गलियारों में चर्चा है कि राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ डॉ. मिश्रा की निजी तरक्की भी रॉकेट की रफ्तार से हुई।

 

​अयोध्या की सबसे महंगी कॉलोनी में उनका लिफ्ट युक्त बहुमंजिला आलीशान मकान बनकर तैयार हुआ है और उनकी लाइफस्टाइल में भी गुणात्मक बदलाव आया है। लोग हैरान हैं कि अचानक इतना बड़ा आर्थिक परिवर्तन कैसे हुआ? इसी बीच चढ़ावा चोरी और अब 40% कमीशन के आरोपों ने इस मामले को और हवा दे दी है। देखना दिलचस्प होगा कि इस 'कमीशन' के खेल में अभी और कितने धुरंधरों के नाम उजागर होते हैं।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala