रिटायरमेंट प्लानिंग होगी बेहद आसान! पेंशनबाजार ने कॉर्पोरेट NPS सर्विस की मजबूत; कर्मचारियों और कंपनियों को होगा बड़ा फायदा

PensionBazaar Corporate NPS Services: पैसाबाजार के रिटायरमेंट प्लानिंग प्लेटफॉर्म ‘पेंशनबाजार’ ने अपनी कॉर्पोरेट नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) फैसिलिटीज को और मजबूत किया है। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों और संस्थानों के लिए अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट बेनिफिट्स देना बेहद आसान, सुचारू और डिजिटल बनाना है।

अक्सर प्रशासनिक झंझटों और कागजी कार्रवाई के कारण कंपनियां कॉर्पोरेट एनपीएस लागू करने से कतराती थीं। इस कमी को दूर करते हुए पेंशनबाजार ने एक टेक्नोलॉजी-बेस्ड सिंगल-विंडो इंटरफेस तैयार किया है, जो ऑनबोर्डिंग से लेकर सर्विसिंग तक के सभी झंझटों को खत्म करता है।

पेंशनबाजार के हेड विश्वजीत गोयल ने कहा कि, ‘लोग अक्सर अपने करियर के आखिरी दौर में रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं। हमें मिलकर कंपाउंडिंग के फायदों के बारे में जागरूकता बढ़ानी होगी, जिसका फायदा तभी मिल सकता है जब लोग जल्दी शुरुआत करें। हमारा लक्ष्य कॉर्पोरेट एनपीएस की ऑपरेशनल मुश्किलों को दूर करना और रिटायरमेंट प्लानिंग को हर कर्मचारी की वित्तीय यात्रा का एक स्वाभाविक हिस्सा बनाना है।’

एंप्लॉयर और HR टीमों का काम हुआ आसान

पेंशनबाजार का यह डिजिटल प्लेटफॉर्म कॉर्पोरेट NPS लागू करने के हर चरण को आसान बनाता है:

डिजिटल ऑनबोर्डिंग व डॉक्यूमेंटेशन: एंप्लॉय ऑनबोर्डिंग, कॉन्ट्रिब्यूशन मैनेजमेंट और रिपोर्टिंग को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है।

ऑपरेशनल झंझट खत्म: मैन्युअल काम खत्म होने से कंपनियों की HR और फाइनेंस टीमों का समय बचता है, जिससे छोटी-बड़ी हर तरह की कंपनियां इसे आसानी से अपना सकती हैं।

कर्मचारियों के लिए एक जगह सभी सुविधाएं

कर्मचारियों के लिए भी रिटायरमेंट प्लानिंग का अनुभव अब काफी आसान हो गया है:

  • आसान डिजिटल एक्सेस: कर्मचारी घर बैठे डिजिटल रूप से अपनी ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
  • रियल-टाइम ट्रैकिंग: कर्मचारी अपने NPS अकाउंट की डिटेल्स देखने के साथ-साथ अपने रिटायरमेंट फंड की ग्रोथ पर लगातार नजर रख सकते हैं।
  • कम उम्र में प्लानिंग का मौका: वर्कप्लेस पर एनपीएस आसानी से मिलने के कारण युवा कर्मचारी करियर की शुरुआत से ही रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू कर सकते हैं।

वर्कप्लेस पर क्यों अहम हो रही है रिटायरमेंट प्लानिंग?

आमतौर पर कर्मचारी घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई या अन्य तत्कालीन जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं और रिटायरमेंट को करियर के आखिरी पड़ाव के लिए टाल देते हैं। लेकिन अब कंपनियां सिर्फ सैलरी देने तक सीमित न रहकर कर्मचारियों के संपूर्ण वित्तीय कल्याण पर ध्यान दे रही हैं। पेंशनबाजार आसान डिजिटल अनुभव और सही जानकारी के जरिए कर्मचारियों को कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: क्या रिटायरमेंट के बाद आपकी बचत 30 साल तक साथ दे पाएगी? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Retirement Planning: पहले रिटायरमेंट का मतलब थोड़ा आसान था। 58-60 साल की उम्र में नौकरी छोड़ी और अगले 10-15 साल तक बचत के सहारे जिंदगी चल गई। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

आज भारतीय पहले से कहीं ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं। 1960 में औसत उम्र सिर्फ 41 साल थी। अब यह 70 साल से ऊपर पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि 60 साल में रिटायर होने वाला व्यक्ति 85-90 साल तक जी सकता है। यानी रिटायरमेंट अब 10 साल नहीं, 25-30 साल का सफर बन चुका है।

यही वजह है कि अब सिर्फ बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या वही पैसा पूरे रिटायरमेंट में आपका साथ देगा?

क्या 1 करोड़ रुपये काफी होंगे?

मान लीजिए आपके पास रिटायरमेंट के समय 1 करोड़ रुपये हैं। इस पर हर साल 8% रिटर्न मिलता है। आप पहले साल 3.5 लाख रुपये निकालते हैं और हर साल महंगाई के हिसाब से निकासी 5% बढ़ाते हैं।

ऐसे में 30 साल बाद भी आपका फंड खत्म नहीं होता। उल्टा यह करीब 3.37 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वजह यह है कि शुरुआती वर्षों में निवेश का रिटर्न निकाली गई रकम से ज्यादा रहता है। इसलिए बाकी पैसा लगातार बढ़ता रहता है।

सालशुरुआत में फंडसालाना निकासीसाल के अंत में फंड
1₹1.00 करोड़₹3.50 लाख₹1.05 करोड़
5₹1.19 करोड़₹4.25 लाख₹1.24 करोड़
10₹1.48 करोड़₹5.43 लाख₹1.54 करोड़
15₹1.82 करोड़₹6.93 लाख₹1.90 करोड़
20₹2.23 करोड़₹8.84 लाख₹2.33 करोड़
25₹2.71 करोड़₹11.29 लाख₹2.82 करोड़
30₹3.25 करोड़₹14.41 लाख₹3.37 करोड़

सबसे बड़ा खतरा क्या है?

आज सबसे बड़ा जोखिम लॉन्गेविटी रिस्क है। यानी आपकी बचत खत्म हो जाए, लेकिन जिंदगी बाकी रहे।

एक सर्वे के मुताबिक, औसत भारतीय ने रिटायरमेंट के लिए सिर्फ 28 लाख रुपये जोड़े हैं। जबकि आराम से रिटायर होने के लिए उसे करीब 1 करोड़ रुपये चाहिए। यानी जरूरत और बचत के बीच बड़ा अंतर है, औसतन करीब 72 लाख का।

महंगाई और इलाज का खर्च

रिटायरमेंट में सबसे बड़ा दुश्मन महंगाई है। आज 50,000 रुपये महीने का खर्च है, तो 30 साल बाद यही खर्च 2 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकता है।

इसके ऊपर मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ रहा है। उम्र बढ़ने के साथ दवाइयां, टेस्ट और अस्पताल का खर्च भी बढ़ता जाता है। इसलिए रिटायरमेंट का बड़ा हिस्सा इलाज पर खर्च हो सकता है।

जल्दी शुरुआत करना जरूरी

रिटायरमेंट की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर रहेगा। कंपाउंडिंग को ज्यादा समय मिलेगा और छोटी-छोटी बचत भी बड़ा फंड बन सकती है।

अब रिटायरमेंट को सिर्फ नौकरी खत्म होने का दिन मत समझिए। यह 25-30 साल की लंबी वित्तीय यात्रा है। अगर इस सफर को आराम से बिताना है, तो तैयारी भी समय रहते शुरू करनी होगी।

इन 5 बातों का भी ध्यान रखें

  • रिटायरमेंट की तैयारी जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना कम बोझ पड़ेगा।
  • अपना सारा पैसा एक ही जगह मत लगाइए। अलग-अलग विकल्पों में बांटकर निवेश करें।
  • हर साल महंगाई को ध्यान में रखकर अपने निवेश और खर्च का हिसाब जरूर देखें।
  • इलाज का खर्च तेजी से बढ़ता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इमरजेंसी के लिए अलग पैसा रखें।
  • रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी कैसे आएगी, इसकी योजना पहले से बना लें। SWP, SCSS और दूसरे विकल्प इसमें मदद कर सकते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।