Salman Khan: ‘मातूभूमि’ की रिलीज डेट बढ़ी आगे, इस बीच काउबॉय लुक में बदले-बदले से दिखे सलमान खान

Salman Khan: सलमान खान की बहुप्रतीक्षित मिलिट्री ड्रामा ‘मातृभूमि’ की थिएटर में रिलीज में असल दुनिया में हुए कूटनीतिक बदलावों के कारण काफी देरी हो रही है। भारत और चीन के बीच 2020 में हुई सीमा झड़पों पर आधारित इस प्रोजेक्ट पर, दोनों देशों के बीच हाल ही में संबंधों में आए सुधार के बाद रक्षा मंत्रालय ने सवाल उठाए हैं।

अधिकारियों ने फिल्म के संवेदनशील जियोपॉलिटिकल कंटेंट और इसमें चीन का सीधे तौर पर जिक्र किए जाने को लेकर चिंता जताई है, जिससे इसकी संभावित रिलीज रुक गई है। हालांकि प्रोड्यूसर्स अभी भी इस साल के आखिर तक फिल्म को सिनेमाघरों में लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मंजूरी मिलने में आ रही रुकावटों के कारण इसका प्रीमियर 2027 तक टल सकता है।

एक सूत्र ने बॉलीवुड हंगामा को बताया, “मामले अभी सुलझने बाकी हैं। अगर वे जल्द सुलझ भी जाते हैं, तो भी अच्छी रिलीज़ डेट मिलना मुश्किल होगा, क्योंकि ज़्यादातर बड़ी तारीखें पहले ही बुक हो चुकी हैं।” उन्होंने आगे कहा, “इस साल दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को है।

दशहरा से एक दिन पहले भी अक्सर बड़ी छुट्टी जैसा माहौल होता है और कलेक्शन में उछाल आता है। इसलिए, ‘मातृभूमि’ को पांच दिन के लंबे वीकेंड का फ़ायदा मिल सकता है। उम्मीद है कि ‘रामायण’ की रिलीज डेट 30 अक्टूबर कर दी जाएगी। उसके बाद, नवंबर के आखिरी हफ्ते तक कोई बड़ी फिल्म रिलीज नहीं होने वाली है, जिससे ‘मातृभूमि’ को भी फायदा हो सकता है।”

अगर मामले सुलझ नहीं पाए, तो चित्रांगदा सिंह स्टारर इस फ़िल्म को अगले साल के लिए टाला जा सकता है। ‘मातृभूमि’ को असल में 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था, लेकिन तब से इसमें कई बार देरी हो चुकी है। इन सबके बीच सलमान खान को बांद्रा में एक स्टूडियो के बाहर डबिंग के बाद देखा गया, जिससे उनकी आने वाली फिल्म को लेकर फैंस के बीच काफी चर्चा शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर कई पैपराजी वीडियो वायरल हो रहे हैं।

वीडियो में सलमान एक टफ, काउबॉय लुक में नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने हैट भी पहनी है। उन्होंने हल्के नीले रंग की डिस्ट्रेस्ड डेनिम पैंट और लाल-सफेद चेक वाली बटन-डाउन शर्ट पहनी थी, जिसके बटन आधे ही लगे हुए थे। एक्टर ने टेक्सचर्ड ग्रे काउबॉय हैट पहनकर अपने लुक को और भी शानदार बना दिया।

Guru Purnima 2026: इस साल गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को राशि अनुसार दें उपहार, जानें आपकी राशि के अनुसार क्या दे सकते हैं भेंट

Guru Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में “गुरु” का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इस दिन लोग अपने गुरुओं के पास जाते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। जिनके गुरु इस संसार में नहीं हैं, वे उनके चित्र की पूजा करते हैं या गुरु स्वरूप मानकर माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करते हैं। गुरु पूर्णिमा हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुओं को भेंट या दान करना बेहद फलदायी माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। चूंकि यह दिन महान ऋषि वेदव्यास जी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। नीचे सभी 12 राशियों के अनुसार गुरु को भेंट करने या दान देने योग्य वस्तुओं की सूची दी गई है :

आपकी राशि अनुसार गुरु के लिए भेंट

मेष राशि : मेष राशि के जातकों को गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को लाल रंग के वस्त्र, मूंगा, या लाल चंदन भेंट करना चाहिए। इसके साथ ही गेहूं और गुड़ का दान करना भी शुभ रहेगा।

वृषभ राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को सफेद या रेशमी वस्त्र भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा मिश्री, चांदी या चावल का दान करने से गुरु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि वालों को अपने गुरु को हरे रंग के वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें, या मूंग की दाल भेंट करनी चाहिए। गुरु के सानिध्य में गायत्री मंत्र का जाप करना भी आपके लिए लाभकारी रहेगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों को गुरु को सफेद चंदन, चावल, या चांदी का कोई पात्र भेंट करना चाहिए। जरूरतमंदों को दूध या मिठाई का दान देना भी उत्तम माना जाता है।

सिंह राशि : सिंह राशि के लोग अपने गुरु को पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र, केसर, या तांबे का पात्र भेंट करें। इसके अलावा गेहूं और धार्मिक ग्रंथों का दान भी बहुत फलदायी होता है।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों को गुरु को किताबें, पेन, या शिक्षण सामग्री भेंट करनी चाहिए। इसके साथ ही हरे फल या मूंग की दाल का दान करना आपके बौद्धिक विकास के लिए शुभ है।

तुला राशि : तुला राशि के जातकों को अपने गुरु को सफेद रेशमी वस्त्र या मिश्री भेंट करनी चाहिए। आप आश्रम या मंदिर में चावल और घी का दान भी कर सकते हैं।

वृश्चिक राशि : इस राशि के लोग अपने गुरु को लाल या महरून रंग के वस्त्र, तांबे के बर्तन, या कलावा भेंट करें। जरूरतमंदों को भोजन कराना भी आपके लिए शुभ रहेगा।

धनु राशि : धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति (गुरु) हैं। आपको अपने गुरु को पीले वस्त्र, चना दाल, केसर, या हल्दी भेंट करनी चाहिए। गुरु से गुरु मंत्र दीक्षा लेना आपके लिए सबसे सर्वोत्तम रहेगा।

मकर राशि : मकर राशि वालों को गुरु को नीले या भूरे रंग के वस्त्र या कोई उपयोगी कंबल भेंट करना चाहिए। साथ ही, गुरु के चरणों में तिल या उड़द की दाल का दान समर्पित करें।

कुंभ राशि : इस राशि के जातक अपने गुरु को सफेद या नीले रंग के वस्त्र, सूखे मेवे (जैसे काजू, बादाम) या औषधि भेंट कर सकते हैं। इसके अलावा अनाथालय या वृद्धाश्रम में अन्न दान करना विशेष फल देता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों को गुरु को पीले वस्त्र, सोने की कोई छोटी वस्तु, पुखराज (यदि सामर्थ्य हो) या धार्मिक पुस्तकें (जैसे भगवद गीता या रामायण) भेंट करनी चाहिए। हल्दी और चने की दाल का दान करना भी बहुत शुभ है।

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Prambanan Temple: 1000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर जाएंगे पीएम मोदी, जानिए भारत-इंडोनेशिया के रिश्तों में क्यों है इसकी खास अहमियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता शहर में स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का दौरा करेंगे। इस दौरान भारत और इंडोनेशिया मिलकर करीब 1,000 साल पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और मरम्मत के काम की शुरुआत करेंगे। प्रम्बानन मंदिर दोनों देशों की साझा संस्कृति, इतिहास और प्राचीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

1000 साल पुराना है मंदिर

इसका उद्देश्य भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत बनाना है। इस परियोजना के जरिए दोनों देश अपनी प्राचीन विरासत की रक्षा करने के साथ-साथ आपसी सहयोग और रणनीतिक संबंधों को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कल मुझे राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना की शुरुआत करने का अवसर मिलेगा। करीब 1,000 साल पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।”

इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर

प्रम्बानन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह देश की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण 9वीं सदी में मतारम साम्राज्य के समय हुआ था। उस दौर में यहां करीब 240 मंदिर थे। समय के साथ इनमें से कई मंदिर टूट-फूट गए और आज उनके अवशेष ही बचे हैं। इतिहास के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण हिंदू संजय राजवंश के राजा राकाई पिकाटन ने कराया था। उस समय मध्य जावा में बौद्ध शैलेंद्र राजवंश का भी काफी प्रभाव था। शैलेंद्र राजवंश ने बोरोबुदुर समेत कई बड़े बौद्ध स्मारकों का निर्माण कराया था।

जानें मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार, प्रम्बानन मंदिर का निर्माण उस समय हुआ, जब इस क्षेत्र में फिर से हिंदू धर्म को मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं था, बल्कि राजसत्ता, एकता और शासन की ताकत का भी प्रतीक माना जाता था। उस समय राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता था। धीरे-धीरे प्रम्बानन मंदिर साम्राज्य का प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक केंद्र बन गया। प्रम्बानन मंदिर परिसर का सबसे बड़ा आकर्षण 47 मीटर ऊंचा भगवान शिव को समर्पित शिव महादेव मंदिर है। यह पूरे परिसर की सबसे ऊंची इमारत है। इसके अलावा यहां भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित दो प्रमुख मंदिर भी मौजूद हैं।

भूकंप से हुआ था मंदिर का भारी नुकसान

साल 1991 में प्रम्बानन मंदिर को उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शानदार वास्तुकला के कारण यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। यह दुनिया के सबसे सुंदर हिंदू मंदिर परिसरों में से एक माना जाता है और हर साल यहां हजारों देशी-विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। भूकंप से नुकसान होने के बावजूद इस मंदिर की ऐतिहासिक पहचान को बचाने के लिए समय-समय पर बड़े स्तर पर मरम्मत और संरक्षण का काम किया गया है।

प्रम्बानन मंदिर की पत्थर की दीवारों पर रामायण की कहानी को बेहद सुंदर नक्काशी के जरिए उकेरा गया है। श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर की परिक्रमा करते हुए इन चित्रों के माध्यम से पूरी रामायण की कथा को क्रमवार देख सकते हैं। इंडोनेशिया की संस्कृति में भी रामायण का विशेष महत्व है। यहां प्रम्बानन मंदिर की भव्य पृष्ठभूमि में रामायण बैले का मंचन किया जाता है, जो इस सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखता है।

पीएम मोदी करेंगे दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रम्बानन मंदिर दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और मरम्मत की परियोजना से दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते और साझा विरासत को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन:यहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे, ब्रह्मोस डील पर मुहर लगने की संभावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन है। वे सोमवार को पहुंचे थे, एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच आज द्विपक्षीय बैठक होगी। जिसमें करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर मुहर लगने की संभावना है। मोदी इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन भी जाएंगे। 9वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। पीएम इंडोनेशिया के बिजनेसमैन के साथ राउंडटेबल मीटिंग करेंगे और जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। इसके बाद न्यूजीलैंड के लिए रवाना हो जाएंगे। इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप दिखाई देती है। यहां रामलीला होती है, गरुड़ एयरलाइन है और नोट पर भगवान गणेश की तस्वीर भी छप चुकी है। आखिर यहां भारतीय संस्कृति कैसे पहुंची? पढ़िए खबर के आखिर में भास्कर नॉलेज। मोदी की इंडोनेशिया दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें… इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के लिए अहम इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब है। भारत और इंडोनेशिया ने 2018 में प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान साबंग पोर्ट और आसपास समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके तहत पोर्ट के विकास, समुद्री संपर्क, लॉजिस्टिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश बन सकता है भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब ₹2,500 करोड़ की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की संभावित डील इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा मानी जा रही है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के DRDO और रूस की ‘एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया’ के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने किया है। यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। भास्कर नॉलेज इंडोनेशिया 2000 साल से भारतीय संस्कृति से जुड़ा भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की बात करें, तो ये करीब 2,000 साल पुराने माने जाते हैं। प्राचीन काल से भारतीय व्यापारियों, हिंदू और बौद्ध संस्कृति का इंडोनेशिया पर गहरा प्रभाव रहा है। आज भी इंडोनेशिया के बाली और जावा में रामायण और महाभारत पर आधारित नृत्य-नाटक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रचलित हैं। वहां 85% मुस्लिम आबादी होने के बाद भी 20 हजार रुपिया के नोट पर भगवान गणेश की फोटो छपी थी। इसके अलावा भी कई ऐसे प्रतीक है, जिसमें भारतीय संस्कृति की छाप मिलती है। भारत का इंडोनेशिया पर कभी शासन नहीं रहा, फिर भी पहुंची संस्कृति PM मोदी का 102वां विदेश दौरा, तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे पीएम मोदी का यह 102 वां विदेश दौरा है। वहीं वह तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे हैं। उनका पहला दौरा मई 2018 में हुआ था। इसके बाद मोदी सितंबर 2023 में जकार्ता में आयोजित 20वीं आसियान (ASEAN)-भारत और 18वीं ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने इंडोनेशिया पहुंचे थे। ———————– ये भी पढ़ें… मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, संसद को संबोधित किया:बोले- सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता, 5 भारतीयों से हुई इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सम्मान मिलने पर PM मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया। पूरी खबर पढ़ें…

Exclusive: रावण के अलावा रामायण का कोई और किरदार नहीं निभाना चाहते आशुतोष राणा, वजह जान दंग रह जाएंगे आप

Exclusive: अपने नए Durlabh Darshan को लेकर आशुतोष राणा बेहद एक्साइटेड है। ये प्रोजेक्ट उन्होंने प्रोड्यूसर प्रशांत मिश्रा और फिल्म राइटर आलोक श्रीवास्तव के साथ मिलकर बनाया और लॉन्च किया। इस प्रोजेक्ट को लेकर एक्टर ने कहा कि जहां धर्म और विज्ञान दोनों मिल जाते हैं, वह दुर्लभ दर्शन है। वहीं अपने रावण के किरदार को लेकर भी उन्होंने खुलकर बात की है। बताया क्यों वह रावण का रोल करना पसंद करते हैं।

रावण का किरदार है खास

अशुतोष राणा से जब हमें पूछा कि रामायण में उन्होंने रावण के किरदार को क्यों चुना और रावण के अलावा वह किस किरदार को निभाने में दिलचस्पी रखते? इस सवाल का जवाब उन्होंने बिना देर किए दे दिया। एक्टर ने कहा कि रावण के अलावा में किसी और किरदार को नहीं निभाना चाहता हूं। रावण अपने आप में बहुत दिलचस्प किरदार है। वहीं उसके दोनों हाथ में लड्डू हैं। उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि रावण के लिए खुद नारायण वैकुंठ से आए। वहीं वध के बाद उसे वैकुंठ मिला…और अगर वध न होता तो शिव भक्ति के चलते कैलाश में स्थान मिल जाता।

दुर्लभ दर्शन में क्या खास?

आप एक जगह बैठ कर ही देश के प्रसिद्ध मंदिरों का दर्शन एवं वहां होने वाले समस्त पूजा-अनुष्ठान देख पाएंगे, और वह भी मंदिर में अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति जैसे अनुभव के साथ। दुर्लभ दर्शन द्वारा तैयार की गई विशेष 6D VR टेक्नोलॉजी के जरिए यह सब अनुभव संभव हो पाएगा। दुर्लभ दर्शन, आशुतोष राणा के साथ मिल कर, विश्व के पहले 100 से अधिक 6D अनुभव वाले केंद्र खोलेगा। फिलहाल इस सुविधा का आनंद देश के ग्यारह प्रसिद्ध मंदिरों में लिया जा सकेगा। विशेष बात यह होगी कि इस वर्चुअल रियलिटी में आप 3D दृश्य के साथ-साथ मंदिर के वातावरण में मौजूद जल, वायु और सुगंध की भी हूबहू अनुभूति कर सकेंगे।

सस्ते दामों में उपलब्ध

आपको ये दुर्लभ दर्शन आसानी से 11 शहरों में मिल जाएंगे- श्री काशी विश्वनाथ, Varanasi, श्री महाकालेश्वर, उज्जैन, मां वैष्णो देवी, राजद्वार पार्क , हनुमान गढ़ी , अयोध्या, पावन धाम , हरिद्वार, मां महालक्ष्मी मंदिर, नागपुर, ISKCON मंदिर , कैलाश दिल्ली, नीलकंठ धाम , गुजरात, मां बगलामुखी नलखेड़ा, मां शारदा शक्तिपीठ मैहर, मां भद्रकाली शक्तिपीठ, कुरुक्षेत्र , ityadi। वहीं दाम की बात करें तो अयोध्या में 3D- 200 रुपए और 6D-300 रुपए में उपलब्ध है। जबकि बाकी जगह 3D- 150 रुपए और 6D-250 रुपए में उपलब्ध है।

Alia Bhatt-Ranbir Kapoor: सीता बनीं आलिया…राम के किरदार में दिखेंगे रणबीर कपूर, ‘रामायण’ को मॉर्डन और ट्रेडिशनल अंदाज़ में पेश करने जा रहा कपल

Alia Bhatt-Ranbir Kapoor: 2026 ‘रामायण’ की कहानियों और किरदारों का साल होने वाला है। वजह है इस साल दो बड़ी फ़िल्में का इस पर बेस्ड होना। एक तरफ नितेश तिवारी की ‘रामायणम्’ और YRF की ‘ऐल्फा’। दिलचस्प बात यह है कि असल ज़िंदगी के पति-पत्नी रणबीर कपूर और आलिया भट्ट इन फ़िल्मों में भगवान राम और सीता के किरदारों को बखूबी निभा रहे हैं।

अप्रैल में, “रामायणम् पार्ट 1” का पहला टीज़र रिलीज़ हुआ था, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में नज़र आए थे। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में ए.आर. रहमान और हंस ज़िमर का म्यूजिक है। इसमें साई पल्लवी सीता के रोल में, यश रावण के रोल में, रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में और सनी देओल भगवान हनुमान के रोल में हैं। यह फ़िल्म दिवाली पर रिलीज़ होगी।

लेकिन कपूर के भगवान राम के तौर पर दिखने से पहले, उनकी लवली वाइफ आलिया भट्ट मॉडर्न-डे सीता के रोल में 3 जुलाई, 2026 को “ऐल्फा” के साथ सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली हैं। शिव रावेल की फ़िल्म “ऐल्फा” का पहला ट्रेलर न सिर्फ़ आलिया भट्ट के किरदार की बैकस्टोरी के बारे में और जानकारी देता है, बल्कि इसमें “रामायण” से जुड़े कई सीधे कनेक्शन भी मिलते हैं।

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सबसे पहले तो, भट्ट के किरदार का नाम सीता है और उनकी मां का नाम जानकी बताया गया है। जानकी, सीता का ही दूसरा नाम है, क्योंकि वह मिथिला के राजा जनक की गोद ली हुई बेटी थीं। ट्रेलर में आगे बताया गया है कि भट्ट के किरदार ‘सीता’ को भी बॉबी देओल का किरदार उनके माता-पिता से दूर ले जाता है और उन्हें अपने गुप्त “ऐल्फा” प्रोग्राम के लिए ट्रेनिंग देता है।

ये हिंट कहानी को इन समानताओं से आगे ले जाकर एक मॉर्डन, फेमिनिस्ट मोड़ देते हैं। रामायण में, भगवान हनुमान ने ही अशोक वाटिका में माता सीता से मिलने के दौरान रावण की लंका में आग लगाई थी। “ऐल्फा” फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है कि आलिया भट्ट यानी सीता खुद ही अपनी रक्षक बनती हैं। ट्रेलर में उनका डायलॉग है, “सीता खुद लंका में आग लगाने आई हैं,” और साथ ही वह अकेले ही बुरे लोगों की पिटाई करती हैं और एक ठिकाने को तबाह कर देती हैं। एक और सीन में वह कहती हैं, “अग्निपरीक्षा शुरू करो,” जो उस “अग्निपरीक्षा” की ओर इशारा है जिससे रावण द्वारा अपहरण किए जाने के बाद अपनी पवित्रता साबित करने के लिए सीता को गुजरना पड़ा था।

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दिलचस्प बात यह है कि जब “रामायण” के लिए कास्टिंग का ऐलान हुआ था, तो कई फैंस ने सोचा था कि आलिया भट्ट को सीता के रोल के लिए क्यों नहीं चुना गया, क्योंकि वे कलाकार शादीशुदा थे और उन्होंने “ब्रह्मास्त्र” में शिव और ईशा का किरदार निभाया था।

इसके अलावा, आलिया भट्ट ने “रामायण” और “महाभारत” दोनों की महिलाओं के प्रति अपनी दिलचस्पी के बारे में खुलकर बात की है। कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में, एक्ट्रेस ने चित्रा बनर्जी दिवाकरुनी की किताब “पैलेस ऑफ़ इल्यूज़न्स” की तारीफ़ की थी। यह किताब द्रौपदी के नज़रिए से “महाभारत” की कहानी को नारीवादी नज़रिए से दोबारा कहती है।

2024 में, जब आलिया ने मेट गाला के रेड कार्पेट पर वॉक किया, तो लिली सिंह के बुक क्लब ने उनकी खास सब्यसाची साड़ी की तुलना “द फॉरेस्ट ऑफ़ एनचैंटमेंट्स” के कवर से की। यह किताब दिवाकरुनी ने सीता के नज़रिए से “रामायण” को नए ढंग से पेश करते हुए लिखी थी। लेखिका ने अपनी स्टोरीज़ में वह तस्वीर भी शेयर की थी। “अल्फा” के टीज़र लॉन्च के दौरान भी, एक्ट्रेस ने इस किताब पर आधारित फ़िल्म बनाने में अपनी दिलचस्पी के बारे में बात की। वहीं राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन आलिया का रामयण स्पेशल साड़ी पहनना भी लोगों को खूब भाया था।

यह पहली बार नहीं है जब “ब्रह्मास्त्र” की एक्ट्रेस ने “सीता” नाम का किरदार निभाया है। राजामौली की ‘RRR’ में भी उनके किरदार का नाम “सीता” ही था। उस फ़िल्म में वह अपने मंगेतर सीताराम राजू (राम चरण) से अलग हो जाती हैं, क्योंकि वह अपने मरते हुए पिता से किए वादे को पूरा करने के लिए एक अंडरकवर मिशन पर चले जाते हैं। लेकिन जहाँ ‘RRR’ में उनके किरदार को स्क्रीन पर बहुत कम समय मिला था, वहीं “अल्फा” फ़िल्म आलिया भट्ट और उनके “सीता” वाले किरदार को वह अहमियत देने जा रही है जिसके वे हकदार हैं।

कुल मिलाकर, 2026 वह साल बनने जा रहा है जब रणबीर कपूर और आलिया भट्ट हमें एक ही महाकाव्य कहानी के पारंपरिक और आधुनिक वर्जन देखने को मिलेंगे।