Mojtaba Khamenei: इस डर की वजह से पिता अली खामेनेई के जनाजे में शामिल नहीं होंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा! ईरान से आया बिग अपडेट

Mojtaba Khamenei: ईरान से एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे में सार्वजनिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम है। इस फैसले के पीछे सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं और संभावित हमलों का डर बताया जा रहा है क्योंकि इस समय इजरायल के साथ तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मोजतबा खुद जनता से मिलना चाहते हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें ऐसा न करने की सख्त सलाह दे रही हैं।

तेहरान के लिए रवाना होने से पहले इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बातचीत करते हुए इलाही ने कहा कि मैं पिछले हफ्ते ईरान में था और मेरे कुछ दोस्तों से मिला जिन्होंने मोजतबा से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि मोजतबा बाहर आना चाहते हैं और लोगों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह बेहद खतरनाक है और वे उनके लिए सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकते। मुझे लगता है कि वह बाहर नहीं आएंगे।

कड़े सुरक्षा पहरे के बीच होगा अंतिम संस्कार

अली खामेनेई के जनाजे में हजारों शोककुल लोगों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के तेहरान पहुंचने की उम्मीद है। यह समारोह इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए एक धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षण बनने जा रहा है। इस साल की शुरुआत में ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के बीच हुए युद्ध के बाद से सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। संभावित जवाबी कार्रवाई या टारगेटेड अटैक्स की आशंकाओं को देखते हुए अधिकारियों द्वारा अंतिम संस्कार के जुलूस के आसपास व्यापक सुरक्षा बल तैनात किए जाने की उम्मीद है।

इलाही ने बताया कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान में माहौल बेहद भावुक है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक बहुत-बहुत बड़ा नुकसान है। उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी आत्मा, अपने प्राण खो दिए हैं। उनका मानना है कि कोई भी उनकी जगह नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान और विदेशों से समर्थक दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए यात्रा कर रहे हैं। वे एकजुटता दिखाने और यह कहने आ रहे हैं कि हम आपके साथ हैं, हम आपको कभी नहीं भूलेंगे और आपके रास्ते पर चलेंगे।

मोजतबा की पब्लिक अपियरनेंस नहीं होने पर उठ रहे सवाल

मोजतबा खामेनेई की संभावित अनुपस्थिति से उनकी स्थिति और उनके अधिकार को लेकर कयासबाजी और तेज होने की संभावना है। 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल हवाई हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाया गया था। तब से वह लोगों के बीच से दूर रहे हैं। हालांकि उन्होंने एक दर्जन से अधिक लिखित संदेश जारी किए हैं और आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है लेकिन अभी तक उनकी कोई भी प्रमाणित सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जिस हवाई हमले में खामेनेई परिवार के कई सदस्य और मोजतबा की पत्नी जहरा हदाद अदेल मारी गई थीं, उसी हमले में मोजतबा खुद भी घायल हो गए थे। उनकी इस लंबी अनुपस्थिति ने राजनयिक और खुफिया हलकों में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा स्थिति दोनों को लेकर अटकलों को हवा दी है। अगर वह अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं होते हैं तो उनके नेतृत्व और सार्वजनिक वैधता पर सवाल और गहरे हो सकते हैं।

आपको बता दें कि अपने पिता के विपरीत मोजतबा खामेनेई ने अपने करियर का अधिकांश समय पर्दे के पीछे बिताया है। अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बनने से बहुत पहले ही एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति थे। उन्होंने 1989 में देश का सर्वोच्च पद संभालने से पहले 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। इसके उलट मोजतबा ने कभी भी औपचारिक रूप से कोई सरकारी पद नहीं संभाला है। विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के कार्यालय के भीतर एक प्रभावशाली भूमिका निभाई और शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ करीबी संबंध बनाए रखे।

साल 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था और उन पर ईरान के कट्टरपंथी क्षेत्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि उन्होंने ईरान के बाहरी ऑपरेशन्स और आंतरिक सुरक्षा तंत्र का समर्थन करने के लिए कुद्स फोर्स और बासिज मिलिशिया के साथ मिलकर काम किया था। उनका नाम ईरान के राजनीतिक विवादों में भी बार-बार सामने आया है।

क्या मोजतबा कायम कर पाएंगे पिता जैसा दबदबा?

भले ही मोजतबा सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विश्लेषक इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि क्या वह अपने पिता जैसा प्रभाव हासिल कर पाएंगे। खुफिया आकलनों का हवाला देने वाली ब्लूमबर्ग की एक जांच के मुताबिक मोजतबा ने तेल राजस्व और अपतटीय निवेशों से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से पर्याप्त संपत्ति और प्रभाव बनाया है। कई जानकारों का तर्क है कि संस्थागत शक्ति सीधे तौर पर व्यक्तिगत अधिकार में नहीं बदल जाती। यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के प्रोफेसर थॉमस जूनो ने कहा कि मोजतबा के पास अभी भी उस कद की कमी है जो उनके पिता ने दशकों में बनाया था। जूनो ने कहा कि मोजतबा खामेनेई की भूमिका अभी अस्पष्ट है। इस मोड़ पर इसकी संभावना बहुत कम है कि उनके पास उतना प्रभाव हो जितना उनके पिता का हुआ करता था।

तनाव के बावजूद ईरान जता रहा है भरोसा

जब इलाही से इजरायल की ओर से मिल रही नई धमकियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य तनाव के बावजूद ईरान मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई देश ईरान की तारीफ कर रहे थे और कह रहे थे कि ईरान युद्ध जीत गया। ईरान अब भी बहुत मजबूत है और डटने के लिए तैयार है। फिलहाल सभी की निगाहें तेहरान पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई ईरान के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के इस सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आखिरकार सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं या नहीं।

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मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर, ईरान ने फिर बंद किया हॉर्मुज, आखिर क्यों लिया ये फैसला?

Iran closed the Strait of Hormuz due to a ceasefire violation

Iran closes the Strait of Hormuz again : मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, ईरान ने सीजफायर उल्लंघन के चलते एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद कर दिया है। ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान का कहना है कि अमेरिका के भरोसा तोड़ने और लेबनान में इसराइल के युद्धविराम का उल्लंघन करने के कारण होर्मुज को बंद किया गया है। ईरानी सेना का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल ने हमला किया है, जो कि युद्धविराम का लगातार उल्लंघन है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद दोनों देशों ने होर्मुज को खोलने का निर्णय लिया था। अब ईरान के इस फैसले ने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है।

 

मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर सामने आई है। खबरों के अनुसार, ईरान ने सीजफायर उल्लंघन के चलते एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद कर दिया है। ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान का कहना है कि अमेरिका के भरोसा तोड़ने और लेबनान में इसराइल के युद्धविराम का उल्लंघन करने के कारण होर्मुज को बंद किया गया है।

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ईरानी सेना ने किया यह दावा

ईरानी सेना का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल ने हमला किया है, जो कि युद्धविराम का लगातार उल्लंघन है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के बाद दोनों देशों ने होर्मुज को खोलने का निर्णय लिया था। अब ईरान के इस फैसले ने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है।

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ईरान ने दी यह चेतावनी 

ईरान की जॉइंट मिलिट्री कमांड ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर आक्रामकता जारी रहती है तो आगे के कदम उठाने की योजना बनाई गई है। ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने संकेत दिया कि जब तक ईरान को यह महसूस नहीं होता कि अमेरिका समझौते का पालन कर रहा है, तब तक शायद ही कुछ हो पाएगा।

 

लेबनान पर इसराइली हमलों में 16 लोगों की मौत 

बाघेई ने कहा, अंतिम समझौते के लिए बातचीत तभी शुरू होगी, जब लेबनान में लड़ाई खत्म करने सहित मुख्य वादों को पूरा किया जाएगा। शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर हुए इसराइली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 2 बच्चे भी शामिल थे।

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ईरानी सेना के दावे पर क्‍या बोले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस?

वहीं दूसरी ओर ईरानी सेना के दावे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान भी सामने आया है। वेंस का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान होर्मुज को बंद कर रहा है। उपराष्ट्रपति वेंस का कहना है कि ईरान पर बातचीत के लिए आने वाले दिनों में उनके स्विट्जरलैंड जाने की उम्मीद है।

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नेतन्याहू बोले- लेबनान से पीछे नहीं हटेगी ईरानी सेना

इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ किया है कि ईरान की सेना लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच 111 दिनों की जंग के बाद युद्ध समाप्त करने को लेकर 14 बिंदुओं का समझौता हुआ है। इसे इस्लामाबाद समझौते का नाम दिया गया है। इस समझौते में इसराइल शामिल नहीं है। ऐसे में ईरान की तरफ से होर्मुज को एक बार फिर बंद किए जाने का फैसला क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है।
Edited By : Chetan Gour

फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

ईरान ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है। ईरान ने कहा कि 18 जून को अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते के तहत इस अहम जलमार्ग से कमर्शियल शिपिंग जारी है। सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इन दावों को “बेबुनियाद” और गलत बताया।

बघाई ने स्ट्रेट के बंद होने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि MoU पर हस्ताक्षर के बाद, तेहरान ने सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही “फिलहाल सामान्य रूप से चल रही है”।

दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि ईरान की नौसेना ने अचानक एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान कर दिया। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह बंद कर दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने साफ कहा है कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाता और अमेरिका इस इलाके को खाली नहीं करता, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा।

दावा- ईरान ने दी थी खुली धमकी!

इसमें बताया गया कि समुद्री रेडियो चैनलों पर ईरान के सबसे खतरनाक सैन्य संगठन इरेक्ट (IRGC – इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने एक बयान जारी कर अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच बुधवार को जो समझौता हुआ था, अमेरिका उसका पालन नहीं कर रहा है।

ईरानी सेना ने सख्त लहजे में चेतावनी दी, “क्योंकि लेबनान से इजरायल की वापसी, समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना और अमेरिकी आतंकवादी ताकतों का फारस की खाड़ी से बाहर निकलना हमारी मुख्य शर्तें थीं, इसलिए जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद रहेगा। सभी जहाजों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए इस रास्ते के पास न आएं। अगर किसी भी जहाज ने इस आदेश को मानने से इनकार किया, तो उसे सीधे निशाना बनाया जाएगा (यानी उड़ा दिया जाएगा)।”

आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी इसे बंद कर दिया गया था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान पर पहुंच गए थे।

लेबनान पर इजरायल के हमले से नाराज हुआ ईरान!

बताया गया कि ईरान के इस गुस्से के पीछे इजरायल का लेबनान पर किया गया ताजा हमला है। अमेरिका-ईरान डील के तहत यह माना जा रहा था कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी जंग रुक जाएगी। लेकिन कल आधी रात से इजरायल ने लेबनान के 11 शहरों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 33 घायल हो गए।

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि उनकी सेना “जब तक जरूरी होगा” लेबनान में ही रहेगी। वहीं, इजरायल के धुर दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन ग्विर ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि “पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए।” इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह किसी मामूली पागल का बयान नहीं है, बल्कि इजरायली सरकार के सुरक्षा मंत्री की सोच है। तेल अवीव (इजरायल) में बैठी यह सरकार पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसका मकसद सिर्फ स्थायी युद्ध (Permanent War) करना है।”

अमेरिका का दावा: “हमने तो रास्ता खोल दिया था”

दूसरी तरफ, अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को ही ऐलान किया था कि उसने पिछले दो महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। ऐसे में अमेरिका के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि ईरान किस अधूरी नाकाबंदी की बात कर रहा है।

यहां तक कि समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाली एजेंसी ‘AXSMarine’ के मुताबिक, इस समझौते के तुरंत बाद गुरुवार को रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजरे थे, जो पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी संख्या थी। लेकिन अब ईरान के इस नए कदम ने पूरी दुनिया को एक बार फिर महायुद्ध और भयंकर आर्थिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

“मुझसे फोटो के लिए गिड़गिड़ाई थीं मेलोनी”… ट्रंप के दावे पर भड़कीं इटली की पीएम, कहा- ‘हम कभी भी भीख नहीं मांगते’

अभी कुछ ही दिन पहले फ्रांस के एवियान (Evian) में हुए G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) (15 से 17 जून) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन अब इस दोस्ती में बहुत बड़ा धमाका हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर दिया कि जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा “भीख मांगी थी” (Begged)। इस दावे के बाद मेलोनी काफी ज्यादा भड़क गई हैं और उन्होंने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप का विवादित दावा: “तरस खाकर खिंचवाई फोटो”

इटली के एक न्यूज चैनल ‘La7 TV’ को दिए फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही धुन में मेलोनी का मजाक उड़ाते हुए कहा, “वह शायद खुश होंगी कि मैंने उनसे बात की, जबकि मुझे उनसे बात करने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने मेरे साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए मुझसे भीख मांगी थी। वह मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए इतनी बेताब थीं कि पूछिए मत। मैं तो फोटो नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया, इसलिए मैं मान गया।”

मेलोनी का पलटवार: “ईश्वर गवाह है, इटली कभी भीख नहीं मांगता!”

ट्रंप के इस बयान के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

मेलोनी ने वीडियो में साफ-साफ कहा, “डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा है। मैं सच में उनके इस व्यवहार से हैरान हूं। मुझे नहीं पता कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों करते हैं; वैसे यह कोई पहली बार नहीं है।”

मेलोनी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ट्रंप की दुखती रग पर हाथ रखते हुए आगे कहा, “बड़े दुख की बात है कि ट्रंप अपनी यह आक्रामकता और तेवर पश्चिमी देशों या अमेरिका के असली दुश्मनों के खिलाफ नहीं दिखाते, बल्कि उनके सामने तो वह बेहद नरम पड़ जाते हैं। खैर, उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए: मैं और मेरा देश इटली, कभी किसी के आगे भीख नहीं मांगते।”

इटली में भारी गुस्सा: डिप्टी पीएम ने रद्द किया अमेरिका दौरा

ट्रंप की इस टिप्पणी से पूरे इटली के नेताओं में गुस्सा उबल पड़ा है। इसे पूरे देश का अपमान माना जा रहा है।

इटली के डिप्टी पीएम एंटोनियो तायानी ने गुस्से में अपना 21 और 22 जून का अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रंप के ये शब्द पूरे इटली का अपमान हैं, इसलिए मैं अमेरिका नहीं जा रहा।”

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा, “मैं तो बंदूक की नोक पर भी मेलोनी को किसी से फोटो के लिए भीख मांगते नहीं देख सकता। मेलोनी ने इटली और यूरोप के भले के लिए ट्रंप की पुरानी कड़वी बातों को भुलाकर उनसे मुलाकात की थी, लेकिन ट्रंप ने फिर से अपनी खराब तहज़ीब (Lapse in style) दिखा दी।”

कभी पक्के दोस्त थे, अब क्यों आई इतनी कड़वाहट?

आपको बता दें कि जॉर्जिया मेलोनी कभी डोनाल्ड ट्रंप की बहुत बड़ी समर्थक हुआ करती थीं। यहां तक कि साल 2025 में जब ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो मेलोनी उस समारोह में शामिल होने वाली अकेली यूरोपीय नेता थीं।

लेकिन फिर रिश्ते क्यों बिगड़े?

दरअसल ट्रंप ने ईसाई धर्मगुरु पोप लियो (Pope Leo) पर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे मेलोनी नाराज हो गईं। इस साल शुरू हुए ईरान युद्ध को लेकर दोनों के विचार बिल्कुल अलग हो गए और मेलोनी ने ट्रंप से दूरी बना ली।

हालांकि, इस G7 समिट में दोनों ने पैच-अप (रिश्ते सुधारने) की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप के इस एक बयान ने दोनों देशों के बीच एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

 

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक खास पोस्ट के जरिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका की मजबूरी की वजह से हुआ है। खामेनेई ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा कि आपको बताया गया है, ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”

उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ही इसके लिए सबसे ज्यादा जोर डाला था। खामेनेई के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही मजबूरी में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।”

बता दें कि समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान किए गए। यह कार्यक्रम G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुआ था। मैक्रों ने X पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता “स्थायी शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति देता है।”

औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाला था। हालांकि, तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।

अमेरिका-ईरान समझौते में क्या कहा गया है?

इस दस्तावेज का औपचारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात कही गई है।

इसकी शर्तों के तहत, अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस दौरान जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगी। अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटाने पर भी सहमत हो गया है।

वहीं, ईरान ने भी कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति जताई है।

बता दें कि संधि पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, दोनों पक्षों के पास व्यापक अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय है।

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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पर अमेरिकी जांच, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल तेज

Mojtaba Khamenei iran new supreme leader

अमेरिका के न्याय विभाग (US Department of Justice) ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच शुरू की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जांच उन आरोपों पर केंद्रित है जिनमें दावा किया गया है कि खामेनेई ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ा निवेश पोर्टफोलियो तैयार किया। इसमें वॉल स्ट्रीट के प्रमुख बैंकों में भी निवेश शामिल था।

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियां खामेनेई से जुड़ी कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की समीक्षा कर रही हैं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि क्या किसी अमेरिकी वित्तीय संस्थान ने इन लेन-देन को सुविधाजनक बनाने में कोई भूमिका निभाई थी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन बैंकों की गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है, उनमें JPMorgan Chase और Citigroup जैसे बड़े अमेरिकी बैंक शामिल हैं। 

 

हालांकि, जांच शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि खामेनेई के खिलाफ आपराधिक आरोप तय कर दिए गए हैं। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह इस पूरी जांच के मुख्य केंद्र में बने हुए हैं।

 

मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता उस समय बने थे, जब उनके पिता और तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा देश की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखते हैं।

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इस बीच, अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। हालांकि, इसी महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि मोजतबा खामेनेई जीवित हैं और ईरान के नेतृत्व संबंधी मामलों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। Edited by : Sudhir Sharma

दुनिया देखती रह गई और पाकिस्तान बन गया ‘किंगमेकर’! शहबाज शरीफ ने किया अमेरिका और ईरान ‘मेगा डील’ का ऐलान

US Iran Sign Islamabad MoU: खाड़ी में सीजफायर के बीच दुनिया के लिए एक और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को खत्म करने के लिए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अब यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है।

इस ऐतिहासिक शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि, ‘इस समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा, वहीं अमेरिका भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘तुरंत’ हटा लेगा’।

शहबाज शरीफ और कतर की मध्यस्थता से हुई डील

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने X पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर आज इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इस पर दस्तखत किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं’।

शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान, सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह की मेजबानी करेगा, जहां तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में शांति, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि की एक मजबूत नींव बताया।

ट्रंप ने वर्साय के महल में किए दस्तखत

व्हाइट हाउस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने वाले इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ वर्साय के महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वर्साय से रवाना होते समय ट्रंप ने खुद पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘यह साइन हो चुका है… मैंने वर्साय में इस पर दस्तखत किए हैं।’ हालांकि, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने इसका उल्लंघन किया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी के लिए अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी में मौजूद रहेगी।

ईरान ने भी की पुष्टि, लेबनान को लेकर हुआ बड़ा फैसला

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इर्ना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी समझौते के फाइनल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारियों के दस्तखत के बाद अब इस समझौते को लागू करने की परीक्षा है।

समझौते की ये है मुख्य बातें:

  1. ईरान ने साफ किया कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना और सीजफायर उनकी प्राथमिकता है। इस समझौते के शुरुआती क्लॉज में लेबनान का तीन बार जिक्र है और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है।
  2. समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत का दौर चलेगा।
  3. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।

ईरानी संसद के स्पीकर बोले- ‘हमारा हाथ ट्रिगर पर है’

भले ही समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हों, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका को लेकर अभी भी भारी अविश्वास है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने वाशिंगटन के प्रति गहरा संदेह जताते हुए कहा, ‘अमेरिका पर मेरा अविश्वास सबसे ज्यादा है। भले ही यह समझौता फाइनल हो जाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इसे मंजूरी दे दे, फिर भी अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है’।

होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, ‘ईरान के वहां संप्रभु अधिकार हैं और स्वाभाविक रूप से हम सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे। हमारा हाथ अभी भी ट्रिगर पर है।’

पीएम शरीफ ने इन नेताओं का जताया आभार

शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील तक पहुंचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शुक्रिया अदा किया। इसके अलावा उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र के नेतृत्व और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अथक प्रयासों की सराहना की।