एक साल में 8 लाख रुपये से सीधे 25 लाख का हो गया पैकेज! टेक प्रोफेशनल ने बताया 1 साल में कैसे 3 गुना बढ़ी सैलरी

कई प्रोफेशनल्स अपनी सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद में सालों बिता देते हैं, लेकिन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए, सिर्फ़ 12 महीनों में करियर से जुड़े कुछ फैसलों ने उनकी सैलरी में जबरदस्त बढ़ोतरी कर दी। रेडिट पर अपनी कहानी शेयर करते हुए, इस टेक प्रोफेशनल ने बताया कि कैसे नई नौकरी के लिए दूसरी जगह जाने के मुश्किल फैसले ने आखिरकार उनकी सालाना कमाई को लगभग तीन गुना करने में मदद की।

करीब 5 साल के अनुभव वाले जावा फुल स्टैक डेवलपर, इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) में ‘निंजा’ प्रोफ़ाइल के साथ की थी। पीछे मुड़कर देखने पर, उन्होंने अपने पहले प्रोजेक्ट को जावा, स्प्रिंग बूट, AWS, एंगुलर और पायथन जैसी टेक्नोलॉजीज़ का अनुभव दिलाने का श्रेय दिया।

एक ही प्रोजेक्ट पर लगभग चार साल बिताने और बेहतरीन परफॉर्मेंस रेटिंग पाने के बावजूद, उन्हें लगा कि उनकी सैलरी में बढ़ोतरी सीमित ही रही। अपनी रेडिट पोस्ट में उन्होंने लिखा, “लेकिन डिजिटल एग्ज़ाम (विंग्स 1) पास करने और अच्छे बैंड (A – 2022, B – 2023, A – 2024) पाने के बाद भी, मेरा CTC सिर्फ़ 7.8 LPA था।”

जुलाई 2025 में जब उन्होंने अपनी पहली नौकरी बदली, तब उनकी ज़िंदगी में एक अहम मोड़ आया। उस समय उनके पास कई ऑफ़र थे। एक ऑफ़र में रिमोट वर्क (घर से काम करने) की सुविधा थी, लेकिन सैलरी कम थी। दूसरे ऑफ़र में सबसे ज़्यादा पैकेज मिल रहा था, लेकिन उसके लिए बेंगलुरु जाना ज़रूरी था। तीसरा ऑफ़र घर के पास था और उसमें बेंगलुरु वाली नौकरी से थोड़ी कम सैलरी मिल रही थी।

वे खुद को इंट्रोवर्ट मानते थे, इसलिए किसी नए शहर में बसने का विचार उन्हें ज्यादा उत्साहित नहीं कर रहा था। उन्होंने माना कि वे सुरक्षित विकल्प चुनने की सोच रहे थे, लेकिन तभी एक कलीग ने उन्हें लंबे समय के फायदों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने लिखा, “मैं आखिरी वाला ऑफर एक्सेप्ट करने की सोच रहा था, क्योंकि एक इंट्रोवर्ट होने के नाते, मुझे नए दोस्त बनाने में मुश्किल होती है और मुझे दूसरी जगह बसना बिल्कुल पसंद नहीं था।” “लेकिन मेरे एक कलीग ने मुझसे कहा कि मुझे बेंगलुरु वाला ऑफर स्वीकार कर लेना चाहिए और वहां चले जाना चाहिए, क्योंकि यह मेरे करियर के लिए बेहतर होगा।”

Increased my salary by 3x within the span of an year

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आखिरकार उन्होंने उस सलाह को माना और बेंगलुरु चले गए। उन्होंने बताया कि यह बदलाव उम्मीद से कहीं बेहतर रहा। उन्हें बजट के अंदर रहने की जगह मिल गई, नए दोस्त बने और वे शहर की ज़िंदगी में घुल-मिल गए। करीब छह महीने तक सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा। लेकिन, जल्द ही लागत कम करने के उपायों का असर उनकी टीम पर पड़ा। कई साथियों को प्रोजेक्ट से हटा दिया गया, जबकि एक और साथी का काम खत्म हो गया। इन हालात ने उन्हें फिर से नए मौकों की तलाश शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

उन्हें सबसे पहले एक फिनटेक कंपनी से ऑफर मिला, जिसके लिए उन्होंने एक ही दिन में इंटरव्यू के सभी राउंड पास कर लिए थे। हालांकि, सैलरी में जो बढ़ोतरी ऑफर की गई थी, वह उनके मौजूदा पैकेज से सिर्फ़ 22% ज़्यादा थी। अपने नोटिस पीरियड के दौरान, वे कई कंपनियों के साथ इंटरव्यू देते रहे, जिनमें फिलिप्स, डेल्टा एयरलाइंस, AMEX GBT और दूसरी सर्विस-बेस्ड कंपनियां शामिल थीं। जहां AMEX GBT ने 50% बढ़ोतरी का ऑफर दिया, वहीं डेल्टा एयरलाइंस ने 75% बढ़ोतरी की उनकी मांग को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि यह कंपनी के बजट से बाहर है।

आखिरकार, उन्होंने AMEX GBT का ऑफर स्वीकार कर लिया और इसी महीने कंपनी जॉइन कर ली। अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए, डेवलपर ने कहा कि उन्होंने TCS में 3.3 LPA के पैकेज के साथ अपना करियर शुरू किया था। समय के साथ, लगातार अच्छा प्रदर्शन और स्किल्स में सुधार की वजह से उनका पैकेज बढ़कर 7.8 LPA हो गया। हालांकि, कंपनी बदलने और दूसरी जगह जाकर काम करने के लिए तैयार होने के बाद उन्हें बड़ी बढ़त मिली। बाद में उन्होंने कमेंट सेक्शन में बताया, “मेरा मौजूदा CTC 24.8 LPA है।”

60% सैलरी हाइक के ऑफर पर जॉब बदलने में इस शख्स ने की ऐसी गलती कि अब पछता रहा! Job स्विच करते वक्त आप भी रखें ये ख्याल

आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में जब भी किसी को बड़ी सैलरी हाइक का ऑफर मिलता है तो वह बिना ज्यादा सोचे-समझे तुरंत कंपनी बदल लेता है। सवाल ये है कि क्या सिर्फ भारी-भरकम पैकेज देखकर नौकरी बदलना हमेशा सही होता है? बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल के सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विषय पर इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। सनी कुमार नाम के एक शख्स ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। ये काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने एक दोस्त की आपबीती सुनाते हुए दावा किया है कि आज के दौर में किसी छोटी कंपनी में ज्यादा सैलरी पाने से बेहतर है कि आप किसी बड़ी कंपनी में थोड़ी कम सैलरी पर काम करें। आइए जानते हैं कि उनके दोस्त ने 60% हाइक के चक्कर में क्या गलती की और नौकरी बदलते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

60% हाइक का ऑफर और फिर लग गया बड़ा झटका

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 ने इस वायरल वीडियो पर डिटेल्ड रिपोर्ट की है। इसके मुताबिक सनी कुमार ने वीडियो में बताया कि उनका एक दोस्त पुणे में मास्टरकार्ड जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। वहां उसकी सैलरी अच्छी थी, वर्क प्रोफाइल पूरी तरह स्टेबल था और वह अपने करियर में काफी अच्छा कर रहा था। इसी बीच उसे एक कंसल्टेंसी फर्म से 60 फीसदी सैलरी हाइक का बड़ा ऑफर मिला। इतने बड़े पैकेज के लालच में आकर उसने मास्टरकार्ड की स्टेबल नौकरी छोड़ दी और नई कंपनी जॉइन कर ली।

6 महीने में ही पलट गई बाजी

सनी के मुताबिक यह फैसला उनके दोस्त के लिए सही साबित नहीं हुआ। नई कंसल्टेंसी कंपनी को जॉइन किए हुए अभी महज छह महीने ही हुए थे कि कंपनी के हाथ से वो प्रोजेक्ट ही फिसल गया जिसके लिए उनके दोस्त को हायर किया गया था। इसके तुरंत बाद कंपनी ने उसके दोस्त से कहा कि या तो वह खुद इस्तीफा दे दे या फिर उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

आईटी सेक्टर में अस्थिरता: सनी कुमार की सलाह

इस घटना का उदाहरण देते हुए सनी कुमार ने प्रोफेशनल्स को सलाह दी है कि वे सिर्फ बड़ा पे-चेक देखकर नौकरी बदलने से पहले दो बार जरूर सोचें। उन्होंने वीडियो में कहा कि अगर आप एक अच्छी और स्टेबल कंपनी में हैं, जहां आपकी सैलरी अच्छी है तो मेरा सुझाव यही होगा कि भले ही आपको 60-70% या 100% तक की हाइक भी क्यों न मिल रही हो, कम से कम अगले 6 महीने से एक साल तक जॉब स्विच न करें। इन दिनों आईटी सेक्टर काफी वोलटाइल यानी अस्थिर है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सनी कुमार का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर नौकरीपेशा लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने सनी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि जॉब सिक्योरिटी जरूरी है लेकिन मेट्रो शहरों की हकीकत भी देखनी होगी। यूजर ने लिखा कि कम सैलरी में मेट्रो शहर के कमरे का किराया और राशन का खर्च उठाना मुश्किल होता है। इसलिए किसी के बहकावे में आने के बजाय अपना फैसला खुद लें। मास्टरकार्ड अच्छी कंपनी है और हमें समझना चाहिए कि हर बार बात सिर्फ हाइक की नहीं, स्टेबिलिटी की होती है।

एक दूसरे यूजर ने कुमार के विचार का समर्थन करते हुए लिखा कि मैं हमेशा सुनिश्चित करता हूं कि जब भी जॉब बदलूं तो एक बड़ी कंपनी से दूसरी बड़ी कंपनी में ही जाऊं। मैं किसी छोटी कंपनी में नौकरी खोने का रिस्क और उसका रोज का तनाव नहीं झेल सकता।

दूसरा पक्ष: बड़ी कंपनियां भी नहीं हैं लेऑफ से सुरक्षित

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सनी के इस तर्क का विरोध किया कि बड़ी कंपनियां पूरी तरह सुरक्षित होती हैं। उन्होंने इसके लिए उदाहरण भी दिए। एक यूजर ने कमेंट किया कि कोई भी कंपनी सुरक्षित नहीं है।। मुझे बीती 15 जून को ही HSBC से लेऑफ (नौकरी से निकालना) कर दिया गया। दूसरे यूजर ने लिखा कि क्या गारंटी है कि मास्टरकार्ड से भी उसे नहीं निकाला जाता… आजकल बड़ी कंपनियां भी बहुत ज्यादा रीस्ट्रक्चरिंग कर रही हैं। एक तीसरे शख्स ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘निकाले तो आप बड़ी कंपनी से भी जा सकते हैं और छोटी से भी। अंतर बस इतना है कि छोटी कंपनी ने कम से कम वहां रहने के दौरान आपको 60% ज्यादा पैसे तो दिए।’

जॉब स्विच करते वक्त केवल कंपनी का साइज न देखें, इन बातों का रखें ख्याल

बहस के बीच एक यूजर ने बहुत ही काम की सलाह दी कि फैसला सिर्फ कंपनी के छोटे या बड़े होने के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि आज के दौर में कुछ अन्य महत्वपूर्ण चीजों का एनालिसिस करना जरूरी है:

SaaS कंपनियों से बचें: यूजर के मुताबिक इन दिनों SaaS (सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस) कंपनियों में जाने से बचना चाहिए। नौकरी बदलने से पहले कंपनी के ग्लोबल हेडकाउंट और भारत में उनके कर्मचारियों की संख्या की जांच करें। कंपनी का कुल रेवेन्यू कितना है और उसका नेट प्रॉफिट क्या है, इसकी जानकारी जरूर जुटाएं। कंपनी के भविष्य के प्लान क्या हैं और वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कितना निवेश कर रहे हैं, इन सभी पहलुओं को चेक करने के बाद ही कोई फैसला लें।

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Viral Post: ‘1.2 लाख कमाकर भी खुश नहीं…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुई टेक प्रोफेशनल की पोस्ट

Viral Post: अक्सर लोग सोचते हैं कि बड़े शहर में नौकरी और ज्यादा सैलरी का मतलब बेहतर जिंदगी होता है। वहीं हाल में ही एक टेक प्रोफेशनल ने सैलरी को लेकर किया गया पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि मुंबई में अच्छी सैलरी मिलने के बाद भी उनका काफी पैसा किराए, आने-जाने और रोजमर्रा के खर्चों में खर्च हो जाता था। इसके कारण वह न तो ज्यादा बचत कर पा रहे थे और न ही मन की शांति महसूस कर रहे थे। वहीं, अपने छोटे शहर में कम कमाई के बावजूद उन्हें ज्यादा सुकून और बेहतर जीवन का अनुभव हुआ। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

पोस्ट में व्यक्ति ने बताया कि, मुंबई में 1.2 लाख रुपये महीने कमाने के बावजूद उन्हें उतना सुकून नहीं मिला, जितना अपने छोटे शहर में 40,000 रुपये में मिलता था। व्यक्ति ने बताया कि, बड़ी सैलरी हमेशा बेहतर जीवन की गारंटी नहीं होती, क्योंकि बड़े शहरों में रहने का खर्च और तनाव भी उतना ही ज्यादा होता है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

X पर अपनी पोस्ट में शुभ जैन ने लिखा, “मेरे होमटाउन में 40 हजार रुपये की कमाई, मुंबई में 1.2 लाख रुपये की सैलरी से ज्यादा बेहतर महसूस होती थी। मैं मुंबई में काम कर रहा था और हर महीने करीब 1.2 लाख रुपये हाथ में मिलते थे। सच कहूं तो कागज पर ये रकम काफी शानदार लगती थी, लेकिन महीने के अंत तक यह शायद ही कभी छह अंकों वाली सैलरी जैसी महसूस होती थी।”

 

बताए अपने खर्चे

शुभ जैन के अनुसार, मुंबई में उनकी 1.2 लाख रुपये की सैलरी का बड़ा हिस्सा खर्चों में चला जाता था। 1 BHK फ्लैट का किराया 30,000 रुपये, घरेलू खर्च करीब 60,000 रुपये, हाउस हेल्प और लॉन्ड्री पर 3,000 रुपये तथा बिजली और इंटरनेट पर 3,000 रुपये खर्च होते थे। इसके अलावा, फूड डिलीवरी पर 7,000 रुपये, यात्रा पर 5,000 रुपये और वीकेंड आउटिंग पर करीब 8,000 रुपये खर्च हो जाते थे, जिससे महीने के अंत तक बचत काफी कम रह जाती थी।

मेंटली थका हुआ था

उन्होंने लिखा, “मजेदार बात यह है कि 1.2 लाख रुपये कमाने के बाद भी, इसका एक बड़ा हिस्सा चुपचाप टियर-1 शहर में रहने की लागत में चला जाता था।” जैन के अनुसार, बड़े शहरों की सुविधाएं कई बार अतिरिक्त खर्च का कारण बन जाती हैं। उन्होंने कहा, “खाना बनाना है? तो खाना ऑर्डर कर दो। किराने की दुकान दूर है? तो ब्लिंकिट से मंगा लो। काम के बाद बहुत थक गए? कैब बुक कर लो। हफ्ता तनाव भरा रहा? तो वीकेंड पर खर्च करके खुद को राहत दो।” उन्होंने लिखा,”लेकिन एक समय के बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं ज्यादा पैसा तो कमा रहा था, लेकिन मानसिक रूप से पहले से ज्यादा थका हुआ महसूस कर रहा था।”

घर पर मिल रही शांति

बड़े शहरों में नौकरी करने से करियर के बेहतर मौके मिलते हैं, लेकिन इसके साथ रहने का खर्च, लंबी यात्रा और व्यस्त लाइफस्टाइल जैसी चुनौतियां भी आती हैं। शुभ जैन ने बताया कि अपने होमटाउन लौटने के बाद उनकी मासिक आय घटकर करीब 40,000 रुपए रह गई, लेकिन इसके बावजूद उनकी जीवनशैली में पॉजिटिव बदलाव आया। उनका कहना है कि कम कमाई के बावजूद उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा सुकून, बेहतर संतुलन और मानसिक शांति महसूस होने लगी, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी अधिक आसान और आरामदायक हो गई। उन्होंने लिखा, “और सबसे अजीब बात यह है कि मैं यहां आकर सच में खुद को पहले से ज्यादा अमीर महसूस करने लगा!”

जैन ने साफ किया कि उनका मकसद किसी एक शहर को दूसरे से बेहतर बताना नहीं था। उन्होंने लिखा, “मैं ये नहीं कह रहा कि टियर-3 शहर, टियर-1 शहरों से बेहतर हैं। मुंबई ने मुझे प्रोफेशनल तौर पर आगे बढ़ने का मौका दिया, लेकिन मेरे होमटाउन ने मुझे फिर से जिंदगी को करीब से महसूस करना सिखाया।” जैन ने अंत में कहा,”एक समय पर मुझे एहसास हुआ कि अच्छी कमाई करना और अच्छी जिंदगी जीना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।”