उधमसिंह शहीद दिवस पर जानें इस वीर क्रांतिकारी के बारे में 10 अनसुने तथ्य

 Picture of Udham Singh, a true son of Mother India and a brave revolutionary, on his martyrdom day

 

Udham Singh Shaheed Diwas; भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में शहीद ऊधम सिंह का नाम अदम्य साहस, देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए लगभग 21 वर्षों तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा की और अंततः ब्रिटिश अधिकारी माइकल ओ'ड्वायर को लंदन में गोली मारकर हजारों निर्दोष भारतीयों की शहादत का प्रतिशोध लिया।

31 जुलाई को मनाया जाने वाला ऊधम सिंह शहीद दिवस हमें उनके अद्वितीय साहस, राष्ट्रप्रेम और स्वतंत्रता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। इस महान क्रांतिकारी के जीवन से जुड़े 10 ऐसे रोचक और कम चर्चित तथ्य, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

 

आइए जानते हैं उधम सिंह शहीद दिवस पर जानें इस महान क्रांतिकारी के जीवन से जुड़े 10 अनसुने और प्रेरणादायक तथ्य…

 

उधम सिंह के बारे में 10 अनसुने तथ्य

 

1. बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया

ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के सुनाम में हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया, जिसके बाद वे अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के सेंट्रल खालसा अनाथालय में पले-बढ़े।

 

2. उनका जन्म नाम कुछ और था

बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका मूल यानी जन्म नाम शेर सिंह था। अनाथालय में दीक्षा के बाद उनका नाम बदलकर ऊधम सिंह रखा गया।

 

3. जलियांवाला बाग हत्याकांड ने बदल दी जिंदगी

13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग नरसंहार ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने वहीं प्रतिज्ञा की कि इस अत्याचार के जिम्मेदार लोगों को दंड दिलाएंगे।

 

4. बदला लेने के लिए 21 वर्षों तक इंतजार किया

ऊधम सिंह ने जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने लगभग 21 वर्षों तक सही अवसर का इंतजार किया और फिर 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में माइकल ओ'ड्वायर को गोली मार दी।

 

5. कई देशों की यात्रा की

क्रांतिकारी गतिविधियों के दौरान उन्होंने अफ्रीका, अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों की यात्रा की। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े लोगों से संपर्क बनाए।

 

6. कई नामों से पहचाने गए

ब्रिटिश सरकार से बचने के लिए उन्होंने अलग-अलग नामों का उपयोग किया। सबसे प्रसिद्ध नाम 'राम मोहम्मद सिंह आजाद' था, जो भारत की धार्मिक एकता और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है।

 

7. अदालत में भी नहीं झुके

गिरफ्तारी के बाद अदालत में उन्होंने अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं जताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अपने देशवासियों के साथ हुए अत्याचार का प्रतिशोध लिया है।

 

8. 31 जुलाई 1940 को दी गई फांसी

ब्रिटेन की पेंटनविले जेल में 31 जुलाई 1940 को उन्हें फांसी दी गई। इसी कारण हर वर्ष 31 जुलाई को उनका शहीद दिवस मनाया जाता है।

 

9. 34 साल बाद भारत लौटा उनका पार्थिव शरीर

वर्ष 1974 में महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह के पार्थिव अवशेष उनकी शहादत के 30 साल बाद एयर इंडिया की विशेष उड़ान से भारत लाए गए थे, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

 

10. आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं

ऊधम सिंह का जीवन हमें अन्याय के खिलाफ साहस, धैर्य, देशभक्ति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम अध्यायों में हमेशा अमर रहेगा। शहीद दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देना और उनके आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

 

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Nirav Modi Extradition: ‘उसे भारत की जेल में होना चाहिए…’; नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री का बड़ा बयान

Nirav Modi India Extradition: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करीब 2 अरब डॉलर (USD 2 Billion) के कथित घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण में हो रही लंबी देरी को लेकर ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने अपनी ही सरकार और न्यायिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस मामले में देरी ने भारत और ब्रिटेन के बीच भरोसे को कमजोर किया है। पटेल ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।

प्रीति पटेल ने कहा कि उन्हें यह देखकर बेहद दुख और हैरानी होती है कि नीरव मोदी अब भी ब्रिटेन में है। जबकि उसे काफी पहले भारत भेज दिया जाना चाहिए था। बता दें कि अप्रैल 2021 में पटेल ने ही नीरव मोदी के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। ब्रिटेन की अदालतों ने उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत पाए थे।

“उसे भारत की जेल में होना चाहिए था”

द डेली टेलीग्राफ के एक पॉडकास्ट The Diamond King में बातचीत के दौरान प्रीति पटेल ने कहा कि यदि ब्रिटेन की न्याय व्यवस्था सही तरीके से काम कर रही होती, तो नीरव मोदी आज ब्रिटेन में नहीं बल्कि भारत की जेल में अपनी सजा काट रहा होता। उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण कानूनों और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का उद्देश्य ही यही है कि आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के लिए उसके देश भेजा जाए। लेकिन इस मामले में लगातार हो रही देरी ब्रिटेन की व्यवस्था का खुला दुरुपयोग है और यह ब्रिटिश करदाताओं के साथ भी अन्याय है।

भारत-ब्रिटेन संबंधों पर पड़ा असर

प्रीति पटेल ने दावा किया कि गृह मंत्री के रूप में 2019 से 2022 के अपने कार्यकाल के दौरान इस मामले ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को भी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि भारत, ब्रिटेन से असफल शरणार्थियों (Failed Asylum Seekers) को वापस लेने के मुद्दे पर सहयोग करने में हिचकिचा रहा था क्योंकि नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी।

उनके अनुसार, भारत यह देखना चाहता था कि ब्रिटेन प्रत्यर्पण मामलों में वास्तविक प्रगति दिखाए। जब तक ऐसा नहीं हुआ। तब तक भारत के पास बातचीत में एक मजबूत कूटनीतिक बढ़त बनी रही, जिससे ब्रिटेन को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

लंदन की जेल में बंद है नीरव मोदी

55 वर्षीय नीरव मोदी इस समय लंदन की पेंटनविल (Pentonville) जेल में बंद है। भारत में उसके खिलाफ तीन प्रमुख आपराधिक मामले दर्ज हैं:-

  • सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी का मामला।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच।
  • सबूतों और गवाहों के साथ कथित छेड़छाड़ से जुड़ा मामला।

प्रत्यर्पण की राह लगभग साफ

रिपोर्ट के अनुसार, नीरव मोदी ब्रिटेन में उपलब्ध लगभग सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर चुका है। बताया जा रहा है कि यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (European Court of Human Rights) में दायर उसकी अंतिम अपील भी खारिज हो चुकी है।

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इसके अलावा मानवाधिकार और गोपनीय शरण (Asylum) संबंधी दावों के आधार पर भी उसे राहत नहीं मिली है। ऐसे में माना जा रहा है कि कई वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण पहले की तुलना में काफी करीब पहुंच चुका है।