Alpha Alia Bhatt Movie Review: मिसफिट आलिया भट्ट….तो स्पाई फिल्म में ग्लैमर डॉल बनकर रह गईं शरवरी वाघ, बॉबी देओल ने बचा ली थोड़ी इज्जत

फिल्म- ऐल्फा

निर्देशक- शिव रवैल

कलाकार- आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर, बॉबी देओल

रेटिंग-2/5

Alpha Alia Bhatt Movie Review: जब यशराज ने फिल्म ऐल्फा का ऐलान किया था तो फैंस का एक्साइटमेंट और उम्मीदें काफी बढ़ी थीं। इसके बाद फिल्म की स्टार कास्ट का ऐलान हुआ तो आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर का नाम सुनकर हर किसी की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई थीं। लेकिन फिल्म देखकर आप ठगा हुआ सा महसूस करने वाले हैं।

कहानी

शिव रावेल की डायरेक्ट की गई फिल्म ऐल्फा में आलिया का किरदार ‘सीता’ आपको फुल एक्शन में नजर आती हैं। वह अजेय है, उससे कोई गलती नहीं होती, वह मौत को कई बार टक से छूकर वापस आती हैं। वहीं हवा में उछलकर ऐसे दुश्मनों को ढेर कर देती हैं जैसे ग्रेवटी से उनका लेना देना ही न हो। उसे ‘टेस्ट सब्जेक्ट’ के तौर पर बढ़ा किया जाता है। घर-परिवार प्यार से कोसों दूर होती है।

प्यार और हमदर्दी क्या होती है उसे नहीं पता है। उसे अपने इमोशंस भी जाहिर करने में भी काफी मुश्किल होती है। इसीलिए, जब वह अपनी अलग हो चुकी जुड़वां बहन दुर्गा के साथ कुछ प्यार भरे पल बिताती है, तो खुश होती है नया एहसास करती है। लेकिन आलिया पर उनका ये किरदार उतना जच नहीं रहा है। ‘अल्फा’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध पर बेस्ड है, जिसमें दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ था। बढ़ते खतरों के बीच भारत को अजेय बनाने के पक्के इरादे के साथ, कर्नल फतेह सिंह लखावत वैज्ञानिक डॉ. वर्गीज की मदद से एक खास टास्क फोर्स बनाने के लिए एक ‘बेहतरीन और एडवांस्ड प्रोग्राम’ तैयार करते हैं। जल्द ही, कुछ युवा पुरुषों को ‘अल्फा’ नाम का सीरम दिया जाता है, जिसे सुपरह्यूमन बनाने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था।

यह सीरम देखने की क्षमता, रिफ्लेक्स, फेफड़ों की क्षमता और इंद्रियों की शक्ति को बढ़ाता है। इससे सुनने की क्षमता तेज हो जाती है और पानी के अंदर आठ मिनट तक सांस रोके रखने की काबिलियत मिलती है। लेकिन जल्द ही, सीरम के खतरनाक साइड इफेक्ट्स दिखने लगते हैं। इस बात से अनजान, लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रांत कौल अपनी पत्नी जानकी को यह सीरम दे देते हैं, जब प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है।

नतीजा? एक बच्ची को जन्म देने के बाद जानकी की ऑपरेशन टेबल पर ही मौत हो जाती है। उस बच्ची को फतेह सिंह चुपके से बदल देते हैं और उसे एक ‘ऐल्फा’ सोल्जर के तौर पर पालते-पोसते हैं। दुनिया से दूर, राजस्थान की एक फैसिलिटी में कैद और किसी एक्सपेरिमेंट की तरह लगातार निगरानी में पली-बढ़ी सीता एक हथियार बन जाती है। लेकिन फतेह सिंह असल में वो नहीं हैं जो होने का दावा करते हैं। और इसी उतार-चढ़ाव भरे माहौल में एंट्री होती है उसकी जुड़वां बहन दुर्गा की, जो उससे अलग हो गई थी।

डायरेक्शन

बात अगर डायरेक्टर शिव रवैल की करें, जिन्होंने ऐल्फा को निर्देशित किया है। एक तरह से कहा जा सकता है कि शिव ने स्पाई थ्रिलर को स्टाइलिश थिलर बना दिया है। फिल्म को देखकर आपको बोरियत होने लगती है। एक सीन भी आपके अंदर एक्साइटमेंट नहीं जगाता है। फिल्म के कई सीन अधूरेपन का शिकार है। वहीं कई जगह आप को एक्शन देख ऐसा लगेगा कि ये आखिर क्यों हो रहा है?

एक्टिंग

फिल्म ऐल्फा का लीड किरदार आलिया भट्ट हैं। बाकी पूरी कास्ट को यशराज ने सपोर्टिंग रोल में रखा है। फिल्म की कहानी आलिया के ईर्द-गिर्द ही घूमती हैं। फिल्म देख आपको बस एक ही सवाल खाए जाता है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी, जो आलिया ने इस फिल्म को हां कहा। जिगरा के बाद आलिया के करियर में एक और बुरी फिल्म एड हो गई है ‘ऐल्फा’। आलिया भट्ट जैसी दमदार एक्ट्रेस की फिल्म से हर किसी को काफी उम्मीदें रहती हैं। उन्होंने हाईवे, गंगूबाई बाई जैसी शानदार फिल्में दी हैं।

अब बात करते हैं शरवरी वाघ की। यशराज ने शरवरी को फिल्मी दुनिया में लॉन्च किया है। यशराज के अलावा वे और भी फिल्मों में शानदार काम के साथ नजर आई हैं। हाल में रिलीज हुई उनकी मैं वापस आउंगा हो या फिर महाराज दोनों ही फिल्मों में एक्ट्रेस का इतना शानदार है कि उनसे भी काफी उम्मीदें रहती हैं। लेकिन अफसोस निर्देशक एक्ट्रेस के टैलेंट का यूज न कर सके। फिल्म ऐल्फा में शरवरी को बहुत कम स्क्रीन टाइम दिया गया है। वहीं उनका रोल फिल्म के लिए जरूरी भी नहीं लगता है। अगर वह फिल्म में न होती तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।

फिल्म की इज्जत थोड़ी बहुत बॉबी देओल ने अपनी दमदार एक्टिंग से बचा ली है। लेकिन बेतुक कमजोर कहानी ने उनका काम भी खराब किया है। वहीं अनिल कपूर भी अपने रोल के हिसाब से फिट हैं। फिल्म में ऋतिक के कबीर वाले कौमियो ने फिल्म को थोड़ी बहुत हाईप दिलाई है।

फिल्म को देखें या नहीं

फिल्म को न देखना कहना जायज नहीं होता है। एक फिल्म बनाने में कई लोगों की मेहनत होती है। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिन्हें किसी भी हाल में टॉलरेट करना मुश्किल होता है। ऐल्फा के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप लीड कास्ट के जबरा फैन हैं…यानी उनकी शक्ल देख चेन मिल जाता है, तो आप इसे देख सकते हैं। बाकि फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं।

Tumbbad 2: सोहम शाह स्टारर ‘तुम्बाड 2’ का महाराष्ट्र के मानसून से है तगड़ा कनेक्शन, जानें फुल अपडेट

Tumbbad 2: सोहम शाह स्टारर ‘तुंबाड’ भारत की सबसे यादगार हॉरर फ़िल्मों में से एक है। 2018 में राही अनिल बर्वे के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म की कई खासियतों में से एक है इसका डरावना माहौल, जिसमें लगातार होती बारिश कहानी का एक अहम हिस्सा बन गई थी।

लगातार होती बारिश ने इस भारतीय पौराणिक हॉरर फ़िल्म की दुनिया को और भी डरावना और असरदार बना दिया था। यह कहना गलत नहीं होगा कि बारिश खुद एक किरदार की तरह थी। खबरों के मुताबिक, मेकर्स इसके सीक्वल में भी वही जादू फिर से पैदा करने की योजना बना रहे हैं। कहा जा रहा है कि वे शूटिंग शेड्यूल में बदलाव कर रहे हैं और दूर-दराज की जगहों की तलाश कर रहे हैं ताकि फ़िल्म की शूटिंग असली बारिश में हो सके।

जहां ‘तुंबाड’ की शूटिंग चार मॉनसून सीज़न के दौरान हुई थी, वहीं खबर है कि इसके सीक्वल के शेड्यूल में कई बार बदलाव किए जा रहे हैं ताकि एक बार फिर असली बारिश को कैमरे में कैद किया जा सके। फिल्म के मेकर्स उस यादगार माहौल को फिर से बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिसने पहली फिल्म को इतना खास बनाया था।

सूत्रों के मुताबिक, मॉनसून के असामान्य और अनिश्चित व्यवहार के कारण प्रोडक्शन टीम ने अपनी शूटिंग की योजनाओं में पूरी तरह से बदलाव किया है। महाराष्ट्र में बारिश का पैटर्न लगातार अनिश्चित होता जा रहा है, इसलिए मेकर्स मौसम की स्थिति पर रियल-टाइम नज़र रख रहे हैं और जिन इलाकों में सबसे ज़्यादा बारिश हो रही है, वहाँ के हिसाब से अपने शेड्यूल में बदलाव कर रहे हैं।

अंदरूनी सूत्रों का यह भी कहना है कि टीम ने बड़े पैमाने पर कृत्रिम वर्षा व्यवस्था पर निर्भर न रहने का विकल्प चुना है, बल्कि तुम्बाड से जुड़ी प्रामाणिकता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक वर्षा को इकट्ठा करना पसंद किया है, साथ ही कई क्षेत्रों में चल रही पानी की कमी के बीच पानी के उपयोग से संबंधित व्यापक चिंताओं का भी ध्यान रखा है।

खबर है कि टीम महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाकों में दूर-दराज और बारिश वाली जगहों की तलाश कर रही है, ताकि ‘तुंबाड’ वाली वैसी ही शानदार दुनिया बनाई जा सके जिससे दर्शक जुड़े हुए हैं। कहा जाता है कि इन जगहों तक पहुंचना ही अपने आप में एक चुनौती है। सेट पर पहुंचने के लिए कास्ट और क्रू को घने और मुश्किल रास्तों से होकर लगभग दो से तीन घंटे की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।

फिल्म से जुड़े एक सूत्र ने कहा, “मज़ेदार बात यह है कि जहां ‘तुंबाड’ चार मॉनसून सीज़न में शूट होने की वजह से मशहूर हुई थी, वहीं ‘तुंबाड 2’ के लिए टीम असल में मॉनसून का पीछा कर रही है।” उन्होंने आगे कहा, “‘तुंबाड’ की दुनिया में बारिश हमेशा से एक अहम किरदार रही है और मेकर्स इसे असलियत के साथ दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

सूत्र ने यह भी बताया कि कुछ जगहों को खास तौर पर इसलिए चुना गया क्योंकि वहां बाकी जगहों के मुकाबले ज़्यादा बारिश हो रही थी। सोहम शाह इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और इसे उनके ही बैनर तले बनाया जा रहा है। नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी भी फ़िल्म में एक अहम भूमिका में नज़र आएंगे। फ़िल्ममेकर आदेश प्रसाद इस सीक्वल को डायरेक्ट कर रहे हैं। ‘तुम्बाड 2’ 3 दिसंबर, 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

Eetha Teaser: पड़े-पड़े मरी तो बेचारी कहलाऊंगी…नाचते हुए मरी तो मिसाल बन जाऊंगा, श्रद्धा कपूर स्टारर ‘ईथा’ का टीजर रिलीज

Eetha Teaser: लक्ष्मण उतेकर महाराष्ट्र के समृद्ध इतिहास का एक और अध्याय लेकर सिनेमाघरों में लौट रहे हैं। छत्रपति संभाजी महाराज पर आधारित ‘छावा’ के बाद, निर्देशक अब ‘ईथा’ में विठाबाई भाऊ मांग नारायणगांवकर की कहानी पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें श्रद्धा कपूर मुख्य भूमिका में हैं और उनके साथ रणदीप हुड्डा भी नज़र आएंगे।

इस बायोपिक का पहला टीज़र आज सिनेमाघरों में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की फिल्म ‘कॉकटेल 2’ के साथ खास तौर पर दिखाया गया। जैसे ही पहला शो शुरू हुआ, दर्शकों को लावणी डांसर के रूप में श्रद्धा की एक हैरान करने वाली झलक देखने को मिली।

‘ईथा’ का टीज़र विठाबाई नारायणगांवकर की ज़िंदगी के एक अहम हिस्से पर फ़ोकस करता है। श्रद्धा पहले ही फ़्रेम से उस किरदार में पूरी तरह ढल जाती हैं। टीज़र में उन्हें गर्भवती दिखाया गया है। प्रेग्नेंसी के बावजूद, वह स्टेज पर परफॉर्म करती रहती हैं। हालांकि, एक शो के दौरान उन्हें एहसास होता है कि बच्चे के जन्म का समय आ गया है। परफ़ॉर्मेंस बीच में न छोड़ते हुए, वह शांत रहती हैं और बच्चे को जन्म देने के लिए बैकस्टेज जाती हैं। विठाबाई पत्थर से गर्भनाल काटती हैं और अपनी परफ़ॉर्मेंस फिर से शुरू करती हैं, जिससे दर्शक हैरान रह जाते हैं। वे उनके समर्पण और हिम्मत की तारीफ़ करते हैं।

असल घटनाओं के अनुसार, डिलीवरी के बाद उन्हें आराम देने के लिए उस शो को तुरंत रोक दिया गया था जिसमें उन्होंने परफॉर्म किया था। कहानी की असलियत बनाए रखने के लिए, फ़िल्म की शूटिंग कई जगहों पर की गई, जिनमें मुंबई का मध आइलैंड, सोलापुर, औंधेवाड़ी, सतारा, नासिक और भोर शामिल हैं। शूटिंग के दौरान, एक अहम लावणी सीक्वेंस फ़िल्माते समय श्रद्धा के बाएं पैर में फ़्रैक्चर हो गया था।

महाराष्ट्र की मशहूर तमाशा कलाकार विठाबाई ने इस लोक नृत्य की विरासत को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। पंढरपुर में कलाकारों के परिवार में जन्मीं विठाबाई के पिता और चाचा ‘भाऊ-बापू मांग नारायणगांवकर’ नाम का पारिवारिक मंडली (ट्रूप) चलाते थे। उनके दादा नारायण खुडे इस मंडली के संस्थापक थे। विठाबाई लावणी, गवलन और भेदिक जैसे कई तरह के गीतों के माहौल में पली-बढ़ीं।

‘तमाशा सम्राज्ञी’ (तमाशा की महारानी) के नाम से मशहूर नारायणगांवकर ने तब परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया, जब उनके पिता मुश्किल दौर से गुज़र रहे थे। उन्होंने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते, जिनमें 1957 और 1990 में मिला राष्ट्रपति पुरस्कार भी शामिल है। इतनी तारीफ़ और लोकप्रियता के बावजूद, विठाबाई को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। खबरों के मुताबिक, उनकी मौत के बाद अस्पताल का बिल दानदाताओं ने चुकाया था।

‘ईथा’ 28 अगस्त, 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इसका टीज़र अभी सिर्फ़ सिनेमाघरों में ही दिखाया जा रहा है। इसे जल्द ही आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा।