प्रतिवर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है। यदि आप योगासान करना जानते हैं तो यह प्राणायम की तैयारी के बेहतर है। यदि आप नहीं भी जानते हैं तो भी आप प्राणायाम करके भरपूर लाभ उठा सकते हैं। बस जरूरी यह है कि आप इसे सही तरीके और नियम के साथ करें। चलिए जानते हैं प्राणायम के 5 फायदे और विधि।
जानें कैसे करें अनुलोम-विलोम प्राणायाम:
- यदि आप नए हैं तो आपको अनुलोम विलोम प्राणायाम करना चाहिए, जिसे 'नाड़ी शोधन प्राणायाम' भी कहा जाता है।
- किसी शांत जगह पर पद्मासन, सुखासन या आरामदायक मुद्रा में बैठें।
- दाएं हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें।
- बाएं नथुने से धीरे-धीरे और गहराई से सांस लें।
- बाएं नथुने को अनामिका यानी रिंग फिंगर से बंद करें और अंगूठे को हटाकर दाहिने नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
- अब दाहिने नथुने से सांस लें।
- दाहिने नथुने को अंगूठे से बंद करें और अनामिका हटाकर बाएं नथुने से सांस छोड़ें।
- यह एक चक्र पूरा हुआ। इसी तरह 5 मिनट तक अभ्यास करें। शुरुआत 5 मिनट से करें, धीरे-धीरे 15-15 मिनट तक बढ़ाएं।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने के 5 प्रमुख फायदे:
1. मन और मस्तिष्क:
अनुलोम विलोम पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे तनाव वाले हार्मोन कम होते और मन शांत होता है। मस्तिष्क के बाएं और दाएं गोलार्द्धों जो कि तर्क और रचनात्मकता से जुड़े होते हैं के बीच संतुलन स्थापित करता है, जिससे एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।
2. फेफड़ों और श्वसन प्रणाली:
यह फेफड़ों की क्षमता यानी लंग की कैपेसिटी को बढ़ाता है, जिससे अधिक ऑक्सीजन अंदर आती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है। यह श्वसन प्रणाली को मजबूत करके अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस और एलर्जी जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं से मुक्ति दिलाता है। यह श्वास मार्ग को साफ करता है और सूजन को कम करता है।
3. ब्लड प्रेशर:
नियमित अभ्यास उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर को कम करने और नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है, क्योंकि यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
4. डिटॉक्सिफाई:
इस प्राणायाम से शरीर में ऑक्सीजन के बेहतर प्रवाह और तंत्रिका तंत्र के संतुलन से पाचन क्रिया में भी सुधार होता है। गहरी और नियंत्रित श्वास शरीर से विषाक्त पदार्थों को अधिक कुशलता से बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे शरीर आंतरिक रूप से शुद्ध होता है। यह शुद्धि हमें निरोगी बनाकर हमारी आयु को बढ़ाने वाली सिद्ध होती है।
5. प्रतिरक्षा प्रणाली:
बेहतर ऑक्सीजन प्रवाह, तनाव में कमी और शरीर का आंतरिक संतुलन प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे शरीर बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
विशेष: यदि आप अनुलोम विलोम में पारंगत हो जाएं तब आप भस्त्रिका और कपालभाती प्राणायम की ओर बढ़ें। इसे भी आप 5 मिनट से

