Google Chrome यूजर्स सावधान! सरकार का हाई-रिस्क अलर्ट, तुरंत करें ये जरूरी काम

google chrome security warning

भारत में करोड़ों लोग इंटरनेट चलाने के लिए गूगल क्रोम नामक ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं। सरकारी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गूगल क्रोम के यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा कि इस ब्राउजर में कई सिक्योरिटी खामियां मिली हैं। इसका फायदा उठाकर हैकर्स आपके सिस्टम की एक्सेस ले सकते हैं। इससे पर्सनल इंफोर्मेशन के साथ-साथ डेटा चोरी का भी डर बना हुआ है। 

गूगल क्रोम के इन वर्जन पर ज्यादा खतरा

CERT-In के अनुसारल अगर आप विंडोज या मैक पर गूगल क्रोम के 145.0.7632.75/76 से पुराने और Linux पर 144.0.7559.75 से पुराने वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। एजेंसी को क्रोम के इन वर्जनों में खामियां मिली हैं।

 

एजेंसी का दावा है कि क्रोम के CSS रेंडरिंग कंपोनेंट में ये खामियां पाई गई हैं। इनका फायदा उठाकर अटैकर्स ब्राउजर के अंदर मेमोरी हैंडलिंग को मैनिपुलेट कर सकते हैं। इससे पूरे सिस्टम की एक्सेस अपने हाथों में लेकर डेटा चोरी और सर्विस डिसरप्शन कर सकते हैं।

यूजर्स क्या करें?

एजेंसी ने इस वार्निंग को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है। इससे निपटने के लिए यूजर्स को तुरंत क्रोम ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी गई है। यूजर्स गूगल स्टेबल चैनल के जरिए रिलीज हुई अपडेट को इंस्टॉल कर सकते हैं। इसमें इन खामियों को ठीक करने के लिए सिक्योरिटी पैचेज जारी किए गए हैं।

 

अगर यूजर्स समय समय पर अपने डिवाइस और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड करते हैं तो उन्हें साइबर अटैक से भी सुरक्षा मिलती है साथ ही नए फीचर्स भी मिलते हैं।

क्रोम यूजर्स कैसे डिलिट करें हिस्ट्री

नियमित रूप से हिस्ट्री डिलिट करना न सिर्फ प्राइवेसी के लिए अच्छा है। बल्कि इससे डिवाइस को तेज और सुरक्षित भी बनाए रखा जा सकता है। क्रोम यूजर्स अपनी ब्राउजिंग और डाउनलोड हिस्ट्री कुछ आसान स्टेप्स में डिलिट कर सकते हैं। जानिए कैसे डिलिट करें हिस्ट्री :

 

-ऊपर दाईं ओर तीन डॉट्स पर क्लिक करें

– History पर क्लिक करें और Delete browsing data पर जाएं

-समय सीमा चुनें- जैसे पिछला एक घंटा, 24 घंटे या पूरा डेटा।

-Delete Data पर क्लिक करें।

क्या है CERT-In

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारत की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, जो 2004 से साइबर सुरक्षा खतरों, हैकिंग और फिशिंग से निपटने के लिए जिम्मेदार है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत साइबर हमलों की रोकथाम, चेतावनी और आपातकालीन प्रतिक्रिया का कार्य करती है। 

edited by : Nrapendra Gupta 

India AI Impact Summit : PM मोदी ने किया Jio Pavilion का दौरा, आकाश अंबानी ने दिखाया AI इकोसिस्टम

India AI Impact Summit PM Narendra Modi Jio Pavilion visit

इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जियो के AI पवेलियन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जियो द्वारा विकसित विभिन्न AI आधारित मॉडलों और समाधानों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने जियो इंटेलिजेंस, जियो संस्कृति AI, जियो आरोग्य AI, जियो शिक्षा और जियो AI होम जैसे मॉडलों को देखा। इन मॉडलों का उद्देश्य क्रमशः एंटरप्राइज इंटेलिजेंस, भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक सामग्री, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा समाधान और स्मार्ट होम आधारित AI सुविधाओं को सुलभ बनाना है।

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इस मौके पर रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कंपनी द्वारा विकसित किए जा रहे AI इकोसिस्टम और उसके विभिन्न आयामों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। 

 

जियो लंबे समय से “AI for All” की अवधारणा पर जोर देता रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पहले भी कह चुके हैं कि तकनीक का वास्तविक लाभ तब मिलता है, जब वह बड़े पैमाने पर आम लोगों तक पहुंचे। इसी सोच के तहत जियो “AI for All” के विज़न पर काम कर रही है। 

 

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में देश-विदेश की कई टेक कंपनियां और नीति विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के जियो पवेलियन के दौरा ने AI क्षेत्र में निजी क्षेत्र की पहलों पर ध्यान खींचा है।  Edited by : Sudhir Sharma

X का सर्वर हुआ डाउन, APP और वेबसाइट पर यूजर्स को परेशानी

twitter X

माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) आज अचानक डाउन हो गया है। इससे दुनियाभर के लाखों यूजर्स ऐप और वेबसाइट दोनों पर लॉग इन या फीड लोड नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।  Downdetector के अनुसार, इस दौरान सैकड़ों यूजर्स अलग-अलग क्षेत्रों में ऐप एक्सेस नहीं कर पाए और उनकी फीड लोड नहीं हो सकी। 

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सबसे ज्यादा असर अमेरिका और भारत के कई हिस्सों में देखा गया, जहां बड़ी संख्या में यूजर्स ने प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में समस्या की शिकायत की। लोगों को लॉग-इन करने, पोस्ट करने और टाइमलाइन रिफ्रेश करने में दिक्कतें आईं। आउटेज ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतों में अचानक उछाल दर्ज किया गया।

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 Downdetector के मुताबिक, सुबह 8:24 बजे (ईटी) यानी 1324 GMT तक अमेरिका में X से जुड़ी 23,210 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। Downdetector विभिन्न स्रोतों से स्टेटस रिपोर्ट इकट्ठा कर तकनीकी बाधाओं को ट्रैक करता है। Edited by : Sudhir Sharma

Samsung Galaxy S26 Ultra vs S25 Ultra : जानिए इस साल क्या मिल सकते हैं नए फीचर्स और बड़े अपग्रेड्स

sumsung galaxy

Samsung जल्द ही अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Galaxy S26 Ultra पेश करने वाला है। शुरुआती जानकारियों के अनुसार, इस बार बड़े बदलावों की बजाय उपयोगी और व्यावहारिक अपग्रेड देखने को मिल सकते हैं। Samsung 25 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाले Galaxy Unpacked इवेंट में अपनी नई फ्लैगशिप सीरीज़ लॉन्च कर सकता है। कंपनी Galaxy S26, Galaxy S26 Plus और Galaxy S26 Ultra मॉडल पेश कर सकती है। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान Galaxy S26 Ultra पर रहेगा, जो Galaxy S25 Ultra का अपग्रेडेड वर्जन होगा।

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डिजाइन और बिल्ड

लीक्स के मुताबिक, Samsung इस बार S25 Ultra के शार्प किनारों की जगह थोड़ा राउंडेड फ्रेम दे सकता है। फोन की मोटाई 8.2mm से घटकर 7.9mm हो सकती है, जबकि वजन 218 ग्राम से कम होकर 214 ग्राम तक आ सकता है। फ्रेम मटेरियल में भी बदलाव संभव है। कंपनी टाइटेनियम की जगह एल्युमिनियम फ्रेम का इस्तेमाल कर सकती है, जिससे वजन कम हो सकता है और फोन का फील थोड़ा अलग हो सकता है।

 

डिस्प्ले में सुधार

 

Samsung Galaxy S26 Ultra में 6.89 इंच का डिस्प्ले मिल सकता है, जो S25 Ultra के 6.86 इंच स्क्रीन से थोड़ा बड़ा होगा। हालांकि रोजमर्रा के इस्तेमाल में यह फर्क ज्यादा महसूस नहीं होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी M13 पैनल की जगह नया M14 पैनल दे सकती है। साथ ही 8-बिट की बजाय 10-बिट कलर सपोर्ट मिल सकता है, जिससे HDR कंटेंट देखते समय बेहतर कलर ट्रांजिशन और आउटपुट मिल सकता है। इसके अलावा थर्ड जनरेशन  की एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग और नया प्राइवेसी डिस्प्ले फीचर भी जोड़ा जा सकता है, जो पिछले Ultra मॉडल में नहीं था।

 

परफॉर्मेंस और मेमोरी

Galaxy S26 Ultra में Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिल सकता है, जो S25 Ultra में दिए गए Snapdragon 8 Elite चिप को रिप्लेस करेगा। इससे बेहतर पावर एफिशिएंसी और लंबे समय तक स्थिर परफॉर्मेंस मिल सकती है। RAM स्पीड 9.6Gbps से बढ़कर 10.7Gbps तक जा सकती है। हालांकि तुरंत बहुत बड़ा स्पीड अंतर महसूस न हो, लेकिन मल्टीटास्किंग और लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस में सुधार संभव है।

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बैटरी और चार्जिंग

बैटरी क्षमता 5,000mAh ही रहने की उम्मीद है। लेकिन चार्जिंग स्पीड में सुधार हो सकता है। वायर्ड चार्जिंग 45W से बढ़कर 60W और वायरलेस चार्जिंग 15W से बढ़कर 25W तक जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यूजर्स को कम समय में ज्यादा चार्जिंग मिल सकती है।

 

कैमरा अपग्रेड

Samsung 200MP HP2 मेन सेंसर को बरकरार रख सकता है, लेकिन इसका अपर्चर f/1.7 से बढ़ाकर f/1.4 किया जा सकता है। बड़ा अपर्चर कम रोशनी में बेहतर फोटोग्राफी में मदद कर सकता है। 50MP 5x टेलीफोटो कैमरा में f/3.4 की जगह f/2.9 अपर्चर मिल सकता है, जिससे ज्यादा लाइट कैप्चर होगी। हालांकि 10MP 3x टेलीफोटो कैमरा में थोड़ा छोटा सेंसर दिया जा सकता है।

 

कीमत पर सस्पेंस

कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि Galaxy S26 Ultra की कीमत अपने पिछले मॉडल से कम हो सकती है। हालांकि Samsung ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कीमत का खुलासा नहीं किया है। अंतिम जानकारी लॉन्च इवेंट में सामने आएगी। Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit 2026 : 19-20 फरवरी को भारत में होगा मेगा इवेंट, 65 से ज्यादा देश होंगे शामिल, 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स का जमावड़ा

भारत 19-20 फरवरी 2026 को राजधानी के भारत मंडपम में वैश्विक स्तर का इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 आयोजित करने जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। समिट करीब 65 देश शामिल होंगे।  यह पहली बार है जब यह अंतरराष्ट्रीय मंच किसी विकासशील देश में आयोजित किया जा रहा है।

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600 से ज्‍यादा स्‍टार्टअप्‍स की मौजूदगी रहेगी। इस समिट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस AI एक्शन समिट के दौरान की थी। भारत ने खुद को AI विस्तार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है। Alphabet की Google, Microsoft और Amazon ने मिलकर 2030 तक भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 68 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। 

 

शिखर सम्मेलन को संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ताओं में Alphabet के CEO सुंदर पिचाई, OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, Anthropic के CEO डारियो अमोदेई, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और Google DeepMind के CEO डेमिस हसाबिस शामिल हैं। इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 को भारत की AI कूटनीति और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक AI शिखर सम्मेलन होगा।

 

प्रधानमंत्री इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसे वर्ष का प्रमुख वैश्विक AI मंच माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक सहयोग के जरिए समावेशी, प्रभावशाली और कार्रवाई-उन्मुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना है।

 

वैश्विक सहयोग की नई दिशा

यूके AI सेफ्टी समिट, AI सियोल समिट, फ्रांस AI एक्शन समिट और ग्लोबल AI समिट ऑन अफ्रीका जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों की निरंतरता में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इसका लक्ष्य केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित न रहकर, ठोस परिणाम और वास्तविक प्रगति सुनिश्चित करना है। यह समिट वैश्विक AI सहयोग के लिए नई प्राथमिकताओं, ठोस पहल और बहुपक्षीय ढांचे को मजबूत करेगा।

 

मानवता और सतत विकास पर फोकस

समिट का उद्देश्य AI की परिवर्तनकारी शक्ति को मानवता की सेवा, समावेशी विकास, सामाजिक उन्नति और पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोग करना है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक AI गवर्नेंस में मजबूत करने का प्रयास करेगा, ताकि तकनीकी प्रगति कुछ देशों तक सीमित न रह जाए।

 

तीन ‘सूत्र’ होंगे आधार

इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट तीन मूल स्तंभों या ‘सूत्रों’ पर आधारित होगा—

People (लोग), Planet (पृथ्वी) और Progress (प्रगति)।

ये तीनों सूत्र यह तय करेंगे कि बहुपक्षीय सहयोग के जरिए AI का उपयोग सामूहिक लाभ के लिए कैसे किया जाए।

 

सात ‘चक्र’ में होगी चर्चा

 

इन तीन सूत्रों के आधार पर चर्चा सात प्रमुख क्षेत्रों (चक्रों) में संगठित की जाएगी- 

  • मानव पूंजी (Human Capital)
  • सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन
  • सुरक्षित और भरोसेमंद AI
  • लचीलापन, नवाचार और दक्षता
  • विज्ञान
  • AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण
  • आर्थिक विकास और सामाजिक हित के लिए AI
  • प्री-समिट कार्यक्रम भी शुरू

 

समिट से पहले MeitY कई प्रमुख पहलें आयोजित कर रहा है, जिनका मकसद समावेशी विकास और नवाचार के लिए AI के उपयोग को बढ़ावा देना है।

 

इनमें शामिल हैं:

 

AI for ALL: विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी AI समाधान खोजने की वैश्विक चुनौती।

AI by HER: महिला नेतृत्व वाले AI समाधानों को बढ़ावा देने की पहल।

YUVAi: 13-21 वर्ष के युवाओं के लिए वैश्विक नवाचार प्रतियोगिता।

 

आवेदन और पंजीकरण खुले

इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक संगठन और प्रतिभागी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।  आयोजकों को ऐसे सत्र डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जो People, Planet और Progress की थीम के अनुरूप हों और वैश्विक AI संवाद को ठोस दिशा दें।

 Edited by : Sudhir Sharma

Android 16 QPR3 Beta 2.1 Rollout : Pixel यूजर्स के लिए बैटरी और स्टेबिलिटी फिक्स के साथ नया अपडेट जारी, जानिए कैसे मिलेगा

Android 16 QPR3 Beta 2.1 Rollout

गूगल ने Pixel डिवाइसों के लिए Android 16 QPR3 Beta 2.1 अपडेट रोलआउट करना शुरू कर दिया है। यह अपडेट जनवरी में जारी QPR3 Beta 2 के बाद का फॉलोअप वर्जन है, जिसका मुख्य उद्देश्य सिस्टम की स्थिरता, बैटरी परफॉर्मेंस और ओवरऑल विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है।
 

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रिलीज नोट्स के मुताबिक, यह अपडेट उन यूजर्स के लिए उपलब्ध है जो Android Beta for Pixel प्रोग्राम में पहले से एनरोल हैं। Pixel 6 और Pixel 7 सीरीज को बिल्ड नंबर CP11.251209.009 मिल रहा है, जबकि अन्य समर्थित डिवाइसों को CP11.251209.009.A1 वर्जन जारी किया गया है।

 

किन समस्याओं को किया गया ठीक?

इस अपडेट में कई अहम बग फिक्स शामिल किए गए हैं- ऐप ड्रॉअर स्क्रॉल करते समय फ्रीज होने की समस्या ठीक की गई। Android Auto द्वारा गलत तरीके से अधिक स्क्रीन टाइम लॉग करने की समस्या सुधारी गई, जिससे बैटरी लाइफ बेहतर होगी। फुल-स्क्रीन और PiP मोड में नोटिफिकेशन शेड इस्तेमाल करते समय आने वाली ग्राफिकल गड़बड़ियों को दूर किया गया।

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रात के समय अत्यधिक बैटरी ड्रेन की समस्या को ठीक किया गया। बैटरी चार्ज लिमिट सेट होने के बावजूद 100% तक चार्ज होने की दिक्कत दूर की गई। Wi-Fi कनेक्शन बग के कारण स्लो इंटरनेट स्पीड की समस्या सुलझाई गई। रेडियो इंफॉर्मेशन सेटिंग्स एक्सेस करते समय होने वाले क्रैश को ठीक किया गया।

कॉल के दौरान स्पीकरफोन पर स्विच करने में देरी और ऑडियो फीडबैक की कमी को बेहतर ऑडियो रूटिंग से सुधारा गया। Always-On Display से डिवाइस जगाते समय स्क्रीन फ्लिकर की समस्या दूर की गई। Microsoft Intune से मैनेज ऐप्स समेत कुछ ऐप्स के स्टार्टअप क्रैश को ठीक किया गया।

 

वायरलेस चार्जिंग में गड़बड़ी और स्लो वायर्ड चार्जिंग की समस्या पावर मैनेजमेंट सिस्टम में सुधार कर ठीक की गई। फोल्डेबल डिवाइस को फोल्ड करते समय आने वाले सिस्टम क्रैश को एक्टिविटी लाइफसाइकिल मैनेजमेंट में सुधार कर सुलझाया गया।

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अपडेट कैसे मिलेगा 

अन्य Android QPR बीटा वर्जनों की तरह यह बिल्ड सामान्य उपयोग के लिए पर्याप्त रूप से स्थिर मानी जा रही है। यदि आप Android Beta for Pixel प्रोग्राम में शामिल हैं और ऑप्ट-आउट नहीं किया है, तो यह अपडेट ओवर-द-एयर (OTA) के जरिए स्वतः उपलब्ध हो जाएगा।

 

Android Beta समुदाय में शुरुआती यूजर्स के मुताबिक, यह लगभग 90MB से 110MB के बीच का छोटा अपडेट है और इसमें बड़े विजुअल बदलाव नजर नहीं आते। हालांकि यह ‘अंडर-द-हूड’ सुधारों पर केंद्रित है, जो डिवाइस की परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं। Edited by : Sudhir Sharma

रूस में Telegram पर डिजिटल स्ट्राइक, पुतिन ने लगाई पाबंदियां, फाउंडर बोले- हम झुकेंगे नहीं

रूसी अधिकारियों ने देश के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप में से एक, 'टेलीग्राम' पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार का यह कदम रूसी नागरिकों को विदेशी तकनीकी प्लेटफार्मों के बजाय खुद के नियंत्रित विकल्पों की ओर धकेलने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल डुरोव ने एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि रूस की यह कोशिश नाकाम होगी। रूस ने फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम पर बैन लगा दिया है।

इनके अलावा स्नैपचैट (Snapchat), फेसटाइम (FaceTime), ट्विटर/X और गेमिंग प्लेटफॉर्म रोब्लॉक्स (Roblox) पर भी रूस ने प्रतिबंध लगा रखा है। रूसी नियामक संस्था 'रोसकोमनाडजोर'  का कहना है कि इन विदेशी प्लेटफार्मों का उपयोग स्थानीय कानूनों के उल्लंघन और सुरक्षा जोखिमों के लिए किया जा रहा था।

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टेलीग्राम को निशाना बनाना रूसी प्रशासन के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि इसका उपयोग रूस में लाखों आम लोगों के अलावा खुद रूसी सेना, शीर्ष सरकारी अधिकारी, सरकारी मीडिया और यहां तक कि क्रेमलिन द्वारा भी किया जाता है।  

 

डुरोव ने कहा कि रूस अपने नागरिकों को निगरानी और राजनीतिक सेंसरशिप के लिए बनाए गए एक सरकारी ऐप का उपयोग करने के लिए मजबूर करने की कोशिश में टेलीग्राम पर पाबंदियां लगा रहा है। आठ साल पहले, ईरान ने भी यही रणनीति अपनाई थी- और वह विफल रहा। उसने झूठे बहानों के आधार पर टेलीग्राम को प्रतिबंधित किया और लोगों को सरकार द्वारा संचालित विकल्प पर स्विच करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

 

मंगलवार को रूसी सरकार ने टेलीग्राम तक पहुंच को सीमित करने का आदेश जारी किया। सरकार का तर्क है कि यह कदम 'रूसी नागरिकों की सुरक्षा' के लिए उठाया गया है। अधिकारियों ने ऐप पर उन सामग्रियों को ब्लॉक करने से इनकार करने का आरोप लगाया है जिन्हें प्रशासन 'आपराधिक और आतंकवादी' मानता है।

 

 डिजिटल सर्विस ट्रैकिंग साइट Downdetector के अनुसार पिछले 24 घंटों में 11,000 से अधिक यूजर्स ने ऐप के काम न करने या धीमा चलने की शिकायत की है।

 

 

 

रूस के दूरसंचार नियामक रोसकोम्नाडज़ोर (Roskomnadzor) ने एक बयान में कहा कि जब तक रूसी कानूनों के उल्लंघन को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक टेलीग्राम मैसेंजर के संचालन पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित नहीं है और धोखाधड़ी या आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं हैं।

 

रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, प्रतिबंधित सामग्री को न हटाने और खुद को विनियमित करने में विफल रहने के लिए टेलीग्राम पर 64 मिलियन रूबल (लगभग 8.28 लाख डॉलर) का जुर्माना भी लगाया गया है।

 

पाबंदियां लागू होते ही पूरे रूस में इसके असर देखे गए।  Edited by : Sudhir Sharma

Airtel लाया नया AI कवच, फोन पर OTP शेयर करते ही बजेगा ‘अलर्ट’

ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच Airtel ने अपने करोड़ों ग्राहकों के लिए एक जादुई समाधान पेश किया है। कंपनी ने एक ऐसा AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) फ्रॉड अलर्ट सिस्टम लॉन्च किया है, जो ठगों के जाल में फंसने से पहले ही आपको सावधान कर देगा। कंपनी ने बयान में कहा कि हमारा मकसद ग्राहकों को एक सुरक्षित डिजिटल अनुभव देना है, ताकि वे बिना किसी डर के तकनीक का इस्तेमाल कर सकें। 

 

कैसे काम करेगा यह 'डिजिटल बॉडीगार्ड'?

अक्सर ठग KYC या बैंक अपडेट के नाम पर आपको कॉल करते हैं और बातों में उलझाकर OTP मांग लेते हैं। अब एयरटेल का नया सिस्टम:

 

लाइव चेतावनी: अगर आप कॉल पर हैं और उसी दौरान आपके पास बैंक का OTP आता है, तो सिस्टम तुरंत आपको अलर्ट भेजेगा।

 

जोखिम की पहचान: यह आपको साफ बताएगा कि कॉल के दौरान OTP साझा करना आपके लिए भारी पड़ सकता है।

 

समय की बचत: इससे यूजर को संभलने का मौका मिल जाएगा और वह ठगी का शिकार होने से बच जाएगा।

 

अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा पहल

Airtel पिछले 2 सालों से डिजिटल सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी ने ठगी रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं:

 

खतरनाक लिंक्स पर रोक: संदिग्ध और फर्जी लिंक्स को नेटवर्क लेवल पर ही ब्लॉक करना।

 

स्पैम कॉल की पहचान: फर्जी कॉल्स को 'Spam' के रूप में मार्क करना।

 

नेटवर्क फिल्टर: धोखाधड़ी वाली कॉल्स को ग्राहकों तक पहुँचने से पहले ही रोकना।

 

कब और किसे मिलेगा यह फीचर?

शुरुआत: यह खास फीचर फिलहाल हरियाणा के ग्राहकों के लिए शुरू कर दिया गया है।

 

देशभर में रोलआउट: अच्छी खबर यह है कि अगले दो हफ्तों के भीतर यह पूरे भारत में Airtel ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा। Edited by : Sudhir Sharma

 

WhatsApp स्कैमर्स की अब खैर नहीं! इन 8 जादुई फीचर्स को आज ही करें ऑन, आपका अकाउंट बन जाएगा अभेद्य किला

whatsapp

दुनिया के सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp का इस्तेमाल आज हम सभी करते हैं, लेकिन क्या आपका अकाउंट वाकई सुरक्षित है? आए दिन सामने आ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' और 'ऑनलाइन स्कैम' के मामलों ने प्राइवेसी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

अगर आप भी चाहते हैं कि कोई अनजान व्यक्ति आपकी चैट न पढ़ सके या आपको ठगी का शिकार न बना सके, तो WhatsApp के ये 8 छिपे हुए सिक्योरिटी फीचर्स आपके लिए सुरक्षा कवच साबित होंगे। आइए जानते हैं इन्हें कैसे ऑन करें:

 

1. टू-स्टेप वेरिफिकेशन (Two-Step Verification)

यह सुरक्षा की सबसे पहली और मजबूत दीवार है। इसे ऑन करने के बाद, अगर कोई आपका सिम कार्ड क्लोन भी कर ले, तो भी वह बिना आपके '6-डिजिट पिन' के WhatsApp लॉगिन नहीं कर पाएगा।

 

कैसे करें: Settings > Account > Two-step verification > Enable.

 

2. साइलेंस अननोन कॉलर्स (Silence Unknown Callers)

आजकल अंतरराष्ट्रीय नंबरों (+92, +84 आदि) से फर्जी कॉल आने की बाढ़ आई हुई है। इस फीचर को ऑन करते ही अनजान नंबरों से आने वाली कॉल खुद-ब-खुद म्यूट हो जाएंगी।

 

कैसे करें: Settings > Privacy > Calls > Silence Unknown Callers.

 

3. चैट लॉक (Chat Lock)

अगर आप अपनी पर्सनल चैट को दूसरों की नजरों से छिपाना चाहते हैं, तो यह फीचर बेस्ट है। यह आपकी चुनिंदा चैट्स को एक अलग फोल्डर में सुरक्षित कर देता है जो आपके फिंगरप्रिंट या फेस आईडी से ही खुलता है।

 

कैसे करें: जिस चैट को लॉक करना है उस पर लॉन्ग प्रेस करें > Chat Lock पर क्लिक करें।

 

4. पासकी (Passkeys)

पासवर्ड भूलने की झंझट खत्म! 'पासकी' फीचर के जरिए आप अपने फोन के बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक) का इस्तेमाल कर WhatsApp में लॉगिन कर सकते हैं। यह हैकर्स के लिए सेंध लगाना नामुमकिन बना देता है।

 

5. 'एडवांस' प्राइवेसी – आईपी एड्रेस प्रोटेक्शन

क्या आप जानते हैं कि कॉल के दौरान कोई आपकी लोकेशन ट्रैक कर सकता है? 'Protect IP Address in Calls' फीचर को ऑन करने से आपकी लोकेशन और आईपी एड्रेस पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

 

कैसे करें: Settings > Privacy > Advanced > Protect IP Address in Calls.

 

6. डिसेपियरिंग मैसेज (Disappearing Messages)

अगर आप चाहते हैं कि आपकी चैट एक निश्चित समय के बाद खुद डिलीट हो जाए, तो इसे ऑन करें। यह डेटा लीक होने की स्थिति में आपकी पुरानी चैट को सुरक्षित रखता है।

 

7. प्रोफाइल फोटो और स्टेटस प्राइवेसी

अपनी प्रोफाइल फोटो और स्टेटस को हमेशा 'My Contacts' पर रखें। इससे स्कैमर्स आपकी फोटो का इस्तेमाल कर आपके रिश्तेदारों को ठगने (Impersonation Scam) की हिम्मत नहीं कर पाएंगे।

 

8. ग्रुप इनविटेशन कंट्रोल

अक्सर ठग आपको अनजान ग्रुप्स में जोड़कर निवेश या जॉब स्कैम का झांसा देते हैं। प्राइवेसी सेटिंग में जाकर 'Groups' को 'My Contacts' पर सेट करें, ताकि कोई भी एरा-गैरा आपको ग्रुप में न जोड़ सके। Edited by: Sudhir Sharma

Artificial Intelligence Rules : 20 फरवरी से AI नियम सख्त: बिना लेबल AI कंटेंट नहीं चलेगा, डीपफेक तुरंत हटाने का आदेश

केंद्र सरकार ने मंगलवार को डीपफेक सहित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार और बनावटी कंटेंट के मैनेजमेंट को लेकर ऑनलाइन मंचों के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। इसके तहत एक्स और इंस्टाग्राम जैसे मंचों को किसी सक्षम अधिकारी या अदालतों द्वारा निर्देशित की गई ऐसी किसी भी सामग्री को 3  घंटे के अंदर हटाना होगा। सरकार ने एआई जनरेटेड डीपफेक सामग्री को लेकर आईटी नियमों को सख्त कर दिया है। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अब अदालती आदेश पर 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट हटाना होगा। 

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इन नए संशोधनों में एआई से बनाए गए कंटेंट की अनिवार्य लेबलिंग और यूजर्स की शिकायतों के त्वरित निवारण का भी प्रावधान किया गया है। नियमों के मुताबिक एआई सामग्री की अनिवार्य रूप से लेबलिंग जरूरी है। बनावटी सामग्री बनाने या साझा करने की सुविधा देने वाले मंच को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सामग्री पर स्पष्ट रूप से और प्रमुखता से लेबल लगाया जाए। जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां इसे स्थायी मेटाडेटा या पहचानकर्ताओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए। 

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अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मध्यवर्ती (इंटरमीडियरीज) एक बार एआई लेबल या मेटाडेटा लगाए जाने के बाद उन्हें हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं दे सकते। आईटी नियमों के तहत गैरकानूनी कार्यों के निर्धारण के लिए एआई-जनित सामग्री को अन्य सूचनाओं के समान माना जाएगा। सोशल मीडिया मंच को सरकारी या अदालती आदेशों पर अब 36 घंटे के बजाय तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा यूजर्स  की शिकायतों के निवारण की समय-सीमा भी कम कर दी गई है।  Edited by: Sudhir Sharma