असम बाढ़ पीड़ितों के लिए हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, झारखंड सरकार देगी 3 करोड़ रुपए की मदद

Jharkhand CM announces rs 3 crore relief for flood victims

असम में आई विनाशकारी बाढ़ से कई गांव तबाह हो गए। नदियां उफान पर है और सड़कों पर पानी भरा हुआ है। वर्षा जन्य हादसों में अब तक 91 लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 3 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। 

 

सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि असम में आई विनाशकारी बाढ़ से उत्पन्न गंभीर संकट से मैं अत्यंत व्यथित हूं। तथा इस आपदा में हुई जन-धन की अपूरणीय क्षति पर झारखंड की जनता की ओर से प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में झारखंड सरकार और राज्य की जनता असम के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। राहत एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग की भावना से झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष, असम में 3 करोड़ रुपए की सहायता राशि का योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि मैं झारखंड के सभी सक्षम नागरिकों एवं संस्थाओं से भी आग्रह करता हूं कि वे यथासंभव आगे बढ़कर असम के बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता करें। संकट के इस समय एक-दूसरे का हाथ थामना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। असम के लोगों के धैर्य, साहस और सेवा-भाव को मेरा नमन। मां कामाख्या से प्रार्थना है कि असम शीघ्र इस प्राकृतिक आपदा से उबरकर सामान्य जनजीवन की ओर लौटे।

 

सीएम सोरेन ने कहा कि मुझे विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों से असम शीघ्र इस संकट से उबर जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर झारखंड हर संभव सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहेगा। उन्होंने झारखंड की जनता की ओर से असम के सभी प्रभावित परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना व्यक्त की।

कई राज्यों में आफत की बारिश और बाढ़ का अलर्ट, जानें आपके राज्य का हाल

Weather Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 7 जुलाई 2026 को देश के विभिन्न राज्यों में मानसून के तेजी से सक्रिय होने और कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश, जलभराव व बाढ़ जैसी स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है। पश्चिम भारत के तटीय इलाकों से लेकर उत्तर भारत के मैदानी व पहाड़ी क्षेत्रों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट दिया गया है। 

उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम? 

दिल्ली और एनसीआर में आसमान में बादल छाए रहने और मध्यम स्तर की बारिश की संभावना है। नमी के कारण तापमान 33–35°C के आसपास रहेगा, जिससे उमस महसूस हो सकती है। पश्चिमी यूपी में कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश (7–11 सेमी) दर्ज की जा सकती है। पूर्वी यूपी में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का अनुमान है। पहाड़ी राज्यों- उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश भूस्खलन (Landslide) और नदियों के उफान पर रहने का अलर्ट है। दोनों राज्यों में अनेक स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश (12–20 सेमी) की चेतावनी दी गई है। दूसरी ओर, मानसून के आगे बढ़ने के साथ ही पंजाब और हरियाणा के अधिकांश जिलों में गरज के साथ बारिश की संभावना है। 

मुंबई ठाणे में बारिश का रेडअलर्ट

कोंकण, मुंबई, ठाणे और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश का ऑरेंज/रेड अलर्ट जारी किया गया है। मुंबई के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। गुजरात रीजन और सौराष्ट्र के कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश और 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ में कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है।

कर्नाटक और केरल में मूसलाधार बारिश

दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक (मंगलोर, उडुपी) और केरल में मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यहां तेज हवाओं के साथ समुद्र में ऊंची लहरें उठने की चेतावनी दी गई है। तमिलनाडु और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होगी। हालांकि, दिन के समय तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहने और उमस बढ़ने की संभावना है।

पूर्वोत्तर में बाढ़ का खतरा

असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। झारखंड और ओडिशा पर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा और बिहार के कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) का अलर्ट है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि पहाड़ी क्षेत्रों और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर रहें। 

राहुल गांधी ने अपनी डॉग नूरी के साथ शेयर किया वीडियो, कहा, मां देखेगीं तो नाराज होंगी, लेकिन मैनेज कर लेंगे

Rahul Gandhi with noorie

कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक खास वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी मां सोनिया गांधी के पालतू डॉगी नूरी के साथ समय बिताते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के जरिए कांग्रेस ने लोगों से बेजुबान जानवरों के प्रति प्यार, सम्मान और दया का भाव रखने की अपील की है।

कांग्रेस ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, हर जानवर प्यार, सम्मान और अपनापन पाने का हकदार है और आज नूरी पहली बार सोशल मीडिया के जरिए सामने आई है।


बता दें कि राहुल गांधी पहले भी कई बार जानवरों के अधिकार और उनकी देखभाल को लेकर अपनी बात रखते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि जानवरों को भी इस धरती पर इंसानों के बराबर सम्मान के साथ रहने का अधिकार है। नूरी जैक रसेल टेरियर नस्ल की एक डॉगी है। राहुल गांधी उसे गोवा से अपनी मां सोनिया गांधी के लिए सरप्राइज गिफ्ट के तौर पर लेकर आए थे। हाल ही में राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर Ask Me Anything सेशन शुरू किया था। उन्होंने छात्रों और Gen-Z से कहा था कि वे उनसे कोई भी सवाल पूछ सकते हैं और वह इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए उसका जवाब देंगे।

मां गुस्‍सा होगीं लेकिन कोई बात नहीं: राहुल गांधी ने कहा कि जानवरों को पृथ्वी पर बराबर सम्मान के साथ रहने का हक है। इसमें उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी के डॉग नूरी को दिखाते हुए कहा कि मैंने नूरी के साथ वीडियो बनाया है, इस पर वो (मां) गुस्सा होंगी। लेकिन कोई बात नहीं मैनेज कर लिया जाएगा।

सावन में जरूर करें चमोली के प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर के दर्शन, CM धामी की श्रद्धालुओं से अपील

gopeshwar temple chamoli

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के पावन महीने में चमोली स्थित प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर के दर्शन करने की अपील की है। जानिए मंदिर का इतिहास, वास्तुकला, धार्मिक महत्व और यहां पहुंचने का पूरा मार्ग। ALSO READ: श्रावण में जागेश्वर धाम का करें दर्शन: देवदार के जंगलों के बीच बसे 224 प्राचीन शिव मंदिर, क्या बोले सीएम धामी?

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि चमोली जनपद के गोपेश्वर में स्थित प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का अनुपम केंद्र है। प्रकृति की गोद में स्थित इस पावन धाम में महादेव के दर्शन मन को असीम शांति और एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति से भर देते हैं।

उन्होंने कहा कि पवित्र सावन मास में चमोली आगमन पर श्री गोपीनाथ मंदिर में देवाधिदेव महादेव के दर्शन कर उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें। ALSO READ: उत्तराखंड आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर, जागेश्वर से कैंची धाम तक श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

अपनी प्राकृतिक सुंदरता तथा ताजे और शांत वातावरण के कारण गोपेश्वर पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केन्द्र रहा है। भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के अलावा वैतरणी कुंड, बिना प्रतिमाओं के मंदिर समूह तथा बांज के वृक्ष अन्य दर्शनीय स्थल हैं। 

 

गोपीनाथ मंदिर अपने वास्तु के कारण अलग से पहचाना जाता है। इसका एक शीर्ष गुम्बद और 30 वर्ग फुट का गर्भगृह है, जिस तक 24 द्वारों से पहुंचा जा सकता है। मंदिर के आंगन में एक 5 मीटर ऊंचा त्रिशूल है, जो 12 वीं शताब्दी का है और अष्ट धातु का बना है। ALSO READ: CM धामी ने बताया नैनीताल के मुक्तेश्वर महादेव मंदिर का महत्व, जहां शिव भक्ति के साथ दिखता है हिमालय का अद्भुत नजारा

 

कैसे जाएं गोपेश्‍वर?

जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से गोपेश्वर की दूरी 225 किमी है। गोपेश्वर से निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन एनएच 58 पर गोपेश्वर से 205 किमी की दूरी पर स्थित है। ऋषिकेश भारत के प्रमुख स्थलों के साथ रेलवे नेटवर्क से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और कई अन्य स्थलों से गोपेश्वर के लिए टैक्सी और बसें आसानी से उपलब्ध रहती हैं।

कर्मचारियों-अधिकारियों ने किया मुख्यमंत्री का अभिनंदन, सीएम डॉ. मोहन बोले- आपके खिले चेहरे देखकर आनंद आता है

भोपाल/छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शुक्रवार को छिंदवाड़ा के एफडीडीआई ऑडिटोरियम में अभिनंदन किया गया। कई विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों ने प्रमोशन की खुशी में उनका स्वागत किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार कई तरह के काम करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 साल की यात्रा में देश दुनिया के सामने अलग पहचान बना चुका है। सभी क्षेत्रों में लगातार विकास हो रहा है। लगातार जन-कल्याणकारी योजनाओं से जनता का कल्याण हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश वो निर्णय भी ले रहा है, जिन्हें लेने में लोग हिचकते हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छिंदवाड़ा के नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए। बता दें, छिंदवाड़ा में 1281 अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है।  

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब से हमारी सरकार बनी है, तब से हमने भी जनता के कल्याण के लिए कठोर निर्णय लिए। गरीब-युवा-महिला-किसान सब वर्गों के कल्याण के लिए सरकार हमारे अधिकारियों-कर्मचारियों के जरिये पूरी ताकत से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारे अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रमोशन का मामला कई सालों से अटका हुआ था। हमने कहा चाहे जो हो जाए हम उनका हक उनको दिलाकर रहेंगे। यह काम करने में कई तरह की बाधाएं आईं।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जब बाधाएं ज्यादा हो गईं, तो हमने कहा जो होगा सो होगा, देखेंगे। उसके बाद जो सालों से नहीं हुआ, वो 4 और 8 दिन में हो गया।

 

हमेशा रहें सकारात्मक-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब वो विभागों से जानकारी ले रहे थे, तब कई अधिकारी-कर्मचारी ये भी भूल गए थे डीपीसी कैसे होती है। इस तरह प्रमोशन की प्रकिया पर ही प्रश्न खड़ा हो गया था। आज आपके खिलते चेहरे हमें आनंद दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ही काम करते आदमी ऊबने लगता है, उसके मन में निराशा आती है। इसलिए हमेशा सकारात्मक रहने का प्रयास करना चाहिए।  उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों से कहा कि जो प्रमोशन के लिए बच गए हैं, वे चिंता न करें, सरकार उनका भी ध्यान रखेगी। 

 

समस्याओं का करेंगे त्वरित निराकरण-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हर विभाग में समान रूप से भर्तियां होंगी। अकेले पुलिस विभाग में 2 साल में 18 हजार भर्तियां होंगी। उसमें एक हजार ड्राइवरों की भर्ती होगी। हमने 7 हजार के आसपास प्रोफेसर की भर्ती की है। स्कूल शिक्षा के दस हजार से ज्यादा पद भरे गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने दोबारा भर्तियां निकाली हैं। पिछले ढाई साल में हम लगभग 1 लाख भर्तियां कर चुके हैं। और ढाई लाख करेंगे।

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की शुरुआत छिंदवाड़ा से होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। हमारे देश में बैठकों का सिलसिला तो लगातार चलता रहता है, लेकिन हमने यह निर्णय लिया है कि प्रत्येक शुक्रवार को कोई भी अधिकारी कार्यालय में नहीं बैठेगा। सभी अधिकारी और जनप्रतिनिधि क्षेत्र में रहकर आमजन के बीच जाएंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं भी इस अभियान में सक्रिय रूप से सहभागी बन रहा हूं और इसकी शुरुआत आज छिंदवाड़ा से हो रही है। मेरे साथ सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए संकल्पित होकर कार्य करेंगे। यही मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का मूल उद्देश्य है।

क्या ये भूतिया कुआं है? गुजरात के इस कुएं में हो रही अजीब हलचल, जानिए क्या है सच

गुजरात के मोरबी जिले के वीरपरडा गांव में एक 18 फीट गहरा कुआं इन दिनों लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। पिछले कई दिनों से इस कुएं का पानी बिना रुके समुद्र की लहरों की तरह ऊपर-नीचे हो रहा है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद दूर-दूर से लोग इस अनोखे नजारे को देखने पहुंच रहे हैं। शुरुआत में लोगों ने इसे भूकंप, भूगर्भीय हलचल और यहां तक कि चमत्कार या अलौकिक घटना से जोड़ना शुरू कर दिया, लेकिन अब भूवैज्ञानिकों ने इसकी अलग ही वजह बताई है।

 

समुद्र जैसी लहरें उठने से मचा कौतूहल, वायरल हुआ वीडियो

 

मोरबी तालुका के वीरपरडा गांव में किसान प्राणजीवनभाई सदारिया के खेत में बने इस कुएं का निर्माण करीब तीन महीने पहले ही हुआ था। करीब 30 फीट व्यास और 18 फीट गहरे इस कुएं में 2 अगस्त से लगातार पानी में तेज हलचल देखी जा रही है। कई बार पानी लहरों के साथ किनारों तक पहुंच जाता है और बाहर भी छलकने लगता है।

 

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आसपास के गांवों के लोग, राहगीर और पर्यटक बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचने लगे। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर शांत खड़े कुएं में समुद्र जैसी लहरें कैसे उठ रही हैं।

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लोग बोले- कहीं भूकंप का संकेत तो नहीं?

 

कुएं में लगातार उठती लहरों को देखकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे दैवीय चमत्कार बताया, जबकि कई लोगों को आशंका थी कि कहीं यह किसी भूकंप या भूगर्भीय हलचल का संकेत तो नहीं है। कुछ स्थानीय लोगों ने तो इसे अलौकिक घटना तक मान लिया।

 

हालांकि जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है और वैज्ञानिक कारणों का इंतजार करने को कहा है।

 

भूवैज्ञानिक ने बताया असली कारण

 

मोरबी के जिला भूवैज्ञानिक जगदीश वढेर के अनुसार, शुरुआती जांच में किसी भी तरह की भूकंपीय गतिविधि (Seismic Activity) के सबूत नहीं मिले हैं।

 

उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण भूजल (Groundwater) का स्तर तेजी से बढ़ा है। इसके चलते जमीन के भीतर चट्टानों के सूक्ष्म छिद्रों (Pore Spaces) में फंसी हवा बाहर निकल रही है। यही हवा पानी की सतह पर दबाव बनाकर लहरें पैदा कर रही है।

 

भूवैज्ञानिक ने यह भी बताया कि कुआं सड़क के किनारे स्थित है, जहां हवा का प्रवाह अधिक रहता है। इससे भी पानी की सतह पर हलचल बढ़ सकती है।

भूकंप से कोई संबंध नहीं, संस्थान ने भी दी पुष्टि

 

जगदीश वढेर ने बताया कि इस मामले में गांधीनगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सीस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR) से भी संपर्क किया गया। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि इलाके में कोई सक्रिय फॉल्ट लाइन (Active Fault Line) या भूकंपीय गतिविधि नहीं है। यानी इस घटना का भूकंप से कोई संबंध नहीं है।

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अब गुजरात ग्राउंडवॉटर रिसर्च इंस्टीट्यूट करेगा विस्तृत जांच

 

मोरबी के जिला कलेक्टर स्वप्निल खरे ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद जिला भूवैज्ञानिकों ने मौके का निरीक्षण किया है। प्रारंभिक जांच में पानी की हलचल का कारण फंसी हुई हवा (Trapped Air) माना गया है।

 

हालांकि अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए गुजरात ग्राउंडवॉटर रिसर्च इंस्टीट्यू की टीम को विस्तृत अध्ययन के निर्देश दिए गए हैं। टीम अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद इस अनोखी घटना की वैज्ञानिक पुष्टि हो सकेगी।

 

फिलहाल बना हुआ है आकर्षण का केंद्र

 

जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक यह रहस्यमयी कुआं लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इसे किसी चमत्कार, अलौकिक घटना या भूकंप से जोड़ने की बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। शुरुआती जांच साफ संकेत देती है कि यह प्राकृतिक भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और जमीन के भीतर फंसी हवा के दबाव का परिणाम हो सकता है।

 

राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम AMA में बताया, कौन हैं उनका पसंदीदा नेता?

rahul gandhi says who is his favourite bjp leader

इंस्टाग्राम पर 'Ask Me Anything' सेशन के दौरान राहुल गांधी ने अपने पसंदीदा नेता का नाम बताकर राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। भाजपा में अपना पसंदीदा नेता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया। ALSO READ: Gen Z पर मोहन भागवत के बयान से सियासी बवाल, प्रियंका गांधी बोलीं- छात्रों को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं

 

उन्होंने अमरिंदर सिंह की जमकर सराहना करते हुए कहा कि मैंने उनके साथ लंबे समय तक काम किया है। वे बहुत कूल है। वे मिलिट्री हिस्ट्री में एक्सपर्ट हैं। इसलिए मैं उनको काफी पसंद करता हूं। अंत में वे हेलो अंकल अमरिंदर कहते हैं।

गौरतलब है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह 2 बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे हैं। 2021 तक वे कांग्रेस में थे। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने 27 अक्टूबर 2021 को अपनी नई पार्टी Punjab Lok Congress बनाई। सितंबर 2022 को उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर लिया। ALSO READ: NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा! CBI का दावा- NTA के अधिकारियों ने ही लीक किए थे प्रश्नपत्र

 

डॉग नूरी के साथ शेयर किया वीडियो

उनसे डॉग लव के बारे में भी सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि जानवरों को पृथ्वी पर बराबर सम्मान के साथ रहने का हक है। इसमें उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी के डॉग नूरी को भी दिखाया। राहुल ने कहा कि मैंने नूरी के साथ वीडियो बनाया है, इस पर वो गुस्सा होंगी। लेकिन कोई बात नहीं मैनेज कर लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर Ask Me Anything सेशन शुरू किया है। उन्होंने कहा था कि इसमें छात्र और Gen-Z उनसे जो भी सवाल करेंगे, वो उसका जवाब इंस्टाग्राम पर देंगे।

80वां स्वतंत्रता दिवस 2026: 9 अगस्त क्यों है भारत के इतिहास का सबसे अहम दिन? जानिए भारत छोड़ो आंदोलन की कहानी

History of Quit India Movement : Mahatma Gandhi, the Red Fort, and the Tricolour flag in the picture.

Quit India Movement: 15 अगस्त 1947 को भारत की आज़ादी का सूर्य उदित हुआ, लेकिन इस स्वतंत्रता के पीछे वर्षों का कठोर संघर्ष छिपा था। इसी दीर्घकालिक संग्राम में 9 अगस्त 1942 का दिन ब्रिटिश हुकूमत के ताबूत में अंतिम कील साबित हुआ, जब महात्मा गांधी के आह्वान पर देश भर में 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) का आगाज़ हुआ।

 

1. पृष्ठभूमि: क्यों शुरू हुआ यह आंदोलन?

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों की सहमति के बिना ही भारत को युद्ध में झोंक दिया था। इससे भारतीय जनमानस और शीर्ष नेताओं में तीव्र असंतोष पनपा। जब ब्रिटिश सरकार ने भारतीय नेताओं की स्वायत्तता संबंधी माँगों को खारिज कर दिया, तब महात्मा गांधी ने अंग्रेज़ी शासन से पूर्ण मुक्ति के लिए अंतिम और निर्णायक युद्ध का निश्चय किया।

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2. ऐतिहासिक घटनाक्रम: प्रस्ताव और 'करो या मरो' का आह्वान

8 अगस्त 1942 (मुंबई): बॉम्बे (मुंबई) के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अधिवेशन में ऐतिहासिक 'भारत छोड़ो प्रस्ताव' पारित किया गया।

महात्मा गांधी का संदेश: इसी मंच से बापू ने लगभग 70 मिनट का प्रभावशाली भाषण दिया और देशवासियों को 'करो या मरो' का अमर मंत्र दिया- अर्थात् या तो हम भारत को आज़ाद कराएंगे या इस प्रयास में अपने प्राणों की आहुति दे देंगे।

 

3. ब्रिटिश सरकार की दमनकारी कार्रवाई और 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर'

9 अगस्त 1942 की भोर: आंदोलन को अंकुरित होने से पहले ही कुचलने के लिए ब्रिटिश प्रशासन ने 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर' चलाया।

प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी: महात्मा गांधी को पुणे के आगा खां महल में नज़रबंद किया गया, जबकि कांग्रेस कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों को अहमदनगर दुर्ग में कैद कर दिया गया।

संस्था पर प्रतिबंध: ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को अवैध संस्था घोषित कर दिया, सभी जुलूसों पर रोक लगा दी और देश भर में हो रहे विरोध के लिए गांधी जी को जिम्मेदार ठहराया।

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4. जन-नेतृत्व का अभ्युदय और उग्र प्रदर्शन

शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन थमा नहीं, बल्कि जनता ने स्वयं इसकी बागडोर संभाल ली:

स्वतःस्फूर्त भागीदारी: छात्रों, मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों ने बिना किसी केंद्रीय मार्गदर्शन के देशव्यापी हड़तालें और प्रदर्शन आयोजित किए।

जन-आक्रोश का विस्फोट: दमनकारी लाठी-गोली की नीति के जवाब में जनाक्रोश हिंसक रूप में भी बदला। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी तंत्र को निशाना बनाया- लगभग 250 रेलवे स्टेशन, 150 पुलिस थाने और 500 डाकघर क्षतिग्रस्त किए गए।

महिला शक्ति की मिसाल: स्वतंत्रता सेनानी अरुणा आसफ अली ने 9 अगस्त को पुलिस मुस्तैदी के बीच गोवालिया टैंक मैदान में निडर होकर तिरंगा फहराया। उन्हें इस अदम्य साहस के लिए 'अगस्त क्रांति की ग्रैंड ओल्ड लेडी' की उपाधि दी गई।

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5. आंदोलन के परिणाम और स्वतंत्रता का मार्ग

भारी क्षति और जनसमर्पण: सरकारी आँकड़ों के अनुसार 940 लोग शहीद हुए और 1,630 घायल हुए, जबकि वर्ष के अंत तक 60,000 से अधिक गिरफ्तारियाँ हुईं। अनधिकृत आँकड़ों के अनुसार इस संग्राम में 10,000 से अधिक लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया।

अंग्रेज़ों की विवशता: इस आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत को यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि भारतीय जनता को अब अधिक समय तक ग़ुलाम बनाए रखना असंभव है। इसी जनाक्रोश के दबाव में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जो अंततः लॉर्ड माउंटबेटन के वायसराय काल में 15 अगस्त 1947 को भारत की आज़ादी के रूप में परिणत हुई।

 

6. एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य: 14-15 अगस्त 1947 का समय

जहाँ एक ओर 14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को नई दिल्ली में पं. जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक भाषण के साथ आज़ादी का जश्न मनाया जा रहा था, वहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इस उत्सव से दूर थे। वे उस समय बंगाल के नोआखाली में सांप्रदायिक हिंसा को रोकने और शांति स्थापित करने के लिए अनशन पर बैठे हुए थे।

 

निष्कर्ष: 'अगस्त क्रांति दिवस' का संदेश

प्रतिवर्ष 9 अगस्त को संपूर्ण देश 'अगस्त क्रांति दिवस' के रूप में मनाता है। यह दिन भारत के अदम्य साहस, अभूतपूर्व राष्ट्रवाद और उन अनगिनत अमर शहीदों के प्रति हमारी असीम श्रद्धा का प्रतीक है, जिनकी बदौलत आज हम एक स्वतंत्र राष्ट्र में साँस ले रहे हैं।

 

Gen Z पर मोहन भागवत के बयान से सियासी बवाल, प्रियंका गांधी बोलीं- छात्रों को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं

संघ प्रमुख मोहन भागवत Gen Z बयान पर सियासी बवाल मचा हुआ है। प्रियंका गांधी से लेकर वेणुगोपाल तक कई कांग्रेस नेताओं ने मोहन भागवत के बयान पर सवाल उठाए। प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों को मोहन भागवत के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। वहीं केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अगर उन्हें छात्रों की सच में परवाह है, तो उन्हें छात्रों पर हुए अत्याचारों की निंदा करनी होगी। ALSO READ: Top News: 15 राज्यों में भारी बारिश अलर्ट, मेटा पर 5400 करोड़ का जुर्माना, Gen-Z पर क्या बोले मोहन भागवत

 

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने छात्रों व युवाओं के साथ RSS प्रमुख मोहन भागवत की बातचीत पर कहा कि उन्हें मोहन भागवत से किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

क्या बोले वेणुगोपाल?

RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' इवेंट पर कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि अगर उन्हें 'जेन जी' की सच में परवाह है, तो उन्हें भारत के गृह मंत्री से इस्तीफा देने के लिए कहना चाहिए। वरना, केंद्रीय गृह मंत्री को कम से कम संसद में आकर छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि RSS सरकार को नियंत्रित कर रही है। अगर उन्हें छात्रों की सच में परवाह है, तो उन्हें छात्रों पर हुए अत्याचारों की निंदा करनी होगी। पेलेट गन्स का इस्तेमाल किया गया था, और छात्र इसके लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वह इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? यह सब बस दिखावा है।

 

क्या बोले थे मोहन भागवत?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने देश की युवा पीढ़ी का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि वह Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करेंगे। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों को राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। युवाओं की बात को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद के जरिए उनकी चिंताओं को समझने की जरूरत है। ALSO READ: Mohan Bhagwat : Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा, छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी न बताएं, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, चीन और पाकिस्तान को लेकर क्या कहा

 

मुंबई में करीब 2,000 Gen Z और Gen Alpha सदस्यों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने और सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि संवाद के लिए दोनों पक्षों के बीच अपनापन और आपसी सम्मान जरूरी है।

 

NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा! CBI का दावा- NTA के अधिकारियों ने ही लीक किए थे प्रश्नपत्र

cbi investigation on neet paper leak 2026

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच में खुलासा हु्आ है कि पेपर सेट करने वाले राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (NTA) के अधिकारियों ने ही पेपर लीक किए थे। CBI का आरोप है कि आरोपियों का मकसद पैसे कमाना और कुछ खास कैंडिडेट्स की मदद करना था। ALSO READ: Mohan Bhagwat : Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा, छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी न बताएं, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

 

CBI ने 13 आरोपियों को नामजद किया है जिनमें NTA के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया कि यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला सुनियोजित नेटवर्क था। इसमें परीक्षा से जुड़े लोगों के साथ ही कोचिंग संचालक, बिचौलिए और दलाल शामिल थे।

 

कई महीने पहले शुरू हो गया था खेल

जांच एजेंसी के अनुसार, पेपर लीक का पूरा खेल परीक्षा से कई महीने पहले ही शुरू हो गया था। कुछ लोगों ने पहले से योजना बनाकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया जिसके जरिए गोपनीय प्रश्नपत्र बाहर तक पहुंचाए गए। यह एक संगठित आपराधिक साजिश थी जिसमें अलग-अलग राज्यों के कई लोग जुड़े हुए थे। ALSO READ: Meta पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना, बच्चों की मानसिक सेहत पर कोर्ट का बड़ा फैसला

 

NTA के 3 विषय विशेषज्ञों को बनाया आरोपी

CBI ने अपनी चार्जशीट में NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों को भी आरोपी बनाया है। इनमें बॉटनी, केमिस्ट्री और फिजिक्स के विशेषज्ञ शामिल हैं। इन विशेषज्ञों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए गोपनीय प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई।

 

कैसे लीक हुए पेपर?

जांच में पता चला कि लीक हुए प्रश्नपत्र  WhatsApp, Telegram पर PDF फाइल और फोटो के जरिए शेयर किए गए। लीक हुए प्रश्न पहले NTA के विषय विशेषज्ञों से निजी ऑपरेटरों और बिचौलियों तक पहुंचे। इसके बाद इन्हें अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। जब्त किए गए मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम डिजिटल सबूत मिले। जांच के दौरान मोबाइल में NEET 2026 नाम का एक WhatsApp ग्रुप भी मिला।