यूपी में निवेश का बड़ा मौका, 18 प्रीमियम बस स्टेशन होंगे विकसित, 1,100 रुपए करोड़ से ज्यादा के निवेश की तैयारी

योगी सरकार में उत्तर प्रदेश के परिवहन ढांचे को आधुनिक और व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा  में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने पीपीपी मॉडल के तहत  फेज-2 में प्रदेश के 18 आधुनिक प्रीमियम बस स्टेशनों एवं वाणिज्यिक परिसरों के विकास के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। इसके  जरिए निवेशकों को परिवहन अवसंरचना के साथ-साथ रिटेल, होटल, फूड कोर्ट, ऑफिस स्पेस, मल्टीप्लेक्स और अन्य व्यावसायिक  गतिविधियों में निवेश का अवसर मिलेगा।

 

यूपीएसआरटीसी के मुताबिक इन परियोजनाओं में 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावनाएं हैं। प्रस्तावित बस स्टेशन  आधुनिक यात्री सुविधाओं से युक्त होने के साथ शहरों के प्रमुख एवं व्यावसायिक स्थानों पर विकसित किए जाने की योजना है।  इससे बस यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ संबंधित शहरों में आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति मिलने  की उम्मीद है।

 

90 वर्ष तक की कंसेशन अवधि का प्रावधान

योजना की प्रमुख विशेषताओं में 90 वर्ष तक की कंसेशन अवधि शामिल है। निवेशकों के लिए दीर्घकालिक एवं स्थिर व्यावसायिक  अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परियोजनाओं में रिटेल, होटल, फूड कोर्ट, ऑफिस स्पेस और मल्टीप्लेक्स जैसी गतिविधियों के  लिए वाणिज्यिक क्षेत्र (कॉमर्शियल स्पेस) विकसित किए जाएंगे। इससे बस स्टेशन केवल आवागमन के केंद्र न रहकर आधुनिक  ट्रांजिट-कमर्शियल हब के रूप में विकसित हो सकेंगे।

 

10 अगस्त तक जमा होगी निविदा

निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे तक निर्धारित की गई है। निविदा से संबंधित विस्तृत  जानकारी यूपीएसआरटीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जबकि टेंडर दस्तावेज उत्तर प्रदेश ई-टेंडर पोर्टल (  http://etender.up.nic.in/ ) पर देखे जा सकते हैं।

पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को ही क्यों? जानिए भारत में इस दिन कहां मनाया जाता है खास समारोह

14 August Pakistani Independence Day

पाकिस्तान द्वारा भारत से एक दिन पहले, यानी 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने के पीछे मुख्य रूप से कानूनी, प्रशासनिक और धार्मिक कारण हैं। इसी के साथ ही भारत में एक ऐसी जगह भी है जहां पर 14 अगस्त को झंडा फहराया जाता है। चलिए जानते हैं ये रोचक जानकारी। 

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1. पाकिस्तान 14 अगस्त को क्यों मनाता है स्वतंत्रता दिवस?

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (Indian Independence Act, 1947): ब्रिटेन की संसद द्वारा पारित इस अधिनियम के अनुसार, दोनों देशों को 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि (12:00 AM) को ही कानूनी रूप से संप्रभुता हस्तांतरित की गई थी।

 

वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन का शेड्यूल: लॉर्ड माउंटबेटन को कराची में पाकिस्तान और नई दिल्ली में भारत, दोनों जगह सत्ता हस्तांतरण (Transfer of Power) समारोह में शामिल होना था। दोनों जगह एक ही दिन (15 अगस्त) उपस्थित होना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने 14 अगस्त 1947 को कराची जाकर मोहम्मद अली जिन्ना को सत्ता सौंपी। इसीलिए पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है, क्योंकि लॉर्ड माउंटबेटन ने 14 अगस्त को कराची जाकर सत्ता हस्तांतरित की थी ताकि वे 15 अगस्त को दिल्ली में उपस्थित रह सकें।

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समय का अंतर (Time Zone): 1947 में भारत और पाकिस्तान के समय मानक में अंतर था। जब 15 अगस्त की मध्यरात्रि को स्वतंत्रता घोषित हुई, तब भारतीय समयानुसार रात के 12:00 बज रहे थे, जबकि कराची/पाकिस्तान के समय के अनुसार रात के 11:30 बज रहे थे (जो कि 14 अगस्त की तारीख थी)।

 

रमजान की रात: 14 अगस्त 1947 की रात (27वां रमजान) इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार बेहद पवित्र रात ('शब-ए-कद्र') मानी जाती थी, इसलिए भी पाकिस्तान ने 14 अगस्त को आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस के रूप में अपनाया।

 

ध्यान दें: पाकिस्तान ने 1947 और 1948 में पहला और दूसरा स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही मनाया था और वहां के शुरुआती डाक टिकटों पर भी 15 अगस्त 1947 ही दर्ज था। जुलाई 1948 में कैबिनेट के फैसले के बाद इसे आधिकारिक तौर पर 14 अगस्त कर दिया गया।

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2. भारत में 14 अगस्त को झंडा कहां फहराया जाता है?

भारत में आधिकारिक राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही मनाया जाता है, लेकिन 14 अगस्त को निम्नलिखित विशिष्ट संदर्भों में तिरंगा फहराया जाता है और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं:-

 

बिहार के पूर्णिमा में: देश में एक ऐसा भी शहर है जहां स्वतंत्रता दिवस का जश्न 15 अगस्त की सुबह नहीं, बल्कि 14 अगस्त की आधी रात को ही शुरू हो जाता है? यह अनोखी परंपरा बिहार के पूर्णिया जिले में निभाई जाती है, जो हमें आजादी के उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाती है जब हमारा देश वास्तव में स्वतंत्र हुआ था। रत की आजादी की घोषणा 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को हुई थी। ठीक रात 12 बजकर 1 मिनट पर रेडियो पर यह घोषणा की गई कि अब भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है। 

 

पूर्णिया के स्थानीय लोगों के अनुसार, उस ऐतिहासिक क्षण को याद करते हुए, पूर्णिया के वीर स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह ने अपने साथियों रामरतन साह और शमशुल हक के साथ मिलकर एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने फैसला किया कि वे आजादी का जश्न उसी क्षण मनाएंगे जिस क्षण इसे घोषित किया गया था। उन्होंने 14 अगस्त की रात को ही पूर्णिया के झंडा चौक पर पूरे जोश और गर्व के साथ तिरंगा फहराया। उन्होंने मिठाई बांटकर और देशभक्ति के नारे लगाकर आजादी का पहला जश्न मनाया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

 

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (Partition Horrors Remembrance Day): भारत सरकार ने 2021 में 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' घोषित किया था। इस दिन देश भर के सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, राष्ट्रीय स्मारकों (जैसे- अटारी-वाघा बॉर्डर, लाल किला परिसर, और दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक) पर 1947 के विभाजन में अपनी जान गंवाने वाले लोगों की याद में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और राष्ट्रीय ध्वज फहराया/नमित रखा जाता है।

 

अटारी-वाघा सीमा (Atari-Wagah Border): पंजाब स्थित भारत-पाकिस्तान सीमा पर 14 और 15 अगस्त दोनों दिन बीएसएफ (BSF) द्वारा विशेष 'बीटिंग रिट्रीट' (Beating Retreat) समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।

 

तहलका से लेकर खुद की जिंदगी में यौन उत्पीड़न के तहलके तक, आखिर कौन हैं तरुण तेजपाल?

tarun tejpal

1980 पत्रकारिता से जुड़े थे तरुण तेजपाल।
1981 इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, आउटलुक में काम किया।
1982 साल 2000 में तहलका वेबसाइट शुरू की।

तरुण तेजपाल एक भारतीय पत्रकार, प्रकाशक और उपन्यासकार हैं। वे चर्चित खोजी समाचार पत्रिका 'तहलका' (Tehelka) के सह-संस्थापक और पूर्व प्रधान संपादक रह चुके हैं। उन्हें भारत में स्टिंग ऑपरेशन और खोजी पत्रकारिता के लिए एक समय जाना जाता था, लेकिन 2013 में एक महिला सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद वे कानूनी विवादों में घिर गए।

यौन उत्पीड़न मामला : नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी एक महिला सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले में तहलका के मामले में दोषी ठहराया था। उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। वर्ष 2021 में गोवा की एक सत्र अदालत ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने उस फैसले को पलट दिया और अगस्त 2026 में उन्हें इस मामले में बलात्कार (रेप) का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

दोषी ठहराये जाने के बाद क्‍या बोले थे तेजपाल?
कोर्ट से दोषी ठहराये जो के बाद तरूण तेजपाल ने कहा था, “मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है और इसके अलावा कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं। कृपया मेरे साथ नरमी बरतें”

कौन हैं तेजपाल : तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को पंजाब के जालंधर शहर में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके चलते उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला। तेजपाल ने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक (ग्रेजुएट) की पढ़ाई की है। तेजपाल की शादी साल 1985 में हुई थी और उनकी पत्नी का नाम गीता बत्रा है। दोनों कॉलेज में साथ थे। उनकी दो बेटियां हैं, एक का नाम टिया और दूसरी का कारा है।

पत्रकारिता के साथ पब्लिशर बने : 56 साल के तरुण तेजपाल भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार रहे हैं। उनके पास पत्रकारिता का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। साल 1980 में 'द इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप में नौकरी करते हुए उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद 'इंडिया-2000' नाम की एक मैगजीन में नौकरी करने के लिए वे नई दिल्ली आ गए।

पब्लिशिंग कंपनी 'इंडिया इंक' : 1984 में वे बतौर सीनियर सब-एडिटर 'इंडिया टुडे' मैगजीन के लिए काम करने लगे। 1994 में 'फाइनेंशियल एक्सप्रेस' को ज्वॉइन कर लिया। इसके बाद वे 'आउटलुक पत्रिका' के साथ जुड़े और अगले कई सालों तक वहीं काम करते रहे। इसी दौरान उन्होंने खुद की पब्लिशिंग कंपनी 'इंडिया इंक' शुरू की। ये वही कंपनी है, जिसने 1998 में अरुंधति रॉय का उपन्यास 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' छापा था। जिसे बुकर प्राइज मिला था।

तहलका शुरू किया : ‘आउटलुक’ छोड़ने के बाद मार्च 2000 में उन्होंने एक अन्य पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर ऑनलाइन इंवेस्टिगेटिव वेबसाइट ‘तहलका डॉट कॉम’ शुरू की। साल 2004 में ये एक टैब्लॉइड न्यूजपेपर में तब्दील हो गई, वहीं 2007 में इसे मैगजीन का रूप दे दिया गया।

Redmi का बड़ा धमाका, लांच किया सस्ता स्मार्टफोन, 8,000mAh बैटरी और 50MP कैमरा

Redmi Note 17

Xiaomi ने भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन Redmi Note 17 लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को TrueColour AMOLED डिस्प्ले, 8,000mAh की बड़ी बैटरी और Qualcomm Snapdragon चिपसेट के साथ पेश किया है। फोन में 50MP का मेन कैमरा दिया गया है। इसके अलावा Redmi Note 17 में Corning Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन, IP65 रेटिंग और मजबूत चेसिस जैसे फीचर्स मिलते हैं।

 

फोन को स्लिम और हल्के डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि HydroTouch 2.0 तकनीक रोजमर्रा की परिस्थितियों में स्क्रीन को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करती है।

 

Redmi Note 17 की कीमत और उपलब्धता

 

Redmi Note 17 को Dark Night, Arctic Blue और Starlight Purple कलर में लॉन्च किया गया है। यह दो स्टोरेज वेरिएंट में उपलब्ध होगा।

 

वेरिएंट MRP शुरुआती कीमत*

6GB + 128GB ₹27,999 ₹24,999

8GB + 128GB ₹30,999 ₹27,999

 

शुरुआती कीमत में SBI Card, Axis Bank और Kotak Bank के क्रेडिट कार्ड तथा EMI ट्रांजैक्शन पर मिलने वाला ₹3,000 का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट शामिल है।

 

कंपनी ग्राहकों को Jio True 5G के साथ 5TB JioAI Cloud स्टोरेज, 3 महीने का YouTube Premium Lite और 6 महीने के लिए Google One का 200GB क्लाउड स्टोरेज भी दे रही है।

 

Redmi Note 17 की बिक्री 13 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे (IST) से शुरू होगी। इसे mi.com, Amazon Specials और Xiaomi Retail के जरिए खरीदा जा सकेगा।

 

Redmi Note 17 के स्पेसिफिकेशंस

 

Redmi Note 17 में 6.99 इंच का FHD+ OLED डिस्प्ले दिया गया है। इसका रिजॉल्यूशन 2396×1080 पिक्सल है। डिस्प्ले में 120Hz रिफ्रेश रेट, 240Hz टच सैंपलिंग रेट और 1,800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिलती है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए Corning Gorilla Glass 7i दिया गया है।

 

परफॉर्मेंस के लिए फोन में Qualcomm Snapdragon 4 Gen 4 4nm SoC दिया गया है। इसमें ऑक्टा-कोर CPU है, जिसमें दो Cortex-A78 कोर 2.3GHz और छह Cortex-A55 कोर 2GHz की क्लॉक स्पीड पर काम करते हैं। ग्राफिक्स के लिए Adreno 613 GPU मिलता है।

 

फोन को 6GB और 8GB LPDDR4X RAM के साथ 128GB UFS 2.2 स्टोरेज में पेश किया गया है। स्टोरेज को microSD कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है।

 

Android 16 और HyperOS 3

 

Redmi Note 17 Android 16 पर आधारित Xiaomi के HyperOS 3 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है। कंपनी ने इसमें बेहतर और रिफाइंड सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस देने का दावा किया है।

 

कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन के रियर में 50MP का मेन कैमरा दिया गया है, जिसका अपर्चर f/1.8 है और इसके साथ LED फ्लैश मिलता है। यह कैमरा 1080p तक वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 8MP का फ्रंट कैमरा f/2.0 अपर्चर के साथ दिया गया है।

 

सिक्योरिटी के लिए फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलता है। इसके अलावा इसमें इंफ्रारेड सेंसर भी दिया गया है। ऑडियो के लिए बॉटम-पोर्टेड स्पीकर मिलता है। IP65 रेटिंग फोन को धूल और पानी के छींटों से सुरक्षा प्रदान करती है।

कनेक्टिविटी और बैटरी

 

कनेक्टिविटी के लिए Redmi Note 17 में 5G, Dual 4G VoLTE, Wi-Fi 6 (2.4GHz + 5GHz), Bluetooth 5.1, GPS + GLONASS और USB Type-C का सपोर्ट दिया गया है। फोन का डायमेंशन 169.7×79.14×8.45mm और वजन 225 ग्राम है। इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक 8,000mAh की बैटरी है। यह 45W फास्ट चार्जिंग और 22.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करती है। बड़ी बैटरी की वजह से यह फोन ज्यादा इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकता है।

स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर, हर विकासखंड में तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर

UP education reform: योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल शिक्षण संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत अब प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो शिक्षकों को तकनीक आधारित शिक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य विद्यालयों में उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण और गुणवत्तापूर्ण बनाना है। 

 

इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विकासखंड से एक शिक्षक को संदर्भदाता (मास्टर ट्रेनर) के रूप में नामित किया गया। इन संदर्भदाताओं का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण दो चरणों में आयोजित किया गया। प्रथम चरण का प्रशिक्षण 27 से 29 जुलाई तथा द्वितीय चरण का प्रशिक्षण 4 से 6 अगस्त तक संपन्न हुआ। अब यही प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर अपने-अपने विकासखंडों में शिक्षकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देंगे। प्रत्येक प्रशिक्षण बैच में अधिकतम 50 प्रतिभागी शामिल होंगे तथा प्रशिक्षण निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित किया जाएगा।

स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब का होगा प्रभावी उपयोग

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, इंटरैक्टिव डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, ई-कंटेंट तथा अन्य डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें तकनीक आधारित कक्षा-शिक्षण, डिजिटल प्रस्तुतीकरण, विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने तथा विषयों को अधिक रोचक और प्रभावी ढंग से पढ़ाने की आधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराया जाएगा। साथ ही एनबीडीआईयूपी (NBDIUP) पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल बोर्ड मैनुअल, इंस्टॉलेशन वीडियो, संचालन संबंधी ट्यूटोरियल तथा अन्य डिजिटल सामग्री का भी उपयोग कराया जाएगा।

डिजिटल शिक्षा को मिलेगी नई मजबूती

योगी सरकार का उद्देश्य विद्यालयों में स्थापित डिजिटल संसाधनों को केवल उपकरण तक सीमित न रखकर उन्हें दैनिक शिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना है। प्रशिक्षित शिक्षक स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब का अधिक प्रभावी उपयोग कर विद्यार्थियों के लिए विषयों को अधिक सरल, दृश्यात्मक और सहभागितापूर्ण बना सकेंगे। इससे बच्चों की समझ, सीखने की गति और कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी को भी नई मजबूती मिलेगी। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप डिजिटल एवं अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष फोकस

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एस्केलेशन मैट्रिक्स, प्रेरणा मॉड्यूल तथा विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से डिजिटल संसाधनों में आने वाली तकनीकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जा रही है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी का प्री-टेस्ट और पोस्ट-टेस्ट कराया जाएगा। प्रशिक्षण का ऑनलाइन पर्यवेक्षण राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला समन्वयकों को प्रशिक्षण की नियमित निगरानी और शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशिक्षण सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी तथा प्रत्येक बैच का फीडबैक लेकर गुणवत्ता का सतत मूल्यांकन किया जाएगा।

तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए सुदृढ़ व्यवस्था

महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और अन्य डिजिटल शिक्षण संसाधनों के संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आने पाए। इसके लिए विभिन्न सेवा प्रदाताओं के जिला, राज्य एवं उच्च स्तर के अधिकारियों के संपर्क विवरण उपलब्ध कराए गए हैं। किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान निर्धारित एस्केलेशन मैट्रिक्स के अनुरूप समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही सभी जनपदों को 30 अगस्त 2026 तक ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल शिक्षण में दक्ष बनाना है लक्ष्य 

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य केवल विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल शिक्षण में दक्ष बनाना है। प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल शिक्षण में दक्ष बनाते हुए कक्षा शिक्षण में डिजिटल संसाधनों का अधिकतम प्रयोग कराया जाना है। जब शिक्षक तकनीक का प्रभावी उपयोग करेंगे, तभी विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण, रोचक और सहभागितापूर्ण शिक्षा पहुंचेगी। यह प्रशिक्षण अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप डिजिटल शिक्षा को विद्यालयों की नियमित शिक्षण प्रक्रिया का मजबूत आधार बनाएगा।

गुजरात में एनालॉग पनीर, बटर और चीज़ पर लगा बैन, स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने किया बड़ा ऐलान

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गुजरात सरकार ने राज्य में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने बुधवार को घोषणा की कि पूरे गुजरात में अब अमानक (non-standard) एनालॉग पनीर, मक्खन और चीज़ के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हित में लिए गए इस सख्त फैसले का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

1 . सैंपल टेस्टिंग और ग्राहकों के साथ धोखा

राज्य के फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDCA) द्वारा बड़े पैमाने पर सैंपल एकत्र करके लैब में टेस्टिंग की गई थी, जिसमें बाजार में घटिया और कृत्रिम डेरी विकल्पों के बेचे जाने के चौंकाने वाले मामले सामने आए। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि वनस्पति तेल और गैर-डेरी सामग्रियों से बने उत्पादों को पनीर या चीज़ बताकर बेचकर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं।

 

2. डेरी किसानों के हित और शुद्धता की रक्षा

गुजरात देश का एक प्रमुख डेरी राज्य है, जहाँ लाखों दुग्ध उत्पादक किसान उच्च गुणवत्ता वाले डेरी उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। जब ग्राहक पनीर या बटर खरीदते हैं, तो वे शुद्ध दूध से बने उत्पादों की उम्मीद करते हैं। कृत्रिम और घटिया एनालॉग उत्पादों के कारण शुद्ध डेरी उत्पाद बनाने वाले असली किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसे रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।

 

3. कानूनी कार्रवाई और राज्य सरकार की अपील

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSA), 2006 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए सरकार ने यह प्रतिबंध लागू किया है। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यापारी या फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) के खिलाफ FSSA के तहत सख्त कानूनी सजा दी जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने सभी उत्पादकों, व्यापारियों, होटलों, रेस्टोरेंटों और कैटरर्स से कानून का कड़ाई से पालन करने और केवल प्रमाणित व असली डेरी उत्पादों का ही उपयोग करने की अपील की है।

 

एनालॉग पनीर क्या है? जानिए इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव और सरकारी आदेश से जुड़ी जानकारी

 

राज्य सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और असली डेरी किसानों के हित में घटिया एनालॉग उत्पादों पर सख्त बैन लगा दिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हर नागरिक तक शुद्ध, सुरक्षित और प्रमाणित भोजन पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। गुजरात का अमूल जैसा डेरी ब्रांड आज पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है, ऐसे में बाजार में शुद्ध दूध के नाम पर कृत्रिम विकल्पों की बिक्री को रोकना बेहद जरूरी हो गया था।

 

1 . एनालॉग पनीर बनाने की प्रक्रिया

एनालॉग पनीर असली दूध से नहीं बनाया जाता है। इसे पानी, सस्ते मिल्क पाउडर, स्टार्च और पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों को मिलाकर तैयार किया जाता है। आमतौर पर तेल और पानी आपस में नहीं मिलते, इसलिए उन्हें एकसार करने के लिए विशेष प्रकार के इमल्सीफायर मिलाए जाते हैं। इस कृत्रिम मिश्रण को गर्म करके उसमें एसिड मिलाकर जमाया जाता है, जिससे यह दिखने में बिल्कुल असली पनीर की तरह ही ठोस और सफेद नजर आता है।

 

2. असली और एनालॉग पनीर में अंतर

प्राकृतिक पनीर शुद्ध दूध को नींबू या सिरके (vinegar) से फाड़कर बनाया जाता है, जिसमें प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर पूरी तरह से वनस्पति वसा (fat), स्टार्च और रसायनों का मिश्रण है। यह काफी सस्ता पड़ता है, इसलिए लागत बचाने के उद्देश्य से कई होटलों और ढाबों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है।

 

3. स्वास्थ्य पर प्रभाव और 'स्वस्थ गुजरात' का संकल्प

रसायनों और वनस्पति तेल से बना यह एनालॉग पनीर यदि बार-बार या ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। “स्वस्थ गुजरात” के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार ने इस पनीर पर रोक लगाकर शुद्ध भोजन की गारंटी दी है। डेरी उद्योग की रक्षा करने के साथ-साथ नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाला और सही भोजन प्रदान करना ही इस कड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य है।

तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा, फैसले को सुप्रीम कोर्ट में करेंगे चैलेंज

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बलात्कार के एक मामले में दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें 10 साल कैद की सजा सुनाई। वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

 

साल 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को 2021 में बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सरकार की अपील पर जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।

इस मामले में गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने कहा कि 0 साल की सजा के बारे में अभी हम मामले का अध्ययन करेंगे। हम तय करेंगे कि आदेश के उस हिस्से को चुनौती दी जाए या नहीं। हमने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। हम चाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा जुर्माना लगाया जाए। अब चार हफ्ते का समय दिया गया है, जबकि शुरू में दो हफ्ते का समय बताया गया था। मुझे और आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील को चैंबर में बुलाया गया था। वहां जजों ने हमें बताया कि उन्हें सरेंडर करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया जाएगा।

फैसले पर क्या बोले तरुण तेजपाल

सजा सुनाए जाने से पहले मीडिया से बातचीत में तरुण तेजपाल ने कहा है कि वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि तहलका मैगजीन की वजह से उनसे राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है।

ट्रायल कोर्ट से मिली थी तरुण तेजपाल को राहत

इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का यह फैसला त्रुटिपूर्ण था।

 

क्या है मामला?

साल 2013 में तरुण तेजपाल के साथ काम करने वाली एक युवती ने उन पर गोवा के एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में रेप का आरोप लगाया था। इस मामले में 30 नवंबर 2013 को तरुण तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। गोवा सेशन कोर्ट ने साढ़े सात साल बाद 2021 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा, जानिए क्या है पूरा मामला

Tarun Tejpal Convicted: खोजी पत्रकारिता के लिए विख्यात मैगजीन 'तहलका' के संस्थापक और पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने मई 2021 में निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया। कोर्ट ने उन्हें IPC की धारा 376 (2) (f) समेत अन्य गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत दोषी ठहराया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा के एक 5-स्टार होटल में 'तहलका' मैगजीन द्वारा एक हाई-प्रोफाइल वार्षिक कार्यक्रम 'थिंक फेस्ट' (Think Fest) आयोजित किया गया था। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुई थीं। कार्यक्रम के दौरान (7 और 8 नवंबर 2013 की मध्यरात्रि) तरुण तेजपाल ने तहलका में ही कार्यरत अपनी एक जूनियर महिला पत्रकार (सहकर्मी) को लिफ्ट के अंदर रोककर उनके साथ दो बार जबरदस्ती की और यौन उत्पीड़न किया।

घटना का खुलासा और 'माफीनामे' का ईमेल

घटना के कुछ दिनों बाद पीड़िता ने संस्थान की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को ईमेल भेजकर अपनी आपबीती सुनाई। जब यह मामला सार्वजनिक हुआ, तो मीडिया और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। मामला बढ़ता देख तरुण तेजपाल ने पीड़िता को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्होंने अपने इस कृत्य को एक 'गलती' स्वीकारते हुए माफी मांगी। इसके साथ ही उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 महीने के लिए 'तहलका' के एडिटर-इन-चीफ पद से हटने की घोषणा की। हालांकि, पीड़िता ने रुख साफ किया कि संस्था के प्रमुख द्वारा इसे महज एक व्यक्तिगत भूल बताकर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

22 नवंबर 2013 को गोवा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया और तरुण तेजपाल के खिलाफ दुष्कर्म तथा गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। वह लगभग 8 महीने तक गोवा की जेल में बंद रहे, जिसके बाद जुलाई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल सकी।

सेशंस कोर्ट का फैसला और विवाद

मई 2021 में गोवा की सत्र अदालत (सेशंस कोर्ट) ने इस मामले में तरुण तेजपाल को 'संदेह का लाभ' (Benefit of Doubt) देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया था। सेशंस कोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता के घटना के बाद के आचरण पर सवाल खड़े किए थे, जिसकी देशभर के कानूनी विशेषज्ञों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता ने तीखी आलोचना की थी। निचली अदालत के इस विवादित फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने तुरंत बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में अपील दाखिल की।

बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त रुख

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की पीठ ने गोवा सरकार और अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत का फैसला तथ्यों और कानून के सिद्धांतों के विपरीत था।

कोर्ट ने इन धाराओं में दोषी पाया

हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को निम्नलिखित धाराओं में दोषी पाया। धारा 376 (2) (f) (अधिकार या नियंत्रण की स्थिति में किसी महिला से दुष्कर्म करना), धारा 354(A) (यौन उत्पीड़न), धारा 354(B) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग)। 

कोर्ट में तेजपाल की नरमी की अपील

फैसले के समय अदालत में मौजूद तरुण तेजपाल ने खुद को प्रताड़ना का शिकार बताया और अपनी उम्र तथा परिवार की स्थिति का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि वह दो बेटियों के पिता हैं। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें कम से कम 10 साल की सजा की श्रेणी में रखा है।

MYH का अदना सा फार्मासिस्ट कैसे बन बैठा करोड़पति, करोड़ों के प्लॉट, आलीशान बंगला, पूरे महकमे पर उठे सवाल

rakesh gorkhe

इंदौर में एमवाय अस्‍पताल में पदस्‍थ फार्मासिस्‍ट के घर EOW के छापे में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। मंगलवार को फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के कई ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी।

कार्रवाई की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सरकारी दवाओं के स्टॉक में कथित गड़बड़ी कर आय से करीब 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति जमा कर ली। बता दें कि जांच के दौरान बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड यात्रा करने का भी खुलासा हुआ है। अब फार्मासिस्ट राकेश गोरखे पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) का शिकंजा कस गया। बुधवार को हुई छापामार कार्रवाई में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने केवल आय से अधिक संपत्ति के मामले को ही नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज की खरीद प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे बढ़ती गई गोरखे की संपत्‍ति : ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच के अनुसार राकेश गोरखे और उसके परिवार की वैध आय चेक पीरियड में 1.11 करोड़ रुपए रही, जबकि उसके द्वारा अर्जित संपत्तियों का मूल्य 2.13 करोड़ रुपए से अधिक पाया गया। यानी वैध आय की तुलना में करीब 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति। सवाल यह है कि आखिर एक फार्मासिस्ट ने इतना बड़ी संख्‍या में संपत्‍ति कैसे जुटा ली।

सामान्‍य कर्मचारी से करोड़पति तक : बता दें कि राकेश गोरखे की नियुक्ति वर्ष 2007 में एमवाय अस्पताल में हुई थी। शुरुआत में वह एक सामान्य कर्मचारी की तरह काम करता था। उस समय न तो उसका प्रशासन में कोई विशेष प्रभाव था और न ही वह किसी बड़े अधिकारी का करीबी माना जाता था। साल 2008 में उसने अपना अटैचमेंट एमजीएम मेडिकल कॉलेज की क्रय शाखा में करा लिया। यहीं से उसके करियर की दिशा बदलनी शुरू हुई।

जानकारों के मुताबिक वर्ष 2012 के आसपास तत्कालीन डीन डॉ. पुष्पा वर्मा के कार्यकाल में गोरखे की सक्रियता तेजी से बढ़ी। दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और अन्य खरीदी प्रक्रियाओं में उसकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई। खास बात यह रही कि खरीद से जुड़े अधिकांश कामों में उसकी मौजूदगी रहती थी, लेकिन वह दस्तावेजों पर सीधे हस्ताक्षर करने से बचता था। इससे निर्णय प्रक्रिया में प्रभाव तो बना रहा, लेकिन जिम्मेदारी से दूरी भी बनी रही।

2007 में हुई थी नियुक्ति: EOW के मुताबिक राकेश गोरखे की साल 2007 में फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति हुई थी। साल 2015 में उनका मासिक वेतन 18,711 रुपए था, जो 2025 में बढ़कर 54,664 रुपए हो गया। उनकी पत्नी कीर्ति गोरखे वर्ष 2010 से शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन हैं और वर्तमान में उनका मासिक वेतन 42,402 रुपए है।

बता दें कि EOW की कार्रवाई में इंदौर के अलग-अलग इलाकों में स्थित छह संपत्तियों का खुलासा हुआ। इनमें स्कीम नंबर-140 स्थित वृंदावन गार्डन का दो मंजिला मकान, साकार एनआरआई सिटी का बड़ा प्लॉट, साहिल इंद्रांचल होम्स, संघवी रेजीडेंसी और सद्गुरु नंदी विहार में प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा ओमेक्स डेवलपर्स में प्लॉट बुकिंग के लिए 6.70 लाख रुपए का भुगतान भी मिला है।

थाईलैंड यात्रा का भी खुलासा: छापेमारी के दौरान जब्त पासपोर्ट से पता चला कि राकेश गोरखे अक्टूबर 2023 में बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड गए थे। EOW अब इस विदेश यात्रा पर हुए खर्च का भी आकलन कर रही है और उसे आरोपी के कुल व्यय में शामिल किया जाएगा। टीम ने छह संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक पासबुक, पासपोर्ट और 1.51 लाख रुपए नकद भी जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कई संपत्तियों की जानकारी अपने विभाग को नहीं दी थी। फिलहाल दस्तावेजों की जांच और संपत्तियों के सत्यापन की कार्रवाई जारी है।

क्या ब्रह्मांड बिग बैंग से नहीं बना? नई स्टडी में सामने आई ‘बिग बाउंस’ थ्योरी

Big Bang Theory, Big Bounce,

हाल ही में Physical Review D जैसी प्रमुख विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति को लेकर एक नया सिद्धांत पेश किया है। MSN.COM की खबर के अनुसार इस नए अध्ययन के मुताबिक, हमारे ब्रह्मांड की शुरुआत पारंपरिक 'बिग बैंग' (Big Bang) से नहीं, बल्कि 'बिग बाउंस' (Big Bounce) की प्रक्रिया से हुई हो सकती है।

 

मुख्य वैज्ञानिक तथ्य और खोजें

सिंगुलैरिटी (Singularity) की पहेली:

पुराने 'बिग बैंग' सिद्धांत का मानना है कि ब्रह्मांड की शुरुआत अनंत घनत्व वाले एक बेहद छोटे बिंदु से हुई थी। लेकिन वैज्ञानिक स्वीकार करते हैं कि उस बिंदु पर आइंस्टीन के भौतिकी के सामान्य नियम (General Relativity) काम करना बंद कर देते हैं।

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क्या है 'बिग बाउंस' (Big Bounce) सिद्धांत?

नए अध्ययन के अनुसार, ब्रह्मांड किसी शून्य या सूक्ष्म बिंदु से पैदा नहीं हुआ। इसके विपरीत, एक पुराना ब्रह्मांड धीरे-धीरे सिकुड़ता (Gravitational Collapse) गया। जब पदार्थ अपनी क्वांटम सीमा (Quantum Limit) तक पूरी तरह दब गया, तो भौतिकी के नियमों के कारण वह नष्ट नहीं हुआ—बल्कि एक स्प्रिंग की तरह वापस उछला (Bounce हुआ) और फैलने लगा।

 

ब्लैक होल और पैरेंट यूनिवर्स मॉडल:

यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के प्रोफेसर एनरिक गजतानागा (Enrique Gaztañaga) और उनकी टीम के अनुसार, हमारा पूरा दृश्यमान ब्रह्मांड एक बड़े 'पैरेंट यूनिवर्स' के विशाल ब्लैक होल के अंदर हुए गुरुत्वाकर्षण बाउंस का परिणाम हो सकता है।

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क्वांटम मैकेनिक्स और आइंस्टीन के नियमों का मेल:

यह नया मॉडल क्वांटम मैकेनिक्स और सामान्य सापेक्षता (General Relativity) दोनों के सिद्धांतों के अनुकूल है, जिससे 'अनंत घनत्व' (Singularity) की उलझन दूर हो जाती है।

 

क्या 'बिग बैंग थ्योरी' पूरी तरह गलत साबित हो गई?

नहीं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह बिग बैंग थ्योरी को खारिज करना नहीं, बल्कि उसमें किया गया एक बड़ा सुधार (Expansion Model) है। यह अध्ययन ब्रह्मांड के फैलाव को नकारता नहीं है, बल्कि यह सटीक रूप से समझाता है कि फैलाव शुरू होने से ठीक पहले क्या घटित हुआ था।

 

संक्षेप में, यह शोध उन वैज्ञानिकों के प्रयासों पर आधारित है जो ब्रह्मांड के जन्म की गुत्थी सुलझाने के लिए 'सिंगुलैरिटी' की जगह 'बिग बाउंस' मॉडल को अधिक सटीक मानते हैं।

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