अमीर बनने से पहले बूढ़ा हो जाएगा भारत! 2050 तक हर 5 में 1 भारतीय होगा 60 साल से ज्यादा उम्र का

भारत में वर्ष 2050 तक औसतन हर 5 में से एक व्यक्ति की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होगी। साथ ही लगभग 10 में से 7 बुजुर्ग ग्रामीण भारत में रहेंगे। ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ (टीआरआई) की रिचर्स के अनुसार भारत विकसित देशों के विपरीत समृद्ध बनने से पहले ही वृद्ध होती आबादी वाले देश की श्रेणी में पहुंच रहा है। ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ (एनएफएचएस), ‘लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया’ (एलएएसआई), जनगणना के अनुमान, ‘टाइम यूज सर्वेक्षण’ तथा अन्य राष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर तैयार श्वेतपत्र में बताया गया है कि भारत की पारंपरिक पारिवारिक देखभाल व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। रिचर्स के मुताबिक कई विकसित देशों ने समृद्धि हासिल करने के बाद वृद्ध होती आबादी की चुनौती का सामना किया, जबकि भारत में यह स्थिति उससे पहले ही बन रही है।

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रिचर्स के अनुसार प्रत्येक बुजुर्ग को सहारा देने वाले कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की संख्या 2001 में 8.4 थी, जो 2026 तक घटकर औसतन 5.2 रहने का अनुमान है। ‘ग्रामीण भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव, बदलते पारिवारिक ढांचे और देखभाल व्यवस्था का भविष्य’ शीर्षक वाला यह श्वेतपत्र ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ की ‘इंडिया रूरल कालक्वी’ (आईआरसी) के अवसर पर जारी किया गया। रिचर्स के अनुसार 2050 तक भारत में लगभग 34.7 करोड़ लोग यानी हर पांच में से एक व्यक्ति 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का होगा। रिचर्स के अनुसार 10 में से करीब सात बुजुर्ग ग्रामीण क्षेत्रों में रहेंगे।
 

श्वेतपत्र के मुताबिक भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था मुख्य रूप से प्रसव, टीकाकरण और गंभीर बीमारियों जैसी तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित की गई थी। रिचर्स के अनुसार कई विकसित देशों ने समृद्ध बनने के बाद वृद्ध होती आबादी की चुनौती का सामना किया जबकि भारत में यह जनसांख्यिकीय बदलाव अपेक्षाकृत कम आय स्तर पर ही हो रहा है।

क्या है कारण 

रिसर्च के मुताबिक इसका कारण परिवारों का पहले की तुलना में छोटा होना, युवाओं का रोजगार के लिए घर से दूर जाना और लोगों की औसत आयु में वृद्धि होना है। इसके बावजूद देश में लगभग 94 प्रतिशत बुजुर्गों की देखभाल अब भी परिवारों के भीतर ही की जाती है, जिससे परिवार के कम सदस्यों पर बुजुर्गों की बढ़ती और पहले से अधिक जटिल देखभाल की जिम्मेदारी आ रही है। रिचर्स के अनुसार  महिलाएं प्रतिदिन औसतन 305 मिनट बिना किसी वेतन के देखभाल कार्यों में बिताती हैं, जबकि पुरुषों का योगदान केवल 56 मिनट का है।
 

 बिना किसी वेतन के कार्यों का यह असमान बंटवारा महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ है। अध्ययन में यह भी बताया गया कि जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, लू और बाढ़ जैसी घटनाओं के कारण महिलाओं के अवैतनिक काम का बोझ काफी बढ़ रहा है। श्वेतपत्र के अनुसार स्वास्थ्य सेवा के अगले चरण में लंबे समय से चली आ रही बीमारियों, दिव्यांगता और बढ़ती उम्र से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहे लोगों की सहायता करना शामिल है, जिसे केवल अस्पतालों के माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता।

Stock Market : शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 455 अंक टूटा, निफ्टी में भी गिरावट

share market 13 march

शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। Sensex 455.59 अंक यानी 0.58 फीसदी गिरकर 78,499.17 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 में 65.35 अंक यानी 0.27 फीसदी की गिरावट रही और यह 24,570.65 के स्तर पर बंद हुआ। शुक्रवार को सेंसेक्स 438.68 अंक यानी 0.56 फीसदी गिरकर 78,516.08 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी 97.10 अंक यानी 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 24,538.90 के स्तर पर खुला।

 

सेंसेक्स के 16 शेयर लाल निशान में

 

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 14 शेयर बढ़त के साथ और 16 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, निफ्टी 50 की 50 कंपनियों में से 24 शेयर हरे निशान में रहे, जबकि 26 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

 

TCS में सबसे ज्यादा तेजी

सेंसेक्स की कंपनियों में TCS का शेयर सबसे ज्यादा 3.53 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसके अलावा Mahindra & Mahindra 2.53 फीसदी, SBI 1.03 फीसदी, Tech Mahindra 0.91 फीसदी और BEL 0.74 फीसदी चढ़े। Infosys 0.68 फीसदी, HCL Tech 0.59 फीसदी, Reliance Industries 0.49 फीसदी, IndiGo 0.45 फीसदी, Maruti Suzuki 0.38 फीसदी, Power Grid 0.37 फीसदी, NTPC 0.29 फीसदी, Sun Pharma 0.26 फीसदी और ITC 0.18 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए।

 

Bajaj Finance में 5.90 फीसदी की भारी गिरावट

 

शुक्रवार को Bajaj Finance का शेयर 5.90 फीसदी की भारी गिरावट के साथ सेंसेक्स का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला स्टॉक रहा। इसके अलावा Bajaj Finserv 4.18 फीसदी और ICICI Bank 3.72 फीसदी टूटे। वहीं Trent 3.54 फीसदी, Axis Bank 1.20 फीसदी, Asian Paints 1.02 फीसदी, Titan 0.82 फीसदी, Tata Steel 0.69 फीसदी और HDFC Bank 0.68 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।

 

इसके अलावा Adani Ports 0.53 फीसदी, Kotak Mahindra Bank 0.51 फीसदी, Eternal 0.49 फीसदी, Bharti Airtel 0.25 फीसदी, Hindustan Unilever 0.22 फीसदी, UltraTech Cement 0.18 फीसदी और L&T 0.12 फीसदी टूटे।

यूपी में 30 लाख लोगों की आजीविका का साधन बना हथकरघा-पावरलूम : CM योगी

CM Yogi Adityanath

National Handloom Day CM Yogi Adityanath: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारीगरों व बुनकरों के उत्थान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यूपी में हथकरघा और पावरलूम से करीब 30 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी है। सरकार ने 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को विद्युत सुविधा के रूप में 109 करोड़ रुपए का लाभ दिया है। सीएम ने हथकरघा उत्पादों को डिजाइन, तकनीक, पैकेजिंग व मार्केटिंग के जरिये वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों की खरीद बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को उपहार में देने की अपील भी की।

 

मुख्यमंत्री शुक्रवार को लोकभवन सभागार में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह-2026 के अवसर पर संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर विशिष्ट कार्यों के लिए बुनकरों को सम्मानित किया और विभिन्न योजनाओं के तहत बुनकरों व लाभार्थियों को चेक भी वितरित किए। सीएम ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न उत्पादों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया।

 

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारी विरासत है। ढाई लाख परिवार यानी लगभग 14-15 लाख लोग इस व्यवसाय पर आश्रित हैं। इसमें पावरलूम को भी जोड़ लिया जाए तो यह संख्या लगभग 30 लाख तक पहुंच जाती है। हथकरघा/पावरलूम उद्योग इन 30 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का आधार बना है। इसके जरिए लाखों लोग सरकार पर आश्रित हुए बिना ही अपने कार्यक्रम, उद्योग, रोजगार को आगे बढ़ा रहे हैं। हमारी सरकार ने तय किया कि इन हस्तशिल्पियों को सम्मान मिलना चाहिए, साथ ही उन्हें हर प्रकार की सुविधा मिलनी चाहिए। इसी क्रम में गत वर्ष हैंडलूम से जुड़े हुए 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को 109 करोड़ रुपए की विद्युत से जुड़ी सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

हथकरघा उद्योग के लिए सुनहरा अवसर

सीएम योगी ने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा का समय है। इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में हम तभी टिक पाएंगे, जब समय व मांग के अनुरूप डिजाइन व वस्त्र तैयार करेंगे। दुनिया में उत्पादों की मांग को देखते हमारे लिए सुनहरा अवसर भी है। लखनऊ, गोरखपुर, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर समेत सभी क्षेत्र अपने उत्कृष्ट हस्तशिल्प के लिए जाने जाते हैं। हमारे कारीगरों ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मान्यता व पहचान दिलाई है। प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों, कारीगरों व उद्यमियों के उत्थान के लिए हर वक्त साथ खड़ी है।

National Handloom Day

देश की नई संसद में लगी भदोही की कालीन

मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही में कालीन का क्लस्टर 2017 के पहले मृतप्राय सा हो गया था। लेकिन, आज वहां से दुनिया के बाजारों में सैकड़ों करोड़ रुपए का कालीन एक्सपोर्ट किया जा रहा है। देश की नई संसद में भी भदोही की कालीन लगी है। देश की संसद में अलग-अलग जगहों पर उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प और कारीगरों का सम्मान झलकता दिखाई देता है। भदोही में केंद्र सरकार की मदद से कालीन का एक्सपो सेंटर भी बनाया है। वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना हो चुकी है। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, डिजाइन, पैकेजिंग, एक्सपोर्ट, मार्केटिंग को और बेहतर बनाने के लिए भी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। जब हम स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देंगे, तो भारत का पैसा भारत में ही लगेगा। इससे हमारे हस्तशिल्पियों के चेहरे पर समृद्धि की खुशहाली आएगी।

प्रदेश में पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क की स्थापना

सीएम ने कहा कि वाराणसी में फैसिलिटेशन सेंटर से जुड़े हुए छात्रों को स्कॉलरशिप दी जा रही है। गत वर्ष 450 छात्रों को स्कॉलरशिप दी गई। इसके जरिए डिजाइनिंग, टेक्नोलॉजी, पैकेजिंग के बारे में अध्ययन कराया जा रहा है। टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती प्रदान करने के लिए लखनऊ में पीएम मित्र पार्क की स्थापना 1000 एकड़ में हो रही है। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र टेक्सटाइल उद्योग ही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं और हर हाथ को काम दिलाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार संत कबीर के नाम पर प्रदेश में पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के कार्य को आगे बढ़ा रही है।

क्षेत्र में 70 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 और 2017 के पहले भी विकास के ऐसे काम हो सकते थे, लेकिन इसके लिए पिछली सरकारों के पास विजन नहीं था। पिछली सरकारों में हर काम को केवल वोटबैंक के नजरिए से देखा जाता था। ऐसे में गरीबों, कारीगरों व हस्तशिल्पियों का सम्मान पिछड़ जाता था। 2017 से पहले यूपी में बिजली और आवागमन के लिए अच्छी सड़कें तक नहीं थीं। कानून-व्यवस्था इतनी बदहाल थी कि बेटी, व्यापारी, हस्तशिल्पी, कारीगर कोई भी सुरक्षित नहीं था। किंतु आज हथकरघा के क्षेत्र में 70 फीसदी से अधिक महिलाएं कार्य कर रही हैं। यह अद्भुत है। पीएम मोदी जी भी विदेशी दौरों पर यूपी के हस्तशिल्प उत्पादों को विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप प्रदान करते हैं। यह सभी हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान है।

हथकरघा बना सबसे बड़ा कुटीर उद्योग

सीएम ने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट के माध्यम से ब्रांडिंग हुई तो मार्केट भी उपलब्ध हुआ। डबल इंजन की सरकार ने इसको टेक्नोलॉजी, डिजाइन और पैकेजिंग के साथ जोड़ा है। आज 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी में काम कर रही हैं। अब हथकरघा सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है। डबल इंजन की सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों को संरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि हस्तशिल्पियों और कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को टेक्नोलॉजी व डिमांड के अनुसार मार्केट से जोड़ें। विश्वकर्मा श्रम सम्मान और पीएम विश्वकर्मा के माध्यम से कारीगर भी टूलकिट व ट्रेनिंग की व्यवस्था का पूरा लाभ उठाएं। संत कबीर और वीरांगना झलकारी बाई पुरस्कार से सम्मानित लोग भी काम में नयापन जारी रखें। मुख्यमंत्री ने आमजन से अपील की कि वे स्थानीय कारीगरों व हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार उत्पादों को गिफ्ट के रूप में दें। दीपावली, होली, ईद समेत अन्य पर्वों पर उत्तर प्रदेश के उत्पाद भेंट स्वरुप दिखाई देने लगे हैं।

सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों की खरीद

सीएम ने कहा कि सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों को खरीदने के लिए व्यवस्था बनाई गई है। विभाग तत्काल इस पर काम करें। हॉस्पिटल, होटल, गेस्ट हाउस व अन्य जगहों पर हथकरघा उत्पाद बढ़ेंगे तो यह सोने पर सुहागा हो जाएगा। इससे बुनकरों, कारीगरों समेत उद्योग से जुड़े सभी लोगों की आय भी बढ़ेगी।

स्वदेशी ने तोड़ी थी गुलामी की बेड़ियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, केवल एक दिवस नहीं बल्कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। आज के दिन 7 अगस्त 1905 को आंदोलन को एक नई दिशा मिली थी, जब स्वदेशी ने पदार्पण किया था। स्वदेशी के मंत्र ने उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम पूरे भारत को एकता के सूत्र में जोड़कर गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का काम किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन के लिए खादी व स्वदेशी को ही अपना मंत्र बनाया था। उन्होंने चरखे को आंदोलन का सबसे बड़ा शस्त्र बनाया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने 7 अगस्त की तिथि को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया। यह देश में हथकरघा से जुड़े लाखों उद्यमियों, व्यवसायियों, हस्तशिल्पियों का सम्मान है।

 

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हस्तकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, मुकेश शर्मा, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल कुमार सागर, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विजयेंद्र पांडियन, विशेष सचिव शेषमणि त्रिपाठी समेत अन्य गण्यमान्य अतिथि उपस्थिति रहे।

जन-विश्वास अभियान में एक्शन में सीएम डॉ. मोहन यादव, CMHO, तहसीलदार सहित तीन को किया सस्पेंड

भोपाल। मध्यप्रदेश में शुक्रवार से शुरु हुए जन-विश्वास अभियान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक बार फिर एक्शन मोड में दिखाई दिए। छिंदवाड़ा में उन्होंने एक तरफ यहां 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' की शुरुआत की, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक कड़ाई का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने शिकायतों पर सुनवाई करते-करते छिंदवाड़ा के सीएमएचओ डॉ. नरेश गु्न्नाड़े, तहसीलदार और पटवारी को तत्काल निलंबित कर दिया। इससे पहले सीएम डॉ. मोहन ने छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय स्थित लोक सेवा केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कलेक्ट्रेट कार्यालय में उद्यमियों-जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से संवाद कर क्षेत्र के विकास, औद्योगिक संभावनाओं एवं प्रगति के विषयों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जनता की समस्याओं का तुरंत निराकरण भी किया। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने कहा कि आज छिंदवाड़ा से “जन विश्वास अभियान” का शुभारंभ किया। इस अभियान के अंतर्गत हमारे सभी जनप्रतिनिधि क्षेत्र में जनता से संवाद कर रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत जन संवाद के माध्यम से भविष्य की योजनाएं एवं नीतियां बनाई जाएगी। साथ ही लोगों की समस्याओं का समाधान और आवश्यकताओं की पूर्ति भी की जाएगी।

 

लगेगा जनता दरबार

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में आज नो मीटिंग डे है। मध्यप्रदेश में अब सरकार जनता के पास पहुंचेंगी। इसके लिए हर शुक्रवार को जिला केंद्र से लेकर  तहसील स्तर तक जनता दरबार लगेगा। जिसमें सरकार के सभी मंत्री, विधायक, कलेक्टर, कमिश्नर मैदान में उपस्थित रहेंगे और जनता की सुनवाई करेंगे।  संवाद,समाधान,संवेदनशीलता,सादगी इसके 4 पिलर है। पूरे प्रदेश में जन विश्वास अभियान चलेगा। पूरे देश में पहली बार मध्यप्रदेश ने यह अभियान शुरू किया है। 

 

प्राकृतिक खेती-ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हर क्षेत्र की कार्य संस्कृति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाबद्ध विकास की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में प्राकृतिक खेती, पशुपालन और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे जैसी पहलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। आज छिंदवाड़ा के प्रतिभावान नागरिकों से इन महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया और उनके बहुमूल्य सुझावों को विकास की भावी योजनाओं में शामिल करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जन-विश्वास अभियान के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है तथा उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

राहुल गांधी ने कुत्तों पर जो कहा… क्या हम उस पर बात कर सकते हैं?

Rahul Gandhi with noorie

हाल ही में राहुल गांधी ने एक बात कही: हम कुत्तों के मालिक नहीं हैं, हम यह धरती उनके साथ साझा करते हैं।”

जैसा कि होना था, बहस कुत्तों पर नहीं, राहुल गांधी पर शुरू हो गई। होनी भी थी। हमारे यहां विचारों से ज़्यादा विचार रखने वाले की जात, दल और विचारधारा पर चर्चा होती है।

लेकिन ज़रा राजनीति को पाँच मिनट के लिए विराम दीजिए। और खुद से सिर्फ़ एक सवाल पूछिए – क्या यह बात सच है?

क्योंकि सवाल राहुल गांधी का नहीं है। सवाल इंसानियत का है।

और किसी भी सभ्यता का असली चरित्र इस बात से तय नहीं होता कि वह अपने सबसे ताकतवर लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती है…

बल्कि इससे तय होता है कि वह उन जीवों के साथ कैसा व्यवहार करती है जो न वोट दे सकते हैं, न विरोध कर सकते हैं और न अपनी पीड़ा शब्दों में कह सकते हैं।

अगर पृथ्वी पर सबसे वफादार प्रजाति का चुनाव हो, तो शायद इंसान शीर्ष दस में भी जगह न बना पाए।
ज़रा सोचिए।

कम-से-कम पंद्रह हज़ार वर्षों से कुत्ते इंसान के साथ चल रहे हैं। शायद उन्होंने हमें उतना समझ लिया है, जितना हम आज तक खुद को नहीं समझ पाए।

  • हमने धर्म के नाम पर लड़ाइयाँ लड़ीं।
  • सीमाओं के नाम पर खून बहाया।
  • जाति, नस्ल, भाषा, विचारधारा और सत्ता के लिए एक-दूसरे का गला काटा।
  • कभी-कभी तो सिर्फ इसलिए कि सामने वाले की राय हमसे अलग थी।

और कुत्ते?
उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि आपने किसे वोट दिया।

  • आप किस भगवान को मानते हैं।
  • आपकी जात क्या है।
  • आपके पास कितना पैसा है।
  • या आपके पासपोर्ट का रंग क्या है।

एक कुत्ते के लिए बस एक ही सच होता है – यह मेरा इंसान है।” शायद इसलिए आज भी कुत्ते इंसानों को, इंसानों से बेहतर समझते हैं।

जब हम भू-राजनीति से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन से लेकर क्रिकेट तक हर विषय पर बहस कर सकते हैं, तो उस जीव पर भी एक गंभीर चर्चा बनती है जिसने किसी भी सभ्यता से पहले इंसान का साथ चुना था।

दुर्भाग्य यह है कि आज कुत्तों के बारे में हमारी राय पशु-चिकित्सकों, व्यवहार वैज्ञानिकों या विशेषज्ञों से कम… और व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी से ज़्यादा बनती है।

एक वायरल वीडियो। एक दर्दनाक घटना। एक सनसनीखेज़ हेडलाइन। और देखते ही देखते करोड़ों लोग पूरी प्रजाति पर फैसला सुना देते हैं।

आज आक्रोश, तथ्यों से तेज़ दौड़ता है। डर, सच से पहले पहुँच जाता है।

लेकिन इतिहास कुछ और कहता है। महाभारत में जब पांडवों की अंतिम यात्रा शुरू होती है, तो एक-एक कर सभी साथ छोड़ देते हैं।

अंत तक सिर्फ़ युधिष्ठिर और एक कुत्ता बचते हैं। स्वर्ग के द्वार पर युधिष्ठिर से कहा जाता है कि यदि स्वर्ग चाहिए तो कुत्ते को छोड़ना होगा।

वे मना कर देते हैं। बाद में वही कुत्ता धर्मराज का रूप लेकर उनकी अंतिम परीक्षा पूरी करता है।

ज़रा ठहरकर सोचिए… भारत के सबसे महान नायकों में से एक की अंतिम नैतिक परीक्षा किसी राजा, ऋषि या योद्धा ने नहीं ली थी।

वह परीक्षा एक कुत्ते ने ली थी।

अब ज़रा पश्चिम की ओर चलिए।

होमर के महाकाव्य ओडिसी में आर्गोस नाम का कुत्ता बीस वर्षों तक अपने मालिक ओडीसियस की प्रतीक्षा करता है।

बूढ़ा। उपेक्षित। लगभग अंधा। लेकिन अपने मालिक को एक नज़र में पहचान लेता है।
और फिर… चैन से अपनी अंतिम साँस लेता है।

अलग-अलग सभ्यताएँ।
अलग-अलग महाद्वीप।
हज़ारों वर्षों की दूरी।
लेकिन वफ़ादारी का प्रतीक दोनों ने एक ही जीव को चुनाकुत्ता।

यह संयोग नहीं है।
यह मानव सभ्यता की साझा बुद्धिमत्ता है।
आज भी सेना और पुलिस की के-9 यूनिट बिना किसी कैमरे, बिना किसी लाइक और बिना किसी पुरस्कार की अपेक्षा के अपनी जान जोखिम में डालती है।

न जाने कितने परिवार आज इसलिए सुरक्षित हैं क्योंकि किसी कुत्ते ने खतरे को इंसानों से पहले पहचान लिया।
हर नायक दो पैरों पर नहीं चलता।
और फिर भी…
हमने उन्हें दो हिस्सों में बाँट दिया।
पालतू… और आवारा।
एक मखमली गद्दों पर सोता है। दूसरे पर पत्थर बरसाए जाते हैं।

विडंबना देखिए…
आवारा कुत्ते हमारे शहरों में नहीं आए। हम उनके घरों में घुस गए।
हमने जंगल काटे। खुले मैदान खत्म किए। कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए। कूड़े के पहाड़ लगा दिए।
फिर हैरान होते हैं कि जानवर हमारी बस्तियों में क्यों दिखाई देते हैं।

शायद रास्ता कुत्ते नहीं भूले। हम भटक गए हैं।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आवारा कुत्तों की समस्या नहीं है। बिलकुल है।
कुत्तों के हमले होते हैं। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। जनसुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता।
लेकिन गंभीर समस्याओं का समाधान गुस्से से नहीं, विज्ञान से निकलता है।

समाधान नफरत नहीं है।
समाधान है –

  • टीकाकरण।
  • नसबंदी।
  • जिम्मेदार पालतू पशु पालन।
  • बेहतर कचरा प्रबंधन।
  • वैज्ञानिक शहरी नियोजन।

दुर्भाग्य यह है कि ये बातें ट्रेंड नहीं करतीं। नफरत करती है।

क्योंकि जिम्मेदारी निभाने से आसान है किसी को दोषी ठहरा देना।

इतिहास गवाह है – कुत्तों ने कभी युद्ध नहीं शुरू किए। उन्होंने कभी नफरत का कारोबार नहीं किया। उन्होंने दुनिया को “हम” और “वे” में नहीं बाँटा।

उन्होंने कभी धर्म, जाति, भाषा या राष्ट्रीयता के आधार पर प्रेम नहीं किया।

उन्होंने बस… साथ निभाया। हमारी सबसे अच्छी घड़ियों में भी। हमारे सबसे बुरे दिनों में भी।

तो अब असली सवाल यह है – ज़्यादा विकसित प्रजाति कौन है?

वह… जो रॉकेट बना सकती है, लेकिन भरोसा नहीं बचा सकती?

या वह… जो सिर्फ़ दो वक्त की रोटी, थोड़ा-सा स्नेह और अपने इंसान के साथ चलने का अधिकार चाहती है?

शायद मानव सभ्यता का भविष्य सिर्फ़ और अधिक बुद्धिमान बनने में नहीं है। शायद थोड़ा-सा कुत्तों जैसा बनने में है। क्योंकि अब सवाल यह नहीं रहा कि…

क्या कुत्ते इंसानों के लायक हैं? सवाल यह है कि… क्या इंसान अब भी कुत्तों के लायक हैं?

(Dedicated to my gentle giant, Don the Great Dane—who taught me more about humanity than many humans ever could) 

जेन-जी के बाद बुजुर्ग पेंशनभोगियों का केन्द्र सरकार को अल्टीमेटम, कहा- अब होगी आरपार की लड़ाई

EPS-95 Pension Protest: देश भर के लाखों बुजुर्ग कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जीवनयापन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS-95) के तहत मिलने वाली बेहद कम पेंशन से नाराज देश के सेवानिवृत्त कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर पेंशनभोगियों ने अपनी मांगों को लेकर महाआंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। सरकार को अल्टीमेटम देते हुए पेंशनर्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

 

देशभर के ईपीएस-95 (EPS-95) पेंशनधारक पिछले लंबे समय से अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 'ईपीएस-95 नेशनल एजिटेशन कमेटी' के बैनर तले देश के कोने-कोने से आए बुजुर्ग पेंशनर्स ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डालकर जोरदार प्रदर्शन किया है। इन बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन के 30 से 35 साल देश की सेवा और संगठित क्षेत्र में नौकरी करने में बिता दिए, लेकिन आज के इस महंगाई के दौर में उन्हें मात्र 1,000 से 1,171 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन मिल रही है, जिसमें गुजारा करना असंभव है।

क्या हैं संगठन की प्रमुख मांगें?

प्रमुख मांगें, जिन पर अड़े हैं पेंशनभोगीआंदोलनकारियों और राष्ट्रीय नेतृत्व ने सरकार के सामने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • न्यूनतम पेंशन में वृद्धि : ईपीएस-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर तुरंत 7,500 रुपये किया जाए।
  • महंगाई भत्ता (DA) : पेंशन के साथ-साथ महंगाई भत्ते (DA) को जोड़ा जाए ताकि बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके।
  • मुफ्त चिकित्सा सुविधा : बुजुर्ग पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथियों को आयुष्मान भारत योजना या अन्य माध्यमों से मुफ्त और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। 
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्रियान्वयन : उच्च पेंशन (Higher Pension) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों को बिना किसी पेचीदगी या भेदभाव के पूरी तरह से लागू किया जाए।

सरकार को कड़ा अल्टीमेटम और आगे की रणनीति

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्षों और वक्ताओं ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि सरकार ने उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो देश भर के पेंशनभोगी और अधिक कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।

 

चेतावनी दी गई है कि जरूरत पड़ने पर देश के सभी ईपीएफओ (EPFO) कार्यालयों के बाहर तालेबंदी की जाएगी, सांसदों के आवासों के समक्ष प्रदर्शन और आमरण अनशन जैसे रास्ते अपनाए जाएंगे। पेंशनभोगियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल पैसों की नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और बुढ़ापे की सुरक्षित जिंदगी की है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस बड़े और देशव्यापी बुजुर्ग आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है। 

IRCTC की नई वेबसाइट हुई लाइव, टिकट बुकिंग से पहले करना होगा ये जरूरी काम, जानें पूरा तरीका

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भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेवा इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। IRCTC ने अपनी नई टिकट बुकिंग वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया है। करीब 24 साल पुराने इंटरफेस के बाद वेबसाइट को नए डिजाइन और कई नए फीचर्स के साथ अपडेट किया गया है। नई वेबसाइट में टिकट बुकिंग, PNR चेक करने, टिकट कैंसिल करने, ट्रेन सर्च करने और प्रोफाइल मैनेज करने जैसे कामों को आसान बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि, अगर आप पहली बार नई वेबसाइट पर लॉगिन कर रहे हैं तो टिकट बुक करने से पहले आपको एक जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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पहली बार लॉगिन करते समय अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल जरूर तैयार रखें, क्योंकि OTP वेरिफिकेशन पूरा किए बिना टिकट बुकिंग नहीं की जा सकेगी।

 

पहली बार लॉगिन पर मोबाइल और ईमेल वेरिफिकेशन जरूरी

 

नई IRCTC वेबसाइट पर पहली बार लॉगिन करने वाले यूजर्स को अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी वेरिफाई करना होगा। वेबसाइट के होमपेज पर पहुंचते ही वेरिफिकेशन का विकल्प दिखाई देगा। इसके लिए आपके मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर अलग-अलग OTP भेजे जाएंगे। दोनों OTP दर्ज करने के बाद आपका अकाउंट वेरिफाई हो जाएगा। यह एक बार की प्रक्रिया है। जब तक मोबाइल और ईमेल वेरिफिकेशन पूरा नहीं होता, तब तक वेबसाइट से टिकट बुक नहीं किया जा सकेगा।

 

एक बार वेरिफिकेशन के बाद दोबारा जरूरत नहीं

 

मोबाइल और ईमेल का वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद सामान्य तरीके से टिकट बुक किया जा सकेगा। अगली बार लॉगिन करने पर आपको यह प्रक्रिया दोबारा पूरी नहीं करनी होगी। IRCTC के इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स के अकाउंट की सुरक्षा बढ़ाना और अनधिकृत एक्सेस की संभावना को कम करना है।

 

Aadhaar Authentication कैसे करें?

 

नई वेबसाइट पर Aadhaar Authentication का स्टेटस देखना भी आसान किया गया है। इसके लिए ये स्टेप फॉलो करें:

 

  • IRCTC की नई वेबसाइट पर लॉगिन करें।
  • ऊपर दाईं तरफ दिए गए User ID पर क्लिक करें।
  • My Profile में जाएं।
  • अब Authenticate User विकल्प पर क्लिक करें।
  • अगर आपका Aadhaar पहले से लिंक है तो यहां उसका Authentication Status दिखाई देगा।
  • अगर Aadhaar लिंक नहीं है तो अपनी जरूरी जानकारी दर्ज करके दिए गए निर्देशों का पालन करें।
  • Tatkal टिकट के लिए Aadhaar Authentication जरूरी

 

अगर आप Tatkal Ticket बुक करते हैं तो Aadhaar Authentication खास तौर पर महत्वपूर्ण है। IRCTC के अनुसार Tatkal टिकट बुक करने के लिए Aadhaar Authentication अनिवार्य है।

 

नई IRCTC वेबसाइट में क्या बदला?

 

नई वेबसाइट में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनका मकसद टिकट बुकिंग को ज्यादा आसान और सुरक्षित बनाना है।

 

1. नया और क्लीन इंटरफेस : वेबसाइट को आधुनिक डिजाइन के साथ ज्यादा साफ और व्यवस्थित बनाया गया है।

 

2. मोबाइल और ईमेल OTP वेरिफिकेशन : पहली बार लॉगिन पर दोनों की वन-टाइम वेरिफिकेशन जरूरी है।

 

3. टिकट से जुड़े काम आसान : टिकट बुकिंग, PNR चेक, कैंसिलेशन, ट्रेन सर्च और प्रोफाइल मैनेजमेंट जैसे विकल्पों को आसान तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

4. Aadhaar Authentication का आसान विकल्प : Aadhaar से जुड़ी प्रक्रिया अब My Profile सेक्शन में उपलब्ध है।

 

5. सुरक्षा पर जोर : OTP वेरिफिकेशन और Aadhaar Authentication जैसे फीचर्स के जरिए टिकट बुकिंग को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई है।

अभी Beta Version में है वेबसाइट

IRCTC की नई वेबसाइट फिलहाल Beta Version में उपलब्ध है। कंपनी आने वाले समय में इसमें और फीचर्स जोड़ने तथा मौजूदा सुविधाओं को बेहतर करने की तैयारी कर रही है। इसलिए अगर आप IRCTC से ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं तो नई वेबसाइट पर लॉगिन करके इसके नए इंटरफेस और सुविधाओं को देख सकते हैं।

AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा पर रांची में प्रदर्शन के दौरान फेंकी स्याही, जंतर-मंतर के Gen Z Protest से आई थी चर्चा में

Neha Bora

रांची में चल रहे JPSC प्रोटेस्ट में शामिल होने पहुंचीं नेहा बोरा पर एक युवक ने स्याही फेंक दी। वो झारखंड में चल रहे प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंची थी। घटना के बाद नेहा बोरा ने कहा कि इसका पता लगाना जरूरी है कि ये कौन सी ताकतें हैं।

बता दें कि नेहा बोरा दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद चर्चा में आई थी। वो एक तरह से प्रोटेस्‍ट का महिला चेहरा बन गई थी। अब वो रांची पहुंची थी। नेहा AISA की अध्यक्ष हैं। नेहा बोरा छात्र प्रदर्शन को समर्थन देने रांची पहुंची थीं, जिसके बाद उन पर स्याही फेंकी गई। दिल्ली के प्रदर्शन के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA ने रांची में JPSC प्रोटेस्ट को अपना समर्थन दिया है। हालांकि उनके इस समर्थन को लेकर कुछ अभ्यर्थी खुश नहीं दिख रहे हैं।

नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट में भूख हड़ताल : नेहा बोरा AISA की तरफ से तमाम बड़े प्रदर्शनों का हिस्सा बनती रही हैं और कुछ दिन पहले उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। सोनम वांगचुक के साथ ही नेहा बोरा और उनके कुछ साथी भी प्रोटेस्ट के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे थे। करीब 20 दिन तक इन सभी ने बिना खाए प्रोटेस्ट किया था और इसके बाद से ही नेहा बोरा का नाम सोशल मीडिया पर खूब चलने लगा। पुलिस लाठीचार्ज के बाद उनका भाषण सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ।

कौन हैं नेहा बोरा : नेहा बोरा की उम्र अभी महज 29 साल है और वो अपनी बेबाक आवाज के लिए जानी जाती हैं। मूल रूप से नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा से आती हैं, लेकन उनका बचपन पश्चिम बंगाल में बीता। उनके पिता भारतीय सेना में रह चुके हैं। स्कूली पढ़ाई के बाद से ही नेहा बोरा ने एक्टिविज्म शुरू कर दिया और थिएटर में भी खूब दिलचस्पी दिखाई। नेहा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के अरबिंदो कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से एमए किया।

फिलहाल नेहा दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में PhD रिसर्च स्कॉलर हैं। नेहा बोरा कॉलेज की शुरुआत में ही लेफ्ट छात्र संगठन AISA से जुड़ गईं थीं और उनकी लीडरशिप क्वालिटी को देखते हुए उन्हें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुना गया। अध्यक्ष बनने के बाद से ही वो अपने संगठन की तरफ से हर मोर्चे पर खड़ी रहती हैं और छात्रों की आवाज उठाने का काम करती हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुनकरों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत बुनकरों व लाभार्थियों को सम्मानित करने के साथ चेक भी दिए। इसके साथ ही हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया।

बुनकरों का सम्मान

साड़ी, ब्राकेड एवं ड्रेस मेटेरियल श्रेणी

वाराणसी से जमालुद्दीन को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपए का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

सूती दरी, ऊनी दरी, आसनी एवं दरेट श्रेणी

  • सीतापुर से अकील अमहद को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपए का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

बेडशीट, बेड कवर एवं होम फर्निशिंग श्रेणी

  • बिजनौर से कफील अहमद को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपए का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

स्टोल, अंगवस्त्र या अन्य पारंपरिक वस्त्र उत्पाद श्रेणी

  • वाराणसी से प्यारेलाल को प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रुपए का चेक, प्रशस्ति पत्र व ट्रॉफी

झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के तहत बुनकरों का सम्मान

  • मऊ से सुरेंद्र कुमार – 93 हजार रुपए का चेक
  • इटावा से सोनी –     93 हजार रुपए का चेक
  • झांसी से मीरा बाई –  93 हजार रुपए का चेक

मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना के लाभार्थी

  • मुरादाबाद से गुलाम वारिस – 78 हजार रुपए का चेक
  • बरेली से मो. साजिद अंसारी – 93 हजार रुपए का चेक 
  • मेरठ से जय किशन राजपूत – 93 हजार रुपए का चेक

हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान

  • उत्तर प्रदेश हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय और हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल चेन्नई के बीच एमओयू
  • दमेरा टाटा ग्रुप बैंगलोर के साथ एमओयू
  • कार्गो डीटीडीसी के साथ एमओयू
  • इंटरनेशनल फैशन बिजनेस एक्सचेंज काउंसिल (मुंबई) के साथ एमओयू
  • कानपुर के प्रतीक कुमार के साथ एमओयू

भारत में बढ़ रहा EV का क्रेज, खरीदने से पहले जानें इलेक्ट्रिक वाहनों के 4 प्रकार और इनके फायदे

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बनती जा रही है। 2016 के बाद से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में करीब 46 गुना बढ़ोतरी हुई है। वहीं, EV से जुड़े निर्यात का मूल्य 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया।

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सरकार की कई योजनाओं और नीतियों से देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को बढ़ावा मिल रहा है। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए PLI Scheme, PM E-DRIVE Scheme और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली पहलें भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर रही हैं।

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2030 तक नई गाड़ियों में 30% EV का लक्ष्य

 

भारत ने 2030 तक नई वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए India Electric Mobility Index जारी किया है। इसके साथ Electric Vehicles in India: $200 Billion Opportunity रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का EV सेक्टर आने वाले वर्षों में करीब 200 अरब डॉलर का आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। इससे सिर्फ वाहन निर्माण ही नहीं, बल्कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग स्टेशन, ऑटो कंपोनेंट, सर्विस और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

 

शहरों से छोटे कस्बों तक बदल रही मोबिलिटी

 

बड़े शहरों में रोजाना आने-जाने और छोटे शहरों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सरकार की जलवायु रणनीति और टिकाऊ परिवहन के लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है।

 

EV को बढ़ावा देने से पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम है।

 

इलेक्ट्रिक वाहन क्या होता है?

 

इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV वह वाहन है, जो मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है और बैटरी में स्टोर बिजली का इस्तेमाल करता है। बैटरी को बाहरी पावर सोर्स यानी चार्जिंग स्टेशन या अन्य चार्जिंग सिस्टम से रिचार्ज किया जा सकता है।

 

कितने तरह के होते हैं इलेक्ट्रिक वाहन?

 

1. Battery Electric Vehicle (BEV)

ये वाहन पूरी तरह बिजली से चलते हैं। इनमें इंटरनल कंबशन इंजन नहीं होता और इन्हें बाहरी चार्जिंग सिस्टम से चार्ज किया जाता है।

 

2. Hybrid Electric Vehicle (HEV)

हाइब्रिड वाहन में पेट्रोल/डीजल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर भी होती है। दोनों प्रणालियां वाहन को चलाने में मदद करती हैं।

 

3. Plug-in Hybrid Electric Vehicle (PHEV)

PHEV में भी इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों होते हैं, लेकिन इसकी बैटरी को बाहरी पावर सोर्स से चार्ज किया जा सकता है। इससे वाहन कुछ दूरी तक सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड पर चल सकता है।

 

4. Fuel Cell Electric Vehicle (FCEV)

इन वाहनों में केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदला जाता है और इसी बिजली से इलेक्ट्रिक मोटर चलती है।

 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है EV?

 

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारत के लिए सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर का बदलाव नहीं है। इसका असर ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग, आयात बिल, प्रदूषण और नई तकनीक जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। बैटरी निर्माण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ भारत में EV का पूरा इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है।

 

कुल मिलाकर, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री और सरकारी नीतियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश की मोबिलिटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 2030 का 30 फीसदी EV लक्ष्य और 200 अरब डॉलर के संभावित आर्थिक अवसर को देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ऑटो सेक्टर के साथ-साथ रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी बड़ा क्षेत्र बन सकती है।