अगस्त के पहले हफ्ते कैसी रही बाजार की चाल, किन फैक्टर्स ने किया प्रभावित?

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Share Market Weekly Review : अमेरिका ईरान संकट, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, FII-DII गतिविधियां, वैश्विक बाजारों के संकेत और रुपये-क्रूड की चाल से भारतीय शेयर बाजार प्रभावित हुए। 3 दिन बाजार हरे और 2 दिन लाल निशान में बंद हुआ। कारोबारी हफ्ते में सेंसेक्स में 404 और निफ्ट में 189 अंकों की बढ़त रही। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा अगस्त का पहला सप्ताह।

 

कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल?

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 544 अंक चढ़कर 78639 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 391 अंक की तेजी के साथ 24,774 पर पहुंचा। मंगलवार को सेंसेक्स 210 अंकों की गिरावट के साथ 78429 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 159 अंक गिरकर 24,615 पर पहुंच गया। बुधवार को सेंसेक्स 152 अंक चढ़कर 78581 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10 अंक की तेजी के साथ 24,625 पर पहुंचा।

 

गुरुवार को सेंसेक्स 374 अंक चढ़कर 78955 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 12 अंक की तेजी के साथ 24,636 पर जा पहुंचा। हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 456 अंकों की गिरावट के साथ 78499 पर आ गया, जबकि निफ्टी 65 अंक गिरकर 24,571 पर बंद हुआ। 

 

इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, अमेरिका की टैरिफ नीति और एसबीआई समेत कई कंपनियों के नतीजों ने इस हफ्ते बाजार को प्रभावित किया। RBI का रुख ब्याज दरों में तत्काल बदलाव की बजाय महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने वाला रहा। FII flow और अमेरिकी बाजारों की दिशा ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया। पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने क्रूड तथा रिस्क मैनेजमेंट को प्रभावित किया। डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव ने खासकर IT, ऑयल और आयात-निर्भर कंपनियों को प्रभावित किया।

शेयर बाजार की टाइमिंग में बदलाव

3 अगस्त 2026 से भारतीय शेयर बाजार में F&O ट्रेडर्स के लिए बड़ा बदलाव लागू हुआ। अब F&O ट्रेडिंग शाम 3:40 बजे तक चलती है, F&O वाले शेयरों की कैश मार्केट में सामान्य ट्रेडिंग 3:15 बजे तक और नॉन-F&O शेयरों की ट्रेडिंग पहले की तरह 3:30 बजे तक जारी रहेगी। F&O शेयरों का क्लोजिंग प्राइस पुराने VWAP सिस्टम की बजाय क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के जरिए तय होगा। यह बदलाव बाजार में ट्रांसपरेंसी बढ़ाने और क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा सटीक बनाने के लिए हुआ है। 

 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बाजार विशेषज्ञ सुयश राठौर ने कहा कि युद्ध थमने की उम्मीद और क्रूड ऑइल के दाम घटने से इस हफ्ते बाजार रेंजबाउंड लेकिन सकारात्मक रहा। विदेशी निवेशकों ने बाइंग की तो मानसून के रफ्तार पकड़ने से भी निवेशकों में उत्साह का संचार हुआ। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते भी बाजार हरे निशान में दिखाई दे सकता है। अगर अमेरिका और ईरान में समझौता होता है तो बाजार में नया मूवमेंट आ सकता है।

 

शेयर बाजार एक्सपर्ट योगेश बागौरा के अनुसार, निफ्टी में 25050 से 25100 का रेजिस्टेंस बना हुआ है। इसके ऊपर क्लोजिंग आने पर बाजार 25400 से 25500 तक जा सकता है। नीचे में बाजार को 24150-24300 का मजबूत सपोर्ट है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की इस्लामिक नाटो वाली डील से ईरान नाराज नजर आ रहा है। तो जापान अपनी मुद्रा येन में गिरावट को संभालने में नाकाम रहा है। अमेरिका इस स्थिति में जापान की मुद्रा को सहारा देकर उसे संभालने का प्रयास कर रहा है। 

 

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

UPI MDR Charges Controversy: UPI लेनदेन शुल्क में ‘ट्रंप कनेक्शन’ की क्यों हो रही चर्चा?

UPI MDR Charges Controversy

UPI MDR Charges Controversy: भारत सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए नए विधेयक—कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2026—के जरिए बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को यूपीआई (UPI) और रूपे (RuPay) डेबिट कार्ड भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी लेनदेन शुल्क लगाने की अनुमति देने के प्रावधानों ने देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

 

विश्लेषकों और विपक्षी दलों का मानना है कि यह केवल भारत का एक घरेलू वित्तीय या बैंकिंग निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और अमेरिकी प्रशासन का रणनीतिक दबाव एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है।  ALSO READ: भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

1. अमेरिकी कंपनियों (Visa & Mastercard) को नुकसान और USTR की आपत्तियां

2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा लॉन्च किए जाने के बाद भारत में यूपीआई का उपयोग अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। इसका मुख्य कारण इसकी सुगमता और 'शून्य एमडीआर' (Zero MDR) मॉडल रहा है।

  • राजस्व में गिरावट : वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) जैसी अमेरिकी वित्तीय दिग्गज कंपनियों का व्यावसायिक मॉडल व्यापारियों से वसूले जाने वाले लेन-देन शुल्क पर टिका होता है। भारत में शून्य-शुल्क वाली यूपीआई और रूपे नीति के कारण इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी और राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की गई।
  • विदेशी व्यापार बाधा (Trade Barrier) : संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत की डिजिटल भुगतान नीतियों और रूपे को दिए जा रहे सरकारी प्रोत्साहन को अमेरिकी कंपनियों के लिए 'विदेशी व्यापार बाधा' के रूप में वर्गीकृत किया।
  • 30% मार्केट कैप का मुद्दा : USTR ने एनपीसीआई द्वारा थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप्स पर तय की गई 30% बाजार हिस्सेदारी की सीमा पर भी चिंता जताई है, जबकि Google Pay और PhonePe जैसी कंपनियां इस बाजार के बड़े हिस्से पर काबिज रही हैं। 

2. भारत द्वारा पूर्व में दिए गए व्यापारिक समझौते

अमेरिकी व्यापारिक दबाव के संदर्भ में यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि भारत ने पहले भी कई कदम उठाए हैं:

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का यह विधेयक अमेरिकी व्यापारिक दबाव का ही परिणाम है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर का प्रभाव केवल व्यापारियों पर लागू होता है, आम उपभोक्ताओं पर नहीं, और यह प्रक्रिया अभी विचाराधीन है।

3. 'ट्रंप कनेक्शन' और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी दबाव का पैटर्न

वित्त विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन (विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों) का यह पैटर्न केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका दुनिया भर के उन देशों पर दबाव बना रहा है जिन्होंने अपने स्वदेशी, कम लागत वाले या शून्य-शुल्क वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं:

वैश्विक उदाहरण

  • ब्राजील (Pix System) : ब्राजील के केंद्रीय बैंक के त्वरित और मुफ्त 'Pix' सिस्टम के खिलाफ अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 का सहारा लिया।
  • इंडोनेशिया : इंडोनेशियाई नेशनल पेमेंट गेटवे (NPG) द्वारा स्थानीय प्रोसेसिंग अनिवार्य करने पर अमेरिका ने आपत्ति जताई, जिसके बाद इंडोनेशिया को अमेरिकी कंपनियों को क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन की अनुमति देनी पड़ी।
  • अन्य देश : वियतनाम के NAPAS, तुर्की के TROY, सऊदी अरब के डेटा लोकलाइजेशन और चीन के 'यूनियनपे' (China UnionPay) पर भी USTR ने अपने टेक और फाइनेंशियल दिग्गजों के हितों के लिए सवाल उठाए हैं।

प्रस्तावित कानून के माध्यम से यूपीआई और रूपे पर शुल्क लगाने का प्रावधान भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच एक संतुलन बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। USTR की रिपोर्ट और वैश्विक उदाहरणों से यह स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन अपने स्वदेशी डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने वाले देशों पर अपनी वित्तीय कंपनियों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए लगातार दबाव बना रहा है।

भारी बारिश से गुरुग्राम बना जलग्राम, दिल्ली में जलभराव से जगह-जगह जाम

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में मानसून का प्रकोप जारी है। 8 अगस्त 2026 को तड़के से हो रही मूसलाधार बारिश ने दिल्ली और गुरुग्राम की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। भारी वर्षा के कारण गुरुग्राम की सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं, जिससे शहर में 'जलग्राम' जैसे हालात बन गए हैं। ALSO READ: दिल्ली-NCR में भारी बारिश के बाद हाहाकार, कई इलाकों में जलभराव, घंटों जाम में फंसे लोग, सड़कों पर भरा कमर तक पानी

 

वहीं, राजधानी दिल्ली में भी कई प्रमुख सड़कों और अंडरपासों में भारी जलभराव के चलते ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

गुरुग्राम में 'वर्क फ्रॉम होम' एडवाइजरी और ऑरेंज/रेड अलर्ट

जलभराव से सड़कें जलमग्न: दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) पर नरसिंहपुर, हीरो होंडा चौक, इफ़्को चौक, सोहना रोड और सुभाष चौक सहित कई इलाकों में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया।
प्रशासनिक सलाह: बिगड़ते मौसम और सड़कों पर भारी जलजमाव को देखते हुए गुरुग्राम जिला प्रशासन ने निजी व कॉर्पोरेट दफ्तरों के लिए 8 अगस्त को 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) की सलाह जारी की।
अंडरपास बंद: एहतियात के तौर पर पानी से भरे कई प्रमुख अंडरपासों को वाहनों की आवाजाही के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। ALSO READ: IIT दिल्ली में PM मोदी का छात्रों को मंत्र, ‘जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस’, चुनौतियों से मत घबराना

 

दिल्ली में भी यातायात ठप, ये रास्ते हुए सबसे ज्यादा प्रभावित

दिल्ली में आईटीओ (ITO), धौला कुआँ, महरौली-बदरपुर रोड (लालबत्ती सह लाल कुआं क्षेत्र), और जीटी करनाल रोड पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं।

 

ट्रैफिक एडवाइजरी: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को लाल कुआं, आईटीओ और मिंटो रोड की तरफ जाने वाले रास्तों से बचने तथा वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।तापमान में गिरावट: लगातार बारिश और ठंडी हवाओं के कारण दिल्ली का न्यूनतम तापमान सामान्य से लगभग 2.2 डिग्री गिरकर 24.7°C (सफदरजंग) और 22.5°C (पालम) तक पहुँच गया। अधिकतम तापमान 31°C से 32°C के आसपास बने रहने का अनुमान है।

 

IMD का पूर्वानुमान और चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 8 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी रखा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार:दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का दौर रुक-रुक कर चलता रहेगा।शाम व रात के समय भी हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। 10 अगस्त तक दिल्ली-एनसीआर में मानसून की यह सक्रियता बनी रहने का अनुमान है।

 

महिला आरक्षण पर राहुल गांधी का रिजिजू को जवाब, बोले- 2023 का कानून बिना शर्त लागू करें

kiren rijiju and rahul gandhi on women reservation

राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साल बाद भी कानून लागू क्यों नहीं हुआ और इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। ALSO READ: IIT दिल्ली में PM मोदी का छात्रों को मंत्र, ‘जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस’, चुनौतियों से मत घबराना
 

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा – महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ। सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं? 2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के। ALSO READ: 'क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए?' राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर शशि थरूर का बड़ा बयान

 

राहुल के किस बयान ने रिजिजू को दी उम्मीद?

इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात किए जाने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा था कि देश की राजनीति का मकसद 'लोगों को यह समझाना होना चाहिए कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा हुआ है। रिजिजू ने राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताया।

 

राहुल गांधी के बयान पर रिजिजू ने क्या प्रतिक्रिया दी?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव साफ दिख रहा है। अब, मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।

 

गौरतलब है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं।

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

Three Party Mecca Summit

Three Party Mecca Summit: मध्यपूर्व में चल रहे तनावों के बीच, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ऐसे सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार उनमें से किसी भी देश पर हमले को तीनों सहयोगी देशों पर हमला माना जाएगा।

 

फ़ारस की खाड़ी वाले क्षेत्र में बढ़ते हुए तनाव के बीच, परमाणु हथियार वाले देश पाकिस्तान, नाटो के सदस्य तुर्की और सऊदी अरब के बीच इस आकस्मिक सैन्य सैमझौते से नाटो के यूरोपीय देश भी चकित हैं। इन तीनों देशों के बयानों के अनुसार, सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सऊदी शहर मक्का में एक बैठक के दौरान इस “मक्का प्रतिरक्षा समझौते” को अंतिम रूप दिया। ALSO READ: ईरान से युद्ध पर अमेरिका 37.5 अरब डॉलर फूंक चुका, 67 अरब डॉलर और चाहिए

समझौते का उद्देश्य़

समझौते का उद्देश्य पारस्परिक सुरक्षा हितों को मज़बूत करना और अपनी प्रतिरोध क्षमता बढ़ाना बताया गया है। इस समझौते के अधीन, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को तीनों सहयोगी देशों पर हमला माना जाएगा। बयानों के अनुसार, यह समझौता तीनों हस्तारक्षरकर्ता देशों के साझे सुरक्षा हितों को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

बयानों में इस बात पर बल दिया जा रहा है कि इस गठजोड़ का मुख्य उद्देश्य “किसी भी हमले के खिलाफ मिलकर उसे रोकने की अपनी साझी क्षमता” को मज़बूत करना है। किंतु, समझौते की शर्तों या हमले की स्थिति में आपसी मदद के तौर-तरीके के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। ALSO READ: ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की HIT लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से ही समझौता है

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच, सितंबर 2025 से ही पारस्परिक रक्षा का एक समझौता लागू है; पाकिस्तानी सैनिक और उसके कई लड़ाकू विमान पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं। 

 

जर्मन प्रेस एजेंसी (dpa) ने पाकिस्तानी सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि यह नया समझौता मुख्य रूप से तुर्की द्वारा सऊदी अरब और पाकिस्तान को तकनीकी ज्ञान के हस्तांतरण, गोपनीय जानकारी के आदान-प्रदान और सऊदी अरब में हवाई प्रतिरक्षा की क्षमताएं विकसित करने पर केंद्रित है। इसके अलावा, तुर्की के रक्षा उद्योग में सऊदी अरब की ओर से निवेश की भी संभावना है।

पाकिस्तान और सऊदी अरब पर असर

मक्का में तीनों देशों तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब का शिखर सम्मेलन एक ऐसे समय में हुआ है, जब पड़ोस में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को सुलझाने के प्रयास चल रहे हैं।

 

पाकिस्तान बिचौलिाया बन कर दोनों पक्षों को अपनी बातचीत फिर से शुरू करने के लिए मनाने में लगा है। सऊदी सेना और वहां के सरकारी सूत्रों की ओर से यह संकेत मिला बताय़ा जा रहा है कि ईरान-अमेरिका टकराव—और मध्यपूर्व सहित पूरी दुनिया पर पड़ रहा उसका असर— ठीक इस समय मक्का में यह त्रिपक्षीय समझौता होने का एक मुख्य कारण है। ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

सऊदी अरब की मुख्य परेशानी

सऊदी अरब की ओर से बताया गया कि यमन के हूथी मिलिशिया के हमलों में सऊदी अरब के कुछ लोग घायल हुए हैं। मीडिया की ओर से लगातार आ रही खबरों से पता चला है कि इराकी मिलिशिया तथा यमनी हूथी लड़ाके मिलकर सऊदी अरब पर नए हमले करने की तैयारी कर रहे थे; इन दोनों गुटों को ईरान का सहयोगी माना जाता है। 

 

जर्मन प्रेस एजेंसी (dpa) का पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहना है कि मक्का में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए इस समझौते का इरादा ईरान के खिलाफ कोई खास रोक-टोक लगाना नहीं है। इन सूत्रों ने जर्मन प्रेस एजेंसी से यह भी कहा कि यह त्रिपक्षीय समझौता तभी रंग लाएगा, जब अमेरिका इस क्षेत्र से हट जाएगा और सऊदी अरब को इज़राइल की तरफ से तनाव बढ़ने का खतरा महसूस नहीं होगा।

 

सऊदी अरब के पास तेल ओर पैसा तो अकूत है, पर उसे लड़ना-भिड़ना और अपना बचाव स्वयं करना नहीं आता। 1982 के एक समझौते के अधीन, लड़ने-भिड़ने के लिए वहां इस समय लगभग 2600 पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि सितंबर 2025 में हुए एक नए द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के बाद, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाकर लगभग 8000 कर दी है। साथ ही वहां कई लड़ाकू विमान, ड्रोन और एक हवाई रक्षा प्रणाली भी तैनात की है। मक्का में हुए समझौते से वास्तव में तु्र्की के तानाशाह राष्ट्रपति एर्दोआन को सबसे अधिक राजनीतिक लाभ मिलेगा। वे लंबे समय से इस्लामी जगत का खलीफा बनने का सपना देख रहे हैं।

भोपाल का मास्टर प्लान लागू करना अब जरूरी या मजबूरी, आखिरी क्यों 21 साल में तीन ड्राफ्ट, फिर भी कागजों में शहर का भविष्य?

राजधानी भोपाल के आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े रूप के बाद एक ओर जहां नए भोपाल में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं एक भार भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर दिखाए है उससे अब नया मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करने को लेकर सरकार पर दबाव बना गया है।

सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देशों के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा,लेकिन सवाल यहीं है कि आखिर सरकार को सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही क्यों मास्टर प्लान लागू करने की आवश्यकता पड़ रही है।   

तीन बार ड्राफ्ट, फिर भी नहीं बना मास्टर प्लान- भोपाल शहर का मौजूदा मास्टर प्लान 2005 में खत्म हो चुका है, लेकिन इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। ऐसे नहीं 2005 के बाद भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर ड्राफ्ट तैयार नहीं हुए, एक नहीं, दो बार नहीं, तीन बार मास्टर प्लान को लेकर ड्राफ्ट तैयार हुए लेकिन सियासी हस्तक्षेप और प्राशासनिक उदासीनता के कारण मास्टर प्लान लागू नहीं हो सकता।

भोपाल के लिए नया मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया कई वर्षों से चल रही है। अलग-अलग समय पर 2009, 2020 और 2023 में ड्राफ्ट तैयार किए गए, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। 2023 के ड्राफ्ट पर जनप्रतिनिधियों, किसानों और अन्य पक्षों की ओर से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।  2023 में जारी ड्राफ्ट पर 3 हजार से ज्यादा आपत्तियां मिलने के बाद मामला और उलझ गया। मास्टर प्लान लागू करने को लेकर सबसे अधिक आपत्तियां शहर के उन जनप्रतिनिधियों की ओर से लगाई गई जिनके कंधों पर शहर के  विकास की जिम्मेदारी दी थी।

जमीन और सड़कें बनी बड़ी चुनौती-मास्टर प्लान के अटकने का असर शहर के विस्तार पर भी दिखाई दे रहा है। कई प्रस्तावित सड़कों का निर्माण नहीं हो पाया, जबकि दूसरी ओर मास्टर प्लान में प्रस्तावित क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों और अनियोजित निर्माण का विस्तार होता गया। रहवासी इलाकों में बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और नामी कंपनियों के स्टोर और ऑउटलेट बनकर तैयार हो गए। 

कई जगह जमीन पर बनी वास्तविक स्थिति और कागजों में दर्ज योजना के बीच अंतर बढ़ता गया। इससे सड़क, आवास, व्यावसायिक क्षेत्र और दूसरी शहरी सुविधाओं की योजना बनाने में मुश्किलें पैदा हुईं। भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 में लागू हुआ था और उसकी अवधि दिसंबर 2005 में समाप्त हो गई। उस समय शहर की आबादी आज की तुलना में काफी कम थी। इसके बावजूद नए प्लान के लागू न होने से शहर के विकास को पुराने नियोजन ढांचे पर निर्भर रहना पड़ा। यही वजह है कि बढ़ती आबादी, ट्रैफिक, नई कॉलोनियों और बदलती जमीन उपयोग की जरूरतों के हिसाब से शहर का विकास चुनौतीपूर्ण हो गया है।

2047 को ध्यान में रखकर नया प्लान- सरकार ने बाद में पुराने ड्राफ्ट को आगे बढ़ाने के बजाय 2047 की अनुमानित जरूरतों और आबादी को ध्यान में रखकर नया मास्टर प्लान तैयार करने का फैसला किया। इसमें ट्रैफिक व्यवस्था, सड़कों की चौड़ाई, फ्लाईओवर, मेट्रो विस्तार, तालाबों और भोपाल की पुरातात्विक विरासत के संरक्षण जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही गई थी।

मास्टर प्लान के लगातार टलने से सबसे ज्यादा असर शहर के व्यवस्थित विकास पर पड़ रहा है। जहां सड़कें और सार्वजनिक सुविधाएं भविष्य की आबादी के हिसाब से विकसित होनी चाहिए थीं, वहां कई क्षेत्रों में विकास पहले हो रहा है और योजना बाद में बनाई जा रही है। यानी भोपाल का सवाल सिर्फ एक नए दस्तावेज का नहीं, बल्कि अगले कई दशकों के शहर की दिशा तय करने का है। मौजूदा स्थिति में जरूरत इस बात की है कि नया मास्टर प्लान सिर्फ कागज पर तैयार न हो, बल्कि आपत्तियों और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध तरीके से लागू भी किया जाए।
 

हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश- विकास जरूरी, लेकिन जल-जंगल-जमीन की कीमत पर नहीं

hemant soren in van mahotsava

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन जल, जंगल और जमीन की कीमत पर नहीं। सरकार इंसान, वन्यजीव और पर्यावरण के लिए उपयोगी पेड़ों को प्राथमिकता देगी।

 

सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि रांची में राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में शामिल हुआ। आप सभी को इस अवसर पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। वन महोत्सव केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संकल्प है।

 

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को महसूस कर रही है। कभी अत्यधिक वर्षा, कभी सूखा, कभी भीषण गर्मी, कभी असामान्य ठंड, कहीं बादल फटना, कहीं भूस्खलन, ये सभी संकेत हैं कि प्रकृति हमें लगातार चेतावनी दे रही है।

सीएम ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास और प्रकृति के बीच संतुलन भी उतना ही आवश्यक है। सड़कें बनें, उद्योग लगें, शहर बसें, पर जल, जंगल और जमीन की कीमत पर नहीं। जब हम जंगलों में अतिक्रमण करेंगे, तब वन्यजीव भी हमारे बीच आएंगे। आज हाथियों का गांव और शहरों की ओर आना इसी बदलते संतुलन का परिणाम है।

 

उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसके जंगलों, जैव विविधता और प्रकृति से है। इसलिए हमारी सरकार ने स्पष्ट निर्णय लिया है कि राज्य में ऐसे वृक्षों को ही प्राथमिकता दी जाएगी जो इंसान, पशु-पक्षी और पर्यावरण, तीनों के लिए उपयोगी हों। हमें केवल पेड़ लगाने नहीं, उन्हें संरक्षित भी करना है।

IIT दिल्ली में PM मोदी का छात्रों को मंत्र, ‘जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस’, चुनौतियों से मत घबराना

PM Modi in IIT Delhi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस है। इसका कोई कोर्स या पेपर नहीं होता। उन्होंने कहा कि चुनौतियों से जो सिखेगा, वहीं जीतेगा। चुनौतियां आपके लिए अवसर बन जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनौतियां बड़ी हो तो घबराना नहीं चाहिए। हमेशा सीखने की ललक बनाए रखनी चाहिए। ALSO READ: 'क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए?' राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर शशि थरूर का बड़ा बयान

 

पीएम मोदी ने कहा कि लाइफ में curiosity बनाए रखिए… अपनी learning instinct को जगाए रखिए। जो बातें बिना सोचे-समझे स्वीकार कर ली जाती हैं… उन्हें परखिए। उन पर सवाल उठाइए। लेकिन सिर्फ सवाल पूछकर मत रुकिए। उनका समाधान खोजने का साहस भी रखिए।

 

उन्होंने कहा कि आज आप ऐसे समय में इस इंस्टीट्यूज से निकल रहे हैं, जब दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। आज दुनिया की statergic equation बहुत तेजी से बदल रही है, ग्लोबल पॉवर बैलेंस भी प्रतिपल बदल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत है टेक्नोलॉजी की स्पीड। आज कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि अगले 20-30 वर्षों की दुनिया कैसी होगी। लेकिन जब-जब बदलाव का दौर आता है, तब-तब चुनौतियां भी आती हैं और नए अवसर भी पैदा होते हैं। दुनिया बदलेगी, टेक्नोलॉजी भी बदलेगी, इंडस्ट्रीज भी बदलेंगी, प्रोफेशन भी बदलेंगे।

 

उन्होंने कहा कि आज देश के आप सभी प्रतिभाशाली युवाओं के जीवन की नई यात्रा शुरू हो रही है। आप इस समय जीवन के एक यादगार पल को जी रहे हैं। उत्साह, उमंग, सपनों और भावनाओं से सराबोर इस क्षण का हिस्सा बनना, IIT दिल्ली के इस कैंपस में आना, आपके साथ ये अनुभव साझा करना, मेरे लिए भी बहुत खास है।”

 

पीएम मोदी ने कहा कि इन भावुक पलों में मैं एक बात आपसे जरूर कहूंगा। जब जब जीवन आपको पीछे मुड़कर देखने का अवसर देगा, तो ये कैंपस लाइफ, आपके दोस्त, टीचर्स, मेंटर्स और सपोर्ट स्टाफ जो आपका परिवार बन गए, आपके प्रोफेसर्स जिन्होंने आप जैसी प्रतिभाओं को गढ़ने की जिम्मेदारी उठाई और आपका ये Insti जो धीरे-धीरे आपका घर बन गया। आप अपनी हर सक्सेस में इन सबको याद करेंगे, इन सबके लिए थैंकफुल होंगे। ALSO READ: कंगना रनौत का यू-टर्न! Gen Z को बताया भारत की 'सबसे बड़ी ताकत', कुछ दिन पहले प्रदर्शनकारियों को कहा था 'जेनरेशन गटर'

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज आप सभी और सारे स्टूडेंट्स इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं। लेकिन मन के किसी कोने में कुछ और चल रहा होगा। हर स्टूडेंट के मन में आने वाले कल की अपनी-अपनी तस्वीर होगी। कईं छात्र अपनी पहली सैलरी का इंतजार कर रहे होंगे, कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी में होगा, कईं साथी अपने नए स्टार्टअप का सपना देख रहे होंगे, किसी ने अगले कॉम्पिटेटिव एक्जाम का लक्ष्य बनाया होगा। हर किसी का रास्ता अलग है, हर किसी का सपना अलग है। लेकिन इन सबके बाद भी एक एहसास ऐसा है जो आप सभी के मन में एक सा होगा।

‘3 साल से जमीन नहीं मिली’, ऋषभ पंत ने CM धामी से लगाई गुहार, कहा- उत्तराखंड लौटकर करना चाहता हूं काम

rishabh pant with CM Dhami

क्रिकेटर ऋषभ पंत ने उत्तराखंड में जमीन खरीदने में मदद के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की है। पंत ने कहा कि वह दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहते हैं और पिछले तीन साल से जमीन की तलाश कर रहे हैं। सीएम धामी ने अधिकारियों को मामले में जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ALSO READ: सावन में जरूर करें चमोली के प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर के दर्शन, CM धामी की श्रद्धालुओं से अपील

 

ऋषभ पं‍त ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, नमस्ते सर, आप कैसे हैं? उत्तराखंड का स्थानीय निवासी होने के नाते यह मेरे लिए एक लंबा समय रहा है। मैं दिल्ली से अपना ठिकाना बदलकर उत्तराखंड शिफ्ट होने के लिए जमीन खरीदने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मुझे यहाँ रहने के लिए कोई भी बढ़िया और बड़ी सुविधा नहीं मिल पाई। मैं अपने उत्तराखंड से बहुत प्यार करता हूं।

 

उन्होंने कहा कि आपसे मेरी विनम्र विनती है कि कृपया जमीन खरीदने में मेरी मदद करें क्योंकि आजकल स्पष्टता के साथ जमीन मिलना एक बुरा सपना बन गया है। यहां तक कि वह जमीन भी बाकी है, जो मुझे कथित तौर पर तब मिलने वाली थी जब मैं सब कुछ ताक पर रखकर राज्य का प्रचार कर रहा था। 

 

पंत ने कहा कि मैं उत्तराखंड की मदद करने और उसके आसपास निर्माण करने के लिए अपनी मातृभूमि पर वापस जाना चाहता हूं और अपने पहाड़ी लोगों के पास वापस लौटना चाहता हूं। कृपया इस मामले पर गौर करें, मुझे 3 साल से कोई जमीन नहीं मिली है। आपके जवाब का इंतजार है पुष्कर धामी सर। ALSO READ: श्रावण में जागेश्वर धाम का करें दर्शन: देवदार के जंगलों के बीच बसे 224 प्राचीन शिव मंदिर, क्या बोले सीएम धामी?

एक और पोस्ट में ऋषभ पंत ने लिखा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए सरकार की ओर से कोई जमीन उपहार में मिल सके तो यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात होगी। लेकिन अगर आप अनुमति दें, तो मैं सरकार से जमीन उसके तय सरकारी रेट पर ख़रीदना चाहूंगा।

इस पर सीएम धामी ने एक्स पर उन्हें जवाब देते हुए कहा कि प्रिय ऋषभ, आप उत्तराखंड के गौरव हैं। आपने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। अपनी मातृभूमि के प्रति आपका यह प्रेम और यहां वापस आकर योगदान देने की भावना अत्यंत सराहनीय है। आपके द्वारा उठाए गए विषय के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे शीघ्र ही आपसे संपर्क कर नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे।

550 रुपये में 3 महीने, 2000 रुपये में सालभर मनोरंजन, जियो ने बढ़ाया OTT-Pass का दायरा

JIO OTT pass

15 प्रीमियम OTT ऐप्स और 1,000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स का एक्सेस

हाई-स्पीड डेटा और Unlimited 5G भी प्लान में शामिल

सालभर के प्लान में 400 रु तक की बचत 

 

फिल्में, वेब सीरीज, लाइव स्पोर्ट्स और टीवी देखने वाले जियो ग्राहकों के लिए अब लंबे समय के OTT-Pass भी उपलब्ध होंगे। कंपनी ने 550 रुपये में 84 दिन और 2,000 रुपये में 365 दिन वाले दो नए पास जोड़े हैं। पहले से मौजूद 200 रुपये के पास की वैधता 28 दिन है। तीनों पास में हाई-स्पीड डेटा, अनलिमिटेड 5G, 15 प्रीमियम OTT ऐप्स और JioTV पर 1,000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स का एक्सेस मिलेगा। नए OTT-Pass एक साल के सक्रिय बेस प्लान वाले ग्राहकों के लिए होगा। वॉयस-ओनली प्लान इसमें शामिल नहीं हैं।

 

लंबी अवधि का पास लेने पर ग्राहक की लागत भी कम होती है। पहले 200 रुपये का 28 दिन वाला पास अगर ग्राहक तीन बार लेता तो उसे  84 दिनों के लिए 600 रुपये खर्च करने पड़ते, जबकि नया 84 दिन वाला पास 550 रुपये का है। यानी 50 रुपये की सीधी बचत। सालभर के लिए पास पर अब 2400 रुपये के बजाए मात्र 2000 रुपये खर्च करने होंगे। यानी पहले के मुकाबले 400 रुपये कम। डेटा भी अवधि के हिसाब से बढ़ेगा। 200 रुपये के पास में 30GB, 550 रुपये के पास में 90GB और 2,000 रुपये के सालाना पास में 365GB हाई-स्पीड डेटा मिलेगा। 

 

OTT पैकेज में यूट्यूब प्रीमियम, जियोहॉटस्टार मोबाइल + हॉलीवुड और अमेज़न प्राइम शामिल हैं। 550 और 2,000 रुपये के पास में अमेज़न प्राइम लाइट मेंबरशिप, जबकि 200 रुपये के पास में अमेज़न प्राइम वीडियो मोबाइल एडिशन मिलेगा। इसके अलावा ग्राहकों को सोनीलिव, ज़ी5, लायंसगेट प्ले, डिस्कवरी+, सनNXT, फैनकोड, होइचोई, चौपाल, प्लैनेट मराठी, कांचा लन्नका, टाइम्सप्ले और तरंग प्लस का एक्सेस मिलेगा।

 

JioTV पर 1,000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स भी देखे जा सकेंगे। इनमें स्टार प्लस HD, कलर्स HD, SET HD, सन टीवी HD, डिस्कवरी और कार्टून नेटवर्क जैसे चैनल शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक इस पैकेज से ग्राहकों को हर महीने 1,500 रुपये से अधिक मूल्य के मनोरंजन लाभ मिलेंगे। नए 550 रुपये और 2,000 रुपये वाले OTT-Pass 7 अगस्त से MyJio ऐप, जियो की वेबसाइट और अधिकृत रिटेल आउटलेट्स पर उपलब्ध हैं।