Air India Flight : फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलट के डोप टेस्ट पर एयर इंडिया ने कहा- रिपोर्ट नहीं मिली, टिप्पणी की स्थिति में नहीं

फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट के एक पायलट के कथित तौर पर डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने की खबरों के बीच एयर इंडिया ने कहा है कि उसे अभी तक टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। एयरलाइन ने कहा कि रिपोर्ट उसके पास नहीं होने के कारण वह इस मामले में किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।

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एयर इंडिया ने रविवार को कहा कि वह नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के दिशा-निर्देशों के तहत अपने क्रू सदस्यों का नियमित रूप से ड्रग टेस्ट कराती है। यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि 4 अगस्त को अचानक तेज झटकों (Turbulence) का सामना करने वाली फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलटों में से एक डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है।

 

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि लागू प्रोटोकॉल के तहत फ्लाइट के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग टेस्ट की गई थी, लेकिन टेस्ट के नतीजे अभी एयर इंडिया के साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए एयरलाइन किसी भी निष्कर्ष पर टिप्पणी नहीं कर सकती।

 

एयरलाइन ने यह भी कहा कि वह किसी विशेष फ्लाइट या ऑपरेशनल घटना से अलग, विमानन नियमों के अनुरूप अपने क्रू सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट कराती है। जरूरत पड़ने पर एयर इंडिया संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखेगी।

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फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में क्या हुआ था?

 

एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 4 अगस्त को थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान विमान को करीब चार से पांच मिनट तक तेज Turbulence का सामना करना पड़ा था। इस दौरान विमान करीब 300 फीट की ऊंचाई खो बैठा था। फ्लाइट में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे। Turbulence की वजह से कम से कम 17 लोग घायल हुए थे, जिनमें चार केबिन क्रू सदस्य भी शामिल थे। नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू के मुताबिक, घायल चार केबिन क्रू सदस्यों को रीढ़ और गर्दन में चोटें भी आई थीं। घटना के बाद DGCA ने जांच शुरू की थी।

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एक पायलट के डोप टेस्ट में पॉजिटिव होने की रिपोर्ट

 

जांच के दौरान कुछ समाचार संगठनों ने दावा किया कि दोनों पायलटों में से एक का psychoactive substances के लिए किया गया डोप टेस्ट पॉजिटिव आया है। हालांकि, एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि उसे इस टेस्ट की रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। ऐसे में एयरलाइन ने किसी भी कथित निष्कर्ष पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। अब यह देखना होगा कि यदि डोप टेस्ट पॉजिटिव होने की रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

विमान के क्रू की मंत्री ने की तारीफ

नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने घटना के दौरान यात्रियों की मदद करने के लिए एयर इंडिया के क्रू सदस्यों की सराहना की थी।उन्होंने कहा था कि विमान को करीब एक घंटे और उड़ान भरनी थी और इस दौरान भी क्रू सदस्यों ने यात्रियों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराई। मंत्री ने क्रू की बहादुरी की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार जताया।

India-US Relations : H-1B वीजा शुल्क और इमिग्रेशन नीति के अलावा PM मोदी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस किन मुद्दों पर की चर्चा

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। बातचीत के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और उभरती तकनीकों जैसे प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ उनकी फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।

 

बेटे के जन्म पर वेंस और उषा को PM मोदी ने दी बधाई

 

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस को बेटे के जन्म पर बधाई दी। मोदी ने वेंस और उनके परिवार को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति और सेकंड लेडी उषा को उनके बेटे के जन्म पर गर्मजोशी से बधाई दी और पूरे परिवार के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

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व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

 

भारतीय पक्ष की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, मोदी और वेंस ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने उच्चस्तरीय संपर्कों में लगातार बनी गति का स्वागत किया और व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने आपसी हित से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। हालांकि, अमेरिकी पक्ष की ओर से बातचीत को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

 

क्या व्यापार समझौते पर भी हुई चर्चा?

 

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत में भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते का मुद्दा उठा या नहीं। इससे पहले जून में फ्रांस में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने अधिकारियों को जल्द से जल्द संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक व्यापार समझौते की दिशा में काम करने के निर्देश दिए थे।

 

पिछले कुछ समय में क्यों बिगड़े भारत-अमेरिका संबंध?

 

भारत और अमेरिका के संबंधों में पिछले साल उस समय तनाव बढ़ा था, जब अमेरिका ने भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाए थे। इसके अलावा मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव को कम कराने में अपनी भूमिका को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के दावों पर भी भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई थी।

 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बाद के महीनों में कई बार सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच सैन्य संघर्ष को समाप्त कराया और लाखों लोगों की जान बचाई। हालांकि, भारत ने लगातार स्पष्ट किया कि सैन्य संघर्ष की समाप्ति भारत और पाकिस्तान के बीच हुई बातचीत का परिणाम थी और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।

 

H-1B वीजा शुल्क और इमिग्रेशन नीति भी बना मुद्दा

 

अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीति और H-1B वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले ने भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ाया। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका ने संबंधों को फिर से बेहतर बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं। दोनों पक्षों के बीच व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में भी बातचीत आगे बढ़ी है।

मेरठ में CM योगी के कार्यक्रम के दौरान बिना अनुमति उड़ाया ड्रोन, पुलिस ने युवक को किया गिरफ्तार

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मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। कार्यक्रम स्थल के आसपास दो ड्रोन उड़ते हुए दिखाई दिए थे। जांच में एक ड्रोन सरकारी और पूर्व अनुमति से उड़ाया जा रहा था, जबकि दूसरा ड्रोन बिना अनुमति उड़ता पाया गया।

 

मेरठ एसएसपी अविनाश पांडे के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान एक सरकारी ड्रोन को पूर्व अनुमति के तहत उड़ाया जा रहा था। वहीं, दूसरा ड्रोन बिना अनुमति के उड़ता मिला। सूचना मिलते ही सिटी की SWAT टीम ने ड्रोन को ट्रैक कर उसकी पहचान की। ड्रोन के लैंडिंग प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने ड्रोन उड़ाने वाले युवक को पकड़ लिया। पुलिस ने ड्रोन को भी कब्जे में ले लिया है।

 

पूछताछ में युवक ने बताया कि वह मेडिकल थाना क्षेत्र का रहने वाला है और उसे ब्लॉगिंग का शौक है। वह कांवड़ यात्रा और इस बड़े आयोजन को कवर करने के उद्देश्य से ड्रोन उड़ा रहा था। युवक ने पुलिस को बताया कि उसे ड्रोन उड़ाने से जुड़े नियमों की जानकारी नहीं थी। पुलिस ने ड्रोन में रिकॉर्ड की गई पूरी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। ड्रोन की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, ड्रोन उड़ाने से संबंधित नियमों के तहत युवक के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।

 

इसके अलावा पुलिस युवक के सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य ऑनलाइन अकाउंट्स की भी जांच कर रही है। पूरी जांच के बाद आगे की आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या स्वस्थ रहने के लिए 8 घंटे सोना सच में जरूरी है?

मुझे नींद नहीं आने की समस्या हमेशा से रही है, शायद सालों-साल से। कभी-कभी यह सिर्फ एक अहसास होता है, तो कभी यह वाकई सच होता है। यह बात मुझे पता है, क्योंकि मेरी घड़ी मुझे यही बताती है, लेकिन देखा जाए तो मेरी यह घड़ी भी इस समस्या की एक बड़ी वजह हो सकती है। यह मुझे लगातार समय पर सोने की याद दिलाती रहती है और हर सुबह खराब ‘स्लीप स्कोर' दिखाकर परेशान करती है। इससे मेरी घबराहट बहुत बढ़ जाती है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और लगता है कि अब नींद नहीं आएगी। अजीब बात यह है कि अगले दिन मैं एकदम ठीक और तरोताजा महसूस करती हूं।

 

लिस्बन यूनिवर्सिटी की स्लीप रिसर्चर काचा हेईस ने बातचीत के दौरान कहा कि जब आपकी नींद पूरी नहीं होती, तो आपकी सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे मेरी परेशानी की वजह समझ में आ सकती है। भले ही मैं हफ्ते के दिनों में ठीक महसूस करूं, लेकिन वीकेंड पर मैं जरूरत से ज्यादा सोती हूं, जो ‘स्लीप डेट' यानी नींद की कमी का संकेत है।

 

नींद में अहम भूमिका निभाता है हमारा दिमाग

हेईस ने नींद से जुड़ी कई स्थितियों पर शोध किया है, जिसमें एथलीटों पर जेट लैग और नींद की कमी का असर भी शामिल है।

 

एक शोध में स्लीप एप्निया (एक ऐसी बीमारी जिसमें रात में सोते समय बार-बार सांस रुकने लगती है) के मरीजों और शिफ्ट में काम करने वाले लोगों की नींद और सुस्ती के स्तर की तुलना की गई। शिफ्ट में काम करने वाले लोग अक्सर अपनी ‘सर्केडियन रिदम' (जैविक घड़ी) के खिलाफ काम करते हैं। यह हमारे शरीर की अंदरूनी घड़ी होती है जो हमें बताती है कि हमें कब जागना है और कब सोना है। 

 

उन्होंने प्रतिभागियों की खुद महसूस की गई सुस्ती (आत्म-मूल्यांकन) और क्लिनिकल (डॉक्टरी) जांच के नतीजों की तुलना की। इसमें उन्होंने पाया कि लोग जैसे-जैसे ज्यादा सुस्ती या नींद के माहौल के संपर्क में आते हैं, अपनी खुद की सुस्ती का सही अंदाजा लगाने की उनकी क्षमता में उतना ही अंतर आने लगता है।

 

सरल शब्दों में कहें तो दिमाग काम करना बंद कर देता है। यह चिंता की बात होनी भी चाहिए, क्योंकि नींद में दिमाग की अहम भूमिका होती है।

 

हर रात लगभग 7.5 से 8.5 घंटे की नींद की जरूरत

जब हम सोते हैं तो हमारा शरीर मरम्मत और रिकवरी के कई काम करता है। यह भोजन या वातावरण के जरिए शरीर में गए जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है, नई ऊर्जा बनाता है, और यह हमारी पढ़ाई, सीखने और याददाश्त के लिए भी बहुत जरूरी है।

 

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को में नींद पर शोध करने वाली यिंग-हुई फू कहती हैं कि नींद में दिमाग के कई हिस्से शामिल होते हैं। न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र संबंधी) और साइकियाट्रिक (मानसिक) बीमारियों सहित दिमाग की लगभग हर बीमारी का सीधा संबंध नींद की समस्याओं से हो सकता है।

 

औसतन, लोगों को हर रात लगभग 7.5 से 8.5 घंटे की नींद की जरूरत होती है, लेकिन अक्सर हम मुश्किल कामों में लगे लोगों, खासकर नेताओं को यह कहते हुए सुनते हैं कि वे बहुत कम घंटे सोते हैं, जैसे कि वे हमेशा लोगों के लिए काम कर रहे हों।

 

हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भी यह बात दोहराई थी कि पद संभालने के बाद, वे हर रात केवल 0 से 3 घंटे ही सो पाती हैं। पूर्व हेवी मेटल ड्रमर होने के नाते आप जापानी पीएम से एक खास तरह की सहनशक्ति की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि अगर वह जानबूझकर या आदत के कारण लगातार कम सोती हैं, तो यह भले ही उनकी मेहनत और काम के प्रति समर्पण को दिखाए, लेकिन लंबे समय में यह उनकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है।

 

सबसे बुरी स्थिति में, लंबे समय तक नींद की कमी से आपके शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो सकते हैं, जिससे दिल या दिमाग की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। सबसे खराब हालात में, यह जानलेवा भी हो सकता है।

 

फू ने डीडब्ल्यू को बताया कि हमारी सेहत के लिए नींद से ज्यादा जरूरी सिर्फ दो चीजें हैं। एक है हवा। अगर हमें हवा ना मिले, तो हम कुछ ही मिनटों में मर जाएंगे। दूसरी चीज है पानी। अगर हमें पानी ना मिले, तो हम कुछ ही दिनों में मर जाएंगे। अगर आप खाना ना खाएं तो आप कुछ महीने जिंदा रह सकते हैं, लेकिन अगर आप सोएं नहीं, तो शायद आप सिर्फ कुछ हफ्ते ही जिंदा रह पाएंगे।

 

यह बात सभी जानवरों पर लागू होती है। उन्होंने कहा कि अगर हम सोएं नहीं, तो हम मर जाएंगे।

 

अपवाद: नैचुरल शॉर्ट स्लीपर्स (जो स्वाभाविक रूप से कम सोते हैं)

नैचुरल शॉर्ट स्लीपर्स इस नियम के अपवाद हैं। वे रात में 6 घंटे से भी कम सो सकते हैं और ना केवल अच्छा महसूस करते हैं, बल्कि असल में स्वस्थ, खुश और ऊर्जावान भी रहते हैं। ऐसा लगता है कि उनमें कुछ जेनेटिक वेरिएशन होते हैं, जो उन्हें बेहतर ढंग से जीने में मदद करते हैं। फू ने एक 80 साल के नैचुरल शॉर्ट स्लीपर का उदाहरण दिया, जिन्होंने ट्रायथलॉन में हिस्सा लिया था।

 

फू और उनकी लैब ने 2009 में डीईसी2 जीन में इस तरह का पहला वेरिएशन ढूंढा और अपने शोध नतीजे प्रकाशित किए। दस साल बाद उन्होंने एक और पेपर प्रकाशित किया, जिससे पता चला कि एडीआरबी1 जीन भी ‘नैचुरल शॉर्ट स्लीपर सिंड्रोम' से जुड़ा हुआ है। इसके बाद, एनपीएसआर1, जीआरएम1, और एसआईके3 जीन्स को लेकर भी नई जानकारियां सामने आईं और कई अन्य जीन्स पर भी शोध कार्य चल रहा है।

 

हम इन्हें ‘म्यूटेशन' (बदलाव) के बजाय जीन ‘वेरिएशन' (अलग-अलग रूप) कह रहे हैं, क्योंकि म्यूटेशन का संबंध अक्सर सेहत पर बुरे असर से होता है, लेकिन ऐसा लगता है कि ‘नैचुरल शॉर्ट स्लीप' (स्वाभाविक तौर पर कम सोना) से सेहत को वे दिक्कतें नहीं होतीं जिनका सामना उन लोगों को करना पड़ता है जो आदतन कम सोते हैं या जिन्हें नींद पूरी नहीं मिलती।

 

इन जीन से पता चलता है कि नींद शरीर के कई अलग-अलग कामों को प्रभावित करती है-  

 

डीईसी2 : सोने और जागने के समय को कंट्रोल करने में मदद करता है।

 

एडीआरबी1 : दिल और नसों के सिग्नल भेजने में मदद करता है।

 

एनपीएसआर1 : उत्तेजना और बेचैनी को कंट्रोल करने में मदद करता है।

 

जीआरएम1 : दिमाग के काम में शामिल है। यह डिप्रेशन से जुड़ा हो सकता है।

 

एसआईके3 : सेल साइकिल, मेटाबॉलिज्म और सूजन को कंट्रोल करने में भूमिका निभाता है।

 

इनमें से हर एक को खोजने और उन्हें टेस्ट करने में, कई वर्षों की मेहनत और बुनियादी शोध लगे हैं। फू ने कहा कि हम में से हर किसी के जीनोम में 500 से 1,000 खास तरह के म्यूटेशन होते हैं. ऐसे में यह पता लगाना कि असल में किस म्यूटेशन की वजह से ऐसा हो रहा है, बहुत मुश्किल काम है।

 

अच्छी नींद का फायदा

स्वाभाविक रूप से कम सोने वाले जिन लोगों के बारे में अभी जानकारी है, उनकी संख्या बहुत कम है, लेकिन फू का कहना है कि यह क्षमता जितने लोगों में अभी रिसर्च के जरिए सामने आई है, असल में उससे कहीं ज्यादा आम हो सकती है।

 

फू की ज्यादातर खोजें उन चुनिंदा परिवारों तक ही सीमित हैं जिनमें एक जैसा जीन वेरिएशन (जेनेटिक बदलाव) पाया गया है। इसका एक व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारण है: अगर किसी परिवार के तीन सदस्यों में एक जैसा वेरिएशन हो और वे सभी सिर्फ 4 से 6 घंटे की नींद लेकर भी पूरी तरह स्वस्थ दिखते हैं, तो इस बात की पूरी संभावना है कि वही जेनेटिक बदलाव इसके लिए जिम्मेदार है। खासकर तब, जब वह जीन पहले से ही अच्छी नींद के लिए जरूरी माना जाता हो, लेकिन अभी यह शोध शुरुआती चरण में ही है।

 

फू ने कहा कि हम बस इतना जानते हैं कि वे बेहतर काम करते हैं और ज्यादा स्वस्थ रहते हैं. मेरे लिए सबसे तार्किक बात यही है कि उनकी नींद का सिस्टम बेहतर है, यानी वे अच्छी नींद ले पाते हैं।

 

हेईस भी इस क्षेत्र में हो रहे शोध को लेकर संभलकर बात करती हैं। उनका कहना है कि स्वाभाविक रूप से कम सोने वाले लोगों पर अभी बहुत कम अध्ययन हुए हैं।

 

उन्होंने कहा कि जब हम आदतन कम सोने वाले लोगों का क्लिनिकल टेस्ट करते हैं और उनकी नींद का समय बढ़ाते हैं, तो हमें दिखता है कि उनकी सेहत और परफॉर्मेंस में सुधार हुआ है. लेकिन दिक्कत यह है कि स्वाभाविक तौर पर कम सोने वालों पर हमारे पास लंबे समय तक किए जाने वाले अध्ययन की कमी है। 

 

फू भी इस बात से सहमत हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि इस शोध के लिए पैसे जुटाना एक चुनौती रही है। फू ने कहा कि मेरा लक्ष्य हर किसी को अच्छी नींद लेने में मदद करना है, क्योंकि अगर हम सभी को अच्छी नींद लेने में मदद कर सकें, तो बीमारियों में कमी आएगी। बीमारियों के होने की दर में भारी कमी आएगी। क्या आप सोच सकते हैं कि इसका मानवता पर क्या असर होगा?

Kanwar Yatra 2026 : हेलिकॉप्टर से कांवड़ियों पर हुई फूलों की बारिश, बोले- शिवभक्त बोले योगीजी ने फूल नहीं सम्मान बरसाया

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तपती सड़क, पैरों में छाले और सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा…। भगवान शिव के प्रति आस्था में लीन कांवड़ियों के लिए शनिवार का दिन उस समय यादगार बन गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ की धरती पर उनका पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। इसके अलावा हेलिकॉप्टर द्वारा आसमान से बरसते फूलों को देखकर भी कांवड़िए भाव-विभोर हो उठे। किसी ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री का अभिवादन किया तो किसी ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ अपनी खुशी जताई।

 

फूल नहीं, आस्था पर बरसा सम्मान

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को मेरठ पहुंचे और NH-58 कांवड़ मार्ग पर शिवभक्त कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर से कांवड़ मार्ग का हवाई निरीक्षण भी किया। जैसे ही हेलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा शुरू हुई, सड़क पर चल रहे कांवड़ियों ने ‘हर-हर बम-बम’ का उद्घोष करते हुए अपने हाथ उठाकर आभार प्रकट किया। पूरा वातावरण शिवमय हो गया। इस दौरान कांवड़ियों के चेहरों पर थकान की जगह उत्साह और गर्व नजर आया। हरिद्वार से गंगाजल लेकर फरीदाबाद जा रहे शिवभक्त राहुल ने कहा कि मुख्यमंत्री का कांवड़ियों के बीच आकर उनका सम्मान करना गौरव की बात है। योगी जी ने हम पर सिर्फ फूल नहीं बरसाए, हमारी आस्था, तपस्या और भक्ति का सम्मान किया है। यह पल जिंदगी भर याद रहेगा।

 

रास्ते की थकान पलभर में उतर गई

दिल्ली निवासी रोहित ने कहा कि कई दिनों से पैदल चलने के कारण शरीर थक गया था। उमस-गर्मी व भीड़ के बीच यात्रा करना आसान नहीं है, लेकिन जब हेलिकॉप्टर से फूल बरसे और सामने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिखाई दिए तो सारी थकान जैसे एक क्षण में गायब हो गई। रोहित के साथ यात्रा कर रहे अन्य शिवभक्तों ने कहा कि हम बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए निकले हैं। मेरठ में योगी जी ने जिस तरह हमारा स्वागत किया, वह हमारे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं।

 

योगी की व्यवस्थाओं ने जीत लिया दिल

गाजियाबाद के कांवड़िए मुकुल ने कहा कि मुख्यमंत्री जिस तरह पूरी यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं पर नजर रख रहे हैं, उससे पता चलता है कि योगी सरकार हमारी यात्रा को लेकर कितनी गंभीर है। मुख्यमंत्री खुद कांवड़ मार्ग का जायजा ले रहे हैं। हमारे ऊपर फूल बरसाकर उन्होंने संदेश दिया है कि कांवड़िए सरकार के लिए सिर्फ यात्री नहीं, बल्कि भगवान शिव के भक्त और अतिथि हैं। सच में योगी जी ने हमारा दिल जीत लिया।

 

कभी नहीं भूल पाएंगे यह भव्य स्वागत

दिल्ली निवासी अनुज ने कहा कि वह घर पहुंचने के बाद मेरठ में हुए भव्य स्वागत की कहानी जरूर सुनाएंगे। हम तो गंगाजल लेकर अपने शहर जा रहे हैं, लेकिन मेरठ की यह याद भी अपने साथ लेकर जाएंगे। हेलिकॉप्टर से फूल बरसते देखना और मुख्यमंत्री जी को कांवड़ियों का स्वागत करते देखना हम कभी नहीं भूल पाएंगे। बुलंदशहर से कांवड़ लेकर पहुंचीं लक्ष्मी ने पुष्पवर्षा को बेहद भावुक कर देने वाला क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति आस्था लेकर निकले शिवभक्तों पर फूल बरसते देख मन प्रसन्न हो गया। मुख्यमंत्री की ओर से मिला यह सम्मान खुशी और गर्व का विषय है।

 

विजया और जयंती भी हुईं भावुक

हापुड़ से आईं शिवभक्त विजया व जयंती ने कहा कि कांवड़ यात्रा में शिवभक्ति के साथ ऐसा सम्मान मिलना बेहद सुखद अनुभव है। उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान खासकर महिला कांवड़ियों के लिए बहुत अच्छी सुविधाएं प्रदान की गईं हैं। मेरठ में मिला यह स्वागत उनकी यादों में हमेशा बना रहेगा।

 

पुष्पवर्षा के बाद कांवड़ियों में खासा उत्साह नजर आया। फूलों से सजे मार्ग पर शिवभक्त बम-बम भोले के जयघोष के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। किसी के हाथ में तिरंगा था तो कोई भगवा ध्वज लहराते हुए आगे बढ़ रहा था। आसमान से बरसते फूल और सड़क पर गूंजता ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष कांवड़ यात्रा के इस पड़ाव को खास बना रहा था। कांवड़ियों ने कहा कि मुख्यमंत्री के सम्मान ने उनमें नई ऊर्जा भर दी है और अब वे और उत्साह के साथ बाबा भोलेनाथ को गंगाजल अर्पित करने बढ़ रहे हैं।

 

 

सीएम के आने की खबर मिली तो रुक गए

मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना मिलने पर कई अन्य राज्यों के कांवड़िए शुक्रवार रात से ही कार्यक्रम स्थल के पास बने शिविरों में रुक गए थे। हर कोई गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की छवि देखने को आतुर था। जैसे ही योगी आदित्यनाथ मंच पर पहुंचे तो कांवड़ियों का उत्साह दोगुना हो गया।

 

20 मिनट तक हुई पुष्पवर्षा

कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 मिनट तक निरंतर पुष्पवर्षा की। इस दौरान वह और अन्य जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद रहे तो आसमान से एक हेलीकॉप्टर से प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों का दल कांवड़ पथ पर पुष्पवर्षा करता रहा।

 

सीएम योगी को देखकर डीजे पर बजा- जो राम को लाए हैं…

कांवड़ पथ से अत्यधिक संख्या में डीजे वाली बड़ी कांवड़ें भी गुजर रही थीं। जैसे ही डीजे वाली कावड़ मंच के पास पहुंचती तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखकर शिवभक्तों का उत्साह बढ़ जाता। इस दौरान कई कांवड़ों के डीजे पर बज रहे धार्मिक गीतों के स्थान पर शिवभक्तों ने ‘जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे’ गीत बजाना शुरू कर दिया।

 

सिविल डेस में भी तैनात रहे पुलिसकर्मी

पुष्पवर्षा के दौरान हजारों की संख्या में शिवभक्त नेशनल हाइवे के दोनों तरफ खडे़ हुए थे। एक तरफ यातायात का संचालन हो रहा था तो दूसरी तरफ भोलेनाथ के भक्त मंच के सामने से गुजर रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में भी व्यवस्था संभालने को तैनात रहे।

 

मुख्यमंत्री योगी ने उत्साह बढ़ाया

मंच से गुजरने वाला हर कांवड़ यात्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने देर तक ठहरने का प्रयास कर रहा था। इस दौरान बड़ी कांवड़ें भी मंच के सामने से गुजर रही थीं। ऐसे में यातायात व्यवस्था बाधित न होने पाए, इसलिए सीएम योगी भी शिवभक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनका उत्साह बढ़ाते और उन्हें आगे बढ़ने का इशारा भी करते। तब कांवड़ यात्री भी सीएम का अभिवादन करते हुए मस्ती में झूमते हुए गंतव्य की ओर बढ़ जाते।

 

सीएम योगी ने निभाया गठबंधन धर्म

पुष्पवर्षा के दौरान केवल भाजपा के जनप्रतिनिधि ही नहीं एनडीए के घटक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। जब पुष्पवर्षा चल रही थी तो बारी-बारी से जनप्रतिनिधि भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ पुष्पवर्षा कर रहे थे। ऐसे में मुख्यमंत्री की नजर रालोद पार्टी से बिजनौर के सांसद चंदन चौहान और बागपत से सांसद राजकुमार सांगवान पर पड़ी। उन्होंने तुरंत दोनों सांसदों को अपने पास बुलाकर साथ में पुष्पवर्षा कराई।

सुरक्षा व्यवस्था पर सीएम ने जताया संतोष

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस-प्रशासन के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी और कर्मचारी पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने यात्रा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।

 

योगी आदित्यनाथ ने देशभर से आए सभी शिवभक्तों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए भगवान महादेव से सभी की मनोकामनाएं पूरी करने की कामना की। अंत में उन्होंने ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।

Gujarat : गुजरात में दिव्यांगों के लिए बड़ी सुविधा, अब मोबाइल में दिखाएं बस पास और करें फ्री सफर, केंद्र सरकार ने दिया अवॉर्ड

bhupendra patel

गुजरात सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए डिजिटल सुविधा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने दिव्यांगों को जारी किए जाने वाले ‘दिव्यांग बस पास’ को डिजिलॉकर से जोड़ दिया है। अब लाभार्थियों को बस में सफर के दौरान बस पास की हार्ड कॉपी साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने मोबाइल फोन पर डिजिलॉकर में मौजूद डिजिटल बस पास दिखाकर राज्य परिवहन की बसों में सफर कर सकेंगे।

 

राज्य सरकार की इस पहल को ‘ईज ऑफ लिविंग’ और डिजिटल इंडिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस प्रयोग के लिए केंद्र सरकार ने गुजरात को ‘Excellence in Citizen-Centric Digital Governance’ अवॉर्ड से सम्मानित किया है।

 

मोबाइल में दिखाएं डिजिटल बस पास

 

गुजरात सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग दिव्यांग व्यक्तियों को गुजरात स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (GSRTC) की बसों में मुफ्त यात्रा के लिए ‘दिव्यांग बस पास’ जारी करता है।

 

अब इस बस पास को DigiLocker से लिंक कर दिया गया है। इसका फायदा यह होगा कि लाभार्थी यात्रा के दौरान अपने मोबाइल फोन में डिजिटल बस पास दिखा सकेंगे। इससे पास के खोने, खराब होने या उसकी हार्ड कॉपी संभालकर रखने की परेशानी कम होगी।

 

सरकार को मिला डिजिटल गवर्नेंस अवॉर्ड

 

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार के इस डिजिटल प्रयोग को केंद्र सरकार की ओर से ‘Excellence in Citizen-Centric Digital Governance’ अवॉर्ड दिया गया है।

 

राज्य सरकार ने यह सुविधा State e-Governance Mission Team (SEMT) के सहयोग से शुरू की है। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को ज्यादा आसान, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।

 

दिव्यांगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सुविधा?

 

डिजिटल बस पास की सुविधा से दिव्यांग लाभार्थियों को यात्रा के दौरान जरूरी दस्तावेज साथ रखने की परेशानी कम होगी। मोबाइल में डिजिटल पास उपलब्ध होने से वे जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से दिखा सकेंगे।

 

सरकार का मानना है कि इस तरह की डिजिटल सुविधाएं Ease of Living को बढ़ावा देती हैं और नागरिकों को सरकारी सेवाएं ज्यादा आसानी से उपलब्ध कराती हैं।

 

डिजिटल इंडिया के विजन को बढ़ावा

 

गुजरात सरकार की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और नागरिक-केंद्रित शासन के विजन के अनुरूप बताई जा रही है। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकार लगातार पेपरलेस गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य यह है कि नागरिकों को महत्वपूर्ण दस्तावेज और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाएं डिजिटल माध्यम से कहीं भी और कभी भी उपलब्ध हो सकें। 

9.87 लाख पेंशन लाभार्थियों को बड़ा तोहफा, CM पुष्कर सिंह धामी ने खाते में भेजे 146 करोड़ रुपए

उत्तराखंड के पेंशन लाभार्थियों के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं की जुलाई महीने की पेंशन राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी है। सरकार ने यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे खातों में भेजी। मुख्यमंत्री ने कुल 9 लाख 87 हजार 17 लाभार्थियों के बैंक खातों में 146 करोड़ 32 लाख 50 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की। इसका मतलब है कि पात्र लाभार्थियों को पेंशन का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया गया है।

 

किसे मिला पेंशन का पैसा?

 

यह भुगतान समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को किया गया है। कुल 9,87,017 लाभार्थियों को जुलाई महीने की पेंशन का भुगतान DBT के माध्यम से किया गया।

 

अगर आप उत्तराखंड की किसी सामाजिक पेंशन योजना के लाभार्थी हैं, तो अपने बैंक खाते और संबंधित बैंक SMS/स्टेटमेंट को चेक कर सकते हैं।

 

DBT से क्यों किया गया भुगतान?

 

सरकार का कहना है कि पेंशन राशि का भुगतान समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जा रहा है। DBT के जरिए पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचने से सरकारी योजना का लाभ पात्र व्यक्ति तक सीधे पहुंचता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि पात्र लोगों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से मिलता रहे।

CM हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश, बोले- जल, जंगल, जमीन और पहचान की रक्षा हमारा संकल्प

Jharkhand CM hemant soren

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए ऐतिहासिक झारखंड जनजातीय महोत्सव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसी जीवन-दृष्टि दी है, जिसमें प्रकृति पूजनीय है, समुदाय सर्वोपरि है और संस्कृति जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

 

हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी झारखंड में ऐतिहासिक जनजातीय महोत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के शुभ अवसर पर इस आयोजन में शामिल सभी लोगों का स्वागत करते हुए उन्हें शुभकामनाएं और ‘जोहार’ कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव केवल झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों के प्रति संकल्प को भी दर्शाता है।

 

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ अपनी पहचान की रक्षा के लिए संघर्ष झारखंड की विरासत रही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखना सभी का संकल्प होना चाहिए।

 

सोरेन ने अपने संदेश में झारखंड की अस्मिता और भविष्य को लेकर कहा कि “हमारी जमीन, हमारा शासन—अपनी पहचान के साथ, अपने भविष्य की ओर।”

 

मुख्यमंत्री ने झारखंड के वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि राज्य के बहादुर शहीद हमेशा अमर रहें।

 

उन्होंने अपने संदेश का समापन “झारखंड की जय” के उद्घोष के साथ किया।

योगी सरकार का Project Praveen बना मिसाल, AI मूल्यांकन में 50 हजार छात्रों का शानदार प्रदर्शन

cm yogi

योगी सरकार द्वारा प्रदेश के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी भविष्य की तकनीक से जोड़ने की दिशा में शुरू की गई पहल 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा माध्यमिक और एडेड स्कूलों में संचालित 4 घंटे के 'एआई फॉर ऑल' कोर्स की राज्य स्तरीय मूल्यांकन परीक्षा में लगभग 50 हजार छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और औसतन 70.41/100 का शानदार स्कोर हासिल किया है।

 

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत एआई कोर्स का उद्देश्य गांव और शहर के बीच डिजिटल अंतर को खत्म कर हर छात्र को भविष्य की तकनीक से लैस करना है। लगभग 50 हजार छात्रों की भागीदारी और उनका शानदार प्रदर्शन हमारे युवाओं की अपार क्षमता को दर्शाता है। यह योगी सरकार के 'स्किल्ड यूपी-समर्थ यूपी' के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारी सरकार मेधावी छात्रों को एडवांस टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने के अवसर देगी और कमजोर छात्रों को भी विशेष प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा में लाएगी।

 

5 दिन के रिकॉर्ड समय में हुई परीक्षा

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि परीक्षा का आयोजन पूर्णतः पारदर्शी और कुशल तरीके से 5 दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। 8 जुलाई को गोपनीयता के साथ प्रश्न-पत्र जिलों को भेजे गए, 9 जुलाई को मुख्य परीक्षा, 10 जुलाई को अनुपस्थित छात्रों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित हुई और 13 जुलाई तक 73 जिलों में मूल्यांकन कर परिणाम मिशन मुख्यालय को भेजे गए। परिणाम 8 अगस्त को सत्यापित किए गए।

 

परीक्षा में 89% से अधिक छात्र सफल रहे, जिन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है। उत्कृष्ट श्रेणी (80% से अधिक अंक) के तहत 12,500 से अधिक परीक्षार्थी 80 से ज्यादा अंक लाकर 'टॉप' श्रेणी में रहे। वहीं, सक्षम श्रेणी (50 से 80 अंक) के तहत 28,000 से अधिक छात्रों ने इस श्रेणी में अंक हासिल किए। इसी तरह, विशेष ध्यान योग्य श्रेणी (50 से कम अंक) में केवल 4,819 छात्र रहे, जिनके लिए विशेष सुधारात्मक कक्षाएं चलाई जाएंगी।

 

क्षेत्रवार प्रदर्शन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 18,395 छात्रों ने 74.3 के औसत स्कोर के साथ बाजी मारी, जिसमें 37.8% छात्र उत्कृष्ट श्रेणी में रहे। बुंदेलखंड ने गुणवत्ता और निरंतरता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, यहां का औसत स्कोर 74.2 रहा और 50 से कम अंक पाने वाले छात्रों का प्रतिशत पूरे राज्य में सबसे कम मात्र 4.9% रहा। मध्य यूपी का औसत 69.7 और पूर्वांचल के 21 जिलों के 14,387 छात्रों का औसत 64.7 रहा। 

मिशन निदेशक ने बताया कि 50 से कम अंक पाने वाले छात्रों, खासतौर पर पूर्वांचल के लिए 'रेमेडियल एआई मॉड्यूल्स' चलाए जाएंगे। वहीं 80% से अधिक अंक लाने वाले 12,500 से अधिक मेधावी छात्रों को एडवांस्ड एआई, एडवांस्ड कोडिंग और रोबोटिक्स में विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा।

 

उल्लेखनीय है कि 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए 210 घंटे का निःशुल्क कौशल विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें आईटी, ब्यूटी, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जॉब स्पेसिफिक हुनर सिखाए जाते हैं। इसी के साथ 4 घंटे का 'एआई फॉर ऑल' कोर्स अलग से संचालित है।

Jammu Kashmir Cloudburst : बादलों के फटने से नहीं मिल रही राहत, जम्मू कश्मीर में 40 से ज्यादा घटनाओं में 40 मौतें

जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों पर कुदरत का कहर बादल फटने की घटनाओं के रूप में भी बरप रहा है। तभी तो अभी तक इस साल ज्ञात 40 बादल फटने की घटनाओं में 40 के लगभग लोगों की मौत की खबर है। कई घटनाओं के बारे में पता भी नहीं चल सका है। इन बादल फटने की घटनाओं से घरों, सड़कों, पुलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है।

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आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि सिर्फ 1 जून से जुलाई के मध्य तक कम से कम 22 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि जुलाई के उत्तरार्ध और अगस्त की शुरुआत में लगातार भारी बारिश के कारण कई और घटनाएं हुईं, जिससे दर्ज की गई बादल फटने की घटनाओं की कुल संख्या 40 से अधिक हो गई।

भारी बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और बारिश से हुए भूस्खलन के कारण ही मौतें हुई हैं, जिनमें जम्मू डिवीजन में सबसे अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में पुंछ, राजौरी, कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ शामिल हैं, जबकि कश्मीर के कई हिस्सों, विशेष रूप से शोपियां और कुपवाड़ा में भी हाल के हफ्तों में बार-बार अचानक बाढ़ आई है।
 

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बार-बार होने वाली बादल फटने की घटनाओं से दर्जनों आवासीय मकान, दुकानें, स्कूल, सड़कें, पुल, सिंचाई नहरें और कृषि क्षेत्र क्षतिग्रस्त हो गए हैं। अचानक आई बाढ़ के कारण कई गांवों में जलमग्नता हो गई है, जिसके चलते अधिकारियों को निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा और बचाव दल तैनात करने पड़े।
 

भारी बारिश के कारण भूस्खलन, कीचड़ के खिसकने और पत्थर गिरने से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार बाधित हुआ है, जिससे कई मौकों पर यात्रियों और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि चिनाब घाटी के पर्वतीय जिले, विशेष रूप से किश्तवाड़ और डोडा, साथ ही शोपियां, कुपवाड़ा और कश्मीर के अन्य पहाड़ी क्षेत्रों के ऊपरी इलाके, अपने खड़ी भूभाग और मौसमी धाराओं की निकटता के कारण सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में बने हुए हैं।

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मौसम विज्ञानियों के अनुसार, बादल फटने की घटना एक अत्यंत तीव्र और सीमित क्षेत्र में होने वाली वर्षा है, जिसमें लगभग 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर से अधिक वर्षा होती है। ऐसी घटनाओं से अक्सर अचानक बाढ़, मलबा प्रवाह और भूस्खलन जैसी आपदाएँ आती हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए बहुत कम समय बचता है।
 

मौसम विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, जम्मू कश्मीर में बादल फटने की बढ़ती आवृत्ति हिमालय के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ के साथ नमी से भरी दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाओं की परस्पर क्रिया के कारण हो रही है।

उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र की खड़ी पहाड़ी ढलानें नमी से भरपूर हवा को तेजी से ऊपर उठने के लिए मजबूर करती हैं, जिसे ओरोग्राफिक लिफ्टिंग कहा जाता है, जिससे विशाल क्यूमुलोनिम्बस बादल बनते हैं। ये बादल अक्सर संकरी घाटियों में फंस जाते हैं, जहां वे नमी जमा करते रहते हैं और फिर अचानक ढह जाते हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में एक छोटे से क्षेत्र में भारी मात्रा में बारिश होती है।

विशेषज्ञ इस घटना का कारण वायुमंडलीय अस्थिरता को भी मानते हैं। तेज़ ऊपर की ओर उठने वाली वायु धाराएँ वर्षा की बूंदों को बादलों के भीतर निलंबित रखती हैं, जिससे भारी मात्रा में पानी जमा हो जाता है। जैसे ही पानी के बढ़ते भार के कारण ये ऊपर की ओर उठने वाली धाराएँ कमजोर होती हैं, बादल प्रणाली ढह जाती है, जिसके परिणामस्वरूप तीव्र बादल विस्फोट होता है।