
UPI MDR Charges Controversy: भारत सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए नए विधेयक—कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2026—के जरिए बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को यूपीआई (UPI) और रूपे (RuPay) डेबिट कार्ड भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी लेनदेन शुल्क लगाने की अनुमति देने के प्रावधानों ने देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
विश्लेषकों और विपक्षी दलों का मानना है कि यह केवल भारत का एक घरेलू वित्तीय या बैंकिंग निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और अमेरिकी प्रशासन का रणनीतिक दबाव एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है। ALSO READ: भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन
1. अमेरिकी कंपनियों (Visa & Mastercard) को नुकसान और USTR की आपत्तियां
2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा लॉन्च किए जाने के बाद भारत में यूपीआई का उपयोग अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। इसका मुख्य कारण इसकी सुगमता और 'शून्य एमडीआर' (Zero MDR) मॉडल रहा है।
- राजस्व में गिरावट : वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) जैसी अमेरिकी वित्तीय दिग्गज कंपनियों का व्यावसायिक मॉडल व्यापारियों से वसूले जाने वाले लेन-देन शुल्क पर टिका होता है। भारत में शून्य-शुल्क वाली यूपीआई और रूपे नीति के कारण इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी और राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की गई।
- विदेशी व्यापार बाधा (Trade Barrier) : संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत की डिजिटल भुगतान नीतियों और रूपे को दिए जा रहे सरकारी प्रोत्साहन को अमेरिकी कंपनियों के लिए 'विदेशी व्यापार बाधा' के रूप में वर्गीकृत किया।
- 30% मार्केट कैप का मुद्दा : USTR ने एनपीसीआई द्वारा थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप्स पर तय की गई 30% बाजार हिस्सेदारी की सीमा पर भी चिंता जताई है, जबकि Google Pay और PhonePe जैसी कंपनियां इस बाजार के बड़े हिस्से पर काबिज रही हैं।
2. भारत द्वारा पूर्व में दिए गए व्यापारिक समझौते
अमेरिकी व्यापारिक दबाव के संदर्भ में यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि भारत ने पहले भी कई कदम उठाए हैं:
- गूगल टैक्स का अंत : 6% डिजिटल सर्विस टैक्स (गूगल टैक्स) को समाप्त किया गया।
- डेटा सेंटर टैक्स हॉलिडे : विदेशी टेक कंपनियों को भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे का लाभ दिया गया। ALSO READ: क्या अब UPI पेमेंट पर देना होगा चार्ज? नए कानून के बाद जानिए किसे लगेगा शुल्क और किसे नहीं
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का यह विधेयक अमेरिकी व्यापारिक दबाव का ही परिणाम है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर का प्रभाव केवल व्यापारियों पर लागू होता है, आम उपभोक्ताओं पर नहीं, और यह प्रक्रिया अभी विचाराधीन है।
3. 'ट्रंप कनेक्शन' और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी दबाव का पैटर्न
वित्त विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन (विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों) का यह पैटर्न केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका दुनिया भर के उन देशों पर दबाव बना रहा है जिन्होंने अपने स्वदेशी, कम लागत वाले या शून्य-शुल्क वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं:
वैश्विक उदाहरण
- ब्राजील (Pix System) : ब्राजील के केंद्रीय बैंक के त्वरित और मुफ्त 'Pix' सिस्टम के खिलाफ अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 का सहारा लिया।
- इंडोनेशिया : इंडोनेशियाई नेशनल पेमेंट गेटवे (NPG) द्वारा स्थानीय प्रोसेसिंग अनिवार्य करने पर अमेरिका ने आपत्ति जताई, जिसके बाद इंडोनेशिया को अमेरिकी कंपनियों को क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन की अनुमति देनी पड़ी।
- अन्य देश : वियतनाम के NAPAS, तुर्की के TROY, सऊदी अरब के डेटा लोकलाइजेशन और चीन के 'यूनियनपे' (China UnionPay) पर भी USTR ने अपने टेक और फाइनेंशियल दिग्गजों के हितों के लिए सवाल उठाए हैं।
प्रस्तावित कानून के माध्यम से यूपीआई और रूपे पर शुल्क लगाने का प्रावधान भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच एक संतुलन बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। USTR की रिपोर्ट और वैश्विक उदाहरणों से यह स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन अपने स्वदेशी डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने वाले देशों पर अपनी वित्तीय कंपनियों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए लगातार दबाव बना रहा है।

