‘क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए?’ राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ पर शशि थरूर का बड़ा बयान

shashi tharoor and rahul gandhi

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान को मिले समर्थन पर आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस Gen Z और छात्रों की नब्ज को समझने में नाकाम रही। ALSO READ: कंगना रनौत का यू-टर्न! Gen Z को बताया भारत की 'सबसे बड़ी ताकत', कुछ दिन पहले प्रदर्शनकारियों को कहा था 'जेनरेशन गटर'

 

'इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) की 15वीं सालगिरह पर आयोजित एक कार्यक्रम में थरूर ने माना कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा छात्रों के हक में उठाए गए तमाम मुद्दे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान में पहले ही उठाए जा चुके थे। हालांकि, पार्टी को उस समय जनता से वैसा समर्थन और प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी, जैसा CJP के आंदोलन को मिला।

 

उन्होंने कहा कि CJP ने जिन मांगों को लेकर आंदोलन खड़ा किया, उन्हें मेरी पार्टी और राहुल गांधी ने अपने अभियान के जरिए कई महीने पहले ही उठाया था। लेकिन हमें इस बात पर गंभीरता से आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर कांग्रेस के प्रयासों को वैसी जन-प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिली? हम क्या नहीं कर पाए? क्या हम उनकी बात सुनने में नाकाम रहे? क्या हम लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत पर खरे नहीं उतर पाए? क्या हम 'जेन जी' की नब्ज नहीं पकड़ पाए? ALSO READ: झारखंड छात्र आंदोलन : 14वें दिन राहुल गांधी की एंट्री, बोले 'एजुकेशन सिस्टम कोलैप्स हो चुका है'

 

गौरतलब है कि CJP ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर 20 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर से अपना प्रदर्शन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था। छात्रों की मांग पर सरकार ने पेपर लिक मामले में सख्त कदम उठाए। साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी पद से इस्तीफा दे दिया।

 

राहुल गांधी ने CJP के आंदोलन से पहले, 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की थी, जिसे बाद में देश के कई अन्य शहरों में ले जाया गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष आज भी प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

हिमाचल के चंबा में दर्दनाक बस हादसा, 7 लोगों की मौत, 11 घायल

himachal bus accident

Chamba Bus Accident : हिमाचल प्रदेश के चंबा में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले में पटवार सर्कल बैरागढ़ के तहत चालुंज मोड़ के पास सुबह 7:15 बजे एक प्राइवेट बस के सड़क से फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए।

 

बताया जा रहा है कि हादसे के समय बस में लगभग 15 से 16 यात्री सवार थे। घटना का पता चलते ही स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर एकत्रित हुए और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर घायलों को क्षतिग्रस्त बस से बाहर निकाला और इलाज के लिए तुरंत सिविल अस्पताल भिजवाया।

बरगद के पेड़ जैसी दिखेगी वडोदरा की बुलेट ट्रेन स्टेशन बिल्डिंग, एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं देख रह जाएंगे दंग

baniyan tree like station proposed in vadodara

देश में हाई-स्पीड रेल परिवहन के एक नए युग की शुरुआत हो रही है, जिसके तहत वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन का निर्माण कार्य अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। वडोदरा शहर की पहचान माने जाने वाले बरगद के पेड़ (बनियान ट्री) की थीम पर आकार ले रहा यह स्टेशन लगभग 1.77 लाख स्क्वायर फीट क्षेत्र में फैला होगा। पंड्या ब्रिज के पास बन रहे इस स्टेशन में यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी आधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।

 

केंद्रीय रेलवे मंत्री ने शेयर किया स्टेशन का नया वीडियो

केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन का वीडियो शेयर कर चल रहे निर्माण कार्य की झलक दिखाई। उन्होंने बताया कि स्टेशन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और जल्द ही यह आधुनिक स्टेशन वडोदरा शहर के लिए गर्व और आकर्षण का केंद्र बनेगा।
 

'बनियान ट्री' से प्रेरित संस्कृति और पहचान दर्शाती डिजाइन

वडोदरा शहर में बरगद के पेड़ों की ऐतिहासिक परंपरा को सम्मान देते हुए स्टेशन की पूरी डिजाइन बनियान ट्री से प्रेरित रखी गई है। लगभग 16,467 वर्ग मीटर (1.77 लाख स्क्वायर फीट) क्षेत्रफल में बन रहे इस स्टेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि यह भारतीय रेलवे और स्थानीय बस सेवाओं से आसानी से जुड़ सके।

 

तीन मंजिला ऊंची इमारत और 2 प्लेटफॉर्म की सुविधा

यह बुलेट ट्रेन स्टेशन कुल तीन मंजिला बनाया जा रहा है, जिसकी जमीन से छत तक की ऊंचाई लगभग 34.5 मीटर होगी। इस स्टेशन पर आइलैंड (द्वीप) आकार के दो प्लेटफॉर्म और कुल चार ट्रैक तैयार किए जाएंगे। प्लेटफॉर्म और आंतरिक हिस्से में वडोदरा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की झलक दर्शाती विशेष कलात्मक थीम विकसित की जाएगी।
 

एयरपोर्ट जैसी विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं

यात्रियों को एयरपोर्ट जैसा अनुभव देने के लिए यहां विशाल वेटिंग हॉल, बिजनेस क्लास लाउंज, बेबी केयर रूम, रेस्ट रूम और आधुनिक शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा कार, बस और ऑटो-रिक्शा के लिए अलग पार्किंग जोन के साथ स्मूथ पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ एरिया बनाया जाएगा। भीड़ प्रबंधन के लिए विशाल पेडेस्ट्रियन प्लाजा भी तैयार किया जाएगा।

 

मुंबई-अहमदाबाद की दूरी अब महज 2 घंटे 15 मिनट में

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर मुंबई, सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद सहित कुल 12 आधुनिक स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इस रूट पर बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी, जिसके परिणामस्वरूप मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी महज 2 घंटे 15 मिनट में पूरी हो सकेगी।

 

देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक

यह महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र का सबसे बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इस पूरे कॉरिडोर और स्टेशनों के निर्माण के लिए लगभग 55 लाख मीट्रिक टन सीमेंट और 15 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया जा रहा है, जो भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का नया रिकॉर्ड बनाएगा।

LIVE: रांची में 15वें दिन भी छात्र आंदोलन जारी, हिमाचल के चंबा में बस खाई में गिरी

jharkhand student protest

Latest News Today Live Updates in Hindi : झारखंड के रांची में जेपीएससी और जेएसएसएसी परीक्षा में धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन का आज 15वां दिन है। कुछ ही देर में फिर सर्किट हाउस में सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बात होगी। पल पल की जानकारी…

-रांची में 15वें दिन भी छात्र आंदोलन जारी। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनशन का आज 7वां दिन है।

-देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “टीम के द्वारा सूचना मिली है कि हमारा प्रतिनिधिमंडल आज 10 बजे सर्किट हाउस में वार्ता के लिए जाएगा। कितने लोग बातचीत के लिए मिलने जा रहे हैं, ये बहुत महत्वपूर्ण बात नहीं है। हम सबकी मांगें समान हैं और ये मांगें पूरी होनी चाहिए।”

हिमाचल के चंबा में बस खाई में गिरी। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। 11 घायल।

आज कोई धमकी देता है कि दंगा करवा देंगे तो कहता हूं ‘आओ बच्चू, करा कर देख लो समझ मे आ जायेगा : सीएम योगी

जो स्वयं को नहीं संभाल पा रहे, वे प्रदेश की 25 करोड़ जनता को क्या संभालते? इसीलिए दंगाइयों के सामने समाजवादी घुटने टेकते थे। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंबेडकरनगर में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि अब कोई दंगा कराने की धमकी देता है तो जवाब मिलता है, “आओ बच्चू, थोड़ा दंगा करवा लो, मैं तुम्हें दंगा कराना सिखा देता हूं।” उन्होंने कहा कि सपा का झंडा लेकर चलने वाले अवैध वसूली करते थे, थानों से तहसीलों तक उनका कब्जा था और नौकरी निकलते ही ‘चाचा-भतीजे की जोड़ी’ वसूली के लिए निकल पड़ती थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले भी मुख्यमंत्री होते थे, लेकिन उन्हें गोविंद साहब धाम आने की फुर्सत नहीं थी और नोएडा जाने से इसलिए डरते थे कि कहीं कुर्सी न खिसक जाए। जनता ने उनकी कुर्सी हमेशा के लिए विदा कर दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जलालपुर, आलापुर और टांडा विधानसभा क्षेत्रों की 706 करोड़ रुपये से अधिक की 194 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। उन्होंने लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, प्रमाणपत्र और चेक वितरित किए।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार बहुत जल्द युवा नीति लाएगी, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किलिंग और रोजगार पर फोकस होगा। साथ ही नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के जरिए सिद्धार्थनगर के बांसी से बस्ती होते हुए प्रयागराज को जोड़ने और इस मार्ग को चित्रकूट से आगे सुदूर दक्षिण भारत तक ले जाने की योजना है, जिसका महत्वपूर्ण केंद्र अंबेडकरनगर बनेगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की विकास और गरीबों के उत्थान में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने कहा कि 7 अगस्त का दिन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्ष 1905 में इसी दिन स्वाधीनता संग्राम सेनानियों ने देश की आजादी के लिए 'स्वदेशी' को अपना मंत्र बनाया था। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कटेहरी उपचुनाव में जनता ने धर्मराज निषाद को विजयी बनाया था। इसके बाद आज उन्हें एक बार फिर क्षेत्र में आने का अवसर मिला है। गोविंद साहब धाम आने का यह उनका पहला अवसर है और संभवतः वह यहां आने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं। सैकड़ों वर्षों से आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र रहा यह पवित्र धाम लोगों को अपनी विरासत से जुड़ने की प्रेरणा देता है। गोविंद साहब की पवित्र समाधि और नवनिर्मित राम-जानकी मंदिर में दर्शन कर उन्हें आध्यात्मिक अनुभूति हुई।

 

 

हमारे जनप्रतिनिधियों ने जो कहा है, उसके अनुरूप मेले को राजकीय परंपरा और सुविधाओं से जोड़ेंगे

 

उन्होंने कहा कि माघ मेले में यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। लाखों श्रद्धालु आते हैं। सर्दी की ठिठुरन के बावजूद अपनी विरासत के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता ज्ञापित करने का भाव यहां के लोगों में रहता है। अब यह मेला राजकीय मेले के रूप में मान्यता प्राप्त करेगा। हमारे जनप्रतिनिधियों ने जो कहा है, उसके अनुरूप इस मेले को हम राजकीय परंपरा और सुविधाओं से जोड़ेंगे। जब विगत वर्ष कटेहरी चुनाव के तत्काल बाद आया था, तब 1500 करोड़ रुपये की सौगात देकर यहां का कर्ज चुकता करने के लिए आया था और आज 706 करोड़ रुपये का यह उपहार अंबेडकर नगर वासियों को प्रदान करता हूं।

 

विकास का मॉडल देखना है तो अंबेडकर नगर आकर देखिए

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का मॉडल देखना है तो अंबेडकर नगर आकर देखिए। जनपद एक नहीं, बल्कि दो-दो एक्सप्रेसवे से जुड़ चुका है। यहां के मेडिकल कॉलेज में क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण करके लोगों को ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं की सुविधा मिले, सरकार ने इन सभी कार्यों को किया है। कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की तीन महत्वपूर्ण आधारशिलाएं विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका हैं। तीनों के कार्यक्षेत्र, सीमाएं और लक्ष्मण रेखाएं तय हैं। आपसी समन्वय के साथ ये तीनों संस्थाएं विकास कार्यों को गति देने का काम करती हैं।

 

विधानसभा में समाजवादी पार्टी ने हो-हल्ला और कोहराम मचाया

 

उन्होंने कहा कि हाल ही में विधानसभा में सरकार 59 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट लेकर आई थी। उम्मीद थी कि सत्ता पक्ष और सहयोगी दलों के साथ विपक्ष भी इस पर चर्चा में रुचि दिखाएगा। बजट में युवाओं के रोजगार, अन्नदाता किसानों के उन्नयन, महिलाओं के स्वावलंबन और गरीबों के कल्याण के लिए नई योजनाओं एवं कार्यक्रमों का प्रावधान किया गया है। लेकिन समाजवादी पार्टी ने हो-हल्ला और कोहराम मचाया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुपूरक बजट में सामाजिक न्याय की विभूतियों, महापुरुषों, संतों और ऋषियों के सम्मान के लिए भी धनराशि का प्रावधान किया गया था। महर्षि वाल्मीकि, सद्गुरु संत रविदास, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, छत्रपति शाहू जी महाराज और ज्योतिबा फुले समेत अन्य महापुरुषों से जुड़े स्मारकों और प्रतिमाओं पर छतरी लगाने के साथ सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल और गेट के निर्माण की व्यवस्था की गई थी। अनुपूरक बजट में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई थी। कोटेदारों का इंसेंटिव और ग्राम चौकीदारों का मानदेय बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया था, लेकिन समाजवादी पार्टी ने विधानसभा नहीं चलने दी। क्योंकि समाजवादी पार्टी की विकास और गरीबों के उत्थान में कोई रुचि नहीं है।

 

सपा सरकार में पैसे दिए बिना नौकरी नहीं मिलती थी

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर ने भी पूर्ववर्ती सपा सरकार के दौरान प्रदेश में अराजकता और गुंडागर्दी का जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय युवाओं को योग्यता के आधार पर नौकरियां नहीं मिलती थीं। नौकरी का विज्ञापन निकलते ही 'चाचा-भतीजे की जोड़ी' वसूली के लिए निकल पड़ती थी। नौकरियों में भाई-भतीजावाद हावी था और युवाओं के हक पर डाका डाला जाता था। पैसे दिए बिना नौकरी नहीं मिलती थी, जिससे योग्य युवा भी खुद को ठगा महसूस करते थे। उस समय पठन-पाठन का माहौल चौपट और कानून-व्यवस्था तहस-नहस थी। आए दिन दंगे होते थे। कभी सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, हापुड़, अलीगढ़, एटा, मथुरा, लखनऊ तो कभी कानपुर और प्रयागराज में दंगे होते थे।

 

उन्होंने कहा कि पहले दंगों के कारण उत्तर प्रदेश का माहौल इतना खराब हो गया था कि प्रदेश के नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया था। हस्तशिल्पी और कारीगर पलायन को मजबूर थे, जबकि व्यापारी त्रस्त थे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा का झंडा लेकर चलने वाले लोग अवैध वसूली करते थे। गुंडागर्दी चरम पर पहुंच गई थी। हालात ऐसे थे कि लोगों में यह धारणा बन गई थी 'जिस गाड़ी में सपा का झंडा, समझो होगा उसमें कोई सपा का गुंडा।' अन्नदाता किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे थे और कारीगर पलायन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सपा ने हर जिले में एक-एक माफिया पाल रखा था। कहीं बालू माफिया, कहीं भूमि माफिया, कहीं वन माफिया तो कहीं पशु माफिया सक्रिय थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को भी बताया जाना चाहिए कि उस दौर में किस तरह की अराजकता फैली हुई थी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश माफिया, गुंडा और कर्फ्यू से मुक्त है। नौजवानों के सामने पहचान का संकट नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार मिल रहा है। प्रदेश सरकार नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं के हितों से खिलवाड़ करने वालों को जेल भेजने के साथ उनकी बाप-दादों की कमाई तक जब्त कर गरीबों में बांट दी जाएगी। आज छात्रों के भविष्य, छात्रवृत्ति और नौजवानों के हक पर कोई डाका नहीं डाल सकता। बेटी से छेड़खानी या व्यापारी को धमकाने का भी कोई दुस्साहस नहीं कर सकता। सरकार ने तय कर रखा है कि बेटी और व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए दो ही जगह हैं, जेल या जहन्नुम, तीसरी कोई जगह नहीं।

 

उन्होंने कहा कि सपा सरकार में हर जिले में एक माफिया और सत्ता के समानांतर उसकी सत्ता चलती थी। तब 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया' था,  आज 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट', 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज' और 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन' है। सरकार हर जिले के व्यंजनों को भी पहचान देकर आगे बढ़ा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अन्नदाता किसानों के जीवन में बदलाव और हर गरीब को उसका अधिकार दिलाने के लिए काम कर रही है। प्रदेश में 16 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और 10 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये तक के आयुष्मान भारत का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे जन्म से मूक-बधिर हैं, उनकी सर्जरी में छह लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं। सरकार ने तय किया है कि इसका पूरा खर्च वह उठाएगी। जो बच्चे निराश्रित हैं या कोविड कालखंड में अपने माता अथवा पिता को खो चुके हैं, उनका पूरा खर्च सरकार मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत उठा रही है। उन्हें चार हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई गरीब बीमार है तो वह किसी भी जाति, क्षेत्र, मत या मजहब का हो, हमारे लिए वह प्रदेश का नागरिक है। अगर उसके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है तो मुख्यमंत्री राहत कोष से उसके उपचार के लिए पैसा दिया जाएगा। जनप्रतिनिधि उसकी सिफारिश करेंगे और इलाज के खर्च का भार सरकार उठाएगी। निराश्रित महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन, बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांगजनों को दिव्यांगजन पेंशन दी जा रही है। एक करोड़ 10 लाख परिवारों को पेंशन की सुविधा का लाभ प्रदान किया जा रहा है। आज हर गांव को कनेक्टिविटी और बिजली से जोड़ने के साथ हर खेत तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2017 से पहले यह मौसम इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के लिए जाना जाता था, जिससे बच्चों में भय रहता था।

 

बच्चों के हंसते चेहरे बता रहे कि उनका भविष्य सुरक्षित है

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नप्राशन के दौरान मां की गोद में आए दो बच्चों को जब उन्होंने अपनी गोद में लिया तो उनके हंसते चेहरे बता रहे थे कि उनका भविष्य सुरक्षित है। डबल इंजन की सरकार उनके बचपन को सुरक्षित कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के समय हर साल 1200 से 1500 बच्चे इंसेफेलाइटिस के शिकार होते थे, लेकिन इनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं होती थी। विकास के लिए सरकार के पास विजन और उसके लिए समय होना चाहिए। 

 

सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले भी मुख्यमंत्री होते थे, लेकिन क्या उन्हें गोविंद साहब धाम आने की फुर्सत नहीं मिली थी? पिछले दिनों उन्हें श्रवण धाम और शिव बाबा धाम में भी आने का अवसर मिला था। पहले के मुख्यमंत्री इन स्थानों पर क्यों नहीं आते थे? वर्ष 2017 से पहले मुख्यमंत्री को फुर्सत नहीं थी। वे नोएडा नहीं जाते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि वहां जाने से कुर्सी खिसक जाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब वह मुख्यमंत्री बने और स्वयं नोएडा जाने का कार्यक्रम बनाया तो उन्हें भी बताया गया कि वहां जाने से कुर्सी चली जाती है। इस पर उन्होंने कहा कि जो कुर्सी कल जानी है, वह आज चली जाए तो भी ठीक है। हम जनता के लिए आए हैं और जनता की सुनवाई करेंगे। पहले के लोग इसलिए वहां जाने से डरते थे कि कहीं कुर्सी न चली जाए, लेकिन जनता ने उनकी कुर्सी को हमेशा के लिए विदा कर दिया।

 

संभल में समाजवादी पार्टी के एक गुंडे ने दंगा कराने का प्रयास किया तो आज नाक रगड़ रहा है

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये दोपहर 12 बजे सोकर उठने वाले लोग हैं। 12 बजे सोकर उठेंगे, दो बजे 'बबुआ' तैयार होंगे और उसके बाद उनके 'चच्चू' उन्हें कुछ सिखाएंगे। फिर एक ट्वीट करेंगे और जिम चले जाएंगे। जिम से वापस आएंगे तो महफिल जम जाएगी और फिर उन्हें इतना होश नहीं रहता कि वे इस देश में हैं या देश से बाहर कहीं और हैं।

उन्होंने कहा कि जिनसे स्वयं को नहीं संभाला जा रहा, वे प्रदेश और 25 करोड़ जनता को क्या संभालते। इसीलिए उस समय दंगे होते थे और दंगाइयों के सामने समाजवादी पार्टी की सरकार घुटने टेकती थी। संभल में समाजवादी पार्टी के एक गुंडे ने दंगा कराने का प्रयास किया तो सरकार उसे घुटनों पर लाकर आज नाक रगड़वा रही है।

 

उन्होंने कहा कि बरेली में भी एक गुंडा दंगा करवाता था और लगातार अव्यवस्था पैदा करता था। उसने एक बार धमकी दी तो प्रशासन थोड़ा सहमा। मैंने कहा कि चिंता मत करो, तैयारी करो। उसने धमकी दी है तो उसे एक बार आने दीजिए और एक बार में निपटो। उन्होंने कहा कि आज वह मौलाना जेल में कष्ट उठाकर नाक रगड़ रहा है और कह रहा है 'साहब, बख्श दो। एक बार जान बख्श दो, आगे से गलती नहीं करेंगे, दंगा नहीं करेंगे।'

उन्होंने कहा कि पहले इन दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर सम्मानित किया जाता था और आज जब कोई धमकी देता है कि दंगा करवा देंगे तो मैं कहता हूं 'आओ बच्चू, थोड़ा दंगा करवा लो, मैं तुम्हें दंगा कराना सिखा देता हूं कि कैसा दंगा होता है।' मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 'यूपी में नो कर्फ्यू, नो दंगा और यूपी में है अब सब चंगा।' उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस यह काम नहीं कर सकती थीं, क्योंकि ये भारत की विरासत का अपमान करने वाले लोग हैं।

 

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने महाराजा सुहेलदेव का अपमान किया था। उनका स्मारक नहीं बनने दिया गया, बल्कि विदेशी आक्रांता सालार मसूद के नाम पर गाजी मियां का मेला लगाना प्रारंभ कर दिया गया था। हमारी सरकार आई तो तय किया कि किसी विदेशी आक्रांता के नाम पर कोई कार्यक्रम नहीं होने देंगे। आयोजन होंगे तो महाराजा सुहेलदेव के नाम पर होंगे। आज उसी बहराइच में मेडिकल कॉलेज का नामकरण महाराजा सुहेलदेव के नाम पर किया गया है। वहां महाराजा सुहेलदेव की 56 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा उनके विजय स्मारक के रूप में स्थापित है, जो भारत के सनातन की ध्वजा को लेकर देश को गौरव की अनुभूति कराती है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उसी स्थान पर महाराजा सुहेलदेव ने तीन लाख की सेना के साथ सालार मसूद गाजी को पराजित किया था। आज महाराजा सुहेलदेव के नाम पर आजमगढ़ में विश्वविद्यालय संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को वीरांगना झलकारी बाई कोरी, महारानी दुर्गावती, वीरांगना अवंती बाई लोधी और वीरांगना ऊदा देवी पासी को सम्मान देने की फुर्सत नहीं थी। मुझे प्रसन्नता है कि हमारी डबल इंजन की एनडीए सरकार ने वीरांगना ऊदा देवी, वीरांगना झलकारी बाई कोरी और वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर महिला पीएसी की तीन बटालियनों का गठन किया है। इनमें प्रदेश की बेटियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और वे प्रदेश की सुरक्षा के लिए दुर्गा वाहिनी के रूप में निकलकर गुंडों और अपराधियों का काम तमाम करेंगी।

 

नए उत्तर प्रदेश में आज यहां के लोगों को देश में जहां कहीं भी जाने पर सम्मान मिलता है। नौ वर्ष पहले प्रदेश के लोगों को बाहर सम्मान के लिए तरसना पड़ता था। यूपी का नाम सुनकर लोग दूर भागते थे। अगर किसी के पास अंबेडकर नगर या उत्तर प्रदेश का कोई व्यक्ति बैठता था तो प्रदेश का नाम सुनकर लोग 10 कदम पीछे हट जाते थे। आज स्थिति बदल चुकी है। अब उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर 10 कदम दूर बैठा व्यक्ति भी पास आकर गले मिलने के लिए उतावला होता है। सामने वाले के चेहरे की चमक बताती है कि आज वह भी यूपी के नाम पर गौरव की अनुभूति कर रहा है।

 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान को यह गौरव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मिला है। वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भगवान श्रीराम की पावन जन्मस्थली पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। आज नई अयोध्या अपने वैभव के साथ दुनिया के सामने है। प्रयागराज जाएंगे तो बदला हुआ प्रयागराज दिखाई देगा। मां विंध्यवासिनी धाम का स्वरूप बदल चुका है। नैमिषारण्य में नया नैमिषारण्य नजर आता है और मथुरा-वृंदावन एक बार फिर द्वापर युग और कृष्ण कन्हैया की स्मृतियों को जीवंत कर रहा है।

 

अब कोई भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न नहीं खड़ा कर सकता

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को खटक रहा है कि अयोध्या को सम्मान कैसे मिल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, जबकि कांग्रेस ने भगवान राम के अस्तित्व पर ही प्रश्न खड़ा करने का प्रयास किया था। अब कोई भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न नहीं खड़ा कर सकता। भगवान राम का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर आज अयोध्या धाम में बन गया है और लाखों श्रद्धालु वहां पहुंचकर प्रभु के प्रति अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं।

 

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर हर जिले में एक एम्प्लॉयमेंट जोन बनेगा

 

मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने उनकी स्किलिंग, रोजगार और अच्छी शिक्षा के साथ उन्हें हर जगह सम्मान दिलाने के लिए योजनाएं बनाई हैं। उत्तर प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं में उन्हें अग्रणी भूमिका में आगे बढ़ाने के लिए अभ्युदय कोचिंग की व्यवस्था का विस्तार किया गया है। सरकार बहुत जल्द युवा नीति लाने जा रही है। युवा ही नेतृत्व करेगा और अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किलिंग और रोजगार के लिए आगे बढ़कर काम करेगा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर हर जिले में एक एम्प्लॉयमेंट जोन बनाया जाएगा, जिसमें युवाओं की स्किलिंग के साथ रोजगार की भी व्यवस्था होगी। सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार निषादराज को सम्मान मिला है। श्रृंगवेरपुर जाने पर भगवान श्रीराम और निषादराज के गले मिलते हुए भव्य प्रतिमा त्रेता युग का स्मरण कराती है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों ने जो मुद्दे उनके सामने रखे हैं, सरकार उन पर कार्य करेगी। जहां बस स्टैंड की आवश्यकता होगी, वहां बस स्टैंड बनाए जाएंगे। जहां अतिरिक्त अस्पताल बनाने या अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी, सरकार वह भी करेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड कनेक्टिविटी और टेक्सटाइल पार्क के लिए जो भी आवश्यक होगा, सरकार करेगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी के गुंडों को कोई अवसर नहीं देना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय इसी जनपद के होनहार कार्यकर्ता रामबाबू गुप्ता की हत्या समाजवादी पार्टी के गुंडों ने कर दी थी। उस समय भी वह अंबेडकर नगर आए थे। आज सरकार जिस सख्ती से गुंडों से निपट रही है, उसने हर बच्चे के भविष्य को उज्ज्वल किया है। हर बहन-बेटी को सम्मान और हर व्यापारी को सुरक्षा प्रदान की है। अन्नदाता किसानों के चेहरे पर खुशहाली आई है और हर कारीगर सम्मान के साथ अपनी कारीगरी एवं हस्तशिल्प के वैभव को वैश्विक पटल पर ले जा सकता है। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों को लेकर उनके पास या तो रितेश पांडे आते हैं, कटेहरी विधायक धर्मराज निषाद आते हैं, विधान परिषद सदस्य डॉ. हरिओम पांडे आते हैं या क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के लोगों की विकास में कोई रुचि नहीं है। उनका पशु तस्करी का धंधा चौपट हुआ है। विकास कार्यों में सेंध लगाने वालों को रोका गया है। जमीनों पर कब्जा और अवैध खनन रोका गया है। इन गतिविधियों पर रोक लगाकर वही पैसा विकास कार्यों में लगाया जा रहा है और इसका परिणाम आज अंबेडकर नगर में दिखाई दे रहा है।

 

इस दौरान प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश राजभर, भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष दिलीप पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा 'साधु', विधान परिषद सदस्य डॉ. हरिओम पांडे, विधायक कटेहरी धर्मराज निषाद, पूर्व सांसद रितेश पांडे, पूर्व विधायक त्रिवेणी राम, पूर्व विधायक जयराम विमल आदि उपस्थित थे।

सपा के नेता गांव-गांव घूमकर नौकरियां बेचते थे, वही अब पेपर लीक की बात कर रहे : राजभर

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अम्बेडकरनगर में समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि 706 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देकर सरकार ने अम्बेडकरनगर को विकास की नई रफ्तार दी है। जिले में पांच विधानसभा सीटें हैं और 2027 के चुनाव में सभी पांचों सीटें जीतनी हैं। उन्होंने सपा को परिवारवादी बताते हुए कहा कि उनकी सरकार में नौकरियां बेची जाती थीं और नकल कराई जाती थी, जबकि योगी सरकार ने नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां रिश्वत के बिना दी हैं। 

 

राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत करते हुए कहा कि वह अम्बेडकरनगर को 706 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देने आए हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने जिले को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का संकल्प लिया है। विकास के मामले में सरकार ने कोई भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब कार्यकर्ताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जुटना होगा और जिले की सभी सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना होगा।

 

राजभर ने पेपर लीक के मुद्दे पर सपा को घेरते हुए कहा कि आज उसके नेता दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक पेपर लीक की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी सरकार के समय की व्यवस्था भी याद करनी चाहिए।

सपा की सरकार में दूसरे राज्यों से भी विद्यार्थी उत्तर प्रदेश आते थे और नकल के सहारे परीक्षा पास करके चले जाते थे। पेपर बिकते थे और विद्यार्थी उन्हें खरीदकर खेतों तक में बैठकर हल करते थे। कई विद्यार्थी कॉपी और पेपर लेकर घर तक चले जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के नेता गांव-गांव घूमकर नौकरियां बेचते थे और आज वही लोग पेपर लीक की बात कर रहे हैं। 

 

राजभर ने कहा कि भर्ती कैसे की जाती है, यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीखना चाहिए। योगी सरकार ने नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी और इसके लिए कहीं एक रुपये की भी रिश्वत नहीं देनी पड़ी।

 

कानून-व्यवस्था पर सपा को घेरा

 

कानून-व्यवस्था को लेकर भी राजभर ने सपा पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार के नौ वर्षों से अधिक के कार्यकाल में प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ, जबकि सपा सरकार के पांच वर्षों में एक हजार दंगे हुए और इनमें 1,200 लोगों की जान गई। राजभर ने कहा कि सपा सरकार के समय अपराधी असलहे लहराते थे और गैंगवार होता था। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि अपराधी या तो “ऊपर चले गए, नीचे चले गए या जेल के अंदर चले गए।” उन्होंने इसे योगी सरकार की मजबूत कानून-व्यवस्था का परिणाम बताया।

 

'सपा परिवारवादी, पिछड़ों का हक छीनने वाली पार्टी'

 

राजभर ने सपा के पीडीए के नारे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस समय उत्तर प्रदेश में पीडीए की खूब चर्चा की जा रही है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने सपा को परिवारवादी पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि उसने पिछड़ों का हक छीनने का काम किया है। यह पार्टी प्रदेश और समाज को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाने का काम करती है।

 

उन्होंने कहा कि सपा की सरकार कई बार बनी, अम्बेडकरनगर की सुध नहीं ली। इसके विपरीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां आकर विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दे रहे हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सीएम योगी ने अम्बेडकरनगर में पुराने इतिहास को बदलकर दिखाया है।

 

जीरो पॉवर्टी में चिह्नित परिवारों को मिलेगा पक्का आवास

 

राजभर ने गरीबों के लिए सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत गांव-गांव सर्वे कराया गया था। इसमें ऐसे गरीब और कमजोर परिवारों की पहचान की गई, जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। सर्वे में 13 लाख से अधिक लोग चिह्नित किए गए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीरो पॉवर्टी अभियान में चिह्नित पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

 

इलाज के लिए तीन दस्तावेज दें, आर्थिक मदद की प्रक्रिया बढ़ेगी आगे 

 

राजभर ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब परिवारों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री की ओर से दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता चाहिए तो उसे केवल जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इनमें अस्पताल से इलाज का एस्टीमेट, तहसील से जारी आय प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की छायाप्रति शामिल है।

उन्होंने कहा कि इलाज पर पांच लाख, छह लाख, आठ लाख या 10 लाख रुपये का खर्च हो, तो पात्र जरूरतमंद के दस्तावेज मिलने के बाद आर्थिक सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। उनका प्रयास रहता है कि दस्तावेज उपलब्ध होने के बाद जल्द से जल्द धनराशि संबंधित अस्पताल तक पहुंचे, जिससे पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके।

सीएम योगी ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, प्रमाण पत्र और सांकेतिक चाबियां सौंपी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अम्बेडकरनगर में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी सौगात दी। इस दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला समूहों से जुड़ी लाभार्थियों को चेक प्रदान किए गए। इसके अलावा स्वरोजगार, स्वास्थ्य, आवास, कृषि और कृषक दुर्घटना कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, प्रमाण पत्र और सांकेतिक चाबियां सौंपी गईं। सीएम के हाथों सौगात पाकर लाभार्थियों के चेहरे खिल गये।

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के तहत आकृति राव और उत्कर्ष तिवारी की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी पर प्रत्येक को 5.75 लाख रुपये के चेक प्रदान किए। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के तहत हृदय रोग से उपचारित अंशी और जूही को चेक प्रदान किया गया।

 

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत प्रमोद कुमार गुप्ता को फ्लोर मिल और आरुषि यादव को ब्यूटी पार्लर के लिए पांच-पांच लाख रुपये का चेक दिया गया। 

 

एक जनपद-एक उत्पाद योजना के तहत रीता देवी को कपड़ा व्यवसाय के लिए 48 लाख रुपये का चेक दिया गया। 

 

कृषि विभाग की ओर से वंदना पटेल को ड्रोन दीदी का प्रमाण पत्र दिया गया गया। 

 

कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत सदस्य कृषक अभिषेक तिवारी को चाबी सौंपी गई।

 

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत रीना सोनी, मीरा देवी और कल्पनाथ को गृह प्रवेश के लिए सांकेतिक चाबी दी गई। 

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत उर्मिला और यमुरता देवी को पांच-पांच लाख रुपये का चेक दिया गया। 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ऊषा मौर्य को 469.50 लाख रुपये का चेक और उमा सिंह को 86.40 लाख रुपये का आरएफ चेक दिया गया। वहीं, मेधावी छात्रों में प्रियांशु चौरसिया के अलावा छात्र ध्रुव प्रताप सिंह की माता रंजना सिंह ने सम्मान ग्रहण किया।

‘अतिथि देवो भव’-कांवड़िया शिविरों में सात्विक व्यंजनों के साथ हाईटेक सेवा का संगम

 

 

 

श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में इस बार सेवा, स्वच्छता और आधुनिक व्यवस्थाओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। कांवड़ मार्ग पर लगे शिविरों में शिवभक्तों के स्वागत के लिए ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जो किसी भव्य विवाह समारोह से कम नहीं हैं। सात्विक परंपरा को कायम रखते हुए श्रद्धालुओं को बिना प्याज-लहसुन के देसी व्यंजनों के साथ पास्ता, पिज्जा, नूडल्स, मोमोज और मंचूरियन जैसे आधुनिक स्वाद भी परोसे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप प्रशासनिक अधिकारी लगातार निजी शिविरों का निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और व्यवस्थाओं की जांच कर रहे हैं।

 

कांवड़ियों के लिए पूरे दिन का भोजन समयानुसार निर्धारित किया गया है। सुबह चाय, बिस्किट, पोहा और जलेबी से दिन की शुरुआत होती है, जबकि नाश्ते में समोसा, कचौड़ी, ब्रेड पकौड़ा, वेज हक्का नूडल्स और हनी चिली पोटैटो परोसे जा रहे हैं। दोपहर में शाही पनीर, कढ़ाई पनीर, पनीर लबाबदार, दाल मखनी, मिक्स वेज, चूरचूर नान, बटर नान, जीरा राइस और ताजा रोटियों के साथ रबड़ी-जलेबी, रसमलाई, रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों की व्यवस्था है।

 

शाम के समय स्प्रिंग रोल, चिली पनीर, मंचूरियन, व्हाइट व रेड सॉस पास्ता, वेज पिज्जा, मोमोज, मैकरोनी, सूप और बर्गर श्रद्धालुओं को परोसे जा रहे हैं। रात में छोले-पूड़ी, मटर पनीर, पुलाव, दाल, ताजी रोटियों के साथ खीर, हलवा, फ्रूट कस्टर्ड और गुलाब जामुन परोसे जा रहे हैं। शिविरों में लस्सी, छाछ, जूस, चाय, कॉफी और शीतल पेयजल की भी निरंतर व्यवस्था है।

 

हाईटेक रसोई ने बढ़ाई सेवा की रफ्तार

 

कंकरखेड़ा व्यापार संघ के शिविर में तकनीक ने सेवा को नई गति दी है। संयोजक नीरज मित्तल और व्यवस्था संचालक राजेश खन्ना के अनुसार 20 किलो आटा एक साथ गूंधने वाली मशीन और ऑटोमैटिक रोटी मशीन लगाई गई है। मशीन एक मिनट में करीब 16 और एक घंटे में लगभग 900 रोटियां तैयार कर रही है। प्रतिदिन छह से सात हजार रोटियां बनाई जा रही हैं। सब्जियां काटने और मसाले तैयार करने के लिए भी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कम समय में हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार हो रहा है।

 

व्रत रखने वालों के लिए अलग फलाहार
 

मोदीपुरम स्थित शिविर संचालक दल के सदस्य सुधीर रस्तोगी ने बताया कि उपवास रखने वाले कांवड़ियों के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था की गई है। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, आलू की सब्जी, मौसमी फल और अन्य व्रताहार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लंबी यात्रा के बाद श्रद्धालुओं को कुल्हड़ में केसर युक्त गर्म दूध भी पिलाया जा रहा है, ताकि उन्हें ऊर्जा मिल सके।

 

ईको-फ्रेंडली भंडारों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

 

इस बार अनेक शिविरों को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाया गया है। भोजन परोसने के लिए प्लास्टिक और थर्माकोल की प्लेटों के स्थान पर स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का उपयोग किया जा रहा है। स्वच्छ सर्विंग स्टेशन, व्यवस्थित भोजन व्यवस्था और साफ-सुथरा वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। इससे कांवड़ यात्रा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रभावी ढंग से दिया जा रहा है।

 

सेवा को मान रहे सबसे बड़ी साधना

 

मां कांवड़ सेवा शिविर संचालक अमित मूर्ति का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि शिवभक्तों की यात्रा को सुरक्षित, सुखद और यादगार बनाना है। शिविर संचालकों ने कहा कि योगी सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा के मानकों का पालन किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें समय-समय पर निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं, जबकि सैकड़ों स्वयंसेवक चौबीसों घंटे सेवा में जुटकर ‘अतिथि देवो भव’ की भावना को साकार कर रहे हैं।

भारत पर 100% टैरिफ की तैयारी? रूस-ईरान से तेल खरीद पर अमेरिका का बड़ा वार, सीनेट में बिल पास

modi trump

रूस-ईरान से तेल खरीद पर भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी सीनेट ने इस संबंध में बिल को मंजूरी दे दी है। अगर कांग्रेस से भी इस बिल को मंजूरी मिल जाती है तो इसे राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद अमेरिका रूस-ईरान से तेल खरीद पर भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ हो जाएगा। ALSO READ: क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों में रोड़ा बन रही हैं शेख हसीना?

 

अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। बिल पास होने के बाद इन देशों का रूस से तेल खरीदना मुश्किल हो जाएगा।

 

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाए गए इस बिल का मकसद रूस और ईरान पर दबाव बढ़ाना है। बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। ALSO READ: वॉशिंगटन के आसमान में बड़ा हादसा टला? ट्रंप के मरीन वन हेलिकॉप्टर के बेहद करीब पहुंचा यात्री विमान, जांच शुरू
 

अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था।

 

रूस से कितना तेल आयात करता है भारत?

गौरतलब है कि भारत यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूस से प्रतिदिन 20 लाख बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का आयात कर रहा है। ईरान युद्ध छिड़ने के बाद भारत रूस से गैस का भी आयात कर रहा है।

क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों में रोड़ा बन रही हैं शेख हसीना?

sheikh hasina and India Bangladesh relations

बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में रहते दो साल हो गए हैं। यही मुद्दा दोनों देशों के आपसी संबंधों की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। शेख हसीना दोनों देशों के लिए बेहद अहम हैं। ALSO READ: पृथ्वी पर ऑक्सीजन की उत्पत्ति की पहेली थोड़ी और सुलझी

 

बांग्लादेश से आकर यहां शरण लेने के ठीक दो साल बाद बुधवार को दिल्ली में फॉरेन कॉरेसपोंडेट्स क्लब के एक कार्यक्रम को वर्चुअल तरीके से संबोधित करने के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद बढ़ गया है। बांग्लादेश ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस कार्यक्रम से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

 

बांग्लादेश की एक अदालत हसीना को दो साल पहले हुए आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा और  हत्या के कथित अपराध में मौत की सजा सुना चुकी है। हसीना पांच अगस्त, 2024 को भारत आ गई थी और उस समय से यहीं रह रही हैं। यहां गोपनीय ठिकाने पर रहते हुए वह कई बार अपने ऑडियो और वीडियो जारी कर चुकी हैं। शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की भी बात कही है। बांग्लादेश में पहले की अंतरिम सरकार और बीती फरवरी में चुनाव जीतकर सत्ता में आने वाली तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की गठबंधन सरकार भारत से लगातार इस पर एतराज जताती रही है।

 

भारत-बांग्लादेश के बीच विवाद

बांग्लादेश औपचारिक और अनौपचारिक तरीके से हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध करता रहा है। केंद्र सरकार ने अब तक इस पर चुप्पी साधे रखी थी। लेकिन इस सप्ताह विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, “हमें प्रत्यर्पण का अनुरोध मिला है। सरकार इससे जुड़े कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार कर रही है।”

 

बांग्लादेश और भारत के बीच वर्ष 2013 में हुए प्रत्यर्पण संधि के एक प्रावधान में कहा गया है कि प्रत्यर्पित किए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप अगर राजनीतिक प्रकृति के हों तो अनुरोध खारिज किया जा सकता है।

 

अब बुधवार को शेख हसीना के भाषण पर भी बांग्लादेश सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। विदेश मंत्रालय की ओर से ढाका में जारी एक बयान में कहा गया है कि सामूहिक हत्या के आरोपी और देश से पलायन करने वाली शेख हसीना को दिल्ली में मीडिया से बात करने की अनुमति दिए जाने पर बांग्लादेश सरकार और आम लोगों में भारी नाराजगी है।

 

सरकार ने कहा कि इस कार्यक्रम से द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने की कोशिशों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका से भारत सरकार को पहले ही अवगत करा दिया गया था। ढाका ने इसके बावजूद इस कार्यक्रम की अनुमति दिए जाने पर निराशा जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे 'बांग्लादेश की संप्रभुता' और 'जुलाई क्रांति के शहीदों' का घोर अपमान बताया है। ALSO READ: गुलामी की जंजीरों से निकला आइसक्रीम को स्वाद देने वाला वनीला

 

शेख हसीना की अहमियत

भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए अलग-अलग वजहों से शेख हसीना की काफी अहमियत है। शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान दोनों देशों के आपसी संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे थे। तीस्ता समेत विभिन्न नदियों के पानी के बंटवारे पर विवाद के बावजूद उनके प्रधानमंत्री रहते राजनयिक संबंध बेहतर बने रहे। उनके कार्यकाल में पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई और आखिरकार बांग्लादेश स्थित उग्रवादी शिविरों का सफाया करने में कामयाबी मिली थी।

 

यही वजह है कि भारत पर शेख हसीना का समर्थन करने के आरोप लगते रहे और हसीना पर भारत का पिछलग्गू होने के। तमाम चुनावों में बांग्लादेश के विपक्षी दलों ने इसे अपना प्रमुख मुद्दा बनाया था।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमाम आलोचनाओं के बावजूद हसीना ने बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता का माहौल बनाया। हालांकि कार्यकाल के आखिरी दौर में उन पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने और अपने विरोधियों के खिलाफ ताकत के इस्तेमाल के आरोप भी लगे। जुलाई, 2024 में इन वजहों से ही छात्रों और युवाओं ने उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक आंदोलन शुरू किया था। शुरुआत में हसीना ने कथित तौर पर बल प्रयोग कर इस दोलन को दबाने की कोशिश की। लेकिन इसका उल्टा असर हुआ। आखिरकार हसीना को वहां से अपनी जान बचा कर भारत में शरण लेनी पड़ी।

 

विश्लेषकों का कहना है कि शेख हसीना और उनके परिवार से भारत का ऐतिहासिक संबंध रहा है। हसीना पहले भी मुसीबत में यहां शरण ले चुकी हैं। ऐसे में दो साल पहले उनका यहां शरण लेना स्वाभाविक ही था। केंद्र में सरकार भले बदल गई हो, नीतियों में खास बदलाव नहीं आया है। ALSO READ: दक्षिण कोरिया में गर्मी ने तोड़ा 100 साल का रिकॉर्ड

 

भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि

करीब चार दशक से भारत-बांग्लादेश संबंधों को करीब से देखने वाली विश्लेषक शिखा मुखर्जी डीडब्ल्यू से कहती हैं, “बांग्लादेश के बार-बार एतराज के बावजूद सरकार ने हसीना के भाषणों या बयानों पर कोई रोक नहीं लगाई है। वो लगातार इससे पल्ला झाड़ रहा है।”

 

उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि जरूर है। लेकिन भारत सरकार इस मामले में 'धीरे चलो' की नीति अपना रही है। हसीना के प्रति अपने नरम रवैए के कारण सरकार उनको बांग्लादेश में अनिश्चित भविष्य की ओर धकेलने का फैसला कभी नहीं करेगी।

 

कोलकाता के रबींद्र भारती विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर विश्वनाथ चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहते हैं, “भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनके सहारे भारत हसीना के प्रत्यर्पण से इंकार कर सकता है या फिर इसे लंबे समय तक लंबित रख सकता है।”

 

उनका कहना था कि अब जब बांग्लादेश की एक अदालत ने हसीना को मौत की सजा सुना दी है, भारत की ओर से प्रत्यर्पण के अनुरोध पर शीघ्र किसी फैसले के आसार नहीं हैं।

 

विश्लेषकों का कहना है कि हसीना भारत के साथ ही बांग्लादेश में सत्ता संभालने वाली तारिक रहमान सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। बीएनपी ने बांग्लादेश में चुनाव के दौरान दो साल पहले हुई हिंसा के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का वादा किया था। अब सरकार के सामने अपने इस वादे को पूरा करने की चुनौती है। ALSO READ: क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

 

बांग्लादेश की सरकार पर दबाव

राजधानी ढाका में एक वरिष्ठ पत्रकार रियाज अहमद डीडब्ल्यू से कहते हैं, “अवामी लीग पर पाबंदी तो अंतरिम सरकार ने ही लगा दी थी। अब रहमान सरकार ने हसीना समेत कई दोषियों को अदालत से मौत की सजा दिला दी है। ऐसे में उनको बांग्लादेश लाकर सजा दिलाना सरकार के लिए साख का सवाल है।”

 

ढाका में एक सरकारी कालेज में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ ने नाम जाहिर नहीं करने का अनुरोध करते हुए कहा डा। जहीर शेख (बदला हुआ नाम) डीडब्ल्यू से कहते हैं, “बांग्लादेश सरकार अपनी ओर से कोशिश करती जरूर नजर आ रही है। लेकिन वह हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत पर दबाव डालने की स्थिति में नहीं है।”

 

रियाज और जहीर का कहना था कि बांग्लादेश भले चीन के करीब जा रहा है, वह भारत को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकता। सरकार की साख बचाने के लिए ही बार-बार प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया जा रहा है और हसीना की प्रेस कांफ्रेंस पर आपत्ति जताई जा रही है।

 

विश्लेषकों को उम्मीद है कि शायद अगले महीने दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे में आपसी संबंधों पर जमी बर्फ पिघल सकती है। हालांकि विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि हसीना का मुद्दा ही इसमें सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो सकता है।