भारत में बढ़ रहा EV का क्रेज, खरीदने से पहले जानें इलेक्ट्रिक वाहनों के 4 प्रकार और इनके फायदे

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बनती जा रही है। 2016 के बाद से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में करीब 46 गुना बढ़ोतरी हुई है। वहीं, EV से जुड़े निर्यात का मूल्य 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया।

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सरकार की कई योजनाओं और नीतियों से देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को बढ़ावा मिल रहा है। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए PLI Scheme, PM E-DRIVE Scheme और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली पहलें भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर रही हैं।

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2030 तक नई गाड़ियों में 30% EV का लक्ष्य

 

भारत ने 2030 तक नई वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए India Electric Mobility Index जारी किया है। इसके साथ Electric Vehicles in India: $200 Billion Opportunity रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का EV सेक्टर आने वाले वर्षों में करीब 200 अरब डॉलर का आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। इससे सिर्फ वाहन निर्माण ही नहीं, बल्कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग स्टेशन, ऑटो कंपोनेंट, सर्विस और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

 

शहरों से छोटे कस्बों तक बदल रही मोबिलिटी

 

बड़े शहरों में रोजाना आने-जाने और छोटे शहरों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सरकार की जलवायु रणनीति और टिकाऊ परिवहन के लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है।

 

EV को बढ़ावा देने से पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से पेट्रोल-डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम है।

 

इलेक्ट्रिक वाहन क्या होता है?

 

इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV वह वाहन है, जो मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है और बैटरी में स्टोर बिजली का इस्तेमाल करता है। बैटरी को बाहरी पावर सोर्स यानी चार्जिंग स्टेशन या अन्य चार्जिंग सिस्टम से रिचार्ज किया जा सकता है।

 

कितने तरह के होते हैं इलेक्ट्रिक वाहन?

 

1. Battery Electric Vehicle (BEV)

ये वाहन पूरी तरह बिजली से चलते हैं। इनमें इंटरनल कंबशन इंजन नहीं होता और इन्हें बाहरी चार्जिंग सिस्टम से चार्ज किया जाता है।

 

2. Hybrid Electric Vehicle (HEV)

हाइब्रिड वाहन में पेट्रोल/डीजल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर भी होती है। दोनों प्रणालियां वाहन को चलाने में मदद करती हैं।

 

3. Plug-in Hybrid Electric Vehicle (PHEV)

PHEV में भी इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों होते हैं, लेकिन इसकी बैटरी को बाहरी पावर सोर्स से चार्ज किया जा सकता है। इससे वाहन कुछ दूरी तक सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड पर चल सकता है।

 

4. Fuel Cell Electric Vehicle (FCEV)

इन वाहनों में केमिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदला जाता है और इसी बिजली से इलेक्ट्रिक मोटर चलती है।

 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है EV?

 

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारत के लिए सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर का बदलाव नहीं है। इसका असर ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग, आयात बिल, प्रदूषण और नई तकनीक जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। बैटरी निर्माण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ भारत में EV का पूरा इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है।

 

कुल मिलाकर, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री और सरकारी नीतियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश की मोबिलिटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 2030 का 30 फीसदी EV लक्ष्य और 200 अरब डॉलर के संभावित आर्थिक अवसर को देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ऑटो सेक्टर के साथ-साथ रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी बड़ा क्षेत्र बन सकती है।

हथकरघा को नई पहचान दिला रही योगी सरकार, बुनकरों का बढ़ा उत्साह

UP Handloom Weavers: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के बुनकरों और लाभार्थियों को सम्मानित किया। शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में मुख्यमंत्री ने विभिन्न श्रेणियों में चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कार और चेक प्रदान किए। कार्यक्रम में सम्मान पाने वाले बुनकरों ने इसे अपने लिए गौरव का क्षण बताते हुए योगी सरकार के प्रति आभार जताया।

योजनाओं व प्रोत्साहन से बढ़ा बुनकरों का भरोसा

बनारसी साड़ियों का काम करने वाले वाराणसी के जमालुद्दीन ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का कार्यक्रम उनके लिए गौरवान्वित करने वाला है हथकरघा क्षेत्र को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए योगी सरकार प्रयासरत है। जमालुद्दीन ने बताया कि 2017 के बाद इस क्षेत्र में कई बेहतर कार्य हुए हैं और पहली बार उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया।

बुनकर बेहतर तरीके से अपना काम आगे बढ़ा पा रहे 

सीतापुर के बुनकर अकील अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने से उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई है। योगी सरकार आने के बाद प्रदेश में अनेक बदलाव हुए हैं और इन्हीं बदलावों का परिणाम है कि बुनकर बेहतर तरीके से अपना काम आगे बढ़ा पा रहे हैं। वाराणसी के साड़ी बुनकर प्यारेलाल ने कहा कि सीएम योगी बुनकर समाज के लिए लगातार काम कर रहे हैं। रोजगार और कारोबार को आगे बढ़ाने के प्रयासों से उन्हें लाभ मिल रहा है। समय पर आर्थिक सहायता मिलने से काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है और सम्मान मिलने से उनका मनोबल भी बढ़ा है।

महिलाओं व हस्तशिल्पकारों ने सरकार के प्रयासों को सराहा

ललितपुर की मीराबाई ने कार्यक्रम में बुलाकर सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। इटावा की बिनाई कारीगर सोनी ने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, जिसका सकारात्मक असर उनके काम और तरक्की पर दिखाई दे रहा है।

बुनकरों को आगे बढ़ने का मिल रहा भरोसा

हाथरस के रूप किशोर ने कहा कि सीएम योगी का विजन बुनकरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है। 2017 के बाद हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र की उन्नति के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। टांडा के शाहनवाज अहमद ने बताया कि वे गमछा, साड़ी और दुपट्टा बनाने का काम करते हैं।

हस्तशिल्पकारों के लिए किए जा रहे प्रयासों से काम को मजबूती मिल रही है। वहीं सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बुनकरों को आगे बढ़ने का भरोसा और मजबूती मिल रही है।

सिर्फ कीमत नहीं, कार खरीदते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

car buying tips

नई कार खरीदना एक बड़ा फैसला होता है। पहले जहां ज़्यादातर लोग बजट और कार की कीमत को ही सबसे अहम मानते थे, वहीं आज खरीदार कई दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देते हैं।
 

कार की शुरुआती कीमत निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होती है, लेकिन लंबे समय तक संतोषजनक ओनरशिप के लिए सिर्फ उसी के आधार पर फैसला लेना पर्याप्त नहीं है। सही कार वही होती है जो आपकी जरूरतों, बजट और भविष्य की अपेक्षाओं के अनुरूप हो। आइए जानते हैं कि कार खरीदते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

 

अपनी जरूरतों को समझें

कार खरीदने से पहले यह तय करना जरूरी है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए होगा। खुद से कुछ सवाल पूछें:

  • क्या कार का उपयोग रोज़ शहर में होगा?
  • क्या अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है?
  • परिवार के कितने सदस्य नियमित रूप से साथ सफर करते हैं?
  • ज्यादा बूट स्पेस की जरूरत है?
  • माइलेज ज्यादा महत्वपूर्ण है या पावर?

इन सवालों के जवाब सही कार चुनने में मदद करते हैं।

 

सिर्फ फीचर्स नहीं, उनकी उपयोगिता भी देखें

आज लगभग हर कार में कई आधुनिक फीचर्स मिलते हैं।

 

लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि कौन-से फीचर्स आपकी रोज़मर्रा की ड्राइविंग में वास्तव में काम आएंगे। उदाहरण के लिए, पार्किंग कैमरा, वायरलेस स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल या क्रूज़ कंट्रोल जैसी सुविधाएँ कई लोगों के लिए उपयोगी हो सकती हैं, जबकि कुछ फीचर्स का इस्तेमाल बहुत कम होता है।

 

इसलिए फीचर्स की संख्या से ज्यादा उनकी उपयोगिता पर ध्यान दें।

 

सुरक्षा को प्राथमिकता दें

आज सुरक्षा कार खरीदने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन चुकी है।

 

कार चुनते समय इन बातों पर ध्यान दें:

● एयरबैग्स की संख्या

● Electronic Stability Control (ESC)

● ISOFIX चाइल्ड सीट एंकरेज

● रिवर्स पार्किंग कैमरा या सेंसर

● उपलब्ध सेफ्टी रेटिंग

बेहतर सुरक्षा फीचर्स न केवल ड्राइवर बल्कि पूरे परिवार के लिए अधिक भरोसेमंद सफर सुनिश्चित करते हैं।

 

ओनरशिप खर्च को समझें

कार की कीमत के अलावा कई ऐसे खर्च होते हैं जो पूरे ओनरशिप अनुभव को प्रभावित करते हैं।

 

इनमें शामिल हैं:

  • ईंधन का खर्च
  • इंश्योरेंस
  • नियमित सर्विस
  • टायर और अन्य पार्ट्स का रखरखाव
  • वारंटी के बाद होने वाले संभावित रिपेयर

 

इन खर्चों का पहले से अनुमान लगाने से भविष्य में बजट पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।

 

सर्विस नेटवर्क भी महत्वपूर्ण है

अच्छी आफ्टर-सेल्स सर्विस किसी भी कार के ओनरशिप अनुभव को बेहतर बनाती है।

 

कार खरीदने से पहले यह देखना उपयोगी होता है कि:

  • आपके शहर में अधिकृत सर्विस सेंटर उपलब्ध हैं या नहीं?
  • स्पेयर पार्ट्स आसानी से मिल जाते हैं या नहीं?
  • वारंटी और रोडसाइड असिस्टेंस जैसी सुविधाएँ क्या हैं?

बेहतर सर्विस सपोर्ट लंबे समय में सुविधा और भरोसा दोनों बढ़ाता है।

 

अलग-अलग वेरिएंट की तुलना करें

अक्सर एक ही कार कई वेरिएंट्स में उपलब्ध होती है।

 

हर वेरिएंट में मिलने वाले फीचर्स, सुरक्षा उपकरण और कीमत अलग हो सकती हैं। इसलिए बिना तुलना किए केवल सबसे सस्ता या सबसे महंगा वेरिएंट चुनने के बजाय यह देखना बेहतर होता है कि कौन-सा विकल्प आपकी जरूरतों के हिसाब से सबसे उपयुक्त है।

 

सही जानकारी से बेहतर फैसला

आज कार खरीदने से पहले जानकारी जुटाना पहले की तुलना में कहीं आसान हो गया है।

 

ACKO Drive जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर खरीदार अलग-अलग कारों की तुलना कर सकते हैं, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन समझ सकते हैं, कीमत देख सकते हैं और विभिन्न वेरिएंट्स की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे सही विकल्प चुनना अधिक आसान और सुविधाजनक हो जाता है।

 

निष्कर्ष

नई कार खरीदते समय केवल उसकी कीमत देखना पर्याप्त नहीं है।

 

सुरक्षा, फीचर्स, ओनरशिप खर्च, सर्विस नेटवर्क, ईंधन दक्षता और अपनी रोज़मर्रा की जरूरतों जैसे कई पहलुओं पर विचार करने से बेहतर फैसला लिया जा सकता है।

 

जब खरीदारी पूरी जानकारी और सही तुलना के आधार पर की जाती है, तो कार सिर्फ एक अच्छी खरीद नहीं बनती, बल्कि लंबे समय तक संतोषजनक ओनरशिप अनुभव भी प्रदान करती है।

रांची में छात्र आंदोलन के दौरान नेहा बोरा पर फेंकी गई स्याही, बोलीं- आंसू गैस और पेलेट से नहीं डरे, इससे भी नहीं डरेंगे

ranchi student protest : ink thrown on neha bora

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा पर रांची में विधानसभा मार्च के दौरान स्याही फेंकी गई। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को हम पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया; जब हम तब नहीं डरे, तो यह मामूली स्याही हमारा क्या बिगाड़ लेगी? ALSO READ: झारखंड छात्र आंदोलन पर सियासी बवाल, कंगना रनौत से लेकर संजय सेठ तक भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी से पूछा सवाल

 

नेहा बोरा पर किसी अज्ञात ने स्याही फेंक दी। इससे वहां हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। इस दौरान वहां जय श्री राम के नारे भी लगाए गए। हालांकि पुलिस ने कानून व्यवस्था को संभालते हुए कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया।

 

नेहा ने किस पर लगाया आरोप?

उन्होंने कहा कि जो भाजपा और आरएसएस के गुंडे खुद को छात्रों के साथ खड़ा होने का दावा करते हैं, वही आज छात्रों के जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर विधानसभा मार्च के दौरान मुझ पर स्याही फेंक रहे हैं। क्या उन्हें लगता है कि स्याही फेंककर वे पूरे देश के छात्रों और युवाओं के गुस्से को दबा देंगे? हम उन्हें खुली चुनौती देते हैं कि अगर उभरता हुआ यह छात्र आंदोलन आपकी नफरत की राजनीति की नींव नहीं हिला पाया, तो यह छात्र राजनीति के लिए शर्म की बात होगी। जिन लोगों का छात्रों के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है और जो अपने राजनीतिक हितों के लिए छात्रों को ढाल बना रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए।

रांची स्टूडेंट प्रोटेस्ट का किया समर्थन

दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली नेहा बोरा धरना स्थल पहुंचीं और आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं व मांगों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। ALSO READ: 20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

 

कौन हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की एक शोधार्थी (PhD scholar) हैं। वे इस समय सोशल मीडिया पर लगाकार चर्चाओं में हैं। नेहा को अक्सर शिक्षा के निजीकरण, मॉब लिंचिंग, बिलकिस बानो के न्याय और गाजा में नागरिकों की स्थिति जैसे मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखते देखा गया है। ALSO READ: Who is Neha Bora : कौन हैं नेहा बोरा? CJP प्रोटेस्ट के बाद क्यों हैं चर्चा में, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो

 

जानकारी के मुताबिक उत्तरप्रदेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी नेहा ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिलीगुड़ी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन किया और फिर अंबेडकर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा JNU से जारी रखी। नेहा जेएनयू में छात्र राजनीति से जुड़ीं और बाद में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

 

Tata Sierra और Tata Sierra EV में क्या अंतर है?

car

Tata Sierra और Tata Sierra EV एक जैसी डिज़ाइन लैंग्वेज और प्रीमियम फीचर्स साझा करती हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग-अलग खरीदारों की जरूरतों को पूरा करना है। एक ओर Sierra पारंपरिक पेट्रोल और डीज़ल पावरट्रेन के साथ आती है, वहीं Sierra EV आधुनिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई तकनीकों पर आधारित है।

 

अगर आप इन दोनों में से किसी एक को चुनने की सोच रहे हैं, तो इनके प्रमुख अंतर को समझना उपयोगी होगा।

डिज़ाइन में समानता, पहचान में अंतर

पहली नज़र में दोनों SUV काफी हद तक एक जैसी दिखाई देती हैं।
 

दोनों में Light Saber LED लाइटिंग, फ्लश डोर हैंडल्स, Panoramax पैनोरमिक सनरूफ, Horizon View Triple Screen इंफोटेनमेंट लेआउट और दमदार SUV स्टाइलिंग देखने को मिलती हैं।

 

हालांकि Tata Sierra EV में EV-विशिष्ट फ्रंट डिज़ाइन, अलग एक्सटीरियर डिटेलिंग और चार्जिंग पोर्ट जैसी विशेषताएँ इसे पारंपरिक Sierra से अलग पहचान देती हैं।

केबिन और फीचर्स

दोनों SUV का केबिन आधुनिक और प्रीमियम अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है।
 

दोनों में मिलते हैं:

  • Horizon View Triple Screen इंफोटेनमेंट
  • Panoramax सनरूफ
  • JBL Black 12-स्पीकर ऑडियो सिस्टम
  • Wireless Android Auto और Apple CarPlay
  • Boss Mode
  • पावर्ड ड्राइवर सीट
  • ड्यूल ज़ोन ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल

Sierra EV में इसके अलावा AirConsole गेमिंग, EV-केंद्रित डिस्प्ले, फ्रंक (Front Trunk) और चार्जिंग से जुड़े विशेष फीचर्स भी दिए गए हैं।

सबसे बड़ा अंतर : पावरट्रेन

दोनों SUV के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके पावरट्रेन का है।
 

Tata Sierra में 1.5-लीटर Revotron पेट्रोल, 1.5-लीटर Hyperion TGDi पेट्रोल और 1.5-लीटर Kryojet डीज़ल इंजन विकल्प उपलब्ध हैं। अलग-अलग वेरिएंट्स में मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन भी मिलते हैं।

 

वहीं Tata Sierra EV पूरी तरह इलेक्ट्रिक है। इसमें 63 kWh और 75 kWh बैटरी पैक विकल्प, Acti.ev+ आर्किटेक्चर और QWD ड्यूल मोटर सेटअप (चयनित वेरिएंट में) दिया गया है। यह अधिकतम 504 Nm टॉर्क भी प्रदान करती है।

ड्राइविंग अनुभव

Tata Sierra पारंपरिक इंजन विकल्पों के साथ परिचित और बहुमुखी ड्राइविंग अनुभव प्रदान करती है।

दूसरी ओर Sierra EV में Boost Mode, मल्टी-लेवल रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, 6 Terrain Modes (चयनित वेरिएंट), Off-road Assist और तुरंत मिलने वाला इलेक्ट्रिक टॉर्क इसे अलग बनाते हैं।

तकनीक और कनेक्टिविटी

दोनों SUV आधुनिक तकनीक से लैस हैं।

Sierra में iRA Connected Car Suite, Mappls नेविगेशन, Me Space और Relax Mode जैसे फीचर्स मिलते हैं।
 

वहीं Sierra EV में EV Route Planner, iRA.ev Connected Suite, Vehicle-to-Load (V2L), Vehicle-to-Vehicle (V2V), Digi Access, OTA अपडेट्स और DrivePay जैसी EV-केंद्रित सुविधाएँ भी शामिल हैं।

सुरक्षा

सुरक्षा के मामले में दोनों SUV मजबूत पैकेज पेश करती हैं।
 

दोनों में मिलते हैं:

  • 6 एयरबैग्स
  • Electronic Stability Program (ESP)
  • 360° Surround View Camera
  • L2+ ADAS
  • Blind Spot मॉनिटरिंग
  • Hill Descent Control

Sierra EV के उच्च वेरिएंट्स में 540° Surround View, Auto Park Assist, Summon Mode और Reverse Assist जैसी अतिरिक्त तकनीकें भी उपलब्ध हैं।

आपके लिए कौन-सी सही है?

अगर आप पेट्रोल या डीज़ल इंजन, पारंपरिक ड्राइविंग अनुभव और विभिन्न इंजन विकल्प चाहते हैं, तो Tata Sierra बेहतर विकल्प हो सकती है।
 

अगर आप इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, लंबी ड्राइविंग रेंज, उन्नत कनेक्टेड फीचर्स और EV-विशिष्ट तकनीकों का लाभ लेना चाहते हैं, तो Tata Sierra EV अधिक उपयुक्त साबित हो सकती है।

खरीदने से पहले तुलना करें

दोनों मॉडलों के फीचर्स, वेरिएंट्स और स्पेसिफिकेशन की तुलना करने से सही निर्णय लेना आसान हो जाता है।
ACKO Drive जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर खरीदार Tata Sierra और Tata Sierra EV की तुलना कर सकते हैं, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन समझ सकते हैं, कीमत देख सकते हैं और अपनी जरूरतों के अनुसार सही SUV चुन सकते हैं।

निष्कर्ष

Tata Sierra और Tata Sierra EV डिज़ाइन, केबिन और कई प्रीमियम फीचर्स के मामले में एक जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन दोनों का ओनरशिप अनुभव अलग है।

जहाँ Sierra पारंपरिक इंजन विकल्पों के साथ बहुमुखी SUV का अनुभव देती है, वहीं Sierra EV आधुनिक इलेक्ट्रिक तकनीक, लंबी रेंज और भविष्य की मोबिलिटी को सामने रखती है। सही विकल्प वही होगा जो आपकी ड्राइविंग जरूरतों, बजट और भविष्य की प्राथमिकताओं के सबसे बेहतर अनुकूल हो।

Tata Sierra और Tata Sierra EV में क्या अंतर है?

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Tata Sierra और Tata Sierra EV एक जैसी डिज़ाइन लैंग्वेज और प्रीमियम फीचर्स साझा करती हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग-अलग खरीदारों की जरूरतों को पूरा करना है। एक ओर Sierra पारंपरिक पेट्रोल और डीज़ल पावरट्रेन के साथ आती है, वहीं Sierra EV आधुनिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई तकनीकों पर आधारित है।

 

अगर आप इन दोनों में से किसी एक को चुनने की सोच रहे हैं, तो इनके प्रमुख अंतर को समझना उपयोगी होगा।

डिज़ाइन में समानता, पहचान में अंतर

पहली नज़र में दोनों SUV काफी हद तक एक जैसी दिखाई देती हैं।
 

दोनों में Light Saber LED लाइटिंग, फ्लश डोर हैंडल्स, Panoramax पैनोरमिक सनरूफ, Horizon View Triple Screen इंफोटेनमेंट लेआउट और दमदार SUV स्टाइलिंग देखने को मिलती हैं।

 

हालांकि Tata Sierra EV में EV-विशिष्ट फ्रंट डिज़ाइन, अलग एक्सटीरियर डिटेलिंग और चार्जिंग पोर्ट जैसी विशेषताएँ इसे पारंपरिक Sierra से अलग पहचान देती हैं।

केबिन और फीचर्स

दोनों SUV का केबिन आधुनिक और प्रीमियम अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है।
 

दोनों में मिलते हैं:

  • Horizon View Triple Screen इंफोटेनमेंट
  • Panoramax सनरूफ
  • JBL Black 12-स्पीकर ऑडियो सिस्टम
  • Wireless Android Auto और Apple CarPlay
  • Boss Mode
  • पावर्ड ड्राइवर सीट
  • ड्यूल ज़ोन ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल

Sierra EV में इसके अलावा AirConsole गेमिंग, EV-केंद्रित डिस्प्ले, फ्रंक (Front Trunk) और चार्जिंग से जुड़े विशेष फीचर्स भी दिए गए हैं।

सबसे बड़ा अंतर : पावरट्रेन

दोनों SUV के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके पावरट्रेन का है।
 

Tata Sierra में 1.5-लीटर Revotron पेट्रोल, 1.5-लीटर Hyperion TGDi पेट्रोल और 1.5-लीटर Kryojet डीज़ल इंजन विकल्प उपलब्ध हैं। अलग-अलग वेरिएंट्स में मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन भी मिलते हैं।

 

वहीं Tata Sierra EV पूरी तरह इलेक्ट्रिक है। इसमें 63 kWh और 75 kWh बैटरी पैक विकल्प, Acti.ev+ आर्किटेक्चर और QWD ड्यूल मोटर सेटअप (चयनित वेरिएंट में) दिया गया है। यह अधिकतम 504 Nm टॉर्क भी प्रदान करती है।

ड्राइविंग अनुभव

Tata Sierra पारंपरिक इंजन विकल्पों के साथ परिचित और बहुमुखी ड्राइविंग अनुभव प्रदान करती है।

दूसरी ओर Sierra EV में Boost Mode, मल्टी-लेवल रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, 6 Terrain Modes (चयनित वेरिएंट), Off-road Assist और तुरंत मिलने वाला इलेक्ट्रिक टॉर्क इसे अलग बनाते हैं।

तकनीक और कनेक्टिविटी

दोनों SUV आधुनिक तकनीक से लैस हैं।

Sierra में iRA Connected Car Suite, Mappls नेविगेशन, Me Space और Relax Mode जैसे फीचर्स मिलते हैं।
 

वहीं Sierra EV में EV Route Planner, iRA.ev Connected Suite, Vehicle-to-Load (V2L), Vehicle-to-Vehicle (V2V), Digi Access, OTA अपडेट्स और DrivePay जैसी EV-केंद्रित सुविधाएँ भी शामिल हैं।

सुरक्षा

सुरक्षा के मामले में दोनों SUV मजबूत पैकेज पेश करती हैं।
 

दोनों में मिलते हैं:

  • 6 एयरबैग्स
  • Electronic Stability Program (ESP)
  • 360° Surround View Camera
  • L2+ ADAS
  • Blind Spot मॉनिटरिंग
  • Hill Descent Control

Sierra EV के उच्च वेरिएंट्स में 540° Surround View, Auto Park Assist, Summon Mode और Reverse Assist जैसी अतिरिक्त तकनीकें भी उपलब्ध हैं।

आपके लिए कौन-सी सही है?

अगर आप पेट्रोल या डीज़ल इंजन, पारंपरिक ड्राइविंग अनुभव और विभिन्न इंजन विकल्प चाहते हैं, तो Tata Sierra बेहतर विकल्प हो सकती है।
 

अगर आप इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, लंबी ड्राइविंग रेंज, उन्नत कनेक्टेड फीचर्स और EV-विशिष्ट तकनीकों का लाभ लेना चाहते हैं, तो Tata Sierra EV अधिक उपयुक्त साबित हो सकती है।

खरीदने से पहले तुलना करें

दोनों मॉडलों के फीचर्स, वेरिएंट्स और स्पेसिफिकेशन की तुलना करने से सही निर्णय लेना आसान हो जाता है।
ACKO Drive जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर खरीदार Tata Sierra और Tata Sierra EV की तुलना कर सकते हैं, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन समझ सकते हैं, कीमत देख सकते हैं और अपनी जरूरतों के अनुसार सही SUV चुन सकते हैं।

निष्कर्ष

Tata Sierra और Tata Sierra EV डिज़ाइन, केबिन और कई प्रीमियम फीचर्स के मामले में एक जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन दोनों का ओनरशिप अनुभव अलग है।

जहाँ Sierra पारंपरिक इंजन विकल्पों के साथ बहुमुखी SUV का अनुभव देती है, वहीं Sierra EV आधुनिक इलेक्ट्रिक तकनीक, लंबी रेंज और भविष्य की मोबिलिटी को सामने रखती है। सही विकल्प वही होगा जो आपकी ड्राइविंग जरूरतों, बजट और भविष्य की प्राथमिकताओं के सबसे बेहतर अनुकूल हो।

NEET पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा! ऐसे चुराए गए थे सवाल, हैरान करने वाला तरीका आया सामने

NEET paper leak CBI investigation

NEET paper leak CBI investigation: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं। अदालत में दाखिल की गई सीबीआई की चार्जशीट और स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, पेपर चोरी करने के लिए किसी डिजिटल हैकिंग या पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल नहीं हुआ था, बल्कि बेहद सुनियोजित और लीक से हटकर अपनाए गए पैंतरों से प्रश्नपत्र के कंटेंट को बाहर भेजा गया था।

 

आइए जानते हैं कि सीबीआई की जांच में अब तक क्या-क्या बड़े खुलासे हुए हैं और इस पूरे रैकेट को कैसे अंजाम दिया गया। अब तक क्या-क्या पता चला है? ALSO READ: NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा! CBI का दावा- NTA के अधिकारियों ने ही लीक किए थे प्रश्नपत्र

1. विषय विशेषज्ञों का इस्तेमाल और NTA दफ्तर से डेटा की चोरी

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, इस साजिश में कुछ विषय विशेषज्ञों और सॉल्वर गिरोह का सीधा हाथ था।

  • पर्चियों और याददाश्त का खेल : प्रश्नपत्र तैयार करने या उनकी समीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संदिग्धों ने मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बजाय छोटे कागज के टुकड़ों (पर्चियों) का इस्तेमाल किया।
  • प्रश्नों के मुख्य कीवर्ड्स और विकल्पों को कोड वर्ड में लिखकर या याद रखकर बाहर पहुंचाया गया, ताकि सुरक्षा जांच और सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचा जा सके। ALSO READ: NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

2. ट्रंक और ट्रंक बॉक्स की डिजिटल लॉकिंग से छेड़छाड़

  • हजारीबाग (झारखंड) और पटना के केंद्रों से जुड़े तार खंगालने पर सीबीआई ने पाया कि परीक्षा से कुछ घंटे पहले प्रश्नपत्रों के बक्सों (Trunk Boxes) के साथ सुनियोजित ढंग से छेड़छाड़ की गई थी।
  • बक्सों की सील को इस तरह से निकाला गया कि बाहर से देखने पर डिब्बा पूरी तरह सुरक्षित लगे।
  • प्रश्नपत्रों की तस्वीरें निकालकर उन्हें तुरंत सॉल्वर गैंग के पास 'सेफ हाउस' भेजा गया।

3. 'सेफ हाउस' में सॉल्वर गैंग की तैनाती

  • पटना और आसपास के इलाकों में किराए पर लिए गए हॉस्टल/रिजॉर्ट्स में एमबीबीएस छात्रों और विषय विशेषज्ञों की टीम (सॉल्वर गैंग) को बैठाया गया था।
  • जैसे ही लीक हुए सवालों के इनपुट पहुंचे, महज 2 से 3 घंटे के भीतर पूरे पेपर को हल कर लिया गया।
  • जिन छात्रों ने पैसे दिए थे, उन्हें रातभर उत्तर रटाए गए और सुबह सीधे परीक्षा केंद्रों पर भेजा गया।

4. वित्तीय लेनदेन और शेल खातों का जाल

  • सीबीआई ने जांच में पाया कि प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹30 लाख से ₹50 लाख तक की रकम तय की गई थी।
  • रकम का बड़ा हिस्सा नकद और हवाला नेटवर्क के माध्यम से ट्रांसफर किया गया।
  • सीबीआई ने इस मामले में मास्टरमाइंड्स, ट्रंक से छेड़छाड़ करने वाले बिचौलियों और सॉल्वरों समेत कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

क्या कहा शीर्ष अदालत ने?

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ढांचे और परीक्षा संचालन प्रक्रिया में सुधार के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को सख्ती से लागू किया जाए।

अवंतिका गैस लीकेज में झुलसी जिनी झाला को इलाज का 14 लाख का बिल नहीं दिया, SDM ने हाईकोर्ट में मांगी माफी

avantika gas leak

इंदौर के विजय नगर स्थित अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे में झुलसे लोगों के इलाज और मुआवजे को लेकर शुक्रवार को हुई सुनवाई में SDM ने हाईकोर्ट में माफी मांगी की है। एसडीएम घनश्‍याम धनगर कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान उपस्‍थित हुए थे।

बता दें कि पिछली सुनवाई में शपथ पत्र में इलाज का पूरा खर्च चुकाए जाने की जानकारी गलत पाए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। शुक्रवार को इस मामले में जूनी इंदौर के एसडीएम घनश्याम धनगर कोर्ट में पेश हुए और शपथ पत्र में गलत जानकारी दिए जाने पर कोर्ट से माफी मांगी।

जानकारी समझाने में हुई गलती : शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शपथ पत्र में मुआवजे और इलाज के खर्च से संबंधित जानकारी समझाने में गलती हो गई थी। शासन ने आश्वस्त किया कि हादसे में झुलसे सभी लोगों के इलाज का खर्च सरकार द्वारा अदा किया जाएगा। कोर्ट ने शासन और नगर निगम को यह सुनिश्चित करने को कहा कि पीड़ितों को इलाज के साथ उचित मुआवजा भी मिले।

14 लाख का बिल नहीं चुकाया: गुरुवार को सुनवाई में शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि हादसे में झुलसे सभी लोगों के इलाज का खर्च सरकार चुका चुकी है। हालांकि, पीड़ितों की ओर से इस दावे को गलत बताया गया था। खासकर इन्फ्लुएंसर जिनी उर्फ राजकुमारी झाला की ओर से बताया गया था कि अहमदाबाद में उनका इलाज जारी है और करीब 14 लाख रुपए का अस्पताल बिल अब तक शासन ने नहीं चुकाया है।

अगली सुनवाई 27 अगस्त को : आज सुनवाई के दौरान शासन ने स्पष्ट किया कि हादसे में झुलसे किसी भी व्यक्ति को इलाज के खर्च को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा। सभी पीड़ितों के उपचार का खर्च शासन द्वारा वहन किया जाएगा। कोर्ट ने भी शासन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि पीड़ितों को उनके इलाज और मुआवजे का लाभ मिले। हादसे में झुलसे लोगों को कितनी राशि मुआवजे के रूप में दी जाएगी, यह अगली सुनवाई 27 अगस्त को तय होगा।

20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!

RSS chief Mohan Bhagwat Gen-Z card

RSS chief Mohan Bhagwat Gen-Z card: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा जनरेशन जेड (Gen-Z) के युवाओं के साथ संवाद की पहल पर सेंटर फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने भागवत के इस कदम को महज एक 'देर से उठाया गया राजनीतिक कदम' करार देते हुए तंज कसा कि संघ को युवाओं की याद तब आई जब जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया।

20 जुलाई को कहां थे मोहन भागवत?

अभिजीत दीपके ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीधे संघ प्रमुख की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरएसएस का जनरेशन जेड से बात करना बहुत देर से उठाया गया कदम है। भागवत भाजपा के गॉडफादर हैं। अगर उन्हें युवाओं की इतनी ही चिंता थी, तो उन्हें 20 जुलाई को जनरेशन जेड के उन बच्चों से बात करनी चाहिए थी, जब सड़कों पर उन पर लाठियां बरसाई जा रही थीं। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर प्रताड़ित किए गए युवाओं के पास जाना चाहिए था और प्रधानमंत्री से उनसे माफी मंगवानी चाहिए थी। ALSO READ: Mohan Bhagwat : Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा, छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी न बताएं, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, चीन और पाकिस्तान को लेकर क्या कहा

CJP का रोडमैप : संस्थागत जवाबदेही और सुधारों पर जोर

अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन युवाओं की आवाज बनकर बुनियादी और संस्थागत सुधारों के लिए संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों को उठाया:

  • शिक्षा प्रणाली : उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है। संगठन देश में व्यापक शैक्षणिक सुधारों के लिए दबाव बनाएगा। ALSO READ: हम कॉकरोच हैं, आसानी से नहीं निकलेंगे! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP चीफ दीपके का बयान, 49 दिन चले आंदोलन का अंत
  • चुनावी सुधार और चुनाव आयोग : चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दीपके ने कहा कि जिस तरह से सरकार तय कर रही है कि मतदाता कौन होगा, इस तरह से लोकतंत्र नहीं चल सकता। संस्थाओं के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिख रहा है।
  • न्यायिक सुधार : उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका में आम लोगों के लिए न्याय की प्रक्रिया धीमी है, जबकि हाई-प्रोफाइल मामलों में रातों-रात और आधी रात को सुनवाई हो जाती है।
  • मीडिया की भूमिका : गोदी मीडिया और एकतरफा पत्रकारिता पर हमला बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मीडिया केवल सरकार के एजेंडे को 'मास्टरस्ट्रोक' बताता रहेगा और जनमुद्दों को नजरअंदाज करेगा, तो लोग टीवी देखना बंद कर देंगे। अगर दर्शक ही नहीं रहेंगे, तो विज्ञापनों का मीडिया घराने क्या करेंगे?

कार्रवाई का डर नहीं, हम बहुत कुछ सह चुके

सरकारी दमन या दंडात्मक कार्रवाई के सवाल पर दीपके ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने जंतर-मंतर पर भारी उत्पीड़न झेला है, यहां तक कि उनके वॉशरूम का पानी तक काट दिया गया था। उन्होंने कहा कि हम पहले ही बहुत कुछ देख चुके हैं। इससे अधिक कठोर कार्रवाई अब और क्या होगी? अगर सरकार हमें जेल में डालना चाहती है, तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है, हम डरने वाले नहीं हैं। ALSO READ: Gen Z पर मोहन भागवत के बयान से सियासी बवाल, प्रियंका गांधी बोलीं- छात्रों को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं

संघ प्रमुख का रुख और केंद्र सरकार में हलचल

जंतर-मंतर पर युवाओं के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद संघ और सरकार के भीतर स्पष्ट रूप से बेचैनी देखी जा रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जनरेशन जेड और जनरेशन अल्फा के रुख को स्वीकार करते हुए कहा कि आज के युवाओं के लिए विरोध प्रदर्शन संवाद का ही एक तरीका है। उन्होंने माना कि युवाओं की शिकायतें जायज हैं और वे तर्कसंगत जवाब चाहते हैं। भागवत ने यहां तक कहा कि 'Gen-Z हमारी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार है।'

 

युवाओं के आक्रोश को भांपते हुए प्रधानमंत्री मोदी के हालिया वीडियो के बाद केंद्र सरकार में हलचल तेज हो गई है। पिछले 10 दिनों में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों ने युवाओं से जुड़ने के लिए छोटे, एडिटेड रील्स और क्लिप्स की बाढ़ ला दी है। यहां तक कि विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक तौर पर स्नैपचैट (Snapchat) से जुड़ने का फैसला किया है।

अब जबरदस्‍ती नहीं कर पाएंगे किन्‍नर, इंदौर में कपड़ा व्‍यापारियों ने तय किया त्‍योहारों का नेग

इंदौर में किन्‍नर समुदाय के सदस्‍यों द्वारा अक्‍सर जबरन और मनमानी वसूली करने के मामले सामने आते रहे हैं। इसे लेकर कई बार शिकायतें भी कीं गई, लेकिन प्रशासनिक स्‍तर पर कुछ नहीं हो सका। अब त्‍योहारों के दिनों में नेग वसूली को लेकर किन्‍न्‍रों की टोलियां घरों में दस्‍त्‍कें देना शुरू कर देगी।

ऐसे में इंदौर के कपड़ा व्यापारियों ने नया फैसला लिया है।  कपड़ा व्यापारियों ने अब नेग अथवा दान राशि फिक्स कर दी है। इस रक्षाबंधन पर क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन द्वारा किन्नरों को प्रति दुकान सिर्फ 200 रुपए ही दिए जाएंगे। इससे ज्‍यादा नेग नहीं दिया जाएगा।

बता दें कि दीवाली, रक्षाबंधन और अन्‍य त्‍योहारों पर हर साल किन्‍नर लोगों से जबरिया वसूली करते हैं। नेग व दान राशि के रूप में वे 1 हजार से लेकर ढाई हजार रुपए तक मांग करते हैं। कई बार इस वजह से बाजार में दुकानदारों और किन्नरों के बीच विवाद की स्थिति बनती है। इन हालातों में पिछले साल ही नंदलालपुरा के दोनों किन्नर समूहों व इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के बीच आपसी सहमति बनी थी। ऐसे में कपड़ा व्‍यापारियों ने यह फैसला किया है।

रक्षाबंधन पर 200 रुपए प्रति दुकान : बता दें कि रक्षाबंधन एवं होली पर प्रति दुकान 200 रुपए व दीपावली पर 500 नेग राशि निर्धारित की गई थी, इस साल फिर किन्नरों के द्वारा अधिक राशि की मांग के चलते संगठन ने किन्नरों को पिछले साल बनी सहमति याद दिलाते हुए सभी व्यापारियों से नंदलालपुरा के दोनों किन्नर समूह के लोगों को 200 प्रति दुकान रक्षाबंधन पर देने का फैसला किया है।

गारमेंट्स एसोसिएशन के सदस्‍यों और पदाधिकारियों का कहना है कि रक्षाबंधन, होली व दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के मद्देनज़र इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन (IRGA) ने शहर के व्यापारी बंधुओं से अपील की है कि किन्नर समुदाय के साथ पूर्व में हुए आपसी समन्वय का सम्मान करते हुए निर्धारित नेग राशि ही प्रदान करें, जिससे बाजार में सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण वातावरण बना रहे।

क्‍या कहता है कोर्ट : बता दें कि किन्‍नरों के नेग मांगने के मामले में एक याचिका भी लगाई गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 28 जून 2026 को दिए एक अहम फैसले में कहा था कि किन्नर समुदाय को मांगलिक अवसरों पर जबरन 'नेग' या 'बधाई' वसूली का कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने इसे भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कृत्य बताया है।