मध्य प्रदेश में नक्सलवाद को आखरी सलाम: सीएम मोहन यादव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद सबसे बड़ी चुनौती थी और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद को आखिरी सलाम कर दिया गया है। 

राज्य में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है और इसी की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मध्य प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। कांग्रेस शासनकाल में जो कभी एक बड़ी चुनौती थी, वह आज समाप्त हो गई है और प्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है।

उन्होंने आगे कहा कि मध्य प्रदेश नक्सलवाद से निपटने में सफल हुआ है। कांग्रेस के शासनकाल में तो एक मंत्री को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी। प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष के शासनकाल में राज्य की दृष्टि से लाल सलाम नक्सलवाद को अंतिम सलाम सबसे बड़ी उपलब्धि है। इस समस्या को न केवल नष्ट कर दिया गया है, बल्कि विकास की बयार बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में बह रही है।

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राज्य की राजधानी भोपाल में चार दशक पहले हुए यूनियन कार्बाइड हादसे की चर्चा करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाकर इस दंश से भी मुक्ति मिली है, वही नदी जोड़ो अभियान से लेकर कई बड़े काम हुए हैं। यह हमारे लिए अद्भुत हैं, जो पूरी दुनिया के लिए आश्चर्य है।

राज्य के श्योपुर में स्थित यूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन का प्रयोग सफल रहा है। इसकी चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि चीता कहां जीता है, वह हमारे मध्य प्रदेश में जीता है। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।

राज्य में नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। इसको लेकर मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है और विद्यार्थी उत्साह के साथ स्कूलों में पहुंचने लगे हैं। प्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि बीते तीन वर्षों में प्राथमिक शिक्षा स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।

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Ayodhya Ram Temple Donation Row : राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में SIT का बड़ा एक्शन, ट्रस्टी अनिल मिश्रा तलब; 5 आरोपियों ने खोले कई बड़े नाम

Ayodhya Ram Mandir

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में आस्था के चढ़ावे और दान राशि में कथित हेरफेर का मामला अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अब सीधे मंदिर के नीति-निर्धारकों और रसूखदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 

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दिग्गजों से आमने-सामने पूछताछ, ​डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्टी) को सम्मन

मंदिर व्यवस्था और चढ़ावे की गिनती की निगरानी करने वाले मुख्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को SIT ने आधिकारिक सम्मन भेजकर तलब किया। बंद कमरे में उनसे करीब 4 घंटे तक मैराथन पूछताछ की गई।​

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गोपाल राव से तीखे सवाल, टिन्नू यादव भी रडार पर

ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जांच दल ने बेहद कड़े और तीखे सवाल पूछे। ​ संदिग्ध भूमिका के चलते रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी घंटों पूछताछ हुई। आरोप है कि उन्होंने ही अपने भतीजे मनीष यादव को पैसे गिनने के काम में लगवाया था, जो इस वक्त मुख्य आरोपियों में से एक है।

 

जांच में सामने आए 3 चौंकाने वाले मोड़

जांच से जुड़े पुख्ता सूत्रों का दावा है कि मंदिर के जिस 'स्ट्रॉन्ग रूम' में भारी कैश गिना जाता था, वहां के CCTV फुटेज के साथ या तो छेड़छाड़ की गई या उन्हें जानबूझकर बंद किया गया था। SIT की टेक्निकल टीम अब DVR को रिकवर करने में जुटी है।

 

बैंककर्मियों की मिलीभगत और 'असंतोषजनक' रिकॉर्ड

सरकारी और निजी बैंकों के कुछ कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। मंदिर काउंटर के रिकॉर्ड और बैंक में असल जमा राशि के बीच करोड़ों रुपए का भारी मिसमैच (अंतर) पाया गया है। SIT ने अब तक पेश किए गए रिकॉर्ड्स को पूरी तरह 'असंतोषजनक' ठहराया है।

 

5 आरोपियों ने उगले 'रसूखदार' नाम

शुरुआती जांच में गिरफ्तार हुए 5 आरोपियों (लवकुश मिश्रा, मनीष यादव आदि) ने, जिनके पास से लाखों का कैश मिला था, पूछताछ में मंदिर के कई अंदरूनी और प्रभावशाली नामों का भंडाफोड़ किया है।

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200 लोगों की 'विस्तृत लिस्ट', 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट, ट्रंस्ट ने क्या दी सफाई 

​SIT का नेतृत्व कर रहे लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने इस चक्रव्यूह को भेदने के लिए करीब 200 संदिग्धों की एक लंबी लिस्ट तैयार की है। हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके आंतरिक ऑडिट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। ट्रस्ट ने निष्पक्षता साबित करने के लिए खुद इस SIT जांच की मांग की थी।

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सरकार ने दी 15 दिनों की डेडलाइन

सरकार ने SIT को 7 दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश दिया है।

 जानकारी दे दें कि जांच शुरू होने से ठीक पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की तबीयत खराब होना और अनिल मिश्रा का आंखों के इलाज के बहाने बाहर जाना चर्चाओं में था। लेकिन अब SIT के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के केंद्र में सेंध लगाने वाले चाहे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, बच नहीं पाएंगे। Edited by : Sudhir Sharma

सोना लगातार दूसरे दिन हुआ सस्ता, चांदी का दाम 7 हजार रुपए से अधिक घटा

सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम करीब 2.40 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया।  

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 2,055 रुपए कम होकर 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,50,148 रुपए प्रति 10 ग्राम था। 

22 कैरेट सोने की कीमत 1,37,536 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,12,611 रुपए प्रति 10 ग्राम था। 

सोने के साथ चांदी की कीमतों में कमी देखने को मिली है। चांदी का दाम 7,497 रुपए कम होकर 2,40,191 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,47,688 रुपए प्रति किलो था। 

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हाजिर के साथ वायदा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2.62 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,49,845 रुपए और चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 5.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,38,654 रुपए पर था। 

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमी देखने को मिली है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 2.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,260 डॉलर प्रति औंस और चांदी 5.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66 डॉलर प्रति औंस पर था।

एसकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी घोषणा के बाद सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। इसकी वजह नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों से संकेत मिला कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है, तो 2026 में ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि हाल की भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, फेड के आकलन में स्थिर आर्थिक विकास और मजबूत लेबर मार्केट की बात कही गई, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और बुलियन की कीमतों पर दबाव पड़ा।

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पूर्व PM के बेटे के साथ Cyber Fraud, 7.8 करोड़ रुपए की ठगी, कैसे फंसे जालसाजों के जाल में

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल के साथ बड़ा साइबइ फ्रॉड का मामला सामने आया है। इंद्र कुमार गुजराल 1997 से 1998 तक भारत के 12वें प्रधानमंत्री रहे थे। साइबर जालसाजों ने राज्यसभा के पूर्व सदस्य नरेश गुजराल की पहचान का इस्तेमाल कर ऑनलाइन ‘मैसेजिंग एप्लिकेशन’ के माध्यम से उनकी कंपनी के वित्तीय कर्मचारियों से 7.8 करोड़ रुपए की ठगी कर ली।

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कैसे हुआ खुलासा 

ठगी का खुलासा तब हुआ जब कर्मचारी ने इस लेनदेन की जानकारी नरेश गुजराल की बेटी को दी। बेटी ने जब नरेश गुजराल से बात की तो उन्होंने साफ किया कि उन्होंने ऐसा कोई पैसा ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दिया था। इसके बाद परिवार को साइबर फ्रॉड की जानकारी हुई। 

 

ठग ने नरेश गुजराल की फोटो लगाकर उनके फाइनेंस से जुड़े एक भरोसेमंद कर्मचारी को वॉट्सऐप पर मैसेज भेजा। आरोपी ने खुद को नरेश गुजराल बताया और कहा कि वह एक जरूरी मीटिंग में व्यस्त हैं। इसके बाद उसने एक बैंक अकाउंट में आरटीजीएस के जरिए पैसे भेजने के निर्देश दिए। 

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पुलिस कर रही है मामले की जांच

परिवार ने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए ठगी की करीब 70 प्रतिशत रकम को फ्रीज करा दिया। दिल्ली पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है।  Edited by : Sudhir Sharma

प्रधानमंत्री मोदी “पीएम-किसान योजना” की 23वीं किस्त में किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये करेंगे ट्रांसफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पीएम‑किसान योजना की 23वीं किस्त के रूप में देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेंगे। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को दी गई।  

मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से पीएम‑किसान योजना की 23वीं किस्त किसानों के खाते में ट्रांसफर करेंगे। इस दौरान वह ‘विकसित भारत, विकसित पश्चिम बंगाल’ के संकल्प को नई गति देने के उद्देश्य से कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और रेलवे सहित विभिन्न क्षेत्रों की अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण, राष्ट्र को समर्पण एवं शिलान्यास भी करेंगे।

साथ ही, वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीटेक, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन तथा प्रधानमंत्री धन‑धान्य कृषि योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत करेंगे, जिनसे किसानों की आय, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और समावेशी विकास को व्यापक बल मिलेगा और पश्चिम बंगाल का कृषि परिदृश्य भी बदल जाएगा।

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केंद्रीय कृषि मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में पश्चिम बंगाल में होने वाला यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम किसानों, ग्रामीण समुदाय और युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का संकल्प है कि पूर्वी भारत को कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास का मजबूत केंद्र बनाया जाए और 20 जून का कार्यक्रम इसी विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम‑किसान योजना की 23वीं किस्त के तहत केवल पश्चिम बंगाल में ही 45.35 लाख से अधिक लाभार्थी किसानों को लगभग 907 करोड़ रुपये किस्त के रूप में प्राप्त होंगे। इसके साथ ही राज्य में पीएम‑किसान योजना के अंतर्गत अब तक वितरित कुल राशि 15,055 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी जबकि 2019 में योजना की शुरुआत से लेकर पूरे देश में कुल वितरण 4.46 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगा।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) का भी शुभारंभ करेंगे, जिनकी संयुक्त लागत लगभग 12,200 करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2026‑27 के दौरान इन योजनाओं के माध्यम से लगभग 1.10 करोड़ किसानों को 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसल बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके तहत लगभग 28,140 करोड़ रुपये मूल्य की फसलें बीमा संरक्षण के दायरे में आएंगी।

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Electric Scooter खरीदने से पहले 14 जरूरी बातें जो आपके लिए जानना जरूरी

Electric Scooter, EV Buying Guide

भारत में बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों, पर्यावरण संरक्षण की बढ़ती जरूरत और सरकार की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते इलेक्ट्रिक स्कूटर (ई-स्कूटर) तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और कम खर्च में सफर करने की चाह रखने वालों के लिए ई-स्कूटर एक बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं। हालांकि बाजार में उपलब्ध दर्जनों मॉडल और ब्रांड के बीच सही इलेक्ट्रिक स्कूटर चुनना आसान नहीं है।

 

अगर आप भी नया ई-स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो इन महत्वपूर्ण बातों को जरूर ध्यान में रखें।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्‍स

इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना केवल वाहन खरीदना नहीं, बल्कि कम खर्च, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक की ओर एक कदम है। बैटरी, रेंज, चार्जिंग, सुरक्षा, सर्विस नेटवर्क और सरकारी सब्सिडी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर आप अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सही ई-स्कूटर का चयन कर सकते हैं। भारत का ईवी बाजार तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक स्कूटर परिवहन का प्रमुख साधन बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

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1. सबसे पहले अपनी जरूरत समझें

स्कूटर खरीदने से पहले तय करें कि इसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए होगा। यदि आप रोज ऑफिस जाते हैं तो लंबी रेंज और फास्ट चार्जिंग वाला मॉडल चुनें। छात्रों के लिए हल्का और बजट फ्रेंडली स्कूटर बेहतर रहेगा, जबकि डिलीवरी कार्य करने वालों को मजबूत बॉडी और अधिक वजन उठाने की क्षमता वाला मॉडल लेना चाहिए।

 

2. बैटरी का प्रकार और क्षमता

 

इलेक्ट्रिक स्कूटर की सबसे महत्वपूर्ण चीज उसकी बैटरी होती है।

 

लिथियम-आयन बैटरी: हल्की, टिकाऊ, जल्दी चार्ज होने वाली और लंबी उम्र वाली।

लीड-एसिड बैटरी: सस्ती लेकिन भारी और कम टिकाऊ।

 

बैटरी की क्षमता (kWh) जितनी अधिक होगी, स्कूटर की रेंज भी उतनी ही बेहतर होगी।

 

3. एक बार चार्ज में कितनी दूरी चलेगा?

 

स्कूटर खरीदते समय उसकी रेंज पर विशेष ध्यान दें।

 

  • एंट्री लेवल मॉडल: 30-60 किमी
  • मिड रेंज मॉडल: 80-100 किमी
  • प्रीमियम मॉडल: 120-150 किमी या अधिक

 

विशेषज्ञों के अनुसार, आपकी रोजाना जरूरत से कम से कम 30 प्रतिशत अधिक रेंज वाला मॉडल चुनना चाहिए।

 

4. चार्जिंग समय और सुविधा

 

कुछ स्कूटर पूरी तरह चार्ज होने में 4 से 6 घंटे लेते हैं, जबकि फास्ट चार्जिंग तकनीक वाले मॉडल कम समय में चार्ज हो जाते हैं।

 

रिमूवेबल बैटरी : घर या ऑफिस में आसानी से चार्ज की जा सकती है।

फिक्स्ड बैटरी : वाहन को चार्जिंग पॉइंट तक ले जाना पड़ता है।
 

5. टॉप स्पीड और प्रदर्शन

 

यदि आप शहर की व्यस्त सड़कों पर सफर करते हैं तो स्पीड भी महत्वपूर्ण है।

 

लो-स्पीड स्कूटर : 25-45 किमी/घंटा

मिड-रेंज : 60-80 किमी/घंटा

प्रीमियम मॉडल : 90-120 किमी/घंटा
 

6. मजबूत बॉडी और डिजाइन

 

भारतीय सड़कों को देखते हुए मजबूत फ्रेम, बेहतर सस्पेंशन और आरामदायक सीट वाला स्कूटर चुनना चाहिए। साथ ही पर्याप्त बूट स्पेस और आकर्षक डिजाइन भी महत्वपूर्ण है।

 

7. सुरक्षा फीचर्स को नजरअंदाज न करें

 

सुरक्षा के लिए इन फीचर्स का होना जरूरी है:

  • डिस्क ब्रेक
  • सीबीएस (CBS) या एबीएस (ABS)
  • ट्यूबलेस टायर
  • बेहतर सस्पेंशन सिस्टम
  • 8. स्मार्ट फीचर्स भी देखें

 

आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर अब कई स्मार्ट सुविधाओं के साथ आते हैं, जैसे:

 

  • GPS ट्रैकिंग
  • मोबाइल ऐप कनेक्टिविटी
  • एंटी-थेफ्ट अलार्म
  • कीलेस इग्निशन

9. सरकारी सब्सिडी की जानकारी लें

 

केंद्र और कई राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी और टैक्स छूट प्रदान करती हैं। खरीदारी से पहले उपलब्ध योजनाओं की जानकारी जरूर लें।

 

10. वारंटी और सर्विस नेटवर्क

 

खरीदारी से पहले यह सुनिश्चित करें कि कंपनी का सर्विस नेटवर्क मजबूत हो।

 

  • बैटरी वारंटी
  • मोटर वारंटी
  • स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता

 

इन बातों की जांच करना बेहद जरूरी है।

 

11. बजट के अनुसार करें चयन

 

भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक स्कूटर विभिन्न कीमतों पर उपलब्ध हैं।

 

  • बजट मॉडल: ₹25,000 से ₹50,000
  • मिड रेंज मॉडल: ₹50,000 से ₹1 लाख
  • प्रीमियम मॉडल: ₹1 लाख से ₹1.5 लाख या अधिक

 

हालांकि शुरुआती कीमत अधिक हो सकती है, लेकिन संचालन लागत बेहद कम रहती है।

 

12. ब्रांड और ग्राहक समीक्षा जांचें

 

खरीदारी से पहले ऑनलाइन रिव्यू, वास्तविक रेंज और ग्राहकों के अनुभव जरूर पढ़ें। इससे उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता का पता चलता है।

 

13. लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन नियम समझें
 

25 किमी/घंटा तक की स्पीड वाले स्कूटर के लिए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती।

25 किमी/घंटा से अधिक स्पीड वाले स्कूटर के लिए लाइसेंस, बीमा और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।

 

14. रीसेल वैल्यू का भी रखें ध्यान

भविष्य में बैटरी बदलने का खर्च और स्कूटर की रीसेल वैल्यू भी खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर सकती है। Edited by : Sudhir Sharma

अक्षय कुमार ने श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में किए दर्शन

भारत में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जहां हर साल लाखों लोग मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। उन्हीं में से एक है जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले की त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित प्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी मंदिर, जहां हाल ही में अभिनेता अक्षय कुमार दर्शन करने पहुंचे। उनकी इस तीर्थ यात्रा को लेकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। 

अक्षय कुमार ने गुरुवार को वैष्णो देवी मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, अभिनेता ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की। इस दौरान उन्होंने कुछ समय मंदिर परिसर में भी बिताया।

अक्षय कुमार के माता वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि उनकी मौजूदगी से आम श्रद्धालुओं की दर्शन प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए। पूजा-अर्चना करने के बाद अक्षय कुमार शांतिपूर्वक वहां से रवाना हो गए।

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जैसे ही अक्षय कुमार के मंदिर पहुंचने की खबर फैली, वहां मौजूद श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया। कई लोग उन्हें देखने के लिए इकट्ठा हो गए और उनकी एक झलक पाने की कोशिश करने लगे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के कारण भीड़ को नियंत्रित कर लिया गया।

बता दें कि श्री माता वैष्णो देवी मंदिर भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित है, और यहां हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को पैदल यात्रा भी करनी पड़ती है।

आंकड़ों के अनुसार, वैष्णो देवी मंदिर में प्रतिदिन लगभग 20 हजार से 40 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि छुट्टियों के दौरान यह संख्या एक सप्ताह में तीन लाख से भी ज्यादा पहुंच जाती है। इतनी बड़ी भीड़ के कारण कई बार भक्तों को दर्शन के लिए 12 से 20 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान होटल और यात्रा से जुड़े खर्च भी बढ़ जाते हैं, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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Share Bazaar में लगातार 5वें दिन तेजी, Sensex 77400 के पार, Nifty में भी जबरदस्त उछाल

Indian stock market maintained an upward trend for 5th consecutive trading session

Share Market Update News : मजबूत खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती दबाव को पछाड़ते हुए लगातार 5वें दिन बढ़त का सिलसिला कायम रखा। टेक्सटाइल सेक्टर में भी जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इसकी वजह भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA रहा, जो 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.33 फीसदी) की शानदार बढ़त के साथ 77409.98 के ऐतिहासिक स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 82.30 अंक (0.34 फीसदी) उछलकर 24168.00 के पार निकल गया, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।

 

टेक्सटाइल सेक्टर में जबरदस्त खरीदारी

मजबूत खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने शुरुआती दबाव को पछाड़ते हुए लगातार 5वें दिन बढ़त का सिलसिला कायम रखा। टेक्सटाइल सेक्टर में भी जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इसकी वजह भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA रहा, जो 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है।

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कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.33 फीसदी) की शानदार बढ़त के साथ 77409.98 के ऐतिहासिक स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 82.30 अंक (0.34 फीसदी) उछलकर 24168.00 के पार निकल गया, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।

 

बैंकिंग शेयरों ने पूरे बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई, वहीं मिडकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर, इंटरग्लोब एविएशन, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अडाणी एंटरप्राइजेज शामिल थे। मीडिया, फार्मा, PSU बैंक, प्राइवेट बैंक और रियल्टी में 0.5 फीसदी की बढ़त देखी गई।

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निवेशकों का भरोसा बढ़ा

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने घरेलू बाजार को एक बड़ा सपोर्ट दिया है। सस्ते कच्चे तेल और चुनिंदा खरीदारी के कारण घरेलू साइक्लिकल्स और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले सेक्टर्स में निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ा।

 

इससे पहले यानी बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का रुख रहा। इस दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसयू बैंक के शेयरों के समर्थन से बीएसई के सेंसेक्स और एनएसई के निफ्टी में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में निफ्टी एक बार फिर 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में सफल रहा।

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कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 347.14 अंक यानी 0.45 प्रतिशत के उछाल के साथ 77155.62 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं एनएसई का निफ्टी 96.55 अंक यानी 0.4 प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए 24085.70 पर पहुंच गया।
Edited By : Chetan Gour

सपा के लिए सैफई ही घर-परिवार, मेरे लिए उत्तर प्रदेश घर, 25 करोड़ लोग परिवार : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi inaugurated development projects in Unnao

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव में 570 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 101 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

– उन्नाव भी बना स्टेट कैपिटल रीजन का अंग, लखनऊ से उन्नाव होते हुए कानपुर तक रैपिड रेल का प्रस्तावः मुख्यमंत्री योगी

– गरीबों के लिए नहीं, माफिया के मरने पर निकलते हैं सपा-कांग्रेस नेताओं के आंसू : मुख्यमंत्री योगी

– मुख्यमंत्री योगी ने बच्चों का कराया अन्नप्राशन, प्रदर्शनी का भी किया अवलोकन

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गत 12 वर्षों में देश में और 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार ने जो कार्य किया, वह कांग्रेस व सपा सरकारें नहीं कर सकीं, क्योंकि भ्रष्ट व क्षमता विहीन ये लोग गरीब के बारे में नहीं, केवल अपने परिवार के बारे में सोचते थे। कांग्रेस ने नेहरू-गांधी परिवार से बाहर कभी नहीं सोचा और सपा के लिए केवल सैफई ही परिवार था जबकि प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत को घर और 140 करोड़ लोगों को ही परिवार माना है। मेरे लिए उत्तर प्रदेश घर और 25 करोड़ लोग परिवार के सदस्य हैं। उनकी समृद्धि के लिए कार्य करना ही हमारा मिशन है।

 

मुख्यमंत्री गुरुवार को 570 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 101 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ग्राम पंचायत डीह, भवानी खेड़ा चौराहा, हिंदु खेड़ा उन्नाव में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों को जानकारी दी कि वीर शहीद गुलाब सिंह लोधी की स्मृति में निर्मित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल की क्षमता भी दोगुनी कर दी गई है।

 

खर-दूषण जैसे थे सपा के सत्तापोषित माफिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार के समय गरीब या अन्य राजनीतिक दल आवाज उठाते थे तो इनके गुंडे व माफिया उनकी आवाज दबाने के साथ ही व्यापारियों का अपहरण कर प्रदेश में अराजकता का तांडव करते थे। रामायण काल में खर-दूषण, मारीच व सुबाहु का आतंक ऐसा ही रहा होगा, जैसे सपा सरकार के समय सत्तापोषित माफिया का था।

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कांग्रेस व सपा के नेताओं को कभी गरीब के लिए आंसू बहाते नहीं देखा होगा। इनके आंसू माफिया के मरने पर बहते हैं। ये गरीबों के प्रति संवेदनहीन बन जाते हैं। सर्वाधिक समय तक शासन करने के बावजूद ये दोनों दल देश-प्रदेश को दुर्गति के गर्त में धकेलने के जिम्मेदार हैं। 

 

अध्यात्म, साहित्य व क्रांति की धरा है उन्नाव 

मुख्यमंत्री ने उन्नाव को अध्यात्म, साहित्य व क्रांति की धरा बताया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय आध्यात्मिक स्थलों, साहित्यकारों, क्रांतिकारियों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए। विधानसभा के पूर्व अध्य़क्ष हृदय नारायण दीक्षित के कार्यों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अस्मिता पर संकट के समय गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए राजा रामबख्श सिंह, वीर गुलाब सिंह लोधी ने अपने बलिदान से ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें उखाड़ दीं। 

 

उन्नाव को कभी पिछड़ने नहीं देंगे 

मुख्यमंत्री बोले,  स्वामी साक्षी महाराज जी कहते थे कि लखनऊ व कानपुर के बीच उन्नाव खुद को उपेक्षित महसूस करता है। तब मैंने कहा था कि विकास की हर योजना उन्नाव में भी आएगी। आज उन्नाव की कनेक्टिविटी हर तरफ से फोरलेन की हो गई है। गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए उन्नाववासी लखनऊ को बाईपास कर सीधे दिल्ली, प्रयागराज जा सकते हैं। कानपुर के लिए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भी बन रहा है। उन्नाव व कानपुर की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए गंगा नदी में अतिरिक्त ब्रिज की मांग भी पूरी की गई।

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हम उन्नाव को पिछड़ने नहीं देंगे। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर व गंगा एक्सप्रेसवे पर इंडस्ट्रियल कलस्टर विकसित करने के लिए जमीन अधिग्रहण हो चुका है। डिफेंस कॉरिडोर के लिए लगभग 700 एकड़ लैंड और लगभग 200 एकड़ लैंड इंडस्ट्री कलस्टर के लिए उन्नाव जनपद के लिए तैयार है। उद्योग लगने से स्थानीय नौजवानों को यहीं रोजगार प्राप्त होगा।

 

दुनिया के लिए प्रेरणा बना भारत का प्रबंधन 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दुनिया ऊर्जा, आर्थिक मंदी और पश्चिम एशिया के संकट के दौर से गुजर रही है, तब भी पीएम मोदी के नेतृत्व में जनता को राहत मिली और संकट से उबारा गया। भारत का प्रबंधन दुनिया के लिए प्रेरणा बना। अमेरिका महंगाई से त्रस्त है, लेकिन भारत ने उक्त संकटों का बखूबी सामना किया। भारत में सुरक्षा, आस्था का सम्मान व अर्थव्यवस्था को मजबूती से बढ़ाया जा रहा है। आतंकवादियों, उग्रवादियों व नक्सलवादियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देकर भारत की ताकत का अहसास कराया जा रहा है। 

 

गरीब, किसान, महिला व युवा को केंद्र में रखकर योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की नजर में चार जातियां (गरीब, किसान, महिला, युवा) ही हैं। योजनाएं इन्हें केंद्र में रखकर ही बन रही हैं। मिशन शक्ति के अंतर्गत नारी की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के कार्यक्रम हो रहे हैं। प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए अब गरीब हाथ नहीं फैलाते, बल्कि अधिकारी घर जाकर बताते हैं कि आपका चयन हुआ है। पहले घूस देकर भी योजना का लाभ नहीं मिलता था, आज बिना सिफारिश रसोई गैस, राशन, पेंशन, आयुष्मान आदि सुविधाएं मिल रही हैं। 

 

विपक्षियों के दोहरे चरित्र को देख आती है हंसी 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों के दोहरे चरित्र को देखकर हंसी आती है। प्रदेश को पहचान का संकट देने वाले, माफियाराज, दंगा-कर्फ्यू ग्रस्त बनाने वाले आज उपदेश दे रहे हैं। इनमें तनिक भी लज्जा हो तो अपने कार्यकाल को देख लें। जिन दलों ने युवाओं के रोजगार/नौकरियों, स्वाभिमान से खिलवाड़ किया,  यूपी का युवा इन भ्रष्टाचारियों को स्वीकार नहीं करेगा। युवा 2014 से इनसे अपमान का बदला ले रहा है।

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स्वाभिमान से खिलवाड़ करने वाले बर्दाश्त नहीं 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले किसान को फसल का दाम और बिजली नहीं मिलती थी। ट्यूबवेल चोरी होते थे, आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता था। गन्ने का दाम, समय पर बीज-उर्वरक, कुछ नहीं मिलता था, इसलिए किसान भी इन्हें बर्दाश्त नहीं करेगा। मां जगतजननी की प्रतीक नारी शक्ति खर-दूषण व चंड-मुंड से निपटना जानती है। सपा के नाम पर ‘देख सपाई, बिटिया घबराई’ की चर्चा होती है। नया भारत व नया उत्तर प्रदेश सम्मान, स्वाभिमान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शता नहीं है।

 

यूपी पर बरसता है प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में प्रभु श्रीराम, बांके बिहारी, बाबा विश्वनाथ, मां गंगा का आशीर्वाद बरसता है, यहां पैसे की कमी नहीं है। अब कोई उपद्रव नहीं करता है। हर त्योहार अब गरीबों के लिए भी खुशहाली लाते हैं। गरीब इन त्योहारों पर अच्छे कपड़े पहनकर परिवार के साथ उत्साहित होते हैं। 

 

उन्नाव भी बना एससीआर का अंग 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्नाव भी स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) का अंग बना है। अमर नायक वीर गुलाब सिंह लोधी देश को आजाद कराने के लिए कभी उन्नाव से हजरतगंज, लखनऊ तक पहुंचे थे। अब विकास लखनऊ से उन्नाव होते हुए कानपुर तक जाएगा। देश की पहली रैपिड रेल दिल्ली से मेरठ तक पहुंची है। ऐसे ही लखनऊ से उन्नाव होते हुए कानपुर तक रैपिड रेल का प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। चारों ओर रिंग रोड बनेगी।

लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली जनपद आपस में जुड़ेंगे, विकास में सबकी बराबर की सहभागिता होगी। हमारे पास ऊर्जावान युवा, मेहनती किसान, आधी आबादी की ताकत, मां गंगा का आशीर्वाद है। अब यह जनपद भी विकसित उन्नाव के रूप में प्रस्तुत होगा। अलग-अलग जनपदों में इंडस्ट्रियल कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं। विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की तैयारी चल रही है। सरकार 100 वर्ष की कार्ययोजना को लेकर कार्य कर रही है। 

 

एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में यूपी सबसे आगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे पर कोई चलेगा तो उसे पता लग जाएगा कि ग्लोबल स्टैंडर्ड कैसे लागू किए जाते हैं। इस एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी वही है, जो दुनिया में सबसे अच्छी सड़क की है। हमने इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री जी को उन्नाव व हरदोई के बीच में आमंत्रित किया। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में यूपी सबसे आगे है। 

 

इस अवसर पर सांसद साक्षी महाराज, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, विधायक पंकज गुप्ता, अनिल सिंह, आशुतोष शुक्ल, बंबालाल दिवाकर, श्रीकांत कटियार, ब्रजेश रावत, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, जिला पंचायत अध्यक्ष शकुन सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी आदि मौजूद रहे।
Edited By : Chetan Gour

राहुल गांधी के साथ कोटा में खड़ा हुआ Gen-Z, NEET पेपर लीक और देश के एजुकेशन सिस्‍टम का किया पोस्‍टमार्टम

Gen Z  and Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने राजस्‍थान के कोटा में जब स्‍टेज पर एंट्री ली तो जो माहौल था वो किसी इंटरनेशनल पॉप सिंगर के कंसर्ट जैसा लग रहा था। लाइट्स, कैमरा, मोबाइल के फ्लैशेस और लाखों स्‍टूडेंट की भीड़ और उनका शोर। स्‍टूडेंट जिन्‍हें आजकल जेन-जी कहा जाता है। कोटा में नीट और यूपीएससी की तैयारी कर रहे जेन-जी राहुल को सुनने के लिए बेताब थे। यह शोर बता रहा था कि वे देश के एजुकेशन सिस्‍टम में बदलाव की जरूरत है।

हाफ स्‍लीव शर्ट और पतलून में राहुल गांधी ने स्‍टेज पर आते ही यह साफ कर दिया कि यह कोई राजनीतिक रेली नहीं है। यह आपके लिए हैं, यह उन नौजवानों को लिए है जो अपने भविष्‍य की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्‍होंने कहा— आज की शाम मेरे मुंह से बीजेपी, कांग्रेस और राजनीति जैसा एक भी शब्‍द नहीं निकलेगा। उन्‍होंने कहा कि मैं कश्‍मीर से लेकर कन्‍याकुमारी तक यात्राएं करता हुआ लगातार हमारे एजुकेशन सिस्‍टम के बारे में सोच रहा हूं, स्‍टूडेंट से बात कर रहा हूं। हमारा सिस्‍टम छात्रों के साथ न्‍याय नहीं करता।

हमारे सिस्‍टम की गलती है : इसके बाद उन्‍होंने एक नीट छात्रा स्‍नेहा का सुसाइड नोट दिखाया, कहा कि स्‍नेहा डॉक्‍टर बनना चाहती थी, इनके पिता पैरेलाइज्‍ड हैं, कर्ज लिया था। लेकिन नीट पेपर लीक हो गया और उसने आत्‍महत्‍या कर ली। उन्‍होंने कहा कि स्‍नेहा की गलती नहीं थी, उसके पिता की गलती नहीं थी, आपकी नहीं थी। यह हमारे एजुकेशन सिस्‍टम की गलती है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर काम करे। हम देखें कि हमारे सिस्‍टम में कहां गलती है और उसे सुधारे मिलकर। यह रेली सिर्फ इस बारे में है।

राहुल के साथ छात्रों की गूंज : राहुल गांधी ने देश के एजुकेशन सिस्‍टम के खिलाफ कोटा में आवाज उठाई और स्‍टूडेंट के साथ ही उनके परिजनों से बात कर के इसकी खामियां गिनाई और बताया कि कहां सुधार की जरूरत है। आम आदमी अपने बच्‍चों के लिए कर्ज लेकर डॉक्‍टर बनाने के लिए नीट एक्‍जाम में शामिल करता है और एक पेपर लीक उनके पूरे भविष्‍य और परिवार को बर्बाद कर देता है। इस पूरे अभियान में कोटा में नीट, यूपीएससी और अन्‍य परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्‍टूडेंट ने राहुल के साथ अपनी आवाज मिलाई।

कोटा जाने से पहले क्‍या लिखा राहुल ने : बता दें कि राजस्थान के कोटा रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कोटा के लिए निकल चुका हूं पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं उमेश और रिया। सीकर में उमेश और देहरादून में रिया दोनों ने दोबारा नीट की परीक्षा के दबाव में अपनी जिंदगी खत्म कर ली। उन्होंने आगे कहा कि 22 और 23 साल के बच्चे, जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था वो इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए।

5 साल में कितनी आत्‍महत्‍याएं : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2021 से लेकर वर्ष 2026 के बीच NEET से जुड़े कम से कम 93 छात्र आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में ऐसे मामलों की संख्या सबसे ज्यादा रही, जब कम से कम 32 छात्रों ने अपनी जान गंवाई। साल 2026 में अब तक 14 मामले सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 5 मामले 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद दर्ज किए गए। हालांकि ये आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।

कहां-कहां हुई आत्‍महत्‍याएं : रिपोर्ट्स के अनुसार NEET 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों से कई छात्रों की मौत के मामले सामने आए। 14 मई को गोवा, 15 मई को उत्तर प्रदेश और दिल्ली, 16 मई को राजस्थान तथा 24 मई को कर्नाटक से ऐसे मामले रिपोर्ट किए गए। इसके बाद जून में भी कई घटनाएं सामने आईं। 4 जून को राजस्थान के दौसा निवासी अजीत मीणा की मौत की खबर आई। 13 जून को दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाली 17 वर्षीय रेनू की मौत का मामला सामने आया था। 15 जून को राजस्थान के सीकर और 16 जून को उत्तराखंड के देहरादून से भी NEET अभ्यर्थियों की मौत की खबर सामने आई हैं।

हर साल 24 लाख बच्‍चे देते हैं नीट : नीट (NEET UG) परीक्षा में हर साल लगभग 22 लाख से 24 लाख के बीच छात्र बैठते हैं। उदाहरण के लिए, परीक्षा के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 22,79,743 छात्रों ने पंजीकरण कराया था और 22 लाख से अधिक उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए थे।

कितनी खर्च होता है नीट की तैयारी में : नीट (NEET) की 1 साल की फीस आपके द्वारा चुने गए माध्यम (ऑनलाइन/ऑफलाइन कोचिंग) और संस्थान पर निर्भर करती है। आमतौर पर 1 साल के कोर्स की फीस 50,000 से 2,50,000 के बीच होती है।

ऑनलाइन कोचिंग: यह सबसे सस्ता विकल्प है, जिसकी फीस करीब 4,000 से 1,00,000 प्रति वर्ष तक होती है।
ऑफलाइन कोचिंग (रेगुलर): किसी सामान्य कोचिंग सेंटर या ब्रांच में पढ़ने का खर्च 50,000 से 1,50,000 तक होता है।
प्रमुख कोचिंग संस्थान (जैसे कोटा या आकाश): बड़े संस्थानों में फीस 1,00,000 से 2,50,000 के बीच हो सकती है (हॉस्टल का खर्च अलग से)।

सरकार के लिए बड़ा वेक-अप कॉल : कोटा में राहुल गांधी और 'जेन-जी' (Gen-Z) का यह साथ सिर्फ एक राजनीतिक संवाद नहीं, बल्कि देश की जर्जर होती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का एक कड़ा आक्रोश है। नीट (NEET) पेपर लीक जैसी घटनाओं ने आज की पीढ़ी के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। युवाओं ने नेताओं के साथ मिलकर जिस तरह शिक्षा तंत्र की कमियों का 'पोस्टमार्टम' किया है, उसने यह साफ कर दिया है कि अब देश का युवा चुप बैठने वाला नहीं है। सरकार और प्रशासन के लिए यह एक बड़ा वेक-अप कॉल है—अगर समय रहते इस पूरे सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित नहीं बनाया गया, तो देश के भविष्य (युवाओं) का यह असंतोष एक बड़े आंदोलन की शक्ल ले सकता है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल