
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में आस्था के चढ़ावे और दान राशि में कथित हेरफेर का मामला अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अब सीधे मंदिर के नीति-निर्धारकों और रसूखदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
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दिग्गजों से आमने-सामने पूछताछ, डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्टी) को सम्मन
मंदिर व्यवस्था और चढ़ावे की गिनती की निगरानी करने वाले मुख्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को SIT ने आधिकारिक सम्मन भेजकर तलब किया। बंद कमरे में उनसे करीब 4 घंटे तक मैराथन पूछताछ की गई।
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गोपाल राव से तीखे सवाल, टिन्नू यादव भी रडार पर
ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जांच दल ने बेहद कड़े और तीखे सवाल पूछे। संदिग्ध भूमिका के चलते रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी घंटों पूछताछ हुई। आरोप है कि उन्होंने ही अपने भतीजे मनीष यादव को पैसे गिनने के काम में लगवाया था, जो इस वक्त मुख्य आरोपियों में से एक है।
जांच में सामने आए 3 चौंकाने वाले मोड़
जांच से जुड़े पुख्ता सूत्रों का दावा है कि मंदिर के जिस 'स्ट्रॉन्ग रूम' में भारी कैश गिना जाता था, वहां के CCTV फुटेज के साथ या तो छेड़छाड़ की गई या उन्हें जानबूझकर बंद किया गया था। SIT की टेक्निकल टीम अब DVR को रिकवर करने में जुटी है।
बैंककर्मियों की मिलीभगत और 'असंतोषजनक' रिकॉर्ड
सरकारी और निजी बैंकों के कुछ कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। मंदिर काउंटर के रिकॉर्ड और बैंक में असल जमा राशि के बीच करोड़ों रुपए का भारी मिसमैच (अंतर) पाया गया है। SIT ने अब तक पेश किए गए रिकॉर्ड्स को पूरी तरह 'असंतोषजनक' ठहराया है।
5 आरोपियों ने उगले 'रसूखदार' नाम
शुरुआती जांच में गिरफ्तार हुए 5 आरोपियों (लवकुश मिश्रा, मनीष यादव आदि) ने, जिनके पास से लाखों का कैश मिला था, पूछताछ में मंदिर के कई अंदरूनी और प्रभावशाली नामों का भंडाफोड़ किया है।
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200 लोगों की 'विस्तृत लिस्ट', 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट, ट्रंस्ट ने क्या दी सफाई
SIT का नेतृत्व कर रहे लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने इस चक्रव्यूह को भेदने के लिए करीब 200 संदिग्धों की एक लंबी लिस्ट तैयार की है। हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके आंतरिक ऑडिट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। ट्रस्ट ने निष्पक्षता साबित करने के लिए खुद इस SIT जांच की मांग की थी।
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सरकार ने दी 15 दिनों की डेडलाइन
सरकार ने SIT को 7 दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश दिया है।
जानकारी दे दें कि जांच शुरू होने से ठीक पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की तबीयत खराब होना और अनिल मिश्रा का आंखों के इलाज के बहाने बाहर जाना चर्चाओं में था। लेकिन अब SIT के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के केंद्र में सेंध लगाने वाले चाहे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, बच नहीं पाएंगे। Edited by : Sudhir Sharma

