CM योगी आदित्यनाथ ने किए मां पाटेश्वरी के दर्शन, स्वस्थ-समृद्ध UP के लिए की प्रार्थना

CM Yogi Adityanath Maa Pateshwari Temple: गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुप्त नवरात्र में बुधवार सुबह तुलसीपुर में देवी शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी मंदिर में दर्शन, पूजन-अर्चन किया। उन्होंने मां की आरती उतारी और सुखी, स्वस्थ व समृद्ध उत्तर प्रदेश के लिए प्रार्थना किया। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को देख बच्चे उनके पास पहुंचे, जिस पर मुख्यमंत्री ने उनसे स्नेहपूर्वक बातचीत की और चॉकलेट दी। मुख्यमंत्री ने इससे पहले 6 जून को भी मां पाटेश्वरी के दर्शन किये थे। 

 

सीएम योगी मंगलवार को बहराइच और श्रावस्ती में विकास कार्यों के लोकार्पण- शिलान्यास कार्यक्रम के बाद बलरामपुर पहुंचे। उन्होंने देवीपाटन मंदिर परिसर में रात्रि विश्राम किया। बुधवार सुबह दर्शन-पूजन के बाद मंदिर में आये श्रद्धालुओं का उन्होंने अभिवादन स्वीकार किया।

 

सीएम ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा व स्वच्छता की समुचित व्यवस्था का निर्देश दिया। स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों, संतों आदि से मुलाकात भी की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के लिए प्रस्थान किया। दर्शन-पूजन के दौरान महंत मिथिलेश नाथ योगी, कालीबाड़ी गोरखपुर के महंत रविंद्र दास जी आदि मौजूद रहे।

राष्ट्र, आज समान नागरिक संहिता का महत्व समझ रहा, बोले डॉ. मोहन यादव, डॉ. हेडगेवार ने दिया था समानता का विचार

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रवादी विचारधारा के संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने देश भक्ति के साथ समानता का दर्शन दिया था। वे भारत माता को मिलने जा रही स्वतंत्रता को कायम रखने के महत्व  को पहले ही जान चुके थे, इस नाते उन्होंने राष्ट्र हित में अपनी भूमिका का निर्वाह किया। वे दूरदर्शी सोच के साथ रचनात्मक प्रकल्प संचालित करते थे। डॉ. हेडगेवार के समता के भाव को  आज राष्ट्र भी अंगीकार कर रहा है। समान नागरिक संहिता लागू करने की पहल भी इस भाव को दृष्टिगत रखते हुए की गई है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवींद्र भवन में संस्कार भारती द्वारा द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष होने के अवसर पर हुए महानाट्य “युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार” के मंचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ईश्वर  विशेष कार्य के लिए कोई निमित्त  ढूंढता है। स्वामी विवेकानंद की ये भविष्यवाणी कि आने वाली सदी भारत की होगी,आज चरितार्थ हो रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी डॉ. हेडगेवार जी की कल्पना के भारत के निर्माण में संलग्न हैं। राष्ट्र अपने गर्व और गौरव को प्राप्त कर रहा है।भारत की पहचान एक विधान है।हमारा मूल दर्शन समानता का है। डॉ. हेडगेवार ने स्वतंत्रता के पहले चुनौती भरे दौर में राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र सर्वोपरि के भाव का प्रकटीकरण ही नहीं किया,लाखों लाख नागरिकों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा भी दी।

 

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कार भारती के डॉ. हेडगेवार के योगदान को नाटक के माध्यम से मंचित किये जाने के लिए बधाई दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मध्यप्रदेश विधानसभा में सम्मान नागरिक संहिता विधेयक पारित होने का उल्लेख करते हुए बधाई और शुभकामनाएं दी गईं।

 

कार्यक्रम को राष्ट्रीय सेवक संघ के पदाधिकारी हेमंत मुक्तिबोध ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार राष्ट्र को वैभव की ओर ले जाने के भरसक प्रयास किए। यह नाटक उनके जीवन के समर्पण,राष्ट्र निष्ठा और कर्म आधारित जीवन के  स्वरूप को सामने लाने का माध्यम है। इस अवसर पर मंच पर वरिष्ठ पदाधिकारी  अशोक पांडे , फिल्म अभिनेता और रंगमंच निर्देशक राजीव वर्मा उपस्थित थे। कार्यक्रम में श्री शशि भाई सेठ, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, संस्कृति संचालक  एन पी नामदेव और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत किया गया। आभार प्रदर्शन  श्री रविंद्र सहस्त्रबुद्धे ने किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नाटक के कलाकारों को उत्कृष्ट अभिनय के लिए बधाई दी। नागपुर की नादब्रम्ह संस्था द्वारा तैयार इस नाटक का निर्देशन श्री सुबोध सुरजीकर ने किया। नाटक के लेखक डॉ. अजय प्रधान हैं। संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से हुए नाटक में दक्ष कलाकारों ने प्रभावी अभिनय कर नाट्य प्रस्तुति  को सफल बनाया। देश के अनेक नगरों में नाटक का मंचन हुआ है।

गुजरात विधानसभा का मानसून सत्र सितंबर में, ‘ज़मीन टुकड़ा अधिनियम’ सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक होंगे पेश

Gujarat Assembly's monsoon session in September, several important bills to be tabled

गुजरात विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार और विधानसभा प्रशासन की ओर से सत्र की तैयारियां ज़ोरों पर शुरू कर दी गई हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, गुजरात विधानसभा का मानसून सत्र सितंबर महीने के दूसरे सप्ताह में आयोजित होने की संभावना है। हालांकि यह सत्र केवल 2 से 3 दिनों का छोटा सत्र होगा, फिर भी कानूनी और राजनीतिक दृष्टिकोण से इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

2 से 3 दिनों का छोटा सत्र और कानूनी संशोधन

सूत्रों के अनुसार, यह मानसून सत्र केवल 2 से 3 दिनों तक ही चलने की संभावना है। इस अल्पकालिक सत्र के दौरान सरकार विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है। मुख्य रूप से 'ज़मीन टुकड़ा अधिनियम' (Land Fragmentation Act) में संशोधन सहित कई प्रमुख विधेयकों को लाया जाएगा, जिन पर सभी की निगाहें टिकी होंगी।

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विधानसभा प्रशासन की आंतरिक तैयारियां

विधानसभा प्रशासन द्वारा सत्र के सफल संचालन के लिए आंतरिक योजना और सभी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सदस्यों से जुड़ी प्रक्रियाओं, बैठने की व्यवस्था, प्रश्नकाल और विधेयकों से जुड़े कार्यों का प्रबंधन तेज़ी से किया जा रहा है। सत्र की सटीक तारीखों को लेकर जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।

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जनता के मुद्दे और राजनीतिक सरगर्मी

इस सत्र में विपक्ष द्वारा जनहित के प्रश्नों, राज्य के विकास और आम जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने की पूरी संभावना है। दूसरी ओर सरकार अपने प्रशासनिक निर्णयों और नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए नए बिल पारित कराएगी। समयावधि कम होने के बावजूद, महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों के कारण यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने वाला है।

‘राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों को PM आवास क्यों ले जा रहे थे?’ CJP प्रदर्शन के बीच कंगना रनौत का बड़ा हमला

Protest near PM house : kangana ranaut attacks rahul gandhi

Kangana Ranaut attacks Rahul Gandhi जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच भाजपा सांसद कंगना रनौत ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सवाल किया कि वे क्यों प्रधानमंत्री के आवास की ओर प्रदर्शन करना चाह रहे थे? ALSO READ: CJP Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच दिल्ली मेट्रो ने 16 स्टेशन किए बंद, सफर से पहले जरूर देखें पूरी लिस्ट

 

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि कल बहुत बड़ा सुरक्षा का उल्लंघन हुआ है। राहुल गांधी ने पूरी कोशिश की कि प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री के आवास की ओर आगे बढ़ा दिया जाए। जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हो रहा था तब राहुल गांधी क्यों प्रधानमंत्री के आवास की ओर प्रदर्शन करना चाह रहे थे?

 

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार लगातार संवाद कर रही है। ये कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री इस्तीफा दें? वे दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं आखिर वे क्यों इस्तीफा देंगे? ALSO READ: CJP Protest: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए देशभर से पहुंच रहा खाना, अनजान लोगों ने भेजे सैकड़ों फूड ऑर्डर

 

छात्रों के संसद मार्च के दौरान कंगना को क्या लगा डर?

इससे पहले कंगना ने दावा किया था कि छात्रों के संसद मार्च के दौरान इतनी खतरनाक हो गई थी कि संसद के भीतर मौजूद सभी लोग बुरी तरह घबराए हुए थे। कंगना ने दिल्ली पुलिस के रुख का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि आपने देखा होगा कि कैसे भीड़ हमला करने की कोशिश कर रही थी। एक वक्त तो हम सभी इस डर में थे कि वे कहीं हम पर हमला न कर दें। प्रदर्शन के दौरान पथराव भी हुआ और कुछ लोग घायल भी हुए। आम जनता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। पुलिस ने हमारे लिए एक सुरक्षा ढाल की तरह काम किया। किसी को नुकसान नहीं पहुंचने दिया। ALSO READ: CJP Protest: 'हमको लग रहा था कि भीड़ हम पर हमला कर देगी', कंगना रनौत ने बताया संसद के अंदर कैसा था माहौल?

 

कहां होगी सीजेपी से सरकार की चर्चा?

इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने आज संसद में कह दिया है कि NEET पेपर लीक मामला और उससे जुड़े संबंधित मामलों पर चर्चा करने को तैयार है। सरकार देश और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा के लिए हमेशा तैयार रहती है। संसद के अंदर चर्चा करने के लिए एक सिस्टम बनाया हुआ है। चर्चा सार्थक होनी चाहिए। NEET पेपर लीक के बाद हुई सभी घटनाओं का ब्यौरा भी सरकार सदन में बताएगी। हमने औपचारिक रूप से कह दिया है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं। इस बीच सीजेपी ने जंतर मंतर या किसी सार्वजनिक जगह पर चर्चा की बात कही है। पार्टी ने साफ कर दिया कि चर्चा के लिए किसी मंत्री के घर नहीं जाएंगे।

 

हिंदुस्तान कमाल है, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और पूरे भारत ने Zomato-Swiggy के ज़रिए छात्रों तक सिर्फ खाना नहीं, हौसला भी पहुंचाया, सलाम है आपको!

मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और पूरे भारत ने जिस तरह जंतर-मंतर पर जुटे छात्रों तक अपना प्यार पहुंचाया, वह इस देश की असली पहचान है।

भारत की आत्मा हमेशा से एक ही रही है—जब कोई भूखा हो तो अपने हिस्से की रोटी भी बांट देना, जब कोई प्यासा हो तो अपना घड़ा आगे बढ़ा देना। यहां किसी को भोजन कराना केवल पेट भरना नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और अपनत्व का सबसे पवित्र रूप माना गया है। यही हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी पूंजी है।

लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल के दिनों में जो दृश्य सामने आए, उन्होंने हर संवेदनशील भारतीय को भीतर तक झकझोर दिया। अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कार्रवाई की तस्वीरें विचलित करने वाली थीं। लाठियां, आंसू गैस, धक्का-मुक्की और घसीटते हुए युवाओं की तस्वीरें केवल एक प्रदर्शन की कहानी नहीं थीं, बल्कि उस बेचैनी की तस्वीर थीं जो आज देश का युवा महसूस कर रहा है।

ये वे छात्र थे जो हथियार नहीं, किताबें लेकर आए थे। हाथों में तिरंगा था, कुछ के हाथों में फूल थे। उनकी मांग कोई असंभव नहीं थी—परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक पर रोक और जवाबदेही तय करने की मांग। लेकिन उनकी आवाज का जवाब बल प्रयोग से दिया गया।

और फिर सामने आया हिंदुस्तान का सबसे खूबसूरत चेहरा

जब दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्र भूखे-प्यासे, बारिश और पुलिस कार्रवाई के बीच डटे हुए थे, तब देश के दूसरे शहरों में बैठे लोगों ने भी खुद को इस आंदोलन से जुड़ा हुआ महसूस किया।
मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और देश के अनेक हिस्सों से लोगों ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदर्शन स्थल तक भोजन, चाय और नाश्ता भेजना शुरू किया। कई ऑर्डर गुमनाम थे। डिलीवरी नोट में केवल इतना लिखा था—

जिसे सबसे ज्यादा जरूरत हो, उसे दे दीजिए।”
प्रदर्शन कर रहे छात्रों में बांट दीजिए।”

शायद भेजने वाले कभी उन छात्रों से नहीं मिलेंगे। शायद उन्हें उनका नाम भी नहीं पता होगा। लेकिन उन्हें यह जरूर पता था कि संघर्ष कर रहे किसी अनजान युवा तक उनका स्नेह-समर्थन पहुंचना चाहिए।

यही भारत है। यही देश की असली ताकत है

जहां गुरुद्वारों ने अपने दरवाजे खोले, गुरुद्वारे के सेवादार दरवाजे के बाहर खड़े हो गए और पुलिस को भीतर नहीं आने दिया, वहीं कई डॉक्टर घायल छात्रों के उपचार के लिए स्वयं पहुंच गए। अनेक ऑटो और कैब चालकों ने बिना किराया लिए छात्रों को सुरक्षित घर पहुंचाने का जिम्मा उठाया।

यह केवल सेवा नहीं थी। यह नागरिकता का सबसे सुंदर रूप था।

सलाम है आपको…
सलाम है मुंबई को।
सलाम है बेंगलुरु को।
सलाम है पुणे को।
और सलाम है पूरे हिंदुस्तान को।

आपने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की असली ताकत उसकी सरकारें या उसकी इमारतें नहीं, बल्कि उसके लोग हैं।

जब एक शहर का युवा संघर्ष करता है और दूसरे शहर का कोई अनजान नागरिक उसके लिए भोजन भेजता है, तब भारत केवल एक भूगोल नहीं रहता—वह एक परिवार बन जाता है।

यह केवल खाने का पैकेट नहीं था।

यह एक संदेश था— हम तुम्हारे साथ हैं।” तुम अकेले नहीं हो।”

नई पीढ़ी बदल रही है राजनीति का अर्थ

लंबे समय तक यह धारणा बनाई गई कि यह पीढ़ी सिर्फ मोबाइल स्क्रीन पर जीती है, रील बनाती है और वास्तविक संघर्ष से दूर रहती है। लेकिन इस आंदोलन ने उस धारणा को चुनौती दे दी।

यह वही पीढ़ी है जिसने प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हुई अनियमितताओं, पेपर लीक, वर्षों की तैयारी के बाद टूटते सपनों और मानसिक दबाव के खिलाफ आवाज उठाई। जब भविष्य दांव पर हो, तब चुप रहना उनके लिए संभव नहीं था।

आज का युवा केवल शिकायत नहीं कर रहा, बल्कि भागीदारी कर रहा है। वह सोशल मीडिया पर अभियान चलाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सड़क पर भी उतरता है।

वह पुलिस से टकराने नहीं, संवाद करने जाता है। कई जगहों पर लाठीचार्ज झेलने के बाद भी छात्रों ने पुलिसकर्मियों को फूल देकर “We Love You” कहा। यह विरोध का एक नया तरीका है—जहां प्रतिरोध है, लेकिन घृणा नहीं; जहां असहमति है, लेकिन हिंसा नहीं।

यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति है।

हिंदुस्तान कमाल है

यह देश बार-बार साबित करता है कि यहां इंसानियत किसी भी दूरी से बड़ी होती है।

कभी कोई सैनिक सीमा पर खड़ा होता है तो पूरा देश उसके साथ खड़ा होता है। कभी किसान खेत में संघर्ष करता है तो लोग उसके लिए आवाज उठाते हैं। और जब छात्र अपने भविष्य के लिए खड़े होते हैं, तब अनजान लोग उनके लिए भोजन भेजते हैं।

यही भारत की पहचान है। जंतर-मंतर पर डटे उन सभी छात्रों को सलाम। अपने भविष्य के लिए आवाज उठाने वाले हर युवा को सलाम।

और उन सभी गुमनाम नागरिकों को भी सलाम, जिन्होंने बिना किसी पहचान या प्रसिद्धि की इच्छा के केवल इंसानियत के नाते अपना हाथ आगे बढ़ाया।

जय हिंद। जय जवान। जय किसान। जय छात्र। और जय उस नई पीढ़ी की, जो सवाल भी पूछना जानती है और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ना भी।

क्योंकि बेहतर भविष्य केवल सरकारें नहीं बनातीं—उसे जागरूक नागरिक मिलकर बनाते हैं।

ब्रिटिश सरकार न सरस्वती प्रतिमा वापस करेगी, न कोहिनूर हीरा

British Museum London

-लंदन से लौटकर रमण रावल

Dhar Bhojshala Vagdevi Statue: धार की भोजशाला से ब्रिटेन ले जाई गई जिस वाग्देवी (मां सरस्वती) की मूर्ति को वापस पाने के लिये करोड़ों लोगों की भावनाओं के परिप्रेक्ष्य में भारत सरकार अथक प्रयास करती रही है और लेकिन न तो ब्रिटिश कानून इसकी अनुमति देता है, न ही वहां की सरकार 6 महाद्वीपों से ले जाई गई कोई भी पुरातात्विक वस्तु वापस करने में दिलचस्पी रखती है। याद रहे, 15 मई को मप्र उच्च न्यायालय ने धार की विवादित जगह को निर्विवाद रूप से भोजशाला मानते हुए फैसला सुनाया है। उसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील तो की गई है, लेकिन फैसले पर कोई रोक नहीं लगी है।

 

इस तथ्य से भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है, लेकिन इस सच को तथ्यों के प्रकाश में अब स्वीकार कर लेना ही नियति है। इसकी वजह साफ है, क्योंकि हाल ही के लंदन प्रवास में मुझे यह जानने में आया कि ब्रिटिश संग्रहालय अधिनियम 1963 के अनुसार वहां का कानून इस बात की अनुमति नहीं देता कि किसी भी देश की सांस्कृतिक धरोहर, कलाकृति या वस्तु को उसके मूल देश को लौटा सकें। उल्लेखनीय है कि 15 मई को इंदौर उच्च न्यायालय के फैसले बाद इस मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ा कि लंदन म्यूजियम से सरस्वती प्रतिमा वापस लाना चाहिए।

 

भोजशाला का फैसला 15 मई को आया और मैं 17 मई को ब्रिटिश म्यूजियम देखने इसी मंशा से पहुंचा कि सरस्वती प्रतिमा व कोहिनूर हीरे को देखा जाए। प्रतिमा ब्रिटिश म्यूजियम में है, जबकि कोहिनूर टॉवर ऑफ लंदन में है। म्यूजियम में मूर्तियां, आर्टिफेक्ट्स, हथियार व अन्य साजोसामान है तो टॉवर ऑफ लंदन में ब्रिटिश शासन का शाही आभूषण व साजो-सामान है। ALSO READ: London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

 

ब्रिटिश म्यूजियम में चीन व दक्षिण एशिया वाले भाग में भारत व पड़ोसी देशों की वस्तुएं हैं। यहां सरस्वती, अंबिका व विद्यादेवी की प्रतिमाएं पास-पास रखी हैं। इनके वर्णन भ्रम पैदा करने वाले तो हैं ही, वह अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति का एक और उदाहरण है। वहां जिस प्रतिमा पर अंबिका का होना लिखा है, उसके संक्षिप्त वर्णन में बताते हैं कि इसे हिंदू व जैन दोनों ही पूजते हैं। मूर्ति के एक हाथ में कलम स्पष्ट दिखती है, जो ज्ञान का प्रतीक है, जो देवी सरस्वती हैं। यह प्रतिमा 1909 में ब्रिटिश सेना के भारत स्थित तत्कालीन मेजर जनरल डब्ल्यू किनसाइ्ड ने दान की थी, जिन्हें भोजशाला से प्राप्त होना ही बताया है। वहां सभी कृतियों के साथ दान देना ही बताया गया है। 1961 में भारत के प्रख्यात पुरात्तवेत्ता डॉ.विष्णु श्रीधर वाकणकर ने ब्रिटिश म्यूजियम के भ्रमण के दौरान जिस मूर्ति को सरस्वती प्रतिमा सत्यापित किया था, वह यही है।

इसके ठीक पास एकसाथ दो मूर्तियां प्रदर्शित हैं। इनमें पहली को विद्यादेवी व दूसरी को सरस्वती लिखा है। विद्यादेवी के लिए लिखा है कि एक हाथ में कलम व नीचे उनका सेवक दवात लेकर खड़ा है। ये दोनों मूर्तियां राजस्थान से प्राप्त होना लिखा है। इस तरह से जन सामान्य अंबिका, सरस्वती व विद्यादेवी लिखा होने से भ्रमित होता रहता है कि आखिरकार वाग्देवी की मूर्ति कौन-सी है? जबकि इस बारे में डॉ. वाकणकर की दृष्टि और विवेचना पर कभी संदेह नहीं किया जा सकता। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

 

इस संबंध में दो उल्लेखनीय तथ्य सामने आए हैं। पहला तो यह कि तत्कालीन ब्रिटिश हाई कमिश्नर निकोसल फेन अक्टूबर 1992 के तीसरे हफ्ते में मांडव घूमने आए थे। तब धार कलेक्टर वीसी रावत थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे इस समय इंदौर में रह रहे हैं। रावत ने बताया कि अपनी प्रशासनिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मांडव विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष प्रेमप्रकाश खत्री को साथ लेकर वाग्देवी प्रतिमा लौटाने संबंधी पत्र हाई कमिश्नर को दिया था। उनकी ओर से मुझे ही संबोधित करते हुए 13 अप्रैल 1993 को उनका जवाब आया। उन्होंने लिखा था- आधुनिक भारतीय विद्वता मूर्ति की सरस्वती के रूप में पहचान पर सवाल उठाती है और सुझाव देती है कि इसके बजाय यह जैन देवी अंबिका हो सकती है। मैं निश्चित रूप से विद्वानों के गुणों को आंकने में काफी अक्षम हूं, लेकिन यह स्पष्ट है कि जब तक मूर्ति की पहचान विवादास्पद है, तब तक इसे वापस करने की कोई आशा नहीं है। यह दरअसल, बेहद कूटनीतिक और टालमटोल करने वाला जवाब ही था और उस व्याख्या से बिल्कुल अलग नहीं था, जो ब्रिटिश संग्रहालय में मूर्ति के साथ वर्णित है। ALSO READ: London Trip: सड़कें संकरी, फुटपाथ चौड़े, फिर भी जाम नहीं लगता

 

इस संबंध में दूसरा तथ्य मायने रखता है। ब्रिटिश इतिहासकार मेजर चार्ल्स एकफोर्ड लुआर्ड ने 1912 में एक पुस्तक लिखी है- धार एंड मांडू-ए स्कैच फॉर द साइट सीर (धार व मांडू-पर्यटकों, दर्शकों के लिए एक संक्षिप्त रूपरेखा)। इसका प्रकाशन इलाहाबाद के बिशंभर नाथ भार्गव ने स्टैंडर्ड प्रेस के तहत किया था। इसमें लुआर्ड ने तत्कालीन इतिहासकार के.के. लेले के निष्कर्षों से सहमत होते हुए लिखा- नक्काशीदार खंबे व नक्काशी वाली छतें जैसी निर्माण सामग्रियां स्पष्ट रूप से इस स्थान पर एक हिंदू मंदिर की ओर इशारा करती हैं, जिसे बाद में कमाल मौला मस्जिद के रूप में रूपांतरित किया गया। लुआर्ड ने इस स्थान पर मिली भौतिक खोजों को एक व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया। हालांकि बाद में विद्वानों ने यह स्पष्ट किया कि वाग्देवी की प्रतिमा वास्तव में भोजशाला के आंगन की बजाय पुराने महल के पास मलबे से बरामद की गई थी। जैसा कि मुगलों के इतिहास में अनेक घटनाएं बताती हैं कि वे मंदिरों को बुरी तरह ध्वस्त कर मूर्तियों को खंडित कर दिया करते थे। ऐसे में वाग्देवी की मूर्ति को कहीं फेंक देना सामान्य बात है।

 

चूंकि लुआर्ड ब्रिटिश मेजर थे और अध्ययन-लेखन में उनकी रुचि थी तो उन्होंने स्वयं धार, मांडू का भ्रमण कर तथ्य जुटाए थे, जो प्रामाणिक माने जा सकते हैं। साथ ही ब्रिटिश हाई कमिश्नर की ओर से तत्कालीन धार कलेक्टर को लिखा पत्र दर्शाता है कि ब्रिटेन सरकार की मंशा कभी-भी वाग्देवी प्रतिमा को लौटाने की नहीं रही। इसीलिए सरकार के प्रयास बेनतीजा रहने ही थे।

दरअसल, ब्रिटिश संग्रहालय अधिनियम 1963 में यह स्पष्ट उल्लेख है कि ब्रिटिश कॉलोनी (जिन देशों को गुलाम बनाकर वहां शासन किया, उसे ये कॉलोनी मानते हैं) में कहीं से भी लाई गई किसी भी कलाकृति या वस्तु को वापस नहीं किया जा सकता। यदि कोई भी सामग्री क्षतिग्रस्त हो गई हो या उसे संग्रह में रखना अनुपयुक्त हो तो ही इसे हटाया जा सकता है। वैसे ब्रिटेन का कानून अधिकतम तीन साल के लिए किसी वस्तु को संबंधित देश में ले जाकर प्रदर्शन की अनुमति देता है, लेकिन जैसा कि इस तरह के मामलों में होता है, यह अनुमति बेहद सीमित अपवाद स्वरूप ही दी जाती है। वह भी बेशकीमती वस्तुओं को छोड़कर। ब्रिटिश संस्कृति मंत्रालय इसके लिए अस्थायी निर्यात लाइसेंस देता है, वह भी भारी-भरकम गारंटी के बाद।

 

इस संग्रहालय से अभी तक किसी वस्तु को वापस किए जाने का कहीं उल्लेख नहीं मिलता है। इस बारे में मई 2019 में ब्रिटिश सरकार के तत्कालीन संस्कृति सचिव जेरेमी राइट ने एक साक्षात्कार में बेहद स्पष्ट रूप से कहा था कि लूटे हुए आर्टिफेक्ट्स को यदि पुनर्स्थापित करने के लिए उनके मूल देशों को लौटाना प्रारंभ कर दें तो दुनिया में ऐसा एक भी स्थान नहीं रहेगा, जहां कोई भी व्यक्ति ये सारी चीजें एकसाथ देख सके। उन्होंने यह भी कहा था कि ब्रिटेन सरकार ऐसा कोई भी संशोधन करने नहीं जा रही।

 

ब्रिटिश म्यूजियम में दुनिया भर से लाई गई 80 लाख से अधिक वस्तुएं संग्रहित हैं। इनमें से चुनिंदा ही प्रदर्शित हैं, शेष अध्ययन के लिए हैं या उनका भंडारण किया गया है। ये वस्तुएं 6 महाद्वीपों से लाई गई थीं, जिनमें भारत, मिस्र, ग्रीस, इटली, चीन, इराक, इरान, नाइजीरिया, पेरू प्रमुख हैं। इस विशाल संग्रह के आधार पर मानव सभ्यता का प्राचीन इतिहास पता चलता है। इनमें आदिम युग के औजार, उपयोग की वस्तुएं, चित्र, मूर्तियां, घरेलू कामकाज की चीजें शामिल हैं।  

 

इसी तरह से टॉवर ऑफ लंदन में कोहिनूर हीरे को भी देखा, जिसे लेकर कोई संशय कभी रहा ही नहीं। उसकी छंटा वाकई निराली है। 105 कैरेट के इस हीरे को देखकर मन नहीं भरता। वैसे यह 185 कैरेट का था, जिसकी आभा कमजोर होने पर फिर से तराशा तो यह 105 कैरेट का रह गया। इसे 1850 में भारत की गोरी हुकूमत ने ब्रिटेन महारानी विक्टोरिया को भेंट किया था। इस गैलरी में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी नहीं की जा सकती। वहां ब्रिटिश राजशाही समेत अनेक देशों के राजमुकुट प्रदर्शित हैं, जिनके बारे में यह भी बताया जाता है कि कब किस राजा या महारानी ने किसे कब राज्यारोहण के समय पहना था।

इन्हें मद्धिम रोशनी में ही निहारा जा सकता है। यहां गोरी हुकूमत ने शासित देशों से लूटे हुए राजशाही के खजानों के अलावा ब्रिटेन के तमाम महाराजा-महारानियों के वे बेशकीमती आभूषण, रत्न भी हैं, जो वे अपने राजतिलक, शादी, समारोहों में उपयोग करते रहे हैं। साथ ही सोने का राजदंड, स्वर्ण मंडित व अनमोल रत्नों से सजी तलवारें और अनगिनत राजशाही की प्रतीक वस्तुएं भी हैं। जिनमें स्वर्ण क्रॉकरी, भोजन परोसने के स्वर्ण बर्तन, बड़े आकार के शो पीसेस भी वहां हैं। इस संग्रहालय में दुनिया भर से लाए गए अत्यंत नायाब, महंगे व अनोखी छंटा वाले 23 हजार 678 रत्न संग्रहित हैं। इनमें भारत व अफ्रीका से लाए रत्नों की तादाद अधिक है। कोहिनूर समेत अन्य बेशकीमती खजाने की जानकारी देने वाली स्लाइड भी चलती रहती है।

 

गुजरात के ऊंझा जीरा और सौंफ को मिला GI टैग, किसानों की आय में 20% से 30% तक बढ़ोतरी की संभावना

Gujarat's agricultural products Unjha Cumin and Fennel receive GI tags

गुजरात के 2 प्रमुख कृषि उत्पादों, ऊंझा जीरा (Cumin) और ऊंझा सौंफ (Fennel) को भौगोलिक संकेत (GI) रजिस्ट्री द्वारा आधिकारिक तौर पर 'जीआई टैग' प्रदान किया गया है। इस महत्वपूर्ण मान्यता से इन विशेष मसालों को कानूनी सुरक्षा और एक नई पहचान मिली है, जिससे इनकी वैश्विक निर्यात क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। यह टैग मिलने से उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंझा के मसालों की साख और अधिक मजबूत होगी।

 

किसानों की आय में 20% से 30% तक की बढ़ोतरी संभव

राज्य सरकार के अनुसार, जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की बाजार कीमत सामान्य उत्पादों की तुलना में 20% से 30% अधिक होती है। इस ऐतिहासिक फैसले से मसाले उगाने वाले स्थानीय किसानों के लिए बेहतर आर्थिक अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की ग्रामीण तथा कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी।

 

प्रधानमंत्री के विजन और गुणवत्ता की जीत : मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल से ग्लोबल' विजन का सीधा परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसानों के समर्पण, गुणवत्ता और ऊंझा की समृद्ध परंपरा का प्रमाण है, जो गुजरात को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत कृषि ब्रांड के रूप में स्थापित करेगा।

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जीआई टैग का कानूनी संरक्षण और नकली उत्पादों पर रोक

भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत केवल विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र की विशेषताओं वाले उत्पादों को ही यह टैग दिया जाता है। यह प्रमाण पत्र ऊंझा के जीरा और सौंफ की भौगोलिक प्रामाणिकता को सुरक्षित करता है तथा बाजार में बिकने वाले नकली या मिलावटी उत्पादों के खिलाफ मजबूत कानूनी ढाल प्रदान करता है।

 

वैश्विक विश्वसनीयता और वैल्यू एडिशन के नए अवसर

सरकार का मानना है कि जीआई टैग मिलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ऊंझा के मसालों की विश्वसनीयता काफी बढ़ जाएगी। इस मान्यता से न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कृषि-आधारित नए उद्योगों, प्रसंस्करण (Processing) और वैल्यू एडिशन (Value Addition) के नए रास्ते भी खुलेंगे।

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विभिन्न संस्थाओं और एपीएमसी का संयुक्त प्रयास

जीआई टैग प्राप्त करने की इस आवेदन प्रक्रिया को ऊंझा एपीएमसी (APMC), गुजरात सरकार के बागवानी विभाग, सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (SDAU), EDII और केंद्र सरकार द्वारा पूरा समर्थन दिया गया था। इन सभी संस्थाओं के समन्वित और निरंतर प्रयासों के कारण ही यह सफलता संभव हो सकी है।

 

मसाला व्यापार के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर : दिनेश पटेल

ऊंझा एपीएमसी के चेयरमैन दिनेश पटेल ने इस मान्यता को किसानों और व्यापारियों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इससे उत्पादों की बाजार साख बढ़ेगी, वैश्विक मांग में उछाल आएगा और किसानों को उनकी फसलों का उचित और बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

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गुजरात के जीआई-टैग वाले कृषि उत्पादों का दायरा बढ़ा

ऊंझा जीरा और सौंफ के शामिल होने से गुजरात के जीआई-टैग प्राप्त कृषि उत्पादों की सूची और समृद्ध हो गई है। इससे पहले गिर केसर आम, भालिया गेहूं, कच्छी खारक (खजूर) और अमलसाडी चीकू को यह टैग मिल चुका है, जो राज्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को लगातार बढ़ा रहा है।

जंतर-मंतर पर भारी छात्र प्रदर्शन: दिल्ली में 16 मेट्रो स्टेशन बंद, जानें अभी क्या हाल है

cjp protest jantar mantar

CJP Protest : नीट (NEET) परीक्षा और व्यापक शिक्षा सुधारों के मुद्दे पर आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों का विशाल विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर हैं, वहीं सुरक्षा कारणों से राजीव चौक और पटेल चौक समेत आसपास के 16 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश व निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।

 

सुरक्षा व्यवस्था और मेट्रो अपडेट 

दिल्ली मेट्रो ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आगामी आदेश तक इन मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज सुविधा चालू रहेगी। इन मेट्रो स्टेशनों को किया बंद डीएमआरसी ने लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्‍ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ और जनपथ स्टेशन बंद रखने का पैसला किया है। साथ ही मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम स्टेशन भी बंद रहेंगे। ALSO READ: CJP Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच दिल्ली मेट्रो ने 16 स्टेशन किए बंद, सफर से पहले जरूर देखें पूरी लिस्ट
 

DMRC का बयान: “यात्रियों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए पुलिस प्रशासन के सुझाव पर ये कदम उठाए गए हैं। इंटरचेंज सुविधाएं सामान्य रूप से चालू हैं।

 

दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी: दिल्ली पुलिस के अनुसार, लुटियंस दिल्ली और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है तथा ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है ताकि आम जनता को कम से कम असुविधा हो।

 

क्या हैं प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें?

प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों और युवा प्रतिनिधियों ने शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार के समक्ष मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग: परीक्षा संचालन में हुई अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

पारदर्शी परीक्षा प्रणाली: एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और भविष्य में होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फुल-प्रूफ और पारदर्शी व्यवस्था लागू करना।

शिक्षा बजट में वृद्धि: उच्च शिक्षा के लिए सरकारी बजटीय आवंटन बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की मांग।

काउंसलिंग प्रक्रिया पर स्पष्टता: प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए त्वरित न्याय और स्पष्ट टाइमलाइन के साथ काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करना। ALSO READ: CJP Protest: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए देशभर से पहुंच रहा खाना, अनजान लोगों ने भेजे सैकड़ों फूड ऑर्डर

 

ग्राउंड रिपोर्ट और मुख्य प्रतिक्रियाएं

प्रदर्शनकारी छात्र प्रतिनिधि का बयान: “यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास की है। जब तक ठोस और पारदर्शी कदम नहीं उठाए जाते, हमारा शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।”

 

सरकारी पक्ष का रुख: सरकार और शिक्षा मंत्रालय की ओर से पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका है कि छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उच्च स्तरीय समिति का गठन कर परीक्षा सुधारों पर काम शुरू किया जा चुका है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

CJP Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच दिल्ली मेट्रो ने 16 स्टेशन किए बंद, सफर से पहले जरूर देखें पूरी लिस्ट

Delhi Metro :  16 station closed due to CJP Protest

CJP Protest : जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध के चलते दिल्ली मेट्रो ने सुरक्षा कारणों से 16 स्टेशनों को बंद करने का फैसला किया है। इस वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ALSO READ: CJP Protest: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए देशभर से पहुंच रहा खाना, अनजान लोगों ने भेजे सैकड़ों फूड ऑर्डर

 

दिल्ली मेट्रो ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आगामी आदेश तक इन मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज सुविधा चालू रहेगी।

 

इन मेट्रो स्टेशनों को किया बंद

डीएमआरसी ने लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्‍ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ और जनपथ स्टेशन बंद रखने का पैसला किया है। साथ ही मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम स्टेशन भी बंद रहेंगे। 

डीएमआरसी की यात्रियों से अपील

डीएमआरसी की ओर से यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मेट्रो की नवीनतम जानकारी जरूर जांच लें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। डीएमआरसी की ओर से अगले निर्देश जारी होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। ALSO READ: CJP Protest : दिल्ली में झड़प के बीच गुरुद्वारा बंगला साहिब बना सहारा, घायल प्रदर्शनकारियों और राहगीरों को मिली मदद

 

गौरतलब है कि 2 दिन पहले भी प्रदर्शनकारियों के जंतर मं‍तर से संसद मार्च के दौरान 5 मेट्रो स्टेशन राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ को बंद कर दिया गया था।

ट्रंप का बड़ा फैसला! जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ से भारत की फार्मा इंडस्ट्री को कितना होगा नुकसान?

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में अगस्त 2028 से विदेश से आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका के भीतर कराना है। भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। ऐसे में इस फैसले का भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है।

 

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा कि 1 अगस्त, 2026 से, यूनाइटेड स्टेट्स में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर दो साल के लिए जीरो परसेंट टैरिफ लगा रहेगा। इसके बाद टैरिफ एक साल के लिए 100% और उसके बाद 200% हो जाएगा।

 

अमेरिकी राष्‍ट्र‍पति ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि जेनेरिक दवाओं का उत्पादन फिर से अमेरिका में शुरू हो। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में कारखाने और जरूरी उपकरण नहीं लगाएंगी, उन्हें इस नीति के तहत दंड का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पेटेंट वाली, ब्रांडेड और नई दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और वह पहले की तरह जारी रहेगी।

 

क्या होगा भारत पर असर : 

1. दवा निर्यात को बड़ा झटका: अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है। भारत हर साल अमेरिका को लगभग 9-10 अरब डॉलर की जेनेरिक दवाएं निर्यात करता है। 200% टैरिफ लगने से भारतीय दवाएं अमेरिकी बाजार में काफी महंगी हो जाएंगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कम हो सकती है।

 

2. फार्मा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव : सबसे अधिक असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता ज्यादा है। इनमें Sun Pharma, Dr. Reddy's Laboratories, Cipla, Lupin, Aurobindo Pharma, Zydus। इसी आशंका के चलते घोषणा के बाद इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट भी देखी गई।

 

3. अमेरिका में फैक्ट्री लगा सकती है भारतीय कंपनियां : भारतीय कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री लगाने पर मजबूर हो सकती हैं। कई भारतीय दवा कंपनियां टैरिफ से बचने के लिए अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने या नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने पर विचार कर सकती हैं।

 

4. अमेरिकी मरीजों पर भी असर : भारत दुनिया की सस्ती जेनेरिक दवाओं का बड़ा आपूर्तिकर्ता है। यदि इन दवाओं पर भारी टैरिफ लगता है, तो अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और मरीजों का खर्च भी बढ़ सकता है।

 

मौजूदा घोषणा के अनुसार यह योजना चरणबद्ध है। पहले दो वर्षों तक टैरिफ शून्य रहेगा, इसके बाद पहले 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। इससे भारतीय कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने, वैकल्पिक बाजार तलाशने या अमेरिका में निवेश बढ़ाने का समय मिल सकता है।