Sonam Wangchuk : अनशन खत्म करने को तैयार सोनम वांगचुक, सरकार के सामने क्या शर्त रखी

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े प्रदर्शन के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार यह भरोसा देती है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। विपक्षी सांसदों का एक डेलीगेशन एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मिलने मेदांता हॉस्पिटल पहुंचा ताकि उनसे अनिश्चितकालीन अनशन तोड़ने की अपील की जा सके।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और पुलिस से मांगा जवाब

इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग के मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की है। हाईकोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है।

 

याचिकाकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बिना किसी चेतावनी के पुलिस ने बल प्रयोग किया। साथ ही आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान किनारे खड़ी एक महिला के साथ अतिरिक्त डीसीपी संदीप लांबा ने कथित तौर पर मारपीट की। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से संबंधित अधिकारी को तलब करने की भी मांग की।

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दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

दिल्ली पुलिस ने अदालत में याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि कथित शांतिपूर्ण प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया था। पुलिस के अनुसार, कई वीडियो में पुलिसकर्मियों के घायल होने और भीड़ द्वारा पथराव किए जाने के दृश्य मौजूद हैं। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

 

संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प

सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगों को लेकर 'संसद चलो' मार्च निकाला था। मानसून सत्र के पहले दिन जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे, तब भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

सरकार से बातचीत को तैयार CJP

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बुधवार को CJP ने कहा कि वह सरकार से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए। संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि वे किसी मंत्री के कार्यालय या आवास पर नहीं जाएंगे। बातचीत जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान, जैसे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, में हो सकती है। CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी पुष्टि की कि इस संबंध में पुलिस की ओर से उनसे संपर्क किया गया है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जल्द ही CJP के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर सकते हैं।

लड़कियों से छेड़छाड़, प्राइवेट पार्ट पर बरसाई लाठी, CJP के के आरोपों पर हाईकोर्ट ने केन्द्र से मांगा जवाब

CJP Sansad March Delhi High Court: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो मार्च' और लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के मुद्दे पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जोरदार बहस हुई। प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश हुए देश के दिग्गज वकीलों ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर और रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए। वकीलों ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस ने बर्बरता की, छात्राओं से छेड़छाड़ की गई और उनके प्राइवेट पार्ट्स पर लाठियां मारी गईं। 

 

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। ALSO READ: CJP Protest: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए देशभर से पहुंच रहा खाना, अनजान लोगों ने भेजे सैकड़ों फूड ऑर्डर

 

सीजेपी द्वारा 20 जुलाई को निकाले गए 'संसद चलो मार्च' के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई का मामला अब अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के समक्ष जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और पुलिस को कड़े सवालों का सामना करना पड़ा।

क्या है याचिकर्ताओं की दलील?

याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरण, विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में पैरवी की। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को बड़ी संख्या में युवा और छात्र-छात्राएं संसद मार्च के लिए एकत्र हुए थे। प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था, लेकिन सिविल कपड़ों में आए कुछ लोगों और पुलिस ने मिलकर प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। ALSO READ: CJP protest Photos : CJP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 10 तस्वीरें, देखें पूरे दिन क्या हुआ

 

वरिष्ठ वकील एन. हरिहरण ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कीलों वाली लाठियों, पेलेट गन और इलेक्ट्रिक लाठियों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कम से कम 90 छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

 

छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार : कोर्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा करते हुए हरिहरण ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के साथ पुलिसकर्मियों ने छेड़छाड़ की। वीडियो फुटेज में पुलिसकर्मी छेड़छाड़ करते और छात्र-छात्राओं के प्राइवेट पार्ट्स पर लाठियां मारते दिख रहे हैं। यह बेहद भयानक है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत से इन घटनाक्रमों की वीडियो फुटेज देखने का अनुरोध किया और मामले की जांच दिल्ली पुलिस के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) से कराने तथा दोषी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

क्या कहा सरकार ने?

दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। ASG राजू ने कहा कि इस बात के पर्याप्त वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ हिंसक हो गई थी और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया। उन्होंने दलील दी कि उपद्रवियों ने पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की और कई पुलिसकर्मी इस झड़प में घायल हुए हैं। सरकार का कहना था कि अक्सर शांतिपूर्ण आंदोलनों को असामाजिक तत्व हाईजैक कर लेते हैं। जहां भी कानून का उल्लंघन हुआ है, वहां नियमानुसार FIR दर्ज की जा रही है।

अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस की पीठ ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मिस्टर राजू, यदि यह गैर-कानूनी जमावड़ा था, तो इससे कैसे निपटना है, इसको लेकर स्पष्ट कानून और रामलीला मैदान मामले पर सुप्रीम कोर्ट का दिशा-निर्देश मौजूद है। यदि जनहित याचिका में इस तरह के गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं, तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि सभी पीड़ितों को अलग-अलग एफआईआर करानी चाहिए?

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की गई है। इसी के साथ अदालत ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका को विचार योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।

करें सभी इंतजाम, जलभराव की समस्या बर्दाश्त नहीं : मुख्यमंत्री

CM Yogi Adityanath Gorakhpur

CM Yogi Adityanath Gorakhpur: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को चेतावनी है कि महानगर में किसी भी दशा में जलभराव की समस्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि नाले, नालियों की बड़े पैमाने पर सफाई कराने और बारिश होने पर अधिकाधिक पंपों का संचालन सुनिश्चित करते हुए ध्यान रखा जाए कि कहीं भी जलभराव न होने पाए। जलभराव की समस्या के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता पाए जाने पर जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

 

सीएम योगी बुधवार दोपहर एनेक्सी भवन सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले के विकास कार्यों, बाढ़ बचाव और जलनिकासी की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उनका सर्वाधिक जोर जलनिकासी को लेकर रहा। उन्होंने दो टूक कहा-‘जो भी जरूरी तैयारी या व्यवस्थाएं करनी हैं, उन्हें सुनिश्चित किया जाए, कहीं भी और किसी भी दशा में जलभराव नहीं दिखना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नाले, नालियों की नियमित सफाई कराकर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को रोका जाए ताकि इससे नाले चोक न होने पाएं। मुख्यमंत्री ने समझाया कि हमें मौसम के प्रभाव के अनुसार खुद को तैयार रखना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नाला निर्माण और मरम्मत के प्रस्ताव समय से लेकर समयबद्ध तरीके से काम पूरा किया जाए। सभी अधिकारी, कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें और कहीं भी नकारात्मक वातावरण न बनने दें।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महानगर के राप्ती कॉम्प्लेक्स, गोरक्ष एंक्लेव, विजय चौराहा तथा धर्मशाला आदि पर हुए जलभराव की जानकारी ली और कहा कि नालों की नियमित रूप से सफाई के बाद उन्हें ढका जाए। नगर निगम के सभी पंप पूरी क्षमता से संचालित किए जाएं। उन्होने कहा कि इन व्यवस्थाओं के साथ ही लोगों को प्रेरित किया जाए कि वह कूड़ा नालियों में न डालें। स्वच्छता के लिए कार्यक्रम चलाया जाए, साथ ही नियमित छिड़काव एवं फागिंग कराई जाए। सीएम ने कहा कि स्वच्छता के कार्यक्रम में अधिकाधिक जनसहभगिता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। टीम बना कर हर वार्ड, मलिन बस्तियों, खाली प्लाटों की सफाई कराई जाए और कूड़ा निस्तारण सही से किया जाए।

 

सीएम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छता अभियान चलाया जाए और इसे रूटीन के कार्यों का हिस्सा बनाया जाए। स्वच्छता के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाए। शासकीय भवनों में भी सफाई  पर ध्यान दिया जाए। उन्होने स्ट्रीट वेंडर्स को व्यवस्थित करने, स्ट्रीट लाइटों को ठीक रखने और सभी सीसीटीवी को अद्यतन रखने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसहारा गोवंश सडको पर न रहें।

 

उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि डॉग सड़कों पर न रहें। उनके लिये डॉग शेल्टर बनाया जाए। सीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त संख्या मे एंटी स्नैक वेनम और एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध रहे। 
 

बाढ़ से बचाव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी तैयारियां पूर्ण रहनी चाहिए। तटबंधों की सुरक्षा के लिए नियमित पैट्रोलिंग हो। बाढ़ चौकियां सक्रिय रहें और बाढ़ राहत केंद्रों पर व्यवस्था अच्छी रहे। उन्होने कहा कि बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों में बीमारियों से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरती जाएं। सड़कें क्षतिग्रस्त न रहने पाएं।

योगी सरकार ‘नेचुरल बायो-इकोनॉमी मॉडल’ से बदल रही वनवासी महिलाओं का जीवन

Women Self Employment: जंगल अब सिर्फ आजीविका का साधन ही नहीं बल्कि वनवासी महिलाओं की आर्थिक आजादी की नई पहचान बन रहा है। योगी सरकार के 'नेचुरल बायो-इकोनॉमी मॉडल' ने स्थानीय संसाधनों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलकर वन क्षेत्रों की महिलाओं के लिए रोजगार और सम्मान के नए रास्ते खोल दिए हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए महिलाएं अब बकरी के दूध के साथ नीम, एलोवेरा, हल्दी, चंदन और मोरिंगा जैसे प्राकृतिक अवयवों से हर्बल साबुन तैयार कर रही हैं, जो स्थानीय बाजार से निकलकर दूर-दराज के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश का यह मॉडल 'जंगल से बाजार' की अवधारणा को जमीन पर उतार रहा है। इसका सबसे सफल उदाहरण सोनभद्र जिले के विकास खंड रॉबर्ट्सगंज के ग्राम साजौर का बजरंगबली स्वयं सहायता समूह है। यहां की महिलाएं बकरी के दूध से तैयार हर्बल साबुन बनाकर न केवल अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रही हैं।

50 से 60 हजार रुपये की हर माह बिक्री

बजरंगबली स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 10 से अधिक महिलाएं नियमित रूप से हर्बल साबुन का उत्पादन करती हैं। समूह के जरिए महिलाएं हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक के उत्पाद बेच रही हैं। इससे प्रत्येक महिला को 8 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आय हो रही है। यह आय उनके परिवार की आर्थिक मजबूती के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन स्तर का आधार बन रही है।

प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ रही पहचान

समूह द्वारा तैयार किए जा रहे साबुन में बकरी के दूध के साथ नीम, एलोवेरा, हल्दी, चंदन और मोरिंगा जैसे प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाता है। इन उत्पादों को त्वचा के लिए सुरक्षित और पोषक विकल्प के रूप में बाजार में पहचान मिल रही है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले ये उत्पाद प्राकृतिक जीवनशैली की बढ़ती मांग के बीच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रहे हैं।

ग्रामीण आजीविका मिशन बना बदलाव का आधार

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे वनवासी और ग्रामीण महिलाएं केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सीख रही हैं, बल्कि उन्हें बाजार से जोड़कर स्थायी आय का स्रोत भी मिल रहा है। योगी सरकार का उद्देश्य स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम मूल्य संवर्धन कर गांवों में ही रोजगार के अवसर तैयार करना है, जिसका बजरंगबली स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ये महिलाएं सशक्त उदाहरण हैं।

 

Rahul Gandhi : राहुल गांधी के दिल्ली धरने के विरोध में भोपाल में बीजेपी का प्रदर्शन, कांग्रेस कार्यालय का किया घेराव

भोपाल। दिल्ली में पीएम आवास पर मंगलवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के प्रदर्शन के विरोध में बुधवार को भोपाल में भाजपा ने कांग्रेस कार्यलय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवार की अगुवाई में रेडक्रॉस अस्पताल से कांग्रेस कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला गया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता विरोध मार्च में शामिल हुए। पुलिस बैरिकेडिंग तक पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।

 

इस दौरान हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय अराजकता और देशविरोधी दुष्प्रचार की राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास फैलाने और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने को अपनी राजनीति का हिस्सा बना चुके हैं तथा सत्ता की लोलुपता में देश के सम्मान और राष्ट्रहित को भी दांव पर लगाने से नहीं चूकते।

भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि भाजपा राष्ट्रहित, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार युवाओं के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जबकि विपक्ष छात्रों का उपयोग अपनी तुच्छ राजनीति के लिए कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार हर विषय पर सार्थक चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष संवाद के बजाय अराजकता की राजनीति में विश्वास रखता है। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी से विदेशों में भारत की छवि पर सवाल उठाने को लेकर जवाब मांगा और कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन देश और संस्थाओं को बदनाम करने का अधिकार किसी को नहीं है।

 

राहुल गांधी झूठा नैरेटिव गढ़ते है-भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि कांग्रेस की उस सोच और राजनीति के खिलाफ है, जो लोकतंत्र को कमजोर करने, समाज में वैमनस्य फैलाने और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का निरंतर प्रयास कर रही है। कांग्रेस को देश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि राहुल गांधी बार-बार विदेशी मंचों पर भारत, भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं और न्याय व्यवस्था पर सवाल क्यों उठाते हैं? आखिर किसके हित में वे भारत की उपलब्धियों को नकारने और देश के विरुद्ध झूठा नैरेटिव गढ़ने का प्रयास करते हैं? जनता उन्हें कई बार नकार चुकी है, लेकिन वे अपनी राजनीतिक विफलताओं का दोष देश की संस्थाओं पर मढ़ने का असफल प्रयास कर रहे हैं।

 

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अगर आप कम बजट में नई बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। हीरो मोटोकॉर्प ने अपनी लोकप्रिय कम्यूटर बाइक HF Deluxe Canvas Black Edition की कीमत में बड़ी कटौती की है। कंपनी ने इस वेरिएंट की कीमत  7,635 रुपए कम कर दी है। अब यह बाइक  67,634 रुपए की बजाय 59,999रुपए (एक्स-शोरूम) में उपलब्ध है। खास बात यह है कि इसकी नई कीमत जून 2023 की लॉन्च कीमत  60,760 रुपए से भी कम है।

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हालांकि, यह ऑफर फिलहाल पूरे देश में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। यदि आप इन राज्यों में रहते हैं और नई बाइक खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह ऑफर आपके लिए बचत का अच्छा मौका हो सकता है।

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कंपनी ने कीमत घटाने की आधिकारिक वजह नहीं बताई है, लेकिन ऑटो सेक्टर के जानकारों के मुताबिक 100cc सेगमेंट में बढ़ते मुकाबले और हाल के महीनों में बिक्री में आई गिरावट इसकी बड़ी वजह हो सकती है। इस सेगमेंट में Honda Shine 100, Bajaj Platina 100 और TVS Sport जैसी बाइकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है।

 

राहत की बात यह है कि कीमत कम होने के बावजूद बाइक के इंजन, फीचर्स और क्वालिटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी ग्राहकों को पहले जैसे ही फीचर्स और परफॉर्मेंस मिलेगी, लेकिन कम कीमत पर।

योगी सरकार में यूपी बना देश का इलेक्ट्रॉनिक्स पावरहाउस, 65% मोबाइल और 55% इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का हो रहा उत्पादन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में  अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। कभी इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के मामले में सीमित पहचान रखने वाला उत्तर प्रदेश आज देश में बनने वाले लगभग 65 प्रतिशत मोबाइल फोन का उत्पादन कर रहा है। यही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण में भी प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत तक  पहुंच चुकी है। इस उपलब्धि ने उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर दिया है। 

 

नोएडा और ग्रेटर नोएडा को केंद्र बनाकर विकसित हुए औद्योगिक इकोसिस्टम ने इस परिवर्तन में सबसे अहम भूमिका निभाई है।  यहां सैमसंग, ओप्पो, वीवो और एलजी जैसे वैश्विक ब्रांड्स बड़े पैमाने पर मोबाइल निर्माण कर रहे हैं। इनके साथ डिक्सन  टेक्नोलॉजीज, ऑप्टिमस, पैडजेट इलेक्ट्रॉनिक्स, जेटॉन (जेटवर्क) और भगवती प्रोडक्ट्स (माइक्रोमैक्स) जैसे प्रमुख ओरिजिनल  इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) और ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर्स (ओडीएम) भी संचालित हैं। इससे उत्तर प्रदेश न केवल  भारत की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। 

 

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उत्पादन का भी सबसे बड़ा केंद्र बना यूपी 

 

मोबाइल निर्माण के साथ-साथ प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उत्पादन का भी सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। सैमक्वांग (Samkwang),  होलीटेक (Holitech), केएचवाई (KHY), ख्वाटेक (Khvatec), मिंडा कॉर्पोरेशन (Minda Corporation), जेवर्ल्ड (JWorld), शिनसंग  सीएंडटी (Shinsung C&T), सनवोडा (Sunwoda) और ड्रीमटेक (Dreamtech) जैसी कंपनियां पीसीबीए, डिस्प्ले, कैपेसिटर और  अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट तैयार कर रही हैं। वहीं हायर (Haier) और पैनासोनिक जैसी कंपनियां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में  अपने निवेश का लगातार विस्तार कर रही हैं। इससे उत्तर प्रदेश का औद्योगिक आधार पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत  हुआ है। इस सफलता के पीछे योगी सरकार की उद्योग और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां प्रमुख कारण मानी जा रही  हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2017, उसके बाद वर्ष 2020 एवं 2022 में किए गए संशोधन तथा उत्तर प्रदेश  इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में 75 से अधिक कंपनियों द्वारा 28 हजार  करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया है। यही नहीं, उत्तर प्रदेश ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भी बड़ी छलांग  लगाते हुए 32,146 करोड़ रुपये के स्वीकृत निवेश हासिल किए हैं। इनमें जेवर के निकट स्थापित होने वाला एचसीएल-फॉक्सकॉन  डिस्प्ले ड्राइवर चिप प्लांट सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है, जो भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को नई मजबूती  देगा। 

 

वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात मानचित्र पर तेजी से उभरा प्रदेश 

प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2015 में जहां इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग नगण्य था, वहीं वित्तीय वर्ष  2022-23 में यह बढ़कर 2.58 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का 16.65 प्रतिशत  है। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में केवल स्मार्टफोन निर्यात ही 17.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह वृद्धि उत्तर  प्रदेश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात मानचित्र पर तेजी से उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करती है। औद्योगिक विकास के  साथ-साथ राज्य का डिजिटल इकोसिस्टम भी लगातार मजबूत हुआ है। प्रदेश में 1.85 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर  (सीएससी) संचालित हैं, जहां 314 से अधिक ई-गवर्नेंस सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं 24 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन  उपयोगकर्ताओं का विशाल उपभोक्ता आधार घरेलू मांग को नई गति दे रहा है। विश्वस्तरीय सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क, बेहतर  लॉजिस्टिक्स, कुशल मानव संसाधन और निवेश-अनुकूल माहौल के कारण नोएडा आज मोबाइल फोन, एलईडी टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स  कंपोनेंट, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और लिथियम-आयन बैटरी निर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 

 

अब इंडस्ट्री 4.0 में निवेश को दिया जा रहा बढ़ावा

 

भविष्य की तकनीकों को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, ड्रोन,  ऑटोमेशन और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे इंडस्ट्री 4.0 क्षेत्रों में निवेश को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। सरकार का मानना है कि  इन पहलों से प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, वैश्विक कंपनियों का निवेश बढ़ेगा और उत्तर प्रदेश न केवल  भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का नेतृत्व करेगा, बल्कि देश को वैश्विक प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

Share Bazaar में भारी गिरावट, Sensex 715 अंक लुढ़का, Nifty भी 24000 के नीचे

Indian stock market falls for third consecutive day on Wednesday

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी करीब एक फीसदी तक लुढ़क गए। कच्चे तेल के दामों में तेज उछाल और बैंक शेयरों में भारी बिकवाली इसकी मुख्य वजह रही। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92 प्रतिशत लुढ़ककर 76755.05 अंक पर बंद हुआ, कारोबार के दौरान एक समय यह 828.92 अंक लुढ़ककर 76641.19 अंक पर आ गया था। इसी तरह एनएसई निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79 प्रतिशत टूटकर 23996.25 अंक पर आ गया।

भारतीय सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में आज बढ़त देखने को मिली है। आज 24 कैरेट सोना महंगा होकर 1.43 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है और चांदी की बात करें तो यह 2.26 लाख रुपए प्रति किलो बिक रही है। सेंसेक्स की कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, इन्फोसिस, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक में प्रमुख रूप से गिरावट आई।

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मानक सूचकांक पर पूरे सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा। वैश्विक तेल मानक, ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.68 प्रतिशत चढ़कर 95.27 डॉलर प्रति बैरल हो गई। एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का शंघाई कंपोजिट बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्की और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे।

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इससे पहले यानी मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 238.41 अंक यानी 0.31 फीसदी लुढ़ककर 77470.11 पर बंद हुआ, वहीं एनएसई का निफ्टी 50.80 अंक यानी 0.21 फीसदी टूटकर 24187.70 के स्तर पर आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 1121 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

योगी सरकार का बड़ा दावा, 9 साल में खनन से 30,000 करोड़ रुपए से ज्यादा राजस्व, अवैध खनन पर सख्ती का दिखा असर

योगी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर प्रमुखता से काम कर रही है। सरकार प्रशासन में  पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित जांच व  सख्त कार्रवाई पर जोर दिया जा गया। इसके चलते राज्य के खजाने में बढ़ोतरी हो रही है। उत्तर प्रदेश का भूतत्व एवं खनिकर्म  विभाग इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। विभाग में योगी सरकार के 9 वर्षों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का  राजस्व प्राप्त हुआ है। यह सपा सरकार के कार्यकाल में महज 4,700 करोड़ रुपये तक सीमित था। वहीं योगी सरकार में विभाग ने  प्रदेश में 66 अवैध खनन क्षेत्रों की पहचान कर कार्रवाई की।

 

उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल राजस्व वृद्धि तक  सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शी नीलामी, आधुनिक तकनीक के उपयोग, अवैध खनन पर सख्ती, डिजिटल सेवाओं के विस्तार व  प्रभावी निगरानी व्यवस्था के कारण संभव हो सकी है। विभाग की प्राथमिकता है कि हर स्तर पर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए,  जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ सके।

 

सपा सरकार के मुकाबले कई गुना अधिक बढ़ा राजस्व

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल में खनन से कुल 4,700 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त  हुआ था, जबकि वर्ष 2017 से 2026 के बीच योगी सरकार के 9 वर्षों में यह बढ़कर 30,524 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस प्रकार  योगी सरकार में खनन राजस्व में गुना ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए सरकार की 'जीरो  टॉलरेंस' की नीति का प्रमुखता से पालन किया गया। 

 

राजस्व बढ़ोतरी के प्रमुख कारण

 

अवैध खनन पर तकनीकी निगरानी

अवैध खनन पर प्रभावी कार्यवाही के लिए निदेशालय में नई तकनीक पर आधारित पीजीआरएस प्रयोगशाला की स्थापना की गई।  इस प्रयोगशाला में गूगल अर्थ की मदद से लगातार जांचकर अब तक 66 स्थानों पर अवैध खनन का पता लगाकर तत्काल  कार्रवाई सुनिश्चित की गई। इस कार्रवाई से 2.19 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके साथ अवैध खनन से जुड़े  अपराधियों का नेटर्वक भी खत्म किया गया।

 

पारदर्शी नीलामी से बढ़ा राजस्व, पोर्टल से बढ़ी पारदर्शिता

वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक प्रमुख खनिजों के 10 ब्लॉकों का कंपोजिट लाइसेंस व 3 ब्लॉकों की खनन पट्टों की सफल  ई-नीलामी कर आवंटन किया गया, जिससे राजस्व के नए स्रोत विकसित हुए। इसके साथ खनिज संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन  करते हुए यूपी माइन मित्र पोर्टल विकसित किया गया। इसके माध्यम से 10 प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं। लाखों  आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण किया गया, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।

 

आईएमएसएस से अवैध परिवहन पर नियंत्रण

इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (आईएमएसएस), जियो-फेंसिंग, आएफआईडी टैग, एआई एवं आईओटी आधारित चेकगेट और  ई-नोटिस प्रणाली लागू कर अवैध खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। साथ ही खनिज परिवहन के लिए  वीटीएस प्रणाली, जीपीएस आधारित वाहन निगरानी, राज्य पोर्टलों का एपीआई इंटीग्रेशन व ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था लागू कर  खनिज परिवहन को अधिक पारदर्शी बनाया गया।

 

वैकल्पिक निर्माण सामग्री को बढ़ावा दिया गया 

एम-सैंड नीति-2024 लागू कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ वैकल्पिक निर्माण सामग्री को बढ़ावा दिया गया। साथ ही  तकनीकी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर हंगामा, विरोध करने पहुंचे पति-पत्नी, दिल्‍ली प्रदर्शनकारियों को कहा था कीड़े

Kailash Vijayvargiya

प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर बुधवार को उस समय हंगामा हो गया, जब एक दंपती उनके कथित बयान के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंच गया। पुलिस ने दोनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं मानने पर हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया।

बता दें कि इंदौर के नंदा नगर स्थित प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे प्रहलाद पांडे और उनकी पत्नी संगीता पांडे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। दोनों दिल्ली में आंदोलनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज और मंत्री के उस कथित बयान का विरोध करने पहुंचे थे, जिसमें आंदोलनकारियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है।

जानकारी के अनुसार, प्रहलाद पांडे मंत्री के निवास के बाहर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें वहां रुकने से मना किया और स्थान खाली करने के लिए कहा। इस बात को लेकर पुलिस और दंपति के बीच कुछ देर तक बहस हुई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान करीब 15 मिनट तक मौके पर हंगामे जैसी स्थिति बनी रही, जिसके बाद मामला शांत हो गया।

ये आरोप लगाया मंत्री पर : हिरासत में लिए जाने से पहले प्रहलाद पांडे और संगीता पांडे ने आरोप लगाया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आंदोलनकारियों के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें “कीड़े-मकोड़े” कहा था। उनका कहना था कि वे इसी कथित बयान के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था।