NEET प्रदर्शन विवाद : पुलिस लाठीचार्ज वाली याचिका मामले में क्यों भड़के CJI सूर्यकांत?

cji suryakant

CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में सुनवाई को लेकर मीडिया में चल रही खबरों का सख्ती से खंडन किया है। CJI ने उन दावों को पूरी तरह भ्रामक और 'लापरवाह' करार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और छात्रों पर हुई पुलिस ज्यादती पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

 

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत ने किसी भी याचिका को खारिज नहीं किया है, क्योंकि इस संबंध में कोई औपचारिक केस या याचिका दायर ही नहीं की गई थी। ALSO READ: CJI बोले- वीडियो देखने का वक्त नहीं, हमारा समय बर्बाद न करें, CJP प्रोटेस्ट में लाठीचार्ज पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित 'चलो संसद' मार्च से शुरू हुआ था। NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और व्यापक शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्रों और कार्यकर्ताओं ने संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश की थी।

 

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े बैरिकेड्स लगाए और स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी छात्र घायल हो गए थे। ALSO READ: लंदन में CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में हंगामा क्यों हुआ, Cockroach Janta Party ने क्या कहा

मौखिक टिप्पणी से उपजा भ्रम

घटना के बाद, 22 जुलाई को अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में एक 'लेटर पिटीशन' का उल्लेख (mentioning) किया था। उन्होंने पीठ से पुलिस कार्रवाई के वीडियो फुटेज देखकर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने का अनुरोध किया।

 

उस समय CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हमारा और अपना समय बर्बाद न करें। हमें वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास इसके लिए समय नहीं है। इस मौखिक टिप्पणी के आधार पर मीडिया के एक वर्ग में यह खबरें चलने लगीं कि देश की शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ दायर मामले को सुनने से साफ इनकार कर दिया है। ALSO READ: CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी, कुछ बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह हैं, व्यवस्था पर हमला करते हैं

क्या है CJI का स्पष्टीकरण

भ्रामक रिपोर्टिंग पर कड़ा रुख अपनाते हुए CJI सूर्यकांत ने स्थिति साफ की। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, CJI ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई मामला तकनीकी रूप से कोर्ट के समक्ष दायर ही नहीं होता, तब तक उसे खारिज या लिस्ट करने से मना करने का सवाल ही नहीं उठता।

 

CJI ने मीडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मिश्रा नाम के व्यक्ति ने इसका सिर्फ जिक्र किया था। मीडिया ने गलत तरीके से रिपोर्ट किया कि मैंने मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया है। वह केवल एक प्रतिवेदन था और लोगों ने बिना सोचे-समझे रिपोर्टिंग शुरू कर दी। मैंने रजिस्ट्री से जांच कराई है—इस मामले में एक भी कागज (याचिका) दाखिल नहीं किया गया था।

 

दरअसल, वकील द्वारा केवल एक मौखिक उल्लेख किया गया था और रजिस्ट्री में कोई विधिवत जनहित याचिका (PIL) दर्ज नहीं थी। अदालत के रुख से साफ है कि यदि भविष्य में नियम और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत कोई औपचारिक याचिका (Petition) दाखिल की जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट सामान्य प्रक्रिया के तहत उस पर विचार कर सकता है।

दिल्ली में Gen-Z का ‘मीम वार’, NEET लीक के खिलाफ सड़कों पर शेयर हुआ क्रिएटिविटी और ह्यूमर का डोज

Gen Z Meme

इंस्‍टाग्राम फीड में सिर्फ Gen-Z की रील्‍स, पुलिस और सरकार की नाम में दम
पुलिस को नहीं समझ आ रहा कैसे डील करें छात्रों के तरीकों से

जंतर-मंतर और दिल्ली की सड़कों पर आमतौर पर गंभीर और भारी-भरकम नारों वाली रैलियां देखने को मिलती हैं, लेकिन नीट (NEET) विवाद को लेकर जब Gen-Z छात्र सड़कों पर उतरे, तो विरोध का अंदाज बिल्कुल बदल गया। रोष वही था, गुस्सा उतना ही गहरा, लेकिन अपनी बात कहने का तरीका था—प्योर क्रिएटिविटी, तीखे मीम्स और बेबाक ह्यूमर।

आलम यह है कि लोग रात रातभर Gen-Z छात्रों के मीम्‍स देख रहे हैं। उनके प्रदर्शन का यह अंदाज न तो पुलिस को समझ में आ रहा है और न ही सरकार को। ऐसे भयंकर माहौल में भी Gen-Z छात्रों की मासूमियत और क्रिएटिविटी लोगों को हंसा-हंसाकर लौटपोट कर रही है। लोगों की इंस्‍टाग्राम फीड में सिर्फ Gen-Z प्रोटेस्‍ट की रील्‍स आ रही हैं। कई बच्‍चे सोशल मीडिया में जमकर पापुलर हो गए हैं।

इन युवाओं ने साबित कर दिया कि अपनी मांगें मनवाने के लिए भारी-भरकम भाषणों से ज्यादा असरदार एक सही जगह पर फिट बैठता 'मीम' हो सकता है। अगर यह कहा जाए कि सटायर और ह्यूमर का सही इस्‍तेमाल सिस्‍टम के खिलाफ किसी ने किया है तो वे आज के Gen-Z हैं।

पोस्टर नहीं, 'मीम कार्ड्स' थे हाथ में
पारंपरिक नारों की जगह छात्रों के हाथों में पॉप-कल्चर, वायरल रील्स और पॉपुलर वेब सीरीज के रेफरेंस, पोस्‍टर्स और म्‍यूजिकल अटैक थे।

'पंचायत' शैली: एक छात्र के प्लेकार्ड पर लिखा था—”देख रहा है बिनोद, कैसे 720 में से 720 नंबर बांटे जा रहे हैं!”
बायोलॉजी वाला तंज: एक छात्रा ने लिखा—”दिल में 4 चैंबर होते हैं, लेकिन NTA ने तो चारों ही तोड़ दिए।”
हेरा फेरी वाइब्स: “अरे बाबा, ये 67 रैंक वन देखकर तो भगवान से भरोसा उठ गया रे!”

स्लॉगन्स में भी 'Gen-Z स्लैंग'
सड़कों पर गूंज रहे नारे भी पारंपरिक विरोध से काफी अलग थे। 'इंकलाब' के साथ-साथ इस बार 'नो कैप' (No Cap) और 'रेड फ्लैग' (Red Flag) जैसे शब्दों का जमकर इस्तेमाल हुआ: “System is Not Cooking, System is Overcooking Us!” (सिस्टम कुछ अच्छा नहीं बना रहा, बल्कि हमें ही भून रहा है!) छात्रों का कहना था कि जब परेशानी आज के दौर की है, तो विरोध का जरिया भी आज की भाषा में ही होना चाहिए।

सर, टीयर गैस की व्‍यवस्‍था नहीं किए से लेकर भाग डीके बॉस तक : पुलिस वाहनों में भरकर जब छात्रों को थाने लेकर जाती है तो कोई Gen-Z गाडी का दरवाजा खोलकर भाग जाता है, जिससे सारे छात्र वाहन में से कूदकर भाग जाते हैं। कोई पुलिस के सामने नाच रहा है तो कोई रील्‍स बना रहा है। कोई पुलिस से टीयर गैस की व्‍यवस्‍था करने की बात करता है तो जब पुलिस उन पर पानी की बोछार लगाती है तो वे वॉटर पार्क की पार्टी की तरह नाचने लगते हैं। कोई पुलिस को फूल दे रहा है तो कोई पित्‍जा खिला रहा है। कोई अजीब स्‍लैंग में पुलिस वालों के साथ बात करता नजर आता है। कुल मिलाकर जेनजी ने नाक में दम कर दिया है।

रील कल्चर और ऑन-द-स्पॉट ह्यूमर
प्रदर्शन स्थल पर केवल तख्तियां ही नहीं थीं, बल्कि लाइव स्टैंड-अप और रील्स का दौर भी चल रहा था।

गिटार और पैरोडी: कुछ छात्रों ने बैकग्राउंड में गिटार बजाकर लोकप्रिय गानों की पैरोडी बनाई, जिसमें नीट की तैयारी के डिप्रेशन और पेपर लीक के दर्द को मजाकिया अंदाज में पिरोया गया।

सटायर : कुछ युवा डॉक्टर वाले एप्रन और एनेस्थीसिया के सिरिंज में 'जस्टिस' लिखकर पहुंचे थे, ताकि प्रतीकात्मक रूप से अपनी बात समझा सकें।

पुलिस मारने आए तो जन गण मन गाने लगे : पुलिस इस प्रोटेस्‍ट को काबू में करने के लिए जब लाठी चार्ज करने के लिए आती है तो ये लोग जन गण मन गाने लगते हैं, जिससे पुलिस खुद सावधान की मुद्रा में खडी हो जाती है।

क्यों खास है विरोध का यह तरीका : Gen-Z का मानना है कि जब आप इंटरनेट की भाषा और ह्यूमर का इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी आवाज सिर्फ एक सड़क तक सीमित नहीं रहती—वह रील्स, ट्वीट्स और ट्रेन्ड्स के जरिए मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच जाती है। गुस्सा जाहिर करने का यह डार्क ह्यूमर (Dark Humor) असल में उनके तनाव को कम करने का एक तरीका भी बन गया है। दिल्ली की सड़कों पर उतरा यह 'मीम प्रोटेस्ट' यह साफ संदेश देता है कि आज की पीढ़ी अपनी लड़ाई लड़ना भी जानती है, और उसमें अपनी अनोखी पहचान बनाए रखना भी।

Weather Update : गुजरात से असम तक भारी बारिश से तबाही, UP-बिहार समेत कई राज्यों में अलर्ट

Heavy rains wreak havoc from Gujarat to Assam, alerts issued for several states, including UP and Bihar

Weather Update News : देशभर में मानसून सक्रिय है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्‍तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत 16 राज्यों में आज भारी बारिश, तेज आंधी, वज्रपात और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। वहीं पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की संभावना जताई गई है। असम के कई हिस्सों में भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। राज्‍य के कई हिस्से बाढ़ के कारण अभी भी जलमग्न हैं। इससे 7.21 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। गुजरात में मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर हैं और सड़कें पानी में डूब चुकी हैं।

देशभर में मानसून सक्रिय है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्‍तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत 16 राज्यों में आज भारी बारिश, तेज आंधी, वज्रपात और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। वहीं पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की संभावना जताई गई है। बिहार के पटना, गया, बक्सर, सिवान, सारण, भोजपुर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया और अररिया में आज भारी बारिश का अलर्ट है।

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दिल्ली में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

पूर्वी राज्यों के कई जिलों में ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है। राजधानी दिल्ली में आज भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, शिमला, सोलन, बिलासपुर, लाहौल-स्पीति, चंबा और कांगड़ा में भारी बारिश की चेतावनी है। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, डोडा, जम्मू, पुंछ, बारामूला, गांदरबल, उधमपुर, किश्तवाड़, रियासी और कठुआ में भी भारी बारिश और आंधी की चेतावनी है।

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राजस्थान में भारी बारिश की संभावना

राजस्थान के हनुमानगढ़, चुरू, जयपुर, झुंझुनू, दौसा, भरतपुर, अजमेर, करौली, नागौर, पाली, चित्तौड़गढ़ और सवाई माधोपुर में भारी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड के बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल, देहरादून, पिथौरागढ़, चमोली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और ऋषिकेश में बारिश का अलर्ट जारी है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, बांकुड़ा, बीरभूम, दुर्गापुर, मालदा, कूचबिहार, मुर्शिदाबाद और कलिम्पोंग में भारी बारिश की संभावना है। 

Gujarat heavy rain

गुजरात में क्या हैं हाल? 

गुजरात में मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर हैं और सड़कें पानी में डूब चुकी हैं। राहत और बचाव दल लगातार लोगों की जान बचाने में लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बात की है। उन्होंने राज्य के हालात की जानकारी ली और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

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महाराष्ट्र में भारी बारिश से कई ट्रेनें रद्द

मुंबई मंडल के भिलाड़–बोरीवली तथा घोलवड–उमरगाम रोड रेलखंड पर भारी बारिश और जलभराव के कारण गुरुवार को दिल्ली–मुंबई रेलमार्ग पर रेल संचालन बुरी तरह प्रभावित रहा। पुल क्रमांक-203 पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद कई ट्रेनों को बीच रास्ते रोकना पड़ा। महाराष्ट्र में भारी बारिश ने कई कस्बों और गांवों को जलमग्न कर दिया, जिससे कई लोग फंसे रह गए और अधिकारियों को बचाव अभियान तेज करना पड़ा। 

असम में बाढ़ से हाहाकार 

असम के कई हिस्सों में भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। राज्‍य के कई हिस्से बाढ़ के कारण अभी भी जलमग्न हैं। इससे 7.21 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं मरने वालों की संख्या 47 हो गई है। बाढ़ का सबसे गंभीर असर शिवसागर जिले में देखा गया है, जहां 375682 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद चराइदेव में 186351 और जोरहाट में 115764 लोग प्रभावित हुए हैं। राहत-बचाव अभियान जारी है। 

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मध्य प्रदेश के कई जिलों में अलर्ट

मध्य प्रदेश के भोपाल, शिवपुरी, सागर, दमोह, विदिशा, खांडवा, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), रायसेन, अशोक नगर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, कटनी और इंदौर में आज और कल भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। कुछ जिलों में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक भारी बारिश हो सकती है। राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, इस समय कई मानसूनी प्रणालियां एक साथ एक्टिव हैं।

गुजरात में 14 घंटे में 400 मिमी बारिश से तबाही, जानें वैज्ञानिकों का अनुमान क्यों गलत साबित हुआ?

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गुजरात में पिछले दो दिनों से बारिश ने रौद्र रूप धारण कर लिया है और महज 14 घंटों में कई इलाकों में 400 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। नवसारी के चिखली, अहमदाबाद के धोलेरा (धोलका) और सूरत के उमरपाड़ा जैसे इलाकों में मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सड़कें, खेत और मकान पानी में डूब गए हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। ALSO READ: गुजरात में बाढ़ का संकट, 1200 सड़कें बंद और स्कूलों में छुट्टी, PM मोदी ने CM से की बातचीत, केंद्र देगा हरसंभव मदद

 

बारिश से पहले स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मौसम वैज्ञानिकों ने 'अल नीनो' के प्रभाव के कारण सूखे की बड़ी आशंका जताई थी। इन भविष्यवाणियों से लोगों में दहशत का माहौल बन गया था। हालांकि, हकीकत बिल्कुल उलट निकली और सूखे के बजाय राज्य में विनाशकारी और भारी बारिश हो रही है।

 

वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी गलत साबित होने की मुख्य वजह पैसिफिक डिकेडल ऑसिलेशन (PDO) का प्रभाव था, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया था। PDO प्रशांत महासागर के पानी के तापमान में 20 से 30 वर्षों की अवधि में होने वाला एक दीर्घकालिक बदलाव है। अल नीनो अल्पकालिक होता है, जबकि PDO का प्रभाव दशकों तक रहता है और यह हवा के दबाव व दिशा को बदल देता है।

 

वर्तमान में PDO का 'मजबूत नकारात्मक' (Negative PDO) चरण चल रहा है, जो भारतीय मानसून को काफी मजबूत बनाता है। इस नकारात्मक चरण के कारण पश्चिमी प्रशांत और हिंद महासागर से प्रचुर मात्रा में नमी भारतीय उपमहाद्वीप की ओर खिंची चली आई है। यही नमी युक्त हवाएं अरब सागर से गुजरते हुए गुजरात और पश्चिमी भारत में भारी बारिश लेकर आई हैं। ALSO READ: गुजरात में बारिश का तांडव, वलसाड में 36 इंच, 7 ट्रेनें रद्द, सेना अलर्ट पर

 

मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले मॉडल मौसमी बदलावों को तो जल्दी पकड़ लेते हैं, लेकिन PDO जैसे दीर्घकालिक कारकों को पूरी तरह से समझने में असमर्थ रहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग और नेगेटिव PDO के संयोजन से भविष्य में भी ऐसी भीषण बारिश और बाढ़ की घटनाएं बढ़ने की संभावना है। यह घटना दर्शाती है कि मौसम को समझने के लिए केवल अल नीनो ही नहीं, बल्कि समुद्र के सभी घटकों पर ध्यान देना जरूरी है।

 

DU की एडवाइजरी पर भड़के राहुल गांधी, कहा- छात्रों को धमकाने की हिम्मत कैसे हुई?

rahul gandhi slams delhi university over student protest advisory

दिल्ली यूनिवर्सिटी की जंतर-मंतर प्रदर्शन से दूर रहने की एडवाइजरी पर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने से डराना गलत है और इसके लिए जवाबदेही तय होगी। ALSO READ: 'छात्र दुश्मन नहीं, देश का भविष्य हैं'— NEET विवाद पर सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आप लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए छात्रों को धमकी देने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? कृपया ध्यान दें, जब समय आएगा तो आपको ही जवाबदेह ठहराया जाएगा।

 

डीयू ने छात्रों और शिक्षकों से क्या कहा?

इससे पहले डीयू ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा था कि प्रिय छात्रों और संकाय सदस्यों आपकी सुरक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है। कृपया ध्यान दें कि जंतर-मंतर, नई दिल्ली में किसी भी प्रकार के गैर-कानूनी जमावड़े या प्रदर्शन, जिन्हें भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सख्ती से नियंत्रित किया जाता है, पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

 

उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं और उनकी शैक्षणिक प्रगति तथा व्यावसायिक अवसरों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

 

पोस्ट में कहा गया है कि सभी छात्रों से आग्रह किया जाता है कि वे जंतर-मंतर से दूर रहें और अपनी सुरक्षा तथा कानून के पालन को प्राथमिकता दें। इसके अलावा, आपको सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि स्थिति को भड़काने के लिए बड़ी मात्रा में फर्जी और भ्रामक सामग्री बनाई और प्रसारित की जा रही है। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार ने मानीं 3 बड़ी मांगें; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर चुप्पी

 

जंतर मं‍तर पर डटे हैं छात्र

गौरतलब है कि पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से जंतर मंतर पर छात्रों का धरना जारी है। पीएम मोदी ने फास्ट ट्रेक कोर्ट के गठन के साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए सख्‍त कानून बनाने का भी एलान किया है। इसके बाद सोनम वांगचुक भी अनशन समाप्त करने की घोषणा कर चुके हैं।

‘छात्र दुश्मन नहीं, देश का भविष्य हैं’— NEET विवाद पर सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

Sonia Gandhi Sonia Gandhi attack modi government on NEET paper leak and student protest

पेपर लीक विवाद पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्रों के साथ 'कायरता और क्रूरता' से पेश आने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार से पुलिस कार्रवाई रोकने और संवाद शुरू करने की अपील की। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार ने मानीं 3 बड़ी मांगें; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर चुप्पी

 

सोनिया गांधी ने समाचार पत्र हिंदू में लिखे अपने आलेख में कहा कि देश भर में परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में आ रही गिरावट के खिलाफ छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगें बहुत स्पष्ट हैं- सरकार अपनी जवाबदेही तय करे और शिक्षा में सुधार लाए। 20 जुलाई 2026 का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को दबाने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का हिंसक इस्तेमाल किया। इस हिंसा में कई निर्दोष छात्र घायल हुए।

 

गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि पैलेट के इस्तेमाल को जरूर उनकी मंजूरी मिली होगी। उन्होंने कहा इस सरकार में हिंसा की यह पहली घटना नहीं है। 2020 में सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों के दौरान भी पुलिस यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसी थी और महिला पहलवानों के साथ भी बदसलूकी की गई थी। ALSO READ: CJP Protest : दिल्ली में आज भी 17 मेट्रो स्टेशन बंद, इन 3 स्टेशनों पर जारी रहेगी इंटरचेंज की सुविधा

शिक्षा संकट के पीछे तीन बड़े कारण

सरकारी शिक्षा से पीछे हटना: मोदी सरकार ने अपने कुल बजट में से स्कूल शिक्षा के हिस्से में 50 प्रतिशत और उच्च शिक्षा के हिस्से में 33 प्रतिशत की कटौती की है। पिछले 12 वर्षों में सरकार ने लगभग 1 लाख सरकारी स्कूल बंद कर दिए, जबकि 43,000 निजी स्कूल खोले गए। इनमें से बड़े हिस्से का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठन करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के परिवार अकेले नीट कोचिंग पर जितना पैसा खर्च करते हैं, उतना केंद्र सरकार कुल मिलाकर सरकारी शिक्षा पर भी निवेश नहीं करती।
 

परीक्षा प्रणाली का ध्वस्त होना: उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका केंद्रीयकरण और निजीकरण कर दिया गया है। एनटीए में कर्मचारियों की कमी है और यह निजी ठेकेदारों के भरोसे चल रही है। इसमें विशेषज्ञों के नाम पर राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को रखा गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले 12 वर्षों में देश भर में 152 पेपर लीक हुए, जिनमें से 9 पेपर लीक 2017 में बनी एनटीए के कार्यकाल में हुए हैं। ALSO READ: PM मोदी का छात्रों के नाम Video संदेश, पेपर लीक पर और सख्त होगा कानून, कैबिनेट लाएगी नया बिल
 

रोजगार की कमी : पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के पास अच्छी नौकरियों के अवसर नहीं हैं। इसके बावजूद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसदीय समिति की सिफारिशों को खारिज कर दिया और इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

Top News 24 July : PM मोदी का बड़ा ऐलान, 26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन

top news 24 july

Top News 24 July : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून का एलान किया। सोनम वांगचुक का अनशन खत्म। सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में 17 मेट्रो स्टेशन बंद। देश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला। 24 जुलाई की बड़ी खबरें…

 

पेपर लीक पर बनेगा सख्‍त कानून

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात वीडियो जारी कर पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून का एलान किया। उन्होंने कहा यह बिल आज कैबिनेट में चर्चा के लिए लाया जाएगा। इसे मानसून सत्र में ही पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। ALSO READ: PM मोदी का छात्रों के नाम Video संदेश, पेपर लीक पर और सख्त होगा कानून, कैबिनेट लाएगी नया बिल

 

सोनम वांगचुक का अनशन खत्म

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद खत्म की भूख हड़ताल। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुवार रात करीब 12.30 बजे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे। नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार ने मानीं 3 बड़ी मांगें; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर चुप्पी

 

दिल्ली में 17 मेट्रो स्टेशन बंद

जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के चलते दिल्ली मेट्रो ने शुक्रवार को सुरक्षा कारणों से 17 स्टेशनों को बंद करने का फैसला किया है। मेट्रो प्रशासन ने सभी यात्रियों को सलाह दी है- वे इस दौरान मेट्रो के बजाय बस, ऑटो या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें। ALSO READ: CJP Protest : दिल्ली में आज भी 17 मेट्रो स्टेशन बंद, इन 3 स्टेशनों पर जारी रहेगी इंटरचेंज की सुविधा

 

सोनिया गांधी का सरकार पर हमला

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। 'द हिंदू' अखबार में प्रकाशित अपने लेख 'एन एजुकेशन सिस्टम्स कोलैप्स, यंग इंडियाज ट्रॉमा' में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जवाबदेही और शिक्षा सुधार की मांग करने वाले छात्रों को भविष्य का हकदार मानने के बजाय 'देश का दुश्मन' समझ रही है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार उनके साहस का जवाब कायरता और क्रूरता से दे रही है।

 

भारत समेत 17 देशों पर 10 फीसदी टैरिफ

अमेरिका ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर कार्रवाई करते हुए भारत सहित 60 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह फैसला सभी देशों पर लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले लिया गया।

सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार ने मानीं 3 बड़ी मांगें; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर चुप्पी

sonam wangchuk stops hunger strike

NEET पेपर लीक मामले पर 26 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने सरकार के लिखित आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। सरकार ने छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने, पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और संसद में चर्चा कराने का भरोसा दिया, लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई आश्वासन नहीं मिला। ALSO READ: 26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन, CJP का प्रदर्शन जारी

 

सोनम वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लद्दाख की एपेक्स बॉडी के शीर्ष नेता उनसे मिलने पहुंचे थे। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर करके सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया था। सांसदों और मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि नीट पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली के मुद्दे पर संसद में चर्चा की जाएगी।

 

सोनम के अनुसार, पिछले 2 दिनों से सरकार और उनके बीच बातचीत चल रही थी। वे सरकार से लिखित में आश्वासन चाहते थे, जिसकी वजह से उन्हें 2 दिन अतिरिक्त अनशन पर बैठना पड़ा। आखिरकार, सरकार ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए उन्हें लिखित आश्वासन दे दिया। इसके बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का निर्णय लिया। ALSO READ: CJP Protest : दिल्ली में आज भी 17 मेट्रो स्टेशन बंद, इन 3 स्टेशनों पर जारी रहेगी इंटरचेंज की सुविधा

 

सरकार ने स्वीकार की 3 मांगें

छात्रों पर नहीं होगी कानूनी कार्रवाई: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले या 20 जुलाई को संसद चलो मार्च में शामिल होने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

पीड़ित परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक की घटना की वजह से जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को सरकार उचित मुआवजा देगी।

संसद में होगी पूरी बहस: देश की संसद में इस पूरे मुद्दे, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की जवाबदेही तय करने पर विस्तार से बहस और चर्चा होगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ALSO READ: PM मोदी का छात्रों के नाम Video संदेश, पेपर लीक पर और सख्त होगा कानून, कैबिनेट लाएगी नया बिल

 

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर नहीं मिला आश्वासन

सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार इस बात का कोई आश्वासन नहीं दे सकी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कब होगा। उनके पास दो रास्ते थे- या तो वे कई हफ्तों तक भूख हड़ताल जारी रखते जिससे उनकी जान जा सकती थी, या फिर अनशन समाप्त करते। पिछले 2-3 हफ्तों से हजारों लोग उनसे कह रहे थे कि संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए उनका जीवित रहना जरूरी है।

ईरान से युद्ध पर अमेरिका 37.5 अरब डॉलर फूंक चुका, 67 अरब डॉलर और चाहिए

US Iran war cost

US Iran war cost: अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध बहुत मंहगा पड़ रहा है। लगभग 37 अरब 50 करोड़ डॉलर अब तक ख़र्च हो चुका है और युद्ध का अंत कहीं दिख नहीं रहा। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को इन्हीं दिनों अमेरिकी संसद के उच्च सदन, यानी सीनेट की एक कमेटी के सामने हाथ पसारना और उसके तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।

 

हेगसेथ ने अमेरिकी सीनेट की सुनवाई के दौरान पहली बार 37 अरब 50 करोड़ डॉलर का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने बताया कि इस कुल ख़र्च में न केवल अब तक का ख़र्च शामिल है, बल्कि 30 सितंबर को ख़त्म होने वाले वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक का अनुमानित ख़र्च भी शामिल है। यह अभी भी साफ़ नहीं है कि वे इस आंकड़े तक कैसे पहुंचे। ALSO READ: ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की HIT लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

पिछले जून में ट्रंप ने 90 अरब डॉलर अतिरिक्त माँगे थे

समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने— इससे पहले पिछले मार्च महीने में— युद्ध के शुरुआती छह दिनों का ख़र्च कम से कम 11.3 अरब डॉलर आंका था। पिछले जून महीने में, ट्रंप ने कांग्रेस (संसद) से लगभग 90 अरब डॉलर अतिरिक्त की मांग की थी, जिसका ज़्यादातर भाग ईरान के साथ संघर्ष से जुड़ा था।

 

हेगसेथ ने अब रक्षा विभाग के लिए 67 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की वकालत की है, ताकि सेना की तैयारी सुनिश्चित की जा सके, पुराने हो चुके उपकरणों को बदला जा सके और गोला-बारूद तथा नए हथियारों में निवेश को बढ़ाया जा सके। यह अतिरिक्त बजट नियमित रक्षा बजट के अलावा एक आपातकालिक फंड के तौर पर मांगा गया है। ALSO READ: अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?

अमेरिकी सांसदों की शिकायत

28 फरवरी 2026 को, अमेरिका और इसराइल के साझे हवाई हमलों की शुरुआत के बाद से ही अमेरिका की रिपब्लिकन और डेमोकैटिक, दोनों ही पार्टियों के सांसद शिकायत करते रहे हैं कि ट्रंप और उनकी टीम उन्हें इस संघर्ष के बारे में जानकारी देने में नाकाम रही है। सीनेट की रक्षा समिति वाली सुनवाई के दौरान, उसकी डेमोकैट महिला सदस्य सीनेटर पैटी मरे ने कहा, “राष्ट्रपति महोदय तो तनाव बढ़ाने और युद्ध अपराधों की धमकी दे रहे हैं, और संकेत दे रहे हैं कि यह “कभी न खत्म होने वाला युद्ध हो सकता है।” 

बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने की धमकियाँ

ट्रंप ने ईरान को बार-बार गंभीर धमकियाँ दी थीं— जिनमें आम नागरिकों के इस्तेमाल वाले बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने की धमकी भी शामिल थी। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) समेत कई पक्षों ने चेतावनी दी थी कि ऐसा करना 'युद्ध अपराध' माना जाएगा। अमेरिकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स' और सीनेट, दोनों में ही ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुत कम बहुमत है; इसलिए, बजट से जुड़े कानूनों को पास कराने के लिए आम तौर पर डेमोक्रैटिक सदस्यों के समर्थन की भी ज़रूरत पड़ती है। डेमोक्रैटिक सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड का कहना था कि ट्रंप प्रशासन से लोगों के नाराज़ होने का कारण यह है कि उनके बयान वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

 

केवल डेमोक्रैट ही नहीं, बल्कि अमेरिकी जनता का एक बड़ा भाग ईरान से युद्ध को लेकर ट्रंप सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना कर रहा है। रक्षा मंत्री हेगसेथ की सीनेट में सुनवाई के दौरान उन्हें युद्ध-विरोधी बैनर दिखाए गए। ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

नई बमबारी शुरू

जून का अंत और जुलाई का आरंभ होते ही, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा भी टिक नहीं पाई। दोनों पक्ष अब हर दिन एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। नई बमबारी शुरू होने के 11वें दिन, एक बार फिर ईरान की राजधानी तेहरान में बम-धमाके होने की ख़बर मिली। इसके जवाब में ईरान, खाड़ी क्षेत्र के देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है; हाल ही में, जॉर्डन में कई अमेरिकी सैनिक मारे भी गए।

 

20 जुलाई तक तक ईरान के विरुद्ध युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 18 हो गई, जबकि अब तक 430 सैनिक घायल भी हुए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन के अनुसार, 7 जुलाई के बाद से क़रीब 100 सैनिक घायल हुए हैं, हालांकि ख़बरों के अनुसार उनमें से 96 प्रतिशत सैनिक ड्यूटी पर लौट आए हैं।

अभी कोई अंत दिख नहीं रहा

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर ज़बरदस्त हमले करने की बात कही है। व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के साथ अमेरिका का काम अभी “ख़त्म होने से बहुत दूर” है। ट्रंप के अनुमान के अनुसार, ईरान के पुनर्निर्माण में कम से कम 20 साल लगेंगे।

 

जर्मन टेलिविजन ARD के इस समय तेहरान में स्थित संवाददाता बेन्यामिन वेबर का कहना है कि अमेरिकी हमले 20 जुलाई को एक बार फिर रात भर “पूरे देश” में होते रहे। अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमलों के एक नए दौर की जानकारी दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि इन हमलों का लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य है— जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। वहाँ व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने से ईरान की क्षमता कमज़ोर होती है।

ईरान पर लगातार नए हमले

जर्मन संवाददाता वेबर के अनुसार, लगभग एक घंटे तक चले इन हमलों में ईरान के सैनिक कमान केंद्र, नौसेना के ठिकाने और वाय़ुसेना की सुविधाओं को निशाना बनाया गया। ईरान पर नए हमलों की यह लगातार ग्यारहवीं रात थी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इर्ना (IRNA) ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी हमलों में बुशहर प्रांत की तीन जगहों को निशाना बनाया गया; इनमें ईरान के एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास का बिजली वितरण केंद्र भी शामिल था।

 

इस समय तो यही लग रहा है कि जान-माल की भारी क्षति उठाने के बावजूद न तो ईरान रत्ती भर भी टस-से-मस होने को तैयार है, और न ट्रंप ही युद्ध रोक कर रणछोड़ कहलाने के मूड में हैं। ईरान मरमिटने पर उतारू दिखता है, जबकि ट्रंप चाहते हैं किसी तरह सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

CJP Protest : दिल्ली में आज भी 17 मेट्रो स्टेशन बंद, इन 3 स्टेशनों पर जारी रहेगी इंटरचेंज की सुविधा

CJP protest : DMRC closed 17 metro stations

CJP Protest : जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के चलते दिल्ली मेट्रो ने शुक्रवार को सुरक्षा कारणों से 17 स्टेशनों को बंद करने का फैसला किया है। मेट्रो प्रशासन ने सभी यात्रियों को सलाह दी है कि वे इस दौरान मेट्रो के बजाय बस, ऑटो या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें। मेट्रो बंद होने की वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ALSO READ: 26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन, CJP का प्रदर्शन जारी

 

दिल्ली मेट्रो ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आज सुबह 7:30 बजे से आगामी आदेश तक इन मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। यहां एंट्री और एक्जिट पर पाबंदी लगाई गई है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज सुविधा चालू रहेगी।

 

डीएमआरसी ने लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्‍ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ और जनपथ स्टेशन बंद रखने का पैसला किया है। साथ ही मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, झंडेवालान और शिवाजी स्टेडियम स्टेशन भी बंद रहेंगे। ALSO READ: PM मोदी का छात्रों के नाम Video संदेश, पेपर लीक पर और सख्त होगा कानून, कैबिनेट लाएगी नया बिल

 

गौरतलब है कि बुधवार और गुरुवार को भी 16 स्टेशन सुरक्षा कारणों से बंद कर दिए गए थे। इससे पहले 20 जुलाई को भी प्रदर्शनकारियों के जंतर मं‍तर से संसद मार्च के दौरान 5 मेट्रो स्टेशन राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ को बंद कर दिया गया था।