जोनाथन क्रिस्टी को हराकर भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने किया बड़ा उलटफेर

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने शुक्रवार को बड़ा उलटफेर करते हुए दुनिया के चौथे नंबर के खिलाड़ी जोनाथन को हराकर बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बना ली।

आज यहां टॉप-4 में जगह बनाने के साथ ही आयुष शेट्टी 2018 में एच.एस. प्रणय के बाद इस कॉन्टिनेंटल टूर्नामेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एकल बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए हैं। यह 2023 में चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी के पुरुष डबल्स गोल्ड मेडल के बाद बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में भारत का पहला मेडल भी होगा।

पुरुष एकल बैडमिंटन रैंकिंग में 25वें स्थान पर मौजूद आयुष शेट्टी ने क्वार्टर-फ़ाइनल में इंडोनेशिया के ओलंपियन और तीसरी वरीयता प्राप्त जोनाथन क्रिस्टी को 23-21, 21-17 से हराया।

पहला गेम बेहद कड़ा रहा, जिसमें कोई भी खिलाड़ी निर्णायक बढ़त नहीं बना पाया। पूर्व एशियाई चैंपियन जोनाथन क्रिस्टी 11-10 की मामूली बढ़त के साथ मिड-गेम ब्रेक में गए। जोनाथन क्रिस्टी 18-15 की बढ़त बनाकर मैच पर नियंत्रण बनाते दिख रहे थे और उन्हें गेम पॉइंट भी मिल गया था, लेकिन आयुष शेट्टी ने जोरदार वापसी की और मैच को टाई-ब्रेक में ले जाकर पहला गेम जीत लिया।

दूसरा गेम भी उतना ही कड़ा रहा। आयुष शेट्टी 11-9 की मामूली बढ़त के साथ ब्रेक में गए, जिसके बाद उन्होंने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत की और जीत हासिल करके सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह पहली भिड़ंत थी, जिसमें आयुष शेट्टी ने जोनाथन क्रिस्टी के ख़िलाफ़ अपनी पहली जीत दर्ज की।

इससे पहले टूर्नामेंट में, आयुष शेट्टी ने पहले राउंड में दुनिया के सातवें नंबर के खिलाड़ी और मौजूदा एशियाई खेलों के चैंपियन ली शी फ़ेंग को चौंका दिया था। इसके बाद उन्होंने चीनी ताइपे के ची यू जेन को हराकर क्वार्टर-फ़ाइनल में जगह बनाई थी।

सेमीफाइनल में, आयुष शेट्टी का मुक़ाबला थाईलैंड के पेरिस 2024 रजत पदक विजेता कुनलावुत विटिडसर्न और चीन की एशियाई खेलों की गोल्ड मेडल विजेता पुरुष टीम के सदस्य वेंग होंगयांग के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा।

अगर आप भी देर तक मोबाइल देखते हैं तो जान लें ये नुकसान

smartphone side effects: आज का डिजिटल युग (Digital Age) हमें कई तरह की तकनीकी सुविधाएं दे रहा है, और मोबाइल (Mobile)  इसका सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है। स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग या देर तक मोबाइल देखने की आदत हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है।ALSO READ: Summer health tips: लू और डिहाइड्रेशन से बचाने वाले 10 घरेलू पेय और हेल्थ टिप्स

 

आजकल लोग सोशल मीडिया, वीडियो, गेमिंग और काम के लिए घंटों मोबाइल स्क्रीन पर रहते हैं। ऐसा करने से सिर्फ आंखों और नींद पर असर नहीं पड़ता, बल्कि  मानसिक स्वास्थ्य, शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां भी प्रभावित हो सकती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते हैं कि डिजिटल युग में मोबाइल का संतुलित उपयोग करना बेहद जरूरी है।

 

1. आंखों की रोशनी पर बुरा असर

2. अनिद्रा और खराब स्लीप साइकिल

3. 'टेक्स्ट नेक' और गर्दन में दर्द

4. मानसिक स्वास्थ्य और तनाव

5. याददाश्त और एकाग्रता में कमी 

6. बचाव के लिए क्या करें?

7. मोबाइल-FAQ
 

यहां वेबदुनिया के सुधि पाठकों के लिए देर तक मोबाइल देखने से होने वाले 5 बड़े नुकसान दिए जा रहे हैं:

 

1. आंखों की रोशनी पर बुरा असर

मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' (Blue Light) सीधे हमारी आंखों के रेटिना को प्रभावित करती है। अत: लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखें शुष्क हो जाती हैं, उनमें जलन और धुंधलापन होने लगता है। जिससे कि कम उम्र में ही चश्मा लग जाना और भविष्य में मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।

 

2. अनिद्रा और खराब स्लीप साइकिल

आपको बता दें कि सोने से ठीक पहले मोबाइल देखना आपकी नींद का सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन/ Melatonin नामक हार्मोन को बनने से रोकती है, जो हमें नींद आने में मदद करता है। इससे नींद पूरी न होने से अगले दिन चिड़चिड़ापन, थकान और काम में एकाग्रता की कमी महसूस होती है तथा सेह‍त को खतरा महसूस होने लगता है।ALSO READ: health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार

 

3. 'टेक्स्ट नेक' और गर्दन में दर्द

साथ ही आपको यह जानना भी बहुत जरूरी है कि जब आप मोबाइल देखते हैं, तो आपकी गर्दन अक्सर झुकी हुई होती है। और इस तरह गर्दन झुकाने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे डॉक्टर्स 'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम' कहते हैं। जिसके कारण गर्दन, कंधों और पीठ में दर्द शुरू हो जाता है, जो आगे चलकर स्पॉन्डिलाइटिस का रूप ले सकता है।

 

4. मानसिक स्वास्थ्य और तनाव

सोशल मीडिया पर दूसरों की चमक-धमक वाली जिंदगी देखना और लगातार नोटिफिकेशन चेक करना हमारे दिमाग को शांत नहीं रहने देता। इसी वजह से देर तक मोबाइल देखने से दिमाग हमेशा अत्यधिक उत्तेजित रहता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है। बच्चों में यह लत उनके मानसिक विकास को रोक देती है।

 

5. याददाश्त और एकाग्रता में कमी

मोबाइल पर लगातार 'रील्स' या छोटे वीडियो देखने से हमारे दिमाग की अटेंशन स्पैन यानी किसी चीज पर ध्यान लगाने की क्षमता कम हो रही है। जैसा कि दिमाग को कम समय में ज्यादा जानकारी की आदत हो जाती है, जिससे गहरी सोच और याद रखने की क्षमता कम होने लगती है। इससे आप रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भूलने लगते हैं और निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं।

 

6. बचाव के लिए क्या करें?

20-20-20 का नियम: हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर रखी किसी चीज को देखें।

 

स्क्रीन टाइम लॉक: रात को सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल को खुद से दूर रख दें।

 

नाइट मोड: अगर बहुत जरूरी हो, तो फोन में 'रीडिंग मोड' या 'ब्लू लाइट फिल्टर' का इस्तेमाल करें।

 

डिजिटल डिटॉक्स: हफ्ते में एक दिन कुछ घंटों के लिए मोबाइल को पूरी तरह बंद रखने की कोशिश करें।

 

7. मोबाइल-FAQ:

 

1. सवाल: मोबाइल देर तक देखने से आंखों पर क्या असर पड़ता है?

जवाब: आँखों में थकान, ड्रायनेस और स्ट्रेन हो सकता है।

 

2. सवाल: नींद पर इसका क्या असर है?

जवाब: नीली रोशनी मेलनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद की गुणवत्ता घटती है।

 

3. सवाल: इसे कम करने के लिए क्या किया जा सकता है?

जवाब: मोबाइल ब्रेक लेना, रात में स्क्रीन टाइम कम करना और ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करना मदद करता है।

 

4. सवाल: क्या मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है?

जवाब: ज्यादा समय मोबाइल पर बिताने से स्ट्रेस, चिंता और ध्यान की समस्या बढ़ सकती है।

स्मार्टफोन को 'स्मार्टली' इस्तेमाल करें, इसे अपनी सेहत पर हावी न होने दें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: डॉक्टर बोले: रोज 10 मिनट चलने से कम हो सकती हैं ये बीमारियां

 

Chrome का नया लुक, अब ऊपर वाले टैब्स से पाएं छुटकारा, इस सीक्रेट सेटिंग से बदलें अपना ब्राउजिंग एक्सपीरियंस

हम में से ज्यादातर लोग अपने वेब ब्राउज़र में बदलाव पसंद नहीं करते। इंटरनेट सर्फिंग हमारी जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन गई है कि छोटा सा “अपडेट” भी कभी-कभी सिरदर्द लगने लगता है। लेकिन, गूगल ने अब क्रोम के सबसे बेसिक फीचर- टैब्स (Tabs)-को पूरी तरह से बदल दिया है। यह फीचर नवंबर 2025 से डेवलपर्स के लिए टेस्टिंग मोड (Canary Build) में था, लेकिन अब इसे हम सभी के लिए जारी कर दिया गया है।

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क्या है यह नया बदलाव?

मंगलवार को गूगल ने क्रोम में 'वर्टिकल टैब्स' (Vertical Tabs) फीचर लॉन्च किया है। अब तक आपके द्वारा खोले गए पेज (टैब्स) ब्राउज़र में सबसे ऊपर एक लाइन में दिखाई देते थे। अब आप उन्हें स्क्रीन के बाईं ओर (Left Side) एक लंबी लिस्ट के रूप में देख सकेंगे।

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क्यों है यह खास?

टैब्ड ब्राउजिंग का चलन 2002 में फायरफॉक्स (Firefox) के दौर से शुरू हुआ था और तब से हम ऊपर की तरफ ही टैब्स देखने के आदी हैं। लेकिन जब हम बहुत सारे टैब्स खोल लेते हैं, तो वे इतने छोटे हो जाते हैं कि यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा पेज किस बारे में है। वर्टिकल टैब्स इसी समस्या का समाधान हैं।

 

यूजर्स को इससे क्या फायदा होगा?

वर्टिकल टैब्स सिर्फ एक दिखावटी बदलाव नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक फायदे हैं:

 

नाम पढ़ना हुआ आसान: जब आप 20-30 टैब्स खोल लेते हैं, तो ऊपर वाली पट्टी में सिर्फ छोटे आइकन दिखते हैं। वर्टिकल लिस्ट में टैब का टाइटल (Headline) साफ नजर आता है, जिससे आपको पता रहता है कि आप किस पेज पर हैं।

 

बेहतर मैनेजमेंट: अगर आप बहुत ज्यादा रिसर्च या मल्टी-टास्किंग करते हैं, तो साइड बार में टैब्स को मैनेज करना और उनके बीच स्विच करना ज्यादा तेज और आसान होता है।

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जगह की बचत: अगर आपको सिर्फ आइकन देखने हैं, तो आप इस साइड बार को छोटा (Collapse) भी कर सकते हैं, जिससे स्क्रीन पर कंटेंट देखने के लिए ज्यादा जगह मिलती है।

 

रीडिंग मोड (Reading Mode): गूगल ने इसके साथ ही 'फुल-पेज रीडिंग मोड' भी दिया है। अब किसी भी आर्टिकल पर राइट-क्लिक करके आप उसे बिना किसी विज्ञापन या फालतू की चीजों के, बिल्कुल एक किताब की तरह पढ़ सकते हैं।

 

इसे कैसे शुरू करें?

यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है। अगर आप इसे आज़माना चाहते हैं, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

क्रोम के सबसे ऊपरी हिस्से (जहां टैब्स होते हैं) पर Right-Click करें। वहाँ “Show Tabs Vertically” का विकल्प चुनें। अगर आपको यह विकल्प नहीं दिख रहा है, तो परेशान न हों। गूगल इसे धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर रहा है, जल्द ही यह आपके ब्राउज़र में पहुंच जाएगा।  Edited by : Sudhir Sharma 

चीन के विश्व नंबर 7 के खिलाड़ी को सीधे सेटों में हराकर इस युवा भारतीय ने किया उलटफेर

भारत के उभरते बैडमिंटन स्टार आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए, वर्ल्ड नंबर 7 और हांगकांग ओपन 2025 के चैंपियन चीन के ली शी फेंग को सीधे गेम्स में 21-13, 21-16 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।

दोनों गेम्स में पूर्व वर्ल्ड नंबर 3 ली की मजबूत शुरुआत के बावजूद, इस युवा भारतीय खिलाड़ी ने बाद के चरणों में अपना दबदबा बनाया और प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। पहले गेम में, आयुष ने शुरुआत में ही वापसी करते हुए स्कोर 4-4 से बराबर कर दिया, जबकि 7-7 तक ली को थोड़ी बढ़त हासिल थी। वहां से, यूएस ओपन 2025 के चैंपियन ने मैच पर पूरी तरह से नियंत्रण बना लिया और घरेलू पसंदीदा खिलाड़ी को पछाड़ते हुए पहला गेम 21-13 से अपने नाम कर लिया।

दूसरा गेम भी लगभग इसी पैटर्न पर चला, जिसमें ली ने शुरुआत में दबाव बनाया और मध्य चरण तक बढ़त बनाए रखी। हालांकि, आयुष ने 13-13 के स्कोर पर अपनी रणनीति बदलते हुए कई बार स्कोर बराबर किया। इस युवा खिलाड़ी ने लगातार छह अंक हासिल करते हुए बढ़त बना ली और 51 मिनट में 21-16 के स्कोर के साथ मैच अपने नाम कर लिया। अब अगले मुकाबले में आयुष का सामना चीनी ताइपे के ची यू जेन से होगा।

संग्राम सिंह अर्जेंटीना की धरती पर MMA फाइट जीतने वाले पहले भारतीय बने

जब रविवार की रात को पूरा भारत सो रहा था, तब एमएमए का आइकन संग्राम सिंह ब्यूनस आयर्स में इतिहास रच रहा था। उन्हें अर्जेंटीना में MMA Fight जीतने वाले पहले भारतीय होने का गौरव हासिल हुआ। उम्र में 16 साल छोटे फ्रांस के फाइटर फ्लोरियन काउडियर को उन्होंने यहां बयूनस आयर्स के खचाखच भरे टिगरे स्पोर्ट्स क्लब स्टेडियम में महज एक मिनट 45 सेकंड में धराशायी कर दिया। तिबस्ली (georgia) और एम्स्टर्डम (नीदरलैंड) में जीत के बाद उन्होंने एमएमए में जीत की हैट्रिक भी पूरी कर ली। इस फाइट में उन्हें कुश्ती के दांव पेंचों का काफी फायदा हुआ।

जीत के बाद रिंग पर दिए उनके एक बयान से पूरा एमएमए एरिना तालियों के शोर से गूंज उठा। दोहरे कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैम्पियन संग्राम सिंह ने कहा कि मेरे लिए जीत-हार कोई मायने नहीं रखती। मैं या तो जीतता हूं या सीखता हूं। मैं अक्सर कहता हूं कि पैशन की कोई उम्र नहीं होती। जैसा कि प्रधानमंत्रीजी अक्सर कहते हैं कि ऊंचे सपने देखो और उनको साकार करने में जुट जाओ।

मेरा भी अर्जेंटीना में फाइट जीतने पर पहले भारतीय बनने का सपना साकार हुआ। उन्होंने आयोजकों के साथ ही अपने कोच भूपेश का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह पिछले 25 साल से उनके साथ हैं। वह भी मुझे कामयाबी दिलाने में दिन-रात जुटे रहे। उन्होंने कहा कि जीत के बाद उन्हें देश विदेश से बधाई संदेशों का तांता लग गया। संग्राम सिंह प्रोफेशनल कुश्ती में वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियन भी रह चुके हैं।

खेल मंत्रालय की फिट इंडिया मूवमेंट के ब्रैंड एम्बेसडर संग्राम सिंह ने कहा कि इस बार हालात उनके लिए काफी मुश्किल थे। कॉम्पीटिशन से दो दिन पहले उनका वजन निर्धारित सीमा से 600 ग्राम अधिक था। दिन भर उन्होंने अपने कोच के साथ कड़ी मेहनत की। खूब पसीना बहाया। दिन भर में आधा गिलास पानी पीया। संग्राम सिंह 83 किलो वजन में उतरे जहां दो किलो की छूट थी। संग्राम सिंह ने कहा कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से बड़ा दबाव महसूस कर रहे थे।

इस अवसर पर मौजूद भारतीय राजदूत और उनके बेटे ने भी इस जीत के बाद बेहद भावुक होकर उन्हें बधाई दी। उस समय पूरा स्टेडियम शोर से गूंज उठा था। स्टेडियम के एक कोने से भारत माता की जय के भी नारे लग रहे थे। संग्राम ने कहा कि मुझे भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि पूरा स्टेडियम मेरी फाइट के दौरान मुझे ही क्यों चीयर-अप कर रहा है।

iPad mini को टक्कर देगा Oppo Pad Mini, 144Hz OLED डिस्प्ले, Snapdragon 8 Gen 5 और दमदार बैटरी जैसे फीचर्स

Oppo कॉम्पैक्ट टैबलेट मार्केट में एंट्री करने की तैयारी में है। कंपनी का नया Pad Mini जल्द लॉन्च हो सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन लीक रिपोर्ट्स में इसके दमदार फीचर्स सामने आए हैं। यह टैबलेट उन यूजर्स को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है जो पोर्टेबल होने के साथ-साथ पावरफुल डिवाइस चाहते हैं। लॉन्च के बाद यह बाजार में मौजूद प्रीमियम कॉम्पैक्ट टैबलेट्स को सीधी टक्कर दे सकता है।

 

144Hz OLED डिस्प्ले और प्रीमियम डिजाइन

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लीक्स के मुताबिक Pad Mini में 8.8 इंच का LTPO AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है, जिसका रेजोल्यूशन 2882×1920 पिक्सल होगा। इसमें 144Hz रिफ्रेश रेट और 1800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस दी जा सकती है, जिससे विजुअल्स काफी शार्प और कलर्स बेहद ब्राइट नजर आएंगे। 3:2 आस्पेक्ट रेशियो इसे काम और वीडियो देखने दोनों के लिए बेहतर बनाता है। डिजाइन की बात करें तो इसमें 5.39mm पतला यूनिबॉडी मेटल चेसिस मिल सकता है और वजन करीब 279 ग्राम होगा, जो इसे काफी स्लिम और हल्का बनाता है।

 

 Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर

 

परफॉर्मेंस के लिए इसमें Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट मिलने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो यह अपने सेगमेंट के सबसे पावरफुल टैबलेट्स में से एक होगा। यह गेमिंग, मल्टीटास्किंग और डेली प्रोडक्टिविटी जैसे काम आसानी से संभाल सकेगा। कैमरा के तौर पर इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर सेंसर दिया जा सकता है, जो फोटो और वीडियो कॉलिंग के लिए उपयोगी होगा।

 

 बैटरी, चार्जिंग और कनेक्टिविटी

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रिपोर्ट्स के अनुसार टैबलेट में 8000mAh की बैटरी दी जा सकती है, जो 67W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी। इससे यह पूरे दिन चलने के साथ जल्दी चार्ज भी हो सकेगा। कनेक्टिविटी के लिए इसमें eSIM सपोर्ट मिलने की संभावना है, जिससे यूजर्स कहीं भी आसानी से इंटरनेट का उपयोग कर सकेंगे।

 

  iPad mini से होगी टक्कर

 

यह टैबलेट Apple iPad mini (8th generation) को सीधी टक्कर दे सकता है। जहां Apple अपने डिवाइस में वॉटर रेजिस्टेंस और बेहतर हार्डवेयर दे सकता है, वहीं Oppo हाई रिफ्रेश रेट OLED डिस्प्ले के जरिए यूजर्स को आकर्षित करने की कोशिश करेगा। फिलहाल कंपनी की ओर से लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन लीक के आधार पर इसकी जल्द एंट्री की उम्मीद की जा रही है।  Edited by : Sudhir Sharma

बिना हाथ पांव के पायल ने शीतल को हराकर उलटफेर करते हुए स्वर्ण जीता, भारत बैंकॉक पैरा तीरंदाजी में शीर्ष पर

दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा चुकी युवा तीरंदाज पायल नाग ने यहां विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में बड़ा उलटफेर करते हुए हमवतन और दुनिया की नंबर एक तीरंदाज शीतल देवी को हराकर स्वर्ण पदक जीता और भारत के शानदार प्रदर्शन की अगुआई की जिसमें देश ने कुल सात स्वर्ण पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

अठारह साल की उभरती हुई तीरंदाज पायल ने कंपाउंड महिला वर्ग के फाइनल में 139-136 से जीत हासिल की। ​​भारत के लिए अभियान यादगार रहा जिसमें देश ने पांच रजत और चार कांस्य पदक सहित कुल 16 पदक जीते।

पायल की यह एक साल से थोड़े ज्यादा समय में शीतल पर दूसरी जीत थी। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2025 में जयपुर में हुए पैरा राष्ट्रीय खेलों में भी शीतल को हराया था।

दुबई 2025 एशियाई युवा पैरा खेलों में पदार्पण करने के बाद पायल अपने दूसरे ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही थीं। उन्होंने दबाव के बावजूद जबरदस्त संयम दिखाते हुए अपने से ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी को मात दी।  पायल ने एक परफेक्ट ‘10’ के साथ शुरुआत की और पहला दौर 27-25 से अपने नाम किया। इसके बाद शीतल ने वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।

दूसरे दौर के बाद स्कोर 54-54 से बराबर था। तीसरे दौर में पायल ने अपने खेल का स्तर और ऊंचा करते हुए दो बार ‘9’ और एक बार ‘10’ का निशाना लगाते हुए 82-80 की बढ़त बना ली।

इसके बाद उन्होंने आखिरी दौर में दो बार ‘10’ का सटीक निशाना लगाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

शीतल के बचपन के कोच कुलदीप वेदवान से प्रशिक्षण लेने वाली पायल की अब तक की यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं रही है।

ओडिशा के बोलांगीर जिले के एक प्रवासी मजदूर की बेटी पायल ने 2015 में ईंट-भट्ठे पर बिजली के एक नंगे तार के संपर्क में आने के बाद अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा दिए थे।

उन्होंने 2023-24 के दौरान कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर में शीतल के साथ ही ट्रेनिंग की थी। इसके बाद शीतल सोनीपत चली गई थीं।

बिना हाथों वाली शीतल भारत की सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली पैरा तीरंदाज बन गई हैं। उन्होंने 2022 में एशियाई पैरा खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते और पेरिस 2024 में मिश्रित टीम कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक पदक विजेता बन गईं।

 पायल ने 2025 में राष्ट्रीय पदार्पण करने के बाद से काफी प्रगति की है। जयपुर में शीतल को हराने के अलावा उन्होंने खेलो इंडिया पैरा खेलों में रजत पदक जीता और इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता। राष्ट्रीय चैंपियनशिप के क्वालीफायर में वह शीतल से पीछे रही थीं।

भारत के लिए तोमन कुमार और भावना ने भी अपनी स्पर्धाओं में पहला स्थान हासिल किया।

तोमन ने कंपाउंड पुरुषों के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोनाथन मिल्ने को 146-142 से हराया जबकि भावना ने रिकर्व महिलाओं के फाइनल में थाईलैंड की फत्थराफोन पट्टावेओ को 6-0 से मात दी।

दो बार के पैरालंपिक पदक विजेता हरविंदर सिंह को रिकर्व फाइनल में इंडोनेशिया के खोलिडिन से 3-7 से हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

वहीं स्वाति चौधरी ने भी रजत पदक जीता। उन्हें डब्ल्यू1 महिलाओं के स्वर्ण पदक मैच में दक्षिण कोरिया की ओके ग्यूम किम से 3-7 से हार का सामना करना पड़ा।

इससे पहले श्याम सुंदर स्वामी ने अपने सीनियर साथी खिलाड़ी और पेरिस पैरालंपिक के पदक विजेता राकेश कुमार को कड़े मुकाबले वाले प्लेऑफ में हराकर कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा के कांस्य पदक मैच में स्वामी प्लेऑफ में 10-9 से विजयी रहे। इससे पहले दोनों खिलाड़ियों ने समान 143 अंक बनाए थे और इसलिए टाईब्रेक का सहारा लेना पड़ा।पेरिस पैरालंपिक्स में मिश्रित टीम के कांस्य पदक विजेता राकेश ने टाईब्रेक में हार के कारण चौथे स्थान पर रहकर अपना अभियान समाप्त किया।

महिला वर्ग की व्यक्तिगत स्पर्धा में अंजुम तनवार भी दक्षिण कोरिया की प्रतिद्वंदी के खिलाफ कांस्य पदक मैच में 2-6 से हारने के बाद चौथे स्थान पर रहीं।बैंकॉक में हाल में इसी स्थान पर खेले गए एशिया कप के पहले चरण में भारत ने दो स्वर्ण, चार रजत और चार कांस्य सहित 10 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था।

Gemma 4: गूगल ने पेश किया अब तक का सबसे शक्तिशाली ओपन AI मॉडल; जानें इसकी खासियतें और इस्तेमाल का तरीका

गूगल ने अपनी अब तक की सबसे सक्षम ओपन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल सीरीज 'Gemma 4' से पर्दा उठा दिया है। इस कदम को दुनिया भर के डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और व्यवसायों के लिए शक्तिशाली AI एप्लिकेशन बनाने की राह में एक बड़ी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। 

 

गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) द्वारा विकसित यह मॉडल विशेष रूप से 'एडवांस्ड रीजनिंग' और 'जटिल ऑटोमेटेड वर्कफ़्लो' के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के आधिकारिक ब्लॉग के अनुसार इसे अपाचे 2.0 (Apache 2.0) लाइसेंस के तहत जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि कोई भी इसका व्यावसायिक उपयोग, संशोधन और निर्माण पूरी तरह से मुफ्त में कर सकता है। एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि व्यावसायिक उपयोग के लिए फ्री लाइसेंस देकर गूगल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

 

क्या है Gemma 4 की खासियत?

 

Gemma 4 को उसी तकनीक और रिसर्च पर बनाया गया है जिस पर गूगल का मुख्य मॉडल Gemini 3 आधारित है। इसके फीचर्स- 
चार अलग-अलग साइज: यह मॉडल मोबाइल फोन से लेकर बड़े सर्वर तक के लिए चार आकारों में उपलब्ध है।  बिना इंटरनेट के काम: इसके छोटे 'एज मॉडल्स' (2 बिलियन और 4 बिलियन पैरामीटर्स) को विशेष रूप से फोन, रास्पबेरी पाई और एनवीडिया जेटसन जैसे डिवाइस पर ऑफलाइन चलाने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि बैटरी और रैम की बचत हो सके।

 

 बहुभाषी क्षमता: यह 140 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर उपयोगी बन जाता है।

 

स्वायत्त कार्य (Autonomous Action): यह केवल चैटबॉट तक सीमित नहीं है, बल्कि मल्टी-स्टेप प्लानिंग, कोड जनरेशन और ऑडियो-विजुअल प्रोसेसिंग जैसे जटिल काम भी कर सकता है।

 

अब आपके स्मार्टफोन पर चलेगा शक्तिशाली AI

'एंड्रॉयड डेवलपर्स ब्लॉग' के मुताबिक, Gemma 4 की सबसे बड़ी खूबी इसका मोबाइल पर सीधे चलना है। डेवलपर्स आज से ही 'AICore डेवलपर प्रीव्यू' के जरिए इसका उपयोग कर सकते हैं। गूगल ने पुष्टि की है कि Gemma 4 के लिए लिखा गया कोड इस साल के अंत में आने वाले Gemini Nano 4 सक्षम डिवाइस पर भी काम करेगा। गूगल के 'AI Edge Gallery' ऐप के जरिए यूजर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के 'एजेंट स्किल्स' जैसे फीचर्स का अनुभव ले सकेंगे, जो पूरी तरह से डिवाइस पर ही प्रोसेस होते हैं।

 

कैसे करें Gemma 4 का उपयोग?

यदि आप एक डेवलपर, छात्र या व्यवसायी हैं, तो आप इन तरीकों से इसकी शुरुआत कर सकते हैं:

बड़े मॉडल्स (31B और 26B): इनका उपयोग Google AI Studio के जरिए किया जा सकता है।


डाउनलोड: मॉडल के वेट (Weights) को Hugging Face, Kaggle या Ollama से सीधे डाउनलोड किया जा सकता है।


टूल सपोर्ट: यह मॉडल पहले दिन से ही Hugging Face Transformers, vLLM, llama.cpp और NVIDIA NIM जैसे लोकप्रिय टूल्स को सपोर्ट करता है।

 

डेस्कटॉप और रोबोटिक्स: यह विंडोज, लिनक्स और मैक ओएस पर चलता है। साथ ही, रास्पबेरी पाई 5 के जरिए इसे रोबोटिक्स में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

बाजार में कड़ी टक्कर और विशेषज्ञों की राय

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने Gemma 4 की कार्यक्षमता की सराहना करते हुए इसे 'इंटेलिजेंस-पर-पैरामीटर' के मामले में सबसे कुशल बताया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसे मेटा (Meta) की Llama सीरीज और चीन के DeepSeek मॉडल्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। Edited by : Sudhir Sharma 

Khelo India में दूधवाले ने जीता स्वर्ण पदक, उठ गया था पिता का साया

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन ने बड़े भाई के साथ घर-घर जाकर दूध पहुंचाने के साथ कुश्ती का अभ्यास करते हुए अपने सपने को जिंदा रखा।

जम्मू के जोरावर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय हमाम के लिए जिंदगी और खेल हमेशा साथ-साथ चले हैं। पांच साल पहले पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके और उनके बड़े भाई के कंधों पर आ गई। दोनों ने मिलकर दूध बेचकर घर चलाया और इसी के साथ हमाम ने अपने कुश्ती के सपने को जिंदा रखा।

आखिरकार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में यह संघर्ष रंग लाया, जहां हमाम ने पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके 14 साल के कुश्ती करियर का पहला राष्ट्रीय स्तर का स्वर्ण पदक है।

पदक जीतने के बाद हमाम ने SAI Media से कहा, “मेरे बड़े भाई भी पहलवान थे और राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। पिता के निधन के बाद सारी जिम्मेदारी हम पर आ गई। मेरे भाई को कुश्ती छोड़नी पड़ी और उन्होंने दूध बेचना शुरू कर दिया। मैं भी उनके साथ दूध देने जाता था क्योंकि परिवार चलाना जरूरी था।

लेकिन मेरे भाई ने मुझे हमेशा कुश्ती जारी रखने के लिए प्रेरित किया और मुझे दंगलों में लेकर जाते थे। हमाम ने बताया कि उनके पिता की छोड़ी हुई भैंसें ही परिवार की आजीविका का साधन बनीं। मेरे भाई ने दूध बेचकर घर चलाया और मैं उनकी मदद करता था। लेकिन जब मैंने मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा, तो इस खेल से मुझे लगाव हो गया।”

सीमित संसाधनों के बावजूद हमाम ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। वे अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करते हैं और मैट पर ट्रेनिंग के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर जम्मू तक का सफर तय करते हैं। वह भी अपने काम की जिम्मेदारियों के साथ।

उन्होंने कहा, “साई सेंटर जम्मू में है और हम निचले इलाके में रहते हैं, इसलिए वहां नियमित रूप से जाना मुश्किल होता है। हम आमतौर पर प्रतियोगिताओं के दौरान ही वहां जाते हैं, वरना गांव के अखाड़ों में ही अभ्यास करते हैं। मेरे पास कोई व्यक्तिगत कोच नहीं है। अखाड़े में सीनियर पहलवान हमें मार्गदर्शन देते हैं। जब हम मैट पर अभ्यास करते हैं, तब वहां कोच होते हैं। गांवों में हमें शहरों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। अगर बेहतर सुविधाएं मिलें, तो हमारे क्षेत्र के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीत सकते हैं।”

हमाम के लिए यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है।
उन्होंने अंत में कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लगा। यहां की सुविधाएं बहुत अच्छी थीं। हम एक पिछड़े इलाके से आते हैं, जहां कुश्ती के लिए ज्यादा समर्थन नहीं है, इसलिए हमें दूर-दूर तक जाना पड़ता है। यह पहली बार है जब हमारे लिए इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित की गई है। अगर ऐसे और आयोजन होते रहें, तो हम और पदक जीत सकते हैं।”

Gmail की 22वीं सालगिरह पर बड़ा तोहफा, अब बदल सकेंगे अपनी पुरानी ईमेल आईडी, जानें आसान स्टेप्स

दुनिया के अधिकतर इंटरनेट यूजर्स की तरह आपने भी शायद अपना पहला जीमेल अकाउंट सालों पहले किसी अस्थायी काम या मस्ती-मजाक के लिए बनाया होगा। लेकिन समय के साथ वही 'अजीब' दिखने वाली आईडी हमारे बैंक, सरकारी दस्तावेजों और सोशल मीडिया से जुड़ गई, जिसे बदलना अब तक लगभग असंभव और बेहद थकाऊ काम था।

 

 गूगल का यह कदम उन करोड़ों यूजर्स के लिए राहत लेकर आया है जो सालों पुराने 'Goofy' ईमेल एड्रेस से छुटकारा पाना चाहते थे।जीमेल अब अपनी 22वीं वर्षगांठ (लॉन्च: 1 अप्रैल, 2004) मना रहा है। इस खास मौके पर गूगल ने एक क्रांतिकारी फीचर पेश किया है, जिससे यूजर्स अपनी प्राथमिक ईमेल आईडी को बदल सकेंगे।

 

क्या हैं इस नए अपडेट की खासियतें?

गूगल का यह नया विकल्प यूजर्स की सबसे बड़ी समस्या का समाधान करता है। पुराना यूजरनेम बना रहेगा 'एलियास' (Alias): जब आप अपनी 'गूगल अकाउंट' ईमेल आईडी बदलेंगे, तो आपका पुराना यूजरनेम सक्रिय रहेगा। यह आपकी नई आईडी से लिंक रहेगा, जिससे पुरानी आईडी पर आने वाले ईमेल भी आपको नए इनबॉक्स में मिलते रहेंगे।

 

डाटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

आपकी गूगल फोटोज, ड्राइव की फाइल्स और गूगल शीट्स का एक्सेस दोनों अकाउंट्स पर बना रहेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके द्वारा छोड़े गए पुराने यूजरनेम से कोई दूसरा व्यक्ति नया अकाउंट नहीं बना पाएगा।

 

सुरक्षा और सावधानी: यदि आपकी पुरानी आईडी फेसबुक, ऐपल आईडी, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप या आधार जैसे महत्वपूर्ण खातों से जुड़ी है, तो सावधानी बरतें। गूगल सलाह देता है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर जाकर भी अपनी जानकारी अपडेट कर लें।

 

कैसे बदलें अपनी Gmail आईडी? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

अगर आप अपनी ईमेल आईडी बदलना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:

 

सेटिंग्स एक्सेस करें: ब्राउज़र पर myaccount.google.com/google-account-email पर जाएं।

 

पर्सनल इंफो: 'Personal info' टैब पर क्लिक करें, फिर 'Email' और उसके बाद 'Google Account email' पर जाएं।

 

बदलाव की प्रक्रिया: 'Change Google Account email' विकल्प चुनें, अपना नया मनपसंद यूजरनेम दर्ज करें और कन्फर्म करें।

 

यदि आपको 'Change Google Account email' का विकल्प नहीं दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि यह फीचर अभी आपके क्षेत्र में रोलआउट नहीं हुआ है। गूगल इसे चरणों (Phases) में वैश्विक स्तर पर जारी कर रहा है।

 

सिर्फ 'डिस्प्ले नाम' बदलना है? तो अपनाएं ये तरीका

अगर आप ईमेल आईडी नहीं, बल्कि सिर्फ वह नाम बदलना चाहते हैं जो ईमेल भेजने पर दूसरों को दिखाई देता है, तो ये स्टेप्स फॉलो करें:

  • अपने गूगल अकाउंट में साइन-इन करें।
  • ऊपर बाईं ओर 'Personal info' पर क्लिक करें।
  • 'Name' वाले विकल्प पर जाएं।
  • अपने वर्तमान नाम के बगल में 'Edit' (पेंसिल आइकन) पर क्लिक करें।
  • नया नाम अपडेट करें और 'Save' पर क्लिक कर दें। Edited by : Sudhir Sharma