एप्पल में बड़ा बदलाव: 15 साल बाद CEO पद छोड़ेंगे टिम कुक, जॉन टर्नस संभालेंगे कमान

tim cook

एप्पल के CEO टिम कुक सितंबर में अपने मौजूदा पद से इस्तीफा दे देंगे और एप्पल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर नई भूमिका शुरू करेंगे। एप्पल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जॉन टर्नस, CEO की भूमिका संभालेंगे।

 

15 साल से टिम कुक इस अहम जिम्मेदारी को निभा रहे थे। 65 वर्षीय कुक इस्तीफे के बाद भी वे कंपनी से जुड़े रहेंगे। वे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर नई पारी की शुरुआत करेंगे।

 

टिम कुक 1998 में वर्ल्डवाइड ऑपरेशंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में Apple में शामिल हुए थे। साल 2005 से 2011 तक उन्होंने कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के रूप में काम किया।

 

साल 2011 में एपल के को-फाउंडर स्टीव जाब्स के जाने के बाद टिम कुक कंपनी के सीईओ बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान एप्पल कंपनी ने आसमान की बुलंदियों को छुआ और कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 4 ट्रिलियन डॉलर तक जा पहुंचा। उन्होंने चीन पर निर्भरता कम करते हुए भारत पर फोकस किया। इससे कंपनी को काफी फायदा हुआ।

edited by : Nrapendra Gupta

चीन में ‘Humanoid Robot’ ने Half Marathon में इंसानों का World Record तोड़ा (Video)

चीन की एक कंपनी द्वारा बनाए गए एक ‘ह्यूमनॉइड रोबोट’ ने रविवार को  शौकिया धावकों के साथ हुई एक रेस में 50 मिनट 26 सेकंड के समय के साथ इंसानों का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।

चीन की ‘शेन्जेन ऑनर स्मार्ट टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ द्वारा बनाए गए ‘ह्यूमनॉइड रोबोट’ ‘फ्लैश’ ने 2026 बीजिंग ई-टाउन हाफ मैराथन में ऑटोनॉमस नेविगेशन श्रेणी में जीत हासिल की। यहां की आधिकारिक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ‘फ्लैश’ ने इंसानों के 57:20 के विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

पुरुषों की हाफ मैराथन का विश्व रिकॉर्ड पिछले महीने पुर्तगाल में लिस्बन हाफ मैराथन में युगांडा के स्टार लंबी दूरी के धावक जैकब किप्लिमो ने बनाया था। चीन, जर्मनी, फ्रांस और ब्राजील की 100 से ज्यादा टीमों ने इंसानी धावकों के साथ इस दौड़ में हिस्सा लिया।

प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार रोबोट और इंसानी धावकों ने 21 किलोमीटर का एक ही रास्ता तय किया, लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग लेन का इस्तेमाल किया।सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार रोबोट के लिए कट-ऑफ समय तीन घंटे 40 मिनट निर्धारित किया गया था।

90% सिंथेटिक ट्रैक है घटिया क्वालिटी के, भारतीय एथलेटिक्स में बड़ा खुलासा

भारत में एथलेटिक्स के बुनियादी ढांचे को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के प्रवक्ता आदिल सुमरिवाला ने कहा है कि देश में इस्तेमाल हो रहे लगभग 90 प्रतिशत सिंथेटिक ट्रैक मानकों के अनुरूप नहीं हैं।सुमरिवाला ने कहा कि यह समस्या केवल सामग्री की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया, मार्किंग और समग्र निर्माण मानकों में भी गंभीर खामियां हैं।
उन्होंने बताया कि विश्व एथलेटिक्स (डब्ल्यूए) ने इस मुद्दे पर एएफआई को सक्रिय भूमिका निभाने और स्थिति सुधारने के निर्देश दिए हैं।

सुमरिवाला ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मैं किसी ट्रैक का नाम नहीं लूंगा, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि भारत में 90 प्रतिशत से अधिक ट्रैक सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और मार्किंग के लिहाज से मानकों से नीचे हैं। हमने तोक्यो में विश्व एथलेटिक्स के साथ एक बैठक की थी (पिछले वर्ष विश्व चैंपियनशिप के दौरान), जहां उन्होंने हमें कुछ आंकड़े दिखाए, जो काफी चौंकाने वाले थे।”उन्होंने बताया, “कुछ मामलों में स्थिति बेहद खराब है, जहां असली पॉलीयुरेथेन की जगह पुराने टायरों के रबर का उपयोग किया जा रहा है और ऊपर से केवल रंग चढ़ा दिया जाता है। ऐसे ट्रैक कुछ महीनों में ही खराब हो जाते हैं और उन पर प्रदर्शन करना मुश्किल हो जाता है।”

सुमरिवाला ने कहा कि एएफआई ने 14 और 15 अप्रैल को कोहिमा में आयोजित अपनी वार्षिक आम बैठक के दौरान ट्रैक प्रमाणन प्रक्रिया में शामिल होने का निर्णय लिया है।उन्होंने बताया कि महासंघ अब प्रमाणित और विश्वसनीय विक्रेताओं की सूची तैयार करने पर भी काम करेगा और विदेशी विशेषज्ञों की मदद से अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में पहले से मौजूद विश्व एथलेटिक्स प्रमाणित ट्रैकों पर पुनः प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होगी।

इसी बीच, एएफआई ने हाल ही में खिलाड़ियों के प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) समझौतों पर लगाए गए प्रतिबंध को फिलहाल तीन महीने के लिए स्थगित कर दिया है, ताकि इस पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा सके।
सुमरिवाला ने कहा, “महासंघ का उद्देश्य खिलाड़ियों की सुरक्षा और हितों की रक्षा करना है, क्योंकि कई अनुबंधों में पारदर्शिता और सुरक्षा की कमी देखी गई है।”

Vivo Y05 : सबसे सस्ता स्मार्टफोन भारत में लॉन्च, 6500mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले और Extended RAM के साथ

Vivo ने भारत में अपना नया बजट स्मार्टफोन Vivo Y05 लॉन्च कर दिया है। यह डिवाइस कंपनी के एंट्री-लेवल पोर्टफोलियो को मजबूत करता है। इससे पहले इस फोन को मलेशिया और सऊदी अरब जैसे चुनिंदा बाजारों में पेश किया गया था, जिसके बाद अब इसे भारतीय बाजार में उतारा गया है। फोन Vivo की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर भी उपलब्ध है।

 

कीमत और उपलब्धता

 

Vivo Y05 के बेस वेरिएंट (4GB RAM + 64GB स्टोरेज) की कीमत ₹12,999 रखी गई है। वहीं 4GB RAM और 128GB स्टोरेज वाला दूसरा वेरिएंट भी पेश किया गया है, लेकिन इसकी कीमत का अभी खुलासा नहीं किया गया है। यह स्मार्टफोन Midnight Blue और Champagne Gold जैसे दो कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।

 

फीचर्स और स्पेसिफिकेशन

 

Vivo Y05 4G एक फीचर-पैक्ड बजट स्मार्टफोन है, जिसमें बड़ा डिस्प्ले, दमदार परफॉर्मेंस और लंबी बैटरी लाइफ का कॉम्बिनेशन मिलता है।

 

डिस्प्ले: फोन में 6.74 इंच का HD+ LCD पैनल (1600×720) दिया गया है, जिसमें वॉटरड्रॉप नॉच डिजाइन है। 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ स्मूद स्क्रॉलिंग और एनिमेशन मिलते हैं। इसमें 260 PPI पिक्सल डेंसिटी और 1200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस दी गई है। साथ ही हाई-ब्राइटनेस Eye-Care मोड भी मौजूद है।

परफॉर्मेंस: यह स्मार्टफोन Unisoc T7225 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर (12nm, 1.8GHz तक) पर काम करता है। फोन में Android 16 के साथ OriginOS 6.0 मिलता है।
 

मेमोरी: इसमें 4GB RAM दी गई है, जिसे Extended RAM तकनीक के जरिए 8GB तक बढ़ाया जा सकता है। यानी फिजिकल और वर्चुअल RAM के कॉम्बिनेशन से बेहतर मल्टीटास्किंग और तेज ऐप स्विचिंग मिलती है।

कैमरा: फोन में 8MP का रियर कैमरा (f/2.0) LED फ्लैश के साथ और 5MP का फ्रंट कैमरा (f/2.2) दिया गया है। इसमें नाइट, पोर्ट्रेट, लाइव फोटो, टाइम-लैप्स और डॉक्यूमेंट जैसे कई शूटिंग मोड्स मिलते हैं।

बैटरी: Vivo Y05 में 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो कंपनी के मुताबिक 29 घंटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकती है। इसमें 15W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग सपोर्ट भी मौजूद है।
 

ड्यूरेबिलिटी: फोन में मिलिट्री-ग्रेड ड्रॉप प्रोटेक्शन और IP65 रेटिंग दी गई है, जो इसे धूल और पानी से सुरक्षित बनाती है।
 

कनेक्टिविटी: इसमें Wi-Fi, Bluetooth 5.2, OTG सपोर्ट, FM रेडियो और IR सेंसर जैसे फीचर्स भी शामिल हैं।

 

कुल मिलाकर, Vivo Y05 बजट सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प के तौर पर सामने आया है, जिसमें बड़ी बैटरी, स्मूद डिस्प्ले और उपयोगी फीचर्स का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है। Edited by : Sudhir Sharma

फिडे विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनी वैशाली

भारतीय महिला शतरंज खिलाड़ी आर वैशाली ने फिडे विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया। वह यह खिताब को जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस उपलब्धि पर वैशाली को बधाई दी। बुधवार को 14 राउंड के इस मुकाबले में आखिरी राउंड में कतेरीना लाग्नो को हराकर वैशाली ने खिताब अपने नाम किया।

इस खिताबी जीत के साथ ही उन्होंने इस साल के आखिर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप का टिकट मिल गया है, जहां उनका सामना चीन की जू वेनजुन से होगा।

केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए आर वैशाली को बधाई दी है। डॉ. मांडविया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ” भारत की नारी शक्ति हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। फिडे महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय बनकर इतिहास रचने पर आर वैशाली को हार्दिक बधाई। पूरे भारत को आप पर गर्व है।”

विश्व चैंपियन दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी विक्टर एक्सेलसन ने लिया संन्यास

Vicktor Axelsen

दो बार के ओलंपिक और विश्व चैंपियन दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी विक्टर एक्सेलसन ने बुधवार को संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि लगातार चोटिल होने के कारण उन्हें यह फैसला करना पड़ा।डेनमार्क का यह 32 वर्षीय खिलाड़ी पिछले साल अक्टूबर से पीठ की समस्या के कारण किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाया है। उन्होंने इसके लिए सर्जरी भी कराई लेकिन उनका दर्द अब भी बना रहता है। 

तीन बार के यूरोपीय चैंपियन एक्सेलसन ने ‘बैडमिंटन यूरोप’ से कहा, ‘‘जैसा कि अधिकतर लोग जानते हैं कि मैं काफी समय से अपनी पीठ की समस्या से जूझ रहा हूं। पिछले साल अप्रैल में सर्जरी कराने और लंबे समय तक ‘रिहैबिलिटेशन’ से गुजरने के बाद दुर्भाग्य से अक्टूबर में यह दर्द फिर से उबर गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दर्द के कारण मैं खेल नहीं पा रहा हूं और अभ्यास भी नहीं कर पा रहा हूं। इस कारण मुझे यह बेहद मुश्किल फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’ 

एक्सलसेन 183 सप्ताह तक विश्व में नंबर एक खिलाड़ी रहे हैं और वह इस मामले में तीसरे स्थान पर काबिज हैं। उन्होंने कहा कि दर्द कम न होने और डॉक्टरों का खेल जारी रखने पर एक और सर्जरी की चेतावनी दिए जाने के बाद आखिर में उन्हें अपने शरीर की बात सुननी पड़ी।

मिलनसार स्वभाव का यह खिलाड़ी अपने पूरे करियर में अस्थमा से जूझता रहा है। उन्होंने तोक्यो और पेरिस ओलंपिक में लगातार स्वर्ण पदक जीते तथा 2017 और 2022 विश्व चैंपियनशिप में शीर्ष स्थान हासिल किया। वह यूरोपीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली डेनमार्क की छह टीमों का भी हिस्सा रहे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह फैसला चिकित्सकों से परामर्श करने के बाद लिया है। उनका कहना है कि मुझे अभी जो दर्द हो रहा है, उसके लिए शायद एक और सर्जरी करवानी पड़े। अगर सर्जरी सफल नहीं रही तो इससे भी गंभीर प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। मेरा शरीर मुझे रुकने का संकेत दे रहा है और मुझे अपने डॉक्टरों की सलाह माननी होगी।’’एक्सलसेन अपना आखिरी प्रतिस्पर्धी मैच अक्टूबर 2025 में डेनमार्क ओपन में खेला था। 

रिलायंस फाउंडेशन की बड़ी पहल, 10 लाख ‘साइबर सखी’ तैयार होंगी, महिलाओं को मिलेगा साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

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रिलायंस फाउंडेशन ने ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘e-SafeHER’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह एक साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण पहल है, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली C-DAC संस्था (‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग’) के साथ मिलकर शुरू किया गया है। 

 

इस कार्यक्रम का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर देशभर में 10 लाख महिलाओं को ‘साइबर सखी’ के रूप में तैयार करना है, ताकि वे सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें। मध्य प्रदेश और ओडिशा से कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा। 

महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक और सक्षम बनाने वाला कार्यक्रम e-SafeHER के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षा, डिजिटल लेन-देन और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पहल खास तौर पर उन महिलाओं पर केंद्रित है, जो तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रही हैं। रिलायंस फाउंडेशन इस कार्यक्रम को देशभर में स्वयं सहायता समूहों और अपने जमीनी नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाएगा, जबकि C-DAC प्रशिक्षण सामग्री और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा।

 

इस मौके पर रिलायंस फाउंडेशन की डायरेक्टर ईशा अंबानी ने कहा, “भारत में ग्रामीण महिलाएं पहले से कहीं ज्यादा तेजी से ऑनलाइन आ रही हैं। रिलायंस फाउंडेशन का उद्देश्य सिर्फ डिजिटल पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने के लिए जरूरी जानकारी और कौशल देना भी है। e-SafeHER के जरिए हम महिलाओं को यह सिखाना चाहते हैं कि वे डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल आत्मविश्वास के साथ करें और अपने जीवन और आजीविका को मजबूत बनाएं।”

 

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “देश में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए हम, e-SafeHER जैसी पहल के जरिए दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंच बना रहे हैं। ताकि वे डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और सशक्त बन सकें। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसे आगे बड़े स्तर पर अपनाया और विस्तार दिया जा सकता है।”

 

रिलायंस फाउंडेशन का कहना है कि यह पहल महिलाओं के डिजिटल सशक्तिकरण के उसके व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत डिजिटल साक्षरता, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

BADMINTION ASIA CHAMPIONSHIPS : 61 साल बाद फाइनल में पहुंचा भारत, आयुष शेट्टी ने जीता ऐतिहासिक सिल्वर

Asia Championships Final : भारतीय युवा शटलर आयुष शेट्टी (Ayush Shetty) ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। 20 साल के इस खिलाड़ी ने मेंस सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। हालांकि फाइनल में उन्हें चीन के वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी शी यू की के खिलाफ 8-21, 10-21 से हार का सामना करना पड़ा।

 

 

61 साल बाद भारतीय खिलाड़ी फाइनल में

 

आयुष शेट्टी से पहले आखिरी बार 1965 में कोई भारतीय खिलाड़ी इस टूर्नामेंट के मेंस सिंगल्स फाइनल में पहुंचा था। उस समय दिनेश खन्ना ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था।

अब 61 साल बाद आयुष ने फाइनल में जगह बनाकर इस लंबे इंतजार को खत्म किया।

 

सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय शटलर

 

इस हार के बावजूद आयुष शेट्टी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले भारत को इस कैटेगरी में सिर्फ 1965 में दिनेश खन्ना के रूप में गोल्ड मिला था।

 

 भारत का 19वां मेडल

 

1962 से खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में यह भारत का कुल 19वां मेडल है।

भारत ने अब तक:

 

  • 2 गोल्ड
  • 1 सिल्वर (आयुष शेट्टी)
  • 16 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं

मेंस सिंगल्स में 1965 में दिनेश खन्ना ने गोल्ड जीता था, जबकि 2023 में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने मेंस डबल्स में गोल्ड अपने नाम किया था।

 

 

पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन

 

आयुष शेट्टी का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा। उन्होंने कई बड़े खिलाड़ियों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया।

 

  • वर्ल्ड नंबर 1
  • वर्ल्ड नंबर 4
  • वर्ल्ड नंबर 7

 

जैसे टॉप खिलाड़ियों को हराकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की। सेमीफाइनल में उन्होंने डिफेंडिंग चैंपियन कुन्लावत वितिदसर्न को हराकर फाइनल में जगह बनाई।

हार से सीखेंगे आयुष

 

फाइनल के बाद आयुष ने माना कि वह अपने प्रदर्शन से थोड़ा निराश हैं, लेकिन उन्होंने इसे सीखने का मौका बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी फिटनेस, ताकत और गेम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा हफ्ता उनके करियर के लिए शानदार रहा और वह अपने प्रदर्शन से खुश हैं।

 

 भविष्य का बड़ा सितारा

 

आयुष शेट्टी ने इस टूर्नामेंट में साबित कर दिया कि वह भारतीय बैडमिंटन के उभरते हुए सितारे हैं। 61 साल बाद फाइनल तक पहुंचना और सिल्वर जीतना एक बड़ी उपलब्धि है। अगर वह इसी तरह मेहनत करते रहे, तो आने वाले समय में भारत के लिए गोल्ड मेडल भी जीत सकते हैं। आयुष शेट्टी ने भले ही फाइनल नहीं जीता, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से दिखा दिया कि भारतीय बैडमिंटन का भविष्य मजबूत हाथों में है।

फाइनल में उलटफेर नहीं कर पाए आयुष, चीनी खिलाड़ी से सीधे सेटों में हारे

दुनिया के दूसरे नंबर के पुरुष सिंगल्स खिलाड़ी शि यू की ने यहां खेली जा रही बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 के फाइनल में रविवार को “जायंट किलर” आयुष शेट्टी की जीत का सिलसिला रोक दिया। चीनी खिलाड़ी ने 20 साल के आयुष शेट्टी पर 21-8, 21-10 से शानदार जीत दर्ज की।

2025 पेरिस वर्ल्ड चैंपियनशिप के गोल्ड मेडलिस्ट यूकी ने शुरू से ही मैच पर कंट्रोल कर लिया, उन्होंने पहला गेम 21-8 के स्कोर के साथ शानदार अंदाज में जीता। तीन बार के ऑल इंग्लैंड ओपन चैंपियन ने अपने स्मैश अच्छे से लगाए, जिससे आयुष की डिफेंसिव कमजोरी सामने आ गई और उन्हें नेट्स पर आने से रोक दिया।

आयुष ने गेम 2 में अच्छी शुरुआत की, 6-2 की बढ़त बनाई, लेकिन फिर यू की ने शानदार वापसी करते हुए लगातार 6 पॉइंट लिए, दूसरे गेम के ब्रेक पर स्कोर यू की के पक्ष में 11-8 था। इसके बाद सब यू की ही रहा क्योंकि दुनिया के 25वें नंबर के आयुष के पास यूकी के शॉट्स का कोई जवाब नहीं था, जो एक जैसे सटीक और दमदार थे।

13 स्वर्ण पदक जीतकर युवा भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने दक्षिण एशियाई चैंपियनशिप में बनाया दबदबा

भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने शनिवार को यहां दक्षिण एशियाई युवा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में अलग-अलग वर्ग में 13 स्वर्ण पदक जीतकर अपना क्षेत्रीय दबदबा साबित कर दिया।

यह टूर्नामेंट एशियाई युवा चैंपियनशिप के लिए क्वालीफायर भी है। भारत के प्रियनुज भट्टाचार्य ने अंडर-19 लड़कों के एकल फाइनल में हमवतन पुनीत बिस्वास को 3-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

युगल में एमआर बालमुरुगन और मेहान सेंथिल ने पहले गेम में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए बांग्लादेश के अबुल हसीब और नफीज इकबाल को हराकर खिताब अपने नाम किया। अंडर-15 लड़कों के वर्ग में आदित्य दास ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में हमवतन खिलाड़ी अक्षय किरिकारा को हराया।

युगल का खिताब भी भारत के ही पास रहा जिसमें ऋषान चट्टोपाध्याय और आकाश राजवेलु ने नेपाल के खिलाफ पांच गेम तक चले कड़े मुकाबले में जीत हासिल की।

लड़कियों के वर्ग में जेनिफर वर्गीज ने एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए अंडर-19 फाइनल में हमवतन अनन्या मुरलीधरन को हराया जबकि अंकोलिका चक्रवर्ती ने आहोना रे को पछाड़कर अंडर-15 का खिताब जीता।भारत ने लड़कियों के युगल के दोनों वर्ग में भी क्लीन स्वीप किया। मिश्रित युगल में भी भारत का दबदबा रहा।