बॉर्डर टाउन से Miss Universe J&K तक | Bhanvi Bhardwaj | Rajouri district Jammu

राजौरी के नौशेरा जैसे बॉर्डर टाउन से निकली Bhanvi Bhardwaj ने Miss Universe जम्मू-कश्मीर तक का सफर तय किया।
ये सिर्फ़ एक ताज की कहानी नहीं है, बल्कि हिम्मत, सपनों की कहानी है।
क्योंकि जहाँ Resources कम होते हैं, वहाँ हौसले बड़े होते हैं।
@bhanvistic

Miss Universe Jammu Kashmir, Small Town Success Story, Women Empowerment

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HMD Vibe 2 5G : AI फीचर्स और 6000mAh बैटरी से मचाएगा धमाल मचाएगा सस्ता स्मार्टफोन

HMD Vibe 2 5G

HMD ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन HMD Vibe 2 5G लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला स्मार्टफोन है जिसमें Sarvam AI द्वारा विकसित Indus AI सपोर्ट दिया गया है। कंपनी के मुताबिक Sarvam AI, Sanchar Saathi और Flipkart जैसी साझेदारियों के जरिए HMD भारत-केंद्रित इनोवेशन, डिजिटल सुरक्षा और सुलभ टेक्नोलॉजी अनुभव को मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों तक पहुंचाने पर फोकस कर रही है।

इसकी शुरुआती लॉन्च कीमत 9,499 रुपए रखी गई है। HMD Vibe 2 5G को दो वेरिएंट — 4GB + 64GB और 4GB + 128GB — में लॉन्च किया गया है। यह स्मार्टफोन Cosmic Lavender, Nordic Blue और Peach Pink जैसे तीन कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा।

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कंपनी के मुताबिक HMD Vibe 2 5G खासतौर पर युवा भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह स्मार्टफोन AI आधारित फीचर्स, भविष्य के लिए तैयार 5G कनेक्टिविटी और प्रीमियम डिजाइन के साथ सब-10 हजार रुपये की कैटेगरी में पेश किया गया है।

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HMD Vibe 2 5G में लेटेस्ट Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम दिया गया है। फोन में 6,000mAh की बड़ी एडैप्टिव बैटरी मिलती है, जिसे 18W इन-बॉक्स चार्जर का सपोर्ट प्राप्त है। स्मार्टफोन में IP64 वाटर और डस्ट रेजिस्टेंस के साथ 120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले दिया गया है। यह ऑक्टा-कोर 2.3GHz प्रोसेसर से लैस है। फोटोग्राफी के लिए इसमें 50MP डुअल AI कैमरा सेटअप दिया गया है, जो अलग-अलग लाइटिंग कंडीशन में बेहतर तस्वीरें लेने में सक्षम है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 8MP फ्रंट कैमरा मौजूद है।  Edited by : Sudhir Sharma

सूर्यकुमार की छुट्टी? ‘रेडीमेड कप्तान है यह खिलाड़ी, 2022 से 2026 तक… हर बड़े मैच का हीरो

33 गेंद… 93 रन… 5 चौके… 9 आसमानी छक्के… और 281.81 का खतरनाक स्ट्राइक रेट!

धर्मशाला की ठंडी रात में रजत पाटीदार ने ऐसा तूफान उठाया कि गुजरात टाइटंस की पूरी टीम उड़ गई। आईपीएल 2026 के क्वालिफायर-1 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान ने सिर्फ मैच नहीं जीता, बल्कि टीम इंडिया के दरवाजे पर जोरदार दस्तक दे दी। RCB लगातार दूसरी बार और कुल चौथी बार आईपीएल फाइनल में पहुंच चुकी है, और इस सफर के सबसे बड़े हीरो बने हैं रजत पाटीदार। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि उन्हें टीम इंडिया में मौका मिलना चाहिए या नहीं… सवाल ये है कि क्या भारत को सूर्यकुमार यादव के बाद अपना अगला टी20 कप्तान मिल चुका है?

 

रजत सिर्फ रन नहीं बना रहे, वो मैच की दिशा बदल रहे हैं। जिस तरह उन्होंने विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल के आउट होने के बाद दबाव को मौके में बदला, उसने बता दिया कि ये खिलाड़ी बड़े मंच के लिए बना है। यही वजह है कि अब क्रिकेट एक्सपर्ट्स से लेकर फैंस तक हर कोई कह रहा है—“रजत पाटीदार को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

 

 


 

 1. मिडिल ऑर्डर का सबसे खतरनाक मैच फिनिशर

 

टीम इंडिया लंबे समय से ऐसे बल्लेबाज की तलाश में है जो नंबर 4 या 5 पर आते ही मैच का टेम्पो बदल दे। रजत पाटीदार वही खिलाड़ी साबित हो रहे हैं।

 

आईपीएल 2026 में उनका स्ट्राइक रेट 200 के करीब रहा। वो उन बल्लेबाजों में नहीं हैं जो 30-40 गेंदें खेलकर सेट होते हैं। रजत आते ही गेंदबाजों पर हमला बोलते हैं। गुजरात के खिलाफ 33 गेंदों में नाबाद 93 रन की पारी हो, मुंबई के खिलाफ 20 गेंदों में 53 रन, लखनऊ के सामने 31 गेंदों में 61 या राजस्थान के खिलाफ 63 रन—हर बार उन्होंने दिखाया कि दबाव उन्हें डराता नहीं, बल्कि और खतरनाक बना देता है।

 

सबसे खास बात ये है कि वो पावरप्ले की आक्रामकता को मिडिल ओवर्स तक खींच ले जाते हैं। आधुनिक टी20 क्रिकेट में यही सबसे बड़ी कला मानी जाती है।

 

 

 2. कप्तानी में शांत दिमाग, फैसलों में आक्रामक सोच

 

आईपीएल जैसी हाई-प्रेशर लीग में कप्तानी करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब सामने विराट कोहली जैसी बड़ी मौजूदगी हो। लेकिन रजत पाटीदार ने पूरे सीजन जिस परिपक्वता से आरसीबी को संभाला, उसने सबको प्रभावित किया। आरसीबी का बैक-टू-बैक फाइनल में पहुंचना सिर्फ बल्लेबाजी का नहीं, बल्कि शानदार नेतृत्व का भी परिणाम है। रजत मैदान पर ज्यादा शोर नहीं मचाते, लेकिन उनके फैसले बहुत कुछ बोलते हैं। गेंदबाजी बदलाव हो या फील्ड सेटिंग, उन्होंने हर मौके पर मैच पढ़ने की क्षमता दिखाई।

 

टीम इंडिया फिलहाल ऐसे कप्तान की तलाश में है जो शांत भी हो और निडर भी। रजत दोनों बॉक्स टिक करते हैं। यही वजह है कि उन्हें “रेडीमेड कप्तानी विकल्प” कहा जा रहा है।

 

 

 

 3. बड़े मैचों के खिलाड़ी, दबाव में और खतरनाक

 

हर खिलाड़ी लीग मैचों में रन बना सकता है, लेकिन असली सुपरस्टार वही होता है जो नॉकआउट में चमके। रजत पाटीदार बार-बार यही साबित कर चुके हैं।

 

IPL 2022 Eliminator में उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 54 गेंदों में नाबाद 112 रन ठोके थे। उस पारी ने पहली बार पूरे देश को एहसास कराया था कि आरसीबी को एक एक्स-फैक्टर बल्लेबाज मिल चुका है। अब आईपीएल 2026 के क्वालिफायर में 33 गेंदों में 93 रन की विस्फोटक पारी ने साबित कर दिया कि 2022 कोई फ्लूक नहीं था। जब मंच बड़ा होता है, तब रजत का खेल और बड़ा हो जाता है। यही वो क्वालिटी है जो किसी खिलाड़ी को सिर्फ अच्छा बल्लेबाज नहीं, बल्कि मैच विनर और लीडर बनाती है।

 4. स्पिन के खिलाफ भारत का सबसे बड़ा हथियार

 

मौजूदा समय में भारतीय बल्लेबाज विदेशी स्पिनर्स के खिलाफ संघर्ष करते नजर आते हैं। लेकिन रजत पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत ही स्पिन अटैक को तहस-नहस करना है। वो फ्रंट फुट पर निकलकर छक्के मारते हैं, बैकफुट पर कट खेलते हैं और मिडिल ओवर्स में रनरेट कभी गिरने नहीं देते।

धर्मशाला में कागिसो रबाडा की ऑफ स्टंप के बाहर पड़ी गुड लेंथ गेंद को कवर स्टैंड के ऊपर पहुंचाना उनकी रेंज और आत्मविश्वास दिखाने के लिए काफी था।

 

टी20 क्रिकेट अब सिर्फ तकनीक का नहीं, इंटेंट का खेल बन चुका है। और रजत का इंटेंट हर गेंद पर दिखाई देता है।

 

 अब और इंतजार क्यों?

 

रजत पाटीदार कोई “वन सीजन वंडर” नहीं हैं।

वो भारत के लिए टेस्ट (3) और वनडे (1) खेल चुके हैं। घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश को रणजी ट्रॉफी जिताने में बड़ी भूमिका निभा चुके हैं। आईपीएल में लगातार असर छोड़ रहे हैं। कप्तानी का अनुभव भी है और बड़े मैचों का टेंपरामेंट भी। सूर्यकुमार यादव ने भारतीय टी20 क्रिकेट को नई दिशा दी, लेकिन अब टीम इंडिया को अगले टी20 वर्ल्ड कप और ओलंपिक साइकल के लिए नया चेहरा तैयार करना होगा।

 

और अगर मौजूदा फॉर्म, कप्तानी, मैच-विनिंग क्षमता और दबाव झेलने की ताकत को देखा जाए…

तो शायद भारतीय क्रिकेट के पास जवाब पहले से मौजूद है

 

नाम है… रजत पाटीदार।

AI का बूम, कंपनी ने कर्मचारियों को बांटा 3.25 करोड़ का बोनस

दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता प्रभाव अब टेक कंपनियों की कमाई में भी साफ नजर आने लगा है। इसी AI बूम का सबसे बड़ा फायदा दक्षिण कोरियाई टेक दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) के चिप कारोबार को मिला है। AI डाटा सेंटरों की बढ़ती मांग के चलते मेमोरी चिप्स की जरूरत तेजी से बढ़ी है और सैमसंग दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों में शामिल है।

 

इसी वजह से पिछले तिमाही में कंपनी के चिप डिवीजन की आय में 49 गुना तक का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। अब कंपनी इस मुनाफे का हिस्सा अपने कर्मचारियों को भी देने जा रही है। बुधवार को सैमसंग के सबसे बड़े कर्मचारी यूनियन ने चिप डिवीजन के कर्मचारियों के लिए भारी-भरकम बोनस पैकेज को मंजूरी दे दी। इस पैकेज के तहत प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 3.40 लाख डॉलर (करीब 3.25 करोड़ रुपए) का बोनस मिल सकता है।

 

यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब कर्मचारियों ने 18 दिनों की हड़ताल की चेतावनी दी थी।  इस साल मार्च में सैमसंग ने अपनी फाइलिंग में बताया था कि 2025 में कंपनी के कर्मचारियों की औसत वार्षिक आय 15.8 करोड़ वॉन (करीब 1 करोड़ रुपए) रही थी।

 

कंपनी और यूनियन के बीच मुनाफे के बंटवारे को लेकर समझौता होने के बाद संभावित हड़ताल टल गई है। इससे वैश्विक मेमोरी चिप सप्लाई पर पड़ने वाला बड़ा संकट भी टल गया। माना जा रहा था कि यदि हड़ताल होती तो न केवल सैमसंग का उत्पादन प्रभावित होता, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता था।

 

सैमसंग के अनुसार, कंपनी के चिप डिवीजन में करीब 78 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में केवल बोनस पर कंपनी लगभग 26.5 अरब डॉलर खर्च कर सकती है। यूनियन की ओर से बताया गया कि इस समझौते के पक्ष में 73.7 प्रतिशत सदस्यों ने मतदान किया। करीब 62,600 बैलेट डाले गए, जो पात्र सदस्यों के 95 प्रतिशत से अधिक थे। समझौते को पारित करने के लिए आधे से अधिक मतों की जरूरत थी।

 

यह बोनस सभी सैमसंग कर्मचारियों के लिए नहीं है, बल्कि केवल चिप निर्माण डिवीजन के कर्मचारियों को मिलेगा। यह डिवीजन प्रोसेसर और मेमोरी चिप्स जैसे RAM का निर्माण करता है, जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप, कारों और ChatGPT व Gemini जैसे AI प्लेटफॉर्म को संचालित करने वाले बड़े डाटा सेंटरों में किया जाता है।

 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के ऑपरेटिंग प्रॉफिट के आधार पर कर्मचारियों को औसतन 51.3 करोड़ वॉन यानी लगभग 3.40 लाख डॉलर का बोनस मिल सकता है। Yonhap News की रिपोर्ट के मुताबिक मेमोरी डिवीजन के कर्मचारियों को करीब 60 करोड़ वॉन (लगभग 3.82 करोड़ रुपए) तक मिल सकते हैं।  Edited by : Sudhir Sharma

FIFA World Cup में खेलेंगे नेमार, 2.5 साल बाद हुई ब्राजील टीम में वापसी

नेमार को अगले महीने होने वाले फीफा वर्ल्ड कप के लिए ब्राज़ील की टीम में शामिल किया गया, जिससे राष्ट्रीय टीम से ढाई साल से ज़्यादा की उनकी गैरमौजूदगी खत्म हो गई।सैंटोस स्टार मैनेजर कार्लो एंसेलोटी द्वारा पढ़े गए आखिरी नामों में से एक था, जिससे हाल के हफ़्तों में ब्राज़ील के मीडिया में छाई सिलेक्शन की बहस खत्म हो गई।

एंसेलोटी ने रियो डी जेनेरो में एक न्यूज़ कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने नेमार को इसलिए नहीं चुना क्योंकि हमें लगता है कि वह एक अच्छा बैकअप होगा, बल्कि इसलिए चुना क्योंकि वह अपनी खूबियों से टीम में जान डाल सकता है।”“चाहे वह एक मिनट खेले या 90 मिनट… मुझे लगता है कि हमें पिच पर कुल मिलाकर मिनटों की क्वालिटी पर ध्यान देना होगा। वह तभी खेलेगा जब वह खेलने का हकदार होगा। ट्रेनिंग यह तय करेगी।मुझे लगता है कि यह ज़रूरी है कि सारी उम्मीदें एक ही खिलाड़ी पर न रखी जाएं।”

34 साल के नेमार, जो 128 इंटरनेशनल मैचों में 79 गोल के साथ ब्राज़ील के ऑल-टाइम लीडिंग स्कोरर हैं, ने आखिरी बार अक्टूबर 2023 में ब्राज़ील के लिए खेला था, जब उरुग्वे के खिलाफ वर्ल्ड कप क्वालीफायर में उनके एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट में चोट लग गई थी।बार्सिलोना और पेरिस सेंट-जर्मेन के पूर्व फॉरवर्ड तब से चोटों से जूझ रहे हैं, पिछले साल जनवरी में अपने बचपन के क्लब सैंटोस में लौटने के बाद सभी कॉम्पिटिशन में 38 मैचों में सिर्फ 17 गोल कर पाए हैं।

एंसेलोटी ने कहा, “हमने पूरे साल नेमार को एवैल्यूएट किया। वह एक इंपॉर्टेंट प्लेयर हैं और वह इस वर्ल्ड कप में इंपॉर्टेंट होंगे। उनकी भूमिका और ज़िम्मेदारी बाकी 25 प्लेयर्स जैसी ही है।”

ब्राज़ील की आखिरी 26-मैन स्क्वाड की बनावट हाल के हफ्तों में पूरे ब्राज़ील में ज़ोरदार चर्चा का विषय रही, जिसमें मौजूदा और पुराने प्लेयर्स ने इस पर अपने विचार बताए कि किसे चुना जाना चाहिए। एंसेलोटी ने बताया कि यह बातचीत उनके साथ हर जगह हुई, जिसमें एक इंटरनेशनल ट्रिप के दौरान प्लेन में भी शामिल है।

Famous works of Nehru: जवाहरलाल नेहरू के 5 ऐसे बड़े कार्य जो नहीं कर सकता था कोई दूसरा पीएम

Portrait of Indias first Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru with children

Pandit Nehru Achievements: पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। उन्होंने एक ऐसे समय में देश की कमान संभाली थी जब भारत सदियों की गुलामी, विभाजन की त्रासदी, भयंकर गरीबी और सांप्रदायिक दंगों से जूझ रहा था। उस दौर में देश को बिखरने से बचाना और एक आधुनिक राष्ट्र की नींव रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नेहरू के कई फैसले और कार्य ऐसे थे जिन्हें उनके कद, दूरदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय छवि के बिना कोई दूसरा प्रधानमंत्री शायद ही अमली जामा पहना पाता। 

 

1. विविध रियासतों का सफल विलय और 'लोकतांत्रिक' भारत का निर्माण

2. 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत

3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे 'आधुनिक भारत के मंदिरों' की स्थापना

4. 'इसरो' (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत

5. 'हिंदू कोड बिल' के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना

 

उनके 5 ऐसे ही बड़े कार्य निम्नलिखित हैं:

 

1. विविध रियासतों का सफल विलय और 'लोकतांत्रिक' भारत का निर्माण

विभाजन के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती 500 से अधिक स्वायत्त रियासतों (Princely States) को एक सूत्र में बांधना था। हालांकि जमीनी स्तर पर रियासतों के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है, लेकिन इसके पीछे नेहरू की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सोच की बड़ी भूमिका थी।

 

एकता और लोकतंत्र का समन्वय: कई नव-स्वतंत्र देशों में राजशाही खत्म होने के बाद सैन्य शासन या तानाशाही आ गई। लेकिन नेहरू ने सुनिश्चित किया कि सभी रियासतें न केवल भारत का हिस्सा बनें, बल्कि वहां के नागरिकों को भी समान लोकतांत्रिक अधिकार मिलें। उन्होंने भारत को एक 'हिंदू पाकिस्तान' बनने से रोका और बहुसंस्कृतिवाद को बढ़ावा दिया।

 

2. 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया दो महाशक्तियों- अमेरिका (पूंजीवादी ब्लॉक) और सोवियत संघ (साम्यवादी ब्लॉक) के बीच 'शीत युद्ध' (Cold War) में बंट चुकी थी। उस समय नए आजाद हुए देशों पर किसी एक पाले में जाने का भारी दबाव था।

 

स्वतंत्र विदेश नीति: नेहरू ने किसी भी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने मिस्र के नासिर और युगोस्लाविया के टीटो के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement – NAM) की नींव रखी।

 

ग्लोबल लीडरशिप: इसके जरिए उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक नैतिक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। इस नीति के कारण भारत को अमेरिका और सोवियत संघ दोनों से मदद मिली, जो उस समय किसी अन्य नेता के अंतरराष्ट्रीय रसूख के बिना असंभव था।

 

3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे 'आधुनिक भारत के मंदिरों' की स्थापना

नेहरू का मानना था कि जब तक भारत वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक उसकी आजादी अधूरी है। उन्होंने भारी उद्योगों, बांधों और शैक्षणिक संस्थानों को 'आधुनिक भारत के मंदिर' कहा था।

 

संस्थानों की दूरदर्शी नींव: नेहरू ने देश में IITs (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), IIMs (भारतीय प्रबंधन संस्थान), AIIMS, और IISER जैसे शीर्ष संस्थानों की स्थापना की।

 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper): उन्होंने देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और अनुसंधान में लगाया। आज भारत जो दुनिया का आईटी हब बना है और वैश्विक स्तर पर हमारे डॉक्टर्स-इंजीनियर्स का जो डंका बजता है, उसकी बुनियाद नेहरू ने ही रखी थी।

 

4. 'इसरो' (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत

आज भारत अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार है, लेकिन इसकी शुरुआत तब हुई थी जब भारत के पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं।

 

अंतरिक्ष और परमाणु विजन: नेहरू ने महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा आयोग (जो बाद में BARC बना) और विक्रम साराभाई के साथ मिलकर INCOSPAR (जो बाद में ISRO बना) की स्थापना की।

 

असंभव को संभव बनाना: उस दौर में जब देश में भुखमरी की स्थिति थी, तब अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम पर पैसा खर्च करने के फैसले की भारी आलोचना हो सकती थी। लेकिन नेहरू के अडिग विश्वास के कारण ये संस्थान राजनीति से दूर रहकर देश को आत्मनिर्भर बनाने में सफल रहे।

 

5. 'हिंदू कोड बिल' के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना

आजादी के समय भारतीय समाज अत्यधिक रूढ़िवादी था और महिलाओं के पास पैतृक संपत्ति, तलाक या गोद लेने जैसे बुनियादी कानूनी अधिकार नहीं थे। नेहरू भारत को सामाजिक रूप से भी आधुनिक बनाना चाहते थे।

 

भारी विरोध के बावजूद सुधार: नेहरू ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ मिलकर 'हिंदू कोड बिल' (Hindu Code Bill) को संसद में पेश किया। इस बिल का खुद कांग्रेस के अंदर के वरिष्ठ नेताओं और सनातन रूढ़िवादी संगठनों ने उग्र विरोध किया था।

 

महिला सशक्तिकरण की नींव: नेहरू ने अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी और इस बिल को अलग-अलग हिस्सों में (हिंदू विवाह अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम आदि) पारित कराया। इसके जरिए हिंदू महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, एक विवाह का नियम और तलाक का अधिकार मिला। उस दौर में ऐसा क्रांतिकारी सामाजिक सुधार करना किसी भी अन्य प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं थी।

 

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10 things about Nautapa: नौतपा से जुड़ी 10 खास बातें

Picture giving information about the days of Nautapa

Summer Health Care: गर्मियों का सबसे तपता दौर यानी नौतपा भारतीय मौसम और लोकमान्यताओं में बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे धरती खूब गर्म होती है और आगे चलकर मानसून मजबूत बनता है। ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी और मौसम विज्ञान- तीनों में नौतपा का विशेष महत्व बताया गया है।ALSO READ: नौतपा की 'आग' उगलती गर्मी से कैसे बचें? ये 5 सावधानियां और 10 गोल्डन रूल्स बदल देंगे आपका समर गेम!

आइए जानते हैं नौतपा से जुड़ी 10 खास बातें, जो इसे सामान्य गर्मी से अलग बनाती हैं।

 

1. सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा की शुरुआत मानी जाती है।

 

2. नौतपा के शुरुआती नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में गिने जाते हैं।

 

3. इस दौरान सूरज की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे गर्मी अधिक बढ़ जाती है।

 

4. खाली पेट धूप में निकलना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए कुछ खाकर ही बाहर जाएं।

 

5. शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए समय-समय पर ग्लूकोज या इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें।

 

6. मान्यता है कि नौतपा अच्छी तरह तपे तो मानसून में अच्छी बारिश होती है।

 

7. लू लगने के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या घरेलू उपाय अपनाएं।

 

8. एसी से सीधे तेज धूप में निकलने से बचें, इससे शरीर पर अचानक असर पड़ सकता है।

 

9. इन दिनों पेय पदार्थों और पानी की मात्रा सामान्य दिनों से ज्यादा रखें।

 

10. जिन लोगों को गर्मी अधिक परेशान करती है, वे हाथ-पैरों और सिर पर मेहंदी लगाकर शरीर को ठंडक दे सकते हैं।

 

नौतपा की तेज गर्मी में थोड़ी सी सावधानी आपको लू, डिहाइड्रेशन और थकावट जैसी समस्याओं से बचा सकती है। सही खानपान, पर्याप्त पानी और धूप से बचाव के उपाय अपनाकर आप इस मौसम में आसानी से सेहत संबंधी परेशानियों से बच सकते हैं।

 

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Pandit Jawaharlal Nehru: पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में 10 रोचक बातें

Pictured is Indias first Prime Minister, Pandit Jawaharlal Nehru

Jawaharlal Nehru First Prime Minister of India: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि हर वर्ष 27 मई को मनाई जाती है। उनका निधन 27 मई 1964 को 74 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। नेहरू जी आधुनिक भारत के निर्माण, लोकतंत्र की मजबूती और शिक्षा के विकास में अहम योगदान देने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। वे बच्चों के प्रिय 'चाचा नेहरू' के नाम से भी प्रसिद्ध थे। नेहरू जी का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में कई ऐसी बातें हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं। 

 

आइए जानते हैं पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी 10 बेहद रोचक बातें:

 

1. कश्मीरी पंडित होने के कारण मिला 'नेहरू' उपनाम

जवाहरलाल नेहरू का परिवार मूल रूप से कश्मीरी पंडित था। उनके पूर्वज राज कौल 18वीं शताब्दी की शुरुआत में कश्मीर से दिल्ली आए थे। दिल्ली में उनका घर एक मुगलकालीन नहर के किनारे था, जिसके कारण स्थानीय लोग उन्हें 'नेहरू' (नहर वाले) कहने लगे। आगे चलकर यही उनका स्थायी उपनाम बन गया।

 

2. घर पर ही हुई शुरुआती पढ़ाई

नेहरू जी के पिता मोतीलाल नेहरू एक बेहद अमीर और प्रसिद्ध वकील थे। उन्होंने जवाहरलाल की शुरुआती शिक्षा के लिए घर पर ही देश-विदेश के सबसे बेहतरीन निजी शिक्षक रखे थे। शुरुआती 15 साल की उम्र तक उन्होंने किसी स्कूल का मुंह नहीं देखा था तथा उनकी पढ़ाई घर पर ही हुई थी। इस उम्र तक उन्होंने किसी स्कूल में दाखिला नहीं लिया था।

 

3. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों से शिक्षा

घर पर शिक्षा प्राप्त करने के बाद, 15 वर्ष की आयु में सन् 1905 में वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए। उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक हैरो (Harrow School) से स्कूली शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज, कैंब्रिज (Trinity College, Cambridge University) से नेचुरल साइंस में ग्रेजुएशन किया और फिर लंदन के इन्नर टेम्पल से वकालत की पढ़ाई पूरी की।

 

4. सिगार से लेकर कपड़ों तक के अनोखे किस्से

नेहरू जी अपनी रॉयल लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते थे। वे 'स्टेट एक्सप्रेस 555'(State Express 555) ब्रांड की सिगार पीते थे। यह सिगार यूनाइटेड किंगडम (लंदन) की एक प्रतिष्ठित और लग्जरी सिगरेट ब्रांड है। एक बार जब नेहरू जी भोपाल गए और उनकी पसंदीदा सिगार खत्म हो गई, तो विशेष रूप से इंदौर से एक विमान के जरिए उनके लिए सिगार मंगवाई गई थी।

 

5. कुल 9 बार गए जेल (3259 दिन)

भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान नेहरू जी को कुल 9 बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने अपने जीवन के लगभग 9 साल (3,259 दिन) सलाखों के पीछे बिताए थे। उनकी पहली जेल यात्रा 1921-22 में हुई थी और आखिरी बार वे 1945 में रिहा हुए थे। 

 

6. जेल की बैरक में लिखी कालजयी किताबें

नेहरू जी एक बेहतरीन लेखक भी थे। उन्होंने जेल में मिले खाली समय का सदुपयोग लिखने में किया। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें जैसे 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' (The Discovery of India, भारत की खोज) और 'ग्लिम्प्सिज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' (Glimpses of World History, विश्व इतिहास की झलकियां) उन्होंने अहमदनगर किले की जेल में रहते हुए बिना किसी संदर्भ किताबों के, केवल अपनी याददाश्त के दम पर लिखी थीं।

 

7. 'चाचा नेहरू' और 'बाल दिवस' का कनेक्शन

नेहरू जी को बच्चों से अगाध प्रेम था और वे बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। बच्चे भी उन्हें प्यार से 'चाचा नेहरू' कहते थे। यही कारण है कि उनके जन्मदिन यानी 14 नवंबर को पूरे देश में 'बाल दिवस' (Childrens Day) के रूप में मनाया जाता है।

 

8. कपड़ों का स्टाइल बना ग्लोबल ट्रेंड

नेहरू जी के पहनावे का स्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि वह पूरी दुनिया में एक फैशन स्टेटमेंट बन गया। उनके द्वारा पहनी जाने वाली बिना कॉलर वाली जैकेट को आज भी 'नेहरू जैकेट' कहा जाता है। प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मैगजीन 'वोग' (Vogue) ने भी उनके ड्रेसिंग सेंस को सराहा था। बता दें कि ये दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली फैशन और लाइफस्टाइल मासिक पत्रिका है, जो 1892 में अमेरिका में स्थापित तथा इसे 'फैशन की बाइबिल' भी माना जाता है। 

 

9. गुलाब के फूल के पीछे का राज

नेहरू जी हमेशा अपनी शेरवानी की जेब पर एक ताजा लाल गुलाब का फूल लगाते थे। इसके पीछे एक बेहद भावुक कारण था। कहा जाता है कि वे अपनी पत्नी कमला नेहरू की याद में यह गुलाब लगाते थे, जिनका साल 1936 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।

 

10. 11 बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित

वैश्विक शांति के लिए काम करने और गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) की नींव रखने वाले नेहरू जी को 11 बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकितकिया गया था, हालांकि उन्हें कभी यह पुरस्कार मिल नहीं सका। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने और उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली।

 

पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। 

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मिचेल मार्श की चोट के बाद पाकिस्तान के खिलाफ यह विकेटकीपर करेगा कप्तानी

ऑस्ट्रेलिया इस सप्ताहांत से शुरू होने वाली पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए अपने चौथे कप्तान को मैदान में उतारेगा, क्योंकि मिच मार्श दौरे से बाहर होने वाले ताज़ा सीनियर खिलाड़ी बन गए हैं। जोश इंगलिस तीन मैचों की इस सीरीज़ में ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी करेंगे, क्योंकि पता चला है कि मार्श को इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के दौरान टखने में चोट लग गई थी।

50 ओवर के कप्तान पैट कमिंस और उनके उप-कप्तान ट्रैविस हेड – जिन्होंने टी20 में चार बार ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी की है – दोनों ही आईपीएल प्लेऑफ़ के कारण इस दौरे पर मौजूद नहीं हैं, क्योंकि आईपीएल के मैच इस्लामाबाद और लाहौर में होने वाले मैचों के साथ ही पड़ रहे हैं। ऐसे में कप्तानी की बागडोर इंगलिस के हाथों में आ गई है।

दिलचस्प बात यह है कि इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने नवंबर 2024 में भी एक बार यह भूमिका निभाई थी – तब भी पाकिस्तान के खिलाफ ही, और तब भी जब टीम के कई मुख्य खिलाड़ी अनुपस्थित थे। मार्श, जिनकी जगह वनडे टीम में अभी तक किसी और को नहीं लिया गया है, पिछले हफ़्ते लखनऊ सुपर जायंट्स का आईपीएल का आखिरी मैच न खेल पाने के बाद घर लौट आए हैं।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के एक प्रवक्ता ने कहा, “मार्श… आगे की जांच और इलाज के लिए अगले आदेश तक पर्थ में ही रहेंगे।” “बांग्लादेश के ‘व्हाइट बॉल’ (सीमित ओवरों के) दौरे के लिए उनकी उपलब्धता पर उचित समय पर फैसला लिया जाएगा।” कमिंस के साथ-साथ जोश हेज़लवुड और मिचेल स्टार्क भी पाकिस्तान और बांग्लादेश, दोनों ही दौरों से बाहर रहेंगे। आईपीएल खत्म होने के बाद ट्रैविस हेड बांग्लादेश में टीम के साथ जुड़ेंगे।

इसके अलावा, ढाका में होने वाले तीन वनडे मैचों के लिए कूपर कोनोली, ज़ेवियर बार्टलेट और बेन ड्वारशुइस के रूप में कुछ और खिलाड़ी भी टीम में शामिल होंगे। इन तीनों को शुरू में टीम से बाहर रखा गया था, क्योंकि यह माना जा रहा था कि उनकी आईपीएल टीम – पंजाब किंग्स – IPL प्लेऑफ़ में जगह बना लेगी। इस घटनाक्रम ने ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं के सामने उन लॉजिस्टिक (प्रबंधकीय) मुश्किलों को उजागर कर दिया है, जो इस सीरीज़ के कारण पैदा हुई हैं – यह सीरीज़ आईपीएल फ़ाइनल से ठीक एक दिन पहले शुरू हो रही है, और मार्श की चोट ने उनकी मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं। मार्श की अनुपस्थिति से इस बात की संभावना बढ़ गई है कि युवा खिलाड़ी ओली पीक पाकिस्तान के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू कर सकते हैं।

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ वनडे सीरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम: जोश इंगलिस (कप्तान), एलेक्स कैरी, नाथन एलिस, कैमरन ग्रीन, मैथ्यू कुहनेमैन, मार्नस लाबुशेन, रिले मेरेडिथ, ओलिवर पीक, मैथ्यू रेनशॉ, तनवीर संघा, लियाम स्कॉट, मैट शॉर्ट, बिली स्टेनलेक, एडम जम्पा।

पाकिस्तान की टीम: शाहीन शाह अफ़रीदी (कप्तान), सलमान अली आगा (उप-कप्तान), अब्दुल समद, अबरार अहमद, अहमद दानियाल, अराफ़ात मिन्हास, बाबर आजम, हारिस रऊफ, माज सदाकत, मुहम्मद ग़ाज़ी ग़ोरी, नसीम शाह, रोहेल नज़ीर, साहिबज़ादा फ़रहान, शादाब ख़ान, शमील हुसैन, सुफ़ियान मुक़ीम।

Apple ला सकता है पहला फोल्डेबल iPhone Ultra, iPhone 18 सीरीज की लॉन्च रणनीति में बड़ा बदलाव

Apple अपनी आगामी iPhone 18 सीरीज को लेकर बड़ी रणनीति पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इस बार हर साल की तरह सितंबर में एक ही इवेंट में सभी iPhone मॉडल लॉन्च नहीं करेगी। माना जा रहा है कि Apple पहले सितंबर 2026 में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च करेगा, जबकि इसके बाद नवंबर में अलग इवेंट के जरिए नया फोल्डेबल iPhone Ultra पेश किया जा सकता है।

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रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि iPhone Ultra Apple का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन हो सकता है, जिसे इंटरनेट पर फिलहाल “iPhone Fold” नाम से चर्चा मिल रही है। हालांकि Apple ने आधिकारिक तौर पर इस डिवाइस की पुष्टि नहीं की है, लेकिन लीक्स और इनसाइडर रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी कई वर्षों से फोल्डेबल टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है।

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बताया जा रहा है कि Apple इस डिवाइस को सामान्य iPhone 18 ब्रांडिंग से अलग रखते हुए एक नई अल्ट्रा-प्रीमियम कैटेगरी बनाना चाहता है। कंपनी इसे सिर्फ एक और iPhone मॉडल के रूप में पेश नहीं करना चाहती, बल्कि प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में अलग पहचान देने की तैयारी में है।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार Apple पहले iPhone 18 Pro और Pro Max मॉडल लॉन्च कर उन्हें बाजार में पर्याप्त समय देना चाहता है। इसके बाद फोल्डेबल iPhone Ultra को लॉन्च किया जाएगा, ताकि नए डिवाइस की वजह से Pro मॉडल्स की बिक्री प्रभावित न हो। वहीं स्टैंडर्ड iPhone 18 मॉडल्स को 2027 की शुरुआत में लॉन्च किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

 

जानकारों का मानना है कि इस रणनीति के पीछे बड़ा कारोबारी कारण भी है। महंगे Pro मॉडल्स की बिक्री बढ़ने से Apple की औसत बिक्री कीमत और राजस्व में इजाफा हो सकता है। साथ ही अलग-अलग समय पर लॉन्च करने से कंपनी Samsung और Huawei जैसे ब्रांड्स को भी टक्कर दे सकेगी, जो साल की शुरुआत में अपने नए डिवाइस पेश करते हैं।

 

फोल्डेबल iPhone को लेकर टेक जगत में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अभी तक Samsung और Huawei फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, लेकिन Apple की एंट्री इस बाजार को नई दिशा दे सकती है। हालांकि फिलहाल ये सभी जानकारियां लीक्स और अटकलों पर आधारित हैं। असली तस्वीर Apple के आधिकारिक लॉन्च इवेंट में ही साफ होगी। Apple द्वारा iPhone 18 सीरीज की लॉन्चिंग को अलग-अलग चरणों में पेश करने की खबरें अब टेक इंडस्ट्री में बड़ी चर्चा का विषय बन गई हैं। जानकारों का मानना है कि कंपनी का यह फैसला केवल नए हार्डवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार में सही समय पर सही प्रोडक्ट उतारने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple सामान्य iPhone 18 मॉडल को करीब छह महीने की देरी के साथ 2027 की शुरुआत यानी स्प्रिंग सीजन में लॉन्च कर सकता है। वहीं फोल्डेबल iPhone Ultra को 2026 के अंत में पेश किए जाने की संभावना है। इस रणनीति के जरिए Apple अपने प्रीमियम iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max मॉडल्स की बिक्री को मजबूत करना चाहता है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि Apple बाजार को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर ज्यादा बिक्री और अधिक मुनाफा हासिल करने की तैयारी में है। खासतौर पर त्योहारों और छुट्टियों के सीजन में महंगे Pro मॉडल्स की बिक्री बढ़ाकर कंपनी अपनी औसत बिक्री कीमत (Average Selling Price) को ऊपर ले जाना चाहती है।

 

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि Apple को अपने ग्राहकों पर पूरा भरोसा है। कंपनी मानकर चल रही है कि ग्राहक जिस मॉडल का इंतजार कर रहे हैं, उसके लिए लंबे समय तक रुकने को तैयार रहेंगे। यही वजह है कि Apple जल्दबाजी में पूरी iPhone 18 सीरीज एक साथ लॉन्च नहीं करना चाहता।

 

हालांकि इस रणनीति ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है। क्या ग्राहक वास्तव में अपनी जरूरत के हिसाब से iPhone चुनते हैं, या फिर Apple बाजार में जो आर्थिक श्रेणियां तय कर रहा है, लोग उसी के मुताबिक फोन खरीदने को मजबूर हो रहे हैं? टेक जगत में अब सबकी नजर Apple के अगले बड़े लॉन्च इवेंट पर टिकी हुई है, जहां कंपनी की वास्तविक रणनीति और नए डिवाइसों की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। Edited by : Sudhir Sharma