यूपी में बन रहे एक्सप्रेसवे पर लगातार सुविधाओं में बढ़ोतरी की जा रही है। इसी के तहत लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसव पर अब टोल प्लाजा पर भी नहीं रुकना होगा। प्लाजा से पहले ही टोल कट जाएगा।
हमीरपुर में एक प्रेमिका ने पति के साथ मिलकर प्रेमी की अपने घर ही में हत्या कर दी। इसके बाद शव जलाकर जंगल में दफना दिया। मृतक के पिता की शिकायत पर पुलिस ने दंपति को हिरासत में लिया तो दोनों ने वारदात कबूल कर ली है।
कानपुर के मकराबर्टगंज में बीएड परीक्षा देने आए अभ्यर्थी और उनके परिजन जर्जर स्लैब टूटने से नाले में गिर गए। हादसे में कई लोग मामूली रूप से घायल हुए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने सभी को बाहर निकाला। घटना के बाद नगर निगम ने मौके पर बैरिकेडिंग कराई।

हाल के समय में वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी और आत्मविश्वास से क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उनके प्रदर्शन को देखते हुए कई लोग उन्हें जल्द से जल्द भारतीय टेस्ट टीम में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का मानना है कि किसी भी युवा खिलाड़ी के विकास में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए।
तेंदुलकर का मानना है कि वैभव में असाधारण क्षमता है और भविष्य में वह टेस्ट क्रिकेट में भी सफल हो सकते हैं, लेकिन उनके विकास की प्रक्रिया को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने देना चाहिए। युवा खिलाड़ियों पर अपेक्षाओं का अतिरिक्त दबाव डालने के बजाय उन्हें अपने खेल को निखारने का पर्याप्त समय और अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनका आत्मविश्वास और खेल को पढ़ने की क्षमता है। ऐसे खिलाड़ियों के साथ अत्यधिक तकनीकी हस्तक्षेप कभी-कभी उनके स्वाभाविक खेल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए फिलहाल उन्हें उसी अंदाज में खेलने देना बेहतर होगा, जिसने उन्हें पहचान दिलाई है।
वैभव की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए तेंदुलकर ने कहा,
“आज सभी वैभव की बात कर रहे हैं। मैंने उन्हें बैटिंग करते हुए देखा है। उनमें बहुत कुछ खास है। सिर्फ गेंद को हिट करने की ताकत ही नहीं, बल्कि उनकी कलाई का काम (रिस्ट वर्क) भी कमाल का है, जिसमें मुझे बहुत इंप्रेस किया। मैदान के हर कोने में शॉट खेलने के लिए आपकी कलाई मजबूत होनी चाहिए। वह सिर्फ हवा में बल्ला नहीं घुमा रहे। वे बाकी खिलाड़ियों की तुलना में गेंद की लाइन और लेंथ को जल्दी भांप लेते हैं और आसानी से बाउंड्री पार करा देते ह।”
From Master Blaster to Boss Baby!
You know you're on the right track when Sachin Tendulkar breaks down your technique!
Watch #CricinfoHonours Star Sports, JioHotstar & Cricinfo! pic.twitter.com/el7UrdNojV— Star Sports (@StarSportsIndia) May 30, 2026
हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में चयन को लेकर उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उनका मानना है कि वैभव को अभी अपने खेल को और निखारने का समय मिलना चाहिए ताकि वह भविष्य में सभी प्रारूपों में सफल हो सकें।

तेंदुलकर ने कहा,
“वैभव को भारतीय टेस्ट टीम में क्या जल्द ही चुना जाना चाहिए। इस पर तेंदुलकर ने कहा कि वह भी वैभव को टेस्ट क्रिकेट में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन इसमें जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। वे जैसे हैं, वैसे ही रहें। टेस्ट में अनुभव के साथ वह चुनौतियों से निपटना सीख जाएंगे।”
“वैभव एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो बहुत आत्मविश्वासी हैं और उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है। मैं उनके नेचुरल इंस्टिंक्ट के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं चाहूंगा। जिस तरह से वे गेंद को देखते हैं और उस पर रिएक्ट करते हैं वह शानदार है। अगर हम उन्हें एक साथ बहुत सारी चीजें बताकर बाधाएं खड़ी करेंगे, तो उनका वह सिग्नल इंटरप्ट हो जाएगा। मैं उन्हें खुलकर अपना खेल खेलने की आजादी दूंगा।”
तेंदुलकर की बातों से साफ है कि वैभव सूर्यवंशी को लेकर उत्साह जितना बड़ा है, उतनी ही जरूरी उनके विकास की सही दिशा भी है। अगर उन्हें बिना अनावश्यक दबाव के आगे बढ़ने दिया गया, तो भारतीय क्रिकेट को आने वाले वर्षों में एक बेहद खास बल्लेबाज मिल सकता है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का भी मानना है कि वैभव जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और निरंतर अवसर मिलने पर वे लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा कर सकते हैं। फिलहाल, फोकस उनके खेल को और मजबूत बनाने पर होना चाहिए ताकि जब भी उन्हें टेस्ट टीम में मौका मिले, वे पूरी तरह तैयार नजर आएं।
भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज Sachin Tendulkar ने 15 नवंबर 1989 को Pakistan national cricket team के खिलाफ कराची में अपना अंतरराष्ट्रीय टेस्ट डेब्यू किया था। सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण गेंदबाजी आक्रमणों का सामना कर अपनी प्रतिभा की झलक दिखा दी थी।
IPL 2026 में वैभव सूर्यवंशी के आंकड़े:
16 पारियां
776 रन
औसत: 48.50
स्ट्राइक रेट: 237.31
72 छक्के
684 रन सिर्फ बाउंड्री से
4 प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड
एलिमिनेटर में 97 (29)
क्वालिफायर-2 में 96 (47)
कानपुर में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया। जब एक फ्लैट से तेज दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो कमरे में 69 साल के अरुण कुमार का शव मिला। वहीं जांच के दौरान दूसरे कमरे में उनकी 58 वर्षीय बहन जीवित अवस्था में मिलीं।
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जिस दौर में औरतों को पढ़ने तक की इजाज़त नहीं थी, वहीं एक लड़की ने इतिहास बदल दिया।
भेड़-बकरी चराने वाली अहिल्याबाई होल्कर, जो पति की मृत्यु और समाज के विरोध के बावजूद मालवा की महारानी बनीं। सड़के, कुएं, घाट, 12,000+ मंदिरों का निर्माण, महेश्वरी साड़ी जैसी विरासत, और जनता का विश्वास जीतना — यही उनकी असली ताकत थी। ✨
इतिहास में बहुत से राजा हुए, लेकिन अहिल्याबाई ने लोगों का दिल जीता। ❤️ लोकमाता, शासक और सच्ची नारी शक्ति का प्रतीक।
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कानपुर में 12 दिन पहले दफनाई गई कायनात का हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल ने दूसरी रिपोर्ट में भी मौत का कारण फांसी लगने से दम घुटना बताया। मायके पक्ष ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए पहली रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे।

ओलंपियन महिला पहलवान विनेश फोगाट शनिवार को हुए ट्रायल में एशियाई खेलों के लिये क्वालीफाई करने में विफल रही। 31 वर्षीय विनेश को 53 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में मीनाक्षी गोयत ने हराया। आज इंदिरा गांधी स्टेडियम में महिलाओं की 53 किग्रा के चयन ट्रायल्स के सेमीफाइनल मुकाबले में मीनाक्षी गोयत ने विनेश फोगाट को 6-4 से हराया। इस हार के साथ विनेश फोगाट एशियाई खेलों के चयन ट्रायल से बाहर हो गई।
Minakshi wrestled down Vinesh Phogat in the semifinal at the Asiad Trials.
Minakshi won 6-4 in an intense match.
: ” Mai Phir Aaugi ( I'll comeback), ” said Vinesh Phogat before leaving the mat. pic.twitter.com/fNmB8ISAze
— RevSportz Global (@RevSportzGlobal) May 30, 2026
पहला मैच एक तरफा जीती, दूसरा मैच हारते हारते बची
पहले दौर के मुकाबले में विनेश फोगाट ने हरियाणा की ज्योति को 7-1 से हराया। इसके बाद अगले दौर के मुकाबले में विनेश ने निशु को हराया। स्कोर 6-6 से बराबर रहने पर विनेश मानदंडों के आधार पर आगे हो गईं। निशु ने टेक डाउन का प्रयास किया लेकिन उन्हें अंक नहीं दिए गए। निशु के कोच ने फैसले को चुनौती दी लेकिन वे हार गए और विनेश राहत की सांस लेते हुए मैट से चली गईं। फैसले से स्तब्ध होकर निशु ने रेफरी और विनेश से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और काफी देर तक मैट पर भावुक खड़ी रही।
ट्रायल्स से पति सोमवीर राठी की सिक्योरिटी वालों से बहस
प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही ट्रायल्स में कुछ ड्रामा देखने को मिला, क्योंकि विनेश और उनके पति सोमवीर राठी की वेन्यू में एंट्री को लेकर सिक्योरिटी वालों से बहस हो गई थी। बाद में मामला सुलझ गया और उन्हें स्टेडियम में जाने दिया गया। वेट-इन प्रोसेस के दौरान एक नया विवाद तब भी सामने आया जब विनेश को शुरू में 50 किग्रा वेट कैटेगरी में रखा गया था। रेसलर ने इस पर एतराज़ जताया और कहा कि वह अपने पसंदीदा 53 किग्रा डिवीजन में मुकाबला करना चाहती हैं।
53 किग्रा वेट कैटेगरी में हिस्सा
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) के प्रेसिडेंट संजय सिंह के दखल के बाद, उनका वेट 53 किग्रा कैटेगरी में दर्ज किया गया, जिससे उन्हें ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत मिल गई। मीडिया से बात करते हुए, विनेश ने प्रोसेस पर नाखुशी जताई, और दावा किया कि उन्हें वेट-इन के लिए लगभग एक घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा और परमिशन मिलने से पहले कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह अपना डाइट और खाने का इंतज़ाम खुद लाई थीं, और कहा कि वह अभी भी अपनी लड़ाई लड़ रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त के एक दिन बाद ट्रायल्स
सुप्रीम कोर्ट से विनेश को हिस्सा लेने की इजाज़त मिलने के एक दिन बाद ट्रायल्स हुए। 28 मई को, रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने ट्रायल्स में उनके हिस्सा लेने पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। हालांकि, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने अर्ज़ी खारिज कर दी, जिससे उनके शामिल होने का रास्ता साफ हो गया। डब्ल्यूएफआई ने बाद में कहा कि विनेश, बाकी सभी एलिजिबल रेसलर्स के साथ वेट-इन के लिए रिपोर्ट हुईं और ज़रूरी फॉर्मैलिटीज़ पूरी कीं। फेडरेशन ने कहा कि सभी तय शर्तें पूरी करने के बाद उन्हें सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाज़त दी गई।

World Environment Day: विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। साल 2026 में हम सब एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और पिघलते ग्लेशियर अब केवल किताबों की बातें नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन की हकीकत बन चुके हैं।ALSO READ: पर्यावरण दिवस पर सबसे अच्छी कविता: धरती की पुकार
इस साल का पर्यावरण दिवस प्रकृति की तरफ से हमारे लिए एक 'वेक-अप कॉल' है, जो हमें याद दिलाता है कि हमारे पास रहने के लिए केवल एक ही ग्रह है—Our Only Earth।
धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश: 'कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय है'
इस पर्यावरण दिवस पर वैश्विक समुदाय से जो सबसे बड़ा संदेश निकलकर आ रहा है, वह बेहद स्पष्ट है: अब बातें करने का वक्त खत्म हो चुका है, अब जमीन पर काम करने का वक्त है। धरती को बचाने के लिए हमें इन 3 मोर्चों पर तुरंत काम करना होगा:
1. प्रकृति के साथ तालमेल
हम अक्सर सोचते हैं कि पर्यावरण को बचाना सरकारों या बड़ी कंपनियों का काम है, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव हमारी छोटी-छोटी आदतों से आता है। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूरी तरह ना कहना, पानी की बर्बादी रोकना और बिजली की बचत करना ही धरती के प्रति हमारा पहला कर्तव्य है।
2. 'इको-एंजायटी' से उबरकर पौधे लगाना
आज की युवा पीढ़ी में पर्यावरण के बिगड़ते हालातों को देखकर एक डर (Eco-Anxiety) बैठ गया है। इस डर का एकमात्र इलाज है- एक्शन। सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय, इस मानसून में कम से कम एक पौधा लगाएं और उसकी तब तक देखभाल करें जब तक वह पेड़ न बन जाए।
3. 'रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल' को जीवन का हिस्सा बनाना
कंज्यूमरिज़्म (ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदने की होड़) ने कचरे के पहाड़ खड़े कर दिए हैं। हमें अपनी जरूरतों को सीमित करना होगा और 'इस्तेमाल करो और फेंको' की संस्कृति को छोड़ना होगा।
हम और आप अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं? (5 आसान कदम)
एक पौधा, एक जीवन: इस 5 जून को अपने घर के आसपास या बालकनी में एक पौधा जरूर लगाएं।
प्लास्टिक को कहें अलविदा: बाजार जाते समय हमेशा कपड़े का थैला साथ रखें। प्लास्टिक की पानी की बोतलों का इस्तेमाल बंद करें।
डिजिटल क्लीन-अप: क्या आप जानते हैं कि ईमेल और क्लाउड स्टोरेज में फालतू का डेटा रखने से भी कार्बन एमिशन (डेटा सेंटर्स के जरिए) होता है? इस पर्यावरण दिवस पर अपने फालतू ईमेल्स डिलीट करें।
पानी की हर बूंद कीमती है: ब्रश करते समय या बर्तन धोते समय नल खुला न छोड़ें।
पक्षी और जानवरों के लिए हमदर्दी: गर्मी के इस मौसम में अपनी छत या बालकनी पर पक्षियों के लिए पानी और दाना जरूर रखें।
एक विचारणीय बात: प्रकृति इंसानों के बिना करोड़ों साल तक फलती-फूलती रही है और हमारे बिना भी रह सकती है। लेकिन हम प्रकृति के बिना एक पल भी जीवित नहीं रह सकते। इसलिए, पर्यावरण को बचाकर हम धरती पर कोई अहसान नहीं कर रहे, बल्कि अपनी खुद की आने वाली पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित कर रहे हैं।
तो आइए इस 5 जून 2026 को सिर्फ वादे न करें, बल्कि धरती को हरा-भरा बनाने का एक सच्चा प्रयास शुरू करें!
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: World Environment Day Essay: विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष निबंध

भारत के इतिहास में कुछ तिथियां केवल कैलेंडर का हिस्सा नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना में अमिट स्मृति बन जाती हैं। 31 मई 1893 ऐसी ही एक तिथि है। यह वह दिन था जब भारतभूमि का एक युवा संन्यासी, साधारण गेरुआ वेशभूषा में, सीमित संसाधनों के साथ, परंतु असीम आत्मविश्वास और अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति को अपने भीतर समेटे हुए, भारतभूमि से विश्व मंच की ओर प्रस्थान कर रहा था। वह कोई राजा नहीं था, न किसी साम्राज्य का दूत और न ही किसी राजनीतिक शक्ति का प्रतिनिधि। वह भारत की आत्मा का वाहक था। वह थे 'स्वामी विवेकानंद।'
उस समय भारत अंग्रेज़ी दासता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। चारों ओर निराशा, हीनभावना और सांस्कृतिक असुरक्षा का वातावरण था। पश्चिमी सभ्यता की चमक के सामने भारतीय समाज अपनी ही परंपराओं पर प्रश्नचिह्न लगाने लगा था। भारत की आध्यात्मिक धरोहर, उसके वेद, उपनिषद, दर्शन और सनातन संस्कृति को पिछड़ेपन का प्रतीक बताने का प्रयास किया जा रहा था। ऐसे कठिन समय में एक युवा संन्यासी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ यह घोषणा की कि भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि विश्व को दिशा देने वाली आध्यात्मिक चेतना है।
अमेरिका के शिकागों नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण उनके लिए केवल एक अवसर नहीं था, बल्कि भारत की प्रतिष्ठा का प्रश्न था।'किंतु यह यात्रा किसी भी दृष्टि से सरल नहीं थी।' उनके पास पर्याप्त धन नहीं ओर न ही कोई बड़ा संगठन उनके साथ, यात्रा की व्यवस्थाएं अनिश्चित थीं। समुद्री यात्रा लंबी और कठिन थी। फिर भी उनके भीतर एक अदृश्य शक्ति कार्य कर रही थी, अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की प्रेरणा और भारतमाता की पुकार।
'31 मई 1893' की वह सुबह भारतीय इतिहास की सबसे भावनात्मक सुबहों में से एक कही जा सकती है। जब स्वामी विवेकानंद ने भारत से प्रस्थान किया, तब उनके मन में केवल एक संकल्प था—विश्व को भारत की आत्मा से परिचित कराना। कहा जाता है कि उस समय उनकी आंखों में करुणा भी थी और तेज भी।
वे जानते थे कि वे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के लिए नहीं जा रहे, बल्कि करोड़ों भारतीयों की मौन आकांक्षाओं को अपने साथ लेकर चल रहे हैं। बंदरगाह पर खड़े लोग शायद यह सोच भी नहीं सकते थे कि यह साधारण-सा दिखने वाला संन्यासी आने वाले समय में भारत के गौरव को विश्व के शिखर तक पहुंचा देगा।
उस क्षण भारत की सांस्कृतिक चेतना समुद्र के रास्ते विश्व की ओर यात्रा कर रही थी। यह केवल शरीर की यात्रा नहीं थी, यह भारतीय आत्मविश्वास की यात्रा थी। यह उस सभ्यता का प्रस्थान था जिसने हजारों वर्षों से विश्व को सहिष्णुता, मानवता और आध्यात्मिकता का संदेश दिया था। स्वामीजी के पास धन की कमी थी, पर विचारों की समृद्धि अपार थी। उनके पास भौतिक साधन सीमित थे, पर आत्मबल असीम था।
स्वामी विवेकानंद की विदेश यात्रा जाने की योजना में उनके शिष्यों तथा अनेक शुभचिंतकों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। विशेष रूप से चेन्नई के भक्तों और राजस्थान के खेतड़ी राज्य के राजा अजीत सिंह जी जो कि स्वामी जी के परम भक्त और समर्थक थे, ने आर्थिक सहायता की।
स्वामी विवेकानंद ने मुंबई से अपनी ऐतिहासिक समुद्री यात्रा प्रारंभ की वे जापान, चीन और कनाडा होते हुए अमेरिका पहुंचे किंतु विदेशी भूमि पर रहने और सम्मेलन तक पहुंचने के लिए वह एकत्रित किया गया धन पर्याप्त नहीं था। फिर भी उन्होंने कठिनाइयों को अपने मार्ग की बाधा नहीं बनने दिया।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागों नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेना था। वहां वे भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वेदांत दर्शन का प्रचार करना चाहते थे। यात्रा के दौरान वे पहले कनाडा के वेंकूवर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने रेलमार्ग से यात्रा की और 30 जुलाई 1893 को शिकागों पहुंचे। बाद में विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए उनके प्रेरणादायक भाषण ने संपूर्ण विश्व को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता से परिचित कराया।
उनके जीवन का यही सबसे बड़ा संदेश है कि जब उद्देश्य महान हो, तब अभाव भी व्यक्ति को रोक नहीं सकते। समुद्र के लंबे सफर के दौरान शायद अनेक बार उनके मन में भारत की छवि उभरती होगी, गरीब किसान, संघर्षरत युवा, दीन-हीन जनता और वह प्राचीन संस्कृति, जो अपनी असली पहचान के लिए व्याकुल थी।
वे जानते थे कि यदि विश्व भारत को सम्मान देगा, तो भारत स्वयं भी अपने प्रति सम्मान अनुभव करेगा। इसलिए उनकी यात्रा केवल शिकागो तक पहुंचने की यात्रा नहीं थी, वह भारत को आत्मगौरव लौटाने की यात्रा थी।
शिकागो पहुंचने के बाद भी संघर्ष समाप्त नहीं हुआ। सम्मेलन में भाग लेने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं, परिचय-पत्रों का अभाव और आर्थिक संकट उनके सामने दीवार बनकर खड़े थे। कई दिनों तक उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। (उन्हें कई दिनों तक भूखा भी रहना पड़ा) परंतु वे विचलित नहीं हुए। उनके भीतर यह अटूट विश्वास था कि वे सत्य व मानवता के संदेशवाहक हैं, और सत्य का मार्ग अंततः स्वयं बन जाता है।
वास्तव में, 31 मई 1893 को आरंभ हुई वह यात्रा केवल शिकागो तक नहीं अपितु वह करोड़ों भारतीयों के हृदय तक पहुंची। उसने गुलाम भारत में आत्मविश्वास का दीप प्रज्वलित किया, युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि भारत की संस्कृति विश्व को दिशा दे सकती है। यही कारण है कि स्वामी विवेकानंद केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रेरणास्रोत बन गए।
आज जब भारत विश्व पटल पर अपनी नई पहचान बना रहा है, तब 31 मई 1893 की वह यात्रा हमें पुनः स्मरण कराती है कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आत्मा में होती है। स्वामी विवेकानंदजी ने जिस भारत का स्वप्न देखा था, वह आत्मविश्वास, संस्कारित, सहिष्णु और मानवता के लिए समर्पित भारत था। इसलिए 31 मई केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा के विश्व की ओर प्रस्थान का दिवस है।
यह वह क्षण था जब एक युवा संन्यासी ने समुद्र पार करते हुए भारत के गौरव को विश्व के शिखर तक पहुंचाने का संकल्प लिया और उसे पूर्ण भी किया। आज भी जब हम स्वामी विवेकानंदजी को स्मरण करते हैं, तब उनके साथ वह ऐतिहासिक यात्रा भी हमारी स्मृतियों में जीवित हो उठती है, एक ऐसी यात्रा, जिसने भारत को स्वयं अपनी शक्ति का बोध कराया।
(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

