Train TTE Female Passengers Fight: पहली बार पकड़ने पर दी थी फंसाने धमकी, TTE ने दूसरी बार दबोचा!

ट्रेन में यात्रियों द्वारा नियम न मानने के कारण एक ऑन-ड्यूटी TTE को सफर के दौरान क्या कुछ झेलना पड़ता है, इस बारे में बहुत कम बात होती है। यह वायरल वीडियो उसी कड़वी सच्चाई को दिखाता है!

इंदौर ने अपने चैंपियंस को किया सलाम: कार्तिक जोशी और प्रीति खंडेलवाल का भव्य सम्मान

Academy of Indore Marathoners (AIM) द्वारा सोमवार प्रातः राजबाड़ा पर शहर के दो गौरवशाली खिलाड़ियों, अल्ट्रा रनर कार्तिक जोशी एवं मध्यप्रदेश की प्रथम महिला आयरनमैन प्रीति खंडेलवाल का भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 500 रनर्स एवं साइक्लिस्टों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर दोनों खिलाड़ियों का अभिनंदन किया।

एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. अरुण अग्रवाल ने बताया कि इंदौर के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। ऐसे खिलाड़ियों का सम्मान करना पूरे शहर का दायित्व है, जिससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर के महापौर माननीय श्री पुष्यमित्र भार्गव ने दोनों खिलाड़ियों का पुष्पहार  एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी ने कार्तिक जोशी की कारगिल से कन्याकुमारी तक की ऐतिहासिक रनिंग यात्रा की सराहना करते हुए उनके उत्साहवर्धन हेतु 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कार्तिक जैसे खिलाड़ी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं और उनकी उपलब्धियां पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं।

वहीं उन्होंने प्रीति खंडेलवाल को महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि उन्होंने आयरनमैन जैसी विश्व की सबसे कठिन खेल प्रतियोगिताओं में से एक को पूर्ण कर यह सिद्ध किया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां प्राप्त कर सकती हैं। उनकी सफलता प्रदेश की हजारों बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देगी।

कार्यक्रम के दौरान एकेडमी के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार से मांग की कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष समिति का गठन किया जाए, जो योग्य खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति (Scholarship), प्रशिक्षण सहायता एवं अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करे।

सम्मान समारोह में कार्तिक जोशी एवं प्रीति खंडेलवाल ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्तिक जोशी ने अपनी लंबी एवं चुनौतीपूर्ण रनिंग यात्रा के अनुभव बताते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। वहीं प्रीति खंडेलवाल ने आयरनमैन प्रतियोगिता की तैयारी, संघर्ष और सफलता की यात्रा साझा करते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते।

सम्मान समारोह के पश्चात सभी रनर्स एवं साइक्लिस्टों ने दोनों खिलाड़ियों के सम्मान में राजबाड़ा से दशहरा मैदान तक रन एवं साइक्लिंग रैली आयोजित की। सैकड़ों प्रतिभागियों ने कार्तिक जोशी के साथ दौड़ लगाकर उनके प्रति अपना सम्मान एवं समर्थन व्यक्त किया। पूरे मार्ग में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया गया तथा खेलों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का संचालन Academy of Indore Marathoners के  श्री विशाल मुदगल ने किया तथा अंत में सभी अतिथियों, खिलाड़ियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। समारोह ने यह संदेश दिया कि इंदौर अपने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का सम्मान करना जानता है और खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सदैव तत्पर है।

1,200 सूखे बोरवेल को एक अधिकारी ने बना दिया Rain Harvesting System | IAS Officer Prathap

जब बारिश का पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा था, तब एक IAS अधिकारी ने समाधान सूखे पड़े बोरवेलों में ढूंढ़ा।
1,200 से ज़्यादा बंद बोरवेलों को रेनवॉटर रिचार्ज स्ट्रक्चर में बदलकर उन्होंने न सिर्फ भूजल स्तर बढ़ाया, बल्कि कई गांवों में पानी की उम्मीद भी वापस लौटा दी।
यह कहानी याद दिलाती है कि बदलाव हमेशा बड़े बजट से नहीं, बड़े विचारों से आता है।
क्या आपके शहर में भी ऐसा मॉडल अपनाया जाना चाहिए?

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jharkhand recipe: झारखंड का पारंपरिक पकवान ओकोपोको, जानिए कैसे बनता है यह व्यंजन

Pictured is Okpoko, a traditional dish from Jharkhand

jharkhand recipe:झारखंड की पारंपरिक खानपान ओकोपोको बनाने के लिए आपको बिल्कुल भी ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती है। आपको बता दें कि इसे बनाने के लिये गेहूं का आटा मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है, उसके बाद गुड़ और घी की आवश्यकता होती है। साथ ही इसे बेहद कम समय में घर में तैयार कर सकते हैं। 

 

कैसे बनाएं ओकोपोको

 

सामग्री: गेहूं का आटा, गुड़ और घी।

 

विधि: 

 

* सबसे पहले एक बड़े बर्तन या परात में आटा लें।

 

* अब गुड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें या हल्का कूटकर बारीक करके आटे में मिला दें अथवा गुड़ को हल्का गर्म करके पिघलाकर आटे में डालें ताकि वह आसानी से आटे में मिल जाए।

 

* अब गुड़ की नमी और घी मिलाकर इनकी मदद से पूरा मिश्रण तैयार कर लें।

 

* फिर उक्त मिश्रण के छोटे-छोटे गोले बनाकर रख लें, आप चाहे तो गोल की जगह लंबा या चपटा आकार भी दे सकते हैं।

 

* इसके बाद कढ़ाई में घी या तेल, जो भी आप इस्तेमाल करना चाहे, उसे गर्म करके ओकोपोको को धीमी आंच पर सुनहरा भूरा होने तक पका लें।

 

* अब अच्छी तरह कुरकुरा होने पर एक बर्तन में निकालकर ठंडा कर लें। इसका अंदर का हिस्सा मीठा व नरम तथा बाहरी परत हल्की कुरकुरी होती है। बता दें कि ओकोपोको ठंडा होने के बाद ही ज्यादा स्वादिष्ट लगता है।

 

* देसी स्वाद और झारखंड की पुरानी संस्कृति की याद दिलाता पारंपरिक पकवान ओकोपोको को सभी बड़े चाव से खाते हैं। इसे आप चाय के साथ भी खा सकते हैं।

 

नोट: इसमें सबसे जरूरी बात यह होती है कि इसे बनाते समय पानी बिल्कुल नहीं मिलाया जाता है, बल्कि दोनों हाथों से अच्छी तरह आटा और गुड़ को मसलते हुए मिलाकर तैयार किया जाता है। 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

Uttar Pradesh News Live: सीएम योगी की कुशीनगर को 424 करोड़ की सौगात, मेरठ में संदिग्ध ड्रोन से हड़कंप

Uttar Pradesh News Live: सीएम योगी ने मंगलवार को कुशीनगर को 424 करोड़ की 278 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।। मेरठ में तीन दिनों से संदिग्ध ड्रोन मंडरा हैं। जिसके बाद सेना और पुलिस अलर्ट हो गई है। मथुरा से आईआईटीयन बाबा को गिरफ्तार किया गया है।

जब रास्ते बंद दिखें… समझ लो किस्मत नया दरवाज़ा खोल रही है

Picture shows a man meditating on how to get rid of a stressful life

कभी-कभी जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब हमें लगता है कि अब आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है। चारों तरफ से निराशा घेर लेती है और मन बार-बार यही कहता है कि शायद अब सब खत्म हो गया। ऐसी स्थिति में इंसान अपनी ही नजरों में कमजोर पड़ने लगता है और उसे अपने प्रयास भी व्यर्थ लगने लगते हैं।

 

लेकिन यदि हम थोड़ी शांति से सोचें, तो समझ में आता है कि हर बंद रास्ता वास्तव में अंत नहीं होता। जीवन कभी भी हमें बिना कारण रोके नहीं रखता, बल्कि वह हमें यह संकेत देता है कि जिस दिशा में हम जा रहे थे, वहां अब रुकना जरूरी है। यह रुकावट हमें किसी नई दिशा की ओर मोड़ने की प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

 

अक्सर हम अपनी असफलताओं को अपनी कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि असल में वही असफलताएं हमें सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। यदि हर प्रयास तुरंत सफल हो जाए, तो हम कभी यह नहीं जान पाएंगे कि हमारे अंदर और कितना सामर्थ्य छुपा हुआ है। कठिन समय ही हमें अपने भीतर झांकने और खुद को समझने का अवसर देता है।

 

जीवन का यह अटल नियम है कि जब तक हम अपने आरामदायक क्षेत्र (Comfort Zone) से बाहर नहीं निकलते, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं होती। जैसे ही परिस्थितियां कठिन होती हैं, हमें अपनी सोच बदलनी पड़ती है और यही बदलाव धीरे-धीरे हमें मजबूत बनाता है। इसलिए जब भी आपको लगे कि सब कुछ आपके खिलाफ जा रहा है, तो यह समझिए कि जीवन आपको एक नई दिशा में ढाल रहा है।

 

इस बात को एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। एक युवक बार-बार असफल हो रहा था और धीरे-धीरे उसने प्रयास करना भी छोड़ दिया। एक दिन वह बहुत निराश होकर बाहर निकला और रास्ते में उसने एक छोटा सा पौधा देखा जो पत्थर के नीचे से निकलने की कोशिश कर रहा था। उस दृश्य ने उसे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि यदि एक छोटा सा पौधा इतनी बाधाओं के बीच भी आगे बढ़ सकता है, तो वह खुद क्यों हार मान रहा है।

 

उसने उसी दिन यह तय किया कि वह परिस्थितियों को दोष देने के बजाय खुद को बदलने की कोशिश करेगा। उसने अपनी गलतियों को समझा, अपने प्रयासों को बेहतर किया और धीरे-धीरे उसकी स्थिति बदलने लगी। कुछ समय बाद वही व्यक्ति सफल हो गया, जिसे कभी लोग असफल समझते थे।

 

यह अनुभव हमें यह समझाता है कि जब ऊपर से रास्ते बंद दिखाई देते हैं, तब वास्तव में हमारे लिए कोई नया रास्ता तैयार हो रहा होता है। समस्या यह नहीं होती कि रास्ता नहीं है, बल्कि यह होती है कि हम उसे देखने के लिए तैयार नहीं होते। जैसे ही हमारी सोच बदलती है, हमें वही रास्ता दिखाई देने लगता है जो पहले नजर नहीं आता था।

 

जीवन हमें बार-बार परखता है और यह देखता है कि हम कितनी दूर तक चलने के लिए तैयार हैं। हर कठिनाई एक प्रश्न की तरह होती है, जो हमसे पूछती है कि क्या हम वास्तव में अपने लक्ष्य के लिए गंभीर हैं। जो लोग इन प्रश्नों का सामना करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं और अपनी पहचान बनाते हैं।

 

किस्मत भी उसी का साथ देती है, जो खुद को तैयार करता है। वह अचानक कोई चमत्कार नहीं करती, बल्कि धीरे-धीरे हमें उस योग्य बनाती है कि हम आने वाले अवसरों को पहचान सकें। जब हम गिरते हैं, टूटते हैं और फिर उठते हैं, तब हमारे अंदर वह परिपक्वता आती है जो सफलता के लिए आवश्यक होती है।

 

ऐसे समय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि हम खुद पर विश्वास बनाए रखें। यदि हम खुद ही हार मान लेते हैं, तो कोई भी हमारी मदद नहीं कर सकता। लेकिन यदि हम परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, अपने प्रयास जारी रखते हैं, तो धीरे-धीरे रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं।

 

इसलिए जब भी जीवन में ऐसा लगे कि अब सब खत्म हो गया है, तो खुद को थोड़ा समय दीजिए और स्थिति को समझने की कोशिश कीजिए। कई बार जो हमें अंत दिखाई देता है, वही वास्तव में एक नई शुरुआत का द्वार होता है। बस हमें धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहना होता है। अंत में यही कहना उचित होगा कि जीवन कभी भी हमें रोकने के लिए नहीं, बल्कि आगे बढ़ाने के लिए काम करता है। जब रास्ते बंद दिखते हैं, तो घबराने के बजाय यह समझने की जरूरत होती है कि शायद अब कुछ नया और बेहतर हमारे सामने आने वाला है। यही सोच हमें निराशा से बाहर निकालकर एक नई दिशा की ओर ले जाती है।

 

अंततः जब भी आपको लगे कि अब आगे कोई रास्ता नहीं बचा, तो यह मानकर चलिए कि जीवन आपको किसी नई राह के लिए तैयार कर रहा है। उस समय धैर्य बनाए रखना और खुद पर विश्वास रखना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। यही विश्वास एक दिन आपके लिए वह दरवाज़ा खोलता है, जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होती।

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है…)

 

जयपुर का पहला Net Zero Cooling Station | Summer India | Rajasthan

40°C की तपती गर्मी में भी जयपुर का यह Net Zero Cooling Station लोगों को दे रहा है सुकून यहाँ ना AC है, ना कूलर, फिर भी अंदर कदम रखते ही 5-6°C तक ठंडक महसूस होती है। हर साल बढ़ती गर्मी को देखते हुए, क्या अब हर शहर में ऐसे Cooling Stations होने चाहिए?

जयपुर का पहला Net Zero Cooling Station | Summer India | Rajasthan

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जब दुनिया ने ठुकराया, माँ ने गले लगा लिया | LGBTQ Story | Pride Month || The Better India Hindi

युवराज की Sexuality के लिए दुनियां ने उससे सवाल किए, ताने मारे, पर इन तानों के बीच उनकी माँ अपने बच्चे की सबसे बड़ी ताक़त बनकर खड़ी रही।

@yuvi.groovy

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ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल टीम फीफा विश्वकप में लगातार छठी बार लेंगी हिस्सा

ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल टीम 11 जून से शुरु होने वाले फीफा विश्वकप 2026 में लगातार छठी बार हिस्सा लेगी। ऑस्ट्रेलियाई टीम क्वालिफाइंग ग्रुप में जापान के बाद दूसरे स्थान पर रही थी।

पिछली बार, कतर 2022 में,ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल टीम, जिसे सॉकरूज के नाम से भी जाना जाता है ने राउंड ऑफ 16 में पहुंचकर विश्वकप में अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन दोहराया था। वहा, ऑस्ट्रेलिया को बाद में चैंपियन बनी टीम अर्जेंटीना के हाथों 2-1 से करीबी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार कनाडा, मेक्सिको और अमेरिका में होने वाले टूर्नामेंट में वे और भी बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद करेंगे।

टोनी पोपोविक की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम ग्रुप डी में तुकिर्ये के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। इसके बाद उनका मुकाबला सह-मेजबान अमेरिका और फिर वे पैराग्वे के साथ होगा।

फुटबॉल ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को 2026 फीफा विश्व कप के लिए अपनी टीम का की घोषणा कर दी है इस टीम में 17 ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं जो पहली बार विश्व कप खेल सकते हैं और दो ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अभी तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। चयनकर्ताओं ने टीम में इटली में रहने वाले अटैकिंग प्लेमेकर क्रिस्टियन वोल्पाटो को भी शामिल किया गया है। वोल्पाटो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इटली के बजाय ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने का फैसला किया है और वह वर्ल्ड कप में अपना पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए तैयार हैं।

22 साल के वोल्पाटो का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था, लेकिन उन्होंने यूथ इंटरनेशनल स्तर पर इटली की तरफ से खेला था। टीम में उनके साथ ऐसे स्ट्राइकर टेटे येंगी भी शामिल हैं, जिन्होंने अभी तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है और जो जापान में क्लब फुटबॉल खेलते हैं। विश्व कप में टीम की कप्तानी गोलकीपर मैट रयान और विंगर मैथ्यू लेकी करेंगे। ये दोनों सॉकरूस के तीसरे और चौथे ऐसे खिलाड़ी बन जाएंगे जो चार वर्ल्ड कप में खेलेंगे। हेड कोच टोनी पोपोविक ने एक बयान में कहा, “इस फाइनल वर्ल्ड कप टीम को चुनने में कई बातों का ध्यान रखा गया है। कुछ मुश्किल फैसले भी लेने पड़े – बड़े टूर्नामेंट्स में ऐसा ही होता है।”

Kanpur Dehat News: आंबेडकर प्रतिमा स्थल पर कब्जे के विरोध में पूर्व सांसद अनिल शुक्ल ने कलेक्ट्रेट पर दिया धरना

1 जून, सोमवार, कानपुर देहात: अकबरपुर तहसील के फतेहपुर रोशनाई गांव में आंबेडकर प्रतिमा स्थल पर कथित कब्जे के विरोध में पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारिसी कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए। उस समय राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला कलेक्ट्रेट सभागार में एक सरकारी कार्यक्रम में मौजूद थीं।