World No Tobacco Day: विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026: एक कदम तंबाकू से दूर, हजार कदम स्वास्थ्य की ओर

Images showing awareness about good health on World No Tobacco Day

Harmful Effects of Tobacco: 'एक कदम तंबाकू से दूर, हजार कदम स्वास्थ्य की ओर'- यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध और दीर्घायु जीवन जीने का मूलमंत्र है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट या गुटखा जैसी चीजें इंसान को शुरुआत में एक अस्थायी आनंद या राहत का अहसास कराती हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत एक जानलेवा जाल बन जाती है। जब कोई व्यक्ति तंबाकू छोड़ने का 'एक कदम' उठाता है, तो उसका शरीर और जीवन 'हजारों कदम' खुशहाली की ओर बढ़ा देते हैं।

 

आइए जानते हैं कि तंबाकू से दूरी बनाते ही आपके स्वास्थ्य में क्या चमत्कारी बदलाव आते हैं:

 

तंबाकू छोड़ते ही शरीर में बदलाव की टाइमलाइन

जैसे ही आप तंबाकू से दूरी बनाते हैं, आपका शरीर खुद को ठीक (Heal) करना शुरू कर देता है:

 

20 मिनट में: ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कनें सामान्य होने लगती हैं।

 

12 घंटे में: खून में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर घटकर सामान्य हो जाता है और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है।

 

2 से 12 हफ्ते में: फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

 

1 वर्ष में: दिल की बीमारी (Heart Attack) का खतरा तंबाकू का सेवन करने वालों की तुलना में आधा हो जाता है।

 

10 वर्ष में: फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मृत्यु का जोखिम लगभग आधा हो जाता है।

 

'हजार कदम स्वास्थ्य की ओर' के बड़े फायदे

कैंसर और गंभीर बीमारियों से मुक्ति: तंबाकू छोड़ने से मुंह, गले, फेफड़ों और पेट के कैंसर का खतरा लगभग खत्म हो जाता है।

 

मजबूत दिल और फेफड़े: सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना बंद हो जाता है। स्टेमिना बढ़ता है और आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं।

 

मानसिक स्पष्टता और कम तनाव: यह एक मिथक है कि तंबाकू तनाव कम करता है। वास्तव में, निकोटीन की लत तनाव बढ़ाती है। इसे छोड़ने से नींद बेहतर होती है और मानसिक शांति मिलती है।

 

आर्थिक और पारिवारिक खुशहाली: तंबाकू पर होने वाला रोज का खर्च बचता है। सबसे बड़ी बात, आपका परिवार एक ऐसी अनहोनी के डर से मुक्त हो जाता है जो तंबाकू के कारण किसी भी वक्त आ सकती है।

 

तंबाकू से दूरी बनाने के 4 आसान उपाय

यदि आप या आपका कोई प्रिय इस लत को छोड़ना चाहता है, तो इन बातों पर अमल करें:

 

'क्विट डेट' (Quit Date) तय करें: कैलेंडर में एक तारीख तय करें कि इस दिन से मुझे तंबाकू को हाथ नहीं लगाना है। 31 मई को 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' (World No Tobacco Day) आ रहा है, इस सफर को शुरू करने के लिए इससे बेहतर दिन कोई नहीं हो सकता।

 

ट्रिगर्स को पहचानें: जब भी तंबाकू की तलब (Crave) उठे, तो तुरंत अपना ध्यान भटकाएं। सौंप, इलायची, लौंग या चुइंगम चबाएं।

 

खूब पानी पिएं: पानी पीने से शरीर में जमा निकोटीन और टॉक्सिन्स तेजी से बाहर निकलते हैं।

 

'नो' कहना सीखें: जब दोस्त या सहकर्मी आपको तंबाकू ऑफर करें, तो पूरी दृढ़ता से मुस्कुराते हुए मना कर दें।

 

आज ही संकल्प लें: मौत के इस धीमे जहर को अपनी जिंदगी से बाहर निकालें। तंबाकू से दूरी बनाने का आपका आज का एक छोटा सा फैसला, आपके कल को सेहतमंद और मुस्कुराता हुआ बना सकता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: 10 things about Nautapa: नौतपा से जुड़ी 10 खास बातें

रो पड़ा ‘Boss Baby’, नम हो गईं करोड़ों आंखें, 15 साल के खिलाड़ी ने बदले क्रिकेट के मायने, हिला दी रिकॉर्ड बुक [VIDEO]

कभी-कभी स्कोरबोर्ड हार दिखाता है, लेकिन मैदान पर कोई खिलाड़ी ऐसा प्रभाव छोड़ जाता है कि पूरी दुनिया सिर्फ उसी की बात करती है। IPL 2026 के क्वालिफायर-2 में यही हुआ। राजस्थान रॉयल्स का सफर भले ही गुजरात टाइटंस के खिलाफ हार के साथ खत्म हो गया, लेकिन 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि Age is Just a Number (उम्र सिर्फ एक संख्या है)

मैच खत्म होने के बाद डगआउट में बैठे वैभव की आंखों में आंसू थे। चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दे रही थी। शायद उन्हें अपनी टीम के बाहर होने का दुख था, शायद 47 गेंदों में 96 रन पर रुक जाने का अफसोस भी। लेकिन उस पल को देखने वाले लाखों क्रिकेट फैंस के मन में सिर्फ एक ही बात थी जिस उम्र में बच्चे क्रिकेटर बनने का सपना देखते हैं, उस उम्र में यह लड़का दुनिया की सबसे कठिन टी20 लीग में Experienced खिलाड़ियों को पीछे छोड़ रहा है।

आज लोग उन्हें सिर्फ वैभव सूर्यवंशी नहीं, बल्कि “Boss Baby” कहकर बुलाते हैं। और IPL 2026 के बाद यह नाम पूरी तरह उनके Personality पर फिट बैठता है।

776 रन, 72 छक्के और 237 की स्ट्राइक रेट… यह किसी वीडियो गेम का आंकड़ा नहीं है

IPL 2026 में वैभव सूर्यवंशी ने जो किया, वह टी20 क्रिकेट के इतिहास के सबसे यादगार पन्नों में गिना जाएगा। एक ऐसा सीजन जिसने रिकॉर्ड बुक्स हिला दीं

IPL 2026 में वैभव सूर्यवंशी के आंकड़े:

16 पारियां
776 रन
औसत: 48.50
स्ट्राइक रेट: 237.31
72 छक्के
684 रन सिर्फ बाउंड्री से
4 प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड
एलिमिनेटर में 97 (29)
क्वालिफायर-2 में 96 (47)

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनके 776 में से 684 रन केवल चौकों और छक्कों से आए। यह दिखाता है कि वह सिर्फ रन नहीं बना रहे थे, बल्कि गेंदबाजों पर लगातार हमला कर रहे थे। ऐसे आंकड़े अक्सर अपने करियर के शिखर पर पहुंच चुके दिग्गज खिलाड़ियों के नाम के आगे दिखाई देते हैं। लेकिन वैभव ने यह सब सिर्फ 15 साल की उम्र में कर दिखाया।

जिस मैच में टीम लड़खड़ाई, वहां अकेले खड़े रहे वैभव

गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर-2 में राजस्थान की शुरुआत बेहद खराब रही। मोहम्मद सिराज और कगिसो रबाडा की तेज गेंदबाजी के सामने राजस्थान ने जल्दी विकेट गंवा दिए। ऐसे दबाव भरे मुकाबले में वैभव ने शुरुआत में स्ट्रगल किया। कई बार गेंद बल्ले को छूकर निकल गई। लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है। वह सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालना भी जानते हैं।

56 रन तक पहुंचने के दौरान रबाडा की एक तेज गेंद उनके हेलमेट पर भी लगी। लेकिन उसके बाद जैसे उन्होंने गियर बदल दिया। अगली 14 गेंदों में उन्होंने 39 रन ठोक दिए। जब वह 96 रन पर आउट हुए, तब तक राजस्थान का स्कोर सम्मानजनक स्थिति में पहुंच चुका था। लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे।

ध्रुव जुरेल, रियान पराग, दासुन शनाका और जोफ्रा आर्चर बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। राजस्थान 214 रन तक पहुंचा, लेकिन गुजरात के बल्लेबाजों ने लक्ष्य हासिल कर लिया। स्कोरकार्ड में यह एक हार थी, लेकिन क्रिकेट देखने वालों के लिए यह वैभव सूर्यवंशी का एक और मास्टरक्लास था।


97 रन, 29 गेंदें और क्रिस गेल का रिकॉर्ड… जिसने दुनिया को चौंका दिया

क्वालिफायर-2 से पहले एलिमिनेटर मुकाबले में वैभव ने ऐसा तूफान खड़ा किया था जिसकी चर्चा पूरे क्रिकेट जगत में हुई। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन ठोक दिए। उस पारी में वह सिर्फ तीन रन से शतक से चूक गए, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह रही कि उन्होंने छक्कों की बारिश करते हुए कई रिकॉर्ड्स को खतरे में डाल दिया।

क्रिकेट फैंस को एक समय ऐसा लगने लगा था कि वह क्रिस गेल (Chris Gayle) के 2013 में RCB के लिए बनाए गए सबसे तेज IPL शतक के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकते हैं।

हालांकि वह रिकॉर्ड नहीं टूटा, लेकिन उस दिन वैभव ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने छक्कों के मामले में ऐसे आंकड़े छू लिए जिन तक पहुंचने में बड़े-बड़े बल्लेबाजों को कई सीजन लग जाते हैं। उन्होंने एक सीजन में क्रिस गेल का ही सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ डाला। उनकी उस विस्फोटक पारी के बाद खुद Chris Gayle ने सोशल मीडिया पर उनके लिए Special Message पोस्ट किया और उन्हें क्रिकेट का नया “Six Machine” बताया।

जब टी20 क्रिकेट का सबसे बड़ा सिक्सर किसी युवा खिलाड़ी की तारीफ करे, तो समझा जा सकता है कि उस खिलाड़ी ने कितनी बड़ी छाप छोड़ी है।

रबाडा, आर्चर और संगकारा भी हुए फैन

वैभव की बल्लेबाजी से सिर्फ Fans ही प्रभावित नहीं हुए, बल्कि दुनिया के बड़े क्रिकेट नाम भी उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे।

Kagiso Rabada ने कहा कि वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनकी तेज हाथों की गति, गेंद की लंबाई को जल्दी पढ़ने की क्षमता और बिल्कुल निडर मानसिकता है। उनके मुताबिक मैदान पर उतरते समय वैभव उम्र के बारे में सोचते ही नहीं।

Kumar Sangakkara (Head Coach and Director of Cricket for the Rajasthan Royals) का मानना है कि वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं और भारतीय टीम का बुलावा ज्यादा दूर नहीं है।

पूर्व वेस्टइंडीज तेज गेंदबाज Ian Bishop ने तो यहां तक कहा कि गेंदबाजों के पास वैभव को रोकने के लिए अब शायद “Plan Z” तक आना पड़ रहा है।

आंसू हार के थे, लेकिन भविष्य जीत का है

96 रन पर आउट होना दर्द देता है।
प्लेऑफ में शतक से सिर्फ चार रन दूर रह जाना दर्द देता है।
टीम का फाइनल से पहले बाहर हो जाना भी दर्द देता है। लेकिन यह कहानी उन आंसुओं की नहीं है। यह कहानी उस लड़के की है

  • जिसने IPL 2026 को अपने नाम कर दिया।
  • जिसने 16 पारियों में 776 रन बनाए।
  • जिसने 72 छक्के उड़ाए।
  • जिसने गेंदबाजों के मन में डर पैदा कर दिया।
  • जिसने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भारतीय क्रिकेट का अगला सुपरस्टार शायद आ चुका है।

15 साल की उम्र में 96 और 97 पर रुक जाना कोई असफलता नहीं है। उनके पास आगे पूरा करियर पड़ा है, सैकड़ों मैच हैं, दर्जनों शतक हैं और अनगिनत रिकॉर्ड उनका इंतजार कर रहे हैं।

राजस्थान रॉयल्स भले ही ट्रॉफी तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन IPL 2026 की सबसे बड़ी खोज, सबसे बड़ा आकर्षण और सबसे बड़ी कहानी सिर्फ एक नाम रही—
वैभव सूर्यवंशी।

और अगर यह सिर्फ शुरुआत है, तो आने वाले सालों में क्रिकेट की दुनिया “बॉस बेबी” का असली राज देखने वाली है।

Ahilyabai Holkar Jayanti: रानी अहिल्याबाई की 301वीं जयंती, जानें इतिहास, प्रेरणादायी विचार और शुभकामनाएं

 Portrait of the great warrior, skilled administrator and just ruler Lokmata Rani Ahilyabai Holkar

Ahilyabai Holkar Jayanti Wishes: रानी अहिल्याबाई जयंती 2026 पूरे भारत में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर लोग उनके आदर्शों, समाज सुधार कार्यों और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान को याद करेंगे। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण कराया। उनका जीवन महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। रानी अहिल्याबाई होलकर को उनकी दयालुता, प्रशासनिक क्षमता और जनता के प्रति समर्पण के कारण 'लोकमाता' कहा जाता है।ALSO READ: रानी अहिल्याबाई का जन्म कब और कहां हुआा था?

 

पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जयंती भारत की उस महान वीरांगना, कुशल प्रशासक और न्यायप्रिय शासिका को नमन करने का दिन है, जिन्होंने अपने जन-कल्याणकारी कार्यों से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। 31 मई 1725 को जन्मीं महारानी अहिल्याबाई होलकर की जयंती हर साल 31 मई को मनाई जाती है।

 

वर्ष 2026 में उनकी 301वीं जयंती के भव्य राष्ट्रीय आयोजनों के बाद, वर्ष 2026 में भी उनकी विरासत, जल संरक्षण के संदेशों जैसे गोदा-नर्मदा जल यात्रा और नारी सशक्तिकरण के रूप में उनकी जयंती को पूरे देश में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है।

 

आइए जानते हैं उनके गौरवशाली इतिहास, प्रेरणादायी विचारों और इस दिन अपनों को भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों के बारे में…

 

रानी अहिल्याबाई होलकर का गौरवशाली इतिहास

अहिल्याबाई होलकर का जीवन अदम्य साहस, त्याग और कर्तव्यपरायणता की एक अद्भुत मिसाल है:

 

प्रारंभिक जीवन और विवाह: अहिल्याबाई का जन्म महाराष्ट्र के अहमदनगर (अब अहिल्या नगर) के चौंडी गांव में हुआ था। मात्र 10 वर्ष की आयु में उनका विवाह मराठा सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव से हुआ।

 

चुनौतियों का पहाड़: वर्ष 1754 में कुंभेर के युद्ध में उनके पति खंडेराव शहीद हो गए। इसके बाद उनके ससुर मल्हारराव होलकर और फिर उनके इकलौते पुत्र मालेराव का भी असमय निधन हो गया। इस भारी व्यक्तिगत संकट के बाद भी उन्होंने खुद को संभाला और इंदौर (मालवा साम्राज्य) की कमान अपने हाथों में ली।

 

कुशल और न्यायप्रिय शासन: उन्होंने 1767 से 1795 तक लगभग 28 वर्षों तक मालवा पर शासन किया। उनके शासनकाल में प्रजा बेहद सुखी और समृद्ध थी। वे स्वयं अदालत लगाकर जनता की समस्याएं सुनती थीं, इसलिए उन्हें 'लोकमाता' कहा गया। देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने शासनकाल में न केवल युद्धों का कुशलता से नेतृत्व किया, बल्कि उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कपड़े के व्यापार- जैसे मशहूर महेश्वरी साड़ियों की शुरुआत और हथकरघा उद्योग को बढ़ावा दिया, जिससे हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता मिली।ALSO READ: लोकमाता अहिल्या: तीन युगों की महानता का संगम

 

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जीर्णोद्धार: देवी अहिल्याबाई ने भारत के आध्यात्मिक ताने-बाने को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), सोमनाथ मंदिर (गुजरात), और केदारनाथ-बद्रीनाथ सहित देश भर के सैकड़ों मंदिरों, घाटों, कुओं, बावड़ियों और धर्मशालाओं का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कराया।

 

लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के प्रेरणादायी विचार

अहिल्याबाई होलकर के जीवन मूल्य और उनके सिद्धांत आज के समाज और नेतृत्व के लिए सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं:

 

* 'प्रजा का कल्याण ही राजा का एकमात्र धर्म है। यदि प्रजा दुखी है, तो शासक का सिंहासन व्यर्थ है।'

 

* 'ईश्वर ने मुझे जो धन और सत्ता सौंपी है, मैं उसकी मालकिन नहीं बल्कि सिर्फ एक ट्रस्टी (रक्षक) हूं। इसका एक-एक पैसा जनता की भलाई और धर्म के कार्यों में लगना चाहिए।'

 

* 'चुनौतियां और संकट जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन न्याय और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने से बड़ी से बड़ी विपत्ति भी रास्ता बदल लेती है।'

 

अहिल्याबाई होलकर जयंती 2026: शुभकामना संदेश

इस पावन अवसर पर आप इन संदेशों, वॉट्सऐप स्टेटस और कोट्स के जरिए अपने मित्रों और परिवार को शुभकामनाएं दे सकते हैं:

 

शुभकामना संदेश 1

'न्याय, धर्म और अटूट नारी शक्ति की प्रतीक, 

महान शासिका पुण्यश्लोक लोकमाता 

देवी अहिल्याबाई होलकर जयंती की 

आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!'

 

शुभकामना संदेश 2

'जिन्होंने संकटों के आगे कभी घुटने नहीं टेके, 

प्रजा को संतान मानकर जिसने वात्सल्य लुटाया। 

ऐसी न्यायप्रिय मां अहिल्याबाई होलकर 

की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!'

 

शुभकामना संदेश 3

'भारत की संस्कृति, मंदिरों के जीर्णोद्धार और 

जल संरक्षण की दूरदर्शी जननायक, 

राजमाता अहिल्याबाई होलकर के आदर्श 

हमारे जीवन को हमेशा प्रेरित करते रहें। 

होलकर जयंती की मंगलकामनाएं!'

 

शुभकामना संदेश 4

'धर्म की रक्षा, न्याय की मूरत, 

महारानी अहिल्याबाई जैसी शासक थी अद्भुत।

इंदौर की गौरव और देश की शान 

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को शत्-शत् नमन।'

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Ahilyabai Holkar जयंती: नारी शक्ति, न्याय और सेवा का प्रतीक महारानी अहिल्याबाई होलकर

Ahilyabai Holkar जयंती: नारी शक्ति, न्याय और सेवा का प्रतीक महारानी अहिल्याबाई होलकर

The picture depicts Ahilyabai Holkar a true example of indomitable courage, public welfare and women power, and the rajvada palace of Indore

Ahilyabai Holkar Biography Hindi: लोकमाता, न्याय की प्रतिमूर्ति और कुशल प्रशासक महारानी अहिल्याबाई होलकर की जयंती हर साल 31 मई को मनाई जाती है। मालवा साम्राज्य (विशेषकर इंदौर और महेश्वर) की बागडोर संभालने वाली रानी अहिल्याबाई का जीवन अदम्य साहस, संन्यास, जनकल्याण और नारी शक्ति का साक्षात उदाहरण है। इस साल 31 मई 2026 को उनकी 301वीं जयंती मनाई जा रही है।ALSO READ: लोकमाता अहिल्या: तीन युगों की महानता का संगम

 

आइए उनके इस पावन दिवस पर उनके जीवन के कुछ ऐसे पहलुओं को याद करें जो आज भी प्रेरणा देते हैं:

 

एक साधारण लड़की से 'लोकमाता' बनने का सफर

जन्म: अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था।

 

भाग्य का मोड़: इंदौर के महाराजा मल्हारराव होलकर ने एक बार अहिल्याबाई को बचपन में मंदिर में गरीबों को भोजन कराते और उनकी भक्ति को देखा। वे उनके संस्कारों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने बेटे खांडेराव से उनका विवाह करवा दिया।

 

विपत्तियों का पहाड़: शादी के कुछ साल बाद ही एक युद्ध में उनके पति खांडेराव शहीद हो गए। इसके कुछ समय बाद उनके ससुर मल्हारराव और फिर उनके इकलौते बेटे मालेराव का भी निधन हो गया।
 

जब संभाली साम्राज्य की बागडोर

चारों तरफ से दुखों से घिरने और उस जमाने में महिलाओं पर कई पाबंदियां होने के बावजूद, अहिल्याबाई टूटी नहीं। उन्होंने खुद आगे बढ़कर मालवा की कमान संभाली। उन्होंने केवल महल से राज नहीं किया, बल्कि पुरुषों की तरह पोशाक पहनकर, तीर-कमान संभालकर खुद युद्ध के मैदान में उतरकर दुश्मनों और लुटेरों को धूल चटाई।

 

सांस्कृतिक पुनरुत्थान और मंदिरों का जीर्णोद्धार

अहिल्याबाई होलकर को भारत के इतिहास में सबसे बड़ी सांस्कृतिक रक्षक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत धन का उपयोग करके पूरे भारत में सनातन संस्कृति का पुनरुद्धार किया।

 

काशी विश्वनाथ मंदिर: क्रूर शासक औरंगजेब द्वारा तोड़े गए वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण 1780 में रानी अहिल्याबाई ने ही करवाया था।

 

अन्य ज्योतिर्लिंग और तीर्थ: उन्होंने सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया, केदारनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, गया और अयोध्या में घाट, कुएं, धर्मशालाएं और मंदिरों का निर्माण कराया।

 

आज भारत के लगभग हर प्रमुख तीर्थ स्थल पर आपको अहिल्याबाई होलकर द्वारा बनवाई गई कोई न कोई धर्मशाला या घाट जरूर मिल जाएगा।

 

महेश्वरी साड़ियों की शुरुआत

रानी अहिल्याबाई केवल धर्म ही नहीं, बल्कि रोजगार को बढ़ावा देने वाली दूरदर्शी शासक थीं। उन्होंने बुनकरों को संरक्षण देने के लिए गुजरात और अन्य जगहों से कारीगरों को बुलाकर महेश्वर में बसाया। यहीं से विश्व प्रसिद्ध 'महेश्वरी साड़ियों' की शुरुआत हुई, जो आज भी भारत का गौरव हैं।

 

न्याय की मिसाल

अहिल्याबाई के राज में न्याय सबके लिए बराबर था, चाहे वह कोई आम नागरिक हो या उनका अपना परिवार। एक लोककथा के अनुसार, जब उनके इकलौते बेटे से अनजाने में एक गाय के बछड़े की मृत्यु हो गई, तो उन्होंने न्याय की रक्षा के लिए अपने ही बेटे को वही सजा देने का आदेश दे दिया था जो किसी आम अपराधी को मिलती। ऐसे कठोर और निष्पक्ष न्याय के कारण प्रजा उन्हें 'देवी' की तरह पूजने लगी।

 

शत-शत नमन: 31 मई का यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक सच्चा शासक वह है जो सत्ता को भोग नहीं, बल्कि प्रजा की सेवा का माध्यम समझे। इंदौर और पूरे भारत के गौरव को बढ़ाने वाली 'मशाल' देवी अहिल्याबाई होलकर की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

पूजा सिंह ने तोड़ा 14 साल का राष्ट्रीय हाई जंप रिकॉर्ड, एशियाई U20 एथलेटिक्स में जीता गोल्ड

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भारतीय एथलेटिक्स में एक नई उम्मीद की किरण उभरी है। 20 वर्षीय युवा हाई जंपर पूजा सिंह ने 2026 एशियाई U20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1.93 मीटर की छलांग लगाकर नया सीनियर महिला राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया और भारतीय खेलों के इतिहास में एक यादगार पल गढ़ दिया।

पूजा ने प्रतियोगिता की शुरुआत 1.91 मीटर की छलांग के साथ की, जिससे उन्होंने अपना खुद का U20 राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और भारतीय महिला हाई जंप के सभी समय के रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुँच गईं। लेकिन उनका प्रदर्शन यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने अगली कोशिश में 1.93 मीटर की छलांग लगाई और 2012 में ओलंपियन सहाना कुमारी द्वारा बनाए गए 1.92 मीटर के लंबे समय से कायम रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

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यह उपलब्धि भारतीय खेलों, विशेषकर महिला हाई जंप में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि पिछले 14 वर्षों में यह राष्ट्रीय रिकॉर्ड नहीं टूट पाया था। प्रतियोगिता में उनकी साहसिक शैली, दबाव में धैर्य और लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन ने साबित किया कि भारत ने एक नई पीढ़ी की एथलीट पाई है।

पूजा का 1.93 मीटर का प्रदर्शन 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की क्वालीफिकेशन मापदंड से भी ऊपर है। उनकी यह छलांग भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संभावित पदकों की उम्मीद जगाती है। प्रशंसक और विश्लेषक इसे भारतीय हाई जंप के लिए मील का पत्थर मान रहे हैं।

हालांकि, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) को यह तय करना होगा कि क्या पूजा को फेडरेशन कप के बाद होने वाले अंतिम क्वालीफिकेशन के बावजूद कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए विशेष अनुमति दी जाएगी। लेकिन प्रदर्शन की बात करें तो पूजा ने ऐसा रिकॉर्ड कायम किया है, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह योग्य बनाता है।

पूजा सिंह ने न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की है, बल्कि भारतीय महिला एथलेटिक्स में भी नई उम्मीद जगाई है। उनके साहस और युवा जोश को देखते हुए, आने वाले एशियाई और कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका नाम भारत के संभावित मेडलिस्टों की सूची में प्रमुख रहेगा।

सनातन परंपरा का यह एक नियम, जिसे अब मान रही है मॉडर्न साइंस; रोज सुबह करने से बीमारियां रहेंगी कोसों दूर

हमारी सनातन संस्कृति में ऋषि-मुनियों ने जितने भी नियम बनाए, उनके पीछे केवल धार्मिक कारण नहीं थे, बल्कि गहरा विज्ञान छिपा था। आज पश्चिमी देश और मॉडर्न मेडिकल साइंस जिन चीज़ों को 'हॉलिस्टिक हीलिंग' या 'वेलनेस हैक्स' कहकर प्रमोट कर रहे हैं, वे हमारे घरों में सदियों से अपनाई जा रही हैं। ऐसा ही एक बेहद साधारण लेकिन चमत्कारी नियम है- 'उषःपान' (रोज सुबह बासी मुंह तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना)। आज मॉडर्न साइंस भी मान चुकी है कि अगर कोई इंसान रोज सुबह उठकर इस नियम का पालन करता है, तो आधी से ज्यादा बीमारियां उसके शरीर के पास भी नहीं फटकेंगी। आइए जानते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक सच।

 

1. पेट बनता है 'सुपरक्लीन' (Detoxification)

आयुर्वेद कहता है कि हर बीमारी की जड़ हमारा पेट है। रातभर जब तांबे के लोटे में पानी रखा रहता है, तो तांबा पानी में मिलकर उसे 'एल्केलाइन' (Alkaline) बना देता है।

साइंस क्या कहती है? सुबह बासी मुंह यह पानी पीने से पेट का एसिड लेवल कम होता है और आंतों की सफाई होती है। यह शरीर के सारे टॉक्सिन्स (जहरीले पदार्थों) को फ्लश आउट कर देता है, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं जड़ से खत्म हो जाती हैं।

 

2. तांबे का 'ऑलिगोडायनेमिक' प्रभाव (Natural Antibiotic)

सनातन परंपरा में तांबे (Copper) के बर्तनों को सबसे शुद्ध माना गया है।

साइंस क्या कहती है? मेडिकल रिसर्च के अनुसार, तांबे में 'ऑलिगोडायनेमिक' (Oligodynamic) गुण होते हैं। जब पानी को 8 घंटे तक तांबे के बर्तन में रखा जाता है, तो उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और फंगस अपने आप मर जाते हैं। यह पानी शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को बूस्ट करता है।

 

3. वेट लॉस और चमकदार त्वचा (Anti-Aging & Weight Loss)

अक्सर लोग वजन घटाने के लिए महंगी दवाइयां या सप्लीमेंट्स लेते हैं, जबकि इसका समाधान सुबह के इस एक नियम में है।

साइंस क्या कहती है? तांबा शरीर के एक्स्ट्रा फैट को बर्न करने में मेटाबॉलिज्म की मदद करता है। इसके अलावा, कॉपर में बेहतरीन एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो चेहरे की झुर्रियों को रोकते हैं और नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण में मदद करते हैं, जिससे चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है।

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उषापान करने का सही तरीका (जो आपको पता होना चाहिए):

  • पानी को रात में ही तांबे के लोटे या जग में ढककर रख दें।
  • सुबह उठते ही, बिना ब्रश किए (बासी मुंह) बैठकर घूंट-घूंट करके इस पानी को पीएं। (सुबह की लार में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पेट के लिए बहुत फायदेमंद हैं)।
  • पानी को कभी भी गर्म न करें, इसे नॉर्मल रूम टेम्परेचर पर ही पीएं।

 

बॉटम लाइन:

सनातन परंपरा का यह 'वॉटर थेरेपी' नियम आज के दौर की सबसे सस्ती और सबसे असरदार दवा है। दवाओं पर पैसे खर्च करने से बेहतर है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें। आज ही से इसे आजमाएं और खुद बदलाव महसूस करें!

 

पैरों की पिंडलियों को सुडौल और पतला करने हेतु आजमाएं ये 6 असरदार उपाय

Effective exercises and tips to slim down your calves

How to slim calves: आजकल फिटनेस और सुंदर शरीर की चाह हर व्यक्ति की प्राथमिकता बन गई है। महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए पैरों की पिंडलियां (Calves) पतली और टोंड होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पतली और आकर्षक पिंडलियां सिर्फ सौंदर्य बढ़ाती हैं बल्कि चलने, दौड़ने और एक्सरसाइज में सहूलियत भी देती हैं।ALSO READ: health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार

 

पैरों की पिंडलियां (Calves/Calf) भारी या मोटी होने के दो मुख्य कारण होते हैं- या तो वहां वसा (Fat) जमा है, या फिर मांसपेशियों (Muscles) का आकार बढ़ गया है, जो कि अक्सर हाई हील्स पहनने या गलत पोस्चर के कारण होता है। अत: पिंडलियों को सुडौल और पतला करने के लिए आपको ऐसी एक्सरसाइज और आदतों को अपनाना होगा जो वहां की मांसपेशियों को बड़ा (Bulky) बनाने के बजाय उन्हें लंबा और टोन (Lean & Elongated) करें। 

 

1. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (Stretching)

2. कार्डियो का सही चुनाव (Right Cardio)

3. बॉडीवेट एक्सरसाइज (कम वजन, ज्यादा रैप्स)

4. हाई हील्स (High Heels) से दूरी बनाएं

5. मसाज और फोम रोलर (Massage n Foam Rolling)

6. खान-पान में बदलाव (Diet Tips)

 

यहां आपके लिए नीचे दिए गए उपाय बेहद असरदार हैं:

 

1. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (Stretching)

पिंडलियों की मांसपेशियों को लंबा और पतला करने के लिए स्ट्रेचिंग सबसे जरूरी है।

 

डाउनवर्ड डॉग पोज (अधोमुख श्वानासन): योग का यह आसन पिंडलियों के लिए वरदान है। इसमें हाथों और पैरों के बल वी (V) शेप बनाना होता है और एड़ियों को जमीन से छूने की कोशिश करनी होती है। इससे पिंडलियों पर गहरा खिंचाव आता है।

 

वॉल स्ट्रेच (Wall Stretch): दीवार के सामने खड़े हो जाएं। एक पैर आगे और एक पीछे रखें। पीछे वाले पैर की एड़ी को जमीन पर टिकाए रखते हुए आगे की तरफ झुकें। 20-30 सेकंड रुकें और फिर पैर बदलें।

 

2. कार्डियो का सही चुनाव (Right Cardio)

हर तरह का कार्डियो पिंडलियों को पतला नहीं करता। आपको भारी रेजिस्टेंस वाले वर्कआउट से बचना चाहिए।

 

लंबी वॉक या धीमी रनिंग: समतल जमीन पर (बिना चढ़ाई के) लंबी वॉक या हल्की रनिंग करने से पैर पतले होते हैं।

 

इनक्लाइन वॉक से बचें: ट्रेडमिल पर चढ़ाई (Incline) बढ़ाकर चलने या पहाड़ों पर चढ़ने से पिंडलियों की मांसपेशियां और भारी हो जाती हैं। इसलिए सपाट सतह पर ही चलें।

 

तैराकी (Swimming): स्विमिंग पूरे शरीर की चर्बी घटाने और पैरों को बिना किसी दबाव के टोन करने का बेहतरीन तरीका है।ALSO READ: Health tips: स्वस्थ जीवन के लिए 10 सरल और असरदार उपाय

 

3. बॉडीवेट एक्सरसाइज (कम वजन, ज्यादा रैप्स)

यदि आप जिम जाते हैं या घर पर वर्कआउट करते हैं, तो भारी वजन उठाने के बजाय अपने शरीर के वजन का इस्तेमाल करें।

 

काफ रेजेस (Calf Raises): सीधे खड़े होकर एड़ियों को ऊपर उठाएं (पंजे के बल आएं) और फिर नीचे लाएं। ध्यान रहे, इसमें कोई एक्स्ट्रा वजन (Dumbbells) न लें। इसके 20 से 25 रैप्स के 3 सेट करें।

 

स्क्वाट्स और लंजेस: ये एक्सरसाइज जांघों के साथ-साथ पिंडलियों को भी सही शेप में लाती हैं।

 

4. हाई हील्स (High Heels) से दूरी बनाएं

जब आप हाई हील्स पहनती हैं, तो आपकी पिंडलियों की मांसपेशियां लगातार सिकुड़ी (Contracted) हुई स्थिति में रहती हैं। लगातार ऐसा होने से वे छोटी और मोटी होने लगती हैं। जितना हो सके फ्लैट फुटवियर पहनें ताकि मांसपेशियों को स्वाभाविक रूप से फैलने का मौका मिले।

 

5. मसाज और फोम रोलर (Massage n Foam Rolling)

कई बार पिंडलियों में भारीपन 'फ्लूइड रिटेंशन' (पानी जमा होना) या मांसपेशियों के कड़े होने के कारण होता है।

 

रोजाना रात को नीचे से ऊपर की ओर (एड़ी से घुटने की तरफ) सरसों या नारियल के तेल से मालिश करें।

 

फोम रोलर का इस्तेमाल करके पिंडलियों की टाइटनेस को कम करें, इससे वहां का ब्लड सर्कुलेशन सुधरेगा और पैर पतले दिखेंगे।

 

6. खान-पान में बदलाव (Diet Tips)

अगर शरीर में फैट प्रतिशत ज्यादा है, तो वह पिंडलियों पर भी दिखेगा।

 

नमक की मात्रा कम करें: ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी रुकता है (Water Retention), जिससे पैर और पिंडलियां सूजी हुई दिखाई देती हैं।

 

पोटैशियम युक्त चीजें खाएं: केला, पालक और एवोकैडो जैसी चीजें खाएं, ये शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी को बाहर निकालने में मदद करती हैं।

 

भरपूर पानी पिएं: सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन जितना ज्यादा पानी पिएंगे, शरीर उतना ही कम पानी होल्ड करेगा।

 

एक जरूरी सलाह: यदि आपकी पिंडलियों में अचानक से बहुत ज्यादा सूजन आ गई है या दर्द रहता है, तो यह केवल फैट नहीं बल्कि किसी मेडिकल स्थिति (जैसे वैरिकोज वेन्स या वॉटर रिटेंशन) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Cashew health effects: प्रतिदिन 5 काजू खाने से क्या होगा सेहत पर असर

 

पर्यावरण दिवस पर सबसे अच्छी कविता: धरती की पुकार

A photo that inspires us to save the Earth on World Environment Day, June 5th

विश्व पर्यावरण दिवस पर कविता

पेड़ों की छांव कभी मत काटो,

धरती मां का दिल मत बांटो।

नदियां रोती, पर्वत चुप हैं,

मानव क्यों अब इतने क्रूर हैं।

हवा में जहर घुलता जाता,

हर जंगल सूना हो जाता।

पक्षी अपना घर खो बैठे,

बादल भी अब कम ही बरसें।

आओ मिलकर पेड़ लगाएं,

सूखी धरती फिर महकाएं।

जल बचाएं, जीवन बचाएं,

हरियाली का दीप जलाएं।

प्लास्टिक को दूर भगाएं,

नदियों को स्वच्छ बनाएं।

प्रकृति हमसे यही कहे,

'मुझे बचाओ, तभी रहो सहे।'

धरती माँ का मान करें हम,

हर जीव का सम्मान करें हम।

विश्व पर्यावरण दिवस ये कहता,

'प्रकृति से ही जीवन रहता।'

आओ मिलकर शपथ उठाएं,

हरा-भरा संसार बनाएं।

पेड़ लगाना धर्म बने अब,

स्वच्छ पर्यावरण कर्म बने अब।

जब हर आंगन हरियाली होगी,

तभी सच्ची खुशहाली होगी।

धरती फिर से मुस्काएगी,

जीवन में हरियाली लाएगी।

 

चोट के बावजूद फीफा विश्वकप के लिए गत विजेता अर्जेंटीना टीम में शामिल हुए लियोनेल मेस्सी

हाल ही में एक क्लब मैच में चोट के बावजूद लियोनेल मेसी उन 26 खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्हें अर्जेंटीना की फीफा वर्ल्ड कप टीम में जगह मिली। यह टूर्नामेंट अगले महीने संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में शुरू होगा। इंटर मियामी के कप्तान मेसी टीम के आक्रमण की अगुवाई करेंगे।

इस आक्रमण पंक्ति में इंटर मिलान के स्ट्राइकर लुटारो मार्टिनेज और एटलेटिको मैड्रिड के जूलियन अल्वारेज भी शामिल हैं। मैनेजर लियोनेल स्कोलोनी ने चेल्सी के मिडफील्डर एन्ज़ो फर्नांडीज, एस्टन विला के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज, इंटर मियामी के मिडफील्डर रोड्रिगो डी पॉल और लिवरपूल के मिडफील्डर एलेक्सिस मैक एलिस्टर को भी टीम में शामिल किया है।

कुल मिलाकर, 2022 में कतर में वर्ल्ड कप जीतने वाली ‘अल्बिसेलेस्टे’ (अर्जेंटीना) टीम के 17 खिलाड़ी इस बार भी टीम में शामिल हैं। अर्जेंटीना अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत 16 जून को अल्जीरिया के खिलाफ करेगा, जिसके बाद ग्रुप जे में उसका मुकाबला ऑस्ट्रिया और जॉर्डन से होगा। तीन बार की वर्ल्ड कप चैंपियन टीम इस टूर्नामेंट के लिए 6 जून को होंडुरास और 9 जून को आइसलैंड के खिलाफ दोस्ताना मैच खेलकर अभ्यास करेगी।

अर्जेंटीना की टीम:

गोलकीपर: एमिलियानो मार्टिनेज (एस्टन विला), जेरोनिमो रुल्ली (ओलंपिक डी मार्सिले), जुआन मुसो (एटलेटिको मैड्रिड)

डिफेंडर: लियोनार्डो बालेर्डी (ओलंपिक डी मार्सिले), निकोलस टैग्लियाफिको (ओलंपिक लियोनेस), गोंज़ालो मोंटिएल (रिवर प्लेट), लिसेंड्रो मार्टिनेज (मैनचेस्टर यूनाइटेड), क्रिस्टियन रोमेरो (टोटेनहम हॉटस्पर), निकोलस ओटामेंडी (बेनफिका), फैकुंडो मेडिना (ओलंपिक डी मार्सिले), नहुएल मोलिना (एटलेटिको मैड्रिड)

मिडफील्डर: लिएंड्रो पारेडेस (बोका जूनियर्स), रोड्रिगो डी पॉल (इंटर मियामी), वैलेंटीन बारको (रेसिंग स्ट्रासबर्ग), जियोवानी लो सेल्सो (रियल बेटिस), एक्सेक्विएल पलासियोस (बायर लेवरकुसेन), एलेक्सिस मैक एलिस्टर (लिवरपूल), एन्ज़ो फर्नांडीज (चेल्सी)

फॉरवर्ड: जूलियन अल्वारेज़ (एटलेटिको मैड्रिड), लियोनेल मेसी (इंटर मियामी), निको गोंज़ालेज़ (एटलेटिको मैड्रिड), थियागो अल्माडा (एटलेटिको मैड्रिड), गिउलियानो सिमियोन (एटलेटिको मैड्रिड), निको पाज (कोमो), जोस मैनुअल लोपेज (पामेइरास), लुटारो मार्टिनेज (इंटर मिलान)।

सिर्फ एक अंडा! वैज्ञानिकों ने बताया दिमाग तेज करने का ‘सीक्रेट फॉर्मूला’

Eggs lowers Alzheimers risk

Eggs lowers Alzheimers risk: आज के दौर में खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण भूलने की बीमारी यानी 'अल्ज़ाइमर' (Alzheimers) और डिमेंशिया का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया भर के डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे 'भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य चुनौती' मान रहे हैं। लेकिन हाल ही में हुए वैज्ञानिक शोधों में एक बेहद चौंकाने वाला और राहत देने वाला सच सामने आया है। दिमागी कमजोरी के हजारों मरीजों का इलाज कर चुके मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. डेल ब्रेडिसन के अनुसार, हमारे किचन में मौजूद एक बेहद साधारण-सी चीज 'अंडा' अल्जाइमर से बचाने और दिमाग को बूस्ट करने में सबसे बड़ा मददगार साबित हो सकता है।

हफ्ते में सिर्फ 1 अंडा खाइए

प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल 'द जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन' में हाल ही में  प्रकाशित एक शोध के अनुसार, जो लोग हफ्ते में एक या उससे अधिक अंडे का सेवन करते हैं, उनमें अंडा न खाने वालों (या महीने में एक बार खाने वालों) की तुलना में अल्जाइमर रोग होने का खतरा 47 प्रतिशत तक कम पाया गया। यही नहीं, नियमित अंडा खाने वाले लोगों ने प्लानिंग, फोकस (एकाग्रता) और सही समय पर सही निर्णय लेने (Decision-making) से जुड़े दिमागी टेस्ट में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया।

आखिर अंडे में ऐसा क्या है?

अल्जाइमर और दिमागी कमजोरी से जूझ रहे मरीजों के मस्तिष्क में आमतौर पर दो जरूरी पोषक तत्वों की भारी कमी देखी जाती है—पहला 'कोलीन' (Choline) और दूसरा ओमेगा-3 फैट का एक प्रकार 'डीएचए' (DHA)। अंडा दुनिया के उन गिने-चुने सुपरफूड्स में से है जिसमें ये दोनों तत्व एक साथ भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

 

'कोलीन' का पावरहाउस : अल्जाइमर के खतरे को कम करने में अकेले 'कोलीन' की 39% भूमिका होती है। पुरुषों को रोजाना 550 मिलीग्राम और महिलाओं को 425 मिलीग्राम कोलीन की जरूरत होती है। महज एक उबले अंडे से शरीर को लगभग 150 मिलीग्राम कोलीन मिल जाता है। यह दिमाग की कोशिकाओं (Brain Cells) की बाहरी परत को मजबूत करता है और याददाश्त को बढ़ाने वाले न्यूरोट्रांसमीटर का निर्माण करता है।

 

एंटीऑक्सीडेंट्स की ढाल : अंडे में ल्यूटिन (Lutein) जैसे एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो दिमाग की कोशिकाओं को डैमेज होने और सूजन (Inflammation) से बचाते हैं।

'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' से भी बचाता है अंडा

डॉ. डेल ब्रेडिसन का कहना है कि अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव के कारण होने वाला 'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' ही आगे चलकर अल्जाइमर का कारण बनता है। बुजुर्गों के लिए अंडा एक बेहतरीन डाइट है क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर है, पचाने में आसान है और शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को अचानक बढ़ने नहीं देता। हेल्थ एक्सपर्ट्स दिमाग में कोलीन की मात्रा बढ़ाने के लिए अंडों के साथ सब्जियों और पनीर को मिलाकर खाने की सलाह देते हैं।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala