Monsoon Update 2026: IMD का बड़ा अपडेट, तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून, कई राज्यों में हो सकती है भारी बारिश

Monsoon Update 2026: भारत मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार को बताया कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम अनुकूल है। 23 जून तक इसके महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ तक पहुंचने की संभावना है। बता दें कि मानसून इस साल 4 जून को केरल पहुंचा था, जो सामान्य तारीख 1 जून से तीन दिन देर से था। इसके बाद यह केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के अधिकतर हिस्सों, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर भारत में फैल चुका है।

इन राज्यों में होगी बारिश

मौसम विभाग ने कहा कि जैसे-जैसे मॉनसून उपमहाद्वीप में आगे बढ़ रहा है और उत्तर-पश्चिमी भारत पर पश्चिमी विक्षोभ का असर हो रहा है, अगले कुछ दिनों में जम्मू, कश्मीर, लद्दाख और मुजफ्फराबाद, पश्चिमी राजस्थान, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पूर्वोत्तर राज्यों, कोंकण और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश होने की उम्मीद है।

मानसून की चाल पर क्यों रखी जाती है नजर

गौरतलब है मानसून की चाल पर इसलिए बारीकी से नजर रखी जाती है क्योंकि भारत में सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से मिलता है, जो खरीफ की बुआई के लिए बहुत जरूरी है। अच्छा मानसून आम तौर पर ग्रामीण मांग, खपत और व्यापक आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।

हालांकि, 2026 में एल नीनो (El Niño) की स्थिति बनी हुई है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे भारत का मानसून कमजोर पड़ सकता है और सामान्य से कम बारिश का खतरा बढ़ जाता है। IMD ने मौसमी बारिश का अनुमान ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) का 90% लगाया है, जो सामान्य से कम बारिश का संकेत है और इससे खेती और जल संसाधनों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।

IMD के अनुसार, 19 से 25 जून के बीच बिहार और झारखंड में छिटपुट बारिश हो सकती है। साथ ही 19 से 22 जून के बीच हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं, 25 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में लू (हीटवेव) जैसी स्थिति देखी गई, हालांकि शुक्रवार के बयान में लू की कोई भविष्यवाणी नहीं की गई थी।

1 से 18 जून के बारिश के आंकड़ों से पता चला कि भारत के 741 जिलों में से 258 जिलों में कम बारिश हुई, जबकि 223 जिलों में बहुत कम बारिश दर्ज की गई। एक दिन पहले, ये आंकड़े क्रमशः 239 और 230 जिलों के थे।

वहीं, IMD ने उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और गुजरात में भारी बारिश की भी जानकारी दी, जबकि तमिलनाडु और ओडिशा में कुछ जगहों पर 60-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ आंधी-तूफान दर्ज किए गए।

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Monsoon: इन 5 कारणों से महाराष्ट्र में फंसा मानसून, खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर

Monsoon: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण महाराष्ट्र में रुके रहने के कारण देश में 4 जून से 18 जून के बीच बारिश में 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस दौरान देश में सामान्य 72.2mm बारिश के मुकाबले केवल 42.6mm बारिश हुई है। IMD के क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, मध्य भारत में 67%, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 42%, दक्षिणी प्रायद्वीप में 22%  और उत्तर-पश्चिम भारत में 6% बारिश की कमी दर्ज की गई है।

मौसम विभाग ने गुरुवार को बताया कि “बड़े पैमाने पर अनुकूल मौसमी परिस्थितियों की कमी” ही मुख्य वजह है, जिसके कारण पिछले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में आगे नहीं बढ़ पाया है।

मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने में देरी के पीछे कुल 5 प्रमुख कारण हैं:

पहला कारण यह है कि वर्तमान मानसून प्रवाह को अरब सागर से मजबूत “सर्ज” यानी तेज और स्थिर हवाओं का सपोर्ट नहीं मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, “आम तौर पर ऐसी तेज हवाएं ही नमी को बढ़ाने और बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए जिम्मेदार होती हैं, जिससे मानसून आगे बढ़ता है।”

दूसरा कारण यह है कि अरब सागर में मानसून से जुड़ी निचले स्तर की दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। इसके चलते महाराष्ट्र के तटीय और अंदरूनी इलाकों तक नमी (moisture) का प्रवाह कम हो गया है।

तीसरा कारण पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो का कमजोर होना है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए मुख्य नमी स्रोत माना जाता है। आईएमडी के अनुसार, इस प्रवाह के कमजोर होने से मानसून की गतिविधि भी प्रभावित हुई है।

चौथा कारण यह है कि अभी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसमीय सिस्टम नहीं है, जैसे निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area), चक्रवाती परिसंचरण या पश्चिमी तट के साथ सक्रिय ऑफशोर ट्रफ। ये सिस्टम सामान्यतः मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन फिलहाल इनकी कमी है।

आखिरी वजह मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का कमजोर दौर है। यह हवा, बादलों और दबाव का एक चलता-फिरता सिस्टम है जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाता है। जब यह सक्रिय होता है, तो दक्षिण भारत में अधिक बादल बनते हैं, जो मानसून हवाओं के साथ उत्तर की ओर बढ़कर ज्यादा बारिश कराते हैं। लेकिन अभी यह कमजोर स्थिति में है।

IMD के अनुसार, इसी वजह से अगले 4-5 दिनों तक महाराष्ट्र के अधिकतर हिस्सों में बारिश सीमित और केवल छिटपुट रहने की संभावना है।

अल नीनो से खरीफ फसलों पर पड़ेगा असर

दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तर दिशा में धीमी गति और हाल ही में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में उत्पन्न हुई अल नीनो की स्थिति, जिसके कारण भारत में कम बारिश हुई है, खरीफ फसलों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है, क्योंकि इन फसलों के फलने-फूलने के लिए समय पर बारिश जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को दिया निर्देश

इसी को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिया कि ऐसे जिलों की पहचान की जाए जहां कम या असमान बारिश की संभावना है। साथ ही राज्यों के साथ मिलकर फसल-वार आपातकालीन (contingency) योजनाएं तैयार करने को कहा गया है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल खेती और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

चौहान ने निर्देश दिया कि हर जोखिम वाले जिले के लिए एक अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जानी चाहिए ताकि खरीफ के मौसम में किसानों को कोई परेशानी न हो।

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Aaj Ka Mausam 19 June: देश के कई हिस्सों में मानसून की सक्रियता और मजबूत वायुमंडलीय प्रणालियों के चलते मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 19 जून के लिए विशेष राष्ट्रीय बुलेटिन जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक, आज बिहार और असम समेत देश के 12 राज्यों/क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का कड़ा अलर्ट है। दूसरी ओर राजस्थान से लेकर दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा तक भीषण आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और थंडरस्क्वाल का तांडव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं आज देश के अलग-अलग राज्यों में कैसा रहेगा मौसम का हाल।

राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र की ओर से जारी 19 जून का पूरे देशभर का वेदर मैप

बिहार समेत इन 12 राज्यों में होगी भारी बारिश बिहार समेत इन 12 राज्यों में होगी भारी बारिश

मानसून प्रोग्रेस: अगले 4-5 दिनों में यहां होगी एंट्री

दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) फिलहाल हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फूलबनी, रांची, जमुई और मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले 4-5 दिनों के भीतर मानसून के तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार के कुछ और हिस्सों तथा छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

बिहार, बंगाल, असम समेत 12 राज्यों में भारी बारिश का कड़ा अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, आज देश के 12 प्रमुख राज्यों और क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश आफत बन सकती है। आज असम व मेघालय और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम के अलग-अलग हिस्सों में मूसलाधार से अति भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। आज बिहार, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और पूर्वोत्तर के नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा के अलग-अलग क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा आज तटीय कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अच्छी बारिश दर्ज की जाएगी।

बिहार और राजस्थान में 80 Kmph का महातूफान, धूलभरी आंधी

आज कुछ राज्यों में हवाओं की रफ्तार बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती है, जिससे जान-माल के नुकसान की आशंका है। आज इन दोनों राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर 60-70 किमी/घंटे की रफ्तार से गंभीर थंडरस्क्वाल (तीव्र झंझावात) आएगा, जिसके झोंके 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। झारखंड, ओडिशा, पश्चिमी मध्य प्रदेश और पश्चिमी राजस्थान में आज 50-60 किमी/घंटे (झोंके 70 किमी/घंटे) की रफ्तार से विनाशकारी थंडरस्क्वाल की चेतावनी है। इसके अलावा आज पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में भीषण धूलभरी आंधी भी चलेगी।

दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा सहित अन्य इलाकों में आंधी-बिजली का अलर्ट

मौसम विभाग ने देश के एक बड़े हिस्से में गरज-चमक और तेज हवाओं का येलो/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। दिल्ली, नई दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और केरल व माहे में आज 40-50 किमी/घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की रफ्तार से तेज आंधी चलने, बिजली कड़कने और गरज-चमक की चेतावनी है। उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी) में भी आंधी का असर दिखेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, कोंकण व गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मारथवाड़ा में आज 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में सिर्फ आकाशीय बिजली कड़कने का अलर्ट है।

पहाड़ों पर ओलावृष्टि की चेतावनी

उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में आज मौसम का मिजाज सबसे ज्यादा बिगड़ा रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण आज हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में आंधी-तूफान के साथ ओले गिरने की गंभीर आशंका है।

यूपी और इन 3 राज्यों में हीट वेव

एक तरफ जहां देश का आधा हिस्सा आंधी और बारिश से सराबोर रहेगा, वहीं कुछ राज्यों में भीषण गर्मी का टॉर्चर जारी रहेगा। आज उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी दोनों) में लू की स्थिति बनी रहेगी, जो 24 जून तक जारी रह सकती है। इसके अलावा आज महाराष्ट्र (मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, विदर्भ) और तेलंगाना के अलग-अलग पॉकेट्स में भी लू का प्रकोप रहेगा। गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कोंकण व गोवा, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में आज अत्यधिक उमस और चिपचिपी गर्मी लोगों को परेशान करेगी।

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Mumbai Water Crisis: मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले वॉटर रिजर्वायर में अब सिर्फ 10% स्टॉक! इन चीजों पर तो पड़ने लगा फौरन असर

Mumbai Water Crisis: मुंबई में पीने के पानी की सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों (वॉटर रिजर्वायर) में पानी का स्टॉक घटकर कुल उपयोगी क्षमता का सिर्फ 10.01 प्रतिशत रह गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने में हो रही देरी के बीच मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने पानी की भारी किल्लत से निपटने के लिए बड़े और कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पानी की इस भारी कमी का सीधा और फौरन असर मुंबई के कई सेक्टरों पर दिखने लगा है। इसमें कंस्ट्रक्शन से लेकर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और स्विमिंग पूल्स तक शामिल हैं।

जलाशयों में पानी की ताजा स्थिति (बुधवार तक के आंकड़े)

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएमसी के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को सातों झीलों में कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का केवल 10.01 प्रतिशत यानी 144918 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध था। हालांकि, यह स्टॉक पिछले दो वर्षों की इसी अवधि की तुलना में थोड़ा बेहतर है। पिछले साल इसी दिन 141510 मिलियन लीटर (9.78%) पानी था। 2024 में यह आंकड़ा 77851 मिलियन लीटर (5.38%) दर्ज किया गया था।

आपको बता दें कि मुंबई को रोजाना करीब 4000 मिलियन लीटर पीने के पानी की सप्लाई करने वाली सातों झीलों की कुल उपयोगी भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर है। वर्तमान में विभिन्न झीलों में पानी की स्थिति इस प्रकार है:-

भातसा (ठाणे जिला- सबसे बड़ा स्रोत): 66,627 मिलियन लीटर (उपयोगी क्षमता का 9.29%)

मोदक सागर: 37,933 मिलियन लीटर (29.42%)

मिडल वैतरणा: 20,008 मिलियन लीटर (10.34%)

विहार (मुंबई के भीतर): 42.11% क्षमता

तुलसी (मुंबई के भीतर): 23.06% क्षमता

(नोट: सातों झीलों में भातसा, अपर वैतरणा, मिडल वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, विहार और तुलसी शामिल हैं।)

इन चीजों पर पड़ा फौरन और सीधा असर

पानी के गिरते स्तर को देखते हुए मंगलवार को एक समीक्षा बैठक बुलाई गई। इसके बाद बीएमसी ने पीने के पानी को सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है। बीएमसी ने निर्माण स्थलों के लिए नए पानी के कनेक्शन जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही मौजूदा साइटों को दी जाने वाली सप्लाई में भी कटौती की गई है।

मुंबई में चल रहे सभी स्विमिंग पूल्स और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए पानी की सप्लाई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बीएमसी ने औद्योगिक, कमर्शियल और खेल प्रतिष्ठानों को दी जाने वाली पानी की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। ये कटौती 17 जून से प्रभावी हो गई है। इसके पहले 15 मई से ही पूरे शहर में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू है।

सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, आरसीएफ, एचपीसीएल, बीपीसीएल, नेवी, एमआईडीसी और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी जैसे बड़े प्रतिष्ठानों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिचालन और माध्यमिक कार्यों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का दोबारा उपयोग करें।

रियल एस्टेट और होम डिलीवरी पर संकट के बादल

बीएमसी द्वारा कंस्ट्रक्शन साइट्स के पानी पर रोक लगाने से मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट में हड़कंप मच गया है। इससे नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मंजूरियों और उनकी लॉन्चिंग पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। इससे इस साल पूरे होने वाले हजारों घरों की डिलीवरी समय पर होने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म ‘एनरॉक’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मुंबई में लगभग 1.43 लाख घर बनकर तैयार होने वाले हैं। अगर पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की बात करें, तो करीब 2.07 लाख घर निर्माण के अंतिम चरण में हैं। एमएमआर में वर्तमान में लगभग 6.86 लाख आवास इकाइयां निर्माणाधीन हैं। इनमें से 75% से अधिक (लगभग 5.15 लाख इकाइयां) अकेले मुंबई में स्थित हैं।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: रुक सकती है रफ्तार

एनरॉक के मुताबिक इस फैसले का तत्काल असर चल रहे निर्माण कार्यों के बजाय प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और अप्रूवल पर अधिक महसूस होगा। निर्माण कार्य के लिए साइटें मुख्य रूप से भूजल और गैर-पेय स्रोतों पर निर्भर रहती हैं, जबकि बीएमसी के पानी का उपयोग मुख्य रूप से वहां काम करने वाले मजदूरों के कल्याण और पीने के लिए किया जाता है। इस पाबंदी से कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने की स्थिति और मजदूरों की उत्पादकता प्रभावित होगी, जो पहले से ही वैश्विक संघर्षों के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और लेबर शॉर्टेज से जूझ रहे हैं।

यह पाबंदी मुंबई के कुछ खास माइक्रो-मार्केट्स के लिए स्थानीय जोखिम पैदा कर सकती है। इनमें दक्षिण मुंबई, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), अंधेरी, बोरीवली और मुलुंड शामिल हैं। अगर मानसून की स्थिति और बिगड़ती है और एमएमआर के अन्य नगर निगम भी बीएमसी की राह पर चलते हैं तो पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण जारी सप्लाई चेन व्यवधानों के बीच साल 2026 में होम डिलीवरी पर गंभीर दबाव आ सकता है। यह स्थिति महामारी के दौर की याद दिला सकती है जब योजनाबद्ध घरों में से केवल 46% की ही वास्तविक डिलीवरी हो पाई थी।

नारेडको (NAREDCO) महाराष्ट्र के अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने भी चिंता जताते हुए कहा कि कंक्रीटिंग, क्योरिंग, प्लास्टरिंग और फिनिशिंग जैसे निर्माण कार्य पूरी तरह से पानी की विश्वसनीय आपूर्ति पर निर्भर होते हैं। लंबे समय तक होने वाला व्यवधान प्रोजेक्ट्स के शेड्यूल को प्रभावित कर सकता है, निर्माण लागत बढ़ा सकता है और घरों व इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी कर सकता है।

मानसून में देरी और अल नीनो का साया

मुंबई में आमतौर पर मानसून 10 जून के आसपास दस्तक दे देता है, लेकिन इस साल इसकी शुरुआत में देरी हुई है। पिछले साल मानसून मई में ही समय से काफी पहले आ गया था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बार अल नीनो (El Niño) की स्थिति विकसित होने की संभावना जताई है, जिससे मानसून की रफ्तार और इसके वितरण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में मानसून मुंबई पहुंच सकता है जिससे बीएमसी और मुंबईकरों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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