CBSE 12th Re-evaluation 2026: री-इवैल्युएशन ने बदला नंबर गेम, झारखंड से निकले साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के ऑल इंडिया टॉपर

CBSE 12th Re-evaluation 2026: सीबीएसई बोर्ड से 12वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले ढेरों छात्र इस साल अपना रिजल्ट देखकर हैरान थे। छात्रों को अपने नंबरों पर भरोसा नहीं हो रहा था। यही वजह थी कि बड़ी संख्या में छात्रों ने री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन किया था। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का री-इवैल्युएशन रिजल्ट घोषित कर दिया है। रिजल्ट आने के बाद छात्रों के नंबरों में ही बदलाव नहीं हुआ है, बल्कि कुछ छात्रों की रैंक भी बदल गई है।

इनमें खासतौर से झारखंड के दो छात्र अब ऑल इंडिया टॉपर बन गए हैं। ये रांची की अवनी केजरीवाल और बोकारो के आदित्य मिश्रा हैं। इसके साथ ही आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस तीनों स्ट्रीम के ऑल इंडिया टॉपर अब झारखंड से हो गए हैं। दरअसल, अवनी केजरीवाल और आदित्य मिश्रा 12वीं में मिले अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं थी। इसलिए उन्होंने अपने मार्क्स की दोबारा जांच करवाई थी, जिसके बाद दोनों के नंबर इतने बढ़ गए कि वे अब पूरे देश के टॉपर बन गए हैं।

री-इवैल्यूएशन के बाद अवनी का स्कोर हो गया परफेक्ट 100

रांची के दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) की छात्रा अवनी केजरीवाल को री-इवैल्युएशन से पहले कुल 95.2% नंबर मिले थे। लेकिन, उन्हें इंग्लिश में बेहतर नंबर मिलने का अनुमान था। इसके बाद उन्होंने अपनी आंसर-शीट की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया। आंसर शीट देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि कई सही आंसर के बावजूद पर्याप्त अंक नहीं दिए गए थे। इसके बाद उन्होंने इंग्लिश, बिजनेस स्टडीज और ग्राफिक्स सब्जेक्ट में री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया। री-इवैल्यूएशन के बाद इंग्लिश में मिले 81 मार्क्स सीधे 100 हो गए, बिजनेस स्टडीज और ग्राफिक्स में भी उन्हें पूरे 100 नंबर मिले। 500 में से 500 नंबर होने से उनका टोटल स्कोर परफेक्ट 100 हो गया और उन्होंने कॉमर्स स्ट्रीम में पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया।

आदित्य के भी नंबर बढ़े और वो बने साइंस के नेशनल टॉपर

बोकारो के डीपीएस स्कूल के छात्र आदित्य मिश्रा ने भी अपने नंबरों का री-इवैल्यूएशन कराया। उन्हें बायोलॉजी में 96 अंक मिले थे, जिससे वे संतुष्ट नहीं थे। वहीं, उनका कुल स्कोर 99.20% था। री-इवैल्यूएशन के बाद बायोलॉजी के मार्क्स 96 से बढ़कर 99 हो गए। इससे उनका कुल प्रतिशत 99.60% हो गया। अब वह कानपुर की सोनाक्षी गोयल के साथ संयुक्त रूप से साइंस स्ट्रीम के नेशनल टॉपर बन गए हैं। आदित्य को इंग्लिश कोर, केमेस्ट्री और पेंटिंग में 100 में 100 अंक मिले हैं, जबकि फिजिक्स में 99 मार्क्स प्राप्त हुए हैं।

आर्ट्स से टॉपर हैं रांची की भव्या रंजन

आर्ट्स स्ट्रीम में रांची के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल की छात्रा भव्या रंजन पहले ही 99.8% अंकों के साथ देश में पहला स्थान हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के स्पेशल ‘टारगेट 100’ प्रोग्राम को दिया है। भव्या ने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को रोजाना प्रैक्टिस के लिए प्रश्न दिए जाते थे और शिक्षकों से तुरंत गाइडेंस मिलता था।

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Gold Price: अपने रिकॉर्ड स्तर से 28% टूटा गोल्ड! खत्म हो गई तेजी या फिर लौट सकती है चमक?

Gold Price: 2025 में 65% की जोरदार तेजी के बाद 2026 अब तक सोने के लिए खास नहीं रहा है। साल की पहली छमाही में सोना करीब 4% टूट चुका है। जनवरी 2026 के आखिर में सोने ने 5,602 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।

लेकिन इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, बाजार में मुनाफावसूली शुरू हुई और सोने में तेज गिरावट आ गई। जून में इसका भाव करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। यह रिकॉर्ड स्तर से करीब 28% नीचे था। फिलहाल सोना करीब 4,144 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद क्या बदला?

इस समय बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल की कीमतों में नरमी आई है। समझौते की खबर के बाद तेल करीब 15% सस्ता हो चुका है। हालांकि निवेशकों के मन में अब भी सवाल है कि यह समझौता कितने समय तक टिकेगा और क्षेत्र में तनाव सचमुच कम होगा या नहीं।

तेल सस्ता होने पर भी क्यों नहीं बढ़ रहा सोना?

यही सबसे बड़ा सवाल है। आमतौर पर तेल सस्ता होने और तनाव कम होने से सोने को सहारा मिलता है। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। फिलहाल सोने की चाल तेल नहीं, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरें तय कर रही हैं।

सोने की कीमत पर एक साथ कई चीजें असर डालती हैं। इनमें महंगाई, ब्याज दरें, डॉलर और वैश्विक घटनाक्रम शामिल हैं। इस समय सबसे ज्यादा असर ब्याज दरों का दिख रहा है।

अमेरिकी फेड बना सबसे बड़ी चुनौती

17 जून को हुई अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद संकेत मिले कि 2026 में कम से कम एक बार और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने भी साफ किया कि महंगाई को काबू में रखना उनकी प्राथमिकता है। इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।

ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जातीं। वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में निवेशकों का रुझान दूसरे विकल्पों की तरफ बढ़ सकता है।

डॉलर भी डाल रहा दबाव

2026 में डॉलर इंडेक्स करीब 2.6% मजबूत हुआ है। दूसरी तरफ सोना करीब 4% गिरा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इसका असर मांग पर पड़ता है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

एक्सपर्ट्स की गोल्ड पर राय

LKP Securities में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी & करेंसी रिसर्च एनालिस्ट) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में एक बार ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और सोने जैसी ऐसी एसेट्स की चमक कुछ कम हुई है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। फेड के सख्त रुख के बाद बुलियन बाजार में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर रखनी चाहिए। बातचीत में किसी भी तरह की प्रगति या रुकावट कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।

क्या खत्म हो गई तेजी?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई काबू में आती है और फेड ब्याज दरें घटाने की तरफ बढ़ता है, तो सोने में फिर तेजी लौट सकती है। दूसरी तरफ अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है, तब भी सोना निवेशकों के लिए बचाव का एक अहम विकल्प बना रह सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक पिछले कई सालों से लगातार सोना खरीद रहे हैं। उनका भरोसा अभी भी बना हुआ है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय पोर्टफोलियो की 5% से 10% रकम सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

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