ईरान ने कहा है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। अगर समझौते का उल्लंघन होता है, तो इसके लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार माना जाएगा। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में दिया। इधर, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की खबरों के कुछ घंटे बाद हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि संगठन इजराइली कब्जे को कभी स्वीकार नहीं करेगा। बेरूत में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराने के अपने लक्ष्य पर कायम है। संगठन लेबनान के संविधान के दायरे में काम करता है और विदेशी दबदबे को खारिज करता है। कासिम ने कहा, अगर दुश्मन हमारे खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो हम भी हथियारों से जवाब देंगे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका वार्ता टली: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली पहली औपचारिक वार्ता टाल दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में लगातार इजराइली हमलों को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं। 2. लेबनान में इजराइली हमलों में 47 लोगों की मौत: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में शुक्रवार देर रात से हुए इजराइली हवाई हमलों में 47 लोग मारे गए और 97 घायल हुए। 2 मार्च से अब तक मरने वालों की संख्या 3,980 पहुंच गई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बढ़ी: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 18 जून को 25 कारोबारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। यह अप्रैल के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा संख्या है। हालांकि, 500 से ज्यादा जहाज और 11 हजार नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं। 4. ट्रम्प बोले- ईरान को एक पैसा भी नहीं मिलेगा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका मजबूरी में बातचीत की मेज पर नहीं आया, बल्कि ईरान खुद आया है। उन्होंने कहा कि अगले 60 दिनों तक ईरान को अमेरिका से एक पैसा भी नहीं मिलेगा। 5. पाकिस्तानी PM ने सऊदी क्राउन प्रिंस से की बात: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और अगले दौर की बातचीत को कूटनीति और संवाद के जरिए आगे बढ़ाने पर जोर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक खास पोस्ट के जरिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका की मजबूरी की वजह से हुआ है। खामेनेई ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा कि आपको बताया गया है, ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”
उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ही इसके लिए सबसे ज्यादा जोर डाला था। खामेनेई के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही मजबूरी में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।”
बता दें कि समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान किए गए। यह कार्यक्रम G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुआ था। मैक्रों ने X पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता “स्थायी शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति देता है।”
औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाला था। हालांकि, तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।
अमेरिका-ईरान समझौते में क्या कहा गया है?
इस दस्तावेज का औपचारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात कही गई है।
इसकी शर्तों के तहत, अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस दौरान जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगी। अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटाने पर भी सहमत हो गया है।
वहीं, ईरान ने भी कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति जताई है।
बता दें कि संधि पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, दोनों पक्षों के पास व्यापक अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय है।
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US Iran Sign Islamabad MoU: खाड़ी में सीजफायर के बीच दुनिया के लिए एक और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को खत्म करने के लिए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अब यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है।
इस ऐतिहासिक शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि, ‘इस समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा, वहीं अमेरिका भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘तुरंत’ हटा लेगा’।
शहबाज शरीफ और कतर की मध्यस्थता से हुई डील
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने X पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर आज इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इस पर दस्तखत किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं’।
शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान, सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह की मेजबानी करेगा, जहां तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में शांति, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि की एक मजबूत नींव बताया।
I am honoured to announce that the historic ‘Islamabad Memorandum of Understanding’ has been electronically signed today between the United States of America and the Islamic Republic of Iran. The Memorandum has been signed by honourable Presidents of both the countries and also…
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) June 18, 2026
ट्रंप ने वर्साय के महल में किए दस्तखत
व्हाइट हाउस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने वाले इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ वर्साय के महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
वर्साय से रवाना होते समय ट्रंप ने खुद पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘यह साइन हो चुका है… मैंने वर्साय में इस पर दस्तखत किए हैं।’ हालांकि, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने इसका उल्लंघन किया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी के लिए अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी में मौजूद रहेगी।
ईरान ने भी की पुष्टि, लेबनान को लेकर हुआ बड़ा फैसला
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इर्ना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी समझौते के फाइनल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारियों के दस्तखत के बाद अब इस समझौते को लागू करने की परीक्षा है।
समझौते की ये है मुख्य बातें:
- ईरान ने साफ किया कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना और सीजफायर उनकी प्राथमिकता है। इस समझौते के शुरुआती क्लॉज में लेबनान का तीन बार जिक्र है और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है।
- समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत का दौर चलेगा।
- ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।
ईरानी संसद के स्पीकर बोले- ‘हमारा हाथ ट्रिगर पर है’
भले ही समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हों, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका को लेकर अभी भी भारी अविश्वास है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने वाशिंगटन के प्रति गहरा संदेह जताते हुए कहा, ‘अमेरिका पर मेरा अविश्वास सबसे ज्यादा है। भले ही यह समझौता फाइनल हो जाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इसे मंजूरी दे दे, फिर भी अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है’।
होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, ‘ईरान के वहां संप्रभु अधिकार हैं और स्वाभाविक रूप से हम सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे। हमारा हाथ अभी भी ट्रिगर पर है।’
पीएम शरीफ ने इन नेताओं का जताया आभार
शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील तक पहुंचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शुक्रिया अदा किया। इसके अलावा उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र के नेतृत्व और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अथक प्रयासों की सराहना की।
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। डील पर दस्तखत करने के बाद ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए। इस दौरान किसी रिपोर्टर ने उनसे पीस डील को लेकर पूछा, तो उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, ‘डील साइन हो गई है।’ ट्रम्प के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5:30 बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में मिलिट्री एक्शन खत्म किया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी गुरुवार को इस समझौते पर मध्यस्थ के तौर पर दस्तखत किए। उन्होंने X पर पोस्ट कर इसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ बताया। पीस डील से जुड़ी 5 फोटोज… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में दावा किया है कि ईरान के साथ उनकी डील पूरी हो गई है। ट्रम्प ने लिखा कि हॉर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत हटाने की अनुमति देने की भी बात कही। अपनी पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- दुनिया के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो। हालांकि पोस्ट में यह नहीं बताया गया कि ईरान के साथ हुई डील में क्या-क्या शामिल है। यह भी साफ नहीं किया गया कि यह व्यवस्था कब से लागू होगी। वहीं, ईरान ने डील को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, लेकिन कहा है कि पहले अमेरिका भरोसा दिखाए, फिर आगे की बातचीत होगी। डील के मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पोस्ट में लिखा- अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। डील को लेकर ईरान की तीन मांगे डील पर ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर खामेन घरीबाबादी ने कहा- हम 60 दिन की बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले अमेरिका को अपने वादे पूरे करने होंगे। ईरान की तीन मुख्य मांगें शहबाज बोले- अमेरिका और ईरान का कूटनीतिक रास्ता अपनाने के लिए धन्यवाद शहबाज शरीफ ने कहा कि लंबी और गहन बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और हमेशा के लिए रोकने पर सहमति जताई है। शरीफ ने बताया कि इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। शरीफ ने अमेरिका और ईरान का कूटनीतिक रास्ता अपनाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कतर के नेतृत्व की भूमिका की सराहना की और सऊदी अरब व तुर्किये के नेतृत्व को भी समझौते तक पहुंचने में अहम योगदान के लिए धन्यवाद दिया। शरीफ कहा कि अब मध्यस्थ इस सप्ताह कई बैठकों का आयोजन करेंगे, जिनमें समझौते को लागू करने की तैयारी और तकनीकी स्तर की बातचीत का आधार तैयार किया जाएगा। ट्रम्प ने पहले कहा था- ईरान से पीस डील कुछ घंटों के लिए टली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि लेबनान पर इजराइली हमले से ईरान के साथ पीस डील की साइनिंग कुछ घंटों के लिए टल गई। एक्सिओस से बातचीत में ट्रम्प ने कहा- इजराइली हमले ने मामला हिला दिया। इससे साइनिंग कुछ घंटे लेट हो गई। अभी तक समझौता हो जाना चाहिए था, लेकिन अब यह कुछ घंटे बाद होगा। ट्रम्प के मुताबिक, जब उनके सलाहकारों ने उन्हें बेरूत पर हमले की जानकारी दी तो वह हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “यह बहुत बुरा था। हम डील पर हस्ताक्षर करने से सिर्फ एक घंटे दूर थे।” रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने इस मुद्दे पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रति भी नाराजगी जताई। हालांकि ट्रम्प ने भरोसा जताया कि समझौता अब भी पटरी पर है। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित डील ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगी, उसके परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी सुनिश्चित करेगी और अचानक निरीक्षण की अनुमति देगी। ईरान सभी कारोबारी जहाजों के लिए होर्मुज तुरंत खोल देगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शुरू करेगा। अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में भी छूट देगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान पाकिस्तानी हॉकी टीम के साथ कथित बदइंतजामी का मामला सामने आया है। कप्तान शकील इमाद बट ने आरोप लगाया कि होटल बुकिंग नहीं होने से खिलाड़ियों को सड़कों पर भटकना पड़ा और खुद खाना बनाकर बर्तन धोने पड़े। वहीं टीम प्रबंधन ने आरोपों को खारिज किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पाकिस्तानी कप्तान का दावा
पाकिस्तान हॉकी टीम के कप्तान शकील इमाद बट ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में होटल में बुकिंग नहीं होने के कारण सड़कों पर भटकी पाकिस्तानी हॉकी टीम। मैच खेलने जाने से पहले बर्तन भी धोने पड़े। दूसरी ओर हॉकी टीम के कोच ने प्रबंधन पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए जांच की मांग की है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने दिए मामले की जांच के आदेश।
Sydney, Australia:- Pakistan hockey captain Ammad Shakeel Butt reveals shocking details.
Players were forced to wash dishes, clothes and clean kitchens before matches. Hotel bookings were cancelled over non-payment.
The squad reportedly waited 13-14 hours at the airport and… pic.twitter.com/Qrxwhmu3uH
— Sanataniwithsign (@HarshadKushwah) February 18, 2026
टीम के कप्तान इमाद बट ने ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद लाहौर हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए पाकिस्तान हॉकी महासंघ के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वह मौजूदा टीम प्रबंधन के साथ आगे नहीं बढ़ सकते।
खेल बोर्ड और हॉकी महासंघ में कौन सही?
उन्होंने कहा कि जब मैंने इस बारे में पाकिस्तान खेल बोर्ड से बात की, तो उन्होंने कहा कि टीम के ऑस्ट्रेलिया रवाना होने से पहले हमने पाकिस्तान हॉकी महासंघ को जरूरी धनराशि उपलब्ध करा दी थी। जब मैंने टीम प्रबंधन से बात की, तो उन्होंने कहा कि खेल बोर्ड ने पर्याप्त और पूरे पैसे उपलब्ध नहीं कराए हैं।
कप्तान ने क्यों खड़े किए हाथ?
बट ने कहा कि 5 दिनों में विश्व कप क्वॉलीफाइंग राउंड शुरू होने वाला है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ और राष्ट्रीय टीम दोनों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है। अब हमारे पास बहुत कम समय है, इसलिए हम मौजूदा टीम प्रबंधन के साथ आगे नहीं बढ़ सकते।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से ऑस्ट्रेलिया में खेल रही पाकिस्तानी हॉकी टीम के खिलाड़ियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें खिलाड़ी अपना खाना पकाते और बर्तन साफ करते दिखाई दे रहे हैं। कई तस्वीरों में वे बैग के साथ सड़क किनारे बैठे हुए भी नजर आ रहे हैं।
edited by : Nrapendra Gupta

